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घायलों को भी मिलेगी ₹50-50 हजार की आर्थिक मदद, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए संवेदनशीलता के साथ सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश
रायपुर / शौर्यपथ / उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन सुरंग में पानी भरने की दर्दनाक घटना ने छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के चार परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया है। हादसे में कोंडागांव जिले के चार श्रमिकों की मृत्यु हो गई, जबकि दो श्रमिक घायल हुए हैं। घटना की जानकारी पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है।
मुख्यमंत्री साय ने हादसे में मृत कोंडागांव जिले के प्रत्येक श्रमिक के परिजन को ₹5-5 लाख तथा घायल दोनों श्रमिकों को ₹50-50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पीड़ित परिवारों को आवश्यक सहायता एवं हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं।
हादसे में कोंडागांव जिले के ग्राम धनसुली के दो, मदनार के एक और दहीकोंगा के एक श्रमिक की जान चली गई। वहीं जिले के दो श्रमिक घायल हुए हैं। दिवंगत श्रमिकों के पार्थिव शरीर कोंडागांव लाए गए, जहां परिजनों एवं स्वजनों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दुःख की इस घड़ी में राज्य सरकार शोकाकुल परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है। सरकार पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति और शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने हादसे में घायल दोनों श्रमिकों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
वेतन व सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान के साथ ही मरम्मत, संधारण कार्यों तथा अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों से निपटने में मिलेगी सहायता
रायपुर / शौर्यपथ / नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के 158 नगरीय निकायों में विभिन्न मदों में कुल 74 करोड़ 88 लाख 17 हजार रुपए आबंटित किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने सभी निकायों को राशि आबंटन के आदेश जारी कर दिए हैं।
नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के 10 नगर निगमों को कुल 45 करोड़ 7 लाख 90 हजार रुपए आबंटित किए हैं। वहीं 48 नगर पालिकाओं को कुल 18 करोड़ 60 लाख 34 हजार रुपए तथा 100 नगर पंचायतों को कुल 11 करोड़ 19 लाख 92 हजार रुपए आबंटित किए गए हैं। विभाग द्वारा निकायों को अनिवार्य निधि, राजस्व वसूली, चुंगी क्षतिपूर्ति, उत्पाद कर, बार लाइसेंस तथा मुद्रांक मद के अंतर्गत यह राशि आबंटित की गई है।
विभाग द्वारा जारी इस राशि से नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर वेतन भुगतान तथा सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान के साथ ही मरम्मत, संधारण कार्यों तथा अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों से निपटने में भी सहायता मिलेगी।
जल-जीवन मिशन के तहत आयोजित हुई कलेक्टर कॉन्फ्रेंस
पूर्ण योजनाओं को करायें भौतिक सत्यापन
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये प्रदेश में जल-जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा के लिए कलेक्टर कॉन्फ्रेंस आयोजित की। मुख्य सचिव ने जिलों के कलेक्टरों से उनके जिले के जल-जीवन मिशन के कार्यों की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा कि वे जल-जीवन मिशन के तहत हर घर जल पहुचांने के लिए व्यक्तिगत रूचि लेकर काम करें। लोगों के घरों में नलों से पानी मिल इसके लिए चलायी जा रही स्कीमों को तहत पूर्ण करायें। पूर्ण हो चुकी योजनाओं का भौतिक सत्यापन करायें और पंचायतों को हस्तांतरित योजनाओं के लंबित भुगतान शीघ्र करायें। मुख्य सचिव ने साफ कहा है जल जीवन मिशन के कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में सोलर आधारित योजनाओं एवं क्रेडा संबंधित नल-जल योजनाओं के कार्यों के संबंध में विचार विमर्श किया गया एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्ण एवं हस्तांतरित योजनाओं के भुगतान की कार्यवाही शीघ्रता से करने के निर्देश दिए गए है। कलेक्टरों को स्त्रोत समस्यामूलक योजनाओं के कार्यों को स्थानीय निधि से पूर्ण कराने कहा गया है।
मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जहां सब इंजीनियरों की कमी है वहां पर दूसरे विभागों के इंजीनियरों से जल-जीवन मिशन के कार्यों को कराने के लिए कार्यवाही करें। कॉन्फ्रेंस में जिला जल एवं स्वच्छता समिति की नियमित मासिक बैठक हो यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैठक की कार्यवाही का समय पर विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाए तथा जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर स्पष्ट आकलन, बेहतर योजना और प्रभावी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करें, ताकि राज्य के प्रत्येक परिवार को समयबद्ध रूप से हर घर नल से जल उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक में 55 एलपीसीडी 7 दिवसों से कम जल प्रदाय की जा रही स्कीमों की जानकारी अधिकारियों से ली गई। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव अब्दुल कैसर हक सहित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं जल जीवन मिशन के अधिकारी मौजूद थे। वीडियो कॉन्फ्रेंस से सभी जिलों के कलेक्टर एवं जिला स्तरीय विभागीय अधिकारी शामिल हुए।
दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के वीर बलिदानियों की पावन स्मृति को संजोने और उनकी शौर्यगाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम सोनपुर में शौर्य वाटिका का भूमिपूजन किया गया। उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में जिले के 37 शहीद परिवारों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर लगभग एक एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही 'शौर्य वाटिका'में शहीदों के नाम पर उनके परिजनों द्वारा स्मृति वृक्ष लगाए गए। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने भी शहीदों की स्मृति में पीपल का पौधा रोपित कर शौर्य वाटिका में पौधरोपण की शुरुआत की। कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री शर्मा ने लगभग 78.96 लाख रुपए की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इनमें तालाब गहरीकरण, खेल मैदान, पहुंच मार्ग निर्माण, शौचालय, चबूतरा निर्माण, वृक्षारोपण एवं शेड निर्माण सहित विभिन्न कार्य शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना के अंतर्गत 37.95 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड निर्माण, आहता निर्माण एवं शेड निर्माण कार्यों का भी लोकार्पण किया गया।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में छत्तीसगढ़ के जवानों और बस्तर के लोगों ने बड़ी कीमते चुकाई है। उन्होंने शहीद जवानों और उनके परिवारों को नमन करते हुए कहा कि आज बस्तर में शांति स्थापित होने के बाद विकास की नई संभावनाएं खुली हैं। जिन क्षेत्रों में कभी नक्सल हिंसा के कारण स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाती थीं, वहां अब विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे में शहीद जवानों की बहादुरी और बलिदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
आज नक्सल क्षेत्रों में तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है, जहां कभी जाना मुश्किल था, अब वहां शांति और बदलाव का माहौल है। उपमुख्यमंत्री ने सोनपुर गांव के विकास की सराहना करते हुए कहा कि यहां शहीदों की स्मृति में शौर्य वाटिका का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले के शहीद परिवारों और शहीदों के नाम पर यहां पौधरोपण किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके त्याग और शौर्य को याद रख सकें। उन्होंने कहा कि सोनपुर गांव में योजना के अनुसार विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सरकार हरसंभव सहयोग करेगी। उपमुख्यमंत्री ने गांव में निर्मित विभिन्न विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि मनरेगा सहित वीवीजी राम जी के माध्यम से रोजगार के साथ-साथ कौशल विकास और अधोसंरचना निर्माण को गति दी जा रही है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से योजनाबद्ध तरीके से गांव के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सांसद विजय बघेल ने भी शहीदों को नमन करते हुए उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम में साजा विधायक ईश्वर साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष कीर्ति नायक, सुरेन्द कोशिक, सरपंच संत कुमार कुंभकार, सेवानिवृत शिक्षक रामू राम चक्रधर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं नागरिक गण उपस्थित थे।
साभार : धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
शिशु जीवन का वह नाजुक चरण है, जहाँ सही पोषण और स्वास्थ्य देखभाल उनके भविष्य की दिशा तय करती है। भारत जैसे विकासशील देश में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और विभिन्न संक्रामक बीमारियों की दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग द्वारा 'शिशु संरक्षण माह' का आयोजन किया जाता है। यह एक विशेष स्वास्थ्य अभियान है, जो नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का कार्य करता है। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए चलाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। छत्तीसगढ़ राज्य में इस अभियान का नया चरण 18 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है, जिसके तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की विशेष देखभाल की जा रही है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य
