August 07, 2026
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    PANKAJ CHANDRAKAR

    PANKAJ CHANDRAKAR

    ने खुद को किया आइसोलेट, फैमिली मेंबर और एक स्टाफ कोरोना पॉजिटिव

    नई दिल्ली /शौर्यपथ/

    देश में कोरोना वायरस के नए मामलों में लगातार उछाल देखा जा रहा है. इस बीच, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के परिवार का एक सदस्य और उनका एक स्टाफ कोरोना पॉजिटिव आया है. प्रियंका गांधी की रिपोर्ट निगेटिव आई है. हालांकि, वह आइसोलेशन में हैं. प्रियंका गांधी ने सोमवार को ट्वीट करके यह जानकारी दी.

    प्रियंका गांधी ने कल अपने ट्वीट में कहा, "मेरे परिवार का एक सदस्य और मेरा एक स्टाफ कल कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए हैं. मेरी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है. हालांकि, डॉक्टर ने मुझे आइसोलेट रहने और कुछ दिन बाद दोबारा टेस्ट कराने की सलाह दी है."

    बता दें कि कोरोना वायरस के मामलों में एक बार फिर तेजी आई है. कुछ दिन पहले तक 6 हजार के आसपास आ रहे नए केस आज 37 हजार के पार निकल गए. वहीं, कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के केस भी देश में बढ़ रहे हैं. ओमिक्रॉन के अब तक करीब 1900 मामले सामने आ चुके हैं. देश के 20 से ज्यादा राज्यों में यह मामले आए हैं.

    हाल ही में केंद्र ने 14 शहरों का जिक्र करते हुए महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल समेत 8 राज्यों को चिट्ठी लिखकर त्वरित कदम उठाने को कहा. केंद्र की ओर से सभी राज्यों को सतर्कता बरतने और जरूरी उपाय करने को कहा गया है.

     

     

     

    75 फीसदी स्कूली बच्चों को लगा को वैक्सीन का टीका 15 से 18 साल की आयु के

    धमतरी /शौर्यपथ/

    शासन के निर्देशानुसार ज़िले में तीन जनवरी से 15 से 18 साल की उम्र के बच्चों को कोविड से सुरक्षा के लिए टीका लगाया जा रहा है। ज़िले में कलेक्टर  पी.एस.एल्मा के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य, शिक्षा और राजस्व अमले के आपसी समन्वय से टीकाकरण के लिए बनाई गई कार्ययोजना का बेहतर नतीजा इस तरह सामने आया है, कि पहले दिन ही 75 फीसदी बच्चों को को-वैक्सीन का टीका लगाया जाना संभव हो पाया। सोमवार तीन जनवरी की सुबह से ही प्रशासनिक अमला, स्कूल शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य अमला इसके लिए भिड़ा रहा। शाम तक ज़िले के 233 निजी और शासकीय स्कूलों के 15 से 18 साल तक की उम्र के 28 हज़ार 589 बच्चों को कोविड टीका लगाया गया। सब बच्चे भी कोविड से बचाव के लिए इस घड़ी का खास तौर पर इंतजार कर रहे थे और बारी आने पर टीका लगने से वे काफी खुश भी हुए।

    गौरतलब है कि ज़िले के 168 शासकीय स्कूलों के 33 हजार 328 बच्चों में से 77.3 प्रतिशत बच्चों को टीका लगा जिसका आंकड़ा 25 हजार 757 है। इसी तरह 65 निजी स्कूलों में 15 से 18 साल की उम्र के 4943 बच्चों में से 2832 बच्चों, याने 57ः को कोविड का टीका लगाया गया। कलेक्टर श्री एल्मा ने बच्चों में कोरोना से सुरक्षा के लिए लगाए गए टीके को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानते हुए सबको इसी तर्ज पर आपसी समन्वय से काम करते हुए आगे भी शेष छूटे इस आयु वर्ग के बच्चों का शत प्रतिशत टीकाकरण कराने पर बल दिया है। उल्लेखनीय है कि यह टीकाकरण अभी जारी है, ज़िले में कुल 38 हजार 271 बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य है।

    मुंगेली और धमतरी में पहले ही दिन कुल लक्ष्य के 39-39 प्रतिशत तथा कोंडागांव में 37 प्रतिशत को लगे टीके

