August 09, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / जिला सहकारी बैंक सीइओ सुनील वर्मा से मिलकर सिंघोला सोसाइटी के अंतर्गत उपकेंद्र धान ऊपार्जन केंद्र रानीतराई सोसाइटी को पूर्ण गठन ग्राम पंचायत रानीतरई महाराजपुर भोथीपारकला, भोथीपारखुर्दू, पुराना उसडीबोड़, भोथीपार, नया धामनसरा, आलीखूंटा, महाराजपुर किसानों ने पूर्व जनपद सदस्य सचिव प्रदेश असंगठित कामगार मजदूर कांग्रेस के योगेन्द्र दास वैष्णव को ज्ञापन देकर किसानों की प्रमुख समस्या अवगत कराया। किसानों की मांग को लेकर तत्काल राज्य शासन के अधिकारियों से मुलाकात कर मांग किया। रानीतराई सोसाइटी को पूर्ण गठन में रानीतरई सोसाइटी को पूर्ण गठन में सोसाइटी के दर्जा दिया जाए। मांग को लेकर शासन के अधिकारियों से ज्ञापन सौंपा गया। जिला सहकारी बैंक के सीईओ वर्मा सुनील वर्मा से मुलाकात कर किसानों समस्या अवगत कराकर बात को प्रमुखता मांग को लेकर चर्चा कर किसानों हस्ताक्षर वाले ज्ञापन दिया गया तथा कोविड को देखते हुए श्री वैष्णव ने उप पंजीयक राजनांदगांव विपणन संघ के अधिकारी को भी किसानों की समस्या से अवगत कराया।
    प्रदेश के महामंत्री शाहिद भाई को एक प्रति ज्ञापन देकर किसान के निराकरण हेतु मांग रखा है तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री मुखिया भूपेश बघेल को एक प्रति अनुसूचित जाति प्राधिकरण अध्यक्ष भुनेश्वर बघेल को एक प्रति देकर किसानों की बात को अवगत करा कर समस्याओं के निराकरण के संबंध में पहल करने की तत्काल मांग किया गया। तथा आज दिनांक को आपत्ति दर्ज कराया गया तथा किसानों के हित में काम करने हेतु ज्ञापन देकर किसानों की हित में निर्णय लेने के लिए मांग रखा जाए। अध्यक्ष भुनेश्वर बघेल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दूरभाष पर सहकारिता मंत्री को अवगत कराया गया तथा पंजीयक को तत्काल कार्यवाही करने हेतु बात किया गया। आने वाले समय में महत्वपूर्ण किसानों के धान खरीदी को देखते हुए पहल किया जाए तथा पुनर्गठन सोसाइटी को अलग किया जाए। रानीतराई अलग से सिंघोला करके किसानों समस्या दूर होगा बात किया गया।
    इस अवसर पर सुरगी सोसाइटी के संचालक जीवन साहू, सुग्रीव साहू, महेश दिवाकर, नारद साहू, नारायण ठाकुर, क्षेत्रीय जनपद सदस्य रोशनी वैष्णव, सरपंच लोकेश गंग वीर राजेंद्र साहू निशा साहू, दिव्या हिरवानी तथा किसानों ने ज्ञापन सौंपा।

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दिया गया कि देश में निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम वर्ष 2009 से प्रभावशाली है और निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार नियम वर्ष 2010 से प्रभावशाली है। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार नियम वर्ष 2010 से लागू कर दिया, लेकिन इस कानून को प्रायवेट स्कूलों में ज्यादा और सरकारी स्कूलों में कम उपयोग किया जाता है, क्योंकि वर्ष 2010 से लेकर 2020 तक इस अधिनियम के अंतर्गत पात्र बच्चों को सिर्फ प्रायवेट स्कूलों में प्रवेश दिलाया जा रहा है और अब तक लगभग 2.85 लाख बच्चों को प्रवेश दिलाया जा चुका है। वहीं इस अधिनियम के अंतर्गत कितने पात्र बच्चों को सरकारी स्कूलों में भर्ती कराया गया, इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के पास नहीं है, जबकि इस कानून के अंतर्गत सर्वप्रथम पात्र बच्चों को सरकारी स्कूलों में फिर अनुदान प्राप्त प्रायवेट स्कूलों में और अंत में गैर सहायता प्राप्त प्रायवेट स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाना है, लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा विगत दस वर्षो में आरटीई कानून के अतंर्गत सर्वप्रथम पात्र बच्वों प्रायवेट स्कूलों में प्रवेश दिलाया जा रहा है और अब जब प्रायवेट स्कूल और पालकों के बीच ट्यूशन फीस को लेकर गतिरोध बढ़ते जा रहा है, तो प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग कह रहे है कि यदि प्रायवेट स्कूलों में पालकों को परेशानी हो रही है तो सरकारी स्कूल में आ जाए, जहां ऑनलाईन क्लासेस चल रही है।
    जरा सोचिए, पालक अपने बच्चों को प्रायवेट अंग्रेजी मिडियम स्कूल से निकाल कर सरकारी हिन्दी मिडियम स्कूल में भर्ती कराए, जहां टीचरों और संसाधन की भारी कमी है, यदि सरकारी स्कूल इतना अच्छा है तो फिर आरटीई के अंतर्गत विगत दस वर्षो में पात्र बच्चों को सरकारी स्कूल में प्रवेश क्यों नहीं कराया गया? क्यों 2.85 लाख बच्चों को प्रायवेट स्कूलों में प्रवेश दिलाया गया?
    प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग के इस गैर जिम्मेदार बयान का छत्तीसगढ पैरेंट्स एसोसियेशन घोर विरोध करता है। शिक्षा का अधिकार कानून का पहले सरकारी स्कूलों में कड़ाई से पालन कराया जाना चाहिए, जहां टीचरों और संसाधन के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति किया जा रहा है और मानदंडों, मानको और शर्तो की धाजियां उड़ाई जा रही है।
    पैरेंट्स एसोसिएशन के रायपुर जिला सचिव पनेश त्रिवेदी ने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार कानून का यदि कड़ाई से पालन कराया जाए तो आधी से अधिक स्कूलों में ताला लग जाएगा और ऐसे सरकारी स्कूलों में पालको को अपने बच्चों को पढ़ाने की नसीहत देने वाले अधिकारीयों की तत्काल छुट्टी कर दिया जाएगा।

    बिलासपुर / शौर्यपथ / बिलासपुर जिले के 17 राजस्व न्यायालयों में काम ढप्प और जनरल पेशी से डेट आगे बढा दी जाती है। किन्तु यह आधा सच है ऐसा देखा जा रहा है कि ऐसे प्रकरण जो व्हीआईपी दर्जा रखते हैं न केवल सूने जा रहे हैं बल्कि सामान्य गति के मुकाबले उन्हें तेजी से निपटाया जा रहा है. और इस तरीके से असल में जिसके पक्ष में व्हीआईपी का फोन नहीं आया है उसे निपटाने की तैयारी चल रही है .
    कुछ प्रकरणों पर तहसीलदार घर बैठे आदेश कर देते हैं एक तरफ बिलासपुर एसडीएम कुछ मामलों पर रोज सुनवाई पर आतुर हैं तो दूसरी ओर अपीलीय न्यायालय में ताला लटक रहा है ऐसे में जिस पक्ष के विरुद्ध आदेश होगा वह अपील करने कहां जाएगा और यही व्हीआईपी संस्कृति है सब जानते हैं कि आमतौर पर शासन अपने आदेश निर्देश जानबूझकर शुक्रवार को देते हैं जिससे शनिवार इतवार को अपीलीय न्यायालय से राहत ना मिले और व्हीआईपी संस्कृति का काम पूरा हो जाए कुछ इसी तरह का काम बिलासपुर एसडीएम कार्यालय में चल रहा है यह रोचक होगा कि वीआईपी प्रकरणों की लिस्ट पर नजर रखी जाए तब पता चलेगा कि इस प्रकरण का किस जनप्रतिनिधि ने दबाव बनाया.....( अजित कुमार की कलम से )

    बिलासपुर / शौर्यपथ / एक तरफ राज्य शासन ने जिले के निजी अस्पताल कोविड-19 का इलाज किस दर पर करेंगे कि घोषणा की है। इस गाइड लाइन के जारी होने के बाद निजी चिकित्सकों ने दावा किया कि हम तो इससे कम दर पर इलाज कर रहे है, दूसरी तरफ निजी अस्पतालों से जो खबर छन के आ रही है वह यह कहती है कि अस्पताल में कोविड-19 का इलाज नही मरीज से लूट हो रही है। राज्य सरकार की सूची के अनुसार सुपर स्पेसिलटी सुविधा के आधार पर जिले के अस्पतालों को तीन श्रेणी में रखा गया है, और उसी के आधार पर प्रति मरीज प्रति दिन की दर तय की गई है। इलाज की यह व्यवस्था 6200 से लेकर 17 हजार प्रति दिन तक है। राज्य सरकार ने अस्पतालों को एनएबीएच (राष्ट्रीय प्रत्यायन अस्पतालों का बोर्ड) से मान्यता प्राप्त और गैर मान्यता प्राप्त के बीच में बांटा है, किन्तु जिले के भीतर ग्रामीण क्षेत्रों को तो छोड़ दे शहर के भीतर भी कोई भी निजी अस्पताल अपने सूचना पटल पर अपने बारे में सूचनाएं नही देता।
    अस्पतालों की नजर से देखे तो जिला स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल चलाने की अनुमति भी नही वह भी स्वयं को सुपर स्पेसिलटी बोलता है, गली-गली मल्टी स्पेसिलटी अस्पताल खुल गए है। शहर के भीतर एक अस्पताल में तो चौपाटी खुल गई है, और अस्पताल बन्द हो चुका है किंतु प्रोटेक्शन एक्ट के लाभ पाने के लिए अस्पताल को चलता दिखाया जाता है।