इस विशेष माह को मनाने का प्राथमिक लक्ष्य बाल मृत्यु दर और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके साथ ही, बच्चों में समय पर बीमारियों की पहचान करना, उन्हें आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करना, तथा माताओं को सही पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं।
प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं और गतिविधियाँ
शिशु संरक्षण माह के दौरान गांव-गांव और शहरों में स्वास्थ्य केंद्रों व आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जाती हैं:
• विटामिन 'ए' का अनुपूरण: 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को रतौंधी (Night Blindness) जैसी आंखों की बीमारियों से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन 'ए' की खुराक दी जाती है।
• एनीमिया से बचाव 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को खून की कमी (एनीमिया) से सुरक्षित रखने हेतु आयरन एवं फॉलिक एसिड (IFA) सिरप का वितरण किया जाता है।
• पूर्ण टीकाकरण: जिन बच्चों के नियमित टीके छूट गए हैं, उन्हें खसरा, रुबेला, पोलिया, काली खांसी और टिटनेस जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकृत किया जाता है।
• कुपोषण की पहचान व उपचार: आंगनवाड़ी स्तर पर सभी बच्चों का वजन और लंबाई नापकर गंभीर रूप से कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है।
• दस्त नियंत्रण और ओआरएस वितरण: बच्चों में डिहाइड्रेशन रोकने के लिए माताओं को ओआरएस पैकेट और जिंक की गोलियां दी जाती हैं।
जागरूकता एवं परामर्श सत्र
केवल दवाएं देना ही इस अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि माताओं और परिवारों का व्यवहार परिवर्तन भी इसका महत्वपूर्ण अंग है:
• स्तनपान का महत्व: जन्म के तुरंत बाद (1 घंटे के अंदर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) और शुरुआती 6 माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए माताओं को प्रेरित किया जाता है।
• ऊपरी आहार की शुरुआत: 6 माह की आयु पूरी होने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ सही मात्रा और गुणवत्ता वाला पूरक आहार (ऊपरी आहार) देने की सलाह दी जाती है। 6 से 12 महीने की उम्र के बीच, आपका शिशु पौष्टिक ठोस आहार खाना शुरू कर देगा, लेकिन माँ का दूध फिर भी पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना रहेगा। जब आपका शिशु माँ का दूध या फार्मूला दूध पीना छोड़ दे, तो उसे धीरे-धीरे और धैर्य से खिलाएँ। उसे नए स्वाद चखने दें, लेकिन ज़बरदस्ती न करें। जब आपका बच्चा ठोस आहार खाना शुरू करे, तो उसे भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खाने से रोकें ताकि वह गले में न अटके।
• अपने शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करने के लिए उसे पढ़ें, उससे बातें करें और उसके लिए गाएं।
• अपने शिशु को सोने के पर्याप्त अवसर प्रदान करें - 4 से 12 महीने के शिशुओं के लिए अनुशंसित नींद की मात्रा प्रतिदिन 12 से 16 घंटे (24 घंटे की अवधि में, झपकी सहित) है।
• शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।
• स्वच्छता व सैनिटेशन: हाथ धोने की सही आदत और बच्चे की देखभाल में साफ-सफाई के महत्व पर चर्चा की जाती है, जिससे संक्रमण से बचाव संभव हो सके।
• शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।
• शिशु को बांधकर रखने वाले उपकरण उसके विकास में बाधा डाल सकते हैं। शिशु को झूले, स्ट्रोलर, बाउंसिंग सीट, एक्सरसाइज़ सॉसर या अन्य किसी भी बांधकर रखने वाले उपकरण में लंबे समय तक न रखें। उन्हें बाहर निकालें और घूमने-फिरने दें।
शिशु संरक्षण माह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हर परिवार और समाज के लिए अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराने वाला समय है। जब समाज का हर वर्ग—स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन/आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और अभिभावक—एक साथ मिलकर प्रयास करेंगे, तभी हम एक स्वस्थ, कुपोषण-मुक्त और सशक्त पीढ़ी का निर्माण कर सकेंगे।
नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आगामी त्योहारी सीजन में आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ महीनों में चीनी के दामों में करीब 40 प्रतिशत तक का उछाल आने की खबरों के बीच अलग-अलग बाजारों में खुदरा कीमतें बढ़कर 58 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। वहीं, कुछ रिपोर्टों के अनुसार पिछले एक-दो महीनों में चीनी के दाम में औसतन 10 से 20 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है।
