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विजेता टीम 23 एवं 24 दिसंबर को आयोजित होने वाले संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में लेंगे भाग
सूरजपुर /शौर्यपथ/
एकलव्य विद्यालय शिवप्रसादनगर में आयोजित एकलव्य विद्यालयों के मध्य जिला स्तरीय खेल, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक प्रतियोगिता का समापन हुआ। कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी राहुल देव, एसडीएम प्रकाश राजपूत, तहसीलदार ओपी सिंह, जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी साहू एवं मंडल संयोजक अजय राजवाड़े एवं आशिक उपाध्याय उपस्थित हुए। कलेक्टर ने सभी विजेता टीम को पुरस्कृत कर बधाई एवं अच्छे खेल खेलने के लिए शुभकामनाएं दी।
इस प्रतियोगिता में सूरजपुर के सभी 4 एकलव्य विद्यालय- शिवप्रसादनगर, ओड़गी, प्रतापपुर एवं प्रेमनगर के विद्यार्थी 14 एवं 19 वर्ग के एथलेटिक्स, शास्त्रीय गायन, वादन, नृत्य, निबंध, चित्रकला एवं भाषण अंतर्गत विभिन्न विधाओं में भाग लिया। एकलव्य विद्यालय शिवप्रसादनगर ओवर आल विजेता रहा एवं बेस्ट मार्च पास्ट का खिताब एकलव्य विद्यालय प्रतापपुर को दिया गया।
कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह ने अपने उद्बोधन में सभी बच्चों की प्रतिभा की प्रशंसा किया एवं विद्यार्थी जीवन मे बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने संभाग एवं राज्य स्तर की प्रतियोगिता के लिए सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी। मुख्य कार्यपालन अधिकारी राहुल देव ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए उनके गुरुजनों को बधाई दिया।।समापन कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन सहायक आयुक्त विश्वनाथ रेड्डी के द्वारा प्रस्तुत किया गया।
सभी विधाओं में प्रथम आये विद्यार्थी 23 एवं 24 दिसंबर को स्टेडियम ग्राउंड सूरजपुर में आयोजित होने वाले संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में सरगुजा संभाग के सभी एकलव्य विद्यालयों के साथ प्रतिस्पर्धा में भाग लेंगे जिसमे प्रथम आये विद्यार्थियों को 27 से 29 दिसंबर को राज्य स्तर में भाग लेने का मौका मिलेगा।
कार्यक्रम के अंत अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया एवं विद्यालय के प्राचार्य बृजेश चौबे के द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।
जिले के जलाशयों से नहरों में नहीं छोड़ा जाएगा ग्रीष्मकालीन धान के लिए पानी
धमतरी /शौर्यपथ/
जिले में रबी सीजन वर्ष 2021-22 में धान के बदले दलहन, तिलहन, गेहूं और ग्रीष्मकालीन मक्का, मूंग उड़द की फसल के लिए जोर दिया जा रहा है, साथ ही किसानों से लगातार अपील भी की जा रही है। उप संचालक कृषि ने बताया कि जिले में दलहन-तिलहन की उतेरा फसलों के लिए 60 हजार 360 हेक्टेयर में बोनी का लक्ष्य रखा गया है जिसमें गत वर्ष के ग्रीष्मकालीन 45 हजार 830 हेक्टेयर क्षेत्र को भी दलहन, तिलहन में परिवर्तित किया जाना है।