    टीकाकरण के लिए किशोरों में दिखा भारी उत्साह, परिजनों के साथ बड़ी संख्या में पहुंचे टीका लगवाने

    3 जनवरी को प्रदेश भर में 1.86 लाख किशोरों को लगाए गए टीके

    रायपुर /शौर्यपथ/

    3 जनवरी को प्रदेश भर में 1.86 लाख किशोरों को लगाए गए टीके

    प्रदेश में 15 से 18 वर्ष के किशोरों की टीकाकरण की अच्छी शुरूआत हुई है। पहले ही दिन 3 जनवरी को प्रदेश भर में एक लाख 85 हजार 906 किशोर-किशोरियों को कोरोना से बचाव का टीका लगाया गया। यह प्रदेश में इस आयु वर्ग के कुल 16 लाख 39 हजार 811 किशोरों के 11 प्रतिशत से अधिक है। मुंगेली और धमतरी जिले में पहले ही दिन कुल लक्ष्य के 39-39 प्रतिशत, कोंडागांव में 37 प्रतिशत, कांकेर में 20 प्रतिशत, गरियाबंद और दुर्ग में 19-19 प्रतिशत, बालोद में 18 प्रतिशत, राजनांदगांव में 15 प्रतिशत, बलौदाबाजार-भाटापारा और महासमुंद में 14-14 प्रतिशत तथा कोरिया में 12 प्रतिशत किशोर-किशोरियों को टीका लगाया गया।

    3 जनवरी को प्रदेश भर में 1.86 लाख किशोरों को लगाए गए टीके

    टीकाकरण की शुरूआत के पहले दिन किशोरों में खासा उत्साह देखा गया। वे अपने अभिभावकों के साथ बड़ी संख्या में टीकाकरण केंद्र पहुंचे और सहर्ष कोरोना से बचाव का टीका लगवाया। प्रदेश में 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के टीकाकरण के लिए 2452 टीकाकरण साइट्स बनाए गए हैं। कोरोना सक्रंमण से बचाव के लिए 3 जनवरी को मुंगेली जिले में 18 हजार 938, धमतरी में 18 हजार 637, कोंडागांव में 13 हजार 434, कांकेर में 9199, गरियाबंद में 6904, दुर्ग में 19 हजार 519, बालोद में 8858, राजनांदगांव में 14 हजार 846, बलौदाबाजार-भाटापारा में 13 हजार 498, महासमुंद में 9041, कोरिया में 4602, सूरजपुर में 4852, कोरबा में 7010 और कबीरधाम में 4524 किशोरों को टीका लगाया गया।

    3 जनवरी को प्रदेश भर में 1.86 लाख किशोरों को लगाए गए टीके

    3 जनवरी को प्रदेश भर में 1.86 लाख किशोरों को लगाए गए टीके

    जशपुर जिले में 3370, दंतेवाड़ा में 1091, रायपुर में 8589, जांजगीर-चांपा में 5611, बिलासपुर में 4065, रायगढ़ में 3385, बस्तर में 1752, बलरामपुर-रामानुजगंज में 1501, सुकमा में 424, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 576, सरगुजा में 927, बेमेतरा में 597, बीजापुर में 117 तथा नारायणपुर में 39 किशोरों को 3 जनवरी को कोरोनारोधी टीके की पहली खुराक दी गई।

    सभी जिलों में जुलूस, रैलियों, पब्लिक गैदरिंग, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और खेल आयोजनों पर लगाई जाए रोक
    चार प्रतिशत या अधिक पॉजिटिव रेट वाले जिलों में सभी स्कूलों, आंगनबाड़ी केन्द्रों, पुस्तकालयों, स्वीमिंग पूल और सार्वजनिक स्थानों को बंद रखा जाए: रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक रात्रिकालीन क्लैम्प डाउन लगाएं

    सार्वजनिक स्थानों, भीड़-भाड़ वाले बाजारों और दुकानों में संक्रमण से बचाव के लिए मास्क के उपयोग को सख्ती से लागू करें

    सभी एयरपोर्ट पर आरटीपीसीआर जांच अनिवार्य की जाए

    सभी रेल्वे स्टेशनों और राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण की रेन्डम टेस्टिंग के निर्देश

    आवश्यतानुसार माइक्रो और मिनी कंटेनमेन्ट जोन बनाएं

    होम आईसोलेशन वाले मरीजों के लिए सप्ताह में सातों दिन 24 घंटे कॉल सेंटर्स संचालित हों

