September 17, 2026
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    बिलासपुर

    बिलासपुर (234)

    जांच रिपोर्ट के बाद शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल, विजय टांडे के साथ सुनील यादव की भूमिका की भी जांच की मांग; शिक्षा मंत्री से करीबी के दावों पर भी सवाल

    बिलासपुर / शौर्यपथ / शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण और पदोन्नति से जुड़े विवाद की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला अब तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे की भूमिका तक सीमित नहीं रह गया है। जांच समिति ने जहां विजय टांडे की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, वहीं स्थापना शाखा के प्रभारी क्लर्क सुनील यादव की भूमिका को लेकर भी शिकायतकर्ता ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    शिकायतकर्ता अंकित गौरहा का आरोप है कि जिन दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर जांच समिति ने तत्कालीन डीईओ विजय टांडे को जिम्मेदार माना, उन्हीं दस्तावेजों में स्थापना शाखा के प्रभारी क्लर्क सुनील यादव की भूमिका भी सामने आती है। गौरहा का कहना है कि उन्होंने जांच समिति से सुनील यादव की भूमिका की भी जांच करने की मांग की थी, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

    जिस दस्तावेज के आधार पर टांडे दोषी, उसी में सुनील की भूमिका का दावा

    अंकित गौरहा के मुताबिक उन्होंने जांच के दौरान समिति के समक्ष अपने पास उपलब्ध दस्तावेज और तथ्य प्रस्तुत किए थे। उनका दावा है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर तत्कालीन डीईओ विजय टांडे को दोषी माना गया।

    गौरहा का कहना है कि रिकॉर्ड में स्थापना शाखा के प्रभारी क्लर्क सुनील यादव की भूमिका भी सामने आती है। उन्होंने समिति से इस भूमिका की अलग से जांच कराने की मांग की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी मांग के बावजूद सुनील यादव की भूमिका पर कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया।

    गौरहा का सवाल है कि यदि किसी दस्तावेज को एक अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने के लिए महत्वपूर्ण माना गया, तो उसी रिकॉर्ड में दूसरे संबंधित कर्मचारी की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की गई?

    हर जांच में अधिकारी जिम्मेदार, बाबू पर कार्रवाई क्यों नहीं?

    शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि यह पहला मामला नहीं है, जिसमें जांच की आंच अधिकारी तक पहुंची हो और सुनील यादव पर कार्रवाई नहीं हुई हो।

    गौरहा के मुताबिक करीब तीन वर्ष पहले तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी एमएल पटेल के कार्यकाल में भी एक मामले की जांच हुई थी। उनका दावा है कि उस जांच में सुनील यादव की भूमिका पर भी गंभीर सवाल सामने आए थे और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई, यहां तक कि निलंबन की सिफारिश किए जाने की बात कही गई थी।

    शिकायतकर्ता के अनुसार, उसी मामले में तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी एमएल पटेल को निलंबित कर दिया गया, जबकि सुनील यादव के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। इसी पुराने घटनाक्रम को आधार बनाकर गौरहा मौजूदा जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठा रहे हैं।

    उनका कहना है कि बार-बार जांच की जिम्मेदारी अधिकारियों पर तय होती है, जबकि स्थापना शाखा में कार्यरत संबंधित कर्मचारी कार्रवाई से बच जाते हैं।

    शिक्षा मंत्री से करीबी की चर्चा, रसूख पर भी सवाल

    मामले में सुनील यादव के शिक्षा मंत्री से करीबी संबंध होने की चर्चा का दावा भी शिकायतकर्ता की ओर से किया गया है। कुछ सूत्रों के हवाले से उनकी सत्ता के शीर्ष स्तर तक पहुंच होने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन राजनीतिक संबंधों और किसी कार्रवाई को प्रभावित करने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    अंकित गौरहा का आरोप है कि प्रभाव और पहुंच के कारण सुनील यादव अब तक कार्रवाई से बचते रहे हैं। हालांकि, यह आरोप भी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है।

    शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि राजनीतिक प्रभाव की बात सही नहीं है, तो विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में सुनील यादव की भूमिका की जांच क्यों नहीं की गई।

    150 से 200 शिकायतों का दावा, फिर भी कार्रवाई पर सवाल

    अंकित गौरहा ने दावा किया है कि सुनील यादव के खिलाफ अलग-अलग स्तरों पर करीब 150 से 200 शिकायतें की जा चुकी हैं। उनके मुताबिक इन शिकायतों में प्रतिनियुक्ति, ट्रांसफर-पोस्टिंग और वर्तमान में चल रहे विकल्प से जुड़े मामलों सहित कई आरोप शामिल हैं।

    शिकायतकर्ता का दावा है कि शिकायतें कमिश्नर, सचिव, कलेक्टर और मंत्री स्तर तक भी पहुंचाई गई हैं। गौरहा का कहना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें अलग-अलग स्तरों पर पहुंचीं, तो प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी।

    इसी आधार पर वे सवाल उठा रहे हैं कि जांच की प्रक्रिया बार-बार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने तक ही क्यों सीमित रह जाती है और स्थापना शाखा के संबंधित कर्मचारी पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?

    कलेक्टर के जांच आदेश के बाद भी सवाल

    शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि हाल ही में कलेक्टर की ओर से सुनील यादव के खिलाफ जांच के निर्देश दिए गए थे। गौरहा का दावा है कि इसके बावजूद उन्होंने अपनी जगह एक चपरासी को बैठाकर स्थापना शाखा का काम करवाया।

    इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि शिकायतकर्ता का यह दावा सही पाया जाता है, तो यह भी जांच का विषय होगा कि किसी कर्मचारी को अपनी जगह किसी अन्य कर्मचारी से शाखा का कार्य कराने की अनुमति किस स्तर से दी गई थी।

    जांच की निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल

    पूरे मामले में शिकायतकर्ता का मुख्य सवाल जांच की निष्पक्षता को लेकर है। उनका कहना है कि उन्होंने जांच समिति के समक्ष सभी संबंधित दस्तावेज और तथ्य उपलब्ध कराए थे। उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर विजय टांडे की भूमिका पर निष्कर्ष निकाला गया, लेकिन उन्हीं रिकॉर्ड में सुनील यादव की भूमिका होने के उनके दावे पर स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया।

    अब सवाल यह है कि क्या जांच समिति संबंधित सभी कर्मचारियों की भूमिका की समान रूप से पड़ताल करेगी? क्या शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर सुनील यादव की भूमिका की भी अलग से जांच होगी? और यदि नहीं, तो इसका विभागीय आधार क्या है?

    इन सवालों का जवाब अब शिक्षा विभाग की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही स्पष्ट हो सकेगा।

    बीपी हुआ डाउन, चिकित्सकों ने कम बातचीत की दी सलाह; व्यापारी संघ सरकंडा ने आंदोलन के समर्थन में दुकानों को बंद रखने का किया आह्वान

    बिलासपुर। अरपा पार क्षेत्र के लिए पृथक नगर निगम की मांग को लेकर नागरिक सुरक्षा मंच के संयोजक एवं संस्थापक अमित तिवारी का आमरण अनशन पांचवें दिन भी जारी है। लगातार अनशन के चलते उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ने लगा है। बताया गया कि पांचवें दिन उनका ब्लड प्रेशर डाउन हुआ, जिसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें अधिक बातचीत नहीं करने की सलाह दी है।

    स्वास्थ्य में गिरावट के बावजूद अमित तिवारी अपनी मांग पर कायम हैं। उनका कहना है कि अरपा पार क्षेत्र के विकास और स्थानीय नागरिकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पृथक नगर निगम का गठन जरूरी है।