उन्होंने बताया कि रबी में विभिन्न फसलों के 2840 क्विंटल बीज के वितरण का लक्ष्य है जिसके विरूद्ध 1732.32 क्विंटल का भण्डारण कर 1498.91 क्विंटल बीज का वितरण किया जा चुका है। इसके पहले भी जिले के किसानों से जनचौपाल, मुनादी एवं अन्य माध्यमों से अपील की गई थी कि किसान ग्रीष्मकालीन (रबी) धान के बदले कम पानी वाली दलहन, तिलहन, गेहूं, चना फसलों के अलावा रबी का मक्का, मूंग, उड़द की फसलें ली जाएं ताकि पानी की बचत की जा सके। उप संचालक कृषि ने बताया कि शासन द्वारा जलाशयों से ग्रीष्मकालीन धान के लिए नहरों में पानी नहीं दिया जा रहा है, ऐसी स्थिति में पेयजल के लिए नलकूप का पानी संरक्षित किया जाना अतिआवश्यक है। उन्होंने पुनः किसानों से अपील करते हुए कहा है कि किसान किसी भी स्थिति में ग्रीष्मकालीन धान की बोनी नहीं करें तथा जल संरक्षण में अपना अमूल्य सहयोग प्रदान करें।
राजनांदगांव /शौर्यपथ/
छुरिया विकासखंड के ग्राम करेगांव के कृषक सुरेश कुमार द्वारा रकबे में अंतर के कारण आत्महत्या किए जाने के संबंध में समाचार पत्र में प्रकाशित तथ्य पूरी तरह से भ्रामक है। मृतक सुरेश कुमार की पत्नी ने यह स्वीकार किया है कि भर्री जमीन जिसका रकबा 1.7 एकड़ है में धान की फसल नहीं ली गई है। गिरदावरी में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं है। मृतक द्वारा 2.03 एकड़ में धान की फसल ली गई थी। जिसके लिए पात्रता के अनुसार उनको धान का विक्रय करने पर 76 हजार 415 रूपए की राशि मिलती। गिरदावरी के अनुसार मृतक का जितना धान का रकबा था उतने का पंजीयन किया है। शेष भूमि पर उसने कोई फसल नहीं लगाई थी, इसलिए गिरदावरी के अनुसार उसका पंजीयन नहीं किया गया है। उसने 44 हजार का ऋण लिया था, धान का विक्रय करने पर 76 हजार 415 रूपए की राशि मिलती। राजस्व विभाग द्वारा गिरदावरी का प्रकाशन किया गया था। दावा आपत्ति के लिए आवेदन भी मंगाए गए थे। मृतक सुरेश द्वारा दावा आपत्ति के लिए आवेदन भी नहीं किया गया था। न ही किसी राजस्व अधिकारी को जानकारी दी गई थी।
इस संबंध में जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय स्तर पर जांच कराई गई, जांच में यह पाया गया कि मृतक के धान के रकबे एवं पंजीयन में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं हुई थी। पुलिस द्वारा आत्महत्या की जांच की जा रही है। मृतक के पास से कोई सोसाईड नोट आदि प्राप्त नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है कि मृतक का गिरदावरी के आधार पर ही धान बिक्री के लिए पंजीयन किया गया था।
जिले में रकबा को लेकर कोई समस्या नहीं है। धान खरीदी के लिए किसानों की सुविधा हेतु जिला प्रशासन द्वारा हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। गिरदावरी के अनुसार मृतक के संयुक्त खाते की भूमि रकबा 1.538 हेक्टेयर में से रकबा 0.825 हेक्टेयर पर धान बोया गया है जिसके अनुसार रकबा 0.825 हेक्टेयर का पूर्ण पंजीयन हुआ है। मृतक द्वारा धान बिक्री हेतु टोकन नहीं कटाया गया था, धान बिक्री होने पर मृतक को 76 हजार 415 रूपए मिलता।
रायपुर /शौर्यपथ/
राज्यपाल अनुसुईया उइके से राजभवन में अखिल भारतीय रौतिया समाज विकास परिषद् जशपुर के सचिव पालुराम प्रधान के नेतृत्व में प्रतिनिधिमण्डल ने मुलाकात की। प्रतिनिधिमण्डल ने रौतिया जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल कराने का आग्रह किया।
