August 10, 2026
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    सिरकट्टी धाम में आस्था का शिखर स्पर्श—श्रीरामजानकी मंदिर की धर्मध्वजा के साथ जाग्रत हुई आध्यात्मिक चेतना : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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       रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर आज आस्था, अध्यात्म और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम साकार हुआ, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने गरियाबंद जिले के सिरकट्टी धाम आश्रम स्थित भव्य श्रीरामजानकी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री ने मंदिर के सर्वोच्च शिखर पर धर्मध्वजा की स्थापना कर प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद मांगा।
    मुख्यमंत्री श्री साय ने सिरकट्टी धाम को आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सामाजिक समरसता का केंद्र बताते हुए आश्रम परिसर में समरसता भवन के निर्माण हेतु 50 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद देशभर में जो आध्यात्मिक ऊर्जा प्रवाहित हुई है, उसी की अखंड धारा आज सिरकट्टी धाम में धर्मध्वजा स्थापना के माध्यम से अनुभव की जा रही है।
    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ऋषि-मुनियों, साधु-संतों और सनातन परंपराओं की भूमि है। धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय इसी भूमि पर व्यतीत किया। दंडकारण्य और अबूझमाड़ की पावन भूमि, जो कभी नक्सलवाद की पीड़ा से जूझती थी, आज शांति और विकास के पथ पर अग्रसर है।
    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आस्था और संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के तहत अब तक 39 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को निशुल्क तीर्थयात्रा कराई जा चुकी है, जबकि मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के अंतर्गत 5 हजार से अधिक श्रद्धालु लाभान्वित हुए हैं। इसके साथ ही प्रदेश के पांच शक्तिपीठों का विकास कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। भोरमदेव क्षेत्र के समग्र विकास हेतु स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत 148 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं रतनपुर के विकास के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष राजिम कल्प-कुंभ का आयोजन भी और अधिक भव्य स्वरूप में किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री ने श्रीरामजानकी मंदिर को जनसहभागिता की अनुपम मिसाल बताया। लगभग 22 हजार परिवारों के सहयोग से 9 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह मंदिर बीते 10 वर्षों की साधना और समर्पण का साकार रूप है। राजस्थान के कुशल शिल्पियों द्वारा पारंपरिक शैली में बिना सीमेंट और लोहे की छड़ के निर्मित इस मंदिर की आयु लगभग एक हजार वर्ष आंकी गई है। मुख्यमंत्री ने मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले सभी श्रद्धालुओं और दानदाताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की आस्था, एकजुटता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया।
    उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने धर्मध्वजा रोहण को ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि यह केवल ध्वजारोहण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में धर्म, अध्यात्म और सामाजिक समरसता की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। केबिनेट मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने इसे अलौकिक अनुभव बताते हुए कहा कि सिरकट्टी धाम आज आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया है।
    सिरकट्टी आश्रम के महामंडलेश्वर महंत संत गोवर्धन शरण व्यास ने स्वागत उद्बोधन में आश्रम की स्थापना, परंपरा और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, विधायकगण श्री रोहित साहू एवं श्री दीपेश साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री गौरीशंकर कश्यप, अनेक जनप्रतिनिधि, देशभर से आए संत-महात्मा और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
    सिरकट्टी धाम में लहराई धर्मध्वजा के साथ यह संदेश स्पष्ट रूप से गूंज उठा कि छत्तीसगढ़ अब केवल विकास ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव की नई ऊँचाइयों की ओर भी अग्रसर है।

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