    कोविड-19 ने सिटी स्कैन कर दिया मजा। कोई मरीज कोरोना पॉजिटिव है या नही यह जानने के लिए तीन टेस्ट ही पर्याप्त है किंतु चिकित्सको ने सिटी स्कैन का रास्ता भी खोल दिया। जिसकी प्रचलित दर 6-7 हजार के बीच है। सिम्स में विधायक शैलेश पांडेय ने 10 लाख रुपये दिया। एसईसीएल से भी लंबी फंडिंग हुई, किन्तु मेडिकल कॉलेज में आज तारीख तक सिटी स्कैन शुरू नही हुआ,और अब लंग्स में कोरोना का प्रभाव देखने सिटी स्कैन की पर्ची काटने का नया खेल शुरू हो गया है। कुल मिलाकर आम जनता या तो कोविड से मरे या बच जाए तो आर्थिक बर्बादी से ।

    दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा ‘‘मुख्यमंत्री बाल भविष्य योजना’’ के अंतर्गत संचालित उत्कृष्ठ संस्था प्रयास आवासीय विद्यालय, दुुर्ग में राज्य के सुदूर नक्सल प्रभावित जिले के विद्यार्थियों का कक्षा 11 वीं प्रवेष परीक्षा के माध्यम से प्रवेषित होकर अपने षिक्षा के स्तर में उन्नयन करते हुए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा जे.ई.ई. मेन-2020 मे उत्कृष्ठ प्रदर्षन किया है।
          विभाग की जिला प्रमुख श्रीमती प्रियंवदा रामटेके, सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, दुर्ग द्वारा जानकारी दिया गया कि इस वर्ष जे.ई.ई. मेन-2020 में 59 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिसमें 29 विद्यार्थियों ने एडवांस हेतु क्वालिफाई किया है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के 16 विद्यार्थी (भोजकुमार, देवेन्द्र कुमार, फलेन्द्र कुमार, गोकुल राम, हेमन्त कुमार, खिलेेष कुमार, निखिल देहारी, नोहेल कोर्राम, प्रकाष कुमार, पुष्पेन्द्र ठाकुर, राजीव ध्रुव, दिप्ती कोमिया, हरिष्मा मरकाम, करिष्मा, लीना एवं मनीषा) अनुसूचित जाति वर्ग के 05 विद्यार्थी (किषोर कुमार टंडन, मनीष कुमार, रूपेष, सचिन बंबोड़े एवं नेहा) अन्य पिछड़ा वर्ग के 07 विद्यार्थी (ऐष्वर्य कुमार, हरोष सोनवानी, हिरेष कुमार, नमेष नमन निषाद, पोषण कुमार वर्मा, निषा गुप्ता एवं प्रियंका) तथा अनारक्षित वर्ग के 01 विद्यार्थी (रवि कुमार विष्वकर्मा) है। इन विद्यार्थीयों में अधिकतर विद्यार्थियो के पालक कृषि/ दैनिक मजदूर किसान निम्न आय वर्ग के हैं। शासन द्वारा विद्यार्थियो को संस्था में हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया करवाकर उत्कृष्ठ षिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों के प्रतिभा को निखार कर भविष्य निर्माण करने का प्रयास किया जाता है।
    पिता-कृषि मजदूर बेटा बनेगा इंजिनियर
    बालोद जिले के डौण्डी लोहारा से फलेन्द्र कुमार, प्रयास आवसीय विद्यालय, दुर्ग के छात्र है। माता-पिता कृषि मजदूर है। जब माता पिता को पता चला कि मेरा बेटा एडवांस के लिए क्वालिफाई किया है, उनके आखों से खुषी के आंसू निकल आए। छात्र द्वारा मुबंई आई.आई.टी. से कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करके देष के निर्माण में योगदान करने की इच्छा व्यक्त की है।
    मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, अब बेटा बनेगा आई.आई.टी. से इंजिनियर
    महासमुंद जिले के बागबहरा ब्लाक के छात्र देवन्द्र कुमार जे.ई.ई. परीक्षा में अच्छा रैंक दृढ़ शक्ति से हासिल कर सफलता प्राप्त की। वह भी देष के उत्कृष्ठ आई.आई.टी. से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करना चाहता है। मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं पिता कृषि मजदूरी करते हैं।
