
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
नई दिल्ली / शौर्यपथ / देश में कोरोनावायरस से संक्रमण के मामले तेजी से फैल रहे हैं. आपदा से मोर्चा संभालने वाला राष्ट्रीय आपदा मोचन बल भी इसकी चपेट में आ गया है. एनडीआरएफ के 76 जवान कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं. इसमें से 50 जवान अम्फान चक्रवात के दौरान पश्चिम बंगाल में तैनात थे. एनडीआरएफ के अनुसार, जिन 26 और जवानों के कोरोना टेस्ट पॉज़िटिव आए हैं, वे दिल्ली में तैनात थे, जिनमें से कुछ मुख्यालय से जुड़े हैं. शेष 50 जवान कटक में संक्रमित पाए गए थे. वे पश्चिम बंगाल में अम्फान के दौरान अपना काम करके वापस आए थे.
एनडीआरएफ के महानिदेशक सत्य नारायण प्रधान ने एनडीटीवी को बताया, "राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के सभी कर्मचारियों में कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिख (Asymptomatic) हैं. सभी की निगरानी में रखा गया है." उनके मुताबिक, ओडिशा सरकार ने 190 जवानों का परीक्षण किया था, जिसमें से 50 कोरोना संक्रमित पाए गए हैं. ये 190 जवान अम्फान प्रभावित पश्चिम बंगाल से ओडिशा लौटे थे. तब इनका टेस्ट किया गया.
एनडीआरएफ के महानिदेशक ने आगे कहा, "संक्रमित पाए गए जवानों का उपचार चल रहा है और वह ठीक हैं." एनडीआरएफ के मुताबिक, एक कर्मचारी को कटक में अश्विनी कोविड-19 अस्पताल में भर्ती किया गया है जबकि कुछ अन्य को भुवनेश्वर के केआईआईएमस अस्पताल में भर्ती किया गया है.
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल ने साइक्लोन के दौरान और उसके बाद राहत और बचाव कार्य के लिए 19 टीमों को तैनात किया था. हर टीम में करीब 45 लोग थे. एक अधिकारी ने बताया, "एनडीआरएफ कई राज्यों में अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के टेस्ट कर रहा है लेकिन कुछ राज्य टेस्ट के लिए पैसा वसूल रह हैं. कुछ राज्य कोई चार्ज नहीं ले रहे हैं जबकि अन्य राज्यों में हमें भुगतान करना पड़ रहा है क्योंकि वे निजी टेस्ट करवा रहे हैं."
गेजेट्स / शौर्यप्थ / व्हाट्एप को टक्कर देने के लिए सोशल मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम ने कई एडवांस फीचर जोड़े हैं। अब आपको टेलीग्राम पर इन-ऐप वीडियो एडिटर, टू-स्टेप वेरिफिकेशन, एनिमेटेड स्टिकर, स्पीकिंग जीफ समेत कई सुविधाएं मिलेंगी। मोबाइल मैसेजिंग ऐप पर आप किसी भी वीडियो या फोटो पर एनिमेटेड स्टीकर चिपका सकेंगे। फोटो पर एनिमेटेड स्टीकर ऑटोमैटिकली जिफ में बदल जाएगा।
आप वीडियो एडिट करने के अलावा उसकी ब्राइटनेस और सैचुरेशन भी एडजस्ट कर सकेंगे। ऐप ने यूजर चैट अनुभव बढ़ाने के लिए नए आकर्षक स्पीकिंग जीआईएफ भी एड किए हैं। वीडियो एनहेंसमेंट फीचर से यूजर्स ड्राइंग के दौरान जूम-इन कर सकेंगे।
नये जिफ पैनल में आपको हर तरह की इमोजी मिलेगी। इमोजी में आप पहले से जल्दी जिफ इमेज तलाश सकेंगे। सर्च रिजल्ट में किसी भी जिफ को होल्ड करके रखने से वह कलेक्शन में सेव हो सकेगी।
स्लीकर इंटरफेस से यूजर के लिए मैसेज भेजना, एडिट करना और उसे डिलिट करना और आकर्षक होगा। वीडियो प्लेयर भी पहले से बेहतर होगा।
फ्लेक्सिबल फोल्डर फीचर से आप अपनी चैट लिस्ट में किसी भी चैट पर होल्ड कर उसे एक फोल्डर में डाल सकते हैं।
अप्रैल तक टेलीग्राम के 400 मिलियन से ज्यादा एक्टिव यूजर्स थे। कंपनी का कहना है कि उसकी इस वर्ष सुरक्षित ग्रुप वीडियो कॉल लाने की योजना है।
सेहत /शौर्यपथ / आयुर्वेद के अनुसार अदरक एक ऐसी औषधि है, जो खाने में स्वाद बढ़ाने के साथ ही कई बीमारियों से दूर रखने में भी काफी मददगार है। ऐसे में आइए जानते हैं बदलते मौसम में आपके पेट को दुरुस्त रखने के अलावा अदरक सेहत के लिए कैसे वरदान है।
पेट के रोगों को ठीक करें अदरक-
भोजन पचने में दिक्कत आए तो अदरक को पीसकर इसके रस को घी या शहद के साथ लेना चाहिए। कई बार भोजन ठीक से न पचने पर पेट में गैस के कारण पेट व सीने में दर्द, भारीपन, ऐंठन, एसिडिटी और दस्त जैसी समस्या हो जाती है। अदरक के सेवन से पाचन क्रिया ठीक होती है। अदरक, काली मिर्च और छोटी पीपली का चूर्ण बराबर भाग में मिलाकर दो ग्राम मात्रा में पुराने गुड़ के साथ मिलाएं। इसके सेवन से फेफड़ों और पेट के रोगों के उपचार में लाभ होता है। भोजन से पहले यदि अदरक का सेवन सेंधा नमक के साथ किया जाए, तो भूख भी बढ़ती है।
सिरदर्द में राहत दिलाए-
सिरदर्द होने पर अदरक के चूर्ण या इसके रस को गर्म पानी में मिलाकर हल्दी के साथ सिर पर इसका लेप करने से लाभ मिलता है। सर्दी के मौसम में पेट या दांत में दर्द होने पर अदरक को चबाकर खाने से तत्काल लाभ मिलता है। दांत के दर्द में अदरक को लौंग के साथ चबाकर खाना चाहिए।
जॉन्डिस में लाभकारी-
जॉन्डिस में अदरक, त्रिफला और गुड़ को साथ मिलाकर सेवन करना चाहिए।
जोड़ों के दर्द में-
अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो आथ्र्राइटिस यानी जोड़ों के दर्द में राहत दिलाता है। पुराने जोड़ों के दर्द में अदरक का रस, अश्वगंधा चूर्ण, शैलाकी चूर्ण, हल्दी का चूर्ण बराबर-बराबर भाग में मिलाकर शहद के साथ सेवन कर बाद में गर्म दूध, चाय या गर्म पानी पीने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है।
सर्दी, जुकाम, बुखार में फायदेमंद-
खांसी, जुकाम, गले में खराश, गला बैठने जैसी स्थिति में अदरक को पीसकर घी या शहद के साथ लेना चाहिए। हिचकी आने पर अदरक के रस का सेवन शहद व तुलसी के साथ करें। सांस के रोगी को शहद के साथ इसका रस देने से कफ पतला होता है, जिससे आराम मिलता है।
अदरक की चाय-
खासतौर पर ठंड के मौसम में अदरक व काली मिर्च के पांच दाने मिला कर तैयार की गई चाय पीने से लाभ होता है।
-बरतें सावधानी-
-ठंडी प्रकृति वाले लोगों को अदरक लाभ पहुंचाता है लेकिन जिन्हें अधिक गर्मी लगती हो या जो पित्त प्रकृति के हों तो उन्हें अदरक से बचना चाहिए।
-हृदय और किडनी के पुराने रोगियों के लिए भी यह नुकसानदायक होती है।
शौर्यपथ / कोरोना वायरस के चलते होटल व्यवसाय पर बुरी मार पड़ी है। शोधकर्ताओं का मानना है कि कोरोना संकट के बीच होटलों में रोबोट आधारित सर्विस शुरू करने से लोगों की सुरक्षित रखने के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करने में और व्यवसाय को तेजी से पटरी पर लाने में मदद मिल सकती है।
ब्रिटेन में सरे विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने प्रमुख चुनौतियों की पहचान करने के लिए 19 होटल मानव संसाधन (एचआर) विशेषज्ञों से बात की। उन्होंने कहा कि रोबोट सर्विस को होटल की गतिविधियों की दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन वे उच्च लागत, कौशल घाटे, होटल की संगठनात्मक संरचना और संस्कृति में महत्वपूर्ण बदलाव जैसी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कंटेम्परेरी हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट में प्रकाशित शोध पत्र के मुताबिक, रोबोटिक तकनीक के प्रत्याशित उपयोगों के चलते हमें मानव और रोबोट के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
होटल उद्योग में रोबोट सर्विस का प्रयोग बढ़ रहा :
शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया कि मार्च, 2020 में कोविड-19 के चलते दुनिया भर में आर्थिक स्थिति बदहाल हो गई। होटल उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई उद्योगों को फिर से पटरी पर लाने के लिए उनकी कार्यप्रणाली में परिवर्तन करना होगा। शोध पत्र की मुख्य लेखक ट्रेसी जू कहती हैं कि होटल उद्योग में रोबोट सर्विस का प्रयोग बढ़ रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है। उन्होंने कहा, संभावना है कि पाबंदिया हटाने के बाद होटल प्रबंधक नए सिरे से शुरुआत करने की योजना बना रहे होंगे, ऐसे में रोबोट सर्विस अपनाना सकारात्मक कदम होगा।
होटल-रेस्तरां में सर्विस दे रहे हैं रोबोट :
लीशर होटल्स ग्रुप के निदेशक विभास प्रसाद ने कहा कि रोबोट सर्विस की शुरुआत कोविड-19 से पहले ही होटल उद्योग और हॉस्पिटैलिटी में हो गई थी। बोस्टन में 'स्पाईस रेस्तरां' इस तरह के मशीनीकरण का उपयोग करता है। वहीं सैन फ्रांसिस्को में 'निर्माता' रोबोट का उपयोग शुरू से अंत तक बर्गर बनाने के लिए करता है। लेकिन अभी तक सीधे मेहमानों की आवभगत करने में रोबोट का उपयोग नहीं किया या है।
शौर्यपथ / कोरोना वायरस के चलते होटल व्यवसाय पर बुरी मार पड़ी है। शोधकर्ताओं का मानना है कि कोरोना संकट के बीच होटलों में रोबोट आधारित सर्विस शुरू करने से लोगों की सुरक्षित रखने के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करने में और व्यवसाय को तेजी से पटरी पर लाने में मदद मिल सकती है।
ब्रिटेन में सरे विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने प्रमुख चुनौतियों की पहचान करने के लिए 19 होटल मानव संसाधन (एचआर) विशेषज्ञों से बात की। उन्होंने कहा कि रोबोट सर्विस को होटल की गतिविधियों की दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन वे उच्च लागत, कौशल घाटे, होटल की संगठनात्मक संरचना और संस्कृति में महत्वपूर्ण बदलाव जैसी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कंटेम्परेरी हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट में प्रकाशित शोध पत्र के मुताबिक, रोबोटिक तकनीक के प्रत्याशित उपयोगों के चलते हमें मानव और रोबोट के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
होटल उद्योग में रोबोट सर्विस का प्रयोग बढ़ रहा :
शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया कि मार्च, 2020 में कोविड-19 के चलते दुनिया भर में आर्थिक स्थिति बदहाल हो गई। होटल उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई उद्योगों को फिर से पटरी पर लाने के लिए उनकी कार्यप्रणाली में परिवर्तन करना होगा। शोध पत्र की मुख्य लेखक ट्रेसी जू कहती हैं कि होटल उद्योग में रोबोट सर्विस का प्रयोग बढ़ रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है। उन्होंने कहा, संभावना है कि पाबंदिया हटाने के बाद होटल प्रबंधक नए सिरे से शुरुआत करने की योजना बना रहे होंगे, ऐसे में रोबोट सर्विस अपनाना सकारात्मक कदम होगा।
होटल-रेस्तरां में सर्विस दे रहे हैं रोबोट :
