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रायपुर /शौर्यपथ/
हाथकरघा से जुड़े बुनकर अपनी जिंदगी के ताने-बाने तो बुन ही रहे हैं। इसी तारतम्य में टाई डाई साड़ियों की बुनाई करके संजय की जिंदगी भी खुशहाल हो गई है। यह कहानी महासमुंद जिले के सरायपाली तहसील के ग्राम सिंघोड़ा निवासी श्री संजय मेहेर की है। जो बचपन से ही अपने परंपरागत व्यवसाय बुनाई कार्य कर रहे हैं। उनके द्वारा तैयार की गई मयूरी साड़ी की बाजार में बड़ी अच्छी मांग है। इस साड़ी की विशेषता यह है कि साड़ी के किनारे में डाबी डिजाईन, पल्लू में फूल और साड़ी में जीव-जंतुओं की आकृति को डिजाईन देकर दो दिन में साड़ी तैयार की जाती है। इसकी बुनाई से उन्हें 1200 रूपए की बुनाई मजदूरी मिलती है।
उन्होंने बताया कि उनके पिताजी और दादा जी के समय से दो साड़ियों की बुनाई कर उसे गांव-गांव में जाकर बेचा करते थे। इससे उन्हें 500 से 1000 तक की आय होती थी, जिससे उनके पूरे परिवार का बड़ी मुश्किल से खर्च चलता था। श्री संजय ने बताया कि आज वे विभिन्न प्रकार की साड़ियों की डिजाईन जैसे- पेपर, महाली, बाबता, डिजाईन की टाई डाई साड़ियों की बुनाई कर रहे हैं। इन साड़ियों की बुनाई से प्रति साड़ी ढाई से तीन हजार रूपए तक की बुनाई मजदूरी मिलती है, जिसके कारण आज वे अपने एक पुत्र और दो पुत्री की पढ़ाई-लिखाई और अपने परिवार का गुजारा बुनाई कार्य से हाने वाले आमदनी से बड़ी आसानी से कर रहे हैं। उनके पास आज 4 एकड़ कृषि योग्य भूमि, मोटर सायकल और उनका खुद का पक्का मकान है, यह सब बुनाई कार्य से हुई आमदनी से ही संभव हुआ है। श्री संजय मेहेर ने बुनकर समिति में 2010-11 से सदस्यता ग्रहण कर विभिन्न डिजाइनों की साड़ियों की बुनाई कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे विगत 40 वर्षों से उड़िया टाई डाई साड़ी का बुनाई कार्य कर रहे है। आज उनके द्वारा 1000 से 10,000 रूपए तक की टाई डाई सम्बलपुरी साड़ी तैयार की जाती है। उन्होंने बताया कि ग्रामोद्योग विभाग के वरिष्ट अधिकारियों द्वारा उन्हें छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों में ओडिसा प्रांत से संबंधित पैटर्न के वस्त्र का प्रचलन है, इन पैटर्न की साड़ियों के उत्पादन करने के निर्देश प्राप्त हुए थे। जिसके तहत विरेन्द्र बहादुर बुनकर सहकारी समिति मर्यादित सलडीह के बुनकर सदस्यों द्वारा कादम्बनी साड़ी तैयार कर प्रस्तुत किया गया। जिसे बिलासा हैण्डलूम में बिक्री हो रही है। इससे बुनकरों को उनकी आय में आर्थिक बढ़ोत्तरी हो रही है।
263 करोड़ की लागत से सिद्ध बाबा जलाशय के निर्माण होगा
समाज सुधारक सावित्री बाई फूले के व्यक्तित्व का संक्षिप्त विवरण
पाठ्यक्रम में होगा शामिल
सामाजिक भवन हेतु 50 लाख रूपए की घोषणा की
गंडई में हाई-टेक सब्जी मण्डी एवं हाई-टेक नर्सरी के निर्माण की घोषणा की
साल्हेवारा में तत्काल तहसीलदार पदस्थापना के निर्देश
छुईखदान के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति,
ब्लड बैंक, हमर लैब, सोनाग्राफी मशीन स्थापित किए जाने की घोषणा
रायपुर /शौर्यपथ/
साल्हेवारा में तत्काल तहसीलदार पदस्थापना के निर्देश
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज राजनांदगांव जिले के गण्डई में समाज सुधारक सावित्री बाई फुले जयंती एवं सम्मान समारोह, मां भगवती शाकम्भरी पूजा-अर्चना कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री बघेल ने इस अवसर पर छुईखदान एवं गण्डई क्षेत्र को 58 करोड़ 89 लाख रूपए के विकास कार्यों की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने छुईखदान एवं गण्डई में धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर का भी शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री बघेल ने इस अवसर पर सावित्रीबाई एवं