August 09, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    राजनांदगांव,  / शौर्यपथ /
    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने शुक्रवार को दिग्विजय स्टेडियम पहुंचकर शतरंज प्रशिक्षण ले रहे नन्हें खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनकी प्रतिभा की सराहना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि राजनांदगांव में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और आने वाले समय में शहर को “शतरंज हब” के रूप में विकसित किया जाएगा।

    डॉ. रमन सिंह ने कहा कि शतरंज केवल एक खेल नहीं, बल्कि बौद्धिक क्षमता और रणनीतिक सोच को विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि सरकार शतरंज को विशेष प्राथमिकता देते हुए ऐसी कार्ययोजना तैयार करेगी, जिससे राजनांदगांव राज्य में शतरंज का प्रमुख केंद्र बन सके।

    उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को केवल औपचारिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि वर्षभर निरंतर अभ्यास, प्रतियोगिताएं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। उभरती प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।

    दिग्विजय स्टेडियम बनेगा “चैंपियंस की नर्सरी”

    विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि दिग्विजय स्टेडियम अब केवल खेल मैदान नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य के चैंपियन तैयार करने की नर्सरी के रूप में विकसित होगा। उन्होंने बताया कि स्टेडियम में लगभग 29 लाख रुपए की लागत से आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही शतरंज जैसे बौद्धिक खेलों को बढ़ावा देकर युवाओं को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है।

    नन्हीं खिलाड़ी माहिका डाकलिया की प्रतिभा की सराहना

    इस अवसर पर डॉ. रमन सिंह ने सात वर्षीय शतरंज खिलाड़ी माहिका डाकलिया से भी मुलाकात की। कक्षा दूसरी में अध्ययनरत माहिका ने आत्मविश्वास के साथ बताया कि वे गत वर्ष उड़ीसा के खुर्दा रोड में आयोजित राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता में अंडर-7 वर्ग में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

    नन्हीं खिलाड़ी की उपलब्धि और आत्मविश्वास से प्रभावित होकर विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी सराहना की तथा उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

    कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षकों, अभिभावकों एवं खेल प्रेमियों में भी विशेष उत्साह देखने को मिला।

    हरी खाद, खरीफ तैयारी और पशुपालन प्रबंधन पर विशेष जोर

    राजनांदगांव,   / शौर्यपथ /
    कृषि विज्ञान केन्द्र सुरगी द्वारा जिले एवं आसपास के किसानों के लिए मौसम आधारित समसामयिक कृषि सलाह जारी की गई है। केन्द्र ने किसानों को खरीफ सीजन की तैयारी समय रहते पूरी करने, हरी खाद अपनाने और संतुलित कृषि प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की अपील की है।

    हरी खाद की बुवाई का उपयुक्त समय

    कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मूंग, ढैंचा एवं सनई जैसी हरी खाद की फसलों की बुवाई 15 मई से जून अंत तक सबसे उपयुक्त रहती है। खरीफ की मुख्य फसल विशेषकर धान की रोपाई से लगभग 45 से 50 दिन पूर्व हरी खाद बोनी चाहिए। मानसून की पहली बारिश या सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने पर किसान इसकी बुवाई शुरू कर सकते हैं।

    विशेषज्ञों ने बताया कि 35 से 40 दिन बाद जब हरी खाद की फसल में फूल आने लगें, तब उसे रोटावेटर या हल की सहायता से मिट्टी में दबा देना चाहिए। इससे मिट्टी में नाइट्रोजन एवं जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ती है और यूरिया जैसे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।

    मृदा परीक्षण और खेत तैयारी पर जोर

    कृषि विज्ञान केन्द्र ने किसानों को सलाह दी है कि खरीफ फसल की बोनी से पहले खेतों की मृदा जांच अवश्य कराएं और रिपोर्ट के अनुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है तथा रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव कम होते हैं।

    साथ ही खेतों में उपयोग होने वाले कृषि यंत्रों एवं उपकरणों की मरम्मत समय रहते कर लेने तथा मिट्टी पलट हल (एमबी प्लाव) से गहरी जुताई करने की सलाह दी गई है। खेतों को पॉलिथीन से ढंकने से खरपतवार, मृदा जनित रोग एवं कीटों के अंडों को नष्ट करने में मदद मिलती है।

    धान की सीधी बुवाई के लिए मई के अंतिम सप्ताह से जून के दूसरे सप्ताह तक का समय उपयुक्त बताया गया है।

    उन्नत बीजों की व्यवस्था करें किसान

    कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खरीफ सीजन के लिए उन्नत किस्मों के बीज समय पर उपलब्ध रखने की सलाह दी है। इनमें प्रमुख रूप से—

    • धान: इंद्रावती, एमटीयू-1153, विक्रम टीसीआर, छत्तीसगढ़ धान-1919
    • सोयाबीन: आरएससी-10-46, आरएससी-11-15, आरएससी-11-07
    • अरहर: छत्तीसगढ़ अरहर-1, छत्तीसगढ़ अरहर-2, राजीवलोचन
    • मक्का: पूसा हाईब्रिड-1, विवेक संकर-51, सीजी अगेती संकर मक्का-1
    • मूंग: पीकेवीएकेएम-4, मालवीय ज्योति, शिखा

    फल उद्यान और सब्जी खेती की तैयारी

    फल उद्यान लगाने के इच्छुक किसानों को 1×1×1 मीटर आकार के गड्ढे तैयार कर धूप में खुला छोड़ने की सलाह दी गई है। आम की दशहरी, लंगड़ा, छत्तीसगढ़ नंदीराज तथा अमरूद की इलाहाबाद सफेदा एवं लखनऊ-49 जैसी किस्मों के पौधे लगाने की अनुशंसा की गई है।

    केला एवं पपीता में टपक सिंचाई होने पर प्रतिदिन शाम को एक घंटे सिंचाई तथा सामान्य स्थिति में 3-4 दिन के अंतराल पर सिंचाई करने की सलाह दी गई है। पपीता के लिए पूसा नन्हा एवं पूसा डवार्फ किस्म उपयुक्त बताई गई है।

    वर्षाकालीन सब्जियों जैसे भिंडी, भटा, मिर्च, खीरा, कद्दू, लौकी, मूली एवं फूलगोभी की खेती के लिए खेत तैयार करने और बीज व्यवस्था करने को कहा गया है। भिंडी एवं भटे में फल बेधक कीट नियंत्रण हेतु प्रति एकड़ 10 फिरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है।

    पशुपालकों के लिए भी महत्वपूर्ण सुझाव

    गर्मी के मौसम को देखते हुए दुधारू पशुओं को दिन में 4-5 बार ताजा पानी पिलाने और प्रतिदिन 50-60 ग्राम नमक खिलाने की सलाह दी गई है। अधिक दूध उत्पादन के लिए 25-30 किलो हरा चारा तथा सूखे और हरे चारे का अनुपात 3:1 रखने को कहा गया है।

    पशुओं को प्रतिदिन 25-30 ग्राम मिनरल मिक्सचर खिलाने तथा पशु बाड़ों को हवादार एवं ठंडा रखने के लिए गीले बारदाने लटकाने की सलाह भी दी गई है।

    राजनांदगांव,  / शौर्यपथ /
    सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिलेभर में चलाए जा रहे जनजागरूकता अभियान के तहत जनपद पंचायत डोंगरगांव के ग्राम पंचायत बनहरदी में “स्वच्छता त्योहार” उत्साह, सहभागिता और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाया गया।

    कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने स्वयं आगे बढ़कर गांव की सड़कों, नालियों, सार्वजनिक स्थलों एवं आसपास के क्षेत्रों में व्यापक साफ-सफाई अभियान चलाया। स्वच्छ वातावरण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देते हुए ग्रामीणों को स्वच्छता को दैनिक आदत बनाने के लिए प्रेरित किया गया।

    इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एमएल चंद्रवंशी ने सर्वोच्च न्यायालय के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि गांवों में स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण बनाए रखने के लिए हर ग्राम पंचायत को इन नियमों का गंभीरता से पालन करना होगा। उन्होंने कचरे के पृथक्करण, ठोस एवं तरल अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।

