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दुर्ग। जिले में पिछले कुछ महीनों के दौरान अवैध गुटखा निर्माण और नशीले पदार्थों से जुड़े अवैध कारोबारों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने जिस सक्रियता और तत्परता का परिचय दिया है, उसने एक ओर कानून व्यवस्था के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता को सामने रखा है, वहीं दूसरी ओर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
ताजा मामला ग्राम जेवरा का है, जहां पुलिस ने अवैध गुटखा निर्माण से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मशीनें, कच्चा माल और अन्य सामग्री जब्त की है। इससे पहले अंडा थाना क्षेत्र में वाशिंग पाउडर निर्माण की आड़ में संचालित अवैध गुटखा फैक्ट्री का भी खुलासा हो चुका है। इन कार्रवाइयों ने यह साबित किया है कि जिले में अवैध गुटखा कारोबार केवल छोटे स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित तरीके से संचालित हो रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुलिस लगातार ऐसे मामलों का खुलासा कर रही है, तब खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है? जिले में विभाग की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में संचालित है, लेकिन अब तक जिन मामलों का खुलासा पुलिस ने किया, उनमें विभाग की कोई उल्लेखनीय भूमिका सामने नहीं आई।
जानकार बताते हैं कि कुछ समय पूर्व खाद्य एवं औषधि प्रशासन की केंद्रीय टीम भी दुर्ग पहुंची थी, लेकिन उसके बाद भी किसी बड़ी अवैध गुटखा फैक्ट्री पर विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई। इसके विपरीत पुलिस लगातार अवैध कारोबारियों तक पहुंच रही है और कार्रवाई को अंजाम तक पहुंचा रही है।
पुराने मामलों की फाइलों में दबे सवाल
कोनारी में पूर्व में हुई कार्रवाई के बाद आगे क्या हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी आज तक सार्वजनिक नहीं हो सकी। नगपुरा क्षेत्र के पास भी अवैध गुटखा निर्माण सामग्री बड़ी मात्रा में मिलने का मामला सामने आया था, लेकिन परिसर खाली मिलने के बाद आगे की कार्रवाई किस दिशा में बढ़ी, यह भी आज तक स्पष्ट नहीं हो पाया।
इसी प्रकार वर्षों पहले मोहन नगर थाना क्षेत्र में बड़ी मात्रा में कथित रूप से अवैध "सितार गुटखा" पकड़ा गया था। उस समय पुलिस की कार्रवाई के बाद उम्मीद थी कि मामले में कठोर कदम उठाए जाएंगे, लेकिन बाद में विभागीय जांच रिपोर्ट में सामग्री को वैध बताते हुए उसे वापस सौंपे जाने की चर्चा लंबे समय तक होती रही। यह मामला आज भी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
वहीं करोड़ों रुपये के चर्चित जीएसटी प्रकरण में भी कुछ नाम सामने आए थे, लेकिन उन मामलों की वर्तमान स्थिति क्या है, यह भी आम जनता की जानकारी से दूर है। इससे यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि कई बड़े मामलों की जांच और कार्रवाई फाइलों तक सीमित होकर रह जाती है।
त्योहारी सीजन में मिठाइयों पर सख्ती, लेकिन नशा परोसने वालों पर नरमी क्यों?
हर वर्ष त्योहारी सीजन के दौरान खाद्य विभाग बाजारों में मिठाई, नमकीन और खाद्य सामग्री की जांच अभियान चलाता है। यह कार्रवाई आवश्यक भी है, लेकिन नागरिकों का सवाल है कि जब युवाओं और समाज के स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करने वाले अवैध गुटखा कारोबार की बात आती है, तब विभाग की सक्रियता उसी स्तर पर क्यों दिखाई नहीं देती?
