September 11, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

      दुर्ग / शौर्यपथ / माननीय उच्चतम न्यायालय, भारत द्वारा न्याय को आमजन तक सरल, सुलभ और सहभागी स्वरूप में पहुंचाने के उद्देश्य से “समाधान समारोह-2026” का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान के समापन चरण में 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को विशेष लोक अदालत आयोजित होगी, जिसमें उच्चतम न्यायालय में लंबित मामलों का आपसी सहमति, संवाद और सौहार्दपूर्ण वातावरण में त्वरित निराकरण किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पक्षकारों को प्रभावी, मानवीय और सहज न्याय उपलब्ध कराना है।

    जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने आम नागरिकों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों से अपील की है कि वे इस अभियान का अधिकतम लाभ उठाते हुए अपने लंबित प्रकरणों के समाधान के लिए सक्रिय भागीदारी करें। विशेष लोक अदालत में पक्षकार अपनी सुविधा अनुसार प्रत्यक्ष रूप से या वर्चुअल माध्यम से भी शामिल हो सकते हैं।

    इच्छुक पक्षकार और अधिवक्ता निर्धारित गूगल फॉर्म के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं, जिसका लिंक उच्चतम न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 मई 2026 निर्धारित की गई है। अधिक जानकारी और सहायता के लिए वन स्टॉप सेंटर (वार रूम) से 011-23112428 और 011-23112528 नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।

    जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाकर अपने मामलों का त्वरित, सुलभ और सौहार्दपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें।

    दुर्ग। नगर पालिक निगम दुर्ग इन दिनों भ्रष्टाचार के नए प्रतिमान गढ़ रहा है। निगम प्रशासन में 'शहरी सरकार' की मिलीभगत और ठेकेदारों की 'सेटिंग' का ऐसा खेल चल रहा…

    रायपुर: सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि आम जनता के लिए वह हथियार है जो प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। इसका एक जीवंत उदाहरण हाल ही में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग द्वारा पारित आदेशों में देखने को मिला है, जहाँ जनसेवक विकास तिवारी की अपीलों पर सुनवाई करते हुए आयोग ने कड़ी कार्रवाई की है।

    लापरवाही पर भारी दंड: 5 में से 4 मामलों में जुर्माना

    जनसेवक विकास तिवारी द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय (रायपुर) के विरुद्ध प्रस्तुत की गई पाँच द्वितीय अपीलों में से चार में आयोग ने कड़ा फैसला सुनाया है। सूचना देने में कोताही बरतने और नियमों की अनदेखी करने पर तत्कालीन जन सूचना अधिकारी (PIO) पर कुल 1 लाख 17 हजार 500 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है।

    तीन मामलों में अधिकतम जुर्माना: आयोग ने तीन अलग-अलग प्रकरणों (A/3579/2024, A/3577/2024, A/3575/2024, और A/3570/2024) में पीआईओ पर 25,000 - 25,000 रुपये का अधिकतम जुर्माना लगाया है।

    चौथे मामले में आंशिक दंड: एक अन्य प्रकरण (A/3574/2024) में 17,250 रुपये की शास्ति (Penalty) अधिरोपित की गई है।

    ऐतिहासिक आदेश: अधिकारी की जेब से वसूलने होंगे 2.56 लाख रुपये

    जुर्माने के अलावा, एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में आयोग ने सूचना के अधिकार के दुरुपयोग को रोकने और आवेदक को न्याय दिलाने के लिए बड़ा आदेश दिया है। इस मामले में कुल 1,26,000 पृष्ठों की विशाल जानकारी प्रदान करने के लिए लगने वाले 2,56,000 रुपये के शुल्क को जन सूचना अधिकारी से ही वसूलने के आदेश जारी किए गए हैं। यह आदेश उन अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो जानकारी देने में जानबूझकर देरी करते हैं या प्रक्रिया को जटिल बनाते हैं।

    "शोषितों और वंचितों का हथियार है RTI" - विकास तिवारी

    इस सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए जनसेवक विकास तिवारी ने कहा, "सूचना का अधिकार अधिनियम वंचितों, शोषितों और गरीबों को उनका हक दिलवाने के लिए एक अत्यंत मजबूत हथियार है। शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए हमारा यह संघर्ष जारी रहेगा। यह जीत आम जनता की जीत है जो व्यवस्था से जवाब मांगना चाहती है।"

    शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की उम्मीद

    विकास तिवारी द्वारा उठाए गए इस कदम की आम जनता और शिक्षाविदों द्वारा सराहना की जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर हुई इस बड़ी कार्रवाई से अन्य विभागों के लापरवाह अधिकारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कड़े फैसलों से सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ेगी और आम जनता को सूचना पाने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

    RTI कार्यकर्ता और जनसेवक विकास तिवारी के इस निरंतर प्रयास ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो कानून की मदद से किसी भी व्यवस्था को सुधारा जा सकता है।

    ✍️ विशेष लेख | विचार विमर्श

    डिजिटल क्रांति के इस दौर में, जहां आम नागरिक कुछ सौ रुपये में महीनेभर का अनलिमिटेड कॉल और इंटरनेट डेटा उपयोग कर रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के विधायकों को हर महीने ₹10,000 का टेलीफोन भत्ता दिया जाना एक गंभीर बहस का विषय बन गया है।

    ? पृष्ठभूमि क्या कहती है?

    सितंबर 2022 में हुए संशोधन के बाद विधायकों का कुल मासिक वेतन और भत्ता लगभग ₹1.60 लाख तक पहुंच गया। इसके साथ ही उन्हें ₹10,000 का टेलीफोन भत्ता, ₹55,000 का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और ₹15,000 का चिकित्सा भत्ता भी मिल रहा है।

    सरकार का तर्क है कि विधायकों को अपने क्षेत्र की जनता से लगातार संवाद बनाए रखना होता है, जिसके लिए यह भत्ता आवश्यक है।

    ? डिजिटल युग में सवाल

    आज भारत में टेलीकॉम सेवाएं बेहद सस्ती हो चुकी हैं।

    Reliance Jio, Airtel और Vi जैसी कंपनियां बेहद कम कीमत में अनलिमिटेड कॉलिंग और डेटा पैक उपलब्ध करा रही हैं।

    ऐसे में सवाल उठता है—

    ? जब आम व्यक्ति ₹300-₹500 में पूरा महीना निकाल सकता है, तो ₹10,000 का भत्ता किस आधार पर तय किया गया है?

    ⚖️ तर्क और विरोध

    समर्थन में तर्क:

    विधायक 24×7 जनता के संपर्क में रहते हैं

    सैकड़ों कॉल, मीटिंग और प्रशासनिक समन्वय की जरूरत

    कई बार निजी और सरकारी संचार अलग-अलग माध्यमों से करना पड़ता है

    विरोध में तर्क:

    डिजिटल सेवाएं पहले से सस्ती और सुलभ

    भत्ता वास्तविक खर्च से कहीं अधिक

    सरकारी खर्चों में अनावश्यक बढ़ोतरी

    ? नैतिक और आर्थिक प्रश्न

    यह मुद्दा सिर्फ एक भत्ते का नहीं, बल्कि सरकारी खर्चों की प्राथमिकता का भी है।

    जब सरकार अन्य क्षेत्रों में खर्च कम करने के लिए कदम उठा रही है—जैसे मंत्रालय की कैंटीन सब्सिडी खत्म करना—तो ऐसे भत्तों की समीक्षा भी उतनी ही जरूरी हो जाती है।

    ? निष्कर्ष: सुधार की जरूरत या व्यवस्था की मजबूरी?

    यह स्पष्ट है कि विधायकों को संचार के लिए संसाधन चाहिए, लेकिन क्या ₹10,000 प्रति माह की राशि आज के समय में उचित है, या इसे वास्तविक खर्च के आधार पर संशोधित किया जाना चाहिए?

    लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग यही कहती है कि हर खर्च—चाहे वह छोटा हो या बड़ा—जनहित के तराजू पर तौला जाना चाहिए।

    शौर्यपथ। मई महीने की शुरुआत कुछ राशियों के लिए बड़ी सफलता के द्वार खोलने वाली है, तो कुछ को सावधानी बरतने की सलाह दी जा…

    रायपुर । शौर्यपथ। 

    छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में संकल्प प्रस्तुत करते हुए प्रदेश की महिलाओं के प्रति अपनी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 'डबल इंजन' की सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सर्वांगीण सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह समर्पित है।

    लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी का नया युग

    मुख्यमंत्री ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह पहल लोकतांत्रिक संस्थाओं को न केवल सुदृढ़ करेगी, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में आधी आबादी की भूमिका को भी प्रभावी बनाएगी। उन्होंने कहा, "जब महिलाएं नीति निर्धारण में शामिल होंगी, तभी विकास अधिक समावेशी और संतुलित होगा।"