    कोविड-19 संक्रमण के नियंत्रण के लिए निजी डॉक्टरों, निजी अस्पतालों, एनजीओ, मीडिया प्रतिनिधियों के साथ आयोजित की जाएं बैठकें

    हॉस्पिटल बेड, दवाईयों के स्टॉक, पीएसए प्लांट्स और ऑक्सीजन की उपलब्धता की डेली रिपोर्टिंग के निर्देश

    चार प्रतिशत या अधिक पॉजिटिव रेट वाले स्थानों में मॉल, सिनेमा, स्वीमिंग पूल, मेरिज पैलेस, होटल, रेस्टोरेंट, ऑडिटोरियम पर प्रतिबंध लगाने और अन्य जिलों में एक तिहाई क्षमता से संचालित करने के निर्देश

    रायपुर /शौर्यपथ/

    मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने प्रदेश मेें कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए सभी कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए कोविड-19 गाइडलाईन के तहत सख्ती से हर संभव उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि हमारा मुख्य उद्देश्य कोविड-19 संक्रमण और इससे संबंधित रिस्क को सीमित करना है, न कि आर्थिक गतिविधियों को धीमा करना।

    इस संबंध में जारी निर्देश में कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से कहा गया है कि प्रदेश के ऐसे जिले जहां पॉजिटिव रेट 4 प्रतिशत या इससे अधिक है, वहां रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक रात्रिकालीन क्लैम्प डाउन लगाया जाए और नॉन कमर्शियल गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाई जाए। इसके लिए जहां जरूरी हो वहां धारा 144 तथा महामारी अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए, जिन जिलों में पॉजिटिव रेट 4 प्रतिशत से ज्यादा है, वहां सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केन्द्रों, पुस्तकालयों, स्वीमिंग पूल और ऐसे सार्वजनिक स्थानों को बंद रखा जाए। ऐसे जिले जहां बीते 7 दिनों में कोरोना पॉजिटिविटी रेट 4ः से कम है, वहां कलेक्टर अन्य जिलो के प्रावधान लागू कर सकेंगे।

    सभी जिलों में जुलूसों, रैलियों, पब्लिक गैदरिंग, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और खेल आयोजनों पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं। जहां जरूरी हो वहां धारा 144 तथा महामारी अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने को कहा गया है।

    सभी कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से कहा गया है कि कोविड-19 संक्रमण के नियंत्रण के लिए निजी डॉक्टरों, निजी अस्पतालों, एनजीओ, मीडिया प्रतिनिधियों के साथ बैठकें आयोजित की जाएं। कोरोना संक्रमण नियंत्रण के उपायों का स्थानीय प्रचार माध्यमों में प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए और नकारात्मक तथा असत्य खबरों पर सख्ती से रोक लगाई जाए। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक, चौम्बर ऑफ कामर्स के प्रतिनिधियों, मॉल के मालिकों, थोक विक्रेताओं, जिम, सिनेमा और थिएटर के मालिकों, होटल-रेस्टोरेंट, स्वीमिंग पूल, ऑडिटोरियम, मेरिज पैलेस, इवेंट मैनेजमेंट समूहों के साथ बैठक करके यह सुनिश्चित करें कि इन स्थानों में क्षमता के केवल एक तिहाई लोगों को प्रवेश दिया जाए। ऐसे जिलों में जहां पॉजिटिव रेट 4 प्रतिशत से अधिक है, वहां इनकी गतिविधियों पर रोक लगाई जाए।

    कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि प्रदेश के सभी एयरपोर्ट पर आरटीपीसीआर जांच अनिवार्य की जाए। ऐसे व्यक्ति जिन्हें कोविड-19 के दोनो टीके लगाए जा चुके हैं वे यात्रा की तिथि के 72 घंटे की आरटीपीसीआर की नेगेटिव रिपोर्ट प्रस्तुत करें। साथ ही एयरपोर्ट पर आने वाले सभी यात्रियों की आरटीपीसीआर जांच अनिवार्य रूप से की जाए। सभी रेल्वे स्टेशनों और राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण की रेन्डम जांच के निर्देश दिए गए हैं।

    मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को यह निर्देश भी दिए हैं कि जहां आवश्यक हो, वहां कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए माइक्रो या मिनी कंटेनमेंट जोन बनाए जाएं। जहां आवश्यक हो वहां संक्रमितों की पहचान के लिए ट्रेसिंग और ट्रेकिंग की जाए। होम आईसोलेशन वाले संक्रमितों के लिए सप्ताह में सातों दिन 24 घंटे कॉल सेंटर्स को सक्रिय किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में मितानिनों के माध्यम से संक्रमण की स्थिति पर नजर रखी जाए। उन्होंने जिला प्रशासन को हॉस्पिटल बेड, दवाईयों के स्टॉक, पीएसए प्लांट्स और ऑक्सीजन की उपलब्धता डेली रिपोर्टिंग के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन को यह सुुनिश्चित करने के यह भी निर्देश दिए हैं कि कोरोना की पिछली दो लहर के दौरान सभी शासकीय और निजी अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता की जानकारी रियल टाईम में ऑनलाईन उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने एनजीओ और निजी संगठनों को कोरोना नियंत्रण के उपायों के लिए सहयोग और आवश्यक सामाग्रियों के दान हेतु प्रोत्साहित किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक स्थानों, भीड़-भाड़ वाले बाजारों और दुकानों में संक्रमण से बचाव के लिए मास्क के उपयोग को सख्ती से लागू करने के निर्देश जिला प्रशासन को दिए हैं। ऐसे लोग जो मास्क नहीं लगाते हैं उनका पुलिस और नगर निगम के स्टाफ के माध्यम से सख्ती से चालान किया जाए। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठकें आयोजित करने तथा शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों को जब तक बहुत जरूरी न हो हवाई यात्रा या रेल से यात्रा नहीं करने को कहा है।

     

     

    रायपुर /शौर्यपथ/

    नगरीय निकाय निर्वाचन के तहत रायपुर के नगर पालिक निगम बीरगांव के सभाकक्ष में आज कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी  सौरभ कुमार ने नवनिर्वाचित पार्षदों को शपथ दिलाई। इस अवसर पर उप जिला निर्वाचन अधिकारी  यू एस अग्रवाल तथा नगर निगम आयुक्त  श्रीकांत वर्मा भी उपस्थित थे।

     

    ये मैं हूं /शौर्यपथ/

    18 साल पहले की बात है, जब एक दिन चूल्हे-चौके में काम करने के बाद मैं खेतों में जलाने के लिए लकड़ियां जुटा रही थी। उस वक्त जुटाई गई लकड़ियों में मैंने देखा कि सफेदे ( यूकेलिप्टस) की लकड़ी में ढेर सारे दीमक लगी हुई है। मेरे मन में यह ख्याल आया कि जिस सफेदे को दीमक इतने प्रेम से खाती हैं, अगर उसे फसलों के बीच-बीच में रख दिया जाए तो शायद दीमक फसलों को छोड़कर सफेदे की लकड़ियों को खाने लगेंगी। मैंने सबसे पहले इस तरकीब को गेहूं की फसल में आजमाकर देखा। यह तरकीब रंग लाई। यह कहना है राजस्थान के सीकर जिले की 70 साल की महिला किसान भगवती देवी का, जो अब किसानों की रोल मॉडल हैं।

    'खेतों के वैज्ञानिक' सम्मान और 50 हजार रुपए के 'कृषि प्रेरणा सम्मान' से नवाजी जा चुकीं भगवती देवी भास्कर वुमन से बातचीत में वैसे तो राजस्थानी में अपनी बात कहती हैं, मगर उनके पति सुंडाराम वर्मा इसका हिंदी में तर्जुमा भी करते जाते हैं, जो खुद कृषि वैज्ञानिक हैं और नए-नए प्रयोगों को अंजाम देने में लगे रहते हैं। भगवती देवी कहती हैं कि मैंने जब यह तरकीब अपनी फसलों पर आजमाई तो यह बेहद कारगर साबित हुई। उसके बाद से तो मैंने दीमक को अपना दाेस्त ही बना लिया।

     सफेदा खरीदने की जरूरत नहीं, बस आप अपने खेतों में लगाइए

    सीकर जिले के दांतारामगढ़ गांव की महिला किसान भगवती देवी कहती हैं, फसलों को नुकसान पहुंचाने में दीमक सबसे आगे होती हैं। यह कीड़ा किसी भी मौसम, नमी, सूखा, गर्मी, सर्दी या किसी भी परिस्थिति में लग जाता है। इससे फसलें बर्बाद हो जाती हैं। मगर, सफेदे की लकड़ी से किसान के हर साल हजारों रुपए बच सकते हैं। न प्रदूषण का झंझट, न उर्वरता का खतरा। सफेदा खरीदने की भी जरूरत नहीं है। बस, आप अपने खेत में यूकेलिप्टस के एक-दो पेड़ लगा लें और दीमक से मुक्ति पाएं। सफेदे की ये लकड़ियां ही दीमक को ललचाएंगी। भगवती देवी के खेत में खेजड़ी, बबूल, बेर, अरड़ू, शीशम, सफेदा और नीम के वृक्ष मुख्य रूप से लगे हुए हैं। इसके अलावा भी कुछ अन्य प्रजातियों के पेड़ पौधे हैं। इन पेड़ों की लकड़ियां हर साल खेत में सफाई के दौरान खेत के चारों ओर बनी सीमा पर डाल दी जाती हैं।

    पहला प्रयोग 2004 में आजमाया, दीमक भी केंचुए की तरह ही जमीन के लिए कारगर

    भगवती देवी बताती हैं कि मैंने अपना पहला प्रयोग 2004 में किया। अपनी तरकीब को मैंने गेहूं के खेत में आजमाया, जाे कामयाब रहा। 3 फीट की सफेदे की लकड़ी गेहूं की दो कतारों के बीच इस तरह जमीन में गाड़ा कि उसका आधा हिस्सा जमीन में रहे। बाद में देखा तो गेहूं की फसल में दीमक नहीं लगी। सारे दीमक सफेदे की लकड़ी चूसने में लगी हुई थीं। वहीं, सफेदे की लकड़ी के नीचे जहां दीमक थे, उसके पास के दाने ज्यादा अच्छे और चमकदार निकले। इससे यह भी पता चला कि दीमक भी केंचुए की तरह ही मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं। फिर तो मैंने बाकी खेतों में भी यही तरकीब अपनाई। यह बात इतनी तेजी से इलाके में फैली कि लोग हमारे खेतों को देखने दूर-दूर से आने लगे।


    मेरी तरकीब को बीकानेर के विश्वविद्यालय ने जांचा-परखा, तब दी मान्यता

    भगवती देवी कहती हैं कि मेरी इस तरकीब के बारे में जब कृषि वैज्ञानिकों को पता चली तो हकीकत जानने के लिए राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (बीकानेर) के कृषि अनुसंधान निदेशक डॉ. एमपी साहू भगवती देवी के खेतों पर पहुंच गए। उस वक्त मेरे खेत में मिर्च की फसल लगी हुई थी। मैंने उन्हें अपना प्रयोग दिखाया। सफेदे की लकड़ी फसल के बीच रखकर अपना प्रयोग डॉ साहू को दिखा दिया। उसके बाद डॉ साहू के निर्देशन में मेरी तकनीक का पुनः शेखावटी कृषि अनुसंधान केंद्र पर किया गया। जब वहां भी प्रयोग सफल रहा तो मेरे प्रयोग को मान्यता मिल गई।

    पति का मिला कदम-कदम पर साथ, कुछ नहीं समझ आता तो बड़े प्यार से बताते

    भगवती देवी बताती है कि मैं तो अंगूठाछाप हूं। जब मैं पति के घर आई तो मैंने देखा कि मेरे पति दिन-रात किसानी में लगे रहते हैं और नई-नई तरकीब आजमाते रहते हैं। उनकी यह कोशिश देख मैं भी उनके साथ खेती-किसानी में जुट गई। मेरे पति को बीते साल कृषि में उनके नए-नए प्रयोगों के लिए पद्मश्री से नवाजा गया। उनके द्वारा एक लीटर पानी से एक पौधा उगाने की तकनीक को देश-दुनिया में पहचान मिली है। वह भी मेरा कदम-कदम पर साथ दे रहे हैं और इस तकनीक को देश के बाकी किसानों तक पहुंचाने की कोशिश में जुटे है। मुझे जब कुछ भी नहीं समझ आता था तो वह मुझे प्यार से विज्ञान की बारीकियों के बारे में बताते।


