August 13, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    जगदलपुर, शौर्यपथ। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर लालबाग मैदान, जगदलपुर में आयोजित मुख्य समारोह के दौरान 16 विभागों द्वारा आकर्षक एवं सुसज्जित झांकियों का भव्य प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर बस्तर पुलिस की झांकी ने प्रथम स्थान प्राप्त कर सभी का ध्यान आकर्षित किया।

    बस्तर पुलिस की झांकी की थीम “साइबर सुरक्षित रहेगा बस्तर – बढ़ेगा बस्तर एवं सड़क सुरक्षा” रही। झांकी के माध्यम से आम जनता को साइबर अपराधों और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का प्रभावी संदेश दिया गया।

    झांकी में डिजिटल अरेस्ट स्कैम, बीमा योजना स्कैम, एपीके फाइल स्कैम तथा इन्वेस्टमेंट स्कैम जैसे बढ़ते साइबर अपराधों के तरीकों को दर्शाते हुए उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। वहीं युवाओं को सड़क सुरक्षा के प्रति प्रेरित करने के लिए बैटमैन, स्पाइडरमैन, कैप्टन अमेरिका और हीमैन जैसे लोकप्रिय हेरोइक आइकॉन के माध्यम से हेलमेट पहनने, यातायात नियमों का पालन करने का संदेश दिया गया।

    बस्तर पुलिस की यह झांकी संदेश, प्रस्तुति और जन-जागरूकता के दृष्टिकोण से अत्यंत प्रभावशाली रही, जिसे निर्णायक मंडल द्वारा प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

    जगदलपुर, शौर्यपथ। गणतंत्र दिवस की 77वीं वर्षगांठ के अवसर पर बस्तर जिला पत्रकार संघ के नयापारा स्थित भवन में पूरे हर्षोल्लास के साथ ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी बस्तर के पत्रकारों ने स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस को गरिमामय वातावरण में मनाया। कार्यक्रम में बस्तर जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने ध्वजारोहण किया। इसके पश्चात उपस्थित पत्रकारों ने राष्ट्रगान गाकर तिरंगे को सलामी दी। इस अवसर पर अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का संविधान हमें मौलिक अधिकारों के साथ-साथ देश की रक्षा, सुरक्षा और विकास में योगदान देने का दायित्व भी सौंपता है। इसी भावना के साथ हम गणतंत्र दिवस को उत्साह और उल्लास से मनाते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य पत्रकार साथियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सभी पत्रकारों ने एकजुट होकर स्वच्छ, निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता की शपथ ली। साथ ही यह संकल्प भी लिया गया कि बस्तर के विकास के लिए उनकी कलम सदैव तत्पर रहेगी और नक्सलवाद के खात्मे एवं शांति स्थापना के लिए पत्रकार साथी शासन-प्रशासन के साथ मिलकर सकारात्मक भूमिका निभाते रहेंगे। इस अवसर पर प्रमुख रूप से पत्रकार नरेश कुशवाहा, सत्यनारायण पाठक,अनिल सामंत, गुप्तेश्वर सोनी, सुनील मिश्रा, शिव प्रकाश सीजी, धर्मेंद्र महापात्र, सुब्बा राव, निरंजन दास, प्रदीप गुहा, शिव कुमार शुक्ला, जीवानंद हालदार, दीपक पांडे, नवीन गुप्ता, बादशाह खान, कृष्णा झा, रविंद्र दास, धीरज मेहरा, अनिल राव, सुनील साहू, सुलोचना फुंडे, प्रियंका सामंत सहित कार्यालय स्टाफ धनसिंग, भूपेश ठाकुर एवं अन्य पत्रकार साथी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन देशभक्ति के जयघोष और बस्तर के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ हुआ।

    बस्तर में गरिमामय ढ़ंग से मनाया गया गणतंत्र दिवस

    जगदलपुर, शौर्यपथ। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरूण साव ने 77 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर जगदलपुर के लालबाग में आयोजित मुख्य समारोह में ध्वजारोहण कर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। इस अवसर पर उन्होंने गणतंत्र दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। गणतंत्र दिवस समारोह में जिला पुलिस बल, केंद्रीय अर्धसैनिक बल, नगर सेना, एनसीसी, स्काउट एवं गाइड्स आदि की 14 टुकड़ियों के द्वारा सलामी दी गई। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के जनता के नाम संदेश का वाचन किया। इस अवसर पर हर्ष और उल्लास के प्रतीक रंगीन गुब्बारे आसमान में छोड़े गए। बस्तर जिले में गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों के द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई और विभिन्न विभागों द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित झांकियों का प्रदर्शन किया गया।

         उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इस अवसर पर शहीद जवानों के परिजनों को शाॅल-श्रीफल भेंटकर उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के उत्कृष्ट अधिकारी-कर्मचारियों को पुरस्कृत किया गया। साथ ही सांस्कृतिक प्रस्तुति, उत्कृष्ट परेड और झांकी के विजेताओं को पुरस्कृत किए। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ बेवरेजेस काॅर्पोरेशन अध्यक्ष श्रीनिवास मद्दी, महापौर संजय पांडेय, नगर निमम सभापति खेमसिंह देवांगन, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष दिनेश कश्यप, उपाध्यक्ष श्रीनिवास मिश्रा, कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी, सीसीएफ आलोक तिवारी एवं सुश्री स्टायलो मण्डावी, सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीशगण, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन जगदलपुर अधिकारी प्रतीक जैन सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकगण और अधिकारी-कर्मचारी, स्कूली छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

    भिलाई | विशेष संवाददाता

    भिलाई ट्रक ट्रेलर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन, दुर्ग परिवहन विभाग एवं यातायात पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत आयोजित जागरूकता अभियान कार्यक्रम रविवार को लगातार तीसरे वर्ष भी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन भिलाई ट्रक ट्रेलर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के मुख्य कार्यालय, खुर्सीपार गेट, भिलाई में किया गया, जहां सड़क सुरक्षा को लेकर अनुकरणीय पहल देखने को मिली।

    कार्यक्रम के दौरान 250 से अधिक ड्राइवरों का स्वास्थ्य परीक्षण, 150 से अधिक लोगों की नेत्र जांच, तथा 100 से अधिक यूनिट रक्तदान कर सामाजिक सरोकार का मजबूत संदेश दिया गया। इसके साथ ही चालकों को यातायात नियमों की जानकारी, ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित मार्गदर्शन प्रदान किया गया। सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 100 से अधिक महिलाओं एवं 500 से अधिक पुरुषों को हेलमेट का वितरण किया गया, जो कार्यक्रम की सबसे प्रभावशाली उपलब्धियों में रहा।

    यातायात जागरूकता को जनमानस तक पहुंचाने के लिए नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया, जिसने सरल और प्रभावी संवाद के माध्यम से सुरक्षित ड्राइविंग, नियमों के पालन और जीवन की अहमियत का संदेश दिया। उपस्थित जनसमूह ने इस प्रस्तुति को सराहा।

    कार्यक्रम में अतिरिक्त परिवहन आयुक्त छत्तीसगढ़ श्री यू.बी.एस. चौहान, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी दुर्ग श्री एस. लकड़ा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्ग श्री सुखनंदन राठौर, उप पुलिस अधीक्षक भिलाई श्री सत्य प्रकाश तिवारी, टीआई (आरटीओ) दुर्ग श्री डगेश्वर सिंह राजपूत, टीआई (आरटीओ) दुर्ग श्रीमती अरुणा साहू एवं परिवहन निरीक्षक श्री एस.के. जांगड़े की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि सड़क सुरक्षा अभियान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि निरंतर जनजागरूकता का माध्यम होना चाहिए।

    भिलाई ट्रक ट्रेलर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री इंद्रजीत सिंह ने सभी अतिथियों, सहयोगी संस्थाओं एवं कार्यक्रम में शामिल ड्राइवर साथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा,

    “सड़क सुरक्षा केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। एक छोटी सावधानी भी किसी की जिंदगी बचा सकती है।”

    कार्यक्रम का सफल संचालन महासचिव श्री मलकीत सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं सदस्य, ड्राइवर साथी, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

    यह आयोजन न केवल सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता का उदाहरण बना, बल्कि सामाजिक सहभागिता और जिम्मेदार नागरिकता का भी सशक्त संदेश देकर गया।

    देशभक्तिपूर्ण कार्यक्रमों से गूंजा प्रेरणा कक्ष

    जगदलपुर, शौर्यपथ। गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर जिले के कलेक्टर आकाश छिकारा ने कलेक्टोरेट में ध्वजारोहण कर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्र गान और राष्ट्रीