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June 30, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ


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शहीद की माताजी से की आत्मीय भेंट, अंत्योदय कार्ड जारी करने के दिए निर्देश

रायपुर , /
महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सुकमा जिले के जगरगुंडा स्थित शहीद एएसआई रामू राम नाग के निवास पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर राष्ट्र की रक्षा एवं जनसेवा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने शहीद की माताजी से आत्मीय मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान प्रदेश और देश की अमूल्य धरोहर है तथा उनके परिवारों का सम्मान और संरक्षण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

इस अवसर पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने संबंधित अधिकारियों को शहीद परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए शहीद की माताजी के लिए अंत्योदय राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया तत्काल पूर्ण करने को कहा, ताकि उन्हें शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सहजता से प्राप्त हो सके।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आज विकास, विश्वास और शांति के नए युग की ओर अग्रसर है। ऐसे समय में प्रदेश के वीर सपूतों के त्याग और बलिदान को सदैव स्मरण रखना हम सभी का दायित्व है। शहीद परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है।

कभी नक्सल प्रभाव का प्रतीक रहे इलाकों में अब विकास, विश्वास और जनभागीदारी की नई इबारत

रायपुर, ।
बस्तर अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जो क्षेत्र कभी भय, असुरक्षा और नक्सली प्रभाव के कारण पहचाने जाते थे, वहां आज विकास, विश्वास और जनभागीदारी की नई ऊर्जा दिखाई दे रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, पोषण और आजीविका के माध्यम से सुदूर अंचलों में परिवर्तन की मजबूत आधारशिला तैयार हो रही है।

इसी बदलते बस्तर की विकास यात्रा को गति देने महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े एक दिवसीय प्रवास पर सुकमा जिले के जगरगुंडा, चिंतलनार, पूर्वर्ती और सिलगेर पहुंचीं।

इस प्रवास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि श्रीमती राजवाड़े सड़क मार्ग से जगरगुंडा पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनीं। वर्षों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में उनका यह दौरा केवल प्रशासनिक उपस्थिति नहीं, बल्कि शासन की संवेदनशीलता, भरोसे और विकास के संकल्प का प्रतीक बनकर सामने आया।

दौरे के दौरान मंत्री ने पूर्वर्ती एवं सिलगेर के आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया तथा अन्नप्राशन एवं गोदभराई कार्यक्रमों में शामिल होकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने बच्चों के साथ आत्मीय संवाद किया, ग्रामीण महिलाओं से मुलाकात की और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर अधिकाधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र कभी संघर्ष और असुरक्षा की पहचान थे, वहीं आज महिला स्वावलंबन, शिक्षा, पोषण और सामाजिक उन्नति के केंद्र बनते जा रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और स्थानीय स्तर पर नई संभावनाओं का निर्माण कर रही हैं।

प्रवास के दौरान मंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत जगरगुंडा स्थित कृतिका महिला संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से संवाद कर उनकी आजीविका, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

ग्रामीण महिलाओं ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पहली बार कोई महिला मंत्री सड़क मार्ग से सीधे जगरगुंडा पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और संवाद करने आई हैं। उन्होंने इसे शासन के प्रति बढ़ते विश्वास और गांव तक पहुंचते विकास का सकारात्मक संकेत बताया।

श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के अंतिम छोर तक विकास की रोशनी पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, रोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए योजनाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय जनसहयोग और सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों के समन्वित प्रयासों से बस्तर में शांति, स्थायित्व और समृद्धि का नया वातावरण तैयार हुआ है। जगरगुंडा, पूर्वर्ती और सिलगेर जैसे क्षेत्रों में बच्चों की मुस्कान, महिलाओं का आत्मविश्वास और विकास की नई संभावनाएं आज बदलते बस्तर की सबसे सशक्त पहचान बन चुकी हैं।