    बचपन में तंगहाली के चलते नहीं कर सकी पढ़ाई, आज महिलाओं को देती हूं ट्रेनिंग

    भगवती देवी कहती है कि सीकर जिले के गोवटी गांव में टेडूरामजी के यहां 1952 में मेरा जन्म हुआ। मेरे पिता पहाड़ी के मकानों में छत के लिए काम आने वाली पट्टियां निकालते और मां मूलीदेवी के साथ हम पांच भाई और दो बहनें खेत में काम करतीं। 1971 में मेरी शादी दांता निवासी सुंडाराम वर्मा से हुई। मेरे पति ने बीएससी की पढ़ाई की थी। मैं पढ़ी तो नहीं थी, मगर उनकी पढ़ाई-लिखाई मेरे काम आई। मैंने पढ़ाई नहीं की, मगर चाहत बहुत थी। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से मैं पढ़ नहीं पाई। मगर, पति की वजह से अब यह मलाल नहीं रहा। अब तो मैं दूसरों को कीटनाशकों के छिड़काव से बचने की ट्रेनिंग देती हूं। महिलाओं को नए-नए प्रयोगों के लिए उनका उत्साह बढ़ाती हूं। आज हमारी स्वाभिमान नाम की एक संस्था है, जो आसपास की महिला-पुरुष किसानों को प्रेरित करने का काम करती है। यह संस्था उन्नत बीजों और खेती के नए तौर-तरीकों और कीटनाशकों के नुकसान के बारे में किसानों को जागरूक कर रही है।

    ज्यादा कीटनाशक के इस्तेमाल से जमीन हो जाती है जहरीली

    भगवती देवी कहती हैं, अगर किसी फसल पर कीटों का प्रकोप होता है तो एक हेक्टेयर में 1 लीटर कीटनाशक का छिड़काव किया जाता है। वहीं, दीमक का प्रकोप होता है तब 1 हेक्टेयर खेत में साल भर में 10 लीटर कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ता है। इतने कीटनाशक से जमीन खराब और जहरीली हो जाती है। वहीं, सफेदे की लकड़ी का इस्तेमाल सस्ता और सुरक्षित भी है।

    बारिश का पानी बर्बाद न हो, इसके लिए भी खोज निकाला नया तरीका

    पूरे राजस्थान में पानी की किल्लत रहती है। इसे देखते हुए वॉटर हॉर्वेस्टिंग भी भगवती देवी ने अनूठे तरीके से की है। भगवती देवी ने बरसात के पानी की बर्बादी को रोकने के लिए खेतों में पॉलीथिन बिछा दी, जिससे होकर पानी एक बड़े गड्‌ढे में ठहर जाता है। यह पानी साल भर फसलों की सिंचाई के काम आता है।

     

    शरद पवार ने खेतों के वैज्ञानिक सम्मान से नवाजा था

    मेरे इस काम के लिए 2011 में उस समय के केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने ‛खेतों के वैज्ञानिक’ सम्मान से नवाजा था। इसके अलावा राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर और मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी, जोधपुर की ओर से भी ‛खेतों के वैज्ञानिक’ सम्मान मिला है। दिल्ली में ‛महिंद्रा समृद्धि इंडिया एग्री अवार्ड्स’ में ‛कृषि प्रेरणा सम्मान’ (उत्तरी ग्रामीण क्षेत्र) के लिए भी मुझे 2013 में 50,000 रुपए का पुरस्कार मिल चुका है। भगवती देवी के दो बेटे और 5 बेटियां हैं। सभी की शादियां हो चुकी हैं।

    भगवती देवी का कहना है कि मैं बिना किसी कीटनाशक के दीमक को काबू करना चाहती थी। मैंने अपने अनुभव को दूसरी फसलों पर भी आजमाया। मुझे इस बात की भी खुशी है कि मैंने अनाज के अलावा दलहनी एवं तिलहनी फसलों और सब्जियों में भी इस प्रयोग को किया और हर बार जीत मिली। इस सफलता से मेरा हौसला कुछ नया करने को बढ़ता गया।

     

     

     

     

    हेल्थ टिप्स /शौर्यपथ/ 

     हेल्दी और सेहतमंद रहने में हमारी डाइट अहम भूमिका निभाती है. खासतौर पर हमारा ब्रेकफास्ट. सुबह का नाश्ता दिन का सबसे जरूरी मील होता है. ब्रेकफास्ट हमेशा हेल्दी होना चाहिए. असल में बहुत से लोग ब्रेकफास्ट  करना स्किप कर देते हैं. वो भी इसलिए क्योंकि वो वजन को कम करना चाहते हैं. लेकिन, आपको बता दें कि ब्रेकफास्ट न करने से वजन और तेजी से बढ़ता है. अगर आप ब्रेकफास्ट में हेल्दी चीजों को शामिल कर लेते हैं तो वजन को आसानी से कम कर सकते हैं. क्योंकि ब्रेकफास्ट में खाई गई चीजें आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराती हैं, जिससे आप अधिक खाने से बचे रहते हैं. और वजन को तेजी से कम कर सकते हैं.

