Google Analytics —— Meta Pixel
April 16, 2026
Hindi Hindi
Uncategorised

Uncategorised (35589)

अन्य ख़बर

अन्य ख़बर (5914)

धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

   जगदलपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहर के केंद्र बस्तर में सोमवार से खेलों का एक नया इतिहास लिखा जाने वाला है। 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026' के प्रथम संस्करण के तहत रायपुर में हुए भव्य उद्घाटन के बाद अब खेल प्रेमियों की नजरें जगदलपुर के धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर पर टिकी हैं, जहाँ 30 मार्च से एथलेटिक्स की रोमांचक स्पर्धाएं शुरू होने जा रही हैं। इस आयोजन का शुभंकर 'मोर वीर' जनजातीय युवाओं के अदम्य साहस और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व कर रहा है। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में शुरू हुआ यह महाकुंभ अब अपने सबसे प्रतीक्षित चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 443 प्रतिभावान खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे।
बस्तर में आयोजित होने वाली एथलेटिक्स स्पर्धाओं में कुल 17 विधाएं शामिल हैं, जिनमें 100 मीटर की फर्राटा दौड़ से लेकर 10,000 मीटर की लंबी दूरी की रेस, हर्डल्स, रिले रेस, और ऊँची व लंबी कूद जैसी श्रेणियाँ आकर्षण का केंद्र रहेंगी। पहले ही दिन डिस्कस थ्रो, लॉन्ग जंप और 110 मीटर हर्डल्स जैसे फाइनल मुकाबले देखने को मिलेंगे। शाम होते-होते 400 मीटर और रिले रेस के रोमांच के बीच विजेता खिलाड़ियों को पदक प्रदान किए जाएंगे। इस पूरे आयोजन के दौरान एथलेटिक्स में कुल 102 पदकों के लिए खिलाड़ी पसीना बहाएंगे, जिनमें छत्तीसगढ़ के 33 स्थानीय खिलाड़ी भी राज्य का मान बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
प्रशासनिक स्तर पर इस आयोजन को 'खेलो इंडिया' के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में खिलाड़ियों के आवास के लिए शहर के 13 प्रमुख होटलों को चिन्हित किया गया है, जबकि उनके आवागमन के लिए एसी वाहनों की सुविधा सुनिश्चित की गई है। सुरक्षा, चिकित्सा और अग्निशमन की पुख्ता व्यवस्था के साथ-साथ पर्यटन विभाग द्वारा आगंतुक खिलाड़ियों और ऑफिशियल्स को बस्तर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे खेल के साथ-साथ यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य और अनूठी संस्कृति से भी रूबरू हो सकें। भारतीय खेल प्राधिकरण के मार्गदर्शन में आयोजित यह स्पर्धा न केवल जनजातीय प्रतिभाओं को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी, बल्कि बस्तर की वैश्विक छवि को एक खेल गंतव्य के रूप में भी स्थापित करेगी।

दुर्ग। शौर्यपथ विशेष दुर्ग नगर निगम की शहरी सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला इंदिरा मार्केट की पार्किंग व्यवस्था से जुड़ा है, जहां निगम…

जगदलपुर, शौर्यपथ। राज्य शासन की पशुधन संवर्धन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता एक बार फिर जमीन पर नजर आई, जब पशुधन विकास विभाग द्वारा ग्राम पंचायत हल्बाकचोरा (शासन कचोरा) में शनिवार को भव्य पशु मेला सह पशु प्रदर्शनी का सफल आयोजन किया गया। इस आयोजन ने न केवल पशुपालकों को नई दिशा दी, बल्कि क्षेत्र में उन्नत पशुपालन के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई।

सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी कलचा बृजमोचन देवांगन ने बताया कि विभाग लगातार पशुपालकों को आधुनिक तकनीक, उन्नत नस्ल एवं वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों को बढ़ावा दे रहा है, जिससे पशुपालकों की आय में वृद्धि हो सके।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनपद पंचायत अध्यक्ष पदलाम नाग रहे। उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम बघेल, कृषि एवं पशुधन सभापति भूपेंद्र ठाकुर, जनपद सदस्य श्रुति शर्मा, सरपंच जयमनी कश्यप एवं उप सरपंच लोकनाथ बघेल की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और भव्य बनाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर उप संचालक डॉ. जे. तिग्गा ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां शीतला मंदिर में दीप प्रज्वलित कर देवी के आशीर्वाद के साथ किया गया, जिससे पूरे आयोजन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।