लीशर होटल्स ग्रुप के निदेशक विभास प्रसाद ने कहा कि रोबोट सर्विस की शुरुआत कोविड-19 से पहले ही होटल उद्योग और हॉस्पिटैलिटी में हो गई थी। बोस्टन में 'स्पाईस रेस्तरां' इस तरह के मशीनीकरण का उपयोग करता है। वहीं सैन फ्रांसिस्को में 'निर्माता' रोबोट का उपयोग शुरू से अंत तक बर्गर बनाने के लिए करता है। लेकिन अभी तक सीधे मेहमानों की आवभगत करने में रोबोट का उपयोग नहीं किया या है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कोरोना वायरस से बचने के लिए अमेरिका में कई लोग भोजन में ब्लीच तक मिलाकर खाने लगे है। अमेरिकी एजेंसी ‘सेंटर फॉर रिसर्च एंड डीसीज कंट्रोल’ के सर्वे में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, 19 फीसदी लोग न सिर्फ भोजन में ब्लीच मिला रहे हैं बल्कि वे ब्लीच से ही खाद्य पदार्थों को धोने लगे हैं। इतना ही नहीं, घर साफ करने वाले क्लीनर से वे शरीर के खुले अंगों को डिसइंफेक्ट कर रहे हैं। कई लोगों ने तो क्लीनर को सूंघने की बात भी स्वीकार की है।
सीडीसी ने मई में 502 वयस्कों के साथ एक ऑनलाइन सर्वेक्षण किया, जिसमें ये चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। सर्वे में शामिल 39 प्रतिशत लोगों ने माना कि उन्होंने कोरोना वायरस को नष्ट करने के लिए सफाई से जुड़े उत्पादों का गलत इस्तेमाल किया। इनमें से एक तिहाई लोगों के शरीर पर इन उत्पादों का नकारात्मक असर भी देखा गया है। शोधकर्ताओं ने लोगों के व्यवहार में आए इस बदलाव को लेकर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि सेनेटाइजर, ब्लीच और साफ-सफाई में प्रयोग किए जाने वाले क्लीनर का सावधानी पूर्वक इस्तेमाल होना चाहिए। इससे आप कोरोना से नहीं बच सके।
साबुन का पानी शराब में मिलाकर पी गए-
सर्वे में भाग लेने वाले 18 फीसदी अमेरिकियों ने कहा कि उन्होंने अपनी त्वचा पर घरेलू क्लीनर लगाए। 10 फीसदी वयस्कों ने कहा कि उन्होंने खुद पर कीटाणुनाशक स्प्रे छिड़का। छह फीसदी लोगों ने स्वीकार किया कि उन्होंने क्लीनर निगला और इसके स्प्रे से भाप ली और चार फीसदी लोगों ने एल्कोहल आदि नशीले पदार्थों में साबुन का पानी, ब्लीच व अन्य कीटनाशक द्वव्य मिलाकर पी लिए।
शरीर पर खतरनाक असर-
ब्लीच:
क्लीनिंग मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के अनुसार , ब्लीच मिश्रण सिर्फ ठोस सतहों पर इस्तेमाल करें, ब्लीच कपड़ों और नाजुक सतहों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। इसकी भाप भी हानिकारक है। इससे गले में दर्द और मुंह का स्वाद बिगड़ने की शिकायत होती है। ब्लीच का इस्तेमाल करते समय खिड़कियां खुली रखी जाएं। ब्लीच में अमोनिया, विनेगर व जंग मिटाने वाले द्वव्य तेजाब आदि मिलाने से जहरीली गैस बन सकती है।
क्लीनर-
क्लीनर से सफाई करते समय पेपर टॉवल सबसे अच्छा विकल्प है। कपड़ा या पोंछा इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें हर बार इस्तेमाल के बाद धोएं और बदलते भी रहें। कई क्लीनिंग उत्पादों के गलत इस्तेमाल से गला व आंखों में जलन, सिरदर्द के अलावा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।
सुरक्षा किट पहनकर करें सफाई : आईसीएमआर-
कोरोना वायरस की दहशत बढ़ने के बाद भारत के अलग-अलग हिस्सों से खबरें आईं कि लोग अपने शरीर से संक्रमण हटाने के लिए सेनेटाइजर तक पी रहे हैं। इसके बाद इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने स्पष्ट चेतावनी जारी की। इसमें कहा गया कि किसी भी तरह के ब्लीच, सेनेटाइजर, क्लीनर का इस्तेमाल शरीर पर करना हानिकारक है। सतहों को विसंक्रमित करते समय लोगों को व्यक्तिगत सुरक्षा किट पहननी चाहिए।