 रायपुर ।
महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बस्तर संभाग के सुकमा जिले के प्रवास के दौरान सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र, लस्केपारा (छिंदगढ़) की पोषण वाटिका में नन्हें बच्चों के साथ मुनगा एवं पपीता के पौधों का पौधरोपण कर सुपोषण, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का प्रेरक संदेश दिया।

इस अवसर पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने “हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण” का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ समाज की शुरुआत घर और आंगन से होती है तथा पोषण और प्रकृति संरक्षण दोनों को जनआंदोलन बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने बच्चों के साथ संवाद करते हुए मुनगा और पपीता के पौधों के पोषण महत्व को सरल और रोचक तरीके से समझाया। बच्चों के हाथों पौधरोपण कराते हुए उन्होंने प्रकृति से जुड़ाव और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि मुनगा को ‘सुपोषण वृक्ष’ के रूप में विशेष पहचान मिली है, क्योंकि इसकी पत्तियां, फलियां और फूल आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और कुपोषण जैसी चुनौती से मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वहीं पपीता विटामिन एवं खनिज तत्वों का समृद्ध स्रोत है, जो बच्चों, किशोरियों एवं महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार अपने घर एवं आंगन में कम से कम एक मुनगा का पौधा अवश्य लगाए। इससे परिवारों को घर के समीप पौष्टिक आहार उपलब्ध होगा और कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण में जनसहभागिता सुनिश्चित होगी।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ बचपन, सुपोषित परिवार और हरित भविष्य हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। पौधरोपण केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य का संकल्प भी है।

राज्य सरकार द्वारा संचालित सुपोषण अभियान के अंतर्गत पोषण वाटिकाओं के माध्यम से बच्चों, किशोरियों और माताओं को स्थानीय स्तर पर पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। बस्तर अंचल से प्रारंभ हुआ यह संदेश अब प्रदेश में पोषण, स्वास्थ्य और हरियाली के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

नई दिल्ली / सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कुछ पोस्टों में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा 28 जुलाई, 2025 को संसद में दिए गए भाषण को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। इन पोस्टों में भाषण के एक चुनिंदा अंश को उद्धृत करके यह झूठा दावा किया गया है कि रक्षा मंत्री ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी भारतीय सैनिक की जान नहीं गई। ये पोस्ट जानबूझकर भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।

रक्षा मंत्री के संसदीय भाषण को विवाद का मुद्दा बनाने की कोशिश करने वालों ने जानबूझकर उनके बयान के पूरे संदर्भ को नजरअंदाज किया है। यह याद रखना जरूरी है कि रक्षा मंत्री के भाषण के समय, मीडिया के कुछ वर्गों और सोशल मीडिया पर एक बेहद प्रचलित और प्रभावी धारणा फैली हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय पायलट लापता हो गए थे। यह धारणा पूरी तरह से झूठी थी, फिर भी इसे ऑपरेशन की सफलता को कम करने और जनता का मनोबल गिराने के स्पष्ट इरादे से आक्रामक रूप से फैलाया जा रहा था। उसी संदर्भ में रक्षा मंत्री ने यह बयान दिया था इसलिए, उनकी टिप्पणी उस समय बेहद तेजी से फैल रहे झूठ का लक्षित और प्रासंगिक जवाब थी।

रक्षा मंत्री के भाषण को उसके संपूर्ण और उचित संदर्भ में समझना भी महत्वपूर्ण है। संसद में दिया गया उनका भाषण, संपूर्ण रूप से, ऑपरेशन सिंदूर की उल्लेखनीय सफलता का गौरवपूर्ण और सटीक वर्णन था। इस ऑपरेशन में भारतीय रक्षा बलों ने अद्वितीय सटीकता, दृढ़ संकल्प और सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया। ऑपरेशन के दौरान 100 से अधिक आतंकवादियों और पाकिस्तानी सैनिकों को निशाना बनाया गया था। इसके साथ ही नियंत्रण रेखा पर स्थित पाकिस्तानी हवाई ठिकानों और तैनाती क्षमता को व्यापक एवं महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचागत क्षति भी पहुंची। यह भाषण भारतीय रक्षा बलों के साहस और क्षमता को उचित श्रद्धांजलि थी और भारत को नुकसान पहुंचाने की इच्छा रखने वालों के लिए एक स्पष्ट संदेश था।

