July 31, 2026
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    नेशनल लोक अदालत बनी उम्मीद की किरण 31 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण, बिछड़े परिवारों में लौटी खुशियां

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    कबीरधाम जिले में 10.77 करोड़ रुपये से अधिक राशि के मामलों का हुआ समाधान

    ब्यूरो चीफ: प्रवीण गुप्ता

    कवर्धा।
    राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजित नेशनल लोक अदालत ने कबीरधाम जिले में न्याय को सरल, त्वरित और मानवीय स्वरूप देने का उदाहरण प्रस्तुत किया। जिले में आयोजित इस महाअभियान में 31 हजार से अधिक प्रकरणों का सफल निराकरण किया गया, वहीं वर्षों से बिखरे परिवारों में भी खुशियां लौट आईं।

    छत्तीसगढ़ में आयोजित इस नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने वर्चुअल माध्यम से किया। इसके पश्चात जिला कबीरधाम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष कु. संघरत्ना भतपहरी ने लोक अदालत का विधिवत शुभारंभ किया।


    सेल्फी प्वाइंट और स्वास्थ्य शिविर बने आकर्षण का केंद्र

    नेशनल लोक अदालत को यादगार बनाने के लिए जिला न्यायालय परिसर में विशेष सेल्फी प्वाइंट बनाया गया था, जहां पक्षकारों ने तस्वीरें लेकर इस अवसर को यादगार बनाया। इसके साथ ही आयोजित स्वास्थ्य शिविर में पहुंचे लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण एवं परामर्श का लाभ भी लिया। न्यायालय परिसर का सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण वातावरण लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करता नजर आया।


    11 खण्डपीठों के माध्यम से हुआ त्वरित न्याय

    जिले में कुल 11 खण्डपीठ गठित की गई थीं, जिनमें 10 खण्डपीठ जिला मुख्यालय कवर्धा तथा 1 खण्डपीठ व्यवहार न्यायालय पंडरिया में संचालित की गई।

    इन खण्डपीठों में निम्न प्रकार के प्रकरण रखे गए थे—

    • राजीनामा योग्य आपराधिक मामले
    • चेक बाउंस प्रकरण
    • व्यवहार वाद
    • मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण
    • वैवाहिक विवाद
    • बैंक लोन, बिजली बिल, जलकर एवं दूरभाष संबंधी प्री-लिटिगेशन प्रकरण

    10.77 करोड़ रुपये से अधिक राशि के मामलों का निराकरण

    नेशनल लोक अदालत के दौरान विभिन्न खण्डपीठों में उल्लेखनीय निराकरण हुए—

    • खण्डपीठ क्रमांक 01 में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कु. संघरत्ना भतपहरी ने मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण में 28 लाख 60 हजार रुपये का अवार्ड पारित किया।
    • खण्डपीठ क्रमांक 02 में परिवार न्यायालय के पीठासीन अधिकारी प्रवीण कुमार प्रधान ने वैवाहिक विवादों से जुड़े 25 प्रकरणों का निराकरण कर कई परिवारों को पुनः एकजुट किया।
    • खण्डपीठ क्रमांक 03 में पीठासीन अधिकारी योगिता विनय वासनिक ने विद्युत प्रकरणों में 2 लाख 78 हजार 997 रुपये की वसूली कर मामलों का समाधान किया।
    • राजस्व न्यायालयों में 22,589 लंबित प्रकरणों का निराकरण करते हुए हितग्राहियों को 10 करोड़ 38 लाख 17 हजार 286 रुपये का लाभ पहुंचाया गया।
    • नगर पालिका कवर्धा द्वारा जलकर एवं अन्य करों से जुड़े 184 मामलों में 1 लाख 20 हजार 107 रुपये की वसूली की गई।

    इस प्रकार जिले में कुल 31,734 प्रकरणों का निराकरण करते हुए 10 करोड़ 77 लाख 03 हजार 433 रुपये की राशि से जुड़े मामलों का समाधान किया गया।


    लोक अदालत ने फिर जोड़े टूटते रिश्ते

    शराब की लत से बिखर रहा परिवार फिर हुआ एक

    परिवार न्यायालय में पहुंचे एक मामले में पति की शराब की लत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया था। पति अपनी आय का अधिकांश हिस्सा शराब में खर्च कर पत्नी और दो बच्चों को प्रताड़ित करता था। परेशान होकर पत्नी ने अलग रहकर भरण-पोषण की मांग करते हुए न्यायालय की शरण ली थी।

    लोक अदालत में पीठासीन अधिकारी द्वारा दोनों पक्षों को समझाइश और परामर्श दिया गया। अंततः पति-पत्नी ने आपसी सहमति से फिर साथ रहने और परिवार को दोबारा बसाने का निर्णय लिया। इस समझौते ने न केवल एक परिवार को टूटने से बचाया बल्कि बच्चों के भविष्य को भी नई उम्मीद दी।


    20 दिन में टूटा रिश्ता, लोक अदालत ने फिर मिलाया

    एक अन्य प्रकरण में वर्ष 2025 में विवाह करने वाले नवविवाहित दंपत्ति शादी के महज 20-25 दिनों बाद विवाद के कारण अलग हो गए थे। मामला परिवार न्यायालय तक पहुंच गया था।

    परिवार न्यायालय में हुई परामर्श प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों ने अपने मतभेद भुलाकर पुनः साथ रहने की सहमति दी। इस समझौते के साथ उनके दाम्पत्य जीवन में फिर से खुशियों की शुरुआत हुई।


    त्वरित न्याय के साथ सामाजिक समरसता का संदेश

    कबीरधाम में आयोजित नेशनल लोक अदालत केवल प्रकरणों के निराकरण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने समाज में संवाद, समझौता और पारिवारिक एकता का मजबूत संदेश भी दिया। त्वरित एवं सुलभ न्याय व्यवस्था के माध्यम से हजारों लोगों को राहत मिली और कई परिवारों के जीवन में नई शुरुआत संभव हो सकी।

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