    स्कूल के महौल से हुए मोटिवेट-जे.ई.ई. हेतु 8 घंटे रोजाना अध्ययन
    प्रयास आवासीय विद्यालय दुर्ग की छात्रा प्रियंका राजनांदगाॅव जिले के डोगरगढ़ ब्लाक की रहने वाली है। उसने बताया कि संस्था में पढ़ाई का अच्छा माहौल एवं षिक्षकों के मोटिवेषन से रोजाना 8 घंटे पढ़ाई कर एडवांस हेतु सफलता प्राप्त की। उसने कहा कि मैं आई.आई.टी. से पढ़ाई कर इंजीनियरिंग सेवा में जाना चाहती है।
    मेरे अरमानों की पूर्ति का स्तंभ है प्रयास, दुर्ग
    कुमारी नेहा जिला बालोद ब्लाॅक डौण्डी लोहारा की रहने वाली छात्रा ने भी एडवांस की परीक्षा की तैयारी कर आई.आई.टी. से बी.टेक करना चाहती है। उसके अनुसार मेरे अरमानों की पूर्ति इस संस्था में आने से सफल हो रही है। प्रयास संस्था भविष्य निर्माण का अच्छा प्लेटफार्म है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोडऩे के लिए विशेष प्रयास लगातार जारी हैं।बिहान योजना के तहत महिलाओं को रोजगार मूलक कार्य के रूप में वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया इस तरह इनको गांव में ही काम उपलब्ध कराया जा रहा है।राज्य सरकार की योजना नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी योजना से सुराजी गाँव की परिकल्पना साकार होती नजर आ रही है। स्व सहायता समूह की महिलाएं गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट खाद और नाडेप टैंकों में पारंपरिक खाद का निर्माण कर रही हैं।
    जिला पंचायत से मिली जानकारी के मुताबिक जिले भर के गौठानों में 1176 नाडेप एवं 1264 वर्मी कम्पोस्ट टैंक निर्मित किए गए हैं। दुर्ग जनपद पंचायत के 62 गौठानों में 543 नाडेप और 579 वर्मी कम्पोस्ट टैंक बने हैं जिनसे अब तक 7271 क्विंटल पारंपरिक कम्पोस्ट और43 क्विंटल केंचुआ खाद का उत्पादन किया है।इसी प्रकार जनपद पंचायत धमधा के 79 गौठानों में 274 नाडेप और 375 वर्मी कम्पोस्ट टैंक निर्मित किए गए हैं और की 581 नाडेप, 61 क्विंटल केंचुआ खाद का निर्माण किया गया है।
    वहीं जनपद पंचायत पाटन के 77 गौठानों में 359 नाडेप और 310 वर्मी कम्पोस्ट टैंकों में 750 क्विंटल नाडेप और 63 क्विंटल केंचुआ खाद का उत्पादन किया है। जिला पंचायत सीईओ श्री सच्चिदानंद आलोक ने बताया कि महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। गांव की स्व-सहायता समूह की महिलाएं जिसमें अध्यक्ष व अन्य महिलाएं पूरी तन्मयता से कार्यरत हैं। गौठान का संचालन स्व-सहायता समूह की महिलाएं ही कर रही है। गौवंश के लिए सभी तरह के इंतजाम किए गए है। गोबर खरीदी योजना के अंतर्गत महिला 2 रू किलो में गोबर खरीदकर गौठानों में जैविक खाद का निर्माण किया जा रहा है। जिसे शासन के निर्देशानुसार विक्रय किया जाएगा।
    जनपद पंचायत दुर्ग में ग्राम पंचायत आलबरस जय मां लक्ष्मी स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत विनायपुर में खुशी स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत मचान्दुर में लक्ष्मी स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत घुघसीडीह भारत माता स्व-सहायता समूह, चंदखुरी में सिंधुजा स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत ढाबा में दीप माला स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत उमरपोटी मां शेरावली स्व-सहायता समूह, जनपद पंचायत पाटन में ग्राम पंचायत अमलीडीह संगवारी स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत पाहंदा में प्रार्थना स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत ढौर में प्रगति स्व-सहायता समूह, जनपद पंचायत धमधा में ग्राम पंचायत देवरी, अम्बे स्व-सहायता समूह, पोटिया में जय माता दी स्व-सहायता समूह, खपरी(ग) जय शीतला स्व-सहायता समूह, घटियाखुर्द (खपरी ग) जय माहावीर स्व-सहायता समूह, द्वारा जैविक खाद निर्माण किया जा चुका है।
    गौठान गोबर और गांव से निकले कचरे से भी बनाएंगी जैविक खाद गौठान योजना के जरिये, गांव की महिलाओं ने साफ रखने के साथ कमाई का जरिया भी ढूंढ लिया है। गांव से निकलने वाला कचरे, अपशिष्ट पदार्थ और गौठान के गोबर से भी खाद बनाने की तैयारी की जा रही है। जिससे जैविक खाद भी बनेंगे और गांव भी स्वच्छ होंगे। महिलाओं को इस योजना से रोजगार का साधन मिल पाया है साथ ही महिलाएं अपने पैरों में खड़े होने का जज्बा भी दिखा रही हैं।

    -4 जोन में बांटा गया जिला, 40 स्टाफ नर्स संभाल रही जिम्मेदारी
    -कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, डिप्टी कलेक्टर प्रियंका वर्मा, दिव्या वैष्णव भी समय समय पर कर कॉल कर व्यवस्था का कर रहे रिव्यु
    -फीडबैक मिलते ही दिक्कत आने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र से भेजी जा रही टीम

       दुर्ग / शौर्यपथ / होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों के स्वास्थ्य पर नजर रखने शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय में होम आइसोलेशन कंट्रोल सेंटर बनाया गया है। यहां 40 स्टाफ नर्स लगातार कॉल कर लोगों से स्वास्थ्य का हाल पूछ रही हैं। ऑक्सीमीटर की रीडिंग पूछ रही है और तापमान भी पूछ रही हैं। किसी तरह की दिक्कत होने पर सुझाव दे रही हैं और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों से हेल्थ टीम भेजी जा रही है। डिप्टी कलेक्टर सुश्री दिव्या वैष्णव ने बताया कि यह टीम पाली में रात दिन काम कर रही है। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे के मार्गदर्शन में यह कार्य किया जा रहा है। कलेक्टर भी इस संबंध में मरीजों से बात करते हैं। उद्देश्य यह है कि घर में रहकर भी मरीज अपना मनोबल बनाये रखें। जब फोन आता है तो वे आश्वस्त हो जाते हैं। हम छोटी छोटी बारीकियां भी पूछते हैं जैसे कि आज भोजन में क्या खाया। हम उन्हें रीच प्रोटीन डाइट की सलाह देते हैं। खूब दाल खाएं, पनीर खाएं। बीमारी को दूर करने में प्रोटीन की बड़ी भूमिका होती है। मौसमी फलों की सलाह देते हैं। कॉलेज की प्राचार्य ने बताया कि 6 मरीजों ने बताया कि ऑक्सीजन लेवल थोड़ा कम हुआ है। हमने उन्हें तुरंत हॉस्पिटल रेफेर कर दिया।

          प्रभारी अधिकारी डिप्टी कलेक्टर प्रियंका वर्मा ने बताया कि जब पहली बार मरीज को जब कॉल किया जाता है तो उन्हें कहा जाता है कि यह नंबर सेव कर लें। यह होम आइसोलेशन सेंटर का नंबर है। दिक्कत हो तो तुरंत फोन करें। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा लाभ लोगों के मनोबल बढ़ाने में होता है। फोन आता है तो वे मनोवैज्ञानिक रूप से निश्चिंत हो जाते हैं। स्टाफ नर्स उनकी स्थिति के बारे में उन्हें बताती हैं कि आप बिल्कुल रिकवरी की ट्रैक पर हैं। डिप्टी कलेक्टर दिव्या वैष्णव ने बताया कि वे भी रोज 10 वीडियो कॉल करती हैं और लोगों से पूछती है। आक्सीमीटर में हमारे सामने आंकड़े दिखाते हैं और हम लोग कहते हैं कि आप बहुत जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे, बस होम आइसोलेशन के कोविड प्रोटोकॉल को फॉलो करें। उन्होंने बताया कि हमने जनप्रतिनिधियों को भी अपने प्रयासों में शामिल किया है। उनके माध्यम से पड़ोसियों से अपील की है कि होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों को ग्रोसरी की जरूरत हो तो उपलब्ध कराएं। किसी तरह की दवा की आवश्यकता होने पर हेल्थ की टीम वहां पहुंचकर इसकी व्यवस्था कर देती है। उल्लेखनीय है कि कालिंग के लिए और व्यवस्था देखने 4 जोन बनाये गए हैं। इनमें दुर्ग, भिलाई, भिलाई 3 और ग्रामीण क्षेत्र हैं। जिनके माध्यम से पूरे जिले को कवर किया जा रहा है। स्टाफ नर्स शकुंतला का कहना है कि यह अनुभव अद्भत है। रिकवर होते लोगों को सुनना बहुत अच्छा लगता है। हम उन्हें सलाह भी देते हैं। कॉल सेंटर की व्यवस्था बहुत उपयोगी साबित हुई है। होम आइसोलेशन में रह रहे केलाबाड़ी के आकाश ने बताया कि उनके पास प्रशासन की ओर से वीडियो कॉल आया। बहुत खुशी हुई कि इस तरह से हमारा ध्यान रखा जा रहा है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / सोमवार से जिला अस्पताल में फीवर सेंटर में 3 काउंटर आरम्भ हो जाएंगे। इस संबंध में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आज कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने पुनः जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। यहां वे कैसुअल्टी वार्ड भी पहुंचे। यहां 15 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इसमें 15 अतिरिक्त बेड की व्यवस्था भी करने के निर्देश कलेक्टर ने दिए।
    उन्होंने अस्पताल आने वाले पेशेंट को आते ही स्टेबल करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने अस्पताल में दवा की उपलब्धता के संबंध में भी जानकारी ली। साथ ही उन्होंने कोरोना वारियर के लिए आवश्यक पीपीई जैसे सुरक्षा उपकरणों की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि जो गंभीर मरीज आते हैं और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षणों से गुजर रहे हों, उन्हें आपात कालीन कोरोना प्रोटोकॉल के मुताबिक स्टेबल करे। इसके लिए पूर्व में प्रशिक्षण भी दिए गए हैं।
    कलेक्टर ने कहा कि फीवर क्लिनिक में व्यवस्था बेहद अहम है। सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे। नए काउंटर आरम्भ होने के पश्चात समय काफी घट जाएगा, इससे सोशल डिस्टेंसिंग बनाये रखने में आसानी होगी। कलेक्टर ने फीवर क्लिनिक में कार्य कर रहे हेल्थ स्टाफ से भी चर्चा की। उन्होंने सिविल सर्जन से लगातार इस दिशा में मॉनिटरिंग करने कहा ताकि जल्द से जल्द सैंपल लेने की प्रक्रिया पूरी की जा सके और लोगों को टेस्ट के लिए न्यूनतम समय लगे। कलेक्टर ने रात की पाली में जिला चिकित्सालय की व्यवस्था की जानकारी भी ली। सिविल सर्जन ने रात के समय डयूटी के लिए लगाए गए स्टाफ की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी को दायित्वों की जानकारी दे दी गई है और वे इसका निर्वहन कर रहे हैं। आपात केस के लिए आवश्यक प्रोटोकॉल के मुताबिक कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि रात के समय सैंपलिंग के लिए भी दल बनाया गया है।
