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दुर्ग। शौर्यपथ की विशेष रिपोर्ट
शहर के चर्चित आभूषण प्रतिष्ठान सहेली ज्वेलर्स में हुए विवाद ने अब एक व्यापक बहस का रूप ले लिया है। यह मामला केवल एक ग्राहक और दुकानदार के बीच का नहीं रह गया, बल्कि इसमें व्यापारिक आचरण, प्रशासनिक निष्पक्षता और प्रभावशाली रसूख—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शुरुआत: भरोसे से विवाद तक
मामले की शुरुआत एक मध्यमवर्गीय महिला ग्राहक से हुई, जिसने आभूषण खरीदने के लिए ₹50,000 एडवांस दिए और लाखों के जेवर भी खरीदे।लेकिन जब उसे खरीदे गए जेवरों की BIS हॉलमार्क गुणवत्ता पर संदेह हुआ, तो वह स्पष्टीकरण के लिए सहेली ज्वेलर्स पहुंची—और यहीं से विवाद ने उग्र रूप ले लिया।
एक महिला बनाम ‘समूह दबाव’
वायरल वीडियो के अंशों में महिला अकेली दिखाई देती है, जबकि दुकान में मौजूद संचालक और उनके समर्थक समूह में उस पर हावी होते नजर आते हैं। महिला जहां अपने पैसे और जेवर की गुणवत्ता को लेकर सवाल कर रही थी, वहीं दूसरी ओर उसे तीखी प्रतिक्रिया और दबाव का सामना करना पड़ा।
पुलिस की मौजूदगी में बिगड़ा माहौल
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची, जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि पुलिस की मौजूदगी में ही विवाद और बढ़ गया। वायरल वीडियो में महिला पुलिसकर्मी और ग्राहक के बीच हाथापाई की स्थिति नजर आती है। आरोप है कि पहले पुलिसकर्मी ने हाथ उठाया, जिसके जवाब में महिला ने भी प्रतिक्रिया दी।
“पुलिस पर हाथ उठाया”—विवाद को हवा?
घटना के दौरान दुकान में मौजूद लोगों द्वारा एक स्वर में “पुलिस पर हाथ उठाया” के नारे लगाए गए।
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की आवाजें पहले से तनावपूर्ण माहौल को और भड़काने का कारण बन सकती हैं।
व्यापारियों की एंट्री और रहस्यमयी कॉल
घटना के दौरान कुछ अन्य व्यापारी भी सहेली ज्वेलर्स के समर्थन में नजर आए। एक वीडियो में एक व्यापारी द्वारा “राठौर को फोन लगाने” की बात भी सुनाई देती है, जिसने पूरे घटनाक्रम को और सवालों के घेरे में ला दिया है।
नया तथ्य: केंद्रीय एजेंसियों से भी टकराव का इतिहास
इस पूरे मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य चर्चा में है जिसने विवाद को और गंभीर बना दिया है। शहर में चर्चा है कि सहेली ज्वेलर्स के संचालकों का पहले भी केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों के साथ विवाद और तीखी बहस हो चुकी है—यहां तक कि हाथापाई जैसी स्थिति भी बनी थी। यह तथ्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्रीय एजेंसियां संवैधानिक शक्तियों से लैस होती हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस पर होती है। ऐसे में जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि—
? “जब बड़े अधिकारियों के साथ ऐसा व्यवहार हो चुका है, तो एक आम महिला ग्राहक के साथ क्या हुआ होगा?”
जनता की सोच: पुलिस नहीं, माहौल जिम्मेदार?
शहर में एक और दिलचस्प पहलू उभरकर सामने आया है— बड़ी संख्या में लोग इस घटना में सीधे तौर पर पुलिस कर्मियों को दोषी नहीं मान रहे। लेकिन यह जरूर मान रहे हैं कि माहौल ऐसा बना दिया गया, जिसमें पुलिस की मौजूदगी में ही विवाद भड़क गया। यानी सवाल केवल कार्रवाई पर नहीं, बल्कि उस परिस्थिति पर है, जो बनाई गई।
CCTV: सच्चाई का सबसे बड़ा गवाह
पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम भूमिका अब सहेली ज्वेलर्स में लगे CCTV कैमरों की मानी जा रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो अधूरे और टुकड़ों में हैं, जिससे पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं हो पा रही।
पीड़ित महिला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा है— “CCTV फुटेज सामने लाई जाए, सच्चाई खुद सामने आ जाएगी।”
सबसे बड़ा सवाल: क्या पुलिस बनी ‘मोहरा’?
