September 22, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    चार दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं, पीड़ितों के आरोप और चौकी प्रभारी के बयान में फर्क; मजदूरों में डर, पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

    दुर्ग ग्रामीण। अंजोरा चौकी क्षेत्र के महमरा में करीब चार दिन पहले हुई चाकूबाजी और कथित लूट की घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है, लेकिन वारदात में शामिल बताए जा रहे आरोपी की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों है?

    पीड़ित पक्ष का आरोप है कि वारदात के दौरान बंदूक की नोक पर चाकूबाजी और लूटपाट की गई। पीड़ितों के मुताबिक मोबाइल, नगदी और बाइक की चाबी ले जाने की बात भी सामने आई है। दूसरी ओर अंजोरा चौकी प्रभारी चंद्रशेखर सोनी का कहना है कि पीड़ितों को शायद भ्रम हुआ हो और घटना में बंदूक नहीं बल्कि उंगली की नोक जैसी स्थिति रही होगी। बंदूक थी या नहीं, यह जांच का विषय है, लेकिन घटना में चाकूबाजी और कथित लूट के आरोपों की जांच पुलिस के सामने अहम चुनौती है।

    अनुभवी प्रभारी, फिर गिरफ्तारी में देरी क्यों?

    अंजोरा चौकी की जिम्मेदारी फिलहाल चंद्रशेखर सोनी संभाल रहे हैं। पुलिस विभाग में लंबे अनुभव के साथ वे क्राइम ब्रांच में भी सेवाएं दे चुके हैं। ऐसे में गंभीर घटना के चार दिन बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्रवाई की गति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    सवाल यह भी है कि यदि पुलिस के पास घटना से संबंधित पर्याप्त जानकारी और सुराग हैं, तो आरोपी तक पहुंचने में आखिर इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या पुलिस की जांच किसी खास बिंदु पर अटकी हुई है, या आरोपी की तलाश के लिए अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई चल रही है?

    क्राइम ब्रांच की भूमिका भी सवालों के घेरे में

    घटना की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच की भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। यदि वारदात में हथियार के इस्तेमाल और लूट के आरोप सामने आए हैं, तो आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कार्रवाई कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है—इसका जवाब क्षेत्र के लोग जानना चाहते हैं।

    मजदूरों में डर, शाम ढलते ही सुरक्षा की चिंता

    महमरा और आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे मजदूर और गरीब परिवार हैं, जो रोज सुबह काम की तलाश में घर से निकलते हैं और देर शाम वापस लौटते हैं। ऐसे में चाकूबाजी और कथित लूट की घटना की चर्चा ने उनके बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    लोगों का सवाल सीधा है—जब आम आदमी रोजी-रोटी के लिए सुबह घर से निकलता है और देर रात लौटता है, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?

    अब पुलिस से तीन सीधे सवाल

    पहला— घटना के चार दिन बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?

    दूसरा— पीड़ितों के बंदूक के आरोप और चौकी प्रभारी के “भ्रम” वाले बयान की पुलिस जांच किस निष्कर्ष तक पहुंची?

    तीसरा— चाकूबाजी और कथित लूट की इस घटना का पुलिस खुलासा आखिर कब करेगी?

    फिलहाल बंदूक थी या नहीं, यह जांच का विषय है, लेकिन चाकूबाजी और कथित लूट की घटना ने क्षेत्र में डर जरूर पैदा किया है। अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं। आरोपी कब पकड़ा जाएगा और मामले का पूरा सच कब सामने आएगा—यह सवाल महमरा के लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

    दुर्ग । शहर को स्वच्छ, सुंदर और प्लास्टिक मुक्त बनाने के उद्देश्य से नगर निगम आयुक्त लीना कोसम के निर्देश पर प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। निगम प्रशासन द्वारा जनजागरूकता के साथ बाजार क्षेत्रों में प्रतिबंधित प्लास्टिक एवं डिस्पोजल के उपयोग, बिक्री और भंडारण की जांच की जा रही है।