    इस दौरान एसडीएम खेमलाल वर्मा भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि शनिवार को मौके पर किये गए निरीक्षण के अनुरूप दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है। नए काउंटर की तैयारियां हो गई हैं। सोमवार से यह आरम्भ हो जाएंगी। कलेक्टर ने अस्पताल परिसर के नियमित सैनिटाइजेशन तथा साफ सफाई की उत्तम व्यवस्था के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देशित किया।

    दुर्ग / शौर्यपथ / कगना रनौत को दिए जा रहे वाई श्रेणी सुरक्षा पर और प्रियंका गाँधी के सुरक्षा हटाने पर प्रदेश कांग्रेस महामंत्री राजेन्द्र साहू ने केंद्र सरकार की दोहरी मानसिकता की निति पर वार करते हुए कहा कि माना आज देश में भाजपा की सरकार ने एक महिला के सुरक्षा के लिए वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है किन्तु क्या ऐसी ही भावना देश की अन्य महिलाओं के लिए भी केंद्र सरकार ने अपनाई है . कौन है कंगना जिसे केंद्र ने एक प्रदेश के मुखिया सहुए बहस के कारण वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान कर दी जबकि इसी देश में एक महिला ऐसी है जिसके पिता की ही नहीं दादी की भी क्रूर तरीके से हत्या हुई और देश की विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी की नेता है जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए किन्तु सरकार द्वारा एक ऐसी महिला को सुरक्षा देने में इतनी तत्परता सिर्फ इस लिए कि सरकार के पुराने दोस्त जो वर्तमान में राजनैतिक विरोधी है के खिलाफ कंगना मुखर हो रही है क्या कंगना के सहारे महाराष्ट्र में अपने आप  को ताकतवार घोषित करने के लिए ये किसी साजिश के तहत हो रहा है जबकि देश की एक बेटी जिसके पूर्वजों ने देश के लिए त्याग और बलिदान किया जिसके दादी और पिता की हत्या हो गयी उसको मिलने वाली सुरक्षा छिन ली गयी मकान ख़ाली करवा दी गई और दूसरी ओर जिस परिवार का देश हित में कोई योगदान नहीं है केंद्र सरकार उसे सुरक्षा दे रही हैं और मीडिया उसे झाँसी की रानी साबित करने में लगी है जो देश का दुर्भाग्य हैऔर इस दुर्भाग्य में केंद्र सरकार परदे से पीछे अपना राजनैतिक खेल खेल रही है . केंद्र सरकार की इस दोहरी निति से भाजपा सरकार की दोहरी मानसिकता ही सामने आ रही है .

    सेहत / शौर्यपथ / हमारे जीवन में बहुत बार ऐसी स्थितियां आती हैं जब हम अपने ही विचारो में खो जाते हैं। फिर इस उलझन को सुलझाना लगभग असंभव हो जाता है। अगर आपके साथ यह बहुत कम होता है तब चिंता करने की कोई बात नही हैं। पर अगर आपको लगता है कि आपके साथ यह हर दूसरे दिन होने वाली घटना है, तब तो आपको सतर्क होकर कार्य करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए।
    लगातार ज़्यादा सोचना गंभीर दिमागी परेशानी जैसे कि चिंता और अवसाद को जन्म दे सकता है। इसलिए इतनी कम उम्र में इतना ज्?यादा सोचना अच्?छी बात नहीं है।
    यदि आप बीते हुए कल के बारे में या आने वाले कल के बारे में ही सोचती रहती हैं, तो आपको अपनी मेंटल हेल्?थ के प्रति सतर्क हो जाना चाहिए। हम बता रहे हैं, ऐसे कुछ संकेत जो यह जानने में आपकी मदद करेंगे कि आप वाकई जरूरत से ज्?यादा सोचती हैं। जिसे ओवर थिंकर कहा जाता है।
    पहला संकेत : क्या आप हर चीज मे मतलब ढूंढती हैं?
