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नई दिल्ली, ।
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि रूस के बाद भारत व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) संचालित करने वाला दुनिया का दूसरा देश बनने की दिशा में अग्रसर है।
तमिलनाडु के कलपक्कम में स्वदेशी रूप से विकसित 500 मेगावॉट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को पहली बार ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल की, जो इस परियोजना की सफलता का अहम पड़ाव माना जा रहा है। इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा विकसित और भाविनी (BHAVINI) द्वारा निर्मित यह रिएक्टर भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत का संकेत देता है।
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की खासियत यह है कि यह जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक ईंधन पैदा करने की क्षमता रखता है। यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन पर आधारित यह तकनीक भारत को भविष्य में अपने विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता देती है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पूर्ण रूप से चालू होने के बाद भारत, रूस के बाद वाणिज्यिक स्तर पर FBR संचालित करने वाला दूसरा देश बन जाएगा। वर्तमान में रूस ही एकमात्र देश है जो इस तकनीक का व्यावसायिक उपयोग कर रहा है, जबकि अमेरिका, फ्रांस, जापान, जर्मनी और चीन जैसे देशों ने इसे प्रयोगात्मक स्तर तक ही सीमित रखा है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि यह उपलब्धि भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा लक्ष्यों के लिए बेहद अहम है। सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें फास्ट ब्रीडर तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने उभरती तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण के लिए स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा इस जरूरत को पूरा करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगी।
इसके साथ ही, “परमाणु मिशन” के तहत वर्ष 2033 तक 20,000 करोड़ रुपये के निवेश से 5 लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) स्थापित करने की योजना है। यह रिएक्टर उद्योगों, दूरदराज क्षेत्रों और सीमित ग्रिड कनेक्टिविटी वाले इलाकों में बिजली आपूर्ति के लिए उपयोगी साबित होंगे।
सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय स्रोतों और अन्य स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों का संतुलित मिश्रण ही वर्ष 2070 तक ‘नेट जीरो’ कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने का आधार बनेगा।
नई दिल्ली, ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक पड़ाव बताते हुए कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय विकास साझेदारी को अभूतपूर्व गति प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री के अनुसार, यह समझौता भारत और न्यूजीलैंड के बीच गहरे विश्वास, साझा मूल्यों और भविष्य की महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि FTA केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक और रणनीतिक सहयोग का नया अध्याय है।
उन्होंने कहा कि इस समझौते का सीधा लाभ किसानों, युवाओं, महिलाओं, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), कारीगरों, स्टार्टअप्स, छात्रों और नवाचार से जुड़े लोगों को मिलेगा। इससे नए अवसर पैदा होंगे और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और अधिक मजबूत होगा।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से न्यूजीलैंड की ओर से 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे कृषि, विनिर्माण, नवाचार और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। यह निवेश दोनों देशों के लिए अधिक समृद्ध और गतिशील भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने इसे “ऐतिहासिक क्षण” करार देते हुए विश्वास जताया कि यह समझौता आने वाले समय में भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
नई दिल्ली ।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कर्नाटक और केरल में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रगति की व्यापक समीक्षा की। यह समीक्षा मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त फीडबैक के आधार पर की गई, जिससे जमीनी स्थिति का आकलन कर सुधारात्मक कदमों पर जोर दिया जा सके।
नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और अजय टम्टा के साथ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा विभिन्न निर्माण कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में कर्नाटक के 7,926 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क और केरल की 61 परियोजनाओं के तहत 1,513 किलोमीटर मार्गों की गुणवत्ता और रखरखाव की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
