September 02, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    पटेल जयंती पर धूमधाम, पर मूर्ति और स्थल फिर उपेक्षित

    जनप्रतिनिधि अपने कार्यालय सजाने में व्यस्त; देशभक्ति के महापुरुष की प्रतिमा सुध की राह देखती

    दुर्ग। शौर्यपथ।

    दुर्ग शहर में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर प्रशासन द्वारा बड़े स्तर पर समारोह आयोजित किया गया, जिसमें शहर के प्रमुख जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित हैं। लेकिन इसी मौके पर चौक-चौराहों के सौंदर्यीकरण के महापौर बाघमार के दावों की पोल भी जनता के सामने खुल गई, क्योंकि पटेल चौक पर स्थापित होने वाली पटेल जी की प्रतिमा का नया स्थल अभी भी निर्माणाधीन है या निर्माण कार्य रुका हुआ है।

       शहरी सरकार की सुन्दरता की हकीकत

        चुनाव से पहले और बाद में महापौर एवं नगर निगम अधिकारी लगातार दावे करते रहे कि शहर सुंदर बनेगा, चौक-चौराहों की सूरत बदलेगी। लेकिन हकीकत यह है कि जब बात देश के महानायक सरदार पटेल के नाम से बने स्थल की आती है, तो आज भी जनप्रतिनिधि सिर्फ अपने ऑफिस, बंगले, एयर कंडीशनर, और फर्नीचर की सजावट में ही करोड़ों रुपए खर्च करने में तत्पर नजर आते हैं। वहीं जिस मूर्ति के सामने आज देशभक्ति का मंच सजाया जा रहा है वह अब भी रंग-रोगन और नए स्थल के इंतजार में खड़ी है।

       जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताएँ

       जिस वार्ड में यह चौक आता है उसके पार्षद खुद नगर निगम के सभापति हैं, और अपने कार्यालय की सजावट पर लाखों खर्च करके प्रवेश उत्सव बड़े धूमधाम से मनाते हैं, लेकिन शहर की जनता के जज्बात और महापुरुषों के सम्मान की बात आते ही पहल टल जाती है। आखिर प्रशासन ने उत्सव में लाखों खर्च किए, पर मूर्ति के सच्चे सम्मान की सुध नहीं ली।

    आत्मचिंतन का समय

    जनता को समझने की ज़रूरत है कि शहरी सरकार वादों के झूले पर चुनाव जीत कर सत्ता का सुख लेना ही जानती है। 

      नगर निगम के 8 महीने के कार्यकाल में भी महापुरुष के सम्मान में नया स्थल तैयार नहीं हो पाया। देशभक्ति के बड़े-बड़े आयोजन, प्रेसनोट और फोटोशूट से सम्मान की मंशा नहीं पूरी होती, जबकि सच यह है कि शहर को सुंदर बनाना खाली बयानों से नहीं, कर्मों से होगा

    सेमीफाइनल में पांच विकेट से दर्ज की अद्भुत जीत, हरमनप्रीत और जेमिमा ने रचा इतिहास

      नई दिल्ली। शौर्यपथ। लौह संकल्प, दमदार प्रदर्शन और अटूट जज़्बे ने भारत के तिरंगे को एक बार फिर ऊंचा कर दिया। महिला विश्वकप 2025 के सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। यह जीत सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि भारतीय महिलाओं की शक्ति और आत्मविश्वास का जीवंत प्रतीक बनी।जेमिमा रोड्रिगेज ने अपनी सधी हुई पारी से मुश्किल हालातों में टीम को संभाला, वहीं कप्तान हरमनप्रीत कौर ने आगे बढ़कर नेतृत्व किया और जीत को सुनिश्चित किया।

       गेंदबाजों ने disciplined spell डालते हुए ऑस्ट्रेलिया को बड़े स्कोर से रोका और मैदान पर भारत का वर्चस्व स्थापित किया।इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के साथ टीम इंडिया अब विश्व क्रिकेट के शिखर की ओर कदम बढ़ा चुकी है। यह जीत बताती है कि भारतीय बेटियां खेल के हर मैदान में दुनिया को मात देने का जज्बा रखती हैं। पूरा देश इस गौरव के क्षण पर गर्वित है।

    शौर्यपथ विस्तृत रिपोर्ट

    छत्तीसगढ़ के लोक पर्व 'करमा' पर आयोजित हो रही प्रतियोगिताओं को लेकर भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत ने विरोध की आवाज बुलंद की है। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा—"हमारी लोकपरंपरा व आस्था का पर्व करमा पूरे समाज को जोड़ने और सद्भाव का संदेश देने के लिए है, यह किसी प्रतिस्पर्धा का हिस्सा नहीं हो सकता। धर्म और आस्था के आयोजन को मंच, पुरस्कार या किसी अन्य प्रतिस्पर्धी स्वरूप में बदलना समाज की भावनाओं को आहत करता है।"