    पांच दिन से अनशन, प्रशासन पर उठ रहे सवाल

    जनहित से जुड़ी इस मांग को लेकर पांच दिनों से आमरण अनशन जारी रहने के बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अनशन के कारण स्वास्थ्य में लगातार गिरावट की बात सामने आने के बावजूद अमित तिवारी आंदोलन जारी रखे हुए हैं।

    उन्होंने कहा कि वे जनहित की इस मांग को लेकर पूरी दृढ़ता के साथ संघर्ष कर रहे हैं। अमित तिवारी के मुताबिक, “मैं सिर पर कफन बांधकर आया हूं और अंतिम दम तक संघर्ष करूंगा। जब तक मुझे ठोस आश्वासन नहीं मिल जाता, मेरा आमरण अनशन जारी रहेगा।”

    व्यापारी संघ सरकंडा ने दिया आंदोलन को समर्थन

    अरपा पार पृथक नगर निगम की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को अब व्यापारी वर्ग का भी समर्थन मिला है। व्यापारी संघ सरकंडा ने मांग के समर्थन में सरकंडा क्षेत्र की दुकानों को बंद रखने का आह्वान किया है।

    व्यापारी संघ ने क्षेत्र के विकास और पृथक नगर निगम की मांग के समर्थन में व्यापारियों से सहयोग की अपील की है। व्यापारी वर्ग के इस समर्थन से आंदोलन को और मजबूती मिलने की संभावना है।

    प्रशासन की अगली पहल पर नजर

    एक ओर अमित तिवारी का आमरण अनशन पांचवें दिन भी जारी है और उनके स्वास्थ्य में गिरावट की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से अब तक मांग पर कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है। ऐसे में आंदोलन को लेकर स्थिति गंभीर होती जा रही है।

    व्यापारी संघ के समर्थन के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अगली कार्रवाई पर है। देखना होगा कि अरपा पार पृथक नगर निगम की मांग और अमित तिवारी के स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन कब तक कोई ठोस पहल करता है।

    बिलासपुर / शौर्यपथ / पुलिस एवं अन्य वर्दीधारी अनुशासित बलों में बिना अनुमति ड्यूटी अथवा प्रशिक्षण छोड़कर लंबे समय तक अनुपस्थित रहना गंभीर परिणाम वाला कृत्य हो सकता है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कठिन परिस्थितियों या असुविधा के कारण प्रशिक्षण कैंप छोड़ देना डेजर्शन यानी सेवा से पलायन की श्रेणी में आ सकता है। अनुशासित बलों में इस तरह के आचरण को सामान्य नहीं माना जा सकता।
    जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने तीन आरक्षकों की याचिकाएं खारिज करते हुए उनकी सेवा से बर्खास्तगी के आदेश को उचित ठहराया है। याचिकाकर्ताओं त्रिलोक चंद साहू, तीरथ दास और लक्ष्मीनारायण पटेल की पुलिस विभाग में वर्ष 2008-09 में नियुक्ति हुई थी।
    // बिना अनुमति प्रशिक्षण बीच में छोड़ा //
    17 जून 2009 को तीनों आरक्षकों को महाराष्ट्र के चाकुर स्थित बीएसएफ स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर में बुनियादी प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था। हालांकि, तीनों ने बिना अनुमति प्रशिक्षण बीच में ही छोड़ दिया। इसके बाद विभाग ने 8 फरवरी 2010 को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा। जवाब के बाद 10 मार्च 2010 को तीनों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। विभागीय अपील और दया याचिकाएं भी खारिज होने के बाद तीनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
    // तीन वर्ष की सेवा पूरी नहीं होने का भी रहा महत्व //
    हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और संबंधित नियमों की समीक्षा करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने सेवा की तीन वर्ष की अवधि पूरी नहीं की थी, इसलिए वे स्थायी कर्मचारी नहीं थे। वर्दीधारी बलों में तैनात कर्मचारी सामान्य अथवा मामूली कारणों से लंबे समय तक अनुपस्थित नहीं रह सकते।
    कोर्ट ने यह भी कहा कि कठिन क्षेत्र में ड्यूटी या असुविधाजनक स्थान पर प्रतिनियुक्ति की आशंका के कारण प्रशिक्षण कैंप छोड़ देना डेजर्शन की श्रेणी में आता है। अनुशासित बलों में इस प्रकार के आचरण को किसी भी परिस्थिति में सामान्य नहीं माना जा सकता।
    // स्वास्थ्य कारणों का दिया हवाला //
    याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि उन्हें स्वीकृत पदों पर नियुक्त किया गया था और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से वे अनुपस्थित हुए थे। उनके अनुसार, उन्होंने चिकित्सा संबंधी दस्तावेज भी प्रस्तुत किए थे और विभागीय जांच के बिना की गई बर्खास्तगी को गलत बताया गया।
    राज्य सरकार ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि तीनों अस्थायी कर्मचारी थे। नियमों के तहत अस्थायी सरकारी कर्मचारी को एक महीने का नोटिस देकर सेवा से हटाया जा सकता है और ऐसे मामलों में विभागीय जांच अनिवार्य नहीं है।
    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष को स्वीकार करते हुए तीनों याचिकाएं खारिज कर दीं और बर्खास्तगी के आदेश को बरकरार रखा। इस फैसले से स्पष्ट है कि अनुशासित बलों में प्रशिक्षण और ड्यूटी के दौरान बिना अनुमति अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा तथा कठिन परिस्थितियों का हवाला देकर सेवा या प्रशिक्षण से पलायन को सामान्य कृत्य नहीं माना जा सकता।