शौर्यपथ /कहते हैं दुनिया में प्रकृति ने प्रत्येक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से भिन्न बनाया है। चाल-ढाल, रूप-रंग के साथ-साथ स्वभाव में भी व्यक्ति अधिकतर एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। कई बार कुछ चीज़ें मिल भी जाती हैं, लेकिन व्यक्ति में कोई न कोई गुण-अवगुण ऐसा जरूर होता है जो उसे दूसरों से भिन्न बनाता है। इसलिये प्रत्येक व्यक्ति की मस्तक की रेखाएं भी समान नहीं होती। किसी की गहरी होती हैं,किसी की सीधी तो किसी ज्यादा होती हैं और किसी की कम। लेकिन इनमें भी सात मुख्य रेखाएं हैं। ये हैं– बुध, शुक्र, मंगल, शनि, गुरु, चंद्र एवं सूर्य रेखाएं।
बुध रेखा– यह रेखा आपकी भौहों के ठीक मध्य बनती है और मध्य से दोनों कानों की ओर जाती है। जिस जातक की बुध रेखा स्पष्ट दिखाई देती हो वह उसकी तीव्र बुद्धि की सूचक होती है। इनके भाग्य में काफी धन कमाना लिखा होता है। ये कभी भी आसानी से कोई आर्थिक नुकसान नहीं होने देते।
शुक्र रेखा– जिन जातकों की शुक्र रेखा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है वे बहुत ही भाग्यशाली होते हैं। इन्हें घूमने-फिरने का काफी शौक होता है। यह रेखा माथे के ठीक बीचोंबीच होती है। रेखा जितनी गहरी होगी जातक उतना ही भाग्यशाली होता है। यदि यह रेखा स्पष्ट न दिखाई दे तो ऐसे जातकों का भाग्य उनका साथ नहीं देता। गहरी रेखा वाले जातक प्यार के मामले में भी रोमांटिक होते हैं।
मंगल रेखा– यह रेखा भी लगभग माथे के बीचो-बीच ही होती है लेकिन इसका स्थान शुक्र रेखा से थोड़ा ऊपर होता है। ऐसे व्यक्ति जो भी कार्य करते हैं, उसके प्रति एक जुनून सा देखा जा सकता है। यदि जातक की मंगल रेखा गहरी हो तो उसका गुस्सा अक्सर सातवें आसमान पर रहता है। हालांकि ये दिल से बहुत ही साफ होते हैं, लेकिन इनके गुस्से से दूर ही रहा जाए तो बेहतर रहता है।
गुरु रेखा– शुक्र एवं मंगल रेखा के ऊपर पायी जाती है गुरु रेखा। ऐसे जातक आध्यात्मिक प्रवृति के पाये जाते हैं, सामाजिक रूप से भी ये काफी मिलनसार होते हैं। जिन जातकों की गुरु रेखा हल्की होती है या फिर न के बराबर होती है। ऐसे जातकों के पापकर्मों में लिप्त होने की संभावनाएं अधिक होती हैं। हालांकि ज्यादा गहरी रेखा भी इन्हें घर-परिवार एवं समाज से विमुख कर देती है जिस कारण इनमें विरक्ति का भाव आने की संभावनाएं होती हैं। इनका स्वभाव थोड़ा हठी भी होता है।
शनि रेखा- यह गुरु से ऊपर मस्तक के ऊपरी हिस्से में दिखाई देती है। यदि आपकी शनि रेखा गहरी है तो आपको जीवन में धन की कमी महसूस नहीं होती। जिस भी चीज़ को पाने का विचार एक बार आप मन में ठान लेते हैं तो उसे हासिल करके ही मानते हैं, लेकिन शनि रेखा बहुत कम जातकों के मस्तक में दिखाई देती है।
चंद्र रेखा– यह रेखा आपके आर्थिक जीवन के उतार-चढ़ाव के प्रदर्शित करने वाली होती है। यदि आपकी यह रेखा स्पष्ट है तो आपको धन की कोई कमी नहीं रहने वाली, लेकिन यह साफ दिखाई नहीं देती है या फिर खंडित नजर आती है तो आपको आर्थिक रूप से हानि होने की संभावनाएं प्रबल होती हैं। यह रेखा आपकी बाईं तरफ की भौंह के ठीक ऊपर होती है। जिनकी चंद्र रेखा गहरी होती है ऐसे जातक अधिकतर कला क्षेत्र में अपना नाम कमाते हैं।
सूर्य रेखा– यह चंद्र रेखा से ठीक विपरीत यानी दाईं ओर की भौंह के ऊपर होती हैं। इससे व्यक्ति का भाग्य तेज माना जाता है। जिनके जीवन में यह रेखा नहीं होता या फिर धूंधली होती है तो ऐसे जातकों को अपने जीवन में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
खेल / शौर्यपथ / वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान डेरेन सैमी ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो शेयर कर सनराइजर्स हैदाराबाद टीम में नस्लवाद के आरोप लगाए हैं। पिछले हफ्ते सैमी 'कालू' शब्द का मतलब जानने के बाद काफी गुस्से में आ गए थे। उन्होंने कहा कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दौरान मुझे और श्रीलंका के क्रिकेटर थिसारा परेरा को 'कालू' कहा जाता था। हम दोनों उस वक्त सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते थे। अब मुझे इस शब्द का मतलब समझ आया है और मैं बहुत गुस्से में हूं। हालांकि, उस वक्त उन्होंने किसी का भी नाम नहीं लिया था।
अब डेरेन सैमी ने नस्लवाद के मुद्दे को लेकर एक वीडियो जारी किया है। उन्होंने इस वीडियो को शेयर करते हुए कहा है कि मैं उन सभी लोगों को एक संदेश देना चाहता हूं, जो मेरे लिए इस शब्द का इस्तेमाल करते थे।
इंस्टाग्राम पर शेयर वीडियो में सैमी ने कहा, ''मैंने पूरी दुनिया में क्रिकेट खेला है और मुझे कई लोगों से प्यार मिला है। मैंने सभी ड्रेसिंग रूम को अपनाया है, जहां मैंने खेला है। इसलिए मैं हसन मिन्हाज को सुन रहा था कि कैसे उनकी संस्कृति के कुछ लोग काले लोगों का वर्णन करते हैं। ''
उन्होंने कहा, ''यह सब लोगों पर लागू नहीं होता है। इसलिए मैंने जब इस शब्द का मतलब जाना तो मैंने कहा था कि मैं गुस्से में हूं। इस शब्द का अर्थ का पता लगा तो मुझे यह अपमानजनक लगा था। तुरंत मुझे याद आया जब मैं सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेला था, तब मुझे ठीक वही शब्द कहा जा रहा था जो हमें काले लोगों के लिए अपमानजनक है।''
सैमी ने कहा कि मुझे जब यह शब्द कहा जाता था, तब मैं इसका मतलब नहीं जानता था। उनकी टीम के साथी उन्हें हर बार उस नाम से पुकारते थे और हंसते थे। उन्होंने कहा, मैं उन लोगों को संदेश देना चाहता हूं कि तुम लोग जानते हो कि तुम कौन हो। मुझे उस समय स्वीकार करना चाहिए था, जब मुझे वह शब्द कहा जाता था। लेकिन मुझे लगा कि इस शब्द का अर्थ मजबूत या इससे ही जुड़ा हुआ कुछ है। मैं नहीं जानता था कि इसका क्या मतलब है। जब भी मेरे लिए वह शब्द इस्तेमाल किया जाता था, तब वहां हंसी का माहौल होता था। मुझे लगता था कि टीममेट्स हंस रहे हैं तो शायद इसमें कुछ फनी होगा।''
डेरेन सैमी ने कहा, ''अब मुझे अहसास हुआ कि यह अपमानजनक था। मैं आप लोगों को मैसेज करूंगा और आप लोगों से पूछूंगा कि जब आप लोग मुझे उस नाम से बुलाते थे तो क्या आप लोगों का मतलब गलत होता था? मेरे सभी ड्रेसिंग रूम्स में बहुत अच्छी यादें हैं। इसलिए जो लोग भी मुझे इस शब्द से बुलाते थे, वे इस बारे में सोचना। इस पर बात करते हैं कि क्या यह आप गलत अर्थों में बोलते थे, अगर हां तो मैं बहुत निराश होऊंगा।''
बता दें कि विंडीज के पूर्व कप्तान अफ्रीकी-अमेरिकी शख्स जॉर्ज फ्लॉयड की मौत को लेकर काफी मुखर रहे हैं। उन्होंने फ्लॉयड की मौत को लेकर चल रहे विरोध करो अपना सपोर्ट दिया है।
हाल ही में अमेरिका में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की अमेरिका में हत्या हो गई।
46 वर्षीय फ्लॉयड की एक पुलिसकर्मी ने घुटने से उसकी गर्दन दबाई, जिसके चलते उनकी मृत्यु हो गई। उनकी हत्या के विरोध में पूरी दुनिया में विरोध दर्ज किया गया। इस पर डेरेन सैमी ने आईसीसी से यह अनुरोध किया था कि क्रिकेट जगत के लोग नस्लवाद के खिलाफ सामने आना चाहिए।
मनोरंजन / शौर्यपथ / लता मंगेशकर और आशा भोसले के बीच संगीत को लेकर चर्चा नहीं होती है। आशा ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि आमतौर पर दोनों बहनों में शायद ही कभी संगीत को लेकर चर्चा होती होगी। दोनों दिग्गज गायिकाओं पर किताबें लिखी गई हैं, इसलिए क्या आशा चीजों को अगले स्तर पर ले जाते हुए उनके बारे में किसी को कोई बायोपिक बनाने दे सकती हैं?
आशा ने आईएएनएस से कहा, "लता दीदी और मैं शायद ही कभी संगीत पर चर्चा करते हैं। हम एक परिवार हैं और हम रोजमर्रा की बहुत सामान्य चीजों की बात करते हैं। हमारा जीवन निजी और व्यक्तिगत है, जहां तक मेरा सवाल है मैं नहीं चाहूंगी कि हम एक फिल्म का विषय बनें।" वर्तमान में अलग-अलग अपार्टमेंट में रह रहीं दोनों बहनों में से छोटी बहन आशा ने कहा, "वह (लता दीदी) 90 साल की हैं और अपने जीवन व परिवेश के साथ शांति में हैं।"
कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के मद्देनजर लागू लॉकडाउन के दौरान भी आशा खुद को व्यस्त रखती आई हैं। आशा ने कहा, "मैं अपनी गायकी कर रही हूं. घर पर व्यायाम करना, नए पकवान बनाना, फिल्में देखना और परिवार के साथ समय बिता रही हूं। मैंने अपने नए यूट्यूब चैनल को लॉन्च किया. दूसरे शब्दों में कहूं, तो मैं खुद को बहुत व्यस्त रख रही हूं।"
वह म्यूजिक कंपोज (संगीत की रचना) भी कर रही हैं। उन्होंने कहा, "मैंने कई धुनों की रचना की है, लेकिन मैंने गीत नहीं लिखे हैं। इसके बारे में मैं प्रसून जोशी और जावेद अख्तर से कह सकती हूं, ताकि फिर इसे रिकॉर्ड करके अपने यूट्यूब पर शेयर कर सकूं।" उन्होंने 1960 से लेकर 1990 के दशक तक कई हिट रचनाएं करने वाले अपने दिवंगत पति का जिक्र करते हुए कहा, "मेरे पास दिवंगत श्री राहुल देव बर्मन की अपने पीछे छोड़ी गई कई महान धुनें हैं।"
आशा ने लॉकडाउन के बीच हाल ही में प्रशंसकों के साथ संवाद करने और अपने जीवन के कई दिलचस्प पहलूओं को उजागर करने के लिए अपना यूट्यूब चैनल लॉन्च किया है। 86 वर्षीय संगीतकार ने कहा, "मेरी पीढ़ी से कोई नहीं है, जो अब उस युग का वर्णन कर सके। मेरा पहला गाना ब्रिटिश भारत में साल 1943 में रिकॉर्ड किया गया था। मैंने भारत का विभाजन देखने के साथ ही द्वितीय विश्व युद्ध, कई महामारियों और संघर्षों वाला काल देखा है। इसलिए यूट्यूब चैनल के माध्यम से बताने के लिए कई किस्से हैं।
नजरिया / शौर्यपथ / साल 1997 में एशियाई आर्थिक संकट के मद्देनजर तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने सात देशों के उस समूह के विस्तार की जरूरत पर बल दिया था, जिसे जी-7 कहा जाता है। उनकी कोशिश के चलते साल 1999 में जी-20 समूह की शुरुआत हुई थी और इसमें यूरोपीय संघ और 19 देश शामिल थे।
अब उस घटनाक्रम के चौबीस साल बाद एक और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उसी जी-7 के विस्तार की अपील की है और अपनी अपील को आधार देने के लिए उन्होंने इस समूह को ‘बहुत पुराना’ बताया है। वैसे ट्रंप इस विस्तार से चाहते क्या हैं, यह साफ नहीं है। हालांकि, तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन जो चाहते थे, वह भी पहले स्पष्ट नहीं था। अब ट्रंप अतिरिक्त सदस्यों के रूप में भारत, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और रूस को शामिल करते हुए जी-10 या जी-11 बनाने की सोच रहे हैं। इसका गणित स्पष्ट है; यह जी-11 बन जाना चाहिए, लेकिन जी-10 की चर्चा क्यों? गौरतलब है, रूस को 2014 में इस अहम समूह से बाहर कर दिया गया था। तब रूस ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था और इसी के कारण जी-8 तब जी-7 बन गया था। दिलचस्प यह है कि जी-7 में शामिल अन्य देशों के अधिकांश प्रमुख रूस के प्रति ट्रंप के उत्साह को साझा नहीं करते हैं। लेकिन अकेली इसी अनिश्चितता की वजह से ट्रंप की जी-7 विस्तार की योजना पर संदेह नहीं करना चाहिए। इस समूह के विस्तार पर चर्चा करने वालों ने वर्ष 1997-99 में भी शामिल होने योग्य प्रत्याशियों पर विचार किया था, लेकिन उन्होंने तब सदस्य संख्या कम रखने को ही सही माना था। उस समूह में भारत के लिए भी जगह बनी थी।
वाकई 1997 में एशियाई देशों में व्यापक आर्थिक संकट के कारण वैश्विक वित्तीय स्थिरता की राह में खड़ी चुनौतियों से मुकाबले के लिए एक बडे़ मंच की जरूरत थी और जी-20 ने उसकी पूर्ति की। साल 2008 के आर्थिक संकट के बाद भी जी-20 ने प्रभावी भूमिका निभाई थी। अब कहा जा सकता है कि तत्कालीन योजना अपेक्षाकृत ज्यादा सोची-समझी थी।
दूसरी ओर, ट्रंप की विस्तार योजना अच्छी तरह से सोची-समझी नहीं है। दुनिया कोरोना वायरस के कारण पिछले 100 साल के सबसे खराब स्वास्थ्य संकट का सामना कर रही है, पर ट्रंप की नई कोशिश इस महामारी पर केंद्रित नहीं दिखती। यदि वह इस समस्या से निपटने की कोेशिश में बहुपक्षपवाद पर विश्वास करते, तो विश्व स्वास्थ्य संगठन में अपने देश के आर्थिक सहयोग को जारी रखते और इस संस्था को भीतर से बदलने के लिए मजबूर करते। इसके साथ ही, समूह विस्तार की उनकी पहल महामारी के समय पैदा हुए आर्थिक संकट पर भी केंद्रित नहीं दिखती है।
इस समय डोनाल्ड ट्रंप को सबसे ज्यादा चिंता अपने चुनाव की है। वह जीत की संभावनाएं तलाश रहे हैं। यही कारण है, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल, जो पश्चिमी दुनिया के राजनेताओं में सबसे तेज हैं, चुनावी साल में अमेरिका दौरा करने से परहेज करती हैं, वह शिखर सम्मेलन में नहीं जाएंगी और न जाने की उनके पास अन्य वजहें मौजूद हैं। मर्केल चीन के खिलाफ गुट बनाने के किसी भी प्रयास में शामिल होने को तैयार नहीं हैं। ट्रंप के एक सहयोगी ने संकेत दिया है कि राष्ट्रपति ट्रंप जी-7 की अगली बैठक में चीन के भविष्य पर चर्चा करना चाहेंगे। अमेरिका-चीन संबंधों में जो तेज गिरावट देखी जा रही है, उसकी पृष्ठभूमि में यह चर्चा अस्वाभाविक नहीं है। हालांकि इससे यूरोपीय देश सहमत नहीं लगते। चीन को अलग-थलग करने के लिए जी-7 का विस्तार करने पर यूरोपीय देशों को राजी करना मुश्किल है।
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेहमान के रूप में बैठक में भाग लेने के लिए ट्रंप का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। भारतीय प्रधानमंत्री ने साल 2019 में राष्ट्रपति इमेनुएल मेक्रॉन के निमंत्रण पर जी-7 शिखर सम्मेलन में मेहमान के रूप में भाग लिया था। फ्रांस के राष्ट्रपति मेक्रॉन ने भी विस्तारित जी-7 में भारत को शामिल करने के ट्रंप के प्रस्ताव का स्वागत किया है। यह समूह, दुनिया की विकसित अर्थव्यवस्थाओं का सबसे अभिजात्य क्लब है, लेकिन बेहतर है कि भारत तब तक अपनी हसरतों को काबू में रखे, जब तक कि वह असली नतीजों और घटनाक्रम के साथ पूरी योजना को देख नहीं लेता।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) यशवंत राज, अमेरिका में हिन्दुस्तान टाइम्स संवाददाता
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