    जनपद पंचायत डोंगरगांव की मुख्य कार्यपालन अधिकारी रोशनी भगत टोप्पो एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था को सफल बनाने तथा समय पर यूजर चार्ज जमा करने की अपील की। कार्यक्रम में गांव को स्वच्छ, सुंदर और स्वास्थ्यप्रद बनाए रखने का सामूहिक संकल्प भी दिलाया गया।

    डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण कार्य में जुटे स्वच्छाग्रहियों का श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया, जिससे कार्यक्रम में सेवा और सम्मान का भाव भी देखने को मिला।

    कार्यक्रम में ग्राम पंचायत की सरपंच पूजा साहू, उपसरपंच भुवन साहू, जिला समन्वयक डॉ. छोटे लाल साहू, यूनिसेफ एसीई से बसंत मरकामड़े, मेघा कुर्रे, करारोपण अधिकारी वीरेंद्र तिवारी, ओपी जैन, कुंदन लाल मांडवी, पंच, उप अभियंता, तकनीकी सहायक, अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

    शौर्यपथ विशेष 

    दुर्ग। शहर के तकियापारा क्षेत्र में संचालित एक बड़े कबाड़ गोदाम की तस्वीरें अब प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। खुले मैदान में भारी मात्रा में प्लास्टिक, लोहे और अन्य कबाड़ सामग्री का भंडारण, चारों तरफ फैली अव्यवस्था और बीच बस्ती में संचालित यह कारोबार अब स्थानीय नागरिकों के लिए चिंता का विषय बन चुका है।

    तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह बड़े पैमाने पर कबाड़ सामग्री खुले में जमा की गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह केवल एक गोदाम नहीं, बल्कि अव्यवस्थित और विवादित कबाड़ कारोबार का केंद्र बन चुका है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यहां दिनभर संदिग्ध गतिविधियां चलती रहती हैं और कई बार चोरी के सामान की खरीदी-बिक्री को लेकर भी चर्चाएं सामने आती रही हैं।

    “साबिर कबाड़ी” का नाम फिर चर्चा में

    क्षेत्र में लंबे समय से संचालित इस कारोबार को लेकर “साबिर कबाड़ी” का नाम लगातार विवादों में सामने आता रहा है। पूर्व में प्रशासनिक कार्रवाई, पुलिस जांच और शिकायतों के बावजूद कारोबार पर स्थायी नियंत्रण नहीं दिखने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। हालांकि किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष और दोष सिद्ध होना प्रशासनिक एवं न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।

    अपराध का पहला पायदान बनता कबाड़ कारोबार?

    सामाजिक जानकारों का मानना है कि चोरी की छोटी घटनाओं के पीछे कबाड़ नेटवर्क बड़ी भूमिका निभाता है। नशे और गलत संगति में पड़े युवक छोटी-मोटी चोरी कर कबाड़ियों को सामान बेच देते हैं, जिससे अपराध की प्रवृत्ति धीरे-धीरे बढ़ती चली जाती है। यही कारण है कि पुलिस व्यवस्था में कबाड़ कारोबार को अपराध जगत की शुरुआती कड़ी माना जाता है।

    निगम और पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल

    नगर निगम नियमों के अनुसार घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस प्रकार खुले रूप से कबाड़ भंडारण और व्यवसाय पर नियंत्रण आवश्यक माना जाता है। इसके बावजूद यदि वर्षों से विवादित कारोबार जारी है, तो सवाल यह भी उठता है कि आखिर कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर क्यों रह जाती है?

    अब शहरवासियों की नजर नगर निगम आयुक्त और पुलिस प्रशासन पर टिकी हुई है। लोगों की मांग है कि ऐसे गोदामों की नियमित जांच हो, अवैध भंडारण हटाया जाए, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड अनिवार्य किया जाए और चोरी के सामान की खरीद-बिक्री में संलिप्त पाए जाने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

    शहर की जनता अब केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि परिणाम चाहती है — ताकि अपराध को जन्म देने वाले ऐसे अवैध नेटवर्क पर स्थायी रूप से रोक लग सके।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दी बधाई, कहा - आकांक्षी क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध

    सेंट्रल इंडिया ज़ोन में उत्कृष्ट प्रदर्शन, अक्टूबर–दिसंबर 2025 तिमाही में हासिल की बड़ी उपलब्धि

    रायपुर / नीति आयोग के मार्गदर्शन में संचालित “चैंपियंस ऑफ चेंज" कार्यक्रम के अंतर्गत बीजापुर जिले के उसूर विकासखण्ड ने अक्टूबर–दिसंबर 2025 तिमाही में सेंट्रल इंडिया ज़ोन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया है।

    यह उपलब्धि राज्य सरकार की जनकेंद्रित विकास सोच, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण मान्यता है।यह सफलता केवल बीजापुर जिले तक सीमित नहीं, बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल की प्रभावशीलता को भी रेखांकित करती है। विशेष रूप से आकांक्षी और दूरस्थ क्षेत्रों में शासन की योजनाओं की प्रभावी पहुंच, सेवा प्रदायगी में सुधार तथा विकास संकेतकों में सकारात्मक परिवर्तन को इस उपलब्धि ने राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी है।

    उल्लेखनीय है कि नीति आयोग द्वारा संचालित “Champions of Change” कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं संबद्ध सेवाएं, आधारभूत संरचना तथा सामाजिक विकास जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर विकासखण्डों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है। उसूर विकासखण्ड ने विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, बेहतर परिणामों तथा विभागीय समन्वय के आधार पर यह उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित की है।
    इस उपलब्धि के पीछे बीजापुर जिले द्वारा अपनाया गया “3C मॉडल” — Convergence (अभिसरण), Collaboration (सहयोग) एवं Competition (प्रतिस्पर्धा) महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है। इस मॉडल के माध्यम से योजनाओं के अभिसरण, जनभागीदारी, विभागीय तालमेल तथा सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित कर परिणाम आधारित कार्य संस्कृति विकसित की गई।

    Convergence (अभिसरण) के अंतर्गत स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, पंचायत, शिक्षा, कृषि सहित अन्य विभागों की योजनाओं को समेकित रूप से क्रियान्वित किया गया। Collaboration (सहयोग) के माध्यम से मैदानी अमले, जनप्रतिनिधियों तथा समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई, वहीं Competition (प्रतिस्पर्धा) के जरिए विकासखण्ड स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया गया।

    "नीति आयोग के ' चैंपियंस ऑफ चेंज' कार्यक्रम में बीजापुर के उसूर विकासखण्ड का राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त करना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और विश्वास का क्षण है।

    यह उपलब्धि बताती है कि हमारा छत्तीसगढ़ अब आकांक्षी क्षेत्रों में भी विकास, सुशासन और जनकल्याण के नए मानक स्थापित कर रहा है। कभी चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाले दूरस्थ अंचल आज स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, आधारभूत सुविधाओं और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।

    यह सफलता हमारी जनकेंद्रित विकास सोच, विभागीय समन्वय, सतत मॉनिटरिंग और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता का परिणाम है। - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

    *रायपुर, /पश्चिम एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। खाद्य विभाग के अनुसार प्रदेश के 2516 पेट्रोल-डीजल पंपों पर 22 मई 2026 की स्थिति में 4.35 करोड़ लीटर पेट्रोल और 8.15 करोड़ लीटर डीजल का स्टॉक मौजूद है।

    राज्य को प्रतिदिन आपूर्ति जारी है। 21 मई को ही 32.52 लाख लीटर पेट्रोल और 57.60 लाख लीटर डीजल की प्राप्ति हुई है। लखौली, मंदिर हसौद और गोपालपुर स्थित ऑयल कंपनी डिपो से जिलों को मांग के अनुसार सप्लाई की जा रही है। रबी फसल कटाई और खरीफ की तैयारी के कारण डीजल की मांग में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसे ध्यान में रखकर आपूर्ति बढ़ाई गई है।

    ड्रम-जेरीकेन में बिक्री प्रतिबंधित, किसानों को छूट
    राज्य शासन ने 22 मई को जारी आदेश में सभी पेट्रोल-डीजल पंपों पर ड्रम, बोतल और जेरीकेन में ईंधन की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है। उल्लंघन पर मोटर स्पिरिट और उच्च वेग डीजल आदेश 2005 के तहत ‘अप्राधिकृत विक्रय’ मानकर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई होगी।

    हालांकि रबी-खरीफ सीजन के लिए किसानों, कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित शासकीय निर्माण कार्यों और अस्पताल, मोबाइल टावर जैसी अत्यावश्यक सेवाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। इनके लिए अनुविभागीय अधिकारी के परीक्षण के बाद सुरक्षा मानकों के अनुरूप बिक्री की अनुमति होगी।

    पैनिक खरीदारी से बचने की अपील
    सचिव खाद्य ने 20 मई को सभी ऑयल कंपनियों के साथ समीक्षा बैठक कर ड्राई आउट होने वाले पंपों को तत्काल स्टॉक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। सरकार ने आम उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अफवाहों से प्रभावित होकर पैनिक खरीदारी या संग्रहण न करें। राज्य में ईंधन की आपूर्ति सुगम बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।

    रायपुर, /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत आरंग विकासखंड के ग्राम कोसरंगी के बाजार चौक में आयोजित चौपाल में ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गांव, गरीब, किसान, महिलाओं और युवाओं के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा सुशासन तिहार के माध्यम से शासन-प्रशासन स्वयं जनता के बीच पहुंचकर समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में संचालित सुशासन तिहार आगामी 10 जून तक जारी रहेगा, जिसके माध्यम से अधिकारी गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं और मौके पर समाधान की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के सुख-दुख में सहभागी बनकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बनने के बाद प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं, ताकि गरीब परिवारों का पक्के घर का सपना पूरा हो सके। उन्होंने ग्रामीणों से शासन की योजनाओं का लाभ लेकर अपने जीवन स्तर को बेहतर बनाने का आह्वान किया।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का विशेष उल्लेख करते हुए ग्रामीणों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत घरों में सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं, जिससे बिजली बिल में कमी आएगी और अतिरिक्त बिजली बेचकर आय अर्जित करने का अवसर भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सूरज केवल रोशनी नहीं, बल्कि नई संभावनाएं भी लेकर आया है और ग्रामीणों को इस योजना का अधिकाधिक लाभ लेना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने किसानों को सौर सुजला योजना की जानकारी देते हुए सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को आधुनिक, किफायती और टिकाऊ सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है, ताकि खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सके।

    मुख्यमंत्री ने स्वामित्व योजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का कानूनी अधिकार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीणों को बैंक ऋण प्राप्त करने में सुविधा होगी और प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्का मकान बनाने की प्रक्रिया भी आसान होगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छह हितग्राहियों को स्वामित्व योजना के तहत पट्टे वितरित किए। इनमें रूपचंद साहू, जीवराखन साहू, गोविंदराम साहू, हीरालाल साहू, रघुराम तथा गीताबाई साहू शामिल हैं। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें अपनी संपत्ति का वैधानिक अधिकार प्राप्त हुआ है।

    कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार युवाओं को कौशल विकास, स्वरोजगार और रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने युवाओं से शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।

    चौपाल के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों को लाभान्वित भी किया गया।

    इस अवसर पर कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, संभाग आयुक्त श्री श्याम धावड़े, कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

    डेयरी, मत्स्य और बहुउद्देशीय पैक्स को सशक्त बनाने पर मंथन, अनाज भंडारण योजना की प्रगति की समीक्षा

    रायपुर, / प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की “सहकार से समृद्धि” की संकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय द्वारा नवा रायपुर में पूर्वी क्षेत्र के छह राज्यों की एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुई।

    सचिव डॉ. भूटानी ने की अध्यक्षता

    कार्यशाला की अध्यक्षता केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने की। इसमें सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक, आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुख बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारी कार्यशाला में शामिल हुए।

    यह कार्यशाला ग्रामीण विकास, किसानों की आय वृद्धि और सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। सहकारिता आधारित योजनाओं से गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा किसान, पशुपालक और मत्स्य पालक आत्मनिर्भर बनेंगे।

    केंद्रीय योजनाओं की हुई समीक्षा

    बैठक में केंद्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की पहल पर संचालित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। सहकारी संस्थाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने की रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ।

    पैक्स को बहुउद्देशीय बनाने पर जोर

    डेयरी, मत्स्य एवं बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के गठन और सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर दिया गया। देशभर में 2 लाख नई डेयरी, मत्स्य एवं बहुउद्देशीय पैक्स समितियों के गठन की दिशा में हो रही प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही विश्व की सबसे बड़ी सहकारी अनाज भंडारण योजना के क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

    विशेषज्ञों ने बताया कि पैक्स समितियों को केवल ऋण वितरण तक सीमित न रखकर बहुउद्देशीय ग्रामीण सेवा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत खाद-बीज वितरण, धान खरीदी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, डेयरी, मत्स्य पालन, वेयरहाउसिंग और ग्रामीण उद्यमिता जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे किसानों और ग्रामीणों को गांव स्तर पर ही बेहतर सुविधाएं और रोजगार के अवसर मिलेंगे।

    व्यवसायिक विस्तार पर मंथन

    कार्यशाला में पैक्स समितियों के बिजनेस डायवर्सिफिकेशन यानी व्यवसायिक विस्तार पर सार्थक चर्चा हुई। अधिकारियों ने पैक्स समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने पर गहन मंथन किया, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके।

    कार्यक्रम में केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय के अपर सचिव श्री सिद्धार्थ जैन, संयुक्त सचिव श्री रमन कुमार, छत्तीसगढ़ शासन के सचिव सहकारिता डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक श्री महादेव कावरे, एनडीडीबी आनंद, गुजरात के डॉ. वी. श्रीधर एवं सीनियर मैनेजर श्री ऋषिकेश कुमार उपस्थित रहे। इसके अलावा अपर पंजीयक श्रीमती सावित्री भगत, संयुक्त पंजीयक श्री यू.बी.एस. राठिया, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक श्री डी.के. गवली, डीजीएम श्री ध्रुप राज सिंह, सहायक प्रबंधक श्री मयूर चव्हाण, अपेक्स बैंक के महाप्रबंधक श्री युगल किशोर, मार्कफेड के महाप्रबंधक श्री दिलीप जायसवाल, अपेक्स बैंक के डीजीएम श्री भूपेश चंद्रवंशी, एजीएम श्री अरुण पुरोहित, श्री एल.के. चौधरी तथा प्रबंधक श्री अभिषेक तिवारी सहित सहकारिता, नाबार्ड, भारतीय खाद्य निगम, नाफेड, वेयरहाउसिंग, डेयरी एवं मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

    शौर्यपथ लेख /

    माँ... मैं एक माँ हूँ। कैसे कह सकती हूँ कि मुझे कुछ चाहिए?
    क्यों मुझे कभी कुछ नहीं चाहिए होता... सिर्फ बच्चों की खुशी के अलावा?

    दर्द, भूख, प्यास मुझे भी तो लगती है। स्त्री घर की धुरी है, तो उसकी महत्ता अपेक्षित क्यों? मुझे कहते हुए डर क्यों लगता है कि माँ को भी कभी कुछ चाहिए होता है? ये कहते ही अपराधबोध और हीनता मुझमें कहाँ से आई? ये डर किसने और कब भरा मुझमें?

    क्या सच में माँ को कुछ नहीं चाहिए होता?
    प्रकृति जन्म देती है, तो स्त्री भी जन्म देती है। पर प्रकृति तो छीन भी लेती है... और माँ से माँगने तक का अधिकार छीन लिया गया। उसे समर्पण, त्याग की मूरत बनाकर देवी बना दिया गया। फिर देवी कुछ माँग कैसे सकती है? वो इंसान जो बन जाएगी।

    इस डर को 'गिल्ट' बनाकर समाज ने स्त्री के जेहन में गहराई से भर दिया।
    माँ अपना अस्तित्व भूल गई और सिर्फ 'माँ' बनकर रह गई। उसे समझा दिया गया कि जिस दिन वह अपने लिए सोचेगी, उस दिन स्वार्थी कहलाएगी। माँ को इतने ऊँचे पद पर बैठा दिया गया जहाँ से वह खुद को देख ही नहीं पाती।

    माँ एक जिम्मेदारी है... इस संसार को सही सोच देने की। माँ सिर्फ एक शब्द नहीं... सोच है। माँ के कर्तव्य के साथ अधिकार होते हैं, ये सिखाने की जिम्मेदारी भी तो माँ की ही है। फिर 'अधिकार' कहते ही गिल्ट क्यों?

    त्याग, समर्पण, ममता, स्त्रीत्व से सीमित नहीं... उसकी एक असीमित दुनिया होती है। उसकी असीमितता का बोध किसने छीन लिया उससे? इन बातों का कभी उत्तर ही नहीं मिला।

    खुद को लुटाते-लुटाते वो ममता से खाली नहीं होती, पर तड़पती रहती है प्यार और अपनेपन के लिए। उसके पास इतना खजाना कहाँ से आता है जो कभी खत्म ही नहीं होता? और ना कभी थकती है वो... लुटाते-लुटाते।

    माँ ऐसी क्यों होती है... पूरी दुनिया से अलग?
    क्योंकि ममता साँस होती है, और साँस लेने से कोई थकता नहीं। दुनिया से अलग इसलिए है क्योंकि दुनिया हिसाब माँगती है... और माँ बेहिसाब है। क्योंकि जिस दिन वो माँ बनती है, उस दिन से वो सिर्फ 'माँ' ही बचती है।

    माँ के प्यार पर कभी जिरह नहीं होती... क्योंकि माँ हर स्पंदन का सबूत होती है। माँ पर बुरा लिखना... किसी कलम के बस की बात नहीं।

    माँ इंसान है... तो उसमें इतनी हिम्मत कहाँ से आती है?
    और भगवान है... तो वो रोती क्यों है?
    वो क्यों कभी खुद के लिए जीना नहीं चाहती? क्यों अपनी खुशियों को त्यागती रहती है? एक माँ में हीन भावना किसने भरी? किस कूटनीति के तहत भरी? हर व्यक्ति का दिल इसका गवाह और उत्तर दोनों है। और फिर माँ को किसी के साक्ष्य की जरूरत क्या?

    समाज ने बेटी को परिस्थिति के साथ चलना सिखाया, बहू को घर जोड़ने की सलाह दी, और माँ को ममता की मूरत बनाकर कहा... "तेरे पास तो खजाना है, तुझे क्या चाहिए? तेरी खुशी तो बच्चों की खुशी में है।" और उससे माँगने का हक छीन लिया।

    माँ ने भी अपने सपने बुनना छोड़ दिया। ख्वाब दफन कर, ममता ही लुटाती रह गई। माँ से कहा... "तू भगवान है... तू रोटी देगी।" उसकी पूजा करने लगे... वो रोटी खिलाने लगी और उसने खुद को इंसान समझना छोड़ दिया।

    माँ की आजादी को छीन, एक सोने के पिंजरे में कैद कर दिया।
    देवी बनाकर कहा... "देखो माँ कितनी महान होती है, कभी कुछ नहीं माँगती।" किसी का ध्यान नहीं गया कि माँ इंसान है... और इंसान थकता है, उसकी जरूरतें होती हैं।

    समाज ने एक जाल बिछाया है अपने बोनेपन का। माँ को इतना ऊँचा बिठाया कि वो नीचे उतर कर अपना हक ही ना माँग ले। माँ चुप हो गई... क्योंकि उसे लगा कि उसने कुछ माँगा तो वह देवी से गिरकर 'औरत' हो जाएगी।

    माँ होना मतलब... गंगा होना। माँ होना मतलब... सिर्फ देना।
    दुनिया ने उसकी थकान का हिसाब रखना बंद कर दिया, क्योंकि माँ तो... बेहिसाब है ना! फिर माँ ने माँगना छोड़ दिया। उसे लगा कि यदि वह एक पल अपने लिए निकाल लेगी, या कहीं किसी से कुछ माँग लेगी, तो उसकी ममता पर उँगलियाँ उठ जाएँगी।

    माँ को वही चाहिए होता है, जिसे हम माँ से छीन लेते हैं।

    बीबीमैं एक माँ हूँ, इसलिए कह सकती हूँ कि... माँ को भी भूख लगती है, थकान होती है, नींद आती है। उसके भी सपने होते हैं, जो बच्चे होने के बाद दफन हो जाते हैं। माँ का ध्यान सिर्फ बच्चे पर रहता है, क्योंकि उसे सिखाया गया है कि वो भगवान है, इंसान नहीं।
    पर माँ इंसान है... भगवान नहीं।
    मैं उसे इंसान का दर्जा वापस दिलाना चाहती हूँ, जो उससे छीन लिया गया है। इंसान कहलाना माँ का अपमान नहीं... उसका सम्मान है। माँ को महान नहीं... माँ को इंसान कहो।

    आज जब मेरी बेटियाँ माँ बनने वाली हैं, तो मैं नहीं चाहती कि मेरी बेटियाँ खुद को भूलें। वो कर्तव्य के साथ माँगने का अधिकार रखें, और माँगते समय खुद को स्वार्थी ना समझें। क्योंकि जो माँ खुद से प्यार करती है, वह अपने बच्चों को प्यार करना भी सिखाती है।

    वो सिखाएगी कि... "माँगूंगी तो माँ नहीं रहूंगी"... इस तरह से उसे जज ना किया जाए। उसे महसूस किया जाए, उसके जज्बात का ख्याल रखा जाए। ऐसा करते समय वो 'माँ' ही रहेगी, ये भरोसा दिलाया जाए।

    मैं एक माँ हूँ और माँ के लिए आवाज़ उठा रही हूँ। 'माँ को कुछ नहीं चाहिए'... ये अंतःकरण में बैठा दिया गया है, उसे शुद्ध करने की जरूरत है। ये माँ को बताने की जरूरत है कि कुछ न माँगना उसका नेचर नहीं, एक साजिश है।

    ;;जो कई हाथों से अपनी गृहस्थी संभाल लेती है, एक जीवन को जन्म दे सकती है, वो इतनी कमजोर नहीं हो सकती कि अपने लिए जीने से अपराधबोध में चली जाए। ये उसका नहीं... समाज द्वारा माँ के मन में भरा गया गिल्ट है।

    माँ से सिर्फ 'देना' मत सीखो, माँ को 'देना' भी सीखो।
    माँ से उससे माँगने का डर छीन लो। उसे बताओ कि तू माँगेगी, तब भी सबसे पवित्र रहेगी। उसे बताओ कि माँगना इंसान होने का सबूत है, कमजोर होने का नहीं।

    माँ अपने बच्चों के लिए पूरा आसमान होती है और पूरी ज़मीन भी। उसका किरदार बहुत वृहद है। बात एक माँ की छवि से आजादी की नहीं... माँ को आजाद करने की है, उस गिल्ट से जो उसे कुछ माँगने से रोकता है।

    रोटी ना बनाए तो उसकी इज्जत कम नहीं होगी। उसे इतना अपनापन मिले कि उससे कह सकें... "सिर्फ खाना बनाना ही आपका काम नहीं।" और उसे अपने सपने दफन करने की जरूरत नहीं।
    हाँ, तू भी थकती है... ये हम जानते हैं। बस इतनी सी परवाह... कि माँ बेपरवाह नहीं होती। क्योंकि माँ के हिसाब और प्रवाह का कोई समकक्ष नहीं।
    लेखिका.. डॉक्टर अनुराधा बक्शी "अनु" अधिवक्ता
    पोलसाय पारा गली नंबर 1
    दुर्ग छत्तीसगढ़
    491 001
    मो. नं. 91792 80257

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