August 04, 2026
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    किसानों के हितरक्षा में सदन में आक्रामक दिखे मुख्यमंत्री केन्द्र का कानून पूंजीपतियों के लिए, हमारा संशोधन किसानों के हक में: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल Featured

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    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज विधानसभा के विशेष सत्र में छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक 2020 पर चर्चा करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लाया गया नया कृषि कानून किसानों के लिए नहीं, बल्कि पूंजीपतियों को लाभ देने वाला है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार एक राष्ट्र-एक बाजार की दुहाई देती है। जब एक राष्ट्र-एक बाजार है, तो कीमत भी एक होनी चाहिए। यदि केन्द्र सरकार एक राष्ट्र-एक बाजार-एक कीमत की व्यवस्था लागू कर दें, तो हमंे कानून में संशोधन करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में तीन नये कानून बनाकर केन्द्र सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। केन्द्र सरकार का कानून किसानों को ठगने वाला कानून है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के नए कानूनों से किसानों के मन में संशय पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को इस बात की गारंटी देनी चाहिए कि किसानों के उपज को कोई भी समर्थन मूल्य से नीचे नहीं खरीदेगा।
    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सदन में केन्द्र सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि कानूनों की खामियों की जमकर आलोचना की और कहा कि हम अपने किसानों के हितों को सुरक्षित रखना चाहते हैं, छत्तीसगढ़ के व्यापार को सुरक्षित रखना चाहते है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोग भोले-भाले है। लोग ठगाए मत, इसलिए हम मंडी विधेयक में संशोधन कर किसानों और आम उपभोक्ता के हितों की रक्षा की व्यवस्था कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय वित्त मंत्री द्वारा कोरोना संक्रमण काल के दौरान 20 लाख करोड़ रूपए के राहत पैकेज का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विशेष पैकेज से किसी को एक पैसा भी नहीं मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और शांता कुमार कमेटी सिफारिशों का उल्लेख किया और केन्द्र सरकार द्वारा किसानों के हितों की अनदेखी के मामले को सदन में बड़े ही तार्किक ढंग से उठाए। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान पूरे सदन में खामोशी छायी रही। सदन के सदस्य, किसानों के हित में मुख्यमंत्री के तर्काें को बड़े ही गौर से सुनते नजर आए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब छत्तीसगढ़ की बात हो, किसानों की बात हो, तो दल नहीं, दिल देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि से छत्तीसगढ़ के किसानों को लाभ देने के मामले में केन्द्र सरकार द्वारा अड़ंगा लगाया जा रहा है। केन्द्र सरकार किसानों को भ्रमित कर रही है।
    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केन्द्र सरकार ने कृषि के क्षेत्र में जो तीन नए कानून बनाए है, उसकी जरूरत क्या थी? क्या किसी किसान संगठन ने या किसी राजनीतिक दल ने कानून में बदलाव की मांग की थी? कोरोना संकट काल में जब देश के लोग समस्याओं से जूझ रहे थे, ऐसी स्थिति में केन्द्र सरकार ने किसानों के हितों की परवाह न करते हुए कृषि के क्षेत्र में तीन नए अध्यादेश जारी कर दिए। उन्होंने कहा कि इसके चलते केन्द्र सरकार के एक सहयोगी दल की मंत्री ने इस्तीफा दे दिया। इन्ही तीनों कानूनों के चलते एनडीए के सहयोगी दल नाराज है। एनडीए के कई केन्द्रीय मंत्री भी इस कानून से सहमत नहीं है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केन्द्र सरकार का कहना है कि कृषि के तीनों नए कानून, किसानों के लिए लाभकारी है। उन्होंने कहा कि यह भ्रम पूरे देश में फैलाया जा रहा है। इससे किसानों का भला होने वाला नहीं है। यह कानून पूंजीपतियों को लाभ देने वाला कानून है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में 2006 से यह कानून लागू है। आज हालत यह है कि समर्थन मूल्य तो दूर की बात, बिहार में 1300 रूपए क्विंटल से अधिक मूल्य पर किसानों का धान खरीदने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि जब इस कानून से बिहार के किसानों का कोई भला नहीं हुआ तो देश के किसानों का भला होने वाला नहीं है।