ज्योतिबा फुले के सामाजिक कार्यों का उल्लेख किया और कहा कि मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में मुझे ज्योतिबा फुले सम्मान का मिलना है। सावित्रीबाई एवं ज्योतिबा फुले का योगदान समाजोत्थान में कभी नहीं भुलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सरकार मजदूर, किसान और हर वर्ग की सरकार है। हमारी सभी योजनाएं जनहित और आम जन की सुविधा और उन्हें अच्छी व्यवस्था देने के लिए ही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी मौजूद लोगों को नए साल की बधाई दी। कार्यक्रम में कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे, खाद्य मंत्री एवं राजनांदगांव जिले के प्रभारी मंत्री अमरजीत भगत, मध्यप्रदेश के लांजी-किरनापुर की विधायक हिना कांवरे विशेष रूप से उपस्थित थीं।
मुख्यमंत्री बघेल ने कार्यक्रम में गंडई में हाई-टेक सब्जी मण्डी
मुख्यमंत्री बघेल ने कार्यक्रम में गंडई में हाई-टेक सब्जी मण्डी, गंडई में उद्यानिकी हाईटेक नर्सरी, मरार समाज के लिए सावत्री बाई फूले के नाम पर एक एकड़ भूमि, सामाजिक भवन निर्माण के लिए 50 लाख रूपए स्वीकृत किए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने 263 करोड़ रूपए की लागत से सिद्ध बाबा जलाशय का निर्माण कराए जाने की भी स्वीकृति दी। इस जलाशय के निर्माण से 34 गांवों के किसानों को लगभग 2500 हेक्टेयर में सिंचाई के लिए जलापूर्ति होगी। मुख्यमंत्री बघेल ने इस मौके पर प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में सावित्री बाई फूले की फोटो लगाने एवं उनके व्यक्तित्व का संक्षिप्त विवरण पाठ्यक्रम में शामिल करने, छुईखदान-गण्डई क्षेत्र में भी कोदो-कुटकी की समर्थन मूल्य पर खरीदी की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने टिकरापारा-खैरागढ़ मार्ग में एवं जालबांधा-खैरागढ़ मार्ग में नैरो ब्रिज के निर्माण, ग्राम भुरभुंदी, लिमो एवं ढाबा हाई स्कूल भवन निर्माण तथा गंडई में 2 आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री बघेल ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र छुईखदान के भवन निर्माण कार्य का भूमि पूजन किया
मुख्यमंत्री बघेल ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र छुईखदान के भवन निर्माण कार्य का भूमि पूजन किया और कहा कि यहां स्त्री एवं बाल रोग विशेषज्ञ की शीघ्र नियुक्ति एवं विभिन्न प्रकार के टेस्ट के लिए हमर लैब, ब्लड बैंक, सोनोग्राफी मशीन भी स्थापित की जाएगी। उन्होंने गंडई नगर पंचायत में बस स्टैण्ड एवं यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण कराए जाने तथा खैरागढ़ एवं छुईखदान विकासखण्ड में पी.एम. आवास योजना के तहत स्वीकृत आवास की बकाया राशि शीघ्र दिए जाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में मांग अनुसार निर्माण कार्य हेतु 10 करोड़ रूपये, छुईखदान एवं गण्डई नगर पंचायत को विकास कार्य के लिए 3-3 करोड़ रूपए की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने साल्हेवारा अंचल के लोगों की सहूलियत के लिए कल 4 जनवरी से उप-तहसील साल्हेवारा में तहसीलदार पदस्थ किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नगर पंचायत गण्डई के वार्ड क्रमांक-7 में 25 लाख 3 हजार रूपए की लागत
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नगर पंचायत गण्डई के वार्ड क्रमांक-7 में 25 लाख 3 हजार रूपए की लागत से पौनी-पसारी योजना के तहत निर्मित अधोसंरचना तथा छुईखदान ब्लॉक के ग्राम खैरबना में 77.23 लाख रूपए की लागत से निर्मित शासकीय हाई स्कूल भवन का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री बघेल ने सुगम सड़क योजना के अंतर्गत निर्मित पहुंच मार्गों का भी लोकार्पण किया, जिसमें 19.99 लाख रूपए की लागत से गण्डई कन्या हायर सेकेण्डरी स्कूल भवन पहुंच मार्ग, 19.99 लाख रूपए की लागत से हाई स्कूल भवन घिरघोली एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल भवन जंगलपुर के लिए निर्मित पहुंच मार्ग, 10 लाख रूपए की लागत से हाई स्कूल भवन कुम्हरवाड़ा पहुंच मार्ग, 15.49 लाख रूपए की लागत से निर्मित हाई स्कूल भवन घोघा पहुंच मार्ग, 19.84 लाख रूपए की लागत से निर्मित माध्यमिक शाला भवन छुईखदान पहुंचमार्ग, 11.36 लाख रूपए की लागत से बने गण्डई थाना भवन पहुंच मार्ग, 19.94 लाख रूपए की लागत से सामुदायिक केन्द्र गण्डई में पहुंच मार्ग तथा 19.55 लाख रूपए की लागत से खैरबना हाई स्कूल भवन एवं साल्हेकसा में पशु औषधालय तक निर्मित पहुंच मार्ग शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर गण्डई एवं छुईखदान क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार हेतु
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर गण्डई एवं छुईखदान क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार हेतु 5 करोड़ रूपए की लागत वाले कार्यों का भूमिपूजन किया। जिसमें 2.50 करोड़ की लागत से 30 बिस्तर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन निर्माण, छुईखदान ग्राम लक्ष्मणपुर, 74.56 लाख रूपए की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र छुईखदान एवं गण्डई में 10-10 बिस्तर वाले आईसोलेशन वार्ड का निर्माण, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पैलीमेटा में 28 लाख रूपए की लागत से निर्मित होने वाले 2 नग एच टाईप स्टाफ क्वाटर, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र घिरघोली में 90 लाख रूपए की लागत से बनने वाले 2-2 नग एच एवं जी टाईप क्वाटर तथा ग्राम धोधा एवं कोपरो में 55.46 लाख रूपए की लागत से बनने वाले उप स्वास्थ्य केन्द्र भवन का निर्माण शामिल है। मुख्यमंत्री बघेल ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत खैरागढ़ ब्लॉक के ग्राम कुकुरमुड़ा में एक करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले हाईटेक उद्यान नर्सरी की भी आधारशिला रखी। जल जीवन मिशन के तहत छुईखदान गंडई क्षेत्र के 66 गांवों में 50 करोड़ 41 लाख रूपए की लागत से निर्मित होने वाली नल जल प्रदाय योजनाओं का भी भूमिपूजन किया।
इस अवसर पर राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष जितेन्द्र मुदलियार
इस अवसर पर राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष जितेन्द्र मुदलियार, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष नवाज खान, शाकम्भरी बोर्ड के अध्यक्ष रामकुमार पटेल, आईजी दुर्ग संभाग ओपी पॉल, कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा, समाज सेवी पदम कोठारी सहित टिकेश्वरी पटेल, सुखदेव पटेल, विजय पाटिल, देवचरण पटेल, राजेन्द्र नायक, आत्माराम पटेल, पतिराम पटेल, बरतराम पटेल, गजेन्द्र ठाकुर एवं जनसामान्य उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
छत्तीसगढ़ पुलिस में मैदानी स्तर पर बड़ा फेरबदल हुआ है। सरकार ने भारतीय पुलिस सेवा के 9 अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली हैं। इनमें से 7 जिलों के पुलिस अधीक्षक भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल 6ठीं वाहिनी के सेनानी और मुख्यमंत्री सुरक्षा के SP भी इस फेरबदल की जद में आए हैं
रायपुर /शौर्यपथ/
स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में काेरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं। इसलिए यह मानकर चलें कि तीसरी लहर आ चुकी है। सिंहदेव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पत्रकारों से बातचीत में यह बातें कहीं। स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने कहा कि कोरोना विदेशों से ही आया है।
ओमिक्राॅन भी विदेशों से ही आ रहा है। बाहर से आने वालों पर अभी प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो यहां के बाॅर्डर पर रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं है, लेकिन बाॅर्डर पर चौकसी और जांच बढ़ाने की जरूरत है ताकि इसके फैलाव को रोका जा सके। सिंहदेव ने कहा कि ओमिक्रॉन का एक भी मरीज अभी तक छत्तीसगढ़ में नहीं मिला है, लेकिन यहां यह सुनामी की तरह आएगी। क्योंकि ओमिक्राॅन तेजी से फैलता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह जितनी तेजी से बढ़ेगा उतनी ही तेजी से उतर भी जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में कोरोना की रफ्तार राेकने के लिए हमे कड़े फैसले लेने होंगे। यदि पॉजीटिविटी दर तीन प्रतिशत से ज्यादा होती है तो स्कूल, कॉलेज, जिम और सिनेमा को लेकर फैसला लिया जा सकता है। वैसे वर्तमान में रायपुर में ये दर 6 फीसदी तथा दुर्ग जिले में चार फीसदी है। यदि यह प्रदेश में 10 फीसदी तक हुआ तो लॉकडाउन ही विकल्प होगा। हालांकि सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश में हमारे पास इलाज की पर्याप्त व्यवस्था है।
रायपुर /शौर्यपथ/
दूसरी लहर के पीक के सात माह बाद सोमवार को छत्तीसगढ़ और रायपुर में कोरोना विस्फोट जैसे हालात बन गए हैं। प्रदेश में एक दिन में 698 और राजधानी में 222 केस मिले हैं। रायपुर में पिछले साल 25 मई को एक दिन में 209 केस मिले थे, इसके पूरे 224 दिन बाद शहर में इतने केस मिले। राजधानी के आईआईटी सेजबहार हास्टल में 48 छात्र-स्टाफ पाजिटिव निकले हैं। इसी तरह, सुकमा में 38 जवान एक साथ पाॅजिटिव पाए गए हैं। हालात के मद्देनजर सीएम भूपेश बघेल ने सोमवार को दोपहर प्रदेश के सभी मंत्रियों और आला अफसरों की आपात बैठक बुला ली।
बैठक के बाद सभी जिलों को अलर्ट कर दिया गया है। सीएम समेत यहां के डाक्टरों ने इसे कोरोना की तीसरी लहर की दस्तक करार दिया है। प्रदेश में संक्रमण ओमिक्रान के फैलाव जैसा है, हालांकि अब तक यहां से भेजे गए किसी सैंपल में नए वैरिएंट की पुष्टि नहीं हुई है। जिस तरह दुनियाभर में अभी 15 से 30 साल की उम्र के बच्चों और वयस्क में अभी केस ज्यादा निकल रहे हैं, वैसी ही स्थिति यहां भी है। राजधानी में केवल 8 दिन में 37 गुना रफ्तार से केस बढ़े हैं। 27 दिसंबर को जहां 6 केस दर्ज किए थे। वो केवल 8 दिन में बढ़कर 222 नए केस पर आ गए हैं।
अगर केवल चार दिन की स्थिति का आंकलन करें तो 31 दिसंबर को शहर में 51 नए केस मिले थे, उसमें चौगुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रायपुर में एक हफ्ते में मिले 425 से अधिक केस में करीब 45 लोग ही ऐसे हैं जिनको दोनों डोज लगे हैं। अर्थात ज्यादातर केस अब उन लोगों में आ रहे हैं जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाया है। या केवल एक ही डोज लगाया है। बच्चों में अचानक केस बढ़ने के पीछे जानकार वैक्सीन नहीं लगवाने को अहम वजह बता रहे हैं। राजधानी में अब तक 60 से अधिक बच्चे कोरोना की जद में आ चुके हैं। इसमें भी 20 से अधिक बच्चे 15 साल से कम उम्र के हैं। इसमें एक साल और एक साल से कम उम्र के बच्चे भी हैं। जो परिवार के लोगों के संक्रमित होने के बाद पॉजिटिव निकले
एक्सपर्ट व्यू; ओमिक्रॉन और डेल्टा के मेल का डर ज्यादा
विशेषज्ञों के अनुसार डेल्टा और ओमिक्रॉन के मेल से बनने वाले मिक्स वैरिएंट म्यूटेशन का डर ज्यादा है। अधिकांश देशों में जहां तेजी से केस बढ़ रहे हैं, वहां ये ट्रेंड भी देखा जा रहा है। प्रदेश में हालांकि अभी तक ओमिक्रॉन का एक भी मामला सामने नहीं आया है। लिहाजा फिलहाल की स्थिति में दोनों वैरिएंट के कॉकटेल जैसी स्थिति नहीं है। डेल्टा वैरिएंट की वजह से प्रदेश में अधिकतम मौतें दर्ज हुई थी। हालांकि बाद में मौत के मामले धीरे धीरे घटते गए हैं। वैरिएंट पॉजिटिव आए ज्यादातर वैरिएंट को वर्णक्रम में नंबर के आधार पर रखा गया है।
इंफेक्टिविटी अपने फुल फॉर्म में आई, सचेत नहीं रहे तो पॉजिटिव होने के चांस
आंकड़े बता रहे हैं कि प्रदेश और रायपुर में अब इंफेक्टिविटी यानी संक्रमण के फैलने की रफ्तार अपने फुल फॉर्म में आ गई है। लगातार केस बढ़ रहे हैं ये ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा। स्थिति को भयावह होने से रोकने के लिए जरूरी है कि सब के सब सचेत हो जाएं। केस दो से तीन, तीन से चार, चार से पांच गुना रफ्तार से बढ़ रहे हैं। क्लिनिकल फीचर और आंकड़े यही बता रहे हैं कि तीसरी लहर अब आ चुकी है। देखने वाली बात यही होगी कि इसके पीक तक पहुंचने में कितने केस और बढ़ेंगे।
हरित राज्य के रूप में होगी ब्रांडिंग
मुख्यमंत्री ने हरित एवं टिकाऊ अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने पर दिया जोर
छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य जहां ग्रीन काउंसिल गठित की गई
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ ग्रीन काउंसिल की प्रथम बैठक
मुख्यमंत्री ने कहा- रि-जनरेटिव डेव्हलपमेंट अधिक प्रगतिशील अवधारणा
बैठक में जैविक उत्पादों के मार्केट लिंकेज, स्व-सहायता समूहों की क्षमता निर्माण, स्थानीय लोगों को जोड़कर आर्थिक मूलक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर हुआ विचार-विमर्श
रायपुर /शौर्यपथ/
छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य जहां ग्रीन काउंसिल गठित की गई
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में प्रदेश में रि-जनरेटिव डेव्हलपमेंट को गति प्रदान करने के लिए गठित छत्तीसगढ़ ग्रीन काउंसिल की प्रथम बैठक आयोजित की गई। ग्रीन काउंसिल के माध्यम से राज्य में हरित एवं टिकाऊ अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के प्रयास किए जाएंगे। रि-जनरेटिव डेव्हलपमेंट (पुनरूत्पादन विकास), सस्टेनेबल डेव्हलपमेंट से अधिक प्रगतिशील अवधारणा है जिसमें उपलब्ध संसाधनों के समुचित उपयोग के साथ-साथ संसाधनों की गुणवत्ता को बढ़ाने के साथ न्यू एज ग्रीन ईकोनॉमी के तहत लाईवलीहुड से स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि के लिए कार्य किया जाता है। मुख्यमंत्री ने बैठक में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की हरित राज्य के रूप में ब्रांडिंग, जैविक उत्पादों के मार्केट लिंकेज, प्रशिक्षण के माध्यम से स्व-सहायता समूहों की क्षमता निर्माण, जिलों की विशेषता के अनुसार विकास और स्थानीय निवासियों को जोड़कर आर्थिक मूलक गतिविधियों को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सम्भवतः देश का पहला राज्य है, जहां ग्रीन काउंसिल का गठन किया गया है।
हरित परिषद की बैठक में पर्यावरणीय मुद्दे को हल करने के लिए परिषद के दृष्टिकोण और मुख्य गतिविधियों को अंतिम रूप दिया गया। सरकार की पहल में स्थायी वन, औषधीय, हर्बल और अन्य उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए महिला स्व-सहायता समूहों की क्षमता का निर्माण, छत्तीसगढ़ में विशेषज्ञ कंपनियों को आमंत्रित करना और राज्य के भीतर कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम शुरू करना शामिल होगा।
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले तीन वर्षों के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्यावरण हितैषी अनेक योजनाएं जैसे सुराजी गांव योजना के अंतर्गत नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी योजना, गोधन न्याय योजना, गौठानों में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने का कार्य, फसल कटाई के बाद खेतो में बचे पैरे को एकत्र कर उसका मवेशियों के चारे के रूप में उपयोग को प्रोत्साहित करना, मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत वन क्षेत्रों में विस्तार के साथ-साथ स्थानीय वनवासियों की आय में वृद्धि, लघु वनोपजों में वेल्यू ऐडिशन प्रारंभ की गई हैं, जो पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण को गति दे रही हैं। इन योजनाओं की देश-विदेश में सराहना की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बैठक में कार्बन उत्सर्जन के संबंध में कहा कि छत्तीसगढ़ में वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से हम जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। पराली न जलाकर उसका उपयोग चारे के रूप में करने से कार्बन उत्सर्जन (प्रदूषण) में कमी ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ सिक्किम के बाद दूसरा जैविक राज्य साबित हो सकता है। श्री बघेल ने बैठक में कहा कि स्व-सहायता समूहों द्वारा जो उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, उनकी मार्केटिंग और प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ में विशेषज्ञ कम्पनियों की सेवाओं को लेने का प्रयास किया जाए। उन्होंने कहा कि बहुत से स्व-सहायता समूह बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। उन्हें प्रशिक्षण देकर नया कौशल सिखाया जा सकता है। उन्होंने इस परिप्रेक्ष्य में कहा कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से सोलर पैनल और जड़ी-बूटियों से वनौषधियां तैयार कराई जा सकती है। कोरबा में वनौषधियों के क्षेत्र में स्व-सहायता समूह अच्छा कार्य कर रहे हैं। वनौषधियों का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा बाजार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जिले में रि-जनरेटिव डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए एक नोडल अधिकारी तैनात किया जाए। जिलों की विशेषता का चिन्हांकन कर विशेषज्ञों की सहायता से वहां विकास के कार्य किए जाएं। उन्होंने छत्तीसगढ़ की ब्रांडिंग की दिशा में भी प्रयास करने के निर्देश दिए। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में इस तरह का प्रगतिशील कदम उठाने वाला छत्तीसगढ़ पहला राज्य होगा।
बैठक में वन मंत्री मोहम्मद अकबर, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव वन और उद्योग मनोज पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह, प्रबंध संचालक राज्य लघुवनोपज संघ संजय शुक्ला, सचिव वन प्रेमकुमार, स्वनीति इनीशिएटिव टीम के सदस्य तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
टीकाकरण की व्यवस्थाओं का लिया जायजा
छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष तेजकुंवर नेताम ने आज राजधानी रायपुर में स्कूलों का निरीक्षण कर 15 से 18 वर्ष तक के बच्चों के कोविड टीकाकरण की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। नेताम कालीबाड़ी चौक स्थित जे.आर.दानी शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और चौबे कॉलोनी स्थित मायाराम सुरजन शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंची और टीकाकरण के बाद छात्राओं का हालचाल जाना। नेताम ने समी पात्र किशोर-किशोरियों से कोविड टीका लगाने की अपील की है।
नेताम ने स्कूली बच्चों को टीकाकरण के बाद भी कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक दिशा-निर्देशों के पालन के बारे में समझाया। उन्होंने बच्चों को सुरक्षा केे लिए पूरे समय मास्क लगाने के लिए कहा। साथ ही उन्होंने छात्राओं से टीका लगाने के पहले भोजन या नाश्ता खाकर आने की बात कही। नेताम ने टीकाकरण की व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए स्कूलों के प्राचार्यों से टीकाकरण के दौरान बच्चों को ज्यादा देर खड़े न रखने और उनके बैठने की पर्याप्त व्यवस्था करने कहा है।
