September 16, 2026
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    जांच में नियुक्ति प्रक्रिया नियम विरुद्ध, फि र भी कार्रवाई क्यों नहीं?

    • doing of business

    जिला पंचायत कोंडागांव में मनीष पटेल की नियुक्ति पर गंभीर सवाल, बिना नए विज्ञापन के प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति का उल्लेख
    जांच प्रतिवेदन में संविदा भर्ती नियम 2012 के पालन न होने की बात, जिम्मेदारों पर एफआईआर और विभागीय कार्रवाई अब भी लंबित

      कोंडागांव / शौर्यपथ / जिला पंचायत कोंडागांव में पदस्थ मनीष कुमार पटेल की नियुक्ति को लेकर सामने आए जांच प्रतिवेदन ने भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में निर्धारित संविदा भर्ती नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किए जाने का उल्लेख होने के बावजूद अब तक एफआईआर अथवा ठोस विभागीय कार्रवाई सामने नहीं आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

    जांच प्रतिवेदन के अनुसार, जिला पंचायत कोंडागांव ने इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत जिला स्तर पर डाटा एंट्री ऑपरेटर के एक रिक्त पद के लिए विज्ञापन क्रमांक 1057, दिनांक 4 फरवरी 2014 जारी किया था। भर्ती प्रक्रिया के बाद तैयार चयन सूची में सरित साहू का चयन हुआ, जबकि प्रतीक्षा सूची में मनीष कुमार पटेल प्रथम स्थान पर थे। चयन एवं प्रतीक्षा सूची के अनुमोदन की तारीख 23 अगस्त 2014 बताई गई है।

    इसके बाद डीआरडीए योजना के अंतर्गत डाटा एंट्री ऑपरेटर का एक पद रिक्त हुआ। जांच में उल्लेख है कि वर्ष 2012 के विज्ञापन के आधार पर इस पद पर ममता देवांगन की नियुक्ति हुई थी। उन्होंने 30 अगस्त 2014 को पटवारी प्रशिक्षण के लिए त्यागपत्र दिया, जिसके बाद पद रिक्त हो गया।

    बिना नए विज्ञापन के प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति

    जांच में सामने आया महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि डीआरडीए योजना के रिक्त पद पर नियुक्ति के लिए न तो नया विज्ञापन जारी किया गया और न ही विभागीय अनुमति ली गई, बल्कि इंदिरा आवास योजना की प्रतीक्षा सूची के आधार पर मनीष कुमार पटेल को नियुक्त कर दिया गया।

    जांच प्रतिवेदन के अनुसार, उनकी नियुक्ति कार्यालयीन आदेश क्रमांक 8972/जि.पं. (डीआरडीए)/अधी./स्था./2014, दिनांक 16 सितंबर 2014 के माध्यम से की गई। अभिलेखों के परीक्षण के बाद जांच में यह भी उल्लेखित किया गया है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में संविदा भर्ती नियम 2012 के निर्धारित नियमों एवं निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

    जांच के बाद भी कार्रवाई पर सवाल

    जांच प्रतिवेदन में भर्ती प्रक्रिया को लेकर अनियमितताओं का उल्लेख होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई? यदि जांच में नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका तय करने की प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ी?

    मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि बिना नए विज्ञापन और विभागीय अनुमति के एक अलग योजना के रिक्त पद पर दूसरी योजना की प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति किए जाने के लिए जिम्मेदारी किसकी थी और इस संबंध में अब तक कोई ठोस विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    प्रशासन के अगले कदम पर निगाह

    जांच प्रतिवेदन उपलब्ध होने के बावजूद कार्रवाई लंबित रहने से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि वह जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय करते हुए आगे क्या कदम उठाता है।

    मामले में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा, नियुक्ति प्रक्रिया की वैधानिकता तथा आवश्यक विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई पर प्रशासन का निर्णय अब महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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