    इसी क्रम में निगम के अतिक्रमण विभाग एवं बाजार विभाग की संयुक्त टीम ने इंदिरा मार्केट क्षेत्र में दुकानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान पांच दुकानों में प्रतिबंधित प्लास्टिक पाए जाने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई।

    कार्रवाई के दौरान जैन प्लास्टिक पर ₹1,200, गोयल डिस्पोजल पर ₹1,000, संजय प्लास्टिक पर ₹1,000, हरिराम प्लास्टिक पर ₹700 तथा पंकज ट्रेडर्स पर ₹1,000 का जुर्माना लगाया गया। इस तरह पांच दुकानदारों से कुल ₹4,900 की जुर्माना राशि वसूल की गई।

    निगम की टीम ने दुकानदारों को प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग, बिक्री और भंडारण नहीं करने की समझाइश दी। साथ ही चेतावनी दी गई कि दोबारा उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाएगा।

    निगम प्रशासन ने व्यापारियों एवं दुकानदारों से प्रतिबंधित प्लास्टिक और डिस्पोजल का उपयोग नहीं करने तथा स्वच्छता नियमों का पालन करने की अपील की है। निगम के अनुसार बाजार क्षेत्रों में निरीक्षण और चालानी कार्रवाई का अभियान आगे भी जारी रहेगा।

    लोरमी। स्थानीय विधायक एवं उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने रविवार को लोरमी के मानस मंच में क्षेत्र की माताओं-बहनों के साथ पारंपरिक तीजा तिहार मनाया। लोरमी के भाइयों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं और उन्होंने अरुण साव को स्नेह एवं आशीर्वाद दिया।

    कार्यक्रम की शुरुआत भगवान महादेव की पूजा-अर्चना से हुई। अरुण साव ने सपत्नीक क्षेत्र की बहनों के साथ भगवान भोलेनाथ की पूजा की और सभी के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

    इस दौरान साव ने उपस्थित माताओं-बहनों का स्वागत करते हुए कहा कि लोरमी की सभी बहनों के घर धन-धान्य, सुख और समृद्धि से भरे रहें तथा उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हों। उन्होंने तीजा तिहार को छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और पारिवारिक स्नेह से जुड़ा पर्व बताया।

    मायके के स्नेह और भाई-बहन के रिश्ते का पर्व

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है। इस अवसर पर माताएं-बहनें पति की दीर्घायु की कामना के लिए व्रत रखती हैं और मायके में भाइयों से स्नेह प्राप्त करती हैं। बचपन की सहेलियों से मुलाकात और पुरानी यादों का ताजा होना इस पर्व को विशेष बनाता है।

    उन्होंने कहा कि लोरमी के भाइयों ने मिलकर क्षेत्र की बहनों के लिए तीजा तिहार का आयोजन किया है। उन्होंने सभी को तीजा तिहार की शुभकामनाएं दीं।

    लोकगीतों ने बांधा समां

    कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन हुआ। प्रसिद्ध लोकगायिका गरिमा दिवाकर, स्वर्णा दिवाकर एवं अंजोर टीम ने छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की प्रस्तुति दी। 'तीजा पोरा आगे भाग हमर खुलगे' और 'तरी हरि नाना' जैसे गीतों पर उपस्थित लोगों ने उत्साह के साथ आनंद लिया।

    वहीं "हमर अरुण भैया हा दिलदार हैवे ना, बहिनी मन ले ओला मया-दुलार हैवे ना" गीत ने आयोजन में भाई-बहन के स्नेह का रंग और गहरा कर दिया। पूरे कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, पारंपरिक तीजा पर्व और पारिवारिक रिश्तों की झलक देखने को मिली।

    दुर्ग। दूसरे वाहन के नंबर की कूटरचना कर अपने वाहन में फर्जी नंबर प्लेट लगाने और उसके कारण दूसरे वाहन मालिक के खाते से ट्रैफिक चालान एवं टोल टैक्स की राशि कटने के मामले में मोहन नगर पुलिस ने फरार चल रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों रोहित कुमार कांकरिया (51) और अनूप रवलामी (55) को 20 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया।