रक्षा मंत्री और भारत सरकार भारतीय रक्षा बलों के प्रत्येक सदस्य के प्रति, और विशेष रूप से राष्ट्र की रक्षा में प्राणों की आहुति देने वालों के प्रति, अपना आदर, कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करते हैं। उनका बलिदान मातृभूमि की सर्वोच्च सेवा है और इसे सदा गरिमा, गौरव और सम्मान के साथ याद किया जाएगा।

उनके सर्वोच्च बलिदान को मान्यता देते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि उनके नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की दीवारों पर अंकित हों। सरकार ने वीर शहीदों के परिवार/आश्रितों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं में रियायतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए हैं।

पीआईबी ने भ्रामक दावों का किया खंडन, शहीदों को समय पर मिली श्रद्धांजलि और वीरता सम्मान

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह वीर सैनिकों के सम्मान को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया मंचों पर प्रसारित भ्रामक दावों का स्पष्ट खंडन किया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने कहा है कि यह दावा पूरी तरह तथ्यात्मक नहीं है कि इन सैनिकों के बलिदान को हाल ही में पहली बार आधिकारिक मान्यता दी गई या सार्वजनिक किया गया।
पीआईबी के अनुसार, राष्ट्र ने इन अमर वीरों को उनके बलिदान के तुरंत बाद ही पूरे सम्मान के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की थी। 11 मई 2025 को आयोजित आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स (DGMO) ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान शहीद हुए इन सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उनके सर्वोच्च बलिदान का सार्वजनिक रूप से उल्लेख किया था।
इसके बाद 14 अगस्त 2025 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इन वीर सैनिकों को प्रदान किए गए वीरता पुरस्कारों की जानकारी सार्वजनिक की गई। भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों पर तत्काल श्रद्धांजलि अर्पित कर इन वीरों के अदम्य साहस और राष्ट्रसेवा को नमन किया।
पीआईबी ने बताया कि 15 जनवरी 2026 को जयपुर में आयोजित आर्मी डे परेड के दौरान सेना प्रमुख ने तीन शहीद सैनिकों के परिजनों को सेना मेडल (वीरता) प्रदान किया। वहीं 8 अक्टूबर 2025 को आयोजित विशेष समारोह में वायु सेना प्रमुख ने संबंधित शहीदों के परिजनों को वीरता सम्मान सौंपा। यह भारतीय सशस्त्र बलों की उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले प्रत्येक सैनिक का सम्मान सर्वोच्च गरिमा के साथ किया जाता है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय समर स्मारक पर शहीदों के नाम अंकित करने की एक निर्धारित और सम्मानजनक प्रक्रिया होती है, जिसका भारतीय सशस्त्र बल पूरी गंभीरता और प्रोटोकॉल के साथ पालन करते हैं। इसलिए यह कहना कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तथ्यात्मक रूप से गलत है।
पीआईबी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के निराधार दावे न केवल तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करते हैं, बल्कि शहीदों के परिजनों को अनावश्यक पीड़ा पहुंचाने और राष्ट्र के वीर सपूतों के सम्मान को ठेस पहुंचाने का जोखिम भी पैदा करते हैं। सभी मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से अपील की गई है कि शहीद सैनिकों से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और तथ्यात्मकता का पालन करें तथा अपुष्ट सूचनाओं के प्रसार से बचें।

राष्ट्र का प्रण
भारतीय सशस्त्र बलों ने दोहराया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के छहों वीर सैनिक राष्ट्र के अमर नायक हैं। उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। उनकी स्मृति का सम्मान हमेशा पूर्ण गरिमा, कृतज्ञता और श्रद्धा के साथ किया जाता रहेगा।

     नई दिल्ली। नागर विमानन मंत्रालय ने चारधाम यात्रा-2026 के पहले चरण में हेलीकॉप्टर संचालन को पूरी तरह सुरक्षित और सफल बताया है। अप्रैल से 26 जून 2026 तक चले इस चरण में 12,032 शटल उड़ानों के जरिए 67,064 तथा 2,065 चार्टर उड़ानों से 11,715 श्रद्धालुओं को यात्रा सुविधा मिली। इस प्रकार कुल 78,779 तीर्थयात्रियों ने हेलीकॉप्टर सेवा का लाभ उठाया।
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रद्धालुओं की सुरक्षित और सुगम यात्रा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही। उन्होंने उत्तराखंड सरकार, डीजीसीए, एएआई, यूकाडा और अन्य एजेंसियों के समन्वित प्रयासों की सराहना की।

मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कड़े मानक लागू किए गए। प्रतिदिन लगभग 400 हेलीकॉप्टर उड़ानों का संचालन हुआ। हेलीकॉप्टर ट्रैकिंग, उन्नत मौसम निगरानी, एटीसी सेवाएं, 33 पीटीजेड कैमरों से निगरानी, दो एकीकृत कमांड सेंटर, सख्त पायलट योग्यता मानक और नियमित सुरक्षा ऑडिट जैसे उपायों के कारण पूरा संचालन बिना किसी घटना के सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
मंत्रालय ने इसे देश के सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय विमानन क्षेत्रों में सुरक्षित संचालन का महत्वपूर्ण उदाहरण बताते हुए कहा कि भविष्य में भी हेलीकॉप्टर सुरक्षा और यात्री सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा।

   नई दिल्ली / भारतीय तटरक्षक बल ने 27 जून, 2026 को गोवा स्थित गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में नई पीढ़ी के त्वरित गश्ती जहाज (एफपीवी) आईसीजीएस अक्षय को अपने बेड़े में शामिल कर आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
अक्षय नाम का यह तेज गश्ती पोत देश के समुद्री हितों की रक्षा के प्रति भारतीय तटरक्षक बल की अटूट प्रतिबद्धता, दृढ़ता और संकल्प का प्रतीक है। यह पोत भारत के विशाल समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा को और सुदृढ़ करेगा तथा समुद्री सुरक्षा और स्वच्छ समुद्री वातावरण बनाए रखने के प्रति भारतीय तटरक्षक बल की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।
यह पोत तटरक्षक बल के विभिन्न अभियानों को पूरा करने में सक्षम है, जिनमें समुद्री कानून का प्रवर्तन, तटीय सुरक्षा, खोज एवं बचाव अभियान, समुद्री पर्यावरण संरक्षण व संकटग्रस्त नाविकों को सहायता प्रदान करना शामिल है। इसके शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता और अधिक सुदृढ़ होगी।
इस पोत को वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग में अपर सचिव (कार्मिक) श्रीमती परमा सेन ने भारतीय तटरक्षक बल में कमीशन किया। इस अवसर पर तटरक्षक क्षेत्र (पश्चिम) के कमांडर इंस्पेक्टर जनरल भीष्म शर्मा, पीटीएम, टीएम, डिप्टी डायरेक्टर जनरल (एचआरडी) इंस्पेक्टर जनरल ज्योतिंद्र सिंह, टीएम और केंद्र व राज्य सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा डिजाइन एवं निर्मित आईसीजीएस अक्षय स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह 'आत्मनिर्भर भारत' के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस पोत के भारतीय तटरक्षक बल में शामिल होने से देश की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को और बल मिलेगा तथा भारत के समुद्री इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन मॉडल के तहत सुकमा में औचक निरीक्षण, अव्यवस्थाओं पर तत्काल कार्रवाई; बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से समझौता नहीं

रायपुर/सुकमा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सुशासन, जवाबदेही और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की प्राथमिकता को धरातल पर उतारते हुए सुकमा जिला प्रशासन ने शासकीय छात्रावासों और आश्रमों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले कलेक्टर और सहायक आयुक्त द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर कई अधीक्षकों और कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया, जबकि कुछ को प्रभार से अलग कर दिया गया।

