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निर्दलीय प्रत्याशियों का आरोप—एनओसी जमा होने के बावजूद नामांकन रद्द किया गया, निष्पक्ष जांच की मांग
सदस्यों का सवाल—पिछले कार्यकाल का लेखा-जोखा पूरा हुए बिना नए चुनाव की घोषणा क्यों?
बचेली/किरंदुल, दंतेवाड़ा। बैलाडीला ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन (बीटीओए) के वार्षिक चुनाव 2026-27 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त किए जाने के बाद चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। प्रभावित प्रत्याशियों का आरोप है कि नामांकन के साथ जमा किए गए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) को कथित रूप से नजरअंदाज अथवा छिपाकर उनके नामांकन निरस्त किए गए।
मामला केवल नामांकन निरस्तीकरण तक सीमित नहीं है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान बीटीओए कार्यालय के सीसीटीवी कैमरे बंद होने तथा निगरानी फुटेज या संबंधित दस्तावेजों से कथित छेड़छाड़ के आरोप भी सामने आए हैं। दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों ने अनुविभागीय अधिकारी को लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसके अलावा तहसीलदार और फम्र्स एंड सोसायटीज विभाग से भी जांच की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सिर्फ दो नामांकन पर सवाल
सदस्यों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि यदि नामांकन नियमों के तहत निरस्त किए गए हैं तो इसकी पूरी प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही? खासतौर पर यह सवाल उठ रहा है कि सिर्फ दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन ही क्यों निरस्त किए गए?
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि उनके द्वारा एनओसी सहित आवश्यक दस्तावेज जमा किए गए थे, तो उनकी जांच किस आधार पर की गई और नामांकन निरस्त करने का स्पष्ट कारण क्या था, इसे सामने लाया जाना चाहिए।
लेखा-जोखा पूरा हुए बिना चुनाव की घोषणा?
वहीं, संस्था के कुछ सदस्यों ने 2025-26 के कार्यकाल से जुड़े लेखा-जोखा और आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पिछले कार्यकाल का हिसाब-किताब और संस्था से जुड़ी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी किए बिना 2026-27 के चुनाव की घोषणा कैसे कर दी गई?
सदस्यों का तर्क है कि नए चुनाव से पहले पिछले कार्यकाल की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि संस्था के सदस्यों के बीच पारदर्शिता बनी रहे।
सीसीटीवी जांच की मांग
सीसीटीवी को लेकर सामने आए आरोपों ने विवाद को और गंभीर बना दिया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कैमरे बंद किए गए या रिकॉर्ड से छेड़छाड़ हुई है, तो इसकी तकनीकी जांच आवश्यक है। इसके लिए सीसीटीवी रिकॉर्ड, डीवीआर और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की गई है।
पहले जांच या पहले मतदान?
अब पूरा विवाद इस सवाल पर केंद्रित हो गया है कि पहले शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी या विवादों के बीच ही मतदान कराया जाएगा?
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोपों और कथित अनियमितताओं की जांच किए बिना चुनाव करा दिया गया, तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल बने रहेंगे। वहीं, जल्दबाजी में चुनाव कराने से पिछले कार्यकाल से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
दो निर्दलीय प्रत्याशियों की शिकायत के बाद अब निगाहें प्रशासन और संबंधित विभाग की जांच तथा निर्णय पर टिकी हैं। यदि जांच होती है तो नामांकन निरस्तीकरण, एनओसी, सीसीटीवी रिकॉर्ड और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अन्य दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