    वजन को कम करने के इन चीजों को करें सेवनः

    1. सलादः

    ब्रेकफास्ट में सलाद का सेवन सबसे अच्छा और हेल्दी माना जाता है. आप सलाद में कई तरह की सब्जियों और फलों को शामिल कर सकते हैं. इनमें पाए जाने वाले पोषक तत्व आपको हेल्दी रखने और वजन को कम करने में मदद कर सकते हैं.


    2. उबला अंडाः

    अंडे को प्रोटीन का सबसे अच्छा सोर्स माना जाता है. आप ब्रेकफास्ट में अंडे का सेवन कर सकते हैं. ये आपको हेल्दी रखने के साथ-साथ वजन को भी कम करने में मदद कर सकता है.

    3. मौसमी फलः

    हर मौसम के अपने फल होते हैं. और उन फलों के कुछ खास फायदे. फलों में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्‍सीडेंट, मिनरल्‍स और विटामिन्‍स होते हैं. सर्दियों के मौसम में आने वाले मौसमी फलों को आप ब्रेकफास्ट में शामिल कर वजन को आसानी से कम कर सकते हैं.

    4. अंकुरित अनाजः

    अंकुरित अनाज को सेहत के लिए काफी अच्छा माना जाता है. अगर आप वजन को कम करना चाहते हैं तो ब्रेकफास्ट में अंकुरित अनाज में सब्जी और फलों को डालकर हेल्दी ब्रेकफास्ट बना सकते हैं.

    सुकमा /शौर्यपथ/

    पढ़ई तुहंर दुआर-2.0 के तहत पठन, लेखन, गणितीय कौशल एवं सामाजिक विज्ञान तथा विज्ञान के प्रोजेक्ट की प्रतियोगिता का विकासखण्ड स्तरीय आयोजन शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोण्टा में सम्पन्न हुआ। इस प्रतियोगिता में विकासखण्ड कोण्टा के संकुल स्तर पर चयनित प्रतिभागी शामिल हुये।

    प्रतियोगिता का विधिवत शुभारंभ विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी एस. के. दीप ने किया। इस अवसर पर खण्ड स्त्रोत समन्वयक महेन्द्र बहादुर सिंह, सहायक खण्ड शिक्षा अधिकारी पी. श्रीनिवास राव, प्राचार्य सहदेव सिंह, दुसन लाल मार्गे, वरिष्ठ शिक्षक बी. विश्वेश्वर राव, सुश्री बी. शैल कुमारी, सुशील कुमार श्रीवास, टी. श्रीनिवास वासू, डी.व्ही.एस. प्रसाद एवं अन्य शिक्षक उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन संकुल समन्वयक जगमोहन, जी. मलेश ने किया। बच्चों के द्वारा बनाये गये मॉडल, सृजनात्मक लेखन एवं पठन, गणित कौशल के प्रस्तुतीकरण पर अधिकारियों ने संतोष जाहिर करते हुए प्रोत्साहित कर जिला स्तर की प्रतियोगिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया।

    विकासखण्ड स्तर पर आयोजित इस प्रतियोगिता में सृजनात्मक लेखन कौशल की विधा में संकुल केन्द्र कोण्टा-1 के स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कोण्टा की छात्रा कु. वेट्टी सानिया ने प्रथम एवं संकुल केन्द्र कोण्टा के शासकीय कन्या माध्यमिक शाला अंग्रेजी माध्यम कोण्टा की छात्रा कु. इस्मिता राय ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

    विज्ञान प्रोजेक्ट प्रदर्शन की विधा में संकुल केन्द्र कोण्टा के स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कोण्टा के छात्र दिवाकर यादव ने प्रथम एवं संकुल केन्द्र कोण्टा के शासकीय कन्या माध्यमिक शाला अंग्रेजी माध्यम कोण्टा के छात्र यश मण्डल ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