    बिलासपुर / शौर्यपथ / बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल एवं ष्ठढ्ढत्र/स्स्क्क रजनेश सिंह के मार्गदर्शन में आर्यन फि़ल्म टीम द्वारा बुके नहीं, बुक भेंट करें अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य औपचारिक बुके की जगह किताबें, कॉपी-पेन एवं अध्ययन सामग्री भेंट कर शिक्षा और ज्ञान को प्रोत्साहित करना है।
    इसी क्रम में बिलासपुर ष्ठढ्ढत्र/स्स्क्क रजनेश सिंह द्वारा रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों के लिए उपहार स्वरूप कॉपी, पेन एवं अध्ययन सामग्री आर्यन फि़ल्म टीम को प्रदान की गई। यह सामग्री आर्यन फि़ल्म की टीम द्वारा स्कूलों में पहुंचकर बहनों के बीच वितरित की जाएगी। इस अवसर पर आर्यन फि़ल्म की ओर से डायरेक्टर रामा नन्द तिवारी, दिनेश चंदानी (होटल बंशीवाला), रूह्म्ह्य. क्कह्म्ड्डठ्ठह्लद्बद्मड्ड क्चद्धड्डह्म्स्र2ड्डद्भ (स्ढ्ढ), उमा शंकर पाण्डेय , सनी मनीष भटेजा, जीतेन्द्र सिदार एवं रवि सहित टीम के सदस्य उपस्थित रहे।

    फरार आरोपियों की सूचना देने पर मिलेगा ईनाम
    बिलासपुर / शौर्यपथ / पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा थाना तोरवा, जिला बिलासपुर में दर्ज अपराध के फरार आरोपियों की सूचना देने वालों के लिए 5 हजार रूपये के ईनाम की घोषणा की गई है। थाना तोरवा में दर्ज अपराध के आरोपी अर्जुन यादव, पिता बहोरिक यादव, उम्र 25 वर्ष, निवासी पंचायत भवन के पास महमंद, थाना तोरवा एवं आरोपी गोविंदा पासी, पिता जय सिंह पासी, उम्र 25 वर्ष, निवासी काली मंदिर के पास लालखदान तोरवा, थाना तोरवा जिला बिलासपुर (छ.ग.) के संबंध में सूचना देने वाले व्यक्ति को 5 हजार रूपये का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा एवं पुरस्कार वितरण के संबंध में पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जिला बिलासपुर का निर्णय अंतिम होगा।
    इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर 07752-223330, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, शहर बिलासपुर 9479193002, पुलिस नियंत्रण कक्ष, बिलासपुर 07752-228504, मो.नं. 9479193099, थाना प्रभारी, तोरवा मो.नं. 9479193021 पर संपर्क किया जा सकता है।