प्रतिनिधिमण्डल ने बताया कि छत्तीसगढ़ में निवासरत रौतिया जाति को 1931 में हुए जनगणना की सूची में तथा मध्यप्रदेश के राजपत्र में 1950 में बतौर अनुसूचित जनजाति अधिसूचित किया गया था, पर 1956 के भारत के राजपत्र में रौतिया जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची से विलोपित कर सरल क्रमांक 15 में राठिया जाति को अधिसूचित किया गया है। प्रतिनिधिमण्डल का कहना था कि राठिया कोई जाति नहीं है यह केवल सरनेम के रूप में लिखा जाता है, जो वर्तनी त्रुटि के कारण रौतिया जाति की जगह गजट में राठिया लिखा गया है। इसलिए रौतिया जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाए।
प्रतिनिधिमण्डल में मीनू प्रसाद सिंह, निर्मल सिंह, नंदकिशोर रौतेया एवं राम किशोर राम शामिल थे।
हेल्थ टिप्स /शौर्यपथ/
दिल की सेहत के लिए अच्छे खानपान का अर्थ यह कतई नहीं है कि बर्गर, फ्रेंच फ्राइज या कोल्ड ड्रिंक से दूरी बना लें। पर यह ध्यान रखना होगा कि ये चीजें नियमित खानपान में शामिल न हो जाएं। यह कहना है अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के पूर्व प्रमुख डॉ. रॉबर्ट एकेल का। एसोसिएशन ने हाल में दिल तंदुरुस्त रखने वाले खानपान को लेकर गाइडलाइंस जारी की हैं। मुख्य लेखक डॉ. एलिस एच लिकटेंस्टाइन ने बताया कि ‘ये न खाएं’ जैसी नसीहतों से लोगों पर दबाव डालने के बजाय हमने खानपान के ऐसे पैटर्न को बढ़ावा देने की कोशिश की है, जिससे दिल स्वस्थ रहे। गाइडलाइंस के प्रमुख अंश...
6 आदतें जो खानपान का पैटर्न सही बनाने में मददगार होंगी, दिल से जुड़े जोखिम भी घटाएंगी
हफ्ते में 150 मिनट वर्कआउट
जीवनभर वजन को संतुलित रखकर दिल से जुड़े जोखिम कम किए जा सकते हैं। हफ्ते में 150 मिनट वर्कआउट, ऊर्जा संतुलन को सही रखता है। उम्र के हर दशक में ऊर्जा की जरूरत 70-100 कैलोरी तक घट जाती है। इसलिए डाइट की नियमित ट्रेकिंग जरूरी है।
गहरे रंग वाले फल-सब्जियां खाएं
विविधता वाले फल-सब्जियां खाएं, इनसे फाइटोकेमिकल्स ज्यादा मिलेंगे। ये गंभीर बीमारियों को रोकने में मददगार हैं। गहरे रंग वाले फल-सब्जी में पोषक तत्व ज्यादा होते हैं। जूस के बजाय साबुत खाने से फाइबर ज्यादा मिलेगा।
रिफाइंड के बजाय साबुत अनाज
रिफाइंड अनाज में पोषक तत्वों को हटा दिया जाता है। इसलिए साबुत अनाज से बने खाने को प्राथमिकता दें। साबुत अनाज में चोकर, एंडोस्पर्म और आंतरिक बीज तीनों परत होती है। इसलिए ये पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। कई सारी स्टडीज में साबित हो चुका है कि साबुत अनाज खाने से दिल को जोखिम पहुंचाने वाले कारकों के नियंत्रण में मदद मिली है।
प्रोटीन के स्वस्थ स्रोत चुनें
प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए फलियां, नट्स जैसे सोयाबीन, दालें, चना और मटर का सेवन करें। ये प्रोटीन के साथ फाइबर के भी अच्छे स्रोत हैं। डेयरी उत्पाद लो फैट या फैट मुक्त चुनें। इनसे वजन और मोटापा बढ़ने से रोकने में मदद मिलेगी।
नारियल/पाम जैसे तेल कम खाएं
विशेषज्ञों का मानना है पॉलीअनसैचुरेटेड फैट वाले तेल बेहतर होते हैं। इनमें सोयाबीन, कॉर्न, सनफ्लॉवर और अलसी तेल आते हैं। ये कार्डियोवस्कुलर खतरों को 30% तक घटा देते हैं। जबकि ट्रॉपिकल तेल जैसे नारियल और पाम तेल से एचडीएल और एलडीएल कॉलेस्ट्रॉल दोनों में बढ़ोतरी होती है।
इसलिए इन्हें खाने में शामिल करने से बचना चाहिए।
अतिरिक्त शुगर/नमक से बचें
उन वस्तुओं और पेय से बचें जिनमें अतिरिक्त शुगर हो। इससे डायबिटीज, दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। नमक (सोडियम क्लोराइड) का ब्लड प्रेशर के साथ सीधा संबंध है। इसके कम सेवन से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
इसके अलावा विशेषज्ञों का मानना है कि डॉक्टरों को मरीजों से पांच मिनट इस विषय पर जरूर बात करना चाहिए कि वे फल, सब्जियां और साबुत अनाज कितनी मात्रा में खाते हैं। या उन्हें इनके फायदों के बारे में कितना पता है
टेक्नोलॉजी /शौर्यपथ/
जापान की क्योटो प्रिफेक्चुअल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने कोरोना संक्रमण की जांच का नया तरीका खोजा है। उन्होंने ऐसा मास्क तैयार किया है, जो मोबाइल की फ्लैश लाइट के जरिए बता देता है कि मास्क पहनने वाला कोविड-19 से संक्रमित है या नहीं। मोबाइल के अलावा अल्ट्रा वॉयलेट लाइट से भी इसका पता लगाया जा सकता है। खास बात यह है कि इस मास्क के फिल्टर को शुतुरमुर्ग की कोशिकाओं से बनाया गया है।
रिसर्चर्स के मुताबिक, मास्क की परतों में एक फिल्टर लगाया गया है। इस पर एक फ्लोरोसेंट स्प्रे किया जाता है। इसमें ऐसी एंटीबॉडी होती है, जो वायरस के साथ बंध जाती है। यदि मास्क पर वायरस के कण मौजूद होते हैं तो फिल्टर UV लाइट में चमकता है। यह मास्क स्मार्टफोन की LED लाइट में भी चमकता है। इससे लोग घर बैठे ही अपना कोविड टेस्ट कर सकते हैं।
मास्क तैयार करने में शुतुरमुर्ग का रोल
यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि वैज्ञानिकों ने सबसे पहले कोरोना वायरस को मादा शुतुरमुर्ग में इंजेक्ट किया। इसके बाद उसके अंडों से एंटीबॉडी निकालकर फ्लोरोसेंट स्प्रे तैयार किया। वैज्ञानिकों का दावा है कि शुतुरमुर्ग में मिलने वाली एंटीबॉडी कई तरह के वायरस और बैक्टीरिया के खिलाफ काम करती है।
32 मरीजों पर की गई रिसर्च
रिसर्च को लीड करने वाले साइंटिस्ट यासुहिरो सुकामोटो ने बताया कि मास्क का ट्रायल सिर्फ 10 दिन में किया गया है। एक्सपेरिमेंट में शामिल 32 कोरोना मरीजों का मास्क UV लाइट में तेजी से चमका। रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि जैसे-जैसे मरीज रिकवर हुए, वैसे-वैसे मास्क का चमकना कम होता गया।
सुकामोटो का कहना है कि वे अगला ट्रायल 150 लोगों पर करना चाहते हैं। अगर ट्रायल कामयाब रहता है तो सरकार से इजाजत ली जाएगी। मंजूरी मिलने के बाद यह मास्क 2022 में मार्केट में आ सकता है।
हेल्थ टिप्स /शौर्यपथ
कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से पूरी दुनिया में दहशत का माहौल है। भारत में अब तक मिले ओमिक्रॉन संक्रमितों की कुल संख्या 166 हो गई है। साथ ही, दुनिया भर में इससे 12 लोगों की मौत हो चुकी है। आगे और क्या देखने मिल सकता है, ये सोचकर लोगों में चिंता, तनाव और घबराहट बढ़ती जा रही है। ऐसी स्थिति में हमें अपने शरीर के साथ-साथ मेंटल हैल्थ का ख्याल रखने की भी जरूरत है।
इन 5 साइन्स-बेस्ड तरीकों को फॉलो करके आप अपने मन को शांत रख सकते हैं..
1. अपने शरीर की सुनें
नकारात्मक भावनाओं से लड़ने के लिए सबसे पहले अपने शरीर की खामोश आवाजों को सुनना जरूरी है। क्या आपके पेट में अकड़न है? क्या आपके सिर में दर्द है? क्या आपकी मांसपेशियों में खिंचाव है? अगर इन सभी सवालों का जवाब हां है तो ये आपकी चिंता के शारीरिक लक्षण हैं। इसके लिए आपको रिलैक्स होने की जरूरत है।
शरीर को आराम देने के लिए अपनी पीठ के बल लेट जाएं। इसके बाद, एक किताब को अपने पेट पर रखें और दोनो हाथों को अपनी छाती पर रख लें। अब इतनी गहरी सांस लें कि किताब जितना हो सके उठ जाए। ये एक्सर्साइज कम से कम 7 मिनट तक करें। इसके अलावा, आप एक कटोरे में बर्फीला पानी लेकर अपने मुंह को धो सकते हैं।
2. टॉक्सिक पॉजिटिविटी से रहें दूर
अपनी चिंताओं को पूरी तरह से नजरंदाज करने से आप टॉक्सिक पॉजिटिविटी के शिकार हो सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसा करके आप अपने दिमाग पर प्रेशर डालते हैं, जिससे मानसिक विकार और बढ़ सकते है। इसलिए जब भी चिंता में हों, खुद से बात करें। अपने दिल पर हाथ रखें और खुद को सहारा दें। ध्यान रखें, कभी-कभी चिंता करना भी सही होता है।
3. गलत आदतों को सुधारें
चिंता से भागने के लिए अगर सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं, तो इस आदत को अभी बदल लें। बिना मतलब के सोशल मीडिया चलाने से आपकी घबराहट और बढ़ जाती है। जर्मनी में हुई एक स्टडी के मुताबिक, महामारी के बारे में ज्यादा पढ़ने से चिंता बढ़ती है।
यदि आप सोशल मीडिया के आदी हैं, तो ऐसे एप्स को अपने फोन से हटा दें जिन्हें चलाकर आप अच्छा महसूस नहीं करते। साथ ही, दूसरों पर निर्भर होने, आलस करने, काम टालने, शराब पीने और कम नींद लेने की आदतों को भी सुधारें।
4. अपना नजरिया बदलें
कोरोना महामारी का अंत कब होगा, यह सवाल हम सभी के मन में है। हालांकि, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। इसलिए हमें अपनी जिंदगी जीने का नजरिया बदलना होगा। चीजों के नकारात्मक और सकारात्मक दोनो ही पहलुओं को परखना होगा। आप यह कल्पना भी कर सकते हैं कि आपकी आज की चिंताएं एक दिन, हफ्ते, महीने या साल बाद कैसी लग सकती हैं।
5. अकेले ना रहें
अकेलापन आपको ज्यादा सोचने पर मजबूर करता है। चिंता दूर करने का सबसे अच्छा तरीका होता है अपने परिवार या दोस्तों से बात करना। साथ ही, आप अपने विचारों को लिखकर उनसे राहत पा सकते हैं। बच्चों और जानवरों के साथ खेलने, ताजी हवा में घूमने और नई हॉबीज एक्सप्लोर करने से भी आप अपनी चिंताओं से मुक्त हो सकते हैं।
रायपुर /शौर्यपथ/
राज्य सरकार के श्रम विभाग ने भवन एवं अन्य निर्माणों पर मानक दर पर उपकर कटौती के निर्देश दिए है। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय से श्रम विभाग ने प्रदेश के समस्त नगर पालिक निगमों के आयुक्त, नगर पालिका परिषदों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों, नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, जिला पंचायतों और जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों सहित राज्य शासन के समस्त विभागीय सचिवों को पत्र जारी कर निर्देश दिए है कि भवन एवं सन्निर्माण उपकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार नियमानुसार प्रचलित दर पर उपकर कटौती की जाए। अधिकारियों को छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल द्वारा समय-समय पर लिए गए निर्णयों के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों के निर्माण कार्यो के लिए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के मानक दर और शहरी क्षेत्रों के निर्माण कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग के प्रचलित मानक दर के आधार पर निर्माण प्राक्कलन की गणना करने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाली है. उन्होंने उत्तराखंड में फ्री हैंड न मिलने और संगठन के लोगों से सहयोग न मिलने पर नाराजगी जाहिर की है.
नई दिल्ली /शौर्यपथ/
कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाली है. उन्होंने उत्तराखंड में फ्री हैंड न मिलने और संगठन के लोगों से सहयोग न मिलने पर नाराजगी जाहिर की है. उत्तराखंड में विधान सभा चुनाव होने में अब दो से तीन महीने ही रह गए हैं. ऐसे में सीएम का चेहरा बनाने पर अभी तक फैसला नहीं लेने पर भी चिंता जताई है.
ट्विटर पर एक लंबे पोस्ट में रावत ने लिखा, 'है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है. जिस समुद्र में तैरना है, सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं. जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं. मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि #हरीश_रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है!'
अगले ट्वीट में रावत ने लिखा है, "फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है "न दैन्यं न पलायनम्" बड़ी उहापोह की स्थिति में हूं, नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे. मुझे विश्वास है कि #भगवान_केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे."
पन्द्रह हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ेगी सिंचाई सुविधा
रायपुर /शौर्यपथ/
छत्तीसगढ़ शासन ने नौ सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण एवं सुधार कार्यों के लिए 20 करोड़ 95 लाख 62 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी है। योजनाओं के पूरा होने से पन्द्रह हजार एक सौ छैसठ हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।
बिलासपुर जिले के विकासखण्ड बिल्हा के अंतर्गत अरपा नदी पर कछार के पास डाईक निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ 66 लाख 86 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। अरपा नदी पर कोनी के पास डाईक निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ 44 लाख रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। कुआपाली जलाशय योजना के शीर्ष कार्य, नहर रिमॉडलिंग एवं लाईनिंग कार्य के लिए दो करोड़ 69 लाख 87 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूरा होने से 194 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।
जांजगीर-चांपा जिले के विकासखण्ड बम्हनीडीह की सोन नदी पर सोनियापाट एनीकट योजना के लिए चार करोड़ 92 लाख 54 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूरा होने से 115 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। जांजगीर-चांपा जिले के हसदेव बांगो परियोजना के चांपा शाखा नहर से सोंठी माईनर एक में आर.डी. 300 मी. से 750 मी. के मध्य सुरक्षावाल का निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ 73 लाख 19 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूरा होने से 120 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। विकासखण्ड सक्ती के देवरीपाली जलाशय योजना के नहर में सी.सी. लाईनिंग दो कि.मी. एवं पक्के कार्यों में सुधार एवं पुनर्निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ 50 लाख 54 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूरा होने से 209 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। विकासखण्ड पामगढ़ अंतर्गत डोंगाकोहरौद वितरक नहर के आर.डी. 0 कि.मी. से 17.88 कि.मी. तक क्षतिग्रस्त लाईनिंग, स्ट्रक्चर एवं बैंको का नवीनीकरण कार्य के लिए दो करोड़ 76 लाख 73 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूरा होने से 14082 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।
मुंगेली जिले के विकासखण्ड लोरमी अंतर्गत कन्हैया नाला जलाशय के शीर्ष कार्य जीर्णोद्धार, मुख्य नहर एवं शाखा में सीमेंट कांक्रीट लाईनिंग कार्य के लिए दो करोड़ 32 लाख 67 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूरा होने से 217 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। गब्दा जलाशय के शीर्ष कार्य का जीर्णोद्धार, मुख्य नहर एवं शाखा नहरों में सीमेेंट कांक्रीट लाईनिंग कार्य के लिए दो करोड़ 32 लाख 78 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के पूरा होने से 229 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