रायपुर /शौर्यपथ/
दृढ़ निश्चय के साथ कड़ी मेहनत से हर व्यक्ति सफलता हासिल सकता है, इसे रायगढ़ की पुसौर विकासखण्ड के ग्राम जकेला निवासी चन्द्रमा प्रधान ने सही साबित किया है। उन्होंने अपने हौसलों से एक सामान्य गृहणी से सफल उद्यमी बनने तक की राह तय की है। अपनी सफलता से वह अब अपने समान अनेक गृहणियों के लिए एक मिसाल बन गई हैं।
चन्द्रमा प्रधान घरेलू कामकाजी महिला थी, लेकिन उनके मन में कुछ करने की ललक और चाह हमेशा से थी। इसी बीच उन्हें खादी ग्रामोद्योग बोर्ड की योजनाओं के बारे में पता चला। उन्होंने जिला पंचायत रायगढ़ में जाकर खादी ग्रामोद्योग विभाग में संपर्क किया। विभाग में उन्हे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना की जानकारी दी गई। जानकारी मिलने पर चन्द्रमा में काम शुरू करने का उत्साह फिर से जागा और उन्होंने पेयजल संबंधी मिनरल वॉटर प्लांट के लिए वर्ष 2020-21 में ऑनलाईन आवेदन कर दिया। उन्हें सरकार से व्यवसाय के लिए 25 लाख रूपये का ऋण मिला। महिला होने के कारण उन्हे लगभग 35 प्रतिशत ग्रामोद्योग विभाग से अनुदान प्राप्त हुआ। आज उनका उद्योग प्रधान मिनरल वॉटर के नाम से स्थापित हो गया है। यहां सुचारू रूप से मिनरल वाटर बनाया जा रहा है।
प्रधान अपने मिनरल वॉटर प्लांट से पानी पाऊच, केन तैयार करती हैं, जिसका विक्रय आस-पास के क्षेत्र के साथ रायगढ़ जिला मुख्यालय, एनटीपीसी लारा एवं रायगढ़-ओड़िसा के आसपास के इलाकों में किया जा रहा है। उन्होंने उद्योग से अपने बेटों को स्वरोजगार के साथ स्थानीय लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराया है। मिनरल वॉटर प्लांट से उन्हें प्रति माह लगभग 25 से 30 हजार रूपये शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। इससे उनके सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। चन्द्रमा प्रधान ने उनके स्वावलंबी बनने में सहायता के लिए विभाग सहित सरकार का आभार व्यक्त किया है।
अच्छी आदतें /शौर्यपथ/
बढ़ती तकनीक और इंटरनेट पर निर्भरता के कारण हम लिखना और किताबें पढ़ना दोनों भूल चुके हैं। स्थिति ये है कि जब कुछ लिखने के लिए कलम उठाते हैं, तो हाथ कांपते हैं और ऐसी हस्तलिपि बनती है कि अपना ही लिखा हुआ पढ़ने में दिक़्क़त होती है। जब हम अच्छी आदतों और जीवनशैली की बात करते हैं, तो उसमें रोज़ लिखने और पढ़ने की आदत भी शामिल होनी चाहिए। अगर इस आदत को छोड़ चुके हैं, तो नए कैलेंडर वर्ष के साथ फिर से अपनाएं।
छोटे से शुरुआत करें
किसी नई चीज़ को अपनाने या दोबारा शुरु करने के लिए प्रयास छोटा होना चाहिए। कहने का अर्थ ये है कि दो-तीन पन्ने एक-साथ लिखने से बेहतर है कि शुरुआत एक उक्ति लिखने या एक पैराग्राफ लिखने से करें। फिर धीरे-धीरे इसे बढ़ाएं। अगर सिर्फ़ अभ्यास के लिए लिख रहे हैं, तो एक पैराग्राफ ही काफ़ी है। इसी तरह पढ़ने के लिए किताब के एक भाग से शुरुआत करें और रोज़ पढ़ें। धैर्य के साथ पढ़ने और लिखने से धीरे-धीरे क्षमता बढ़ेगी और आदत बन जाएगी।
हर छोटी-छोटी चीज़ लिखें
हाथ में मोबाइल और कम्प्यूटर होने के कारण हर छोटी-छोटी चीज़ें इसमें लिखने लगे हैं। बेहतर होगा कि इन्हें डायरी या कागज़ पर लिखें। अगर शॉपिंग की सूची बना रहे हैं, तो मोबाइल के नोट्स के बजाय काग़ज़ पर लिखें। घर में किस डिब्बे में कौन-सा सामान रखा है इसे किसी डायरी में लिखें। ख़ास रेसिपी या कोट्स इकट्ठा करने की आदत है या पसंद है, तो कम्प्यूटर में फोल्डर बनाने के बजाय डायरी में ही लिखें।
रोज़ की टू डू लिस्ट
डायरी लिखने की आदत डालें। अलग से एक डायरी बनाएं। रोज़ आपको कौन-कौन से काम पूरे करने हैं डायरी में लिखें। सुबह उठने के बाद डायरी में पूरे दिन किए जाने वाले कार्य लिखें और उन्हें पूरा करने की कोशिश करें। इसके अलावा आपने दिनभर क्या-क्या किया उसके लिए अलग से डायरी बना सकते हैं। यानी कि दिन पूरा होने के साथ आपने क्या-क्या किया, रोज़ की क्रियाओं को डायरी में लिखें। इससे लिखने की आदत बनी रहेगी।
