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अतिवृष्टि और जलभराव से निपटने के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की दिन-रात ड्यूटी तय, त्वरित राहत देने का दावा
दुर्ग,। मानसून 2026 के दौरान संभावित अतिवृष्टि, जलभराव एवं बाढ़ जैसी आपात परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए नगर पालिक निगम दुर्ग ने बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ का गठन कर दिया है। निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल के निर्देश पर निगम कार्यालय में 24 घंटे संचालित होने वाला कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जो पूरे मानसून सीजन में लगातार कार्य करेगा।
बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ की संपूर्ण मॉनिटरिंग एवं विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी कार्यपालन अभियंता प्रकाशचंद्र थवानी को नोडल अधिकारी के रूप में सौंपी गई है। उनके सहयोग के लिए स्वास्थ्य, अभियंत्रिकी एवं कार्यशाला शाखा के अधिकारियों की टीम भी गठित की गई है।
नगर निगम ने कंट्रोल रूम के सुचारु संचालन के लिए सप्ताह के सातों दिन दिन एवं रात्रि पाली में अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित कर दी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकें।
निगम प्रशासन का कहना है कि मानसून के दौरान यदि कहीं जलभराव, बाढ़ अथवा अन्य आपदा की स्थिति उत्पन्न होती है तो बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ पूरी तरह सक्रिय रहकर त्वरित कार्रवाई करेगा। साथ ही नागरिकों की सुरक्षा एवं राहत कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संस्कृति, आस्था और राष्ट्रीय एकात्मता का अनूठा अभियान हुआ सफल ,प्रदेश के विशिष्टजनों ने किया प्रथम ज्योतिर्लिंग के दर्शन
रायपुर /भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा देने वाली छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी ’’सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा’’ आज सफलता के साथ संपन्न हुई। पांच दिवसीय इस ऐतिहासिक यात्रा के बाद प्रदेश के सभी जिलों से शामिल 1040 विशिष्टजन सकुशल रायपुर लौटे, जहां रायपुर रेलवे स्टेशन पर उनका आत्मीय, गरिमामय एवं भव्य स्वागत किया गया। यात्रियों के चेहरों पर संतोष, श्रद्धा और आत्मिक आनंद की झलक इस अभिनव यात्रा की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण बनी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित इस विशेष सांस्कृतिक यात्रा ने केवल श्रद्धालुओं को भारत के प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के दर्शन का अवसर ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें देश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रीय एकात्मता का भी जीवंत अनुभव कराया। यात्रा ने यह संदेश भी दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक मूल्यों और राष्ट्रीय गौरव को भी समान प्राथमिकता दे रही है।
इस यात्रा में प्रदेश के पद्मश्री सम्मान प्राप्त विभूतियों, राष्ट्रीय एवं राज्य सम्मान से सम्मानित कलाकारों, साहित्यकारों, संस्कृति कर्मियों, समाजसेवियों तथा अन्य विशिष्टजनों ने सहभागिता की। इससे छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, कला, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।
संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन तथा संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ के सुव्यवस्थित प्रबंधन में आयोजित इस यात्रा की देशभर में सराहना हुई। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग, गुजरात राज्य सरकार के समन्वय तथा सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के आत्मीय सहयोग से यात्रा का प्रत्येक चरण अत्यंत सुव्यवस्थित, सुरक्षित और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान सोमनाथ के दिव्य दर्शन-पूजन के साथ मंदिर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन किया। प्रतिभागियों ने भारत की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक सोमनाथ धाम के महत्व को निकट से अनुभव किया। अनेक प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्रों की पावन मिट्टी और नदियों का जल भगवान सोमनाथ को अर्पित कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एकता के सूत्र से जोड़ने का संदेश दिया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास पर आधारित आकर्षक लाइट एंड साउंड शो का भी अवलोकन किया, जिसने मंदिर के पुनर्निर्माण, भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान की प्रेरक गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
पूरी यात्रा के दौरान आवागमन, आवास, भोजन, चिकित्सा, सुरक्षा तथा अन्य सभी व्यवस्थाएं उच्च स्तर पर सुनिश्चित की गईं। संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे स्वयं विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ पूरी यात्रा में उपस्थित रहे और प्रत्येक यात्री की सुविधा का विशेष ध्यान रखा। यात्रियों ने व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि शासन ने उन्हें परिवार जैसा स्नेह और सम्मान प्रदान किया।
यात्रा से लौटे प्रतिभागियों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताते हुए कहा कि वर्षों से संजोई गई सोमनाथ दर्शन की उनकी इच्छा शासन की इस निःशुल्क और सुव्यवस्थित पहल से पूरी हो सकी। उन्होंने कहा कि भगवान सोमनाथ के दिव्य दर्शन, वहां का आध्यात्मिक वातावरण, ऐतिहासिक लाइट एंड साउंड शो तथा उत्कृष्ट यात्रा प्रबंधन ने उन्हें आत्मिक शांति के साथ भारतीय संस्कृति के प्रति नया गर्व प्रदान किया।
रायपुर रेलवे स्टेशन पर लौटे श्रद्धालुओं का पारंपरिक रीति-रिवाज, पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और आत्मीय अभिनंदन के साथ भव्य स्वागत किया गया। स्वागत समारोह के दौरान यात्रियों ने छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा केवल तीर्थाटन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का प्रेरक अभियान रही।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच के अनुरूप यह यात्रा इस बात का प्रमाण बनी कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर से जन-जन को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में संस्कृति विभाग द्वारा किए गए सफल आयोजन ने यह भी सिद्ध किया कि इस तरह के आयोजन समाज में आत्मगौरव, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा की सफलता ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय सांस्कृतिक परिदृश्य में नई पहचान प्रदान की है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, गुजरात राज्य सरकार, सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट तथा छत्तीसगढ़ शासन के समन्वित प्रयासों से संपन्न यह ऐतिहासिक यात्रा आने वाले समय में सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय एकात्मता के क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण के रूप में याद की जाएगी।
कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच, डीईओ ने की त्वरित कार्रवाई; ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी के बाद उठाया गया कदम
जांजगीर-चांपा। जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला, खैरवार पारा (बोड़सरा) में पदस्थ एक शिक्षक और एक शिक्षिका का कथित आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई की है। प्रारंभिक जांच में वीडियो सही पाए जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) अशोक सिन्हा ने दोनों शिक्षकों को उनके वर्तमान विद्यालय से हटाकर अलग-अलग बीईओ कार्यालयों में अटैच कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों और अभिभावकों में गहरा आक्रोश फैल गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। इसके बाद डीईओ द्वारा गठित जांच दल ने प्रारंभिक जांच में वायरल वीडियो की पुष्टि की।
जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षक को नवागढ़ विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय तथा शिक्षिका को अकलतरा बीईओ कार्यालय में आगामी आदेश तक अटैच करने के आदेश जारी किए हैं। विभागीय स्तर पर मामले की आगे की जांच और नियमानुसार कार्रवाई जारी है।
नाम सार्वजनिक नहीं किए गए
जिला शिक्षा अधिकारी तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक प्रारंभिक जानकारी में संबंधित शिक्षक और शिक्षिका के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। विभागीय प्रक्रिया एवं गोपनीयता संबंधी नियमों का पालन करते हुए प्रशासन ने केवल विद्यालय, पद और की गई प्रशासनिक कार्रवाई की पुष्टि की है।
विभाग की सख्त मंशा
शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यालय जैसी संवेदनशील संस्था की गरिमा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि विभागीय जांच में किसी भी प्रकार का अनुशासनहीन आचरण सिद्ध होता है, तो नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
टीएमसी के 20 बागी सांसदों और शिवसेना (यूबीटी) विवाद पर अंतिम सुनवाई पूरी; मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय की संभावना, दलबदल कानून बनेगा सबसे बड़ी कसौटी
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बागी सांसदों की सदस्यता को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष दोनों मामलों में अंतिम दौर की सुनवाई पूरी हो चुकी है और संसदीय सूत्रों के अनुसार जुलाई में शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले निर्णय आने की संभावना जताई जा रही है।
टीएमसी ने अपनी पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि सांसदों द्वारा 'नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI)' में विलय का दावा संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के अनुरूप नहीं है। पार्टी का कहना है कि केवल सांसदों का समूह किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकता और वैध विलय के लिए कानून में निर्धारित शर्तों का पालन आवश्यक है।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) ने भी बागी सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है। पार्टी का कहना है कि दलबदल के मामलों में संवैधानिक प्रावधानों का सख्ती से पालन होना चाहिए। महाराष्ट्र में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़ा विवाद पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
स्पीकर का फैसला अंतिम नहीं होगा
संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता पर निर्णय देने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास है, लेकिन 1992 के 'किहोतो होलोहान बनाम जाचिल्हू' फैसले में सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि स्पीकर का निर्णय न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे में आता है। ऐसे में स्पीकर का कोई भी फैसला सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में चुनौती दिया जा सकता है।
मानसून सत्र में वोटिंग का क्या होगा?
जब तक किसी सांसद को औपचारिक रूप से अयोग्य घोषित नहीं किया जाता, तब तक वह संसद का सदस्य बना रहता है और सदन की कार्यवाही में भाग लेने तथा मतदान करने का अधिकार रखता है। यदि स्पीकर का फैसला सत्र से पहले नहीं आता या मामला अदालत में लंबित रहता है, तो बागी सांसद सामान्य रूप से वोट कर सकते हैं, जब तक कि अदालत विशेष रूप से उनके मतदान पर रोक न लगाए।
यदि स्पीकर बागियों के पक्ष में फैसला देते हैं, तो मूल राजनीतिक दल अदालत से अंतरिम रोक (Stay) की मांग कर सकते हैं। वहीं यदि स्पीकर उन्हें अयोग्य घोषित करते हैं, तो बागी सांसद राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। ऐसी स्थिति में अदालत अंतरिम राहत, सशर्त भागीदारी या अन्य उपयुक्त आदेश दे सकती है।
राजनीतिक महत्व भी बड़ा
इस पूरे विवाद पर देश की नजर इसलिए भी टिकी है क्योंकि आगामी मानसून सत्र में सरकार महत्वपूर्ण विधेयक और संभावित संवैधानिक संशोधन ला सकती है, जिनके लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में बागी सांसदों की सदस्यता और उनके मतदान के अधिकार पर आने वाला फैसला राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।
फिलहाल मामला लोकसभा अध्यक्ष के विचाराधीन है और अंतिम निर्णय के बाद इसके सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने की पूरी संभावना बनी हुई है।
3450 दिनों से लगातार निःशुल्क भोजन सेवा दे रही संस्था ने स्टील की थाली, वस्त्र, फल, मिष्ठान और दैनिक उपयोग की सामग्री भी बांटी