घटना के बाद सबसे गंभीर सवाल यही उठ रहा है—क्या किसी प्रभावशाली प्रतिष्ठान ने अपने पक्ष में माहौल बनाकर पुलिस प्रशासन को अनजाने में ‘मोहरा’ बना दिया?
आगे क्या होगा?
अब पूरे शहर की नजरें तीन बातों पर टिकी हैं—क्या CCTV फुटेज सार्वजनिक किया जाएगा?,क्या निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होगी?,या फिर मामला समय के साथ दब जाएगा?
यह घटना केवल एक ग्राहक विवाद नहीं, बल्कि विश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बन चुकी है। अगर सच्चाई सामने नहीं आई, तो यह मामला आम जनता—खासकर मध्यम वर्ग—के भरोसे को गहरा आघात पहुंचा सकता है।
भिलाई | भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) भिलाई जिले की नवनियुक्त कार्यकारिणी विवादों के घेरे में आ गई है। पार्टी की नई टीम में 'युवा जोश' की जगह 'आपराधिक इतिहास' को तरजीह दिए जाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। जैसे ही कार्यकारिणी की सूची जारी हुई, पार्टी के भीतर और बाहर हड़कंप मच गया है।
प्रमुख बिंदु: जो पार्टी की साख पर सवाल उठा रहे हैं
दागी चेहरों का दबदबा: नई कार्यकारिणी में ऐसे युवाओं को पदाधिकारी बनाया गया है, जिन पर लूट, मारपीट, धोखाधड़ी और महिलाओं से बदसलूकी जैसे संगीन मामले दर्ज हैं।
महादेव सट्टा एप से कनेक्शन: चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ पदाधिकारी चर्चित 'महादेव सट्टा एप' मामले में भी आरोपी हैं और जेल की हवा खा चुके हैं।
गैंगस्टर लिंक: रिपोर्ट के अनुसार, सूची में शामिल कुछ नामों का संबंध कुख्यात गैंगस्टरों के साथ भी बताया जा रहा है।
भीतरघात और बगावत: घोषणा के महज 24 घंटे के भीतर 10 मंडल अध्यक्षों ने इस सूची को खारिज करते हुए अपनी समानांतर सूची जारी कर दी है, जिससे पार्टी में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।
पार्टी की फजीहत, नेतृत्व ने माँगा स्पष्टीकरण
मामले की गंभीरता और बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने भिलाई जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन और युवा मोर्चा अध्यक्ष सौरभ जायसवाल को तलब किया है।
जिलाध्यक्ष का बचाव: सौरभ जायसवाल ने सफाई देते हुए कहा है कि जिन लोगों पर आरोप हैं, उनसे "चरित्र प्रमाण पत्र" माँगे गए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अभी सिर्फ आरोप लगे हैं, अपराध सिद्ध नहीं हुआ है।
निष्कर्ष
शुचिता की राजनीति का दावा करने वाली पार्टी के लिए यह स्थिति बेहद शर्मनाक साबित हो रही है। एक तरफ जहां युवाओं को जोड़ने की बात हो रही है, वहीं 'लिस्टेड अपराधियों' को पद बांटने से निष्ठावान कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। अब देखना यह है कि क्या प्रदेश नेतृत्व इन नियुक्तियों को रद्द कर 'छवि सुधार' की दिशा में कदम उठाता है या नहीं।
नई दिल्ली/गुवाहाटी, । कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है, जिससे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर विवाद गहरा गया है।
क्या है पूरा विवाद?