मेले में दुधारू गाय, देसी भैंस वंश, बकरी-भेड़, बतख एवं कुक्कुट वंश के साथ-साथ असील प्रजाति और हरियाणा नस्ल के बैलों की आकर्षक प्रदर्शनी ने सभी का मन मोह लिया। पशुपालकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपने श्रेष्ठ पशुओं का प्रदर्शन किया।

विशेष रूप से कृत्रिम गर्भाधान से उत्पन्न उत्कृष्ट दुधारू पशु, उन्नत नस्ल के बकरों (जमुनापारी) एवं बेहतर कुक्कुट वंश के पक्षियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार देकर पशुपालकों को प्रशस्ति पत्र के साथ सम्मानित किया गया। इससे पशुपालकों में नई ऊर्जा और प्रतिस्पर्धा की भावना देखने को मिली।

कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. गीतिका ध्रुव, डॉ. योगेश देवांगन, डॉ. नंदकिशोर मांझी, डॉ. अभिषेक तिर्की, डॉ. सिन्हा सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा। साथ ही कामधेनु विश्वविद्यालय जगदलपुर के प्रशिक्षु विद्यार्थी, प्राचार्य एवं स्टाफ की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को और समृद्ध बनाया।

ग्रामीणों एवं पशुपालकों ने राज्य सरकार एवं पशुधन विकास विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

दुर्ग (छत्तीसगढ़)। दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में इन दिनों अवैध मुरूम और मिट्टी खनन का मामला तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। खेत समतलीकरण और विकास कार्यों के नाम पर…

दक्षिण गोवा | विशेष रिपोर्ट

गोवा के दक्षिण जिले के कुर्चोरेम से सामने आया एक सनसनीखेज मामला अब पूरे प्रदेश में आक्रोश और सियासी हलचल का कारण बन गया है। भाजपा पार्षद सुशांत नाइक के 20 वर्षीय बेटे सोहम नाइक पर 25 से 30 नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण, अश्लील वीडियो बनाने और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

तीन साल तक चलता रहा ‘साइलेंट क्राइम’

प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी पिछले तीन वर्षों से नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फंसा कर उनका शोषण करता रहा। आरोप है कि वह उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था, जिससे पीड़िताएं लंबे समय तक डर के साए में चुप रहीं।

पार्टी में खुला ‘काला राज’

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब आरोपी ने कथित तौर पर एक सामाजिक समारोह/पार्टी में अपने दोस्तों के बीच इन अश्लील वीडियो को दिखाया और अपनी हरकतों का बखान किया।

यहीं से मामला बाहर निकला और देखते ही देखते स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया।

जनता के दबाव में पुलिस हरकत में

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस स्टेशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने 23 मार्च 2026 को सोहम नाइक को हिरासत में लिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।

कानूनी शिकंजा: POCSO से IT एक्ट तक

आरोपी के खिलाफ दर्ज की गई FIR में शामिल हैं:

POCSO एक्ट (नाबालिगों के यौन अपराध)

गोवा चिल्ड्रन्स एक्ट

आईटी एक्ट (डिजिटल अपराध और वीडियो रिकॉर्डिंग)

अब तक कम से कम तीन FIR दर्ज की जा चुकी हैं।

कोर्ट ने बढ़ाई हिरासत

27 मार्च 2026 को पणजी चिल्ड्रन्स कोर्ट ने आरोपी की पुलिस रिमांड 4 दिन और बढ़ा दी, ताकि पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान की जा सके।

सियासी संग्राम तेज

इस घटना के सामने आते ही विपक्ष—खासतौर पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी—ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।

विपक्ष का आरोप है कि ऐसे मामलों में प्रभावशाली परिवारों के कारण अक्सर कार्रवाई में देरी होती है, जबकि सरकार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।

कबीरधाम | विशेष समाचार

जिला कबीरधाम के ग्राम पंचायत रेंगाखार अंतर्गत ग्राम कोडार में विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यहां ₹4 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले तटबंध निर्माण कार्य का विधिवत भूमि पूजन संपन्न हुआ। यह परियोजना क्षेत्र में जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और ग्रामीण सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भूमि पूजन कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू एवं जिला अध्यक्ष श्री राजेंद्र चंद्रवंशी सहित कई जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों ने इस परियोजना को क्षेत्र के समग्र विकास के लिए मील का पत्थर बताया।

जल संरक्षण और सुरक्षा को मिलेगा नया आधार

प्रस्तावित तटबंध निर्माण से न केवल वर्षा जल के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी, बल्कि संभावित बाढ़ की स्थिति में गांवों और कृषि भूमि की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। इससे किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

ग्रामीण विकास को मिलेगी गति

जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देगी। जल संसाधनों के सुदृढ़ होने से खेती-किसानी को मजबूती मिलेगी और ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।

जनता में उत्साह, विकास की उम्मीद

भूमि पूजन के दौरान स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने इस पहल के लिए जनप्रतिनिधियों का आभार जताते हुए उम्मीद जताई कि कार्य समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाएगा।

भिलाई/दुर्ग | विशेष राजनीतिक विश्लेषण

भिलाई नगर निगम चुनाव में भले अभी लगभग छह महीने का समय शेष हो, लेकिन सियासी सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। आरक्षण के बाद महापौर पद के लिए पिछड़ा वर्ग से प्रत्याशी तय होना है, और इसी के साथ भारतीय जनता पार्टी के भीतर नामों की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। इन नामों में सबसे प्रमुख नाम महेश वर्मा का उभरकर सामने आ रहा है—जो वर्तमान में भिलाई नगर निगम के पार्षद हैं और लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण संगठन के भीतर एक मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

महेश वर्मा: अनुभव बनाम समीकरण

महेश वर्मा का नाम केवल “सांसद विजय बघेल के करीबी” होने के कारण ही नहीं, बल्कि

नगर निगम की राजनीति में सक्रिय भूमिका

स्थानीय मुद्दों की गहरी समझ

संगठनात्मक अनुभव और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव

के चलते भी प्रमुखता से लिया जा रहा है।

यही वजह है कि उन्हें एक ग्राउंडेड और अनुभवी चेहरा माना जा रहा है, जो महापौर पद की जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हो सकते हैं।

दुर्ग का ‘रिपोर्ट कार्ड’ बना सियासी मुद्दा

प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद हुए नगरीय निकाय चुनाव में विजय बघेल की पसंद को प्राथमिकता मिली थी। लेकिन दुर्ग की महापौर अलका बाघमार की कार्यप्रणाली पिछले एक साल में कई विवादों में घिरी रही।

मुख्य आरोपों में शामिल हैं:

गरीबों के ठेले-गुमटी पर सख्ती, लेकिन अमीरों के अतिक्रमण पर नरमी

गणेश मंदिर के सामने कथित अवैध निर्माण पर चुप्पी

बस स्टैंड की जमीन पर अनुबंध समाप्ति के बाद भी कब्जा

शनिवार बाजार और चौक-चौराहों पर लगातार बढ़ता अतिक्रमण

सफाई व्यवस्था की बदहाली और पेयजल संकट

इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई न होने से जनता ही नहीं, पार्टी के पार्षदों में भी असंतोष बढ़ा है।

जब अपनी ही पार्टी ने उठाए सवाल

हाल ही में सामान्य सभा में जो हुआ, उसने इस असंतोष को सार्वजनिक कर दिया।

सभापति ने खुलकर कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए

कई भाजपा पार्षदों ने इसे पार्टी की साख से जोड़ते हुए नाराज़गी जताई

यह घटनाक्रम बताता है कि मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संकट बन चुका है।

भिलाई में प्रत्याशी चयन पर असर तय

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दुर्ग के अनुभव का असर भिलाई नगर निगम चुनाव में प्रत्याशी चयन पर पड़ेगा?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि:

संगठन इस बार सिर्फ “पसंद” नहीं, “परफॉर्मेंस” को भी तवज्जो देगा

महेश वर्मा का नाम मजबूत जरूर है, लेकिन अंतिम निर्णय में कई अन्य समीकरण भी प्रभाव डालेंगे

इसी बीच, वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की धर्मपत्नी के भी दावेदारी पेश करने की चर्चाएं हैं, जिससे मुकाबला और रोचक हो सकता है।

विजय बघेल की भूमिका पर नजर

दुर्ग में महापौर चयन में अहम भूमिका निभाने वाले सांसद विजय बघेल की राय इस बार भी महत्वपूर्ण रहेगी।

लेकिन पार्टी के भीतर उठ रहे सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि

“क्या इस बार उनकी पसंद को उतनी ही प्राथमिकता मिलेगी?”

यदि संगठन महेश वर्मा के नाम को दरकिनार करता है, तो इसे सीधे तौर पर

दुर्ग महापौर के प्रदर्शन और अंदरूनी नाराज़गी से जोड़कर देखा जाएगा।

कांग्रेस नहीं, भाजपा में ज्यादा हलचल

आम तौर पर चुनावी हलचल कांग्रेस में ज्यादा देखने को मिलती है, लेकिन इस बार स्थिति उलट दिख रही है।

भाजपा के भीतर ही खींचतान, असंतोष और रणनीतिक मंथन तेज हो गया है।

निष्कर्ष:

भिलाई नगर निगम चुनाव अब सिर्फ एक स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि

भाजपा के लिए “आंतरिक संतुलन और विश्वसनीयता” की परीक्षा बनता जा रहा है।

आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि—

? पार्टी अनुभव और जमीनी पकड़ वाले चेहरों को आगे लाती है

या

? फिर राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता देती है

लेकिन इतना तय है कि

दुर्ग की सियासत ने भिलाई की रणनीति को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

दिव्यांग सोनी 

बिलासपुर। जिले में लगातार बढ़ रही वाहन चोरी की घटनाओं पर लगाम कसते हुए बिलासपुर पुलिस एवं एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) की संयुक्त टीम ने एक संगठित बाइक चोरी गैंग का पर्दाफाश किया है। तकनीकी विश्लेषण, मुखबिर की सटीक सूचना और टीमवर्क के दम पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह शहर और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय था और योजनाबद्ध तरीके से बाइक चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहा था। गिरफ्तार आरोपियों में साहिल मरावी, रितेश सेन, निलेश शुक्ला उर्फ राजा, हिमांशु जगत, नंदकुमार रजक एवं सोनू केंवट शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, आरोपी अब तक चोरी के कम से कम 6 प्रकरणों में संलिप्त पाए गए हैं। आरोपियों से पूछताछ जारी है और संभावना जताई जा रही है कि इनके द्वारा अन्य वारदातों को भी अंजाम दिया गया हो सकता है।

इस सफलता के पीछे पुलिस की सतत निगरानी, तकनीकी इनपुट और मुखबिर तंत्र की अहम भूमिका रही। बिलासपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में अपराधों के खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

पुलिस की अपील:

नागरिक अपने वाहनों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा जा सके।

दुर्ग | विशेष रिपोर्ट शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक केंद्र इंदिरा मार्केट में इन दिनों अतिक्रमण को लेकर दोहरी नीति का आरोप तेज होता जा रहा है। एक ओर नगर…

नासिक/मुंबई | विशेष रिपोर्ट

महाराष्ट्र के नासिक से सामने आया स्वयंभू ज्योतिषी अशोक कुमार खरात उर्फ “कैप्टन खरात” का मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता, अंधविश्वास और संगठित शोषण के खतरनाक गठजोड़ की तस्वीर पेश कर रहा है। तंत्र-मंत्र और वशीकरण के नाम पर महिलाओं को अपने जाल में फंसाने वाला यह कथित बाबा अब गंभीर आरोपों और राजनीतिक विवादों के केंद्र में है।

58 वीडियो और ‘आस्था’ के नाम पर शोषण का जाल

पुलिस जांच में बरामद एक पेन ड्राइव ने पूरे मामले को झकझोर कर रख दिया है। इसमें कथित तौर पर करीब 58 महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो पाए गए हैं। आरोप है कि खरात महिलाओं को तंत्र-मंत्र, वशीकरण और ‘अभिमंत्रित वस्तुओं’ का लालच देकर न सिर्फ आर्थिक रूप से ठगता था, बल्कि उनका यौन शोषण कर उन्हें ब्लैकमेल भी करता था।

साधारण पृष्ठभूमि से ‘करोड़ों के बाबा’ तक

जांच में सामने आया है कि खरात का असली नाम लक्ष्मण एकनाथ खरात है, जो नासिक के सिन्नर का निवासी है। बताया जाता है कि वह पढ़ाई में असफल रहा, लेकिन बाद में नाम बदलकर ‘अशोक कुमार’ रखा और खुद को न्यूमरोलॉजिस्ट और तांत्रिक बताकर एक विशाल नेटवर्क खड़ा कर लिया।

आज उसकी संपत्ति करीब 200 करोड़ रुपये आंकी जा रही है, और वह 150 से अधिक विदेश यात्राएं कर चुका है—जो उसके ‘आध्यात्मिक कारोबार’ की असलियत पर सवाल खड़े करती हैं।

कानूनी शिकंजा: 8 FIR, गंभीर धाराएं

अब तक खरात के खिलाफ 8 अलग-अलग FIR दर्ज हो चुकी हैं। इन मामलों में शामिल हैं:

बलात्कार और यौन शोषण

ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी

नशीला पदार्थ देकर अपराध

जबरन गर्भपात

अंधविश्वास विरोधी कानून के तहत अपराध

फिलहाल वह पुलिस रिमांड में है और उससे लगातार पूछताछ जारी है।

SIT जांच और ‘नरबलि’ एंगल

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने IPS अधिकारी तेजस्विनी सातपुते के नेतृत्व में SIT का गठन किया है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच एजेंसियां अब नरबलि और अघोरी प्रथाओं के एंगल की भी जांच कर रही हैं, क्योंकि छापेमारी के दौरान हथियार और संदिग्ध सामग्री मिली है।

छापेमारी में क्या-क्या मिला?

पुलिस की कार्रवाई में खरात के विभिन्न ठिकानों से बरामद हुआ:

58 आपत्तिजनक वीडियो

पिस्तौल और कारतूस

₹6.5 लाख नकद

करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज

राजनीतिक कनेक्शन: तस्वीरें और आरोपों की राजनीति

इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल ला दिया है। कई नेताओं के साथ खरात की तस्वीरें और कथित संबंध सामने आने के बाद आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

रूपाली चाकणकर (NCP): उनकी संस्था से जुड़ाव के आरोपों के बाद उन्होंने महिला आयोग अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

एकनाथ शिंदे: उनके साथ मंदिर दौरे की तस्वीरें वायरल।

दीपक केसरकर और सुनील तटकरे: संपर्क में होने के आरोप।

अमित शाह: विपक्ष ने पुरानी तस्वीरों का दावा किया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विपक्ष का हमला: “सत्ता की छत्रछाया में अपराध?”

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि खरात ने अपने राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक अपने अपराधों को छिपाए रखा। वहीं, सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बता रहा है।

पुलिस की अपील: सामने आएं पीड़ित

पुलिस प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से अपील की है कि यदि कोई अन्य महिला भी इस नेटवर्क का शिकार हुई है, तो वह आगे आए और शिकायत दर्ज कराए।

निष्कर्ष: अंधविश्वास, सत्ता और शोषण का त्रिकोण

अशोक खरात का मामला केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि उस सामाजिक मानसिकता का आईना है जहां अंधविश्वास के सहारे अपराध फलते-फूलते हैं—और जब उसमें सत्ता की परछाईं जुड़ जाए, तो सच सामने आने में वर्षों लग जाते हैं।

अब सवाल यही है—

क्या यह सिर्फ एक ‘बाबा’ का पतन है, या पूरे सिस्टम की पोल खुलने की शुरुआत?

Page 10 of 2543

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)