    रवि भगत का कहना है कि युवाओं और आयोजकों को चाहिए कि वे करमा जैसे पर्व का सम्मान करें और इसे जोड़ने की परंपरा को बनाए रखें, न कि प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनाएं। उन्होंने महोत्सव आयोजकों से गुजारिश की है कि वे इसकी मौलिकता संरक्षित रखें, ताकि अगली पीढ़ी भी यही संस्कृति गर्व से अपना सके।

    पूर्व अध्यक्ष ने भविष्य में समाजिक आयोजनों को व्यावसायिक या प्रतिस्पर्धात्मक स्वरूप देने के बजाए, मूल परंपरा व आस्था की भावना को बनाए रखने की जरूरत दोहराई है। सोशल मीडिया पर उनकी इस अपील को समाज के कई युवा और नागरिक भी समर्थन दे रहे हैं।

    संवेदनशील टिप्पणी

    रवि भगत का बयान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर, पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक एकता की रक्षा करने वाला है। करमा महोत्सव एक 'आस्था' का पर्व है—प्रतिस्पर्धा या निजी लाभ का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और संस्कृति के संरक्षण का द्योतक है। ऐसे त्योहारों को मूल स्वरूप में ही आगे बढ़ाना ही हमारी साझा जिम्मेदारी है।

    नोट: रवि भगत ने अपने फेसबुक पेज पर इस विषय में वीडियो/पोस्ट द्वारा विस्तृत टिप्पणी की है, जिसे छत्तीसगढ़ के जनमानस से बड़ा समर्थन मिल रहा है।

    दुर्ग। शौर्यपथ । दीपावली के पावन पर्व पर ग्राम खोरपा में रंगझाझर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश महामंत्री जितेंद्र वर्मा मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए और उन्होंने दीपावली मिलन समारोह में सभी ग्रामवासियों को शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी आयोजन की जानकारी साझा की, जिसमें स्थानीय संस्कृति, सामाजिक एकता और लोक परंपरा को सजीव बनाए रखने के संदेश दिए गए।

    रायपुर। शौर्यपथ । मेकाहारा जैसे प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में अब आयुष्मान कार्ड, जन-आयुष योजनाओं के नाम पर मिलने वाली मुफ्त जांचें बंद कर दी गई हैं। MRI के लिए 4000 से 5500 रुपये, जबकि सीटी स्कैन के 2500 से 3500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं—यह राशि 10-15% निजी अस्पतालों से भी ज्यादा है। नए सॉफ्टवेयर के नाम पर लॉकिंग दिक्कतें, इनसाइट टेस्ट तक नहीं हो पा रहे।

    अस्पताल में सैकड़ों मरीज घंटों लाइन लगाकर हलाकान हैं, कई लौट जाते हैं। पैसों की वसूली होने के बावजूद जांचें नहीं हो रहीं। पहले आयुष्मान कार्डधारी मरीजों को बेफिक्र इलाज-सुविधा मिलती थी, अब वे भी भटक रहे हैं।

    स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल लगातार ऐसे मामलों में चुप्पी साधे हुए हैं। विभागीय खामियों और बढ़ती परेशानी पर न उनका कोई एक्शन, न मुख्यमंत्री या भाजपा संगठन का कोई संज्ञान नज़र आ रहा है। भाजपा महामंत्री पवन साय से नागरिक सवाल पूछ रहे हैं कि क्या प्रदेश के अस्पतालों की दुर्दशा देखकर भी मन नहीं पसीजता? आखिर राज्य में स्वास्थ्य विभाग की ऐसी बदहाली किसके संरक्षण में हो रही है? कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार का खेल बेशर्मी से जारी है।

    सरकार अगर अब भी जनहितैषी व्यवस्थाएं ठीक नहीं करती, तो विपक्ष और जनता जल्द ही सरकार को इसका सख्त परिणाम दिखा सकते हैं।

     तस्वीर बया कर रही हैं कि मेकाहारा अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें लगी हैं, महिला-मरीज व्हीलचेयर में हैं और इंतजार का माहौल भयावह है—यह सरकारी व्यवस्था की जमीनी सच्चाई दर्शाता है, जिसमें इलाज से ज्यादा वेटिंग और अव्यवस्था से लोग जूझ रहे हैं।

    ऐसे में सुशासन के दावे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के आगे फीके पड़ रहे हैं—सरकारी अस्पताल तक निजी अस्पतालों से महंगे, सुविधाएं ठप और मरीज पूरी तरह से असहाय।