5 अप्रैल 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने रिनिकी भुइयां शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें कथित तौर पर तीन देशों के पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने की बात शामिल थी। इन आरोपों को रिनिकी शर्मा ने पूरी तरह फर्जी बताते हुए गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी खेड़ा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को “नकली और मनगढ़ंत” बताया है।
हाईकोर्ट का रुख सख्त
24 अप्रैल 2026 को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि एक निजी व्यक्ति को इस तरह विवाद में घसीटना गंभीर मामला है।
अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अस्थायी राहत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी और खेड़ा को असम की अदालत जाने को कहा था। अब हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद खेड़ा ने गिरफ्तारी पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है।
आगे क्या?
अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि खेड़ा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिलती है या नहीं। यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संवैधानिक और आपराधिक कानून की कसौटी पर आ चुका है।
पुणे–सतारा मार्ग पर आधुनिक 6-लेन सुरंग परियोजना से घटेगा यात्रा समय, बढ़ेगी सुरक्षा और पर्यटन-व्यापार को मिलेगा बड़ा लाभ
नई दिल्ली/महाराष्ट्र, ।
दशकों से चुनौतीपूर्ण और जोखिमभरे सफर के लिए पहचाने जाने वाले Khambatki Ghat में अब यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदलने जा रहा है। National Highways Authority of India द्वारा NH-48 (पूर्व में NH-4) पर विकसित की जा रही ट्विन ट्यूब 6-लेन सुरंग परियोजना इस क्षेत्र को आधुनिक और सुरक्षित राजमार्ग अवसंरचना का प्रतीक बना रही है।
परियोजना का एक हिस्सा परीक्षण संचालन और सुरक्षा मूल्यांकन के तहत आम जनता के लिए खोला गया है, जिससे यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सफर का अनुभव मिल रहा है। वर्तमान में परियोजना की भौतिक प्रगति 86 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और इसका उद्घाटन 2026 की पहली छमाही में होने की संभावना है।
पहले जहां खंबटकी घाट का सफर संकरी सड़कों, तीखे मोड़ों और लंबे ट्रैफिक जाम के कारण तनावपूर्ण रहता था, वहीं नई सुरंग के शुरू होने से यात्रा का समय काफी कम हो गया है।
यात्रियों के अनुसार:
नई सुरंग में आधुनिक रिफ्लेक्टर, सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन बिंदु और चौड़ी लेन जैसी सुविधाएं यात्रियों को अधिक सुरक्षित अनुभव प्रदान कर रही हैं।
Khambatki Ghat मुंबई-पुणे-बेंगलुरु कॉरिडोर की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो प्रमुख शहरों और पर्यटन स्थलों को जोड़ती है, जैसे—
साथ ही यह मार्ग लोकप्रिय पर्यटन स्थलों—
नई छह-लेन ट्विन ट्यूब सुरंग परियोजना से कई स्तरों पर लाभ होने की उम्मीद है:
✔️ यात्रा समय में बड़ी कमी
✔️ दुर्घटनाओं के जोखिम में उल्लेखनीय गिरावट
✔️ ईंधन की बचत और वाहन रखरखाव लागत कम
✔️ स्थानीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा
✔️ दैनिक यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित और आरामदायक सफर
पहले जहां एक दिशा में केवल 0.85 किमी की दो-लेन सुरंग और दूसरी दिशा में लगभग 8 किमी घाट सड़क थी, वहीं अब आधुनिक तकनीक से लैस नई सुरंग इन सभी समस्याओं का समाधान बनकर उभरी है।
नई खंबटकी घाट ट्विन ट्यूब सुरंग केवल एक इंजीनियरिंग परियोजना नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का प्रतीक बनती जा रही है। यह परियोजना दिखाती है कि जब अवसंरचना को यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है, तो यह न केवल दूरी कम करती है, बल्कि समय बचाती है, जानें सुरक्षित करती है और यात्रा को भरोसेमंद बनाती है। ??