    दिशा समिति की बैठक में आजीविका, आवास, जैविक खेती, स्वच्छता, सिंचाई, सड़क और कुपोषण की स्थिति की हुई विस्तृत समीक्षा, पात्र हितग्राहियों को समय पर योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश

    रायपुर/ सांसद लोकसभा क्षेत्र बिलासपुर एवं केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने आज गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के कलेक्ट्रेट के अरपा सभा कक्ष में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में केन्द्र एवं राज्य शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं तथा विकास कार्यों की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने, पात्र हितग्राहियों को समय पर योजनाओं का लाभ पहुंचाने तथा निर्माणाधीन कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

    बैठक में ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा करते हुए श्री साहू ने स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और उनकी आय में वृद्धि के लिए स्थानीय संसाधनों एवं संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।

    प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्माणाधीन आवासों को शीघ्र पूर्ण कराने तथा हितग्राहियों को आवास निर्माण में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसी तरह व्यक्तिगत एवं सामुदायिक शौचालयों के लंबित कार्यों को भी प्राथमिकता से पूरा करने कहा। पीएम जनमन योजना के तहत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बनाए जा रहे संपर्क मार्गों की समीक्षा करते हुए उन्होंने विभागीय समन्वय से निर्माण में आ रही बाधाओं का शीघ्र निराकरण करने और सड़कों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

    विष्णुभोग धान-चावल की पहचान को मिले नई दिशा

    श्री साहू ने जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिले की विशिष्ट पहचान विष्णुभोग धान-चावल की उत्पादकता बढ़ाने, प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने तथा बेहतर विपणन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में ठोस प्रयास करने कहा, ताकि किसानों को स्थानीय उत्पाद का अधिक लाभ मिल सके।

    स्वच्छता की समीक्षा के दौरान उन्होंने नगरीय क्षेत्रों में नियमित कचरा संग्रहण और स्वच्छता व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वच्छता सर्वेक्षण से संबंधित वास्तविक एवं अद्यतन जानकारी पोर्टल पर दर्ज कराने पर भी विशेष जोर दिया।

    सिंचाई, स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष ध्यान

    जिले में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए जल निकायों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। श्री साहू ने पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए सघन टीकाकरण अभियान चलाने, कुपोषित बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए प्रभावी प्रयास करने तथा टीबी उन्मूलन और मलेरिया नियंत्रण के लिए विभागीय स्तर पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने कहा। उन्होंने जिले में शत-प्रतिशत पात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाने पर भी विशेष जोर दिया।

    लंबित राजस्व प्रकरणों के शत-प्रतिशत निराकरण के निर्देश

    केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री साहू ने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त अधिकांश प्रकरण राजस्व विभाग से संबंधित हैं। उन्होंने कलेक्टर को निर्देशित किया कि नक्शा-बटांकन, सीमांकन, नामांतरण, त्रुटि सुधार सहित सभी लंबित राजस्व प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

    सार्वजनिक वितरण प्रणाली की समीक्षा करते हुए उन्होंने उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न की निर्बाध और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने कहा। शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान उन्होंने सभी जिला अधिकारियों को विद्यालयों का नियमित भ्रमण कर बच्चों एवं शिक्षकों की उपस्थिति, अध्ययन-अध्यापन व्यवस्था और मध्यान्ह भोजन की स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए। उन्होंने आगामी बोर्ड परीक्षाओं में जिले के परीक्षा परिणाम को और बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रयास करने कहा।

    श्री साहू ने मत्स्य पालन, श्रम विभाग सहित सभी विभागों की योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़कर लाभान्वित करने के निर्देश दिए।

    विकास योजनाओं की उपलब्धियों से समिति को कराया गया अवगत

    बैठक में कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने जिले में संचालित विकास कार्यों एवं विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। विभागीय अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से योजनाओं की उपलब्धियों एवं प्रगति से समिति को अवगत कराया।

    बैठक में बताया गया कि वीबी-जी रामजी योजना के तहत जिले में कुल 64 हजार 174 जॉबकार्डधारी परिवार पंजीकृत हैं। श्रम बजट वर्ष 2026-27 में अब तक 9 लाख 96 हजार मानव दिवस का सृजन किया जा चुका है। बिहान समूह से जुड़ी 18 हजार 148 दीदियों को लखपति दीदी की श्रेणी में शामिल किया जा चुका है।

    प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिले में अब तक 46 हजार 151 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। गौरेला विकासखंड में संचालित पीएम जनमन योजना के तहत स्वीकृत 1,080 आवासों में से 865 आवास पूर्ण हो चुके हैं। सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत 36 हजार 924 हितग्राहियों को पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है।

    53 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खरीफ बोनी पूर्ण

    कृषि विभाग की जानकारी के अनुसार खरीफ वर्ष 2026 में निर्धारित 58 हजार 693 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 53 हजार 99 हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी पूर्ण हो चुकी है।

    जिले में 839 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं, जहां 23 हजार 993 बच्चे दर्ज हैं। बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से पूरक पोषण आहार प्रदान किया जा रहा है।

    69 हजार से अधिक घरों में पहुंचा नल का पानी

    आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले में अब तक 3 लाख 16 हजार 675 लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जबकि 24 हजार 248 लोगों के कार्ड बनना शेष है। श्री साहू ने शेष पात्र लोगों के कार्ड शीघ्र बनाने के निर्देश दिए।

    जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 563 योजनाओं में से 245 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। योजना के अंतर्गत 84 हजार 901 घरों के लक्ष्य के विरुद्ध 69 हजार 808 घरों में नल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं, जिनमें 55 हजार 800 क्रियाशील नल कनेक्शन शामिल हैं।

    जिले में 209 उचित मूल्य दुकानें संचालित हैं तथा कुल 1 लाख 16 हजार 319 राशन कार्डधारक हैं। बैठक में केन्द्र एवं राज्य शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विभागवार समीक्षा करते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।

    बैठक में विधायक कोटा श्री अटल श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैकरा, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद गौरेला श्री मुकेश दुबे, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद पेंड्रा श्री राकेश जालान, अध्यक्ष जनपद पंचायत गौरेला श्री शिवनाथ बघेल, अध्यक्ष जनपद पंचायत मरवाही श्रीमती जानकी कुशरो, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित थे।

    स्वच्छता अभियान के दावों पर सवाल, बदबू और मच्छरों से परेशान लोग; जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठी मांग

    रिपोर्टर: कृष्णा मंडल

    लोकेशन: दंतेवाड़ा (बचेली)

    बचेली। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावे करने वाली बचेली नगरपालिका अपनी ही कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में है। एक ओर सड़क पर कचरा फेंकने वाले दुकानदारों और आम नागरिकों पर जुर्माना लगाकर कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नगरपालिका द्वारा तोड़ी गई नाली का मलबा पिछले 15 से 20 दिनों से मुख्य सड़क किनारे पड़ा हुआ है। इससे आसपास के लोगों को बदबू, मच्छरों और आवागमन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

    जानकारी के अनुसार, पुरानी मार्केट स्थित पेट्रोल पंप के सामने नई नाली निर्माण के लिए पुरानी नाली तोड़ी गई थी। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद निकला मलबा सड़क किनारे ही छोड़ दिया गया। कई दिन बीत जाने के बावजूद न तो निर्माण कार्य पूरा हुआ और न ही मलबा हटाया गया। बारिश के कारण नाली में पानी भरने से दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है।