रक्षाबंधन सहित आगामी त्योहारी सीजन में मिठाइयों की मांग बढ़ने वाली है। ऐसे में चीनी की महंगाई का सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ने की संभावना है। चीनी महंगी होने के साथ-साथ मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री और उत्पादन लागत बढ़ने पर त्योहारी सीजन में मिठाइयों के दाम करीब 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। यानी इस बार त्योहारों पर मिठाई खरीदना आम परिवारों की जेब पर पहले की तुलना में अधिक भारी पड़ सकता है।
कम होता स्टॉक बढ़ा रहा चिंता
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार में उपलब्ध स्टॉक को माना जा रहा है। सितंबर के अंत तक देश में चीनी का घरेलू स्टॉक घटकर 30 से 35 लाख टन रहने की आशंका है। यदि स्टॉक इस स्तर तक पहुंचता है तो आगामी सीजन के शुरुआती महीनों में घरेलू मांग पूरी करने को लेकर दबाव बढ़ सकता है।
एथेनॉल उत्पादन की ओर गन्ने का डायवर्जन भी असरदार
चीनी की उपलब्धता पर एथेनॉल उत्पादन का भी असर पड़ा है। गन्ने के रस और सीरप का एक हिस्सा चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट किए जाने से बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने पर कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
त्योहारी मांग बढ़ने से और बढ़ सकती है कीमत
रक्षाबंधन से त्योहारी सीजन की शुरुआत होने के साथ मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी का असर उपभोक्ताओं तक पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। विशेष रूप से मिठाई कारोबारियों की लागत बढ़ने पर इसका भार ग्राहकों पर पड़ सकता है।
सरकार ने आपूर्ति सुधारने के लिए उठाए कदम
बढ़ती कीमतों और घरेलू उपलब्धता को देखते हुए केंद्र सरकार ने बाजार में आपूर्ति सुधारने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा सरकार ने व्यापारियों और थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा को और सख्त किया है, ताकि बाजार में अनावश्यक जमाखोरी पर नियंत्रण रखा जा सके और उपलब्ध स्टॉक का संतुलित वितरण सुनिश्चित हो।
त्योहार की मिठास बचाने की जरूरत
त्योहार भारतीय समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और खुशियों का प्रतीक हैं। रक्षाबंधन पर भाई-बहन के रिश्ते की मिठास से लेकर दीपावली की मिठाइयों तक, चीनी की बढ़ती कीमतों का असर सीधे आम परिवारों की जेब पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार की ओर से आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण के प्रयासों के साथ-साथ व्यापारियों से भी उचित लाभ के साथ उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखने की अपेक्षा है।
आम उपभोक्ताओं के लिए भी यह समय अनावश्यक खरीदारी और बर्बादी से बचते हुए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विकल्पों और उचित कीमतों की तुलना कर खरीदारी करने का संदेश देता है। त्योहार की असली मिठास महंगे दामों में नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और खुशियां बांटने में है। सरकार, कारोबारियों और उपभोक्ताओं के सामूहिक प्रयास से उम्मीद है कि महंगाई के बावजूद त्योहारों की मिठास फीकी नहीं पड़ेगी।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है कि रायपुर निवासी सौम्या राठौर का चयन भारत के सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली में माननीय जस्टिस श्री चन्द्रशेखर के कोर्ट में लीगल असिस्टेंट कम रिसर्च एसोसिएट के पद पर हुआ है। सौम्या राठौर धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क संचालनालय, रायपुर एवं श्रीमती रोशनी राठौर, कम्पीयर, आकाशवाणी, रायपुर की बेटी हैं।
सौम्या राठौर ने MHCET परीक्षा में ऑल इंडिया 23वां स्थान प्राप्त कर एशिया के सबसे पुराने लॉ कॉलेज Government Law College, Mumbai से Legal Science and LL.B. की शिक्षा पूर्ण की है। अपनी उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रतिभा के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में आयोजित लीगल असिस्टेंट परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल करने के बाद सौम्या राठौर की मार्च 2026 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश श्री एन. के. चंद्रवंशी के कोर्ट में लीगल असिस्टेंट के पद पर नियुक्ति हुई, जहां वे वर्तमान में कार्यरत थीं। अब उनकी प्रतिभा और मेहनत ने उन्हें देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था भारत के सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली तक पहुंचाया है।
सौम्या राठौर की बहन शौर्या राठौर भी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर रही हैं। शौर्या राठौर Government Medical College, Jagdalpur से MBBS की पढ़ाई कर रही हैं। सौम्या राठौर और शौर्या राठौर दोनों बहनें प्रारंभ से ही मेधावी छात्राएं रही हैं और अपनी मेहनत एवं प्रतिभा के बल पर लगातार सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल कर रही हैं।