    पठन कौशल की विधा में संकुल केन्द्र पेण्टा के कन्या आश्रम नागलगुण्डा के विद्यार्थी कु. शेख जास्मिन ने प्रथम एवं कु. मड़कम कविता ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। गणित कौशल की विधा में संकुल केन्द्र कोण्टा-1 के स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कोण्टा के विद्यार्थी निखिल कुमार प्रथम एवं तरुण सलवम ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

    सामाजिक विज्ञान प्रोजेक्ट फाईल की विधा में संकुल कोण्टा के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय कोण्टा की छात्रा कु. खुशी मण्डल ने प्रथम एवं शासकीय कन्या माध्यमिक शाला अंग्रेजी माध्यम कोण्टा की छात्रा कु. शिवानी नाग ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। सभी विजयी प्रतिभागियों को विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी के द्वारा पुरस्कार वितरण किया गया।

     

    रायपुर /शौर्यपथ/

    राज्य स्तर पर 18 छात्र-छात्राओं का चयन

    राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित ऑनलाइन कला उत्सव में छत्तीसगढ़ के दो प्रतिभागियों ने आज एकलवादन शास्त्रीय संगीत में तबलावादन प्रस्तुत कर देशवासियों का मन मोह लिया। रायपुर के जे.एन. पाण्डेय स्कूल के जयंत चौहान और जांजगीर चांपा जिले से साधना साहू ने यह प्रस्तुति दी। इस अवसर पर समग्र शिक्षा अभियान के प्रबंध संचालक  नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने जयंत चौहान और साधना साहू को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा विभाग के  अजय पिल्ले,  प्रशांत पाण्डेय, नीलम कुशवाहा,  शैलेन्द्र वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के कला एवं सौन्दर्य बोध विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर के ऑनलाइन कला उत्सव का आयोजन 01 से 6 जनवरी तक किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग के समग्र शिक्षा अभियान की ओर से दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम साईंस कॉलेज के मंच से ऑनलाइन प्रस्तुति दी जा रही है। एक जनवरी को केपीएस भिलाई स्कूल की कुमारी अनुपमा बेनर्जी और पेण्ड्रा रोड की कृष्णम शुक्ला ने एकल गायन शास्त्रीय संगीत प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रतियोगिता में राज्य के 18 छात्र-छात्राओं का राज्य स्तर पर चयन किया गया। इन विधाओं में गायन, वादन, पारंपरिक लोक संगीत, नृत्य, दृश्य कला प्रिंटिंग, मूर्तिकला, स्थानीय खेल एवं खिलौने सहित कुल 9 प्रकार की विधाओं में प्रत्येक विधा से एक बालक और एक बालिका को मिलाकर 18 छात्र-छात्राओं का चयन प्रदेश स्तर पर किया गया।

    इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ से कुमारी दिव्या महंत,  भूपेश देवांगन, कु.रूमा,  उपेन्द्र यादव, कुं. परिधि गजेन्द्र, दुर्गा प्रसाद, कु. भूमिका, डोमेश पाल, कु. तुलिका बनर्जी, विवेक राजवाड़े, कु. अनिता यादव,  ताम्रध्वज साहू, कु. सलमिता एक्का,  चेतन डिगरे अपनी प्रस्तुति देंगे।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    राज्यपाल  अनुसुईया उइके से राजभवन में गायत्री शक्तिपीठ हरिद्वार के प्रमुख एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पण्डया ने मुलाकात की। राज्यपाल ने डॉ. पण्डया का श्रीगणेश जी की प्रतिमा भेंटकर, शाल से स्वागत एवं सम्मान किया। इसके साथ ही अन्य उपस्थित प्रमुखों का भी शॉल से सम्मान किया।

    इस दौरान गायत्री शक्तिपीठ हरिद्वार द्वारा प्रदेश एवं देश में चलाए जा रहे जन जागृति एवं समाज सुधार के कार्यों पर चर्चा हुई एवं युग निर्माण योजना की गतिविधियों पर चर्चा की। राज्यपाल को डॉ. पण्डया द्वारा हरिद्वार आश्रम आने का आमंत्रण भी दिया गया। इस अवसर पर दुर्ग सांसद  विजय बघेल,  सुखदेव निर्मलकर, जोन प्रभारी शांतिकुंज  मोहितराम गुरूवंश उपस्थित थे।

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