    पुलिस के अनुसार मामले में थाना मोहन नगर में अपराध क्रमांक 600/2026 के तहत धारा 336(3), 340(2), 345(3) एवं 347(1) बीएनएस में अपराध दर्ज किया गया है।

    ऐसे सामने आया मामला

    पुलिस के मुताबिक 24 अगस्त 2026 को रायपुर निवासी मोनिश सोनी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी टोयोटा यारिस कार क्रमांक CG 07 BZ 5226 का नंबर किसी अन्य वाहन में फर्जी तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रार्थी को अपने वाहन से संबंधित न होने वाले ट्रैफिक चालान और टोल राशि कटने के संदेश मिलने के बाद फर्जी नंबर प्लेट के इस्तेमाल की जानकारी हुई।

    विवेचना के दौरान पुलिस ने वाहन का उपयोग करने वाले विजय सेन को पूर्व में गिरफ्तार किया था, जिसे न्यायालय में पेश किए जाने के बाद केंद्रीय जेल दुर्ग भेजा गया।

    इसके बाद फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस को रोहित कांकरिया और अनूप रवलामी की संलिप्तता के संबंध में जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार दोनों को 20 सितंबर को गिरफ्तार किया गया।

    2018 में फाइनेंस कराया था वाहन

    पुलिस की जांच में सामने आया कि संबंधित वाहन को अनूप रवलामी ने वर्ष 2018 में रायपुर से फाइनेंस कराया था, लेकिन उसका आरटीओ में पंजीयन नहीं कराया गया। पुलिस के अनुसार बाद में यह वाहन रोहित कांकरिया को और फिर रोहित कांकरिया द्वारा विजय सेन को दिया गया।

    पुलिस का आरोप है कि बिना वैध दस्तावेज एवं पंजीयन के वाहन का उपयोग करते हुए दूसरे वाहन के वैध नंबर की कूटरचना कर नंबर प्लेट लगाई गई। इसके चलते वास्तविक वाहन मालिक को ऐसे ट्रैफिक चालान एवं टोल भुगतान का सामना करना पड़ा, जो उसके वाहन से संबंधित नहीं थे।

    घटनास्थल: रजत होम के पास, हरी नगर, दुर्ग।

    गिरफ्तार आरोपी:

    रोहित कुमार कांकरिया (51), निवासी सिंधिया नगर, मोहन नगर, दुर्ग।

    अनूप रवलामी (55), निवासी ईस्ट नेहरू नगर, भिलाई।

    दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वाहन खरीदते या बेचते समय आरटीओ पंजीयन सहित सभी दस्तावेजों की पूरी जांच करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि या फर्जीवाड़े की सूचना तत्काल पुलिस को दें।

    दुर्ग। अवैध शराब के भंडारण एवं बिक्री के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत दुर्ग पुलिस ने सारथी मोहल्ला क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी के कब्जे से 24 नग देशी शोले मसाला मदिरा और 5 नग शेरा मसाला मदिरा, प्रत्येक 180 एमएल की सीलबंद बोतलें, कुल 5.220 बल्क लीटर शराब बरामद की गई।

    पुलिस के मुताबिक 20 सितंबर 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सारथी मोहल्ला स्थित टप्पा तालाब के पास पीपल पेड़ के सामने एक व्यक्ति झोले में शराब रखकर बिक्री कर रहा है। सूचना की तस्दीक और कार्रवाई के लिए पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस को देखकर वहां से भागने की कोशिश कर रहे व्यक्ति को घेराबंदी कर पकड़ा गया।

    पूछताछ में उसने अपना नाम देवेन्द्र सारथी उर्फ दाऊ अंडा (26), निवासी वार्ड क्रमांक 03, सारथी मोहल्ला, मठपारा, दुर्ग बताया। पुलिस के अनुसार आरोपी शराब रखने और बिक्री के संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बरामद शराब की कीमत ₹2,900 तथा बिक्री की रकम ₹150, इस प्रकार कुल ₹2,950 का सामान जब्त किया है। मामले में पुलिस ने धारा 34(2) आबकारी अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार धारा के तहत मामला अजमानतीय होने के कारण आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।

    घटनास्थल: सारथी मोहल्ला, टप्पा तालाब के पास, पीपल पेड़ के सामने, दुर्ग।

    पुलिस कार्रवाई: दुर्ग पुलिस टीम द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी एवं प्रकरण से संबंधित साक्ष्यों के संकलन की कार्रवाई की गई।

    रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी कार्रवाई का रास्ता साफ; भारत समेत शीर्ष खरीदार निशाने पर, लेकिन शुल्क अभी लागू नहीं

    वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार यह कानून रूस के खिलाफ वैधानिक प्रतिबंधों, टैरिफ और अन्य पाबंदियों का दायरा बढ़ाता है तथा ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाता है। 

    इस कानून का सबसे महत्वपूर्ण और भारत के लिए संवेदनशील पहलू यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के अमेरिकी आयात पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। भारत और चीन जैसे देश इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं। 

    सबसे पहले समझिए—क्या भारत पर 100% टैरिफ लग चुका है?

    नहीं।

    यह इस पूरे घटनाक्रम की सबसे महत्वपूर्ण तथ्यात्मक बात है। कानून ने 100% शुल्क को स्वतः लागू नहीं किया है। बल्कि ट्रंप प्रशासन को यह अधिकार दिया गया है कि वह रूसी ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले संबंधित देशों के खिलाफ टैरिफ कार्रवाई करे। कब, किस देश पर और कितनी दर से कार्रवाई होगी, यह आगे अमेरिकी प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करेगा। 

    यानी फिलहाल स्थिति को “भारत पर 100% टैरिफ लागू” कहना सही नहीं होगा; अधिक सटीक बात है—“भारत पर 100% तक अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने का रास्ता कानून ने खोल दिया है।”

    भारत क्यों आया अमेरिकी निशाने पर?

    भारत लंबे समय से रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। अमेरिका की नई नीति का मूल उद्देश्य उन देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है जो रूसी ऊर्जा खरीदकर रूस की ऊर्जा आय को बनाए रखने में योगदान दे रहे हैं।

    नए कानून में रूस के ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ उसके ‘शैडो फ्लीट’ यानी प्रतिबंधों से बचकर रूसी तेल पहुंचाने वाले टैंकर नेटवर्क को भी निशाना बनाया गया है। इसके अलावा रूसी अधिकारियों, बैंकों और अन्य संस्थाओं पर प्रतिबंधों का प्रावधान है। 

    कानून को भारी बहुमत से मिली मंजूरी

    यह कानून अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ। सीनेट में इसे 86-11 वोट से मंजूरी मिली, जबकि प्रतिनिधि सभा में 262-159 वोट से पारित हुआ। इसके बाद 18 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर किए। 

    कानून का नाम दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है। ग्राहम इस रूस-विरोधी प्रतिबंध पैकेज के प्रमुख समर्थकों में रहे थे। 

    भारत के सामने तीन बड़ी चुनौतियां

    पहली—ऊर्जा सुरक्षा।

    यदि रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव बढ़ता है तो भारत को अपने ऊर्जा आयात के विकल्पों और कीमतों पर फिर से रणनीतिक विचार करना पड़ सकता है।

    दूसरी—अमेरिकी बाजार।

    यदि भविष्य में भारत पर ऊंचा अमेरिकी टैरिफ लगाया जाता है तो अमेरिका को निर्यात करने वाले भारतीय उद्योगों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन किस दर, किन उत्पादों और किस समयावधि के लिए शुल्क लागू करता है। 

    तीसरी—भारत-अमेरिका संबंध।

    रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंध और अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक एवं रणनीतिक संबंध—दोनों को संतुलित रखना नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक चुनौती बन सकता है।

    एक और महत्वपूर्ण तथ्य—यह सिर्फ भारत की कहानी नहीं

    कानून का निशाना केवल भारत नहीं है। चीन भी प्रमुख संभावित प्रभावित देशों में है, क्योंकि वह भी रूसी ऊर्जा का बड़ा खरीदार है। कानून का प्रभाव अन्य प्रमुख खरीदारों पर भी परिस्थितियों के अनुसार पड़ सकता है। 

    इसके अलावा कानून रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव को केवल तेल खरीद तक सीमित नहीं रखता। रूसी ऊर्जा एवं रक्षा क्षेत्र, वित्तीय संस्थानों तथा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले नेटवर्कों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। 

    ईरान के लिए भी कड़ा संदेश

    कानून के शीर्षक में रूस के साथ ईरान भी शामिल है। इसके तहत मौजूदा ईरान प्रतिबंध व्यवस्था को पांच वर्ष के लिए आगे बढ़ाया गया है। इस तरह यह कानून केवल रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ा आर्थिक दबाव नहीं, बल्कि अमेरिका की व्यापक रूस-ईरान प्रतिबंध नीति का हिस्सा बन गया है। 

    भारत के लिए असली सवाल अब शुरू होता है

    ट्रंप के हस्ताक्षर के साथ कानूनी अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति के हाथ में आ गया है, लेकिन भारत पर 100% शुल्क लगने का अंतिम निर्णय अभी अलग चरण है। इसलिए आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण नजर इस बात पर रहेगी कि अमेरिकी प्रशासन इस अधिकार का इस्तेमाल करता है या नहीं, भारत को किस श्रेणी में रखता है और यदि कार्रवाई होती है तो किन भारतीय वस्तुओं पर कितनी दर लागू की जाती है।

    23 सितंबर को सुबह से दोपहर तक बंद रहेंगे प्रतिष्ठान, चंदा वसूली में दबाव और मारपीट के आरोप; व्यापारियों का दो टूक—चंदा देंगे तो स्वेच्छा से

    बिलासपुर। शहर में कथित जबरिया चंदा वसूली को लेकर व्यापारियों का आक्रोश अब सामूहिक विरोध के रूप में सामने आने जा रहा है। चंदा वसूली के नाम पर दबाव, धमकी और मारपीट किए जाने के आरोपों के विरोध में व्यापारिक संगठनों ने 23 सितंबर को सुबह से दोपहर तक बाजार बंद रखने का निर्णय लिया है। इस दौरान शहर के व्यापारी अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर जबरिया चंदाखोरी के खिलाफ एकजुटता का संदेश देंगे।

    कैट के राष्ट्रीय सचिव राजू सलूजा और छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. नवदीप सिंह अरोरा ने बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा के दौरान बंद की घोषणा की। व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि शहर में चंदा वसूली के नाम पर कुछ लोगों द्वारा व्यापारियों पर कथित रूप से दबाव बनाया जा रहा है। विरोध करने पर विवाद और मारपीट की स्थिति बनने की बात भी व्यापारियों ने कही।

    व्यापारियों के अनुसार, कुछ मामलों में विवाद इतना बढ़ा कि कथित चंदा वसूली करने वालों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर तक दर्ज कराने की स्थिति बनी। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि किसी सामाजिक, धार्मिक अथवा अन्य आयोजन के लिए व्यापारी सहयोग करना चाहता है तो वह उसकी इच्छा और सामर्थ्य पर निर्भर होना चाहिए।

    चंदा देना है तो स्वेच्छा से, दबाव में नहीं

    व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में स्वेच्छा से सहयोग करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उनका विरोध दुकान-दुकान पहुंचकर कथित दबाव बनाकर चंदा वसूलने की प्रवृत्ति से है।

    व्यापारियों का कहना है कि सहयोग मांगना अलग बात है, लेकिन किसी व्यापारी की इच्छा के विरुद्ध दबाव बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। कैट और चेंबर की स्थानीय इकाई ने इस मुद्दे को संगठित रूप से उठाने का निर्णय लिया है।

    व्यापारिक संगठनों का कहना है कि मामले की जानकारी प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को भी दी जाएगी, ताकि चंदा वसूली को लेकर उत्पन्न हो रहे विवादों और कथित दबाव की स्थिति पर प्रभावी कार्रवाई हो सके।