1.64 लाख डाकघरों के विशाल नेटवर्क से जुड़ेगी निजी लॉजिस्टिक्स ताकत, दूरदराज क्षेत्रों तक तेज और भरोसेमंद सेवाओं का रास्ता होगा आसान
नई दिल्ली, ।
संचार मंत्रालय के अधीन Department of Posts और देश की अग्रणी लॉजिस्टिक्स कंपनी DTDC Express Limited ने देशभर में लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
नई दिल्ली स्थित Dak Bhavan में आयोजित कार्यक्रम में डाक विभाग के पार्सल निदेशालय के महाप्रबंधक श्री नीरज कुमार झा और डीटीडीसी के राष्ट्रीय चैनल प्रमुख श्री जतिंदर सेठी ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इस समझौते का आदान-प्रदान किया।
यह साझेदारी वर्ष 2025 से जारी सहयोग को आगे बढ़ाते हुए देश में पार्सल डिलीवरी सेवाओं को अधिक तेज, प्रभावी और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थान मिलकर लॉजिस्टिक्स सेवाओं को आधुनिक और सशक्त बनाने पर काम करेंगे। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—
इस समझौते के तहत DTDC Express Limited को Department of Posts के देशभर में फैले 1.64 लाख डाकघरों के व्यापक नेटवर्क तक पहुंच मिलेगी।
इससे कंपनी को—
में मदद मिलेगी।
यह सहयोग डाक विभाग के पार्सल कारोबार को नई गति देगा। डीटीडीसी के अनुभव और तकनीकी सहयोग से—
Department of Posts विश्व का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क संचालित करता है, जो देशभर में संचार, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
वहीं DTDC Express Limited देश की प्रमुख एक्सप्रेस पार्सल डिलीवरी कंपनियों में शामिल है, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स के लिए आधुनिक लॉजिस्टिक्स समाधान उपलब्ध कराती है।
डाक विभाग और डीटीडीसी के बीच यह साझेदारी देश में लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है। इससे न केवल पार्सल डिलीवरी सेवाएं तेज और सुलभ होंगी, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों तक डिजिटल व्यापार की पहुंच बढ़ेगी और भारत के वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब बनने की दिशा को भी नई मजबूती मिलेगी।
नई दिल्ली, ।
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि रूस के बाद भारत व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) संचालित करने वाला दुनिया का दूसरा देश बनने की दिशा में अग्रसर है।
तमिलनाडु के कलपक्कम में स्वदेशी रूप से विकसित 500 मेगावॉट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को पहली बार ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल की, जो इस परियोजना की सफलता का अहम पड़ाव माना जा रहा है। इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा विकसित और भाविनी (BHAVINI) द्वारा निर्मित यह रिएक्टर भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत का संकेत देता है।
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की खासियत यह है कि यह जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक ईंधन पैदा करने की क्षमता रखता है। यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन पर आधारित यह तकनीक भारत को भविष्य में अपने विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता देती है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पूर्ण रूप से चालू होने के बाद भारत, रूस के बाद वाणिज्यिक स्तर पर FBR संचालित करने वाला दूसरा देश बन जाएगा। वर्तमान में रूस ही एकमात्र देश है जो इस तकनीक का व्यावसायिक उपयोग कर रहा है, जबकि अमेरिका, फ्रांस, जापान, जर्मनी और चीन जैसे देशों ने इसे प्रयोगात्मक स्तर तक ही सीमित रखा है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि यह उपलब्धि भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा लक्ष्यों के लिए बेहद अहम है। सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें फास्ट ब्रीडर तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने उभरती तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण के लिए स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा इस जरूरत को पूरा करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगी।
इसके साथ ही, “परमाणु मिशन” के तहत वर्ष 2033 तक 20,000 करोड़ रुपये के निवेश से 5 लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) स्थापित करने की योजना है। यह रिएक्टर उद्योगों, दूरदराज क्षेत्रों और सीमित ग्रिड कनेक्टिविटी वाले इलाकों में बिजली आपूर्ति के लिए उपयोगी साबित होंगे।
सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय स्रोतों और अन्य स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों का संतुलित मिश्रण ही वर्ष 2070 तक ‘नेट जीरो’ कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने का आधार बनेगा।
नई दिल्ली, ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक पड़ाव बताते हुए कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय विकास साझेदारी को अभूतपूर्व गति प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री के अनुसार, यह समझौता भारत और न्यूजीलैंड के बीच गहरे विश्वास, साझा मूल्यों और भविष्य की महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि FTA केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक और रणनीतिक सहयोग का नया अध्याय है।
उन्होंने कहा कि इस समझौते का सीधा लाभ किसानों, युवाओं, महिलाओं, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), कारीगरों, स्टार्टअप्स, छात्रों और नवाचार से जुड़े लोगों को मिलेगा। इससे नए अवसर पैदा होंगे और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और अधिक मजबूत होगा।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से न्यूजीलैंड की ओर से 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे कृषि, विनिर्माण, नवाचार और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। यह निवेश दोनों देशों के लिए अधिक समृद्ध और गतिशील भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने इसे “ऐतिहासिक क्षण” करार देते हुए विश्वास जताया कि यह समझौता आने वाले समय में भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
नई दिल्ली ।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कर्नाटक और केरल में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रगति की व्यापक समीक्षा की। यह समीक्षा मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त फीडबैक के आधार पर की गई, जिससे जमीनी स्थिति का आकलन कर सुधारात्मक कदमों पर जोर दिया जा सके।
नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और अजय टम्टा के साथ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा विभिन्न निर्माण कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में कर्नाटक के 7,926 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क और केरल की 61 परियोजनाओं के तहत 1,513 किलोमीटर मार्गों की गुणवत्ता और रखरखाव की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
गडकरी ने स्पष्ट किया कि राजमार्ग निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन, कड़े गुणवत्ता मानकों के पालन और आधुनिक तकनीकों के व्यापक उपयोग पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि टिकाऊ और सुरक्षित सड़क ढांचा ही देश की आर्थिक गति को मजबूती देता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीनी स्तर पर कार्यों में तेजी लाई जाए, गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाए तथा आधुनिक निर्माण पद्धतियों को अपनाकर यात्रा अनुभव को बेहतर बनाया जाए। साथ ही, प्रमुख राजमार्ग गलियारों में निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर भी फोकस करने को कहा गया।
आगामी मानसून को देखते हुए गडकरी ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं ताकि सड़क सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और यातायात का सुचारू प्रवाह बना रहे। इसके लिए व्यापक जल निकासी प्रबंधन, ढलान संरक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर बल दिया गया।
केंद्र सरकार का यह रुख स्पष्ट संकेत देता है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में अब गुणवत्ता, जवाबदेही और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और बेहतर यातायात अनुभव मिल सके।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति का गठन, राज्यों की सहमति से तैयार होगा वैज्ञानिक कृषि मॉडल
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राज्यों के लिए अलग कृषि रोडमैप तैयार करना देश की कृषि व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक गंभीर और दूरदर्शी पहल है, जिससे किसानों को स्थानीय संसाधनों के अनुरूप खेती की स्पष्ट दिशा मिलेगी।
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह रोडमैप राज्यों की सहमति और उनकी आवश्यकताओं के आधार पर तैयार किया जाएगा तथा इसे किसी भी राज्य पर थोपा नहीं जाएगा। प्रारंभिक स्तर पर Rajasthan, Andhra Pradesh और Uttar Pradesh ने इस पहल के लिए अपनी सहमति प्रदान की है।
इस कार्य में Indian Council of Agricultural Research (आईसीएआर) और कृषि मंत्रालय मिलकर राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे।
नए कृषि रोडमैप के तहत देश के 12 प्रमुख कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक राज्य के लिए उपयुक्त फसल प्रणाली तय की जाएगी।
इस योजना में मुख्य रूप से:
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि Purple Revolution (लैवेंडर खेती) की सफलता को देखते हुए अन्य राज्यों में भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार विशेष कृषि क्रांतियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि यह रोडमैप किसानों के लिए एक वैज्ञानिक दस्तावेज की तरह काम करेगा, जिसमें यह स्पष्ट होगा:
रोडमैप तैयार होने के बाद राज्यों की आर्थिक, तकनीकी और संरचनात्मक जरूरतों का विश्लेषण कर चरणबद्ध तरीके से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
देश की कृषि को आधुनिक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रत्येक राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप बनने से किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खेती का स्पष्ट मार्ग मिलेगा, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