    केन्द्र सरकार के नए कानून के तहत निजी मंडी खोलने की बात पर एतराज जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके जरिए सरकारी मंडियों को समाप्त करने का षड़यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कानून की वजह से धीरे-धीरे मंडियां खत्म हो जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह चिटफंड कम्पनी जैसी व्यवस्था है। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य में चिटफंड कम्पनियों के कारनामों को भी एक-एक कर उजागर किया और कहा कि जिस तरीके से चिटफंड कम्पनियां लोगों को लालच देकर लूटती है। उसी तरह केन्द्र सरकार द्वारा पारित नए कानूनों के जरिए किसान और आम उपभोक्ता लूटे जाएंगे। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि समर्थन मूल्य भारत सरकार घोषित करती है, तो किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने के जिम्मेदारी भी केन्द्र सरकार की है। राज्य सरकारें एजेंसी के रूप में काम करती है। उन्होंने कहा कि जब हम छत्तीसगढ़ के किसानों का धान 2500 रूपए क्विंटल में खरीद रहे थे। भारत सरकार ने किसानों को बोनस देने पर प्रतिबंध लगा दिया। उन्होंने कहा कि धान और गेहूं खरीदने पर यूपीए सरकार ने किसानों को बोनस दिया था। वर्तमान में केन्द्र में ऐसी सरकार है, जो किसानों को बोनस देने से रोकती है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार से किसानों को बोनस देने की अनुमति के लिए हम कृषि मंत्री और खाद्य मंत्री के साथ दिल्ली गए थे। तत्कालीन केन्द्रीय खाद्य मं़त्री से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ और यहां के किसानों की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए बोनस दिए जाने की मांग की थी। परंतु हमारी इस मांग को केन्द्र सरकार ने ठुकरा दिया था। मजबूरन हमें किसानों का धान 2500 रूपए प्रति क्विंटल के बजाए समर्थन मूल्य पर खरीदना पड़ा। किसानों के हितों की रक्षा और उनके उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए हमने राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू की है। इसका लाभ हम राज्य के धान उत्पादक किसानों के साथ-साथ गन्ना और मक्का उपजाने वाले किसानों को भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहां स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों पर अमल किया जा रहा है।
    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों के हितों की लगातार अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि बीते छह माह से जीएसटी का पैसा केन्द्र सरकार ने नहीं दिया है। केन्द्र सरकार से छत्तीसगढ़ को 4000 करोड़ रूपए लेना है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर अत्यावश्यक वस्तु विधेयक में केन्द्र सरकार द्वारा किए गए बदलाव को आम लोगों के लिए नुकसानदायक बताते हुए कहा कि यह विपणन कानून है। इसमें बदलाव पंूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है। इससे अत्यावश्यक वस्तुओं में जैसे खाद्यान्न, तेल, आलू, प्याज आदि के भंडारण की सीमा को खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसका फायदा उठाकर कारपोरेट और बड़े-बड़े व्यापारी मन माफिक कीमत पर किसानों की उपज खरीदकर जमाखोरी करेंगे। पूरा बाजार उनके कब्जे में हो जाएगा और मनमाने दाम पर सामान बचेंगे। उन्होंने कहा कि इसका दुष्परिणाम अभी से देखने को मिलने लगा है। आलू और प्याज की कीमतें कई गुना बढ़ गई है। यह कानून आम उपभोक्ताओं के खिलाफ है।
    मुख्यमंत्री ने सदन में विपक्षी सदस्यों द्वारा चर्चा के दौरान धान खरीदी के संबंध में उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार ने चावल उपार्जन की जो लिमिट इस साल तय की है। वह भी भेदभाव पूर्ण है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से छोटे राज्यों की भी लिमिट छत्तीसगढ़ से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि धान से एथेनॉल बनाने के उनके प्रस्ताव का शुरूआती दौर में लोगों ने मजाक उठाया था। अब तो केन्द्र सरकार ने हमारे प्रस्ताव को लाभकारी बताते हुए मान्य कर लिया है। धान से एथेनॉल बनाने की अनुमति भी दे दी है और इसका विधिवत दर 54.87 रूपए घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में धान की अतिशेष मात्रा तथा गन्ना से एथेनॉल बनाने के लिए राज्य सरकार ने एमओयू भी कर लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी एक साल में राज्य में एथेनॉल का उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। इससे किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य मिलेगा।
    मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान शांता कुमार कमेटी की सिफारिशों को उल्लेख करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार इसके जरिए बोनस को समाप्त करने के बाद अब पीडीएस सिस्टम को भी बंद करने की जुगत में लगी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का एक ऐसा राज्य है, जहां का पीडीएस सिस्टम पूरे देश के लिए मॉडल है। हमारे राज्य में पीडीएस के 98 प्रतिशत उपभोक्ताओं का राशनकार्ड उनके आधार कार्ड से लिंक है। उन्होंने कहा कि शांता कुमार कमेटी की रिपोर्ट के एकदम उलट छत्तीसगढ़ राज्य में 80 प्रतिशत से अधिक किसान समर्थन मूल्य से लाभान्वित होते हैं। मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार के कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मिंग कानून को भी किसानों के लिए घातक बताया। उन्होंने कहा कि हम अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए नया कानून लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हित में खड़ी है और उनके हितों की अनदेखी नहीं होने देगी। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के किसानों और आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सर्व सम्मति से मंडी विधेयक संशोधन विधेयक 2020 को पारित करने का आग्रह किया।

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