    सांस्कृतिक गौरव और प्रेरणा

    छत्तीसगढ़ की माटी को माता शबरी, माँ दंतेश्वरी और माँ महामाया की पावन भूमि बताते हुए श्री साय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी सृजन और शक्ति की आधारशिला है। उन्होंने अपने संबोधन में भक्त माता कर्मा, तीजन बाई, और उषा बारले जैसी विभूतियों के साथ-साथ रानी लक्ष्मीबाई और रानी दुर्गावती जैसी वीरांगनाओं का उल्लेख करते हुए उन्हें समाज का प्रेरणास्रोत बताया।

    वर्ष 2026: "महतारी गौरव वर्ष"

    मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026 को "महतारी गौरव वर्ष" के रूप में मनाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य मातृशक्ति के योगदान को रेखांकित करना और उनके आर्थिक व सामाजिक विकास को नई गति देना है।

    सशक्तिकरण के जमीनी प्रयास

    शासन की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:

    आर्थिक आत्मनिर्भरता: स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आजीविका से जोड़ा जा रहा है।

    सामाजिक सुरक्षा: आवास, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य योजनाओं के जरिए महिलाओं के जीवन स्तर में क्रांतिकारी बदलाव आया है।

    पंचायती राज में नेतृत्व: स्थानीय निकायों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र को निचले स्तर पर मजबूत कर रही है।

    अंत में मुख्यमंत्री ने आह्वान किया:

    "मातृशक्ति का सशक्तिकरण केवल एक नीतिगत विषय नहीं है, बल्कि यह एक समतामूलक और समृद्ध समाज के निर्माण का आधार है। हम एक ऐसी व्यवस्था बनाने के लिए संकल्पित हैं जहाँ हर महिला आत्मनिर्भर और गौरवान्वित महसूस करे।"

    रायपुर/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय कक्ष में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राजनांदगांव जिला क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की।

    इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रिपरिषद द्वारा आधुनिक खेल मैदान एवं अत्याधुनिक क्रिकेट अकादमी के निर्माण हेतु सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा के नाम दर्ज भूमि में से 5 एकड़ भूमि रियायती दर पर आबंटित करने के महत्वपूर्ण निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस पहल से जिले की खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगी और क्रिकेट के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित मांग पर मंत्री परिषद की बैठक में त्वरित निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से राजनांदगांव में अत्याधुनिक स्टेडियम का निर्माण संभव होगा, जिससे प्रदेश के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही, आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहां की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का बेहतर मंच मिलेगा।

    इस दौरान विधायक श्री धरम लाल कौशिक, विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, विधायक श्री ललित चंद्राकर, छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के महासचिव श्री विक्रम सिसोदिया, राजनांदगांव जिला क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव श्री योगेश बागड़ी सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

    रायपुर | विशेष रिपोर्ट

    छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी खर्चों में कटौती की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए मंत्रालय (महानदी भवन) की कैंटीन में दी जा रही सब्सिडी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इस फैसले के बाद अब मंत्रालय में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को सस्ता भोजन नहीं मिल सकेगा, बल्कि बाजार दरों के अनुसार भुगतान करना होगा।

    सरकार अब तक मंत्रालय स्थित कॉफी हाउस को हर महीने लगभग 18 लाख रुपये की सब्सिडी देती थी। इस व्यवस्था को समाप्त करने से राज्य सरकार को हर साल करोड़ों रुपये की बचत होने की संभावना जताई जा रही है।

    ☕ कॉफी हाउस पर लगा ताला

    इस निर्णय का सीधा असर मंत्रालय में संचालित कॉफी हाउस पर पड़ा है, जिसे अब बंद कर दिया गया है। वर्षों से कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए यह स्थान एक महत्वपूर्ण बैठक और विश्राम स्थल के रूप में जाना जाता था।

    ? निजी कंपनी संभालेगी जिम्मेदारी

    नई व्यवस्था के तहत अब मंत्रालय की कैंटीन का संचालन एक निजी कंपनी को सौंपा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी और वित्तीय बोझ भी कम होगा।

    ? बचत बनाम सुविधा का सवाल

    जहां एक ओर सरकार इस निर्णय को वित्तीय अनुशासन और बचत की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों के बीच इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई कर्मचारियों का कहना है कि सब्सिडी खत्म होने से उनकी दैनिक खर्चों में बढ़ोतरी होगी।