दुर्ग / शौर्यपथ / अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) की अमावस्या के पावन अवसर पर जन समर्पण सेवा संस्था, दुर्ग ने सेवा और मानवता की अनूठी मिसाल पेश करते हुए वृद्धाश्रमों, रेलवे स्टेशन तथा शहर के विभिन्न स्थानों पर रह रहे जरूरतमंदों के बीच भोजन और आवश्यक सामग्री का वितरण किया। संस्था द्वारा वृद्धजनों को सम्मानपूर्वक भोजन कराने के साथ ही स्टील की थाली, गिलास, चम्मच, वस्त्र एवं दैनिक उपयोग की सामग्री भी भेंट की गई।
संस्था के अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा ‘बंटी’ ने बताया कि जन समर्पण सेवा संस्था पिछले 9 वर्ष 6 माह (लगभग 3450 दिनों) से बिना किसी व्यवधान के प्रतिदिन दुर्ग रेलवे स्टेशन एवं अन्य स्थानों पर अस्थायी रूप से निवासरत मजदूरों, असहायों, महिलाओं, बच्चों एवं दिव्यांगजनों को रात्रि में निःशुल्क भोजन उपलब्ध करा रही है। संस्था के स्वयंसेवक विभिन्न पर्व एवं त्योहारों पर भी जरूरतमंदों की हरसंभव सहायता करते हैं।
अधिकमास अमावस्या के अवसर पर संस्था के सदस्यों ने पुलगांव स्थित वृद्धाश्रम तथा कादंबरी नगर स्थित महिला अनाथ एवं वृद्ध आश्रम पहुंचकर वृद्धजनों को नई स्टील की थाली, गिलास एवं चम्मच प्रदान किए और उन्हीं में भोजन परोसा। इसके बाद वृद्ध पुरुषों को लुंगी, महिलाओं को नाइटी तथा सभी को मिष्ठान, नमकीन, फल, बिस्किट, साबुन, निरमा, तेल, टूथपेस्ट, कंघी सहित अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की गई।
इसके पश्चात संस्था की टीम ने दुर्ग रेलवे स्टेशन एवं शहर के विभिन्न फुटपाथों पर रहने वाले जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया तथा साबुन एवं अन्य उपयोगी सामग्री का भी वितरण किया।
संस्था ने बताया कि पद्म पुराण एवं अन्य धर्मग्रंथों में अधिकमास के दौरान अन्नदान एवं जरूरतमंदों की सेवा को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। मान्यता है कि इस माह में किया गया दान सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक फलदायी होता है तथा इससे मानव सेवा के साथ आध्यात्मिक संतोष की भी प्राप्ति होती है।
सेवा कार्य में रहे उपस्थित
इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा ‘बंटी’, प्रतिभा शर्मा, पार्षद राम भाऊ, सुरेश गुप्ता, मनोज गुप्ता, लाला, अर्चला शर्मा, सरिता शर्मा, चंचल शर्मा, पिंकी पुरोहित, किरण सेन, सुमन शर्मा, गिरधर शर्मा, राजेंद्र ताम्रकार, अर्जित शुक्ला, आशीष मेश्राम, सुजल शर्मा, विनय मिश्रा, संदीप गुप्ता, अंकेश पेसवानी, वाशु शर्मा, सार्थक शर्मा, अनस खान, अंश पाण्डेय, मंटू गुप्ता, मोक्ष शर्मा सहित संस्था के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
मानपुर में दर्दनाक हादसा, बैरिकेड्स तोड़कर फरार हुआ आरोपी; पुलिस की तत्परता से गिरफ्तारी, क्षेत्र में आक्रोश
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौक / शौर्यपथ / जिले के मानपुर क्षेत्र में तेज रफ्तार और लापरवाही ने एक मासूम की जिंदगी छीन ली। कथित रूप से नशे की हालत में ट्रक चला रहे चालक ने 8 वर्षीय बालिका को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद चालक ट्रक लेकर फरार हो गया, लेकिन पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब 60 किलोमीटर तक पीछा कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी और आक्रोश का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही मानपुर पुलिस ने तत्काल जिलेभर में अलर्ट जारी किया और ट्रक को रोकने के लिए प्रमुख मार्गों पर बैरिकेड्स लगाए। लेकिन आरोपी चालक ने रुकने के बजाय बैरिकेड्स को तोड़ते हुए ट्रक दौड़ा दिया और भागने का प्रयास किया।
60 किलोमीटर तक चला पीछा, पुलिस ने दिखाई मुस्तैदी
घटना के बाद पुलिस की कई टीमें सक्रिय हुईं। लगातार पीछा करते हुए पुलिस ने कोर-कोरकट्टी के पास ट्रक को घेरकर रोक लिया और आरोपी चालक को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने ट्रक को भी जब्त कर लिया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, चालक के नशे में होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण सहित अन्य कानूनी प्रक्रियाएं शुरू कर दी हैं और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
एक परिवार का उजड़ गया संसार
हादसे में 8 वर्षीय मासूम की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों ने दोषी चालक के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सवाल फिर वही—कब थमेगा तेज रफ्तार का आतंक?
यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा, नशे की हालत में वाहन चलाने और भारी वाहनों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई तो मासूम जिंदगियां इसी तरह तेज रफ्तार की भेंट चढ़ती रहेंगी।
फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह मामला तेज रफ्तार, लापरवाही और कथित रूप से नशे की हालत में वाहन चलाने से जुड़ा माना जा रहा है।
लेख : राजनीतिक विश्लेषण
दुर्ग। दुर्ग नगर निगम की राजनीति इन दिनों विकास से अधिक गुटबाजी और शक्ति प्रदर्शन की चर्चाओं के केंद्र में दिखाई दे रही है। बरसात की शुरुआत के साथ जहां शहर के अनेक वार्ड जलभराव, सफाई व्यवस्था, गड्ढों, बदबू और मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निगम के बड़ी संख्या में पार्षदों का केरल भ्रमण राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पहले कुछ पार्षदों के साथ पुरी यात्रा की तैयारी चल रही थी, लेकिन अचानक केरल यात्रा का कार्यक्रम सामने आया और अधिकांश पार्षद उसी ओर रवाना हो गए। इसे लेकर तरह-तरह की राजनीतिक व्याख्याएं की जा रही हैं। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर यह केवल पर्यटन है या इसके पीछे भविष्य की राजनीतिक रणनीति भी आकार ले रही है?
यात्रा बनी शक्ति प्रदर्शन का माध्यम?
इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें केवल एक दल के नहीं, बल्कि कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय पार्षद भी एक साथ दिखाई दिए। इससे यह संदेश गया कि स्थानीय राजनीति में वैचारिक सीमाओं से अधिक व्यक्तिगत समीकरण और गुटीय संतुलन प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े समूह का एक मंच पर आना भविष्य की राजनीतिक दिशा का संकेत माना जाता है। ऐसे में यह यात्रा केवल पर्यटन न होकर शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखी जा रही है।
खर्च को लेकर भी उठ रहे सवाल
यात्रा के खर्च को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ पार्षदों का दावा है कि प्रति व्यक्ति 10 से 15 हजार रुपये का योगदान लिया गया, जबकि सामान्य यात्रा व्यय का अनुमान इससे कहीं अधिक बताया जा रहा है। ऐसे में शहर में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि वास्तविक खर्च अधिक है तो शेष राशि की व्यवस्था किसने की?
हालांकि इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर लगातार अटकलों का दौर जारी है।
वार्डों की चिंता या राजनीतिक गणित?
बरसात के मौसम में शहर के अनेक हिस्सों में जल निकासी, कचरा प्रबंधन और सड़क मरम्मत जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। ऐसे समय में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों का एक साथ लंबी यात्रा पर जाना नागरिकों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।
आलोचकों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की पहली प्राथमिकता अपने वार्ड की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, जबकि समर्थकों का तर्क है कि जनप्रतिनिधियों को भी समय-समय पर सामूहिक संवाद और विश्राम का अवसर मिलना चाहिए। इन दोनों दृष्टिकोणों के बीच जनता अपने सवालों के उत्तर तलाश रही है।
गुटबाजी का नया अध्याय?
दुर्ग निगम की राजनीति पिछले कुछ समय से लगातार गुटीय समीकरणों के कारण सुर्खियों में रही है। सामान्य सभा से लेकर विकास कार्यों तक कई बार मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। अब केरल यात्रा ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में यदि निगम की राजनीति में कोई बड़ा घटनाक्रम होता है, तो इस यात्रा को उसके शुरुआती संकेतों में गिना जा सकता है। हालांकि यह केवल राजनीतिक विश्लेषण है और भविष्य की दिशा आने वाला समय ही तय करेगा।
जनता पूछ रही है...
जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता शहर का विकास है या राजनीतिक गुटों का विस्तार? आखिर वार्डों की समस्याओं के बीच पर्यटन को प्राथमिकता क्यों मिली? और यदि यह केवल निजी यात्रा थी, तो इतनी बड़ी संख्या में पार्षदों का एक साथ जाना संयोग है या किसी बड़े राजनीतिक समीकरण का हिस्सा?
अंतिम बात
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को यात्रा करने, संवाद करने और राजनीतिक रणनीति बनाने का पूरा अधिकार है। लेकिन उसी लोकतंत्र में जनता को यह अपेक्षा भी रहती है कि उसके प्रतिनिधि सबसे पहले उसके वार्ड, उसकी सड़क, उसकी नाली और उसकी मूलभूत समस्याओं को प्राथमिकता दें।
केरल यात्रा समाप्त हो जाएगी, तस्वीरें भी सोशल मीडिया से धीरे-धीरे गायब हो जाएंगी, लेकिन शहर की टूटी सड़कें, जलभराव, कचरे के ढेर और जनता के सवाल वहीं रहेंगे। अब निगाहें इस बात पर हैं कि यात्रा से लौटने के बाद जनप्रतिनिधि विकास की नई पटकथा लिखेंगे या फिर दुर्ग की राजनीति में किसी नए "ऑपरेशन" की शुरुआत होगी।
28 जून तक नामांकन, ऑनलाइन मतदान से होगा नए अध्यक्ष का चुनाव; संगठन ने अपनाया निष्पक्ष रुख
दुर्ग। दुर्ग शहर युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव ने अब पूरी तरह राजनीतिक सरगर्मी पैदा कर दी है। नामांकन प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और 28 जून तक नामांकन दाखिल किए जा रहे हैं। चुनाव की तिथि की आधिकारिक घोषणा भले अभी शेष हो, लेकिन यह तय है कि मतदान पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से कराया जाएगा।
वर्तमान चुनावी परिदृश्य में ऋषि साहू और मनीष सोनवानी सबसे मजबूत दावेदारों के रूप में उभरकर सामने आए हैं। दोनों युवा नेता लगातार कार्यकर्ताओं और युवा मतदाताओं के बीच जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। संगठन के भीतर भी दोनों की सक्रियता और स्वीकार्यता को लेकर सकारात्मक चर्चा है।
सूत्रों के अनुसार, रौनक दुबे ने भी अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है, जिससे चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की नजर फिलहाल मुख्य रूप से ऋषि साहू और मनीष सोनवानी के बीच बनते मुकाबले पर टिकी हुई है।
संगठन ने नहीं खोले अपने पत्ते
इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संगठन ने किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में आधिकारिक रुख नहीं अपनाया है। संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि "सभी प्रत्याशी हमारे अपने हैं। जो कार्यकर्ताओं का अधिक विश्वास प्राप्त करेगा, वही विजयी होगा। संगठन पूरी तरह निष्पक्ष है।"
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन का यह निर्णय भविष्य में किसी प्रकार की गुटबाजी से बचने और लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
35 वर्ष तक के युवाओं को मिलेगा मतदान का अधिकार
युवा कांग्रेस के संगठनात्मक नियमों के अनुसार अध्यक्ष पद के चुनाव में 35 वर्ष तक की आयु वाले सदस्य ही मतदान कर सकेंगे। मतदान ऑनलाइन होने से युवा मतदाताओं में भी उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा है।
जीत किसी की भी हो, संगठन रहेगा मजबूत
चुनावी प्रतिस्पर्धा के बावजूद सबसे सकारात्मक संदेश दोनों प्रमुख दावेदारों की ओर से सामने आया है। ऋषि साहू और मनीष सोनवानी दोनों ने स्पष्ट कहा है कि चुनाव परिणाम चाहे जो भी हो, वे मिलकर संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत बनाने का कार्य करेंगे। दोनों नेताओं ने आपसी सामंजस्य और कांग्रेस संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
वरिष्ठ नेताओं का मिल रहा निष्पक्ष सहयोग
इस पूरे चुनाव में वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं द्वारा भी निष्पक्ष भूमिका निभाई जा रही है। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी सभी दावेदारों को समान अवसर देने और चुनाव प्रक्रिया को लोकतांत्रिक एवं पारदर्शी बनाने पर जोर दे रहे हैं।
बूथ स्तर तक संगठन विस्तार पर रहेगा फोकस