सौम्या राठौर के पिता धनंजय राठौर मूलतः जांजगीर के निवासी हैं और वर्तमान में रायपुर में निवासरत हैं। बेटी की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से राठौर परिवार के साथ-साथ जांजगीर और रायपुर के लोगों में भी हर्ष और गर्व का माहौल है।
सुप्रीम कोर्ट में लीगल असिस्टेंट कम रिसर्च एसोसिएट के रूप में सौम्या राठौर का चयन उनकी मेहनत, मेधा, निरंतर अध्ययन और विधि के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम है। उनकी यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के युवाओं, विशेषकर विधि की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी है।
अगर आलोचना है अधिकार, तो अपमान की सीमा कहां से शुरू होती है? त्रिपुरा हाईकोर्ट ने एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने से किया इनकार
अगरतला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणी के मामले में त्रिपुरा हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में राजनीतिक आलोचना का अधिकार है, लेकिन आलोचना के नाम पर अभद्र, अपमानजनक या मानहानिकारक भाषा का इस्तेमाल स्वतः कानूनी संरक्षण का हकदार नहीं हो जाता।
राजनीतिक विरोध की आजादी, लेकिन भाषा की भी एक सीमा
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राजनीतिक आलोचना और व्यक्तिगत अपमान के बीच अंतर को महत्वपूर्ण माना। अदालत के मुताबिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी जनप्रतिनिधि अथवा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और आलोचना करना नागरिकों का अधिकार है। हालांकि, इस अधिकार की आड़ में किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जो कानून के दायरे में आपत्तिजनक या मानहानिकारक हो।
प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद का भी अदालत ने किया उल्लेख
अदालत ने प्रधानमंत्री के पद की संवैधानिक गरिमा का उल्लेख करते हुए सोशल मीडिया पर कथित अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल को गंभीरता से लिया। कोर्ट की टिप्पणियों का सार यह रहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की राजनीतिक आलोचना और उसके प्रति अभद्र अथवा मानहानिकारक टिप्पणी—दोनों को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता।
एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने की मांग को झटका
मामले में कंटेंट क्राइटर की ओर से एफआईआर तथा जांच के बाद दाखिल चार्जशीट को रद्द करने की मांग की गई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस स्तर पर आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने से इनकार कर दिया। यानी अब मामला आगे कानूनी प्रक्रिया के तहत बढ़ेगा और आरोपों की न्यायिक जांच का रास्ता खुला रहेगा।
सोशल मीडिया यूजर्स के लिए भी बड़ा संदेश
यह फैसला सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी कानूनी सीमाओं को लेकर महत्वपूर्ण बहस को सामने लाता है। अदालत ने संकेत दिया कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और आलोचना करना अपराध नहीं है, लेकिन अभद्र एवं मानहानिकारक भाषा को केवल 'राजनीतिक अभिव्यक्ति' बताकर कानूनी कार्रवाई से बचा नहीं जा सकता।
फैसले का मूल संदेश साफ है—सत्ता की आलोचना लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ कानूनी मर्यादा भी जुड़ी है।
पटना। शौर्यपथ । :अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद अब क्या बिहार की धरती पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक विशाल मंदिर बनने जा रहा है? बीते कुछ दिनों से गलियारों में यह खबर तेजी से तैर रही है कि करीब 112 करोड़ रुपये की लागत से पीएम मोदी का एक भव्य मंदिर तैयार किया जाएगा, जिसमें उनकी 'श्रीराम अवतार' जैसी सोने की मूर्ति स्थापित होगी। इस खबर ने सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। लेकिन क्या वाकई जमीन पर ऐसा कोई मंदिर बनने जा रहा है, या यह सिर्फ एक सियासी शिगूफा है? आइए जानते हैं इस पूरे मामले का असली सच।
? सस्पेंस से उठा पर्दा: कहाँ से आया यह अनोखा आइडिया?
इस पूरे मामले के पीछे कोई धार्मिक संस्था या मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी नहीं है। दरअसल, यह चौंकाने वाला प्रस्ताव बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड (Bihar State Transgender Welfare Board) की एक आंतरिक बैठक से निकलकर सामने आया है। बोर्ड के सदस्य डॉ. राजन सिंह ने देश के प्रति पीएम मोदी के योगदान को देखते हुए पटना में उनके नाम पर 5 एकड़ के परिसर में एक भव्य मंदिर और 'श्रीराम' रूपी स्वर्ण प्रतिमा बनाने की इच्छा जताई है।
?️ क्या है 'आधिकारिक सच' और कानूनी पेंच?