    गौरतलब है कि 17 जुलाई 2026 को नगरपालिका ने मुख्य मार्ग पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर सड़क पर कचरा फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की थी। उस दौरान शहर को स्वच्छ रखने और नियमों का कड़ाई से पालन कराने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे। लेकिन वर्तमान स्थिति उन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि आम लोगों द्वारा सड़क पर कचरा फेंकने पर तत्काल चालानी कार्रवाई की जाती है, तो नगरपालिका की इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसी की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उनका सवाल है कि क्या नियम केवल आम जनता के लिए हैं, या सरकारी विभागों पर भी समान रूप से लागू होते हैं?

    अब शहरवासियों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। देखना होगा कि स्वच्छता अभियान के नाम पर जनता पर सख्ती दिखाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की इस लापरवाही पर भी कोई कार्रवाई होती है या मामला केवल दावों और कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

    (यदि नगरपालिका या संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

    2,446 अधिवक्ता चुनेंगे नई कार्यकारिणी, महिला आरक्षण ने बढ़ाई चुनावी दिलचस्पी; बड़े बार नेताओं के बीच अध्यक्ष पद पर कड़ा मुकाबला

    बिलासपुर / शौर्यपथ / जिला बार एसोसिएशन चुनाव-2026 का चुनावी परिदृश्य पूरी तरह स्पष्ट हो गया है। नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब 14 पदों के लिए 49 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। 25 जुलाई को होने वाले मतदान में 2,446 अधिवक्ता अपने मताधिकार का प्रयोग कर नई कार्यकारिणी का चुनाव करेंगे। मतगणना 26 जुलाई को होगी।

    इस बार मतदाताओं की संख्या पहले की तुलना में अधिक होने के कारण प्रत्याशियों के लिए सभी अधिवक्ताओं तक व्यक्तिगत रूप से पहुंचकर प्रचार करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। जिला न्यायालय परिसर में चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म है और प्रत्याशी लगातार जनसंपर्क में जुटे हुए हैं।

    चुनावी कार्यक्रम

    निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 16 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच में सभी 50 नामांकन वैध पाए गए। 17 जुलाई को नाम वापसी के बाद एक प्रत्याशी के हटने से अब 49 उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं। 21 जुलाई को डाक मतपत्र (पोस्टल बैलेट) के लिए आवेदन लिए जाएंगे, 23 जुलाई को पोस्टल बैलेट से मतदान होगा, जबकि 25 जुलाई को सुबह 10:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक सामान्य मतदान कराया जाएगा।

    किस पद पर कितने उम्मीदवार
    अध्यक्ष – 4 प्रत्याशी
    उपाध्यक्ष – 6 प्रत्याशी
    उपाध्यक्ष (कनिष्ठ महिला आरक्षित) – 2 प्रत्याशी
    सचिव – 8 प्रत्याशी
    कोषाध्यक्ष – 4 प्रत्याशी
    सहसचिव – 5 प्रत्याशी
    ग्रंथालय सचिव – 3 प्रत्याशी
    सांस्कृतिक सचिव – 3 प्रत्याशी
    कार्यकारिणी सदस्य – 11 प्रत्याशी
    महिला कार्यकारिणी सदस्य – 3 प्रत्याशी
    महिला आरक्षण ने बढ़ाई चुनावी सरगर्मी

    इस बार महिला आरक्षण चुनाव का प्रमुख आकर्षण बना हुआ है। महिला उपाध्यक्ष पद पर दीपाली मजूमदार और राधा रजक के बीच सीधा मुकाबला है। वहीं कोषाध्यक्ष पद महिला आरक्षित होने के कारण इस पद पर चार महिला प्रत्याशी चुनाव लड़ रही हैं। सचिव पद पर नूपुर पाल एकमात्र महिला उम्मीदवार हैं, जिससे यह मुकाबला भी विशेष चर्चा में है।

    अध्यक्ष पद पर दिग्गज आमने-सामने

    बार चुनाव का सबसे प्रतिष्ठित मुकाबला अध्यक्ष पद पर माना जा रहा है। इस पद पर चार उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें अनुराग बाजपेई और चंद्रशेखर बाजपेई पहले भी जिला बार एसोसिएशन का नेतृत्व कर चुके हैं। अनुभव और संगठनात्मक पकड़ के कारण यह मुकाबला बेहद रोचक माना जा रहा है।

    गैर-राजनीतिक चुनाव, लेकिन राजनीतिक चर्चा भी तेज

    औपचारिक रूप से जिला बार एसोसिएशन का चुनाव गैर-राजनीतिक माना जाता है, लेकिन अधिवक्ता परिषद के पिछले चुनावों के बाद विभिन्न विचारधाराओं और समूहों की सक्रियता इस चुनाव में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। अधिवक्ताओं के बीच समर्थन जुटाने के लिए विभिन्न पैनल और समूह लगातार संपर्क अभियान चला रहे हैं।

    अब सभी की निगाहें 25 जुलाई के मतदान और 26 जुलाई को आने वाले परिणामों पर टिकी हैं, जो जिला बार एसोसिएशन की नई नेतृत्व टीम का फैसला करेंगे।

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए एक 6 वर्षीय मासूम की जान बचा ली है। बैगा जनजाति के इस बालक ने खेलते समय गलती से सिक्का निगल लिया था, जो उसकी आहार नली (अन्ननली) में फंस गया था। डॉक्टरों की टीम ने बेहद जटिल और आपातकालीन स्थिति में सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर सिक्के को बाहर निकाला।
    पेंड्रा से सिम्स बिलासपुर किया गया था रेफर
    जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के कोटा तहसील अंतर्गत ग्राम सरगोंड का निवासी 6 वर्षीय बालक नरेंद्र खेलते समय सुबह करीब 7 बजे अचानक सिक्का निगल गया। इसके तुरंत बाद उसे कुछ भी निगलने में अत्यधिक परेशानी होने लगी। परिजन आनन-फानन में उसे पेंड्रा के एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बालक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया गया।
    डॉक्टरों के समन्वित प्रयास से मिली सफलता
    बालक को शाम करीब 6.30 बजे सिम्स लाया गया, जिसके बाद अस्पताल का पूरा अमला सक्रिय हो गया। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने तत्काल एक्स-रे कर अन्ननली के ऊपरी भाग (श्वासनली के मुहाने के ठीक पीछे) में फंसे सिक्के की सटीक लोकेशन की पहचान की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति की टीम ने बच्चे को सामान्य एनेस्थीसिया दिया। इसके बाद ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरती पाण्डेय एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने रिजिड इसोफैगोस्कोपी तकनीक के जरिए अत्यंत सावधानी से सिक्के को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के संपन्न हुई और ऑपरेशन के बाद बालक की स्थिति पूरी तरह सामान्य और संतोषजनक है।
    विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता का परिणाम
    इस सफल उपचार पर सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और ईएनटी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता, आधुनिक तकनीकों और आपसी तालमेल के कारण ही इस जटिल आपातकालीन मामले को समय पर सुलझाया जा सका। सिम्स का लक्ष्य हर मरीज को सुरक्षित और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं देना है।
    चिकित्सा अधीक्षक और डॉक्टरों ने अभिभावकों के लिए जारी की सलाह
    चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने आगाह किया कि छोटे बच्चों द्वारा सिक्का, बटन, बैटरी या चुंबक जैसी चीजें निगलना एक गंभीर आपात स्थिति है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार के घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय सीधे विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचना चाहिए। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पाण्डेय ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की पहुंच से सिक्के, छोटी बैटरी और छोटे खिलौने दूर रखें। यदि बच्चा कोई वस्तु निगल लेता है और उसे लार टपकने, गले में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें, तो बिना समय गंवाए तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करें।

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