दुर्ग युवा कांग्रेस का यह चुनाव केवल नए अध्यक्ष के चयन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी राजनीतिक चुनौतियों की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। कांग्रेस संगठन लगातार बूथ स्तर तक अपनी सक्रियता बढ़ाने की रणनीति पर कार्य कर रहा है और माना जा रहा है कि नया युवा अध्यक्ष संगठन की इस रणनीति को और गति देगा।
अब सभी की निगाहें ऑनलाइन मतदान की तिथि की आधिकारिक घोषणा और नामांकन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद बनने वाले अंतिम चुनावी समीकरणों पर टिकी हुई हैं।
140 आवेदनों के साथ जनता पहुंची कलेक्टर दरबार, भूमि, आवास और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे रहे प्रमुख
दुर्ग। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम एक बार फिर आम नागरिकों की उम्मीदों का केंद्र बना, जहां विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर बड़ी संख्या में लोग कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित जनदर्शन में कलेक्टर अभिजीत सिंह ने स्वयं लोगों की समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
जनदर्शन में कुल 140 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें अवैध कब्जा, भूमि सीमांकन, आवासीय पट्टा, प्रधानमंत्री आवास योजना, सीसी रोड निर्माण, ऋण पुस्तिका सुधार, आर्थिक सहायता एवं अन्य जनहित से जुड़े मामले शामिल रहे। कलेक्टर ने कई मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
28 साल बाद भी नहीं मिला पट्टे की जमीन का पता
जनदर्शन में सबसे मार्मिक मामला भिलाई की एक विधवा महिला का सामने आया। महिला ने बताया कि वर्ष 1998 में राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत उनके और उनके दिवंगत पति के नाम पर भू-स्वामित्व पट्टा जारी किया गया था, लेकिन लगभग तीन दशक बीत जाने के बाद भी उन्हें अपनी जमीन का वास्तविक स्थान नहीं बताया गया।
महिला ने प्रशासन को बताया कि वर्तमान में वह बीएसपी क्वार्टर में निवास कर रही हैं और जर्जर आवासों को तोड़े जाने की प्रक्रिया के चलते उनका परिवार आवासीय संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने पट्टे की भूमि का चिन्हांकन कर कब्जा दिलाने तथा मकान निर्माण की अनुमति प्रदान करने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तहसील नजूल को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
फोरलेन सड़क के मापदंड पर उठे सवाल
बोरसी क्षेत्र के नागरिकों ने प्रस्तावित फोरलेन सड़क निर्माण में एक समान मानक अपनाने की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया। नागरिकों का कहना था कि महाराजा चौक से बोरसी चौक तक अधिकांश हिस्सों में सड़क चौड़ीकरण 20 मीटर के मानक पर किया जा रहा है, जबकि एक विशेष हिस्से में 22 मीटर चौड़ाई प्रस्तावित है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इससे उनकी निजी संपत्तियां प्रभावित होंगी। उन्होंने पूरे मार्ग में समान रूप से 20 मीटर चौड़ाई के आधार पर नापजोख कराने की मांग की। इस पर कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को परीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
50 कुत्तों से दहशत, रहवासियों ने मांगी राहत
पदमनाभपुर क्षेत्र के शकुंतला नगरवासियों ने एक आवास में बड़ी संख्या में पालतू कुत्ते रखे जाने की शिकायत दर्ज कराई। आवेदकों के अनुसार संबंधित मकान में लगभग 50 कुत्ते रखे गए हैं, जिन्हें कई बार बिना निगरानी के बाहर छोड़ दिया जाता है।
रहवासियों ने बताया कि कुत्तों के झुंड के कारण क्षेत्र में भय का वातावरण बना हुआ है तथा राहगीरों और मवेशियों पर हमले की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इस संबंध में पूर्व में थाना पदमनाभपुर में शिकायत देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने की बात कही गई। कलेक्टर ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई हेतु एसडीएम दुर्ग को निर्देशित किया।
जनदर्शन बना उम्मीदों का मंच
जनदर्शन में सामने आए मामलों ने यह स्पष्ट किया कि नागरिक आज भी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन को सबसे भरोसेमंद मंच मानते हैं। भूमि, आवास, सड़क और सुरक्षा जैसे मुद्दे सीधे आम जनजीवन से जुड़े हैं और इनके समाधान की अपेक्षा प्रशासन से की जाती है।
कलेक्टर द्वारा कई मामलों में तत्काल संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह बनाना यह संकेत देता है कि प्रशासन समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर है। अब नागरिकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जनदर्शन में दिए गए निर्देश धरातल पर कितनी तेजी से अमल में आते हैं।
काला दिवस मनाने वाली भाजपा को कांग्रेस का पलटवार, कहा- संवैधानिक आपातकाल और वर्तमान हालात की तुलना नहीं छिपा सकती सच्चाई
रायपुर। आपातकाल की बरसी पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा मनाए जा रहे "काला दिवस" को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि देश के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा आज भाजपा का अलोकतांत्रिक चरित्र बन चुका है।
दीपक बैज ने कहा कि वर्ष 1975 में लगाया गया आपातकाल संविधान के प्रावधानों के तहत लागू किया गया था। उस समय देश में उत्पन्न परिस्थितियों और आंतरिक संकट को देखते हुए राष्ट्रपति द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आपातकाल की घोषणा की गई थी, जिसे निर्धारित समय के बाद समाप्त भी कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आज उस ऐतिहासिक घटना को राजनीतिक हथियार बनाकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वास्तविक चिंता का विषय वर्तमान परिस्थितियां हैं, जहां लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर लगातार प्रश्न उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के कार्यकाल में संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा है, विपक्षी दलों को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं तथा केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक उपयोग हो रहा है।
बैज ने दावा किया कि चुनाव आयोग, जांच एजेंसियों और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं पर कार्रवाई, दल-बदल की राजनीति और निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर चुनौती हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, करों का बोझ, पेपर लीक की घटनाएं और आम नागरिकों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनके अनुसार लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं होता, बल्कि जनता की आवाज को सुनना और संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखना भी उसकी मूल आत्मा है।
दीपक बैज ने कहा कि जो संगठन और राजनीतिक दल कभी आपातकाल के विरोध को अपना प्रमुख मुद्दा बनाते थे, वे आज अपनी ही सरकार के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों पर उठ रहे सवालों पर मौन दिखाई देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों, युवाओं और विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए प्रशासनिक और कानूनी तंत्र का उपयोग किया जा रहा है।
कांग्रेस ने भाजपा द्वारा मनाए जा रहे काला दिवस को राजनीतिक दिखावा बताते हुए कहा कि यदि लोकतंत्र और संविधान की वास्तविक चिंता है तो पहले वर्तमान व्यवस्था में उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। वहीं भाजपा लगातार कांग्रेस पर आपातकाल के ऐतिहासिक अध्याय को लेकर निशाना साध रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आपातकाल की बरसी को लेकर छिड़ा यह विवाद आने वाले समय में केंद्र और विपक्ष के बीच वैचारिक संघर्ष को और तीखा कर सकता है। फिलहाल कांग्रेस और भाजपा दोनों लोकतंत्र, संविधान और संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रही हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म होने के संकेत मिल रहे हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