भले ही इस खबर को लेकर सोशल मीडिया और गलियारों में भारी उत्साह या चर्चा देखी जा रही हो, लेकिन कागजी और कानूनी हकीकत इससे कोसों दूर है:सिर्फ एक विभागीय इच्छा: यह प्रस्ताव केवल एक सलाहकार बोर्ड की बैठक में पारित हुआ है। यह बोर्ड बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के तहत आता है।
कैबिनेट की मंजूरी बाकी: किसी भी बोर्ड के प्रस्ताव को हकीकत बनने के लिए राज्य सरकार के कैबिनेट सचिवालय विभाग की अंतिम मुहर की जरूरत होती है, जो कि अभी तक नहीं मिली है।
बजट और जमीन पर सस्पेंस: बोर्ड ने सरकार से 5 एकड़ जमीन और 112 करोड़ रुपये के फंड की मांग की है। लेकिन आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बिहार सरकार या कैबिनेट ने इस भारी-भरकम बजट या जमीन आवंटन को लेकर कोई भी आधिकारिक या कानूनी स्वीकृति जारी नहीं की है।
? निष्कर्ष: मंदिर या सिर्फ एक प्रस्ताव?अंतिम सच यही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने की यह योजना अभी सिर्फ फाइलों और शुरुआती चर्चाओं तक ही सीमित है। जब तक बिहार कैबिनेट इस पर कोई बड़ा फैसला नहीं लेती, तब तक इसे केवल एक 'प्रस्ताव' ही माना जाएगा, किसी मंदिर के निर्माण की शुरुआत नहीं।
रायपुर । शौर्यपथ । छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (CGHB) द्वारा आवंटियों को विलंब अवधि की ब्याज राशि और बकाया जल प्रभार (Water Charges) के सरचार्ज पर 50 प्रतिशत की विशेष छूट एकमुश्त भुगतान (One-Time Settlement) योजना के तहत दी गई थी, जिसकी अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 निर्धारित थी।
*गृह निर्माण ने हितग्राहियों को दाण्डिक ब्याज में 50 प्रतिशत छूट देने की घोषणा*
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने अपने हितग्राहियों को बड़ी सौगात दी है। मंडल मुख्यालय, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बकायादार हितग्राहियों को दाण्डिक ब्याज में 50 प्रतिशत छूट देने की घोषणा की।
*विशेष आवासीय योजना के अंतर्गत OTS-1 एवं OTS-2 में आबंटित संपत्तियां इस योजना के दायरे से बाहर*
यह छूट मंडल की समस्त योजनाओं में निर्मित एवं निर्माणाधीन आबंटित संपत्तियों पर लागू होगी। हालांकि, विशेष आवासीय योजना के अंतर्गत OTS-1 एवं OTS-2 में आबंटित संपत्तियां इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगी। पात्र हितग्राही अपनी आबंटित संपत्ति की संपूर्ण बकाया राशि एकमुश्त जमा कर दाण्डिक ब्याज अर्थात विलंबित अवधि के ब्याज में 50 प्रतिशत छूट का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि मंडल द्वारा पूर्व में भी निर्मित भवनों के विरुद्ध बकाया राशि एकमुश्त जमा करने पर दाण्डिक ब्याज में 50 प्रतिशत छूट का लाभ 31 मार्च 2026 तक दिया गया था। इस योजना को हितग्राहियों से अच्छा प्रतिसाद मिला। मंडल की निधि में तरलता बनाए रखने तथा हितग्राहियों को बकाया राशि एकमुश्त जमा करने की सुविधा देने के उद्देश्य से पुनः यह योजना लागू की गई है।
*वाटर चार्जेस के सरचार्ज में भी 50 प्रतिशत छूट*
अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि कई हितग्राहियों द्वारा जलप्रदाय शुल्क (वाटर चार्जेस) समय पर जमा नहीं किए जाने के कारण लंबित राशि पर सरचार्ज भारित हो रहा था। हितग्राहियों द्वारा लगातार सरचार्ज में छूट देने का अनुरोध किया जा रहा था। हितग्राहियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंडल ने अपनी आबंटित संपत्तियों पर लंबित जलप्रदाय शुल्क का एकमुश्त भुगतान करने पर भारित सरचार्ज में भी 50 प्रतिशत छूट देने का निर्णय लिया है। इससे हितग्राहियों को बकाया राशि के निपटारे में राहत मिलेगी और वे सरचार्ज में छूट का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
अध्यक्ष ने बताया कि इस संबंध में मंडल द्वारा संबंधित इकाइयों को आवश्यक निर्देश जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने हितग्राहियों से इस सुविधा का लाभ उठाते हुए अपनी बकाया राशि का शीघ्र एकमुश्त भुगतान करने की अपील की।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