    क्या आप हर छोटी से छोटी बात का भी कारण ढूंढती हैं, जो कि आपके जीवन में घटित होती है (या नहीं होती)। इसका मतलब आप खुद को हर समय हर छोटी-बड़ी चीज पर सोचने में व्?यर्थ कर रहीं हैं! आपको सार्वजनिक स्थान पसंद होंगे, परंतु वह आपके लिए एक ही समय पर आकर्षक और भारी दोनों हो सकते हैं।
    आप उन सभी चीजों के बारे में सोचेंगी जो आप के आस पास हो रही हैं और आप सभी पर विश्वास भी करने लगेंगी। जो कि असल में एक पेचीदा मामला है। आपको बस अपने आप को यह याद दिलाना है कि हर चीज के पीछे एक बहुत बड़ा कारण नहीं होता। बस बात इतनी सी है कि आपका दिमाग कुछ ज्यादा ही भार उठा रहा है ।
    दूसरा संकेत : आपको सोने में बहुत परेशानी होती है।
    अगर आप बहुत ज्यादा सोचती हैं, तो यह परेशानी आपके दिमाग को बिल्कुल सक्रिय कर देती है और इसको आराम करने की एक क्षण भी अनुमति नहीं देती। आप अच्छी तरह से सोने में इसलिए असमर्थ होते हैं, क्योंकि आपके दिमाग में बहुत सारे विचार एक साथ आ रहे होते हैं। आपको बिस्तर पर जाने से पहले कोई किताब पढऩी चाहिए या फिर ध्यान लगाना चाहिए।
    तीसरा संकेत : आप हर चीज में परफेक्?शन ढूंढती हैं।
    क्या आप एक परफेक्?शनिस्?ट हैं और हर कार्य को बिना किसी विघ्न बाधा के पूरा करना चाहती हैं। यह एक कला हो सकती है, परंतु कभी कभार यह कला भी एक कमजोरी के रूप में प्रकट हो सकती है।
    यह बस इस पर निर्भर है कि आप इस कला का किस प्रकार प्रयोग करते हैं। जब कोई काम आपके हिसाब से नहीं होता, तो आप घबरा जाती हैं और अपनी शांति खो बैठती हैं।
    चौथा संकेत : क्या आप जितना काम नहीं करतीं उससे ज्यादा सोचती हैं?
    अगर आप जितना काम कर रहीं हैं, उससे कही ज्?यादा सोच रहीं हैं, तो यह निश्चित है कि सोचना आपकी बीमारी है। इससे उत्पादकता कम होती है।
    जी हां यह बिल्कुल सच है! आपके दिमाग में कई उम्दा विचार होंगे पर आप सोचते-सोचते ही अपना सारा समय व्यर्थ कर देती हैं और अंत में आप कुछ नहीं कर पाती। तो अपने सोचने के समय को कम करके काम करने के समय को बढ़ाएं।
    पांचवा संकेत : आप आमतौर पर सर दर्द की परेशानी से जूझती हैं
    जी हां बहुत सारे विचार अगर आपके दिमाग में हैं, तो यह सर दर्द की परेशानी को जन्म दे सकता है। यह हमारे शरीर का एक संकेत है कि अब हमारे दिमाग को आराम करने की जरूरत है। इस परेशानी से उभरने में गहरी सांस लेने वाले व्यायाम बहुत मदद कर सकते हैं।
    छठा संकेत : आपको कोई भी निर्णय लेने में बहुत समय लगता है
    अब क्योंकि आपके दिमाग में बहुत सारे विचार दौड़ रहे होते हैं, तो आप बेचैन और निर्णय लेने में असमर्थ महसूस कर सकते हैं। अगर आप यह परेशानी आम तौर पर महसूस करती हैं तो तय कीजिए कि अब एक ही चीज पर पूरी तरह फोकस करेंगी और निर्णय लेंगी।
    अब जब आपने जान लिया है कि ज्यादा सोचने की परेशानी को कैसे रोक सकती हैं, तो वर्तमान में जिएं। आने वाले कल की चिंता में अपने जिंदगी के आज के आनंद को व्?यर्थ न गंवाएं। हर एक लम्हे को अच्छी तरीके से जीने की कोशिश करें, तभी आप खुद को हल्?का महसूस कर पाएंगी।

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision