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May 31, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

मेलबॉक्स /शौर्यपथ / कोविड-19 महामारी के कारण शिक्षा और स्वास्थ्य के बीच संघर्ष जारी है। असल में, अगले महीने सीबीएसई 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करना चाह रहा है। मेडिकल और इंजीनिर्यंरग की कई प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन भी अगले माह होना है। मगर कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कई अभिभावकों ने इन परीक्षाओं के आयोजन को लेकर चिंता जताई है, जो वाजिब भी है। इन परीक्षाओं में लाखों परीक्षार्थी शामिल होते हैं। ऐसे में, इनका आयोजन बच्चों व किशोरों के स्वास्थ्य के मद्देनजर होना चाहिए। किसी भी प्रकार की हड़बड़ी या लापरवाही लाखों प्रतियोगियों की सेहत को खतरे में डाल सकती है। लिहाजा स्वास्थ्य और शिक्षा के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है।
सत्यम कुमार, नालंदा, बिहार

तेल के बढ़ते दाम
कोरोना संकट और चीन-सीमा विवाद के बीच पेट्रोल-डीजल के दाम लगभग पांच रुपये प्रति लीटर बढ़ चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कम हुई कीमतों का कोई लाभ शायद ही भारतीयों को मिल पाया। कारण स्पष्ट है कि जन-हितकारी सरकार आम आदमी को होने वाले लाभ को अपनी कमाई में जोड़कर अपना गणित सुधारने में जुटी रही। आम आदमी के बिगड़े हुए गणित से जैसे उसे कोई सरोकार न हो। पेट्रोलियम पदार्थों पर मनमानी नीतियां लागू करके सरकार जनमानस को क्या संदेश देना चाहती है, यह तो वही जाने, पर आम आदमी के लिए ऐसी नीतियां कष्टकारी सिद्ध हो रही हैं, जिसका एहसास सरकार को होना ही चाहिए।
सुधाकर आशावादी, ब्रह्मपुरी, मेरठ

विश्वासघाती चीन
वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हमारे सैनिकों पर अचानक हमला करके चीन ने अक्षम्य अपराध किया है। इस विश्वासघाती हमले के बाद भारत और चीन के बीच रहा-सहा विश्वास भी दरक गया है। अब चीन को कड़ा सबक सिखाना ही चाहिए। इसके लिए सैन्य, कूटनीतिक, राजनीतिक उपायों के साथ-साथ जबर्दस्त आर्थिक नाकेबंदी भी हमें करनी होगी, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को चोट लगे। वहां से होने वाले आयात में हरसंभव कटौती का प्रयास केंद्र सरकार को करना चाहिए। ऐसी खबरें आई हैं कि हमारे यहां कई प्रोजेक्ट में चीन की कंपनियों को ठेके दिए गए हैं। उन ठेकों को रद्द करते हुए नए टेंडर जारी किए जाने चाहिए और उसमें चीनी कंपनियों के शामिल होने पर रोक लगा देनी चाहिए। हमारे देश में ही करोड़ों प्रशिक्षित लोग बेरोजगार हैं। हम उनके श्रम का सही इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर हम ‘मेक इन इंडिया’ को बुलंद कर सके, तो आत्मनिर्भर आसानी से बन सकेंगे। चीन की हर तरह से आर्थिक कमर तोड़ने के अलावा भारत के पास कोई अन्य विकल्प नहीं है।
निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद

योग शिक्षकों की अनदेखी
यह सच है कि सरकार ने योग को देश की प्राचीन पद्धति के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। आज हम सभी स्वस्थ जीवन जीने के लिए योग-क्रिया करते हैं। यह बात भी साबित हो चुकी है कि नियमित योग करने से स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन जीने में काफी मदद मिलती है। परंतु यह भी एक दुखद सत्य है कि सरकार योग शिक्षकों को लगातार उपेक्षित कर रही है। नियमित योग शिक्षकों को बहाल करने की बजाय अनुबंध पर कुछ स्कूलों में शिक्षकों को बहाल करके उनके भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। राज्य सरकार योग दिवस पर आयोजन करके अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रही है। शारीरिक शिक्षा अनुदेशकों की बहाली निश्चय ही अच्छी बात है, लेकिन जिन विद्यार्थियों ने योग में पीजी डिप्लोमा और एमए किया है, उनके बारे में केंद्र या राज्य सरकारों का न सोचना काफी दुखद है। स्थाई रोजगार से ही हम विद्यार्थियों में विश्वास पैदा होगा, तभी स्वस्थ तन और मन का भी विकास हो सकेगा।
रीना कुमारी, पटना, बिहार

 

ओपिनियन / शौर्यपथ / गलवान घाटी की दुखद घटना के बाद अब देश में कई हिस्सों से चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मांग उठने लगी है। ‘बायकॉट चीन’ की मजबूत होती जनभावना के बीच केंद्र सरकार ने भी बीएसएनएल और एमटीएनएल जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों से कहा है कि वे 4जी के लिए चीन की कंपनियों को टेंडर जारी न करें। मगर जिस तरह से नई दिल्ली और बीजिंग के बीच कारोबारी रिश्ते मजबूत हैं, क्या चीन को किनारे करना संभव है? वह भी तब, जब वैश्विक दुनिया में हर देश के हित दूसरे राष्ट्र से जुड़े हुए हैं?
चीन के साथ हमारा कारोबार कई रूपों में होता है। हम उससे पतंग का मांझा, चीनी मिट्टी की मूर्तियां, गुलाल, पिचकारी, दीपावली की झालरें जैसी गैर-जरूरी चीजें भी मंगवाते हैं, और मोबाइल फोन, इंजीनिर्यंरग व इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के जरूरी कल-पूर्जे भी। गैर-जरूरी उत्पादों के विकल्प हमारे पास मौजूद हैं, लेकिन जरूरी वस्तुओं का आयात तब तक नहीं रोका जा सकता, जब तक उसे हासिल करने का दूसरा रास्ता हमारे पास न हो।
इसके अलावा, चीन पर हमारी व्यापारिक निर्भरता बहुत ज्यादा है। दोनों देशों के बीच पिछले साल लगभग 92 अरब डॉलर का आपसी कारोबार हुआ है, जिसमें हमने चीन से आयात ज्यादा किया और निर्यात कम। सरकार के स्तर पर ‘बायकॉट चीन’ इसलिए भी संभव नहीं है, क्योंकि दोनों देश विश्व व्यापार संगठन के कायदे-कानूनों से बंधे हैं। इसलिए अधिकृत रूप से हम टैरिफ, यानी सीमा शुल्क नहीं लगा सकते। मगर हां, नॉन-टैरिफ बैरियर का लाभ जरूर उठाया जा सकता है। इसका अर्थ है कि सरकार प्रत्यक्ष तौर पर कोई बंदिश नहीं लगाएगी, लेकिन वह परोक्ष रूप से आपसी कारोबार प्रभावित कर सकती है।
सवाल है कि यह होगा कैसे? यह तो तभी संभव है, जब लोगों में राष्ट्रवाद की भावना काफी मजबूत हो जाए। आज कोई भी देश खुलकर किसी दूसरे राष्ट्र की मुखालफत नहीं कर सकता, क्योंकि उनमें कई तरह के कूटनीतिक रिश्ते होते हैं। इसीलिए सरकारें टकराव को हरसंभव टालने के उपाय करती हैं। मगर परदे के पीछे से गैर-राजनीतिक संगठनों के माध्यम से राष्ट्रवाद का माहौल बनाकर वे एक-दूसरे को चोट पहुंचाती रही हैं।
वैसे भी, मौजूदा हालात में सैन्य टकराव न तो चीन के हित में है, और न ही भारत के हित में। कोरोना-संक्रमण ने हर राष्ट्र को गंभीर आर्थिक मुश्किलों में झोंक दिया है। ऐसे में, नॉन-टैरिफ बैरियर ही हमारे लिए सही रास्ता है। गैर-जरूरी उत्पादों के बहिष्कार से चीन को चार-पांच बिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान नहीं होगा, लेकिन इसका संदेश दूर तक अवश्य जाएगा। उसे एहसास होगा कि यदि वह सीमा पर आक्रामक रुख अपनाता है, तो उसे आर्थिक तौर पर इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। उससे भारत जैसा बड़ा बाजार छिन सकता है।
अभी चीन की आर्थिक सेहत भी बहुत अच्छी नहीं है। उसने कोरोना के पहले चरण को भले ही संभाल लिया, लेकिन अब वहां संक्रमण के नए मामले तेजी से पसरने लगे हैं। कोविड-19 के बारे में सही जानकारी छिपाने को लेकर पश्चिमी देश भी उस पर हमलावर हैं। ऐसे में, वह शायद ही कोई नया तनाव बढ़ाना पसंद करेगा। हमारे लिए एक अच्छी बात यह भी है कि दुनिया के तमाम देश अब समझने लगे हैं कि किसी एक मुल्क पर निर्भरता ठीक नहीं है। इसी निर्भरता की वजह से चीन वैश्विक सप्लाई का केंद्र बन गया था। मगर कोरोना-काल में चीन की हालत बिगड़ते ही पूरी दुनिया भी प्रभावित हो गई। अब सभी देश स्थानीय आपूर्ति शृंखला पर अधिकाधिक ध्यान देने लगे हैं। चीन को इसका भी नुकसान होगा। उसके हाथों से अब कई बाजार निकलेंगे। अमेरिका, जापान जैसे कई देशों ने अपनी कंपनियों को वापस अपने देश में बुलाना शुरू भी कर दिया है। इससे आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पडे़गा।
जब से हमने विश्व व्यापार संगठन के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, यह एक धारणा बन गई थी कि जितना अधिक कारोबार हम करेंगे, उतनी ही अधिक खुशहाली आएगी। मगर असलियत में यह विकास तब होता है, जब व्यापार दो समान धरातल वाले देशों के बीच हो। भारत और चीन के कारोबारी रिश्ते का भी यही सच है। चीन कई मामलों में हमसे विकसित है। इसकी बड़ी वजह यही है कि उसने तकनीक और प्रौद्योगिकी की तरफ खासा ध्यान दिया। भूमंडलीकृत दुनिया में तकनीक और प्रौद्योगिकी संपन्न देश ही आगे बढ़ते हैं। हम इस मामले में पिछड़ गए, क्योंकि कहीं न कहीं हमारी राजनीतिक इच्छाशक्ति कमजोर रही। कोठारी आयोग ने अरसे पहले सार्वजनिक शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का छह प्रतिशत खर्च करने की सिफारिश की थी, लेकिन आज तक हम ऐसा नहीं कर पाए हैं। आज भी बमुश्किल चार प्रतिशत ही सार्वजनिक शिक्षा पर खर्च होता है। यही हाल स्वास्थ्य और अनुसंधान व विकास (आरऐंडडी) का भी है। बेशक अपने यहां बड़ी संख्या में इंजीनियर और डॉक्टर डिग्री पाते हैं, लेकिन विश्व पटल पर जरूरी योग्यता का अभाव उनमें देखा जाता है।
जाहिर है, दीर्घकालिक योजना बनाए बिना हम चीन का मुकाबला नहीं कर सकते। मगर तात्कालिक नुकसान उसे तभी पहुंचाया जा सकता है, जब आम जनता में इसके लिए एकजुटता दिखे। हालांकि, इसमें भी एक बड़ी दिक्कत यह है कि सरकार की नीतियों में सभी लोगों का विश्वास नहीं है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि राजनेता खुद अपनी नीतियों के प्रति ईमानदार नहीं दिखते। अगर वाकई हम चीन का आर्थिक मुकाबला करना चाहते हैं, तो सबसे पहले हमारी सरकारों को संवेदनशील होना होगा। उनको आम जनता के दुख-दर्द में शामिल होना होगा। क्या हमारे हुक्मरान इसके लिए तैयार हैं?
(ये लेखक के अपने विचार हैं) अरुण कुमार,अर्थशास्त्री

 

दुर्ग / शौर्यपथ / गुरूवार को दोपहर कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे जब निरीक्षण के लिए सांकरा स्थित आजीविका केंद्र पहुंचे तो वहां उन्हें समूह की महिलाओं द्वारा बनाया जा रहा मास्क विशेष रूप से पसंद आया। उन्होंने इसकी गुणवत्ता की तारीफ की और इनमें से एक मास्क खरीद दिया। कलेक्टर ने यहां बनाए जा रहे साबुन की भी विशेष रूप से प्रशंसा की। वहीं पर मौजूद जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक ने भी 2350 रुपये के साबुन खरीदे। उल्लेखनीय है कि जब से महिलाओं ने एलोवेरा चारकोल आदि साबुन का विक्रय शुरू किया है तब से इनकी काफी मांग बढ़ी है। इस दौरान राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक नीलेश महादेव क्षीर सागर भी मौजूद थे। उन्होंने आजीविका केंद्र के समूह की महिलाओं की प्रशंसा की।
इस मौके पर कलेक्टर ने कहा कि सांकरा स्थित आजीविका केंद्र में बहुत अच्छा काम हो रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि आप लोग अपने उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रहे हैं जैसे अभी मैंने जो मास्क लिया है वह मुझे बहुत पसंद आया है। किसी भी उत्पाद को बाजार में तभी जगह मिलती है जब उस उत्पाद की गुणवत्ता बाजार में उपलब्ध अन्य उत्पादों की तुलना में बेहतर होती है। इसके साथ ही बाजार मूल्य भी क्रेता.विक्रेता दोनों के अनुकूल हो तो उत्पाद की बिक्री तेजी से बढ़ती है। इस तरह बाजार के अनुरूप सामान का मूल्य तय कर अपने ब्रांड की गुणवत्ता बनाकर आप लोगों ने काफी अच्छा कार्य किया है जो सराहनीय है। कलेक्टर उन महिलाओं से भी मिले जो ट्री गार्ड का निर्माण कर रही थी। ट्री गार्ड का निर्माण कर रही महिलाओं ने बताया कि 1000 ट्री गार्ड का निर्माण कर भिलाई नगर निगम को भेज चुकी है और अब वे जिला पंचायत के लिए भी ट्री गार्ड बना रही हैं। उनके द्वारा बनाए गए ट्री गार्ड मनरेगा के फलोद्यान में पौधों की सुरक्षा के लिए काम आएंगे। इसके अलावा सीमेंट पोल निर्माण का भी कार्य कर रही है। उनके द्वारा 1000 सीमेंट पोल का निर्माण किया जा चुका है।
मिशन डायरेक्टर क्षीर सागर ने कहा कि यह बहुत अच्छा प्रयास है जैसे साबुन के फ्लेवर्स के संबंध में किया गयाए ब्रांड में अलग.अलग तरह की विविधता से ग्राहक काफी आकर्षित होते हैं। चूंकि मनरेगा में कार्यस्थल में सैनिटेशन और पंचायतों में स्थानीय जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर साबुन का उपयोग होता है इसलिए आपके द्वारा निर्मित सामान का बहुत सारा बाजार यहां ही उपलब्ध हो जाएगा। इसके अलावा छत्तीसगढ़ शासन में सभी विभागों को विशेष रूप से निर्देशित किया है कि अपनी जरूरतों का सामान अधिकाधिक रूप से स्वसहायता समूह से लें। इससे आपके उत्पादों के लिए बड़ा बाजार उपलब्ध हो रहा है जिस तरह से आपने इन दिनों में कार्य किया है और सांकरा आजीविका केंद्र में जिस तरह से काम हो रहा है उससे बड़ी संभावनाओं की राह खुली है। आप अगर नवाचार के लिए आगे बढ़ते हैं तो इस संबंध में प्रशिक्षण देने के लिए पर बाजार उपलब्ध कराने के लिए कोशिश मिशन द्वारा की जाएगी। कलेक्टर डॉ भूरे ने कहा कि आप लोगों को किसी भी तरह की दिक्कत हो तो इस संबंध में अवगत कराएं।
प्रशिक्षण से लेकर बाजार की उपलब्धता की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा हर संभव मदद की जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि आप लोग उन क्षेत्रों में भी कार्य कर रही हैं जिन क्षेत्रों में अभी तक पुरुष ही कार्य करते थे जैसे आप लोग सीमेंट पोल बना रही हैं फेंसिंग तार बना रही है। बहुत अच्छा काम है बिहान के माध्यम से और जिला प्रशासन तथा शासन की अन्य योजनाओं के माध्यम से हम आपकी पूरी मदद करेंगे। कलेक्टर ने यहां उपस्थित अधिकारियों को आजीविका केंद्र में अन्य तरह के प्रशिक्षण भी चिन्हांकित करने और कार्य आरंभ करने के निर्देश दिए। आज ही आईसीआईसीआई तथा एक्सिस बैंक के प्रबंधकों ने 2500 रुपये के साबुन खरीदे।

दुर्ग / शौर्यपथ / जिस उम्र में बच्चों के हाथ में किताबें और खिलौने होने चाहिए उस उम्र में उन्हें भिक्षावृत्ति की ओर ढकेलना एक जघन्य अपराध ही नहीं है बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी एक घृणित कार्य है। बच्चों से उनका बचपन छीनने का हक किसी को नहीं है, उनके माता पिता को भी नहीं। बच्चों से भीख मंगवाने पर जेजे एक्ट के तहत सजा का प्रावधान भी है।
कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर भूरे ने विगत दिनों जिला बाल संरक्षण समिति की बैठक में स्पष्ट कर दिया था बच्चों की मासूमियत से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी कड़ी में चाइल्ड लाइन द्वारा आज विशेष रेस्क्यू अभियान के चलाकर 03 बच्चों को भिक्षावृत्ति से रोककर उनके पालकों तक पहुँचाया गया। इस रेस्क्यू अभियान में चाइल्ड लाइन द्वारा पहले बालकों को अपने संरक्षण में लिया उसके बाद बाल कल्याण समिति में प्रस्तुत किया। बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार बच्चों को उनके परिजनों को सौप दिया गया, बच्चों को सौपने के पश्चात चाइल्ड लाइन के केंद्र समन्वय द्वारा परिजनों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा गया कि अगली बार यदि बच्चे भीख मांगते पाए गए तो परिजनों को जे जे एक्ट के तहत सजा होगी।
इस रेस्क्यू अभियान में पुलिस विभाग का विशेष सहयोग रहा साथ ही स्वयंसेवी कार्यकर्ता कृतिका देवांगन ने भी अपनी सहभागिता निभाई, चाइल्ड लाइन टीम मेम्बर सविता साहू, भारती बिसेन, ललिता मानिकपुरी, राकेश गुप्ता एवं परामर्शदाता आशीष साहू का भी रेस्क्यू अभियान में महत्वपूर्ण योगदान रहा।

दुर्ग / शौर्यपथ /साख सहकारी समिति द्वारा मंथली इनकम प्लान में रकम जमा कराने के बाद स्कीम के अनुसार भुगतान नहीं किया। इस कृत्य को व्यवसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम दुर्ग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने अर्थतत्व क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी रायपुर के शाखा प्रबंधक मोहम्मद इदरीस अहमद पर 1 लाख 44 हजार रुपये हर्जाना लगाया

ग्राहक की शिकायत
सेक्टर 7 भिलाई निवासी वाई.आर. दामले ने रोहित कुमार खरे के माध्यम से अर्थतत्व क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी रायपुर में मंथली इनकम प्लान में 100000 रुपये दिनांक 8 दिसंबर 2015 को जमा किया था, जिसकी अवधि 36 माह की थी और 36 माह तक प्रतिमाह 1000 रुपये परिवादी को भुगतान मिलना था किंतु प्लान के मुताबिक परिवादी को भुगतान नहीं किया गया और परिवादी को उसकी मूल राशि भी वापस नहीं की गई।

अनावेदकगण का बचाव
चिटफंड सोसायटी की ओर से प्रकरण में कोई कोई जवाब नहीं दिया गया जबकि कथित एजेंट रोहित कुमार खरे ने कहा कि उसने परिवादी को कोई दस्तावेज या रसीद जारी नहीं की थी ना ही वह संस्था का कर्मचारी या एजेंट है। संबंधित संस्था की अचल संपत्ति को अटैच करने की कार्यवाही दुर्ग जिलाधीश द्वारा प्रारंभ की जा चुकी है।

उपभोक्ता फोरम का फैसला
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं तर्कों के आधार पर विचारण कर यह माना कि अनावेदक संस्था ने परिवादी से मंथली इनकम प्लान के लिए 100000 रुपये प्राप्त किया था और मंथली इनकम के 36000 रुपये के स्थान पर केवल 12442 भुगतान किया इसीलिए परिवादी अंतर की राशि 23558 रुपये एवं मूल राशि 100000 रुपये मिलाकर कुल 123558 रुपये प्राप्त करने का अधिकारी है।

हर्जाना राशि
जिला उपभोक्ता फोरम दुर्ग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने अनावेदक संस्था अर्थतत्व साख सहकारी समिति के मैनेजर इदरीश अहमद पर कुल 1.44 लाख रुपये हर्जाना लगाया, जिसमें कुल परिपक्वता राशि 123558 रुपये, मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति स्वरूप रु. 20000 एवं वाद व्यय हेतु रु. 1000 भुगतान करने का आदेश दिया। जिसमें 7.50 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज पृथक से देय होगा। एजेंट के रूप में प्रकरण में पक्षकार बनाए गए रोहित कुमार खरे के विरुद्ध शिकायत प्रमाणित नहीं होने पर उसके खिलाफ प्रकरण खारिज किया गया।

/ /सोशल मीडिया के चौकीदार को देश के चौकीदार समझने की भूल का परिणाम है चीन नेपाल भारत को आंख दिखाने की जुर्रत कर रहे है.
//कहाँ छुपा है चौकीदार?18 घण्टा जागकर काम करने का दम्भ भरने वाले चौकीदार की सजगता की पोल खुल गई।
//मोदी सरकार और भाजपा के नेताओ को कांग्रेस नेता कहां आते हैं? कहां जाते हैं? किस से मिलते हैं? इसकी जानकारी रहती है?लेकिन पुलवामा में 370 किलो आरडीएक्स कहा से आया? चीन कब भारतीय सीमा में घुस गया ये पता नही होता ?
//सोशल मीडिया के चौकीदार को देश के चोकीदार समझने की भूल का परिणाम है चीन नेपाल भारत को आंख दिखाने की जुर्रत कर रहे है.

 

      रायपुर/ शौर्यपथ / भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय के बयान पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने मोदी भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि कहाँ छुपा है चौकीदार?18 घण्टा जागकर काम करने का दम्भ भरने वाले चौकीदार की सजगता की पोल खुल गई। असल में सोशल मीडिया के चौकीदार को जनता देश के चौकीदार समझने की भूल कर गई इसका ही दुखद परिणाम है चीन और नेपाल जैसे देश भारत को आंख दिखाने की जुर्रत कर रहे हैं? बीते 6 साल में देश में 17 सौ से अधिक आतंकी हमले हुए, 500 से अधिक नागरिक और सेना के जवानों की शहादत हुई है, 2016 से लेकर 2018 में आतंकी हमलों में 176 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। भारतीय सीमा में पड़ोसी देशों की सेना की हलचल बढ़ी है, पड़ोसी देश इस दौरान भारतीय भूमि पर कब्जा करने के प्रयास किए। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि सोशल मीडिया के चौकीदार और मोदी सरकार एवं भाजपा नेताओं को कांग्रेस के नेता कहां जा रहे है? किस से मिल रहे हैं? इस बात की पुख्ता जानकारी होती है। लेकिन पुलवामा में 350 किलो आरडीएक्स कैसे आया? चीन और नेपाल भारतीय सीमा पर प्रवेश कैसे कर गए? भाजपा को इस बात की ना तो जानकारी होती है ना तो इनको खबर होती है? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय केंद्र की मोदी सरकार की नाकामी विफलता ढुलमुल विदेशी नीति और बड़बोलापन के कारण चाइना बॉर्डर में हुई 20 से अधिक भारतीय सेना के जवानों की शहादत से और पड़ोसी देश चीन के हरकतों से आम जनता का ध्यान भटकाने कांग्रेस नेताओं पर सवाल उठा रहे है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय को प्रदेश की जनता को बताना चाहिए आखिर नरेंद्र मोदी जी देश को अंधेरे में रखकर अचानक पाकिस्तान कैसे पहुंच गए थे? उनका पाकिस्तान जाने का मकसद क्या था? प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि चाइना बॉर्डर में हुई भारतीय सेना के जवानों की शहादत से देशभर में आक्रोश है। पूरी कांग्रेस पार्टी इस कठिन समय में देश और भारतीय सेना के साथ खड़ी हुई है, देश भारतीय सेना के जवानों की शहादत का बदला चाहती है। ऐसे दुखद समय में भाजपा के नेता कांग्रेस नेताओं पर टीका टिप्पणी कर मोदी सरकार की विफलताओं से जनता का ध्यान हटाने में जुटे हुए हैं। यह वक्त कांग्रेस नेताओं पर टीका टिप्पणी करने का नहीं बल्कि भारत के संप्रभुता मान सम्मान की रक्षा का समय है। शहीद सैनिकों के परिवार को न्याय दिलाने का समय है। मोदी सरकार तत्काल कड़ा और बड़ा फैसला करें और चीनियों के करतूत का कड़ा जवाब दें।

नई दिल्ली / शौर्यपथ / दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की अनुपस्थिति में उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की जिम्‍मेदारी संभालेंगे. जैन की गैरमौजूदगी में उनके सभी विभागों का प्रभार उप मुख्यमंत्री सिसोदिया को दिया गया है.सत्येंद्र जैन को बुधवार को कोरोना पॉजिटिव पाया गया था और वह इस समय अस्पताल में भर्ती हैं. स्वस्थ होकर काम पर लौटने तक वो "Minister without portfolio" (बिना पदभार के मंत्री) रहेंगे. गौरतलब है कि दिल्‍ली में कोरोना के केसों में तेजी से इजाफा हो रहा है और यह आंकड़ा 44 हजार के पार पहुंच चुका है.
देश की राजधानी में इस समय कोरोना 44688 केस हैं. दिल्‍ली में अब तक कोरोना के कारण 1837 लोगों की मौत हो चुकी है. 16 हजार 500 लोग अस्‍पताल में इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं, इस तरह दिल्‍ली में फिलहाल कोरोना के एक्टिव केसों की संख्‍या 26 हजार 531 है.भारत में कोरोनावायरस (Covid-19) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी खतरे की घंटी बनी हुई है.

इस बीच, देश में कोरोना मरीजों को आंकड़ा साढ़े तीन लाख के पार पहुंच गया है. जबकि अभी तक भारत में इस वायरस के चलते होने वाली मौत का आंकड़ा 11 हजार 900 को पार कर गया है. पिछले 24 घंटे में कोरोना के करीब 11 हजार मामले सामने आए हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को भारत में कोरोना के कुल मामले 3,54,065 हो गए है, वहीं इस वायरस के चलते मरने वालों की संख्या 11,903 पहुंच गई है. देश में पिछले 24 घंटे के दौरान 10,974 नए मामले सामने आए हैं. वहीं 24 घंटे में 2003 लोगों ने कोरोना के चलते अपनी जान गवाई है.

 

नई दिल्ली / शौर्यपथ / पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प मुद्दे पर गुरुवार को भी दोनों देशों के बीच मेजर जनरल स्‍तर की दूसरे दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही. सूत्रों ने यह जानकारी दीं. सूत्रों के मुताबिक भारत और चीन के मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों के बीच आज बातचीत खत्म हो गई लेकिन इसमें दोनों पक्ष किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके.इससे पहले, बुधवार को दोनों देशों के बीच पहले दौर की बातचीत भी बिना नतीजे के समाप्‍त हो गई थी.यह बातचीत उसी क्षेत्र में हो रही है जहां सोमवार रात को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इस झड़प में एक कर्नल सहित 20 सैनिकों ने भारत के लिए जान गंवाई थी.खबरों के अनुसार, चीन के भी करीब 45 सैनिकों की इस बातचीत में मौत हुई है.सूत्रों ने कहा कि फिलहाल, इस क्षेत्र से चीनी सैनिकों के बाहर होने के कोई संकेत नहीं हैं. यह क्षेत्र पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब है.
हिंसक झड़प के मुद्दे पर बुधवार को भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर बात हुई थी. इस बातचीत में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से कहा कि 'चीनी सैनिकों ने पूर्व नियोजित और योजना के मुताबिक कार्रवाई की जो सीधे तौर पर लद्दाख की गालवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प का कारण बनी.'

विदेश मंत्री ने दोटूक अंदाज में कहा कि 'इस घटना' से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा और चीन को अपनी कार्रवाई का पुनर्मूल्‍यांकन करने और सुधारात्‍मक कदम उठाने की जरूरत है. दोनों नेताओं ने तनाव को काम करने पर सहमति जताई और कहा "कोई भी पक्ष मामले को बढ़ाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करेगा और इसके बजाय, द्विपक्षीय करारों और प्रोटोकॉल के अनुसार शांति सुनिश्चित करेगा."

 

नई दिल्ली /शौर्यपथ/ दिल्ली में गुरुवार से नई टेस्टिंग तकनीक 'रैपिड एंटीजन टेस्ट' के जरिए कोरोनावायरस की टेस्टिंग शुरू हो गई है. फिलहाल ICMR ने इस तकनीक को केवल कंटेनमेंट जोन और अस्पताल या क्वॉरेंटाइन सेंटर में इस्तेमाल करने की इजाजत दी है. इसका इस्तेमाल कहीं और नहीं होगा. दक्षिण पश्चिम दिल्ली के द्वारका सेक्टर 4 के रत्नाकर अपार्टमेंट में 30 मई को 3 कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद कन्टेनमेंट जोन बनाया गया था. गुरुवार को प्रशासन ने इस अपार्टमेंट में रहने वाले सभी लोगों को इस तकनीक के ज़रिए टेस्ट कराने के लिए बुलाया और टेस्ट किया है.
यह नई तकनीक कोरोना के खिलाफ लड़ाई में बड़ा बदलाव ला सकती है. इससे टेस्टिंग की प्रक्रिया तेज होगी, मरीजों का पता जल्दी चलेगा, जिससे कि उनको इलाज जल्दी मिल जाएगा. यह टेस्टिंग इसलिए बहुत खास है क्योंकि आमतौर पर कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट 1-2 दिन में आती है जबकि इस तकनीक में 15 से 30 मिनट के अंदर नतीजा आ जाता है. इस नई टेस्टिंग तकनीक के तहत अगर किसी शख्स की रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो उसकी पुष्टि RTPC टेस्ट से की जाती है. अगर कोई शख्स पॉजिटिव आता है तो उसे पॉजिटिव मान लिया जाता है. इसके दाम तय करने की ऐसी कोई जानकारी नहीं है क्योंकि यह टेस्ट खुद सरकार करा रही है.

क्या है तकनीक?

इस तकनीक में व्यक्ति की नाक की दोनों तरफ़ से फ्लूइड का सैंपल लिया जाता है. फिर उसको पास ही मौजूद एक मोबाइल बैन के अंदर बनी छोटी से लेबोरेटरी के अंदर टेस्ट किया जाता है. अगर टेस्टिंग स्ट्रिप पर एक लाइन आती है तो इसका मतलब नेगेटिव होता है. लेकिन उसको पुख्ता तौर पर नेगेटिव नहीं माना जा सकता और कन्फर्म करने के लिए RT-PCR टेस्ट ज़रूरी होता है. अगर दो लाल लकीर दिखाई देती हैं तो इसका मतलब व्यक्ति पॉजिटिव है जिसको पुख्ता तौर पर पॉजिटिव मान लिया जाएगा. लेकिन अगर कोई लकीर नहीं देखती तो इसका मतलब टेस्ट बेनतीजा है. इस तकनीक में टेस्ट का नतीजा 15 से 30 मिनट के अंदर आ जाता है. इस तकनीक को साउथ कोरिया की मानेसर स्थित कंपनी ने तैयार किया है.

दिल्ली सरकार तैयार कर रही शेड्यूल

दिल्ली में 20 जून से रोजाना करीब 18 हजार कोरोना टेस्ट कराने की योजना है जिसमें इस तकनीक को सभी मौजूदा 247 कंटेनमेंट जोन में इस्तेमाल किया जाएगा. केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण इस तकनीक के जरिए किए जाने वाले टेस्ट के लिए पूरा शेड्यूल तैयार कर रहा है यानी कब, कहां, कितने टेस्ट कराए जाने का लक्ष्य है यह तय किया जा रहा है.

हालांकि, बता दें कि इसके पहले एक 'रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट' भी शुरू किया गया था, लेकिन उसका ट्रायल सफल नहीं रहा था. कई राज्यों की ओर से शिकायतें आई थीं कि इस टेस्टिंग तकनीक में 90 फीसदी नतीजे गलत आ रहे हैं, जिसके बाद फिर से RTPC टेस्ट पर ही भरोसा किया जा रहा था. ऐसे में देखना होगा कि यह नई तकनीक कितनी सफल रहती है.

 

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / कोरोनावायरस संक्रमण के चलते सुप्रीम कोर्ट ने भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पर रोक लगा दी है. गुरुवार को इस संबंध में एक याचिका पर सुनवाई हुई है, जिस दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर वो इसके लिए अनुमति देते हैं तो भगवान उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे ने कहा कि ये एक गंभीर मामला है और कोर्ट इसके लिए अनुमति नहीं दे सकता. रथयात्रा पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि इस रथयात्रा में दस लाख लोग इकट्ठा होते हैं. इस पर CJI बोबडे ने कहा कि अगर दस हजार भी हैं तो गंभीर बात है. बता दें कि 23 जून से रथयात्रा शुरू होनी थी. यह उत्सव अगले 20 दिनों तक जारी रहता है.
याचिका में कहा गया है कि रथयात्रा में जुटने वाली भीड़ से कोरोना संक्रमण फैलने का ख़तरा बहुत ज़्यादा है, लिहाज़ा इस पर फिलहाल रोक लगाई जाए. इसमें कहा गया है 'क्योंकि लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट अगर दीपावली पर पटाखे जलाने पर रोक लगा सकता है तो रथयात्रा पर रोक क्यों नहीं लगाई जा सकती?'

इस याचिका पर सुनवाई में कोर्ट ने कहा, 'महामारी के समय ऐसी सभाएं नहीं हो सकती हैं. सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिकों की सुरक्षा के हित में, इस वर्ष रथ यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती है. खतरे के बीच लोग इकट्ठा न हो, इसके लिए नागरिकों की सार्वजनिक सुरक्षा के हित में हम इस आदेश को पारित करते हैं.' ऐसे में अब ओडिशा में कोई भी रथयात्रा आयोजित नहीं होगी. इस अवधि के दौरान कोई भी गतिविधि या रथ यात्रा से जुड़ी प्रक्रिया नहीं होगी.

ओडिशा सरकार ने नहीं लिया है अभी कोई फैसला

बता दें कि कोरोना संकट काल के दौरान पुरी में भगवान जगन्नाथ की 23 जून को निकलने वाली रथयात्रा को लेकर ओडिशा सरकार अभी तक इस कोई फैसला नहीं ले पाई है लेकिन ओडिशा विकास परिषद नामक एनजीओ ने रथयात्रा पर रोक लगाने की माँग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की है.

 

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