निरीक्षण के दौरान छात्रावासों में साफ-सफाई की बदहाल स्थिति, अधिकारियों-कर्मचारियों की अनुपस्थिति, रखरखाव में लापरवाही और पूर्व में दिए गए निर्देशों की अनदेखी जैसी गंभीर कमियां उजागर हुईं। जिला प्रशासन ने इसे विद्यार्थियों के हितों के साथ गंभीर लापरवाही मानते हुए बिना देर किए अनुशासनात्मक कार्रवाई की।

इन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई

कार्रवाई के तहत कन्या आश्रम दुब्बाटोटा की अधीक्षिका सुशीला कवासी, प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास दुब्बाटोटा के अधीक्षक पुनेम हिरमा, पोस्ट-मैट्रिक कन्या छात्रावास की अधीक्षिका सविता यादव तथा प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के भोजराज ठाकुर के विरुद्ध निलंबन एवं प्रभार से पृथक करने की कार्रवाई की गई। छात्रावासों का संचालन प्रभावित न हो, इसके लिए तत्काल वैकल्पिक अधिकारियों को जिम्मेदारी भी सौंप दी गई।

बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि छात्रावासों एवं आश्रमों में अध्ययनरत बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शासन की मंशा के अनुरूप सभी संस्थानों में स्वच्छ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण वातावरण सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सुशासन की दिशा में सख्त संदेश

जिला प्रशासन की यह कार्रवाई केवल अनुशासनात्मक कदम नहीं, बल्कि पूरे तंत्र के लिए स्पष्ट संदेश है कि शासकीय संस्थानों में जवाबदेही तय होगी और बच्चों के भविष्य से जुड़ी व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर की लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है।

अतिवृष्टि और जलभराव से निपटने के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की दिन-रात ड्यूटी तय, त्वरित राहत देने का दावा

दुर्ग,। मानसून 2026 के दौरान संभावित अतिवृष्टि, जलभराव एवं बाढ़ जैसी आपात परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए नगर पालिक निगम दुर्ग ने बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ का गठन कर दिया है। निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल के निर्देश पर निगम कार्यालय में 24 घंटे संचालित होने वाला कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जो पूरे मानसून सीजन में लगातार कार्य करेगा।

बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ की संपूर्ण मॉनिटरिंग एवं विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी कार्यपालन अभियंता प्रकाशचंद्र थवानी को नोडल अधिकारी के रूप में सौंपी गई है। उनके सहयोग के लिए स्वास्थ्य, अभियंत्रिकी एवं कार्यशाला शाखा के अधिकारियों की टीम भी गठित की गई है।

नगर निगम ने कंट्रोल रूम के सुचारु संचालन के लिए सप्ताह के सातों दिन दिन एवं रात्रि पाली में अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित कर दी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकें।

निगम प्रशासन का कहना है कि मानसून के दौरान यदि कहीं जलभराव, बाढ़ अथवा अन्य आपदा की स्थिति उत्पन्न होती है तो बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ पूरी तरह सक्रिय रहकर त्वरित कार्रवाई करेगा। साथ ही नागरिकों की सुरक्षा एवं राहत कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संस्कृति, आस्था और राष्ट्रीय एकात्मता का अनूठा अभियान हुआ सफल ,प्रदेश के विशिष्टजनों ने किया प्रथम ज्योतिर्लिंग के दर्शन

रायपुर /भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा देने वाली छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी ’’सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा’’ आज सफलता के साथ संपन्न हुई। पांच दिवसीय इस ऐतिहासिक यात्रा के बाद प्रदेश के सभी जिलों से शामिल 1040 विशिष्टजन सकुशल रायपुर लौटे, जहां रायपुर रेलवे स्टेशन पर उनका आत्मीय, गरिमामय एवं भव्य स्वागत किया गया। यात्रियों के चेहरों पर संतोष, श्रद्धा और आत्मिक आनंद की झलक इस अभिनव यात्रा की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण बनी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित इस विशेष सांस्कृतिक यात्रा ने केवल श्रद्धालुओं को भारत के प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के दर्शन का अवसर ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें देश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रीय एकात्मता का भी जीवंत अनुभव कराया। यात्रा ने यह संदेश भी दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक मूल्यों और राष्ट्रीय गौरव को भी समान प्राथमिकता दे रही है।

इस यात्रा में प्रदेश के पद्मश्री सम्मान प्राप्त विभूतियों, राष्ट्रीय एवं राज्य सम्मान से सम्मानित कलाकारों, साहित्यकारों, संस्कृति कर्मियों, समाजसेवियों तथा अन्य विशिष्टजनों ने सहभागिता की। इससे छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, कला, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।

संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन तथा संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ के सुव्यवस्थित प्रबंधन में आयोजित इस यात्रा की देशभर में सराहना हुई। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग, गुजरात राज्य सरकार के समन्वय तथा सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के आत्मीय सहयोग से यात्रा का प्रत्येक चरण अत्यंत सुव्यवस्थित, सुरक्षित और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान सोमनाथ के दिव्य दर्शन-पूजन के साथ मंदिर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन किया। प्रतिभागियों ने भारत की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक सोमनाथ धाम के महत्व को निकट से अनुभव किया। अनेक प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्रों की पावन मिट्टी और नदियों का जल भगवान सोमनाथ को अर्पित कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एकता के सूत्र से जोड़ने का संदेश दिया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास पर आधारित आकर्षक लाइट एंड साउंड शो का भी अवलोकन किया, जिसने मंदिर के पुनर्निर्माण, भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान की प्रेरक गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

पूरी यात्रा के दौरान आवागमन, आवास, भोजन, चिकित्सा, सुरक्षा तथा अन्य सभी व्यवस्थाएं उच्च स्तर पर सुनिश्चित की गईं। संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे स्वयं विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ पूरी यात्रा में उपस्थित रहे और प्रत्येक यात्री की सुविधा का विशेष ध्यान रखा। यात्रियों ने व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि शासन ने उन्हें परिवार जैसा स्नेह और सम्मान प्रदान किया।

यात्रा से लौटे प्रतिभागियों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताते हुए कहा कि वर्षों से संजोई गई सोमनाथ दर्शन की उनकी इच्छा शासन की इस निःशुल्क और सुव्यवस्थित पहल से पूरी हो सकी। उन्होंने कहा कि भगवान सोमनाथ के दिव्य दर्शन, वहां का आध्यात्मिक वातावरण, ऐतिहासिक लाइट एंड साउंड शो तथा उत्कृष्ट यात्रा प्रबंधन ने उन्हें आत्मिक शांति के साथ भारतीय संस्कृति के प्रति नया गर्व प्रदान किया।

रायपुर रेलवे स्टेशन पर लौटे श्रद्धालुओं का पारंपरिक रीति-रिवाज, पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और आत्मीय अभिनंदन के साथ भव्य स्वागत किया गया। स्वागत समारोह के दौरान यात्रियों ने छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा केवल तीर्थाटन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का प्रेरक अभियान रही।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच के अनुरूप यह यात्रा इस बात का प्रमाण बनी कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर से जन-जन को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में संस्कृति विभाग द्वारा किए गए सफल आयोजन ने यह भी सिद्ध किया कि इस तरह के आयोजन समाज में आत्मगौरव, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा की सफलता ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय सांस्कृतिक परिदृश्य में नई पहचान प्रदान की है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, गुजरात राज्य सरकार, सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट तथा छत्तीसगढ़ शासन के समन्वित प्रयासों से संपन्न यह ऐतिहासिक यात्रा आने वाले समय में सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय एकात्मता के क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण के रूप में याद की जाएगी।


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