August 09, 2026
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    एएनएम एवं मितानिन गृह भ्रमण के दौरान रखेंगी महिला एवं नवजात का ध्यान

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    राजनांदगांव।शौर्यपथ / प्रसव के बाद 45 दिन (6 सप्ताह) तथा जन्म के बाद के प्रथम 42 घंटे और प्रथम सप्ताह को मातृ एवं शिशु के जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि इसी दौरान शिशु और माता को बीमार होने और मृत्यु होने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। लगभग 60 प्रतिशत मातृ मृत्यु इसी समय में होती है, इसको ध्यान में रखते हुए इस अवधि में गर्भवती महिला एवं नवजात का प्रसव पश्चात देखभाल किए जाने हेतु नीरज बनसोड (संचालक स्वास्थ्य सेवाएं) ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया है जिसमें सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को विकासखंड स्तर पर महिला एवं नवजात का विशेष ध्यान रखने को कहा है। जारी पत्र में मितानिन, एएनएम, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक (महिला) को गृह भ्रमण के दौरान कुछ विशेष कार्य करने को कहा गया है। साथ ही नवजात और शिशुवती माताओं की देखभाल के लिए एएनएम और मितानिन को चेक लिस्ट भी दी गई है, जिसके आधार पर महिला एवं नवजात की देखभाल भी की जाएगी। घर पर, उपस्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या एफआरयू में प्रसव होने पर कितने अंतराल पर भेंट करनी होगी और बच्चे का वजन 2.5 ग्राम से कम होने पर प्रोटोकॉल के तहत दो अतिरिक्त गृह भेंट करके सेवाएं प्रदान करनी होगी। इसका विवरण पत्र में दिया गया है। प्रथम भेंट में एमसीपी कार्ड में प्रसव की तिथि, प्रसव का स्थान (घर पर या स्वास्थ्य केंद्र), प्रसव जटिलता, शिशु का लिंग और वजन, शिशु जनम के बाद रोया या नहीं, जनम के एक घंटे बाद शिशु को स्तनपान करवाया या नहीं, शिशु को विटामिन ए का टीका दिया गया या नहीं, यह सब जानकारियाँ भरनी होंगी।

    0 हर भेंट पर सलाह

    गृह भेंट के दौरान मितानिन एवं एएनएम को विशेष सलाह भी जच्चा-बच्चा के लिए देना होगा, जैसे बच्चे की देखभाल करते वक्त साफ सफाई रखना, बच्चे को पहला स्नान करने का सुझाव, बच्चे के सिर और पैर को टेंक कर रखना, बच्चे को हर वक्त गर्मी प्रदान किए जाने की विधि बताना, गर्भनाल का विशेष ध्यान रखना, स्तनपान कराने और स्तनपान का निरीक्षण करना आदि शामिल है। लक्षणों के अधार पर बच्चे को अस्पताल रेफर, नवजात शिशु की प्रसव पश्चात जांच किए जाने के दौरान यदि बच्चे द्वारा स्तनपान नहीं किए जाने, बीमार, सुस्त और चिड़चिड़ा होने, स्पर्श करने पर बुखार या ठंडा लगने, शरीर में ऐंठन या जकड़न महसूस होना, मल में खून आना या दस्त होने पर नवजात को फौरन अस्पताल रेफर करने की सलाह भी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा दिया जाना जरूरी होगा

     

    0 गृह भेंट में मिलना है

    गृह भेंट घर पर प्रसव होने पर प्रथम 24 घंटे में, द्वितीय 3 दिन में, तृतीय 7 दिन में, चतुर्थ 21 दिन तथा पंचम भेट 6 हफ्ते में करनी होगी। स्वास्थ्य केन्द्र में प्रसव होने पर 48 घंटे केन्द्र में रखा जाना है। द्वितीय 3 दिन में, तृतीय 7 दिन में, चतुर्थ 21 दिन में तथा पंचम 6 हफ्ते में करनी होगी। बच्चे का वजन 2.5 ग्राम से कम कम होने पर दो अतिरिक्त गृह भेंट यानि छठवीं भेंट प्रसव के 14 दिन के बाद तथा सातवीं भेंट प्रसव के 28 दिन के बाद करनी होगी। 

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    Last modified on Tuesday, 22 June 2021 17:56

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