अख़बार पढ़ना ज़रूरी है
अख़बार हर घर में आता है, तो रोज़ सुबह इसे पढ़कर दिन की शुरुआत करें। इससे ना केवल पढ़ने की आदत बनेगी बल्कि जानकारी भी बढ़ेगी। इसी तरह अपनी पसंद की किताब भी सुबह के वक़्त ही पढ़ें। अगर सुबह के वक़्त व्यस्त रहते हैं, तो रात में अख़बार और किताब पढ़ें। किताब बदल-बदल कर पढ़ें, जैसे कि एक किताब कहानी की पढ़ें, तो अगली निबंध की पढ़ सकते हैं। ऐसे ही विषय बदल-बदलकर पढ़ें, ताकि रुचि बनी रहे।
स्वसहायता समूह की चार महिलाएं कैंटीन चलाकर रोज एक हजार से 1200 रूपए कमा रहीं
रायपुर /शौर्यपथ/
मनरेगा और ‘बिहान’ ने दिया कमाई का जरिया
इंद्राणी, उर्मिला, सुनीता और सातोबाई की जिंदगी अब बदल चुकी है। मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) और ‘बिहान’ (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) ने उनका जीवन बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। मनरेगा और 14वें वित्त आयोग के अभिसरण से निर्मित वर्क-शेड में स्वसहायता समूह की ये महिलाएं ‘बिहान कैंटीन’ संचालित कर रोज लगभग एक हजार से 1200 रूपए की कमाई कर रही हैं।
ये चारों महिलाएं कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड के राजानवागांव के भारत माता स्वसहायता समूह की सदस्य हैं। इन महिलाओं ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित ग्राम संगठन से 30 हजार रूपए का कर्ज लेकर कैंटीन शुरू किया है। इनके हुनर और इनके बनाए नाश्ते के स्वाद से कैंटीन में भीड़ जुटने लगी है। प्रसिद्ध पर्यटन एवं धार्मिक स्थल भोरमदेव पहुंचने वाले पर्यटक, कैंटीन के पास स्थित भोरमदेव आजीविका केन्द्र में काम करने वाले तथा नजदीकी धान खरीदी केन्द्र में आने वाले किसानों की भीड़ वहां लगी रहती है। इससे इनकी आमदनी बढ़ रही है। अक्टूबर-2021 के आखिरी सप्ताह में शुरू हुई इस कैंटीन से इन महिलाओं ने अब तक लगभग 60 हजार रूपए का नाश्ता बेचा है। इसमें से 30 हजार रूपए बचाकर उन्होंने आमदनी में हिस्सेदारी के साथ ग्राम संगठन से लिया गया कर्ज लौटाना भी शुरू कर दिया है।
‘बिहान कैंटीन’ संचालित करने वाली भारत माता स्वसहायता समूह की सचिव उर्मिला ध्रुर्वे बताती हैं कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत उनके समूह का गठन हुआ है। समूह ने कैंटीन चलाने के लिए बर्तन और राशन खरीदने ग्राम संगठन से 30 हजार रूपए का ऋण लिया है। समूह की चार महिलाएं इस कैंटीन का संचालन कर रही हैं। उर्मिला आगे बताती है कि समूह की कोशिश रहती है कि कैंटीन में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को गरमा-गरम चाय-नाश्ता परोसा जाए। दिनभर की मेहनत के बाद चारों सदस्यों को 300-300 रूपए की आमदनी हो जाती है। मनरेगा और ‘बिहान’ के सहयोग से वे अब आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो रही हैं।
राजानवागांव के सरपंच गंगूराम धुर्वे स्व सहायता समूह के लिए मनरेगा अभिसरण से बने इस वर्क-शेड के बारे में बताते हैं कि ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर वर्ष 2020-21 में इसकी स्वीकृति मिली थी। भोरमदेव आजीविका केन्द्र से लगा यह शेड सात लाख आठ हजार रूपए की लागत से जुलाई-2021 में बनकर तैयार हुआ। गांव के मनरेगा श्रमिकों को इसके निर्माण के दौरान 335 मानव दिवस का रोजगार प्राप्त हुआ जिसके लिए उन्हें करीब 64 हजार रूपए का मजदूरी भुगतान किया गया। मनरेगा और 14वें वित्त आयोग के अभिसरण से निर्मित इस परिसम्पत्ति ने कैंटीन के रूप में महिलाओं को आजीविका का नया साधन दिया है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