गडकरी ने स्पष्ट किया कि राजमार्ग निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन, कड़े गुणवत्ता मानकों के पालन और आधुनिक तकनीकों के व्यापक उपयोग पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि टिकाऊ और सुरक्षित सड़क ढांचा ही देश की आर्थिक गति को मजबूती देता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीनी स्तर पर कार्यों में तेजी लाई जाए, गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाए तथा आधुनिक निर्माण पद्धतियों को अपनाकर यात्रा अनुभव को बेहतर बनाया जाए। साथ ही, प्रमुख राजमार्ग गलियारों में निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर भी फोकस करने को कहा गया।
आगामी मानसून को देखते हुए गडकरी ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं ताकि सड़क सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और यातायात का सुचारू प्रवाह बना रहे। इसके लिए व्यापक जल निकासी प्रबंधन, ढलान संरक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर बल दिया गया।
केंद्र सरकार का यह रुख स्पष्ट संकेत देता है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में अब गुणवत्ता, जवाबदेही और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और बेहतर यातायात अनुभव मिल सके।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति का गठन, राज्यों की सहमति से तैयार होगा वैज्ञानिक कृषि मॉडल
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राज्यों के लिए अलग कृषि रोडमैप तैयार करना देश की कृषि व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक गंभीर और दूरदर्शी पहल है, जिससे किसानों को स्थानीय संसाधनों के अनुरूप खेती की स्पष्ट दिशा मिलेगी।
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह रोडमैप राज्यों की सहमति और उनकी आवश्यकताओं के आधार पर तैयार किया जाएगा तथा इसे किसी भी राज्य पर थोपा नहीं जाएगा। प्रारंभिक स्तर पर Rajasthan, Andhra Pradesh और Uttar Pradesh ने इस पहल के लिए अपनी सहमति प्रदान की है।
इस कार्य में Indian Council of Agricultural Research (आईसीएआर) और कृषि मंत्रालय मिलकर राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे।
नए कृषि रोडमैप के तहत देश के 12 प्रमुख कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक राज्य के लिए उपयुक्त फसल प्रणाली तय की जाएगी।
इस योजना में मुख्य रूप से:
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि Purple Revolution (लैवेंडर खेती) की सफलता को देखते हुए अन्य राज्यों में भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार विशेष कृषि क्रांतियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि यह रोडमैप किसानों के लिए एक वैज्ञानिक दस्तावेज की तरह काम करेगा, जिसमें यह स्पष्ट होगा:
रोडमैप तैयार होने के बाद राज्यों की आर्थिक, तकनीकी और संरचनात्मक जरूरतों का विश्लेषण कर चरणबद्ध तरीके से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
देश की कृषि को आधुनिक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रत्येक राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप बनने से किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खेती का स्पष्ट मार्ग मिलेगा, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।
दुर्ग। सूरज आग उगल रहा है, पारा आसमान छू रहा है और दुर्ग शहर दुनिया के सबसे गर्म शहरों की फेहरिस्त में 12वें पायदान पर अपनी बदहाली दर्ज करा रहा है। ऐसे में जब इंसान और बेजुबान जानवर बूंद-बूंद पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे हैं, दुर्ग नगर निगम "विकास" का ऐसा चश्मा पहनकर बैठा है जिसे जनता का दर्द और मूक जानवरों की प्यास नजर नहीं आ रही।
देवनारायण की 'डंके की चोट' और खाली होता तालाब
शक्ति नगर वार्ड में इन दिनों एक अजीबोगरीब तमाशा चल रहा है। पीडब्ल्यूडी प्रभारी देवनारायण चंद्राकर अपने वार्ड में 45 लाख रुपये के 'सौंदर्यीकरण' की ऐसी जिद पाले बैठे हैं कि भीषण गर्मी में भी तालाब को खाली कराया जा रहा है। लाखों गैलन पानी बहाया जा रहा है ताकि कंक्रीट का विकास खड़ा हो सके।
पूर्व में हुई घटना:पिछले साल ब्लीचिंग पाउडर से हजारों मछलियों का दम घोंटने वाली "शहरी सरकार" इस बार बेजुबान जानवरों के हलक सुखाने की तैयारी में है। शायद पार्षद महोदय के लिए 45 लाख के टेंडर की चमक, उन प्यासे जानवरों की आंखों की नमी से ज्यादा कीमती है।
महापौर अलका बाघमार: 'चयनित' विकास और तकनीकी अंधापन
शहर की प्रथम नागरिक, महापौर अलका बाघमार अपनी उपलब्धियों के कसीदे तो पढ़ती हैं, लेकिन उनके 'तकनीकी ज्ञान' पर अब सवाल उठने लगे हैं। दुर्ग शायद दुनिया का इकलौता ऐसा शहर होगा जहाँ पेवर ब्लॉक के नीचे सीमेंट का बेस बनाया जा रहा है। यह तकनीकी रूप से कितना सही है, यह तो इंजीनियर जानें, लेकिन जनता इसे "भ्रष्टाचार की नई परत" कह रही है।
महापौर की अनदेखी के कुछ नमूने:
अधूरे उद्यान: दादा-दादी पार्क के सामने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा शुरू किया गया उद्यान 2 साल बाद भी अपनी बदहाली पर रो रहा है।
अधूरे नाले: वार्ड-43 कसारीडीह में नाले का काम अधूरा छोड़ दिया गया है, जो अब जनता के लिए जी का जंजाल बन चुका है।
गंदगी का साम्राज्य: सुराना कॉलेज के सामने कचरे का अंबार और सड़ांध मारता वातावरण महापौर की 'स्वच्छ दुर्ग' की दावों की पोल खोल रहा है।
आवारा पशु: सड़कों पर आवारा पशुओं की फौज खड़ी है, लेकिन निगम प्रशासन चैन की नींद सो रहा है।
क्या 'पटरी पार' ही पूरा दुर्ग है?