जब पुलिस लगातार अवैध गुटखा फैक्ट्रियों तक पहुंच रही है, मशीनें जब्त कर रही है और नेटवर्क का खुलासा कर रही है, तब संबंधित विभाग का केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित दिखाई देना स्वाभाविक रूप से प्रश्नों को जन्म देता है।
पुलिस की सक्रियता बनी उम्मीद
वर्तमान में जिले में पुलिस प्रशासन द्वारा की जा रही लगातार कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो अवैध कारोबारों तक पहुंचना और उन पर प्रभावी प्रहार करना संभव है। जेवरा और अंडा जैसे मामलों ने यह साबित कर दिया है कि अवैध गुटखा कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकता है।
अब आवश्यकता इस बात की है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन भी उतनी ही गंभीरता और जवाबदेही के साथ मैदान में उतरे। केवल नमूने लेने और कागजी प्रक्रिया पूरी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। अवैध गुटखा निर्माण, भंडारण और वितरण के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए विभागीय स्तर पर भी ठोस, पारदर्शी और परिणामकारी कार्रवाई जरूरी है।
बड़ा सवाल
जब पुलिस प्रशासन लगातार अवैध गुटखा कारोबारियों तक पहुंच रहा है, तो क्या खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जिम्मेदारी केवल कार्रवाई के बाद दस्तावेज तैयार करने तक सीमित रह गई है?
दुर्ग की जनता अब जवाब चाहती है। क्योंकि यह मामला केवल कानून उल्लंघन का नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है।
डिजिटल गवर्नेंस को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने पर जोर, देशभर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
रायपुर / राज्य में डिजिटल गवर्नेंस के तेजी से बढ़ते दायरे और शासकीय सेवाओं के बढ़ते डिजिटलीकरण के बीच नागरिकों के डेटा एवं महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से रायपुर में "Strengthening Cyber Security Frameworks for State Data" विषय पर राज्य स्तरीय विभागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा चिप्स (CHiPS) द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों, बोर्डों एवं निगमों के 120 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और राष्ट्रीय स्तर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए।
साइबर सुरक्षा अब सुशासन और जनविश्वास का विषय : सचिव श्री अंकित आनन्द
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनन्द ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस की सफलता नागरिकों के विश्वास पर आधारित है और यह विश्वास तभी मजबूत होगा जब शासकीय डिजिटल प्रणालियां सुरक्षित, विश्वसनीय और साइबर खतरों का सामना करने में सक्षम हों। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सुशासन, सेवा निरंतरता और जनविश्वास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण रणनीतिक विषय बन चुका है। राज्य शासन का लक्ष्य केवल डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और लचीला बनाना भी है।
राज्य के लिए तैयार हो रहा व्यापक साइबर सुरक्षा रोडमैप
चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मयंक अग्रवाल ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि राज्य शासन साइबर सुरक्षा को डिजिटल शासन की आधारशिला मानते हुए राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए व्यापक और भविष्य उन्मुख रोडमैप तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप छह प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें जोखिम आधारित सुरक्षा मूल्यांकन, राज्य डेटा सेंटर एवं नेटवर्क सुरक्षा, सुरक्षा संचालन केंद्र (SOC), जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर, डेटा गवर्नेंस तथा साइबर जागरूकता एवं क्षमता निर्माण शामिल हैं।
विशेषज्ञों ने बताए राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा मानक
तकनीकी सत्रों में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न आयामों पर विस्तृत जानकारी साझा की। पुलिस महानिरीक्षक (तकनीकी सेवाएं) डॉ. ध्रुव गुप्ता ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act-2023) की जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून वर्ष 2027 से पूर्ण रूप से लागू हो जाएगा।