    बंद के जरिए देंगे एकजुटता का संदेश

    23 सितंबर का प्रस्तावित बाजार बंद केवल प्रतिष्ठान बंद रखने तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापारियों की सामूहिक एकजुटता का संदेश देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से व्यापारी अलग-अलग स्तर पर इस समस्या का सामना कर रहे हैं, लेकिन अब सामूहिक रूप से आवाज उठाने का निर्णय लिया गया है।

    व्यापारियों ने दो टूक कहा कि सहयोग करना है तो अपनी इच्छा से करेंगे, लेकिन दबाव या कथित जबरिया वसूली के आधार पर चंदा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    शौर्यपथ विशेष 

    दुर्ग। नगर निगम क्षेत्र में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर महापौर श्रीमती अलका बाघमार द्वारा समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जाना निश्चित रूप से जनहित से जुड़ा कदम है। पेवर ब्लॉक से लेकर नाली निर्माण तक मौके पर पहुंचकर बेस और निर्माण गुणवत्ता की जांच करना स्वागत योग्य पहल है। लेकिन इसी के साथ अब शहर में एक दूसरा सवाल भी उठने लगा है—क्या औचक निरीक्षण की कसौटी सभी ठेकेदारों के लिए समान है?

    हाल के दिनों में महापौर द्वारा कुछ निर्माण कार्यों का मौके पर निरीक्षण किए जाने के बीच आरबीएस कंस्ट्रक्शन के कार्यों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। निगम में आरबीएस कंस्ट्रक्शन को वर्तमान समय के प्रमुख ठेकेदारों में गिना जाने लगा है और शहर के अलग-अलग हिस्सों में उसके निर्माण कार्य बताए जा रहे हैं। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि जब गुणवत्ता की जांच को लेकर महापौर स्वयं सक्रिय हैं, तो आरबीएस कंस्ट्रक्शन के निर्माण कार्य भी उसी पैमाने पर औचक निरीक्षण के दायरे में क्यों नहीं दिखाई दे रहे?

    जन्मदिन के बधाई पोस्ट से लेकर निर्माण कार्यों तक उठे सवाल

    महापौर श्रीमती अलका बाघमार के जन्मदिन के अवसर पर शहर में लगाए गए बधाई संदेशों और पोस्टरों में आरबीएस कंस्ट्रक्शन से जुड़े ठेकेदार की भूमिका की चर्चा भी सामने आई थी। यह अपने आप में कोई अनियमितता साबित नहीं करता, लेकिन इसी सार्वजनिक संदर्भ के कारण अब निगम के निर्माण कार्यों को लेकर पारदर्शिता और समान जांच का सवाल उठाया जा रहा है।

    सवाल यह है कि यदि किसी ठेकेदार के कार्यों की गुणवत्ता की जांच की जा रही है तो क्या उसी तरह अन्य बड़े ठेकेदारों के कार्यों की भी नियमित और औचक जांच की जा रही है? यदि हां, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं होती?

    खंडेलवाल कॉलोनी में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

    दो दिन पहले खंडेलवाल कॉलोनी में निर्माणाधीन नाले में सुरक्षा संसाधनों की कमी के बीच एक युवक के गिरने और गंभीर रूप से घायल होने की घटना सामने आई। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। निर्माण स्थल पर बैरिकेडिंग, सुरक्षा संकेतक और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपायों की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी और ठेकेदार की होती है।

    ऐसी घटना के बाद यह भी जरूरी हो जाता है कि निगम केवल निर्माण की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच करे।

    वार्ड 17-18 की नाली और पेवर ब्लॉक जांच के बाद बढ़ा सवाल

    वार्ड क्रमांक 17-18 में नाली निर्माण में लगे सरियों की गुणवत्ता और निर्माण मानकों को लेकर पहले भी सवाल उठाए जा चुके हैं। वहीं हाल में वार्ड क्रमांक 17 में लगाए जा रहे पेवर ब्लॉक को महापौर द्वारा तुड़वाकर बेस की जांच किए जाने की बात सामने आई।

    यह कार्रवाई बताती है कि निगम निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीरता दिखा सकता है। लेकिन इसी दौरान समीपस्थ वार्ड क्रमांक 21 में चल रहे सड़क निर्माण कार्य का निरीक्षण नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जब दोनों क्षेत्र बहुत अधिक दूरी पर नहीं हैं, तो जनता का सवाल स्वाभाविक है कि औचक निरीक्षण की सीमा तय कैसे होती है?