शहर के गलियारों में अब यह चर्चा आम है कि क्या महापौर के लिए विकास का मतलब सिर्फ 'पटरी पार' का क्षेत्र है? बाकी शहर को क्या गंदगी, बदबू और पानी की किल्लत के हवाले कर दिया गया है? भ्रष्टाचार चाहे बाजार विभाग हो या पीडब्ल्यूडी, अपनी चरम सीमा पर है।
पुरानी गलतियों की ढाल कब तक?
निगम की सत्ता में बैठे लोग अक्सर पुरानी सरकारों की कमियां गिनाकर अपनी खाल बचाने की कोशिश करते हैं। लेकिन हुजूर, याद रखिए कि जनता ने आपको उन्हीं कमियों को दूर करने के लिए चुना था, उन्हें दोहराने या उनसे भी बदतर हालात पैदा करने के लिए नहीं।
निष्कर्ष का कड़वा सच:
विकास जरूरी है, पर क्या वह विकास बेजुबानों की जान और जनता की प्यास की कीमत पर होना चाहिए? दुर्ग शहर में आज 'विकास की वीरांगना' के पोस्टर तो चमक रहे हैं, लेकिन उन पोस्टरों के पीछे छिपी प्यास और तड़प की आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। महापौर जी और पीडब्ल्यूडी प्रभारी जी, याद रखिएगा— कंक्रीट के जंगल प्यास नहीं बुझाते!
दुर्ग।
कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित राजस्व समीक्षा बैठक में लंबित प्रकरणों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि समय-सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा लापरवाही पर नोटिस जारी किया जाएगा।
बैठक में नामांतरण, बटवारा, सीमांकन, भू-अर्जन, स्वामित्व योजना, जाति प्रमाण पत्र सहित विभिन्न राजस्व मामलों की समीक्षा की गई। जिले में अविवादित नामांतरण के 16,646 प्रकरणों में से 15,385 का निराकरण (92.42%) किया जा चुका है, जबकि 1,237 मामले लंबित हैं और 115 प्रकरण समय-सीमा से बाहर हैं।
कोटवारी भूमि पर सख्ती:
कलेक्टर ने कोटवारी भूमि के अवैध विक्रय पर रोक लगाने के निर्देश दिए। 90 प्रकरणों में से अब तक 32 में सिविल वाद दायर हुआ है, जबकि 57 लंबित हैं। सभी तहसीलदारों को ग्रामवार खसरा सूची तैयार कर पंजीयन पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए।
सीमांकन प्रकरणों में देरी पर नाराजगी:
कुल 1,242 सीमांकन प्रकरणों में 1,080 का निराकरण हुआ है, जबकि 162 लंबित और 65 समय-सीमा से बाहर हैं। कलेक्टर ने अधिकारियों को फील्ड में जाकर प्राथमिकता से निराकरण के निर्देश दिए।
स्वामित्व योजना की प्रगति:
जिले के 381 गांवों में ड्रोन सर्वे पूर्ण, 379 में मैप तैयार, जबकि 106 गांवों में अंतिम प्रकाशन हो चुका है। शेष 273 गांवों में कार्य जारी है, जिसे शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
मैदानी निरीक्षण अनिवार्य:
नक्शा बटांकन और भू-अर्जन मुआवजा मामलों में तेजी लाने तहसीलदारों को फील्ड निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भारतमाला परियोजना सहित सभी लंबित मुआवजा प्रकरणों के शीघ्र भुगतान पर जोर दिया गया।
अन्य निर्देश:
जाति प्रमाण पत्र के लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण
तकनीकी कारणों से लंबित प्रकरणों के समाधान हेतु उच्च स्तर पर पत्राचार
भूमि आबंटन आवेदनों का प्राथमिकता से निपटारा
बैठक में एडीएम, अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर सहित जिले के सभी राजस्व अधिकारी उपस्थित रहे।
नई दिल्ली/गुवाहाटी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है, जिससे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर विवाद गहरा गया है।
क्या है पूरा विवाद?
5 अप्रैल 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने रिनिकी भुइयां शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें कथित तौर पर तीन देशों के पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने की बात शामिल थी। इन आरोपों को रिनिकी शर्मा ने पूरी तरह फर्जी बताते हुए गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी खेड़ा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को “नकली और मनगढ़ंत” बताया है।
हाईकोर्ट का रुख सख्त
24 अप्रैल 2026 को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि एक निजी व्यक्ति को इस तरह विवाद में घसीटना गंभीर मामला है।
अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अस्थायी राहत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी और खेड़ा को असम की अदालत जाने को कहा था। अब हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद खेड़ा ने गिरफ्तारी पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है।
आगे क्या?
अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि खेड़ा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिलती है या नहीं। यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संवैधानिक और आपराधिक कानून की कसौटी पर आ चुका है।
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा राज्यसभा के सभापति को राघव चड्ढा सहित 7 सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए याचिका सौंपे जाने का दावा सामने आया है। आरोप है कि संबंधित सांसदों ने दल-बदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) का उल्लंघन किया है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि या विश्वसनीय सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। विशेष रूप से राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने की बात भी स्थापित तथ्यों से मेल नहीं खाती, जिससे इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक और संवैधानिक जानकारों के अनुसार, यदि कोई सांसद स्वेच्छा से पार्टी छोड़ता है या व्हिप का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही संभव है। लेकिन इसके लिए स्पष्ट साक्ष्य, औपचारिक प्रक्रिया और सभापति का निर्णय आवश्यक होता है।
कानूनी स्थिति क्या कहती है?
दलबदल कानून के तहत, यदि किसी दल के 2/3 सांसद एक साथ विलय का दावा नहीं करते, तो व्यक्तिगत स्तर पर पार्टी बदलने पर अयोग्यता लागू हो सकती है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय राज्यसभा के सभापति द्वारा लिया जाता है, जिसे न्यायालय में चुनौती भी दी जा सकती है।
निष्कर्ष:
फिलहाल यह मामला दावों और अटकलों के स्तर पर है। जब तक आधिकारिक पुष्टि या दस्तावेज सामने नहीं आते, इसे सत्यापित खबर के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर में शनिवार सुबह एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। सुपेला थाना क्षेत्र अंतर्गत स्मृतिनगर चौकी के एचएससीएल कॉलोनी में एक महिला ने आरक्षक की पत्नी और उसके मासूम बेटे की चाकू से गोदकर हत्या कर दी। इस हमले में आरक्षक की दो बेटियां भी गंभीर रूप से घायल हो गईं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला सरोजनी भारद्वाज ने आरक्षक ललितेश यादव के घर में घुसकर उसकी पत्नी रीना यादव और 8 वर्षीय बेटे आदित्य यादव पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि हमले में बच्चे पर 14 से अधिक और महिला पर लगभग 18 वार किए गए, जिससे मौके पर ही दोनों की मौत हो गई।
हमले के दौरान घर का पूरा कमरा खून से सन गया था, जो घटना की भयावहता को दर्शाता है।
हमले के दौरान रीना यादव ने अपनी बेटियों को बचाने के लिए अंतिम समय तक संघर्ष किया। एक बेटी ने बाथरूम में छिपकर अपनी जान बचाई, जबकि दूसरी किसी तरह बाहर निकलकर पड़ोसियों को सूचना देने में सफल रही। दोनों बच्चियां घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती हैं, जहां एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।
घटना की सूचना मिलते ही पड़ोसी मौके पर पहुंचे और आरोपी महिला को पकड़ लिया। लोगों ने उसके हाथ से चाकू छीनकर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया है।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपी महिला और आरक्षक ललितेश यादव के बीच वर्ष 2024 में फेसबुक के माध्यम से संपर्क हुआ था। यह संबंध धीरे-धीरे व्यक्तिगत रिश्ते में बदल गया।
बताया जा रहा है कि आरक्षक ने आरोपी महिला को रायपुर में अलग मकान लेकर रखा था। हाल के दिनों में वह आशानगर क्षेत्र में किराए के मकान में रह रही थी। घटना से एक दिन पहले भी वह आरक्षक के घर पहुंची थी, लेकिन समझाकर वापस भेज दिया गया था।
24 अप्रैल को आरक्षक ललितेश की मैरिज एनिवर्सरी थी। परिवार को यूपी भेजने के लिए रिजर्वेशन भी कराया गया था। इसी बीच पत्नी रीना ने आरोपी महिला को घर आने की जानकारी दी। आरोपी घर पहुंची, जहां उसने खाना भी खाया।
बताया जाता है कि उसी दौरान अचानक उसने सो रहे बच्चे पर हमला कर दिया और फिर रीना यादव को भी निशाना बनाया। जब बेटियां बचाने आईं, तो उन पर भी हमला कर दिया।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में प्रेम संबंध, मानसिक तनाव और पारिवारिक विवाद को घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि:
“मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है, आरोपी से पूछताछ जारी है और जल्द ही पूरे घटनाक्रम का स्पष्ट खुलासा किया जाएगा।”
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
