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April 06, 2026
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“ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू: अब कचरे की जिम्मेदारी सीधे उत्पादकों पर, लैंडफिल पर लगेगी लगाम”

  • rounak group

दुर्ग | नगर पालिक निगम | 04 अप्रैल

देशभर में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। ये नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुके हैं और इनके तहत कचरा प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक, जवाबदेह और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।

इन नियमों का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब थोक अपशिष्ट उत्पादकों (Bulk Waste Generators) को अपने स्तर पर ही कचरे का प्रसंस्करण करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे नगर निकायों पर भार कम होगा और शहरों में कचरे के ढेर की समस्या पर नियंत्रण लगेगा।

? “वेस्ट हायरेरकी” पर आधारित नई व्यवस्था

नए नियम Waste Hierarchy के सिद्धांत पर आधारित हैं, जिसमें प्राथमिकताएं इस क्रम में तय की गई हैं—

कचरे का न्यूनतम उत्पादन

पुनः उपयोग (Reuse)

पुनर्चक्रण (Recycle)

ऊर्जा पुनर्प्राप्ति

अंत में सुरक्षित निपटान

यह प्रणाली चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

? लैंडफिल पर सख्ती, छंटाई जरूरी

अब केवल गैर-पुनर्चक्रणीय और निष्क्रिय कचरा ही लैंडफिल में भेजा जाएगा।

यदि बिना छंटाई के कचरा भेजा गया, तो उस पर अधिक शुल्क लगाया जाएगा, जिससे स्रोत स्तर पर ही पृथक्करण को बढ़ावा मिलेगा।

? थोक अपशिष्ट उत्पादकों की नई परिभाषा

नए नियमों के तहत इन संस्थाओं को थोक अपशिष्ट उत्पादक माना जाएगा—

20,000 वर्ग मीटर या अधिक क्षेत्र वाले भवन

प्रतिदिन 40,000 लीटर से अधिक जल उपयोग करने वाले संस्थान

100 किलोग्राम या अधिक दैनिक कचरा उत्पन्न करने वाली इकाइयाँ

इसमें हाउसिंग सोसायटी, विश्वविद्यालय, होटल, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान और सरकारी संस्थान शामिल हैं।

? चार श्रेणियों में अनिवार्य कचरा पृथक्करण

अब हर स्तर पर कचरे को इन चार भागों में बांटना अनिवार्य होगा—

गीला कचरा

सूखा कचरा

सैनिटरी कचरा

विशेष कचरा (ई-वेस्ट, बैटरी, ट्यूबलाइट आदि)

इससे रीसाइक्लिंग प्रक्रिया तेज होगी और प्रदूषण में कमी आएगी।

? थोक उत्पादकों की जिम्मेदारी तय

नियमों के अनुसार—

गीले कचरे का स्थल पर ही निपटान/कम्पोस्टिंग अनिवार्य

बाहर प्रसंस्करण की स्थिति में EBWGR प्रमाणपत्र आवश्यक

सुरक्षित संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण की जिम्मेदारी स्वयं की

इसके साथ ही, एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग भी की जाएगी।

? क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नियम?

इन नियमों के लागू होने से—

नगर निगमों पर आर्थिक और संचालन भार कम होगा

कचरा प्रबंधन में जवाबदेही तय होगी

शहरों में लैंडफिल पर निर्भरता घटेगी

पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को मजबूती मिलेगी

? सार:

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 केवल कचरा निपटान का ढांचा नहीं, बल्कि व्यवहार परिवर्तन की पहल है। अब “कचरा फेंकना” नहीं, बल्कि “कचरा प्रबंधित करना” हर नागरिक और संस्था की जिम्मेदारी बन गई है।

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