    ⚖️ संसद की तर्ज पर फैसला

    गौरतलब है कि यह निर्णय संसद की कैंटीन में पहले ही समाप्त की जा चुकी सब्सिडी के मॉडल से प्रेरित बताया जा रहा है, जहां इसी प्रकार सरकारी सहायता को बंद कर दिया गया था।

    ? निष्कर्ष:

    सरकार का यह कदम जहां एक ओर आर्थिक बचत की दिशा में प्रभावी माना जा रहा है, वहीं यह कर्मचारियों की सुविधाओं पर सीधा असर डालता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि निजी संचालन में कैंटीन की गुणवत्ता और कीमतों का संतुलन कैसे बनाए रखा जाता है।

    'अमर इंफ्र ाÓ से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे, भारतमाला परियोजना से कनेक्शन की जांच

    दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग जिले में गुरुवार तड़के प्रवर्तन निदेशालय (श्वष्ठ) की टीम ने तथाकथित समाजसेवी और 'अमर इंफ्राÓ के संचालक चतुर्भुज राठी के ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की। महेश कॉलोनी स्थित उनके निवास पर शुरू हुई इस कार्रवाई से पूरे इलाके में अचानक हलचल तेज हो गई।
    सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'भारतमाला परियोजनाÓ से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के इनपुट के आधार पर की जा रही है। अमर इंफ्रास्ट्रक्चर लंबे समय से सड़क निर्माण और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सक्रिय रही है, जिसके चलते जांच का दायरा व्यापक माना जा रहा है।
    कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। तथाकथित समाजसेवी राठी के निवास के बाहर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और परिसर में आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है। ईडी की टीम अंदर दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है, साथ ही डिजिटल साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है।
    इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। सत्ताधारी दल से जुड़े नेता के यहां हुई कार्रवाई को लेकर विभिन्न तरह के सियासी अर्थ निकाले जा रहे हैं। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम बता रहा है, वहीं स्थानीय स्तर पर इस घटनाक्रम ने चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। फिलहाल, ईडी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी और संभावित रूप से बड़े खुलासे भी सामने आ सकते हैं।

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए "सुशासन तिहार 2026" की शुरुआत आज से होने जा रही है। यह अभियान 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में चलाया जाएगा, जिसके तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जन समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जन शिकायतों का समयबद्ध निराकरण ही सुशासन की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आमजन को पारदर्शी, सरल और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    पहले चरण में लंबित मामलों के निराकरण पर जोर

    अभियान के पूर्व चरण में ही कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि 30 अप्रैल तक सभी लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता से समाधान सुनिश्चित करें। इसमें—
    * नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन जैसे राजस्व प्रकरण
    * मनरेगा के लंबित मजदूरी भुगतान
    * हितग्राहीमूलक योजनाओं के लंबित भुगतान
    * आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र
    * बिजली, ट्रांसफार्मर और पेयजल (हैंडपंप) समस्याएं के त्वरित निराकरण पर विशेष ध्यान रखा जाएगा, साथ ही पात्र हितग्राहियों को उज्ज्वला योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत और सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    प्रदेशभर में लगेंगे समाधान शिविर

    सुशासन तिहार के तहत 1 मई से 10 जून तक लगेंगे शिविर

    * ग्रामीण क्षेत्रों में 15–20 ग्राम पंचायतों के समूह में शिविर
    * शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर आधारित आयोजन
    * मौके पर ही आवेदन स्वीकार और लाभ वितरण
    * अधिकतम एक माह में आवेदनों का निराकरण

    शिविरों में शासन की योजनाओं के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जाएगी और प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन की स्थिति की जानकारी दी जाएगी।

    जनप्रतिनिधियों की भागीदारी और सीधा संवाद

    अभियान के दौरान मंत्रीगण, सांसद, विधायक, मुख्य सचिव और प्रभारी सचिव समय-समय पर शिविरों में पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे और आम नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे।

    ष्टरू करेंगे औचक निरीक्षण और समीक्षा

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा कर—

    * विकास कार्यों का औचक निरीक्षण
    * हितग्राहियों से सीधा फीडबैक
    * जिला स्तर पर समीक्षा बैठकें करेंगे

    निरीक्षण के बाद वे प्रेसवार्ता के माध्यम से जानकारी साझा करेंगे और नागरिकों व सामाजिक संगठनों से सुझाव भी लेंगे।

    व्यापक प्रचार से बनेगा जन आंदोलन

    जनसम्पर्क विभाग और जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। डिजिटल, प्रिंट और स्थानीय माध्यमों के जरिए अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाएगा

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