गृह मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव एवं NATGRID के सलाहकार डॉ. सौरभ गुप्ता ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम साइबर सुरक्षा प्रथाओं पर प्रकाश डाला। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के पूर्व वैज्ञानिक-जी एवं डिप्टी डायरेक्टर जनरल श्री सुरेश चंद्रा ने सरकारी डेटा सुरक्षा के लिए मानकीकरण, प्रमाणन और Trusted IT Systems के महत्व को रेखांकित किया।
समूह चर्चाओं से मिले महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को छह विषयगत समूहों में विभाजित कर विस्तृत विचार-विमर्श कराया गया। चर्चा के दौरान साइबर सुरक्षा परिपक्वता बढ़ाने, सुरक्षा निगरानी तंत्र को मजबूत करने, विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करने, नियमित सुरक्षा ऑडिट, प्रभावी घटना प्रतिक्रिया तंत्र (Incident Response Mechanism) और मानव संसाधन क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए।
राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेंगी कार्यशाला की अनुशंसाएं
कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं का संकलन कर राज्य की साइबर सुरक्षा कार्ययोजना को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। चयनित अनुशंसाओं को राष्ट्रीय स्तर पर विचारार्थ संबंधित संस्थाओं एवं भारत सरकार को भी भेजा जाएगा।
कार्यक्रम में एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. व्ही. रमन्ना राव, छत्तीसगढ़ राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी श्री टी.एन. सिंह, चिप्स के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शशांक पाण्डेय, श्री यू.एस. अग्रवाल, श्री आशीष जायसवाल, संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अनुपम आशीष टोप्पो सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
सुरक्षित डिजिटल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने सुरक्षित डिजिटल शासन, मजबूत साइबर अवसंरचना तथा नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। यह कार्यशाला राज्य में साइबर सुरक्षा को नई दिशा देने और डिजिटल सेवाओं को अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।
अल-नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने राज्य सरकार मुस्तैद, किसानों को अल-नीनो से बचाने किए जा रहे हैं उपाय: मंत्री नेताम
किसानों की चिंता दूर कर रही छत्तीसगढ़ सरकार, अल-नीनो में दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस
रायपुर / शौर्यपथ / अल-नीनो के प्रभाव से इस बार मानसून कमजोर रहने की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कम अवधि वाली फसलों, दलहन-तिलहन पर जोर, बीज सुरक्षा और फसल बीमा को प्राथमिकता देते हुए व्यापक रणनीति तैयार की है। इस आशय की जानकारी कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री राम विचार नेताम ने केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दी। बैठक वीडियोकांफ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुई।
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक कृषि राहुल देव, संचालक अनुसंधान डॉ. विवके त्रिपाठी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में मंत्री श्री नेताम ने बताया कि प्रदेश में 22 जून तक औसत वर्षा महज 30.8 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत से 58.3 मिलीमीटर कम है। खरीफ बोनी का लक्ष्य 48.69 लाख हेक्टेयर है, लेकिन अभी तक केवल 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो पाई है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में सरकार ने किसानों को संभावित घाटे से बचाने के लिए कई ठोस उपाय शुरू कर दिए हैं।
कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि कृषि विभाग ने कम अवधि वाली धान के किस्मों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहनी और तिलहनी फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। उच्चहन भूमि में अनाज के साथ दलहन-तिलहन फसलों को अंतरवर्तीय फसल के रूप में लगाने की सलाह दी जा रही है। धान की जगह दलहन-तिलहन फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए करते हुए राज्य बीज निगम ने 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है। सूखे प्रभावित 15 जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 48,449 क्विंटल किसानों तक पहुंच चुका है।
श्री परदेशी ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के साथ नैनो उर्वरक और लाभकारी फसलों के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सरकार ने बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर फसल नुकसान की भरपाई के लिए बीमा प्लान को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए हैं। ताकि किसानों को आर्थिक क्षति से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि अल-नीनो के प्राभाव कम होने वाली दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस किया जा रहा है। साथ ही
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर अनुसंधान विभाग द्वारा अल-नीनो को ध्यान में रखते हुए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है।
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश में 24 जून 2026 को ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा के सफल आयोजन एवं अधिक से अधिक ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
आवास प्लस 2.0 सर्वेक्षण की प्रतीक्षा सूची का अवलोकन एवं वाचन किया जाएगा
ग्राम सभा में विशेष रूप से आवास प्लस 2.0 सर्वेक्षण से प्राप्त सिस्टम जनरेटेड स्थायी प्रतीक्षा सूची का अवलोकन एवं वाचन किया जाएगा। शासन की मार्गदर्शिका एवं मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार पात्र हितग्राहियों की प्राथमिकता सूची तैयार की जाएगी तथा ग्रामीणों से प्राप्त दावे-आपत्तियों को नियमानुसार प्राप्त कर उनके निराकरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
ग्राम सभा से अनुमोदन के बाद स्थायी प्रतीक्षा सूची को आवास सॉफ्टवेयर में अपलोड करने की कार्यवाही की जाएगी। इसके साथ ही पूर्व बैठक के निर्णयों के पालन प्रतिवेदन, पंचायतों के आय-व्यय की समीक्षा एवं अनुमोदन, विभिन्न योजनाओं से स्वीकृत कार्यों की प्रगति तथा अन्य विकासात्मक विषयों पर भी चर्चा होगी।
जनभागीदारी को बढ़ावा देना
ग्राम सभाओं में विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी जी राम जी) के संबंध में भी ग्रामीणों को जानकारी दी जाएगी। विभाग ने सभी ग्राम पंचायतों से अपील की है कि ग्राम सभा में अधिक से अधिक ग्रामीणों की उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जाए।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध कार्रवाई लगातार तेज की जा रही है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि खनिज संपदा के अवैध दोहन तथा शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने जैसी गतिविधियों को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसी कड़ी में संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म तथा केंद्रीय खनि उडऩदस्ता प्रभारी रजत बंसल के निर्देशन में केंद्रीय खनि उडऩदस्ता और संबंधित जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने 22 जून को मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर और सरगुजा जिलों में व्यापक जांच अभियान चलाया। शिकायतों के आधार पर की गई इस कार्रवाई में विभिन्न स्थानों पर खनिजों के अवैध परिवहन में संलिप्त कुल सात वाहनों को जप्त किया गया।
जांच के दौरान मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के बरबसपुर क्षेत्र में निम्न श्रेणी चूना पत्थर से लदे दो हाइवा, सूरजपुर जिले के लटोरी में रेत से भरा एक हाइवा तथा खडग़वां में एक टिप्पर पकड़ा गया। वहीं सरगुजा जिले के सकालो और अंबिकापुर क्षेत्र में रेत परिवहन कर रहे तीन टिप्परों पर कार्रवाई की गई। सभी वाहनों को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के प्रावधानों के तहत जप्त कर संबंधित थानों में सुरक्षित रखा गया है।
कार्रवाई के दौरान अंबिकापुर के गांधी चौक क्षेत्र में एक गंभीर घटना भी सामने आई। जांच कर रही टीम के साथ वाहन मालिक, चालक और उनके सहयोगियों द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार, गाली-गलौच और धमकी दी गई तथा शासकीय कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत थाना गांधीनगर में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
खनिज विभाग ने दोहराया है कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि कानून का उल्लंघन करने, अधिकारियों को धमकाने अथवा अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
राज्य शासन का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और राजस्व हितों की रक्षा के लिए प्रभावी प्रवर्तन आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में संयुक्त निरीक्षण, निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि अवैध खनन गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
परामर्शदात्री समिति की बैठक में नवनियुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ ने रखा कर्मचारियों का पक्ष, शीघ्र समाधान की मांग
दुर्ग। नगर पालिक निगम दुर्ग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान को लेकर सोमवार को आयुक्त कक्ष में परामर्शदात्री समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में नवनियुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ ने कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए उनके त्वरित एवं न्यायसंगत निराकरण की मांग की।
बैठक के दौरान संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी संस्था की कार्यक्षमता और विकास उसके कर्मचारियों के मनोबल, सुरक्षा एवं सम्मान पर आधारित होती है। कर्मचारियों की मूलभूत समस्याओं का समयबद्ध समाधान होने पर जनसेवा की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार संभव है।
संघ ने निगम प्रशासन के समक्ष प्रत्येक माह निर्धारित तिथि पर नियमित वेतन भुगतान, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, जीपीएफ, सीपीएफ एवं परिवार कल्याण निधि की कटौती राशि का नियमित जमा, तथा छठवें एवं सातवें वेतनमान के लंबित एरियर्स के भुगतान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे विस्तार से रखे।
पदाधिकारियों ने बताया कि समय पर वेतन नहीं मिलने और कर्मचारियों के अंशदान की राशि संबंधित खातों में जमा नहीं होने से उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए पुरानी पेंशन योजना की मांग भी कर्मचारियों की प्रमुख अपेक्षाओं में शामिल है।
बैठक में कर्मचारियों के हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। संघ के अनुसार प्रशासनिक स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक पहल का आश्वासन प्राप्त हुआ है। संगठन ने उम्मीद जताई कि निगम प्रशासन कर्मचारियों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर जल्द ठोस निर्णय लेगा।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल समस्याएं उठाना नहीं, बल्कि निगम प्रशासन और कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर ऐसा सकारात्मक कार्य वातावरण तैयार करना है, जिससे कर्मचारी सम्मानपूर्वक कार्य कर सकें और नगरवासियों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें।
इस अवसर पर संगठन ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से संगठन को मजबूत बनाने तथा कर्मचारी हितों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया। संघ ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के अधिकारों और हितों से जुड़े प्रत्येक मुद्दे को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आगे भी मजबूती के साथ उठाया जाता रहेगा।
प्रमुख मांगें
निर्धारित तिथि पर नियमित वेतन भुगतान
पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
जीपीएफ, सीपीएफ एवं परिवार कल्याण निधि की राशि नियमित जमा करना
छठवें एवं सातवें वेतनमान के लंबित एरियर्स का भुगतान
कर्मचारियों की लंबित प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी समस्याओं का निराकरण
"मजबूत संगठन ही कर्मचारियों के अधिकारों की सबसे बड़ी ताकत है और कर्मचारी हितों की रक्षा के लिए संघ सदैव प्रतिबद्ध रहेगा।"
— राजू लाल चन्द्राकर, जिला अध्यक्ष, नवनियुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ, दुर्ग
15 करोड़ की लागत से बनेगा संभाग स्तरीय बहुउद्देशीय स्टेडियम, खिलाड़ियों को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग जिले के खेलगांव खम्हरिया में प्रस्तावित संभाग स्तरीय बहुउद्देशीय स्टेडियम निर्माण परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार सोमवार को खेल एवं युवा कल्याण विभाग के नाम आबंटित 16 एकड़ शासकीय भूमि का सीमांकन एवं चिन्हांकन कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।
राजस्व, लोक निर्माण एवं पुलिस विभाग के संयुक्त समन्वय से यह कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। सीमांकन कार्य के दौरान भूमि की परिधि को चूना एवं अन्य तकनीकी साधनों की सहायता से चिन्हित किया गया, जिससे अब स्टेडियम निर्माण की प्रक्रिया को गति मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
राजस्व और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त टीम रही मौजूद
तहसीलदार वसुमित्र दीवान के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम, जिसमें आरआई श्री घनश्याम चंद्राकर और पटवारी श्री विवेक देवांगन शामिल थे, ने सीमांकन की कार्रवाई पूरी की। वहीं लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर श्री वाय.के. सोनवानी एवं श्रीमती सुस्मिता चंद्राकर ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए उतई थाना प्रभारी श्री अनिल पटेल के नेतृत्व में 10 पुरुष एवं 10 महिला पुलिसकर्मी तैनात रहे, जिसके चलते पूरी प्रक्रिया निर्विघ्न रूप से संपन्न हुई।
15 करोड़ की लागत से तैयार होगा आधुनिक खेल परिसर
जानकारी के अनुसार, दुर्ग ग्रामीण विधायक श्री ललित चंद्राकर के विशेष प्रयासों से इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के लिए 15 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। निर्माण कार्य के लिए मार्च 2026 में 4 करोड़ रुपये की प्रथम किश्त लोक निर्माण विभाग को जारी की जा चुकी है।
प्रस्तावित स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें—
400 मीटर का सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक
अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला फुटबॉल मैदान
दर्शकों के लिए सीटिंग गैलरी
बैडमिंटन कोर्ट सहित इंडोर स्टेडियम
प्रशासनिक भवन एवं अन्य सहायक सुविधाएं
शामिल हैं।
पूरे संभाग के खिलाड़ियों को मिलेगा लाभ
स्टेडियम निर्माण के बाद दुर्ग ग्रामीण, दुर्ग शहर, रिसाली नगर निगम, भिलाई नगर निगम तथा नगर पंचायत उतई सहित पूरे दुर्ग संभाग के खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को अपने क्षेत्र में ही बेहतर प्रशिक्षण एवं प्रतियोगी अवसर मिल सकेंगे।
ग्रामवासियों और जनप्रतिनिधियों की रही सहभागिता
सीमांकन कार्य के दौरान खेल विभाग के प्रशिक्षक श्री भूपेन्द्र हिरवानी, खम्हरिया सरपंच श्रीमती दुलारी देशलहरे, उपसरपंच श्री टीकाराम साहू, खेल प्रशिक्षक श्री बालक दास डहरे सहित अनेक जनप्रतिनिधि और ग्रामवासी उपस्थित रहे।
हेडलाइन विकल्प
// खेलगांव खम्हरिया को मिली नई पहचान: 16 एकड़ में बनेगा संभाग का आधुनिक स्टेडियम
// दुर्ग के खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी, 15 करोड़ के स्टेडियम का रास्ता हुआ साफ
// खम्हरिया में गूंजेगी खेल प्रतिभाओं की नई उड़ान, स्टेडियम निर्माण हेतु भूमि सीमांकन पूर्ण
// सिंथेटिक ट्रैक से इंडोर स्टेडियम तक: दुर्ग संभाग को मिलने जा रही खेल सुविधाओं की बड़ी सौगात
शौर्यपथ विशेष: यह परियोजना केवल एक स्टेडियम नहीं, बल्कि दुर्ग संभाग की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधारशिला साबित हो सकती है।
बिलासपुर में होने वाली प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम, बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
भिलाई। आगामी राज्य स्तरीय थाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भाग लेने वाली दुर्ग जिला टीम के चयन हेतु सोमवार, 22 जून 2026 को शाम 5:30 बजे गुंडिचा मंडप डोम शेड, सेक्टर-10 भिलाई नगर में चयन प्रक्रिया का आयोजन किया गया। चयन ट्रायल में दुर्ग जिले के विभिन्न क्षेत्रों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
चयन प्रक्रिया में सब जूनियर (अंडर-14), जूनियर (अंडर-17) एवं सीनियर (19 वर्ष एवं उससे अधिक आयु वर्ग) के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए टीम में स्थान बनाने का प्रयास किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ हनुमान जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर सेक्टर-10 की पार्षद श्रीमती सुभद्रा जी मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे जिले का नाम रोशन करें और अधिक से अधिक पदक जीतकर लौटें।
ज्ञात हो कि राज्य स्तरीय थाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप का आयोजन 10 से 12 जुलाई 2026 तक बिलासपुर के रेलवे स्टेडियम में किया जाएगा। प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों में विशेष उत्साह देखा गया।
थाई बॉक्सिंग दुर्ग जिला सचिव जे.पी. राजू ने कहा कि खेलों की नगरी भिलाई में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे खिलाड़ियों से उत्कृष्ट प्रदर्शन की अपेक्षा है। उन्होंने बताया कि चयनित खिलाड़ियों के लिए शीघ्र ही विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा ताकि वे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
कार्यक्रम में कारा-कु-जू-बो-काई-कान कराते डो मार्शल आर्ट्स एंड योग एसोसिएशन के वरिष्ठ छात्र रामकुमार पांडे, गांधी सोनी, भरत लाल साहू, सुभाष सोनी, दीपेश आहूजा, रोहन देवांगन, विपिन दहाते, अक्षत चंद्रा, अरमान देवांगन, वेदांत साहू सहित बड़ी संख्या में जूनियर एवं सीनियर ब्लैक बेल्ट तथा ब्राउन बेल्ट खिलाड़ी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर दुर्ग जिला थाई बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष श्री चिन्ना केशवलु ने भी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें जिले के खिलाड़ियों से उत्कृष्ट प्रदर्शन की पूरी उम्मीद है। उन्होंने भविष्य में थाई बॉक्सिंग खेल के विस्तार और खिलाड़ियों के विकास के लिए हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
चयन प्रक्रिया के सफल आयोजन के साथ अब खिलाड़ियों की निगाहें बिलासपुर में होने वाली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता पर टिकी हैं, जहां दुर्ग जिले की टीम से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
200 टन सैंपल से निकले 5 हीरे, दो जेम क्वालिटी; निवेश, उद्योग और रोजगार की बढ़ीं संभावनाएं
रायपुर/महासमुंद। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा में एक नई उपलब्धि जुड़ गई है। महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान हीरों की प्राप्ति ने प्रदेश के खनिज क्षेत्र को नई दिशा देने के संकेत दिए हैं। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा 200 टन बल्क सैंपल के परीक्षण एवं प्रसंस्करण के बाद कुल 5 हीरे प्राप्त हुए हैं, जिनका कुल वजन 1.22 कैरेट है। इनमें दो जेम क्वालिटी तथा तीन अन्य श्रेणी के हीरे शामिल हैं।
यह उपलब्धि क्षेत्र में हीरा खनिजीकरण की संभावनाओं की पुष्टि करती है और भविष्य में बड़े पैमाने पर निवेश, उद्योग स्थापना, रोजगार सृजन तथा राजस्व वृद्धि का आधार बन सकती है।
वैज्ञानिक अन्वेषण से मिली सफलता
एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड के अनुसार बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय अध्ययन और अन्वेषण ड्रिलिंग जैसे वैज्ञानिक तरीकों से सर्वेक्षण किया गया। इसके आधार पर चिन्हित क्षेत्र से लगभग 200 टन खनिज सामग्री एकत्र कर परीक्षण किया गया, जिसके बाद पांच हीरों की प्राप्ति हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक चरण में मिले ये परिणाम क्षेत्र में व्यापक हीरा भंडार की संभावनाओं का संकेत हैं। इससे भविष्य में विस्तृत सर्वेक्षण और भूगर्भीय अध्ययन का मार्ग प्रशस्त होगा।
मुख्यमंत्री ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस सफलता को छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत उत्साहजनक बताते हुए कहा कि यह प्रदेश की आर्थिक क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पहले से ही देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है और लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट तथा चूना पत्थर के उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अब हीरा संभावनाओं की पुष्टि से प्रदेश की खनिज विविधता और अधिक समृद्ध होगी।
रोजगार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल खनिजों के उत्खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज आधारित उद्योगों, मूल्य संवर्धन इकाइयों और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की नीति पर कार्य कर रही है। हीरा क्षेत्र में संभावनाएं विकसित होने से निवेश आकर्षित होगा और स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर पैदा होंगे।
राष्ट्रीय स्तर पर बनेगी नई पहचान
सरकार का मानना है कि बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में मिली यह सफलता छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकती है। आगामी वैज्ञानिक सर्वेक्षणों और परीक्षणों से क्षेत्र की वास्तविक संसाधन क्षमता का अधिक सटीक आकलन किया जाएगा।
वर्तमान में प्राप्त सभी हीरों को सुरक्षित अभिरक्षा में एनएमडीसी के पन्ना स्थित स्ट्रांग रूम में रखा गया है। आगे की प्रक्रिया नियमानुसार और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप पूरी की जाएगी।
मुख्य तथ्य
स्थान: बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक, सरायपाली (महासमुंद)
परीक्षण सामग्री: 200 टन बल्क सैंपल
प्राप्त हीरे: 5
कुल वजन: 1.22 कैरेट
जेम क्वालिटी हीरे: 2
अन्य श्रेणी के हीरे: 3
परीक्षण एजेंसी: एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड
यह खोज छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है और प्रदेश को खनिज आधारित औद्योगिक विकास के नए युग में प्रवेश कराने का आधार बन सकती है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई बैठक, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा को मिलेगा नया बल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में ग्रामीण रोजगार, आजीविका संवर्धन और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने ‘विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़’, ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ तथा ‘छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026’ के प्रारूप को मंजूरी प्रदान की।
ग्रामीण परिवारों को मिलेगी 125 दिन रोजगार की गारंटी
कैबिनेट ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, सशक्तीकरण और डिजिटल सुशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़ को मंजूरी दी है। भारत सरकार के अधिनियम 2025 के अनुरूप लागू की जा रही इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिवस अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी।
योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण, आजीविकामूलक परिसंपत्तियों का विकास तथा टिकाऊ रोजगार सृजन पर विशेष जोर रहेगा। ग्राम पंचायत आधारित समेकित विकास, विभागीय योजनाओं के अभिसरण और पीएम गति शक्ति से समन्वय भी सुनिश्चित किया जाएगा।
इस योजना में केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में व्यय किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य बजट में 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ से गांवों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए कैबिनेट ने ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया है।
योजना के तहत स्थापित किए जाएंगे—
सृजन केंद्र (हथकरघा, बुनाई-सिलाई, हस्तशिल्प आदि)
प्रसंस्करण इकाइयां (दलहन, तिलहन, राइस मिल, डेयरी आदि)
सेवा केंद्र (कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत, अटल डिजिटल केंद्र)
विपणन केंद्र
आपूर्ति केंद्र
योजना का उद्देश्य उपलब्ध अधोसंरचना और मशीनरी का बेहतर उपयोग करते हुए स्थानीय उत्पादन, प्रसंस्करण, सेवा एवं विपणन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इससे ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे तथा स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा।
इस योजना के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को नोडल एजेंसी तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
नई CBG नीति से अपशिष्ट बनेगा स्वच्छ ईंधन
कैबिनेट ने ‘छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026’ को भी मंजूरी प्रदान की है। नीति का उद्देश्य कृषि अवशेष, नगरीय ठोस अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट तथा अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन कर उन्हें कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) में परिवर्तित करना है।
इस नीति से—
अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा
पर्यावरण संरक्षण होगा
ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी
जैव उर्वरकों का उत्पादन बढ़ेगा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी
छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के अनुसार राज्य में लगभग 5 लाख टन प्रतिवर्ष CBG उत्पादन की संभावना आंकी गई है।
नीति के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी बनाया गया है, जबकि ऊर्जा विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रशासनिक आदेश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
मुख्य फैसले एक नजर में
✅ ग्रामीण परिवारों को 125 दिन रोजगार की गारंटी
✅ वीबी-जी राम जी योजना के लिए 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान
✅ ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ से गांवों में उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा
✅ नई CBG नीति से स्वच्छ ऊर्जा और जैविक अपशिष्ट प्रबंधन को मिलेगी गति
✅ ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और हरित विकास पर सरकार का विशेष फोकस
कैबिनेट के इन निर्णयों को ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय सतत विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