    सागर। शौर्यपथ  । जनपद पंचायत सागर कार्यालय में सोमवार को उस समय अफरातफरी मच गई जब सड़ेरी निवासी एक महिला ने कार्यालय परिसर में खड़ी जनपद सदस्य की कार में तोड़फोड़ कर दी। महिला का आरोप है कि पंचायत सदस्य के परिवार ने उसकी पैतृक जमीन पर कब्जा कर रखा है, जिसकी शिकायत वह महीनों से कर रही थी, लेकिन अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की।

    महिला ने कहा कि उसने कई बार जनपद से लेकर जिला प्रशासन तक आवेदन दिए, मगर कार्रवाई न होने से नाराज होकर उसने यह कदम उठाया। घटना की जानकारी मिलते ही जनपद कार्यालय के कर्मचारी और पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति संभालते हुए वाहन का पंचनामा तैयार किया और महिला से पूछताछ शुरू कर दी है।

    सूत्रों के अनुसार, विवादित जमीन गांव सड़ेरी में ग्राम पंचायत की सीमा के भीतर स्थित है और इस मामले को पहले भी ग्रामीण सभा में उठाया जा चुका है। जनपद सदस्य के परिजन अपनी ओर से कब्जे के आरोपों से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जमीन पर उनका वैध हक है, जिसके दस्तावेज मौजूद हैं।

    फिलहाल पुलिस ने महिला के खिलाफ तोड़फोड़ की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। वहीं, प्रशासनिक स्तर पर भी इस विवाद की तहकीकात के आदेश दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    नवा रायपुर में 1 नवम्बर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे भव्य लोकार्पण, रजत जयंती वर्ष में ऐतिहासिक उपहार

       रायपुर। शौर्यपथ। नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-19 स्थित छत्तीसगढ़ विधानसभा का नवनिर्मित भवन अब पूरी तरह तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने स्थल निरीक्षण कर अधिकारियों से तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

       यह लोकार्पण समारोह 1 नवम्बर को राज्य के रजत जयंती महोत्सव के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा।यह नई विधानसभा सिर्फ एक आधुनिक इमारत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। 51 एकड़ परिसर में निर्मित यह भवन अत्याधुनिक तकनीकों, आधुनिक सुविधाओं और पेपरलेस संचालन व्यवस्था से सुसज्जित है।

       राज्य गठन के 25 वर्षों बाद यह भवन छत्तीसगढ़ को मिला एक ऐतिहासिक उपहार है, जो प्रदेश के विकास, आत्मनिर्भरता और लोकतांत्रिक गौरव की नई पहचान बनेगा।

    चरोटी गांव में वारदात के बाद आरोपी सालिक राम पैकरा गिरफ्तार, 19 फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाकर बरगलाता था महिलाओं को

       बलौदा बाजार। शौर्यपथ। चरोटी गांव में एक युवती की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी सालिक राम पैकरा (25 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी और मृतिका के बीच पहले प्रेम संबंध था, लेकिन युवती के अलग हो जाने से आरोपी ने आवेश में आकर चाकू और लकड़ी से हमला कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को गांव में ही पैरावट में जला दिया गया।साइबर सेल एवं थाना सिटी कोतवाली की संयुक्त टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर वारदात की गहन जांच की।

        तकनीकी विश्लेषण के बाद आरोपी की पहचान हुई और उसे फरार होने से पहले ही दबोच लिया गया।जांच में पता चला है कि सालिक राम पैकरा एक साइकोपैथ प्रवृत्ति का व्यक्ति है। वह महिलाओं की तरह वस्त्र धारण करता है और महिला संबंधी गतिविधियों में लिप्त रहता है। पुलिस ने यह भी पाया कि उसने इंस्टाग्राम पर 19 फर्जी अकाउंट बनाए थे, जिनमें अलग-अलग महिलाओं की तस्वीरें और नामों का प्रयोग किया गया था।

       हत्या का कारण यह था कि आरोपी मृतिका पर दोबारा मिलने और साथ रहने का दबाव बना रहा था, लेकिन युवती के इंकार करने पर उसने इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया।पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने और साइबर अपराध से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।

    बलौदाबाजार। शौर्यपथ। बलौदाबाजार जिले के सिमगा थाना क्षेत्र में एक पत्नी द्वारा अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या का प्रयास करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। भवानी नगर सिमगा निवासी 26 वर्षीय निशा कुंभकार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसका प्रेमी फिलहाल फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।जानकारी के अनुसार, 25 अक्टूबर की शाम निशा ने गहरी साजिश के तहत अपने पति उमाशंकर कुंभकार को 200 रुपये देने के बहाने पुराने पुल के पास बुलाया। वहां निशा के प्रेमी ने उमाशंकर पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल उमाशंकर को स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

        पुलिस पूछताछ में निशा ने जुर्म कबूल कर लिया है कि उसने शादी पूर्व प्रेम संबंध के चलते पति की हत्या की यह पूरी योजना रची थी। सिमगा पुलिस ने निशा को गिरफ्तार कर लिया है और फरार प्रेमी की पहचान कर, टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए लगी हैं। आरोपी महिला के खिलाफ हत्या का प्रयास (धारा 307 आईपीसी) आदि धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

        यह वारदात सिमगा-बेमेतरा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और समाज को स्तब्ध कर गई है।यह घटना समाज में रिश्तों के बदलते समीकरणों और अंधविश्वासपूर्ण भावनाओं पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है। पुलिस की तत्परता से आरोपी पत्नी को गिरफ्तार किया जा सका है, वहीं फरार प्रेमी की तलाश पूरी मुस्तैदी से की जा रही है।

         दुर्ग। शौर्यपथ लेख ।
    राजनीति केवल सत्ता या पद का प्रतीक नहीं, बल्कि जनसेवा का वह माध्यम है जिसके माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग तक संवेदना और सहायता पहुँचे — यही लोकतंत्र का वास्तविक स्वरूप है। परंतु दुर्ग जिले की हाल की घटनाएँ बताती हैं कि आज भी राजनीति में संवेदनशीलता और व्यवहारिक जिम्मेदारी के दो बिल्कुल अलग स्वरूप विद्यमान हैं।
      दीपावली के अवसर पर मालवीय नगर के एक बालक के साथ हुई दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही, जिले से बाहर रहते हुए भी एक जनप्रतिनिधि ने मानवता की मिसाल पेश की — उन्होंने न केवल स्वयं पहल कर बच्चे को सेक्टर-9 अस्पताल के बर्न यूनिट में भर्ती कराया, बल्कि उसके संपूर्ण इलाज का खर्च वहन करने की जिम्मेदारी भी अपने कंधों पर ली। यह कदम राजनीति से ऊपर उठकर मानवीयता की गूंज बन गया।
      वहीं, इसी जिले में एक अन्य जनप्रतिनिधि, जो कि कहीं अधिक प्रभावशाली पद पर आसीन हैं, उनके समक्ष पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल पहुँचा। प्रतिनिधिमंडल ने एक पत्रकार के बच्चे के इलाज हेतु मुख्यमंत्री सहायता कोष से सहयोग की विनम्र अपील की। महीनों बीत गए, परंतु किसी प्रकार की पहल नहीं हुई। यह घटना इस बात का प्रतीक है कि जनप्रतिनिधि का पद भले बड़ा हो, लेकिन यदि संवेदना का भाव अनुपस्थित है तो वह जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित रह जाती है।
      जनप्रतिनिधियों के इन दो विपरीत चेहरों ने जिले की राजनीति को एक गहरा प्रश्न खड़ा कर दिया है — क्या जनसेवा अब व्यक्ति विशेष की मनोदशा पर निर्भर हो गई है? एक ओर जहाँ कोई प्रतिनिधि अपने क्षेत्र से परे जाकर भी मानवता की जिम्मेदारी निभा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे हैं जो अपने ही क्षेत्र की पीड़ा से अनजान बने बैठे हैं।
      यह लेख किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल विशेष पर टिप्पणी नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण और संवेदनशीलता के उस अंतर को रेखांकित करता है जो आज की राजनीति को दो हिस्सों में बाँटता दिख रहा है —
    एक पक्ष जो जनसेवा को धर्म मानता है, और दूसरा जो इसे केवल अवसर का माध्यम समझता है।
    कहा भी गया है —
    "रात में एक दीपक भी यदि जलता है, तो उसकी रोशनी दूर-दूर तक फैलती है।"
    इसी प्रकार जब कोई जनप्रतिनिधि सच्चे भाव से कार्य करता है, तो उसकी मानवता पूरे समाज में आशा की किरण जगाती है। पर जब संवेदनहीनता राजनीति में जगह बना लेती है, तो जनता के मन में अविश्वास और निराशा पनपने लगती है।
      आज आवश्यकता है कि जनता ऐसे प्रतिनिधियों को पहचानें, जो केवल मंचों पर नहीं बल्कि कठिन समय में भी जनता के साथ खड़े हों। क्योंकि राजनीति का मूल्य पद नहीं, बल्कि आचरण से तय होता है।

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