    ठेकेदारों में चर्चा—बधाई पोस्ट लगाओ, जांच से बच जाओ?

    शहर में अब एक तरह की चर्चा और हंसी-मजाक का विषय भी बनने लगा है कि यदि अगले साल महापौर के जन्मदिन पर किसी ठेकेदार के समर्थन में बधाई संदेशों की भरमार कर दी जाए तो शायद उसके निर्माण कार्य जांच के दायरे से बाहर रहेंगे।

    बेशक यह केवल चर्चा और व्यंग्य हो सकता है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी चर्चाओं का जन्म लेना भी निगम प्रशासन के लिए पारदर्शिता की कसौटी पर स्वयं को साबित करने का अवसर है।

    जनता का सीधा सवाल

    महापौर अलका बाघमार द्वारा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच का अभियान यदि वास्तव में शहरहित में है, तो फिर सवाल किसी एक ठेकेदार तक सीमित नहीं होना चाहिए। हर निर्माण कार्य, हर ठेकेदार और हर वार्ड के लिए एक समान जांच व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जाती?

    जनता यह जानना चाहती है—

    क्या औचक निरीक्षण केवल चिन्हित ठेकेदारों के कार्यों तक सीमित रहेगा, या आरबीएस कंस्ट्रक्शन सहित निगम के सभी बड़े और छोटे ठेकेदारों के निर्माण कार्यों की भी समान रूप से जांच होगी?

    अब निगाह इस बात पर है कि निगम की यह जांच व्यवस्था चयनात्मक दिखाई देती है या वास्तव में निष्पक्षता के समान पैमाने पर आगे बढ़ती है।

    मछली पकड़ने गए दो युवकों का दावा—पहले गांजा पीने को कहा, मना किया तो लौटकर कनपटी पर बंदूक टिकाई और चाकू से किया हमला; नकदी, मोबाइल और बाइक की चाबी ले जाने का भी आरोप

    दुर्ग। अंजोरा चौकी क्षेत्र में रात करीब 3 बजे महमरा तालाब के पास दो युवकों के साथ हुई कथित चाकूबाजी और लूट की घटना ने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना को लेकर पीड़ित युवकों और पुलिस की ओर से सामने आया घटनाक्रम अलग-अलग है। यही अंतर अब पूरे मामले को और गंभीर बना रहा है।

    पीड़ितों के अनुसार कमल निषाद (28) और लोकेश निषाद (23) महमरा तालाब के पास मछली पकड़ने गए थे। इसी दौरान बाइक सवार दो अज्ञात युवक वहां पहुंचे और उनसे चिलम में गांजा पीने की बात कही। दोनों युवकों द्वारा इनकार किए जाने के बाद वे वहां से चले गए। आरोप है कि कुछ देर बाद दोनों युवक दोबारा लौटे और बंदूक दिखाकर दोनों की कनपटी पर दबाव बनाया तथा चाकू से हमला कर दिया।

    हमले में कमल निषाद के कूल्हे और लोकेश निषाद की जांघ में गंभीर चोट आने की बात पीड़ितों ने बताई है। दोनों का कहना है कि किसी तरह अपनी जान बचाकर वे घटनास्थल से भागे और अंजोरा चौकी पहुंचे, जहां से उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    सिर्फ चाकू नहीं, नकदी-मोबाइल और बाइक की चाबी ले जाने का भी आरोप

    पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि हमलावर उनके पास मौजूद करीब 1,000 से 1,200 रुपये नकद, मोबाइल फोन और बाइक की चाबी भी ले गए। घटना के बाद से दोनों अज्ञात युवकों की पहचान और तलाश पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है।

    अब सवाल—बंदूक थी या सिर्फ उंगली की नोक?

    मामले में सबसे दिलचस्प और गंभीर सवाल पुलिस के घटनाक्रम के कथन को लेकर सामने आया है। पीड़ित युवकों का दावा है कि उनकी कनपटी पर बंदूक टिकाकर चाकूबाजी की गई। वहीं अंजोरा चौकी प्रभारी से जानकारी लेने पर कथित तौर पर यह बात सामने आई कि युवकों को उंगली की नोक पर चाकू मारा गया।

    यानी सवाल सिर्फ इतना नहीं कि घटनास्थल पर बंदूक थी या उंगली। असली सवाल यह है कि यदि दो युवकों पर रात के अंधेरे में चाकू से हमला हुआ, तो आखिर इतनी आसानी से अपराधियों का हौसला कैसे बढ़ रहा है?

    छोटी बात पर चाकू, क्या अपराधियों के मन से कानून का डर खत्म हो रहा?

    गांजा पीने से इनकार जैसी मामूली बात के बाद कथित तौर पर चाकू से हमला और फिर नकदी-मोबाइल लेकर फरार होने की बात सामने आना कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल है। ग्रामीण क्षेत्र हो या हाईवे से लगे इलाके—कहीं चाकूबाजी तो कहीं बलवा जैसी घटनाओं की चर्चा अब आम लोगों के बीच चिंता बढ़ा रही है।

    घटना के बाद पुलिस पेट्रोलिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। रात के करीब 3 बजे सुनसान इलाके में दो युवकों के साथ कथित हमला होता है और आरोपी वारदात के बाद फरार हो जाते हैं—ऐसे में पेट्रोलिंग की मौजूदगी और उसकी प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    कहानी का असली सच जांच से सामने आएगा

    फिलहाल बंदूक के इस्तेमाल, चाकूबाजी, कथित लूट और आरोपियों की पहचान से जुड़े तमाम पहलुओं की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। लेकिन घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ दिया है—मामला उंगली की नोक का था या बंदूक की नोक का, यह जांच बताएगी; मगर चाकू की नोक पर कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वालों पर पुलिस की नोक कब कसेगी?

    गुंडरदेही*शौर्यपथ 

    ग्राम सरेखा की एक महिला सिकोसा उपस्वास्थ केंद्र स्वास्थ्य कार्यकर्ता पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि बिना सहमति के दवा देने से गर्भ में ही उसके बच्चे की मौत हो गई।

    पीड़िता निशा ने बताया कि उसे पिछले 10-15 दिनों से प्रसव पीड़ा जैसा दर्द हो रहा था। 11 सितंबर शुक्रवार को परिजनों ने जांच के लिए उपस्वास्थ केंद्र सिकोसा लेकर गयी l

    निशा का आरोप है कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता नाम सरस्वती साहू साहू बताया जारहा है जिसने परिजनों से बिना पूछे ही उसे दवा दे दी और कहा कि 15 मिनट में डिलीवरी हो जाएगी, और गुंडरदेही लेकर जाओगे तो गाड़ी में ही बच्चा आ जाएगा। जिससे परिवार घबरा गया और अस्पताल नहीं जा पाया। करीब 3 घंटे तक तेज दर्द होता रहा। इसके बाद जब परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे तो जांच में डॉक्टरों ने बताया कि अभी प्रसव का समय नहीं है। तीन बार जांच के बाद जब अंतिम बार हार्टबीट चेक किया गया तो पता चला कि बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो चुकी है।

    पीड़िता ने मीडिया के सामने रोते हुए कहा कि गांव में इस तरह के 7 से 10 मामले पहले भी हो चुके हैं। उसने प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में किसी अन्य महिला के साथ ऐसी घटना न हो। इस सम्बन्ध मे खंड चिकित्सा अधिकारी सत्येंद्र कुमार मारकंडे ने बताया कि जांच चल रहा है जाँच प्रतिवेदन उच्चअधिकारी को भेज दिया है कार्यवाही की जाएगी

    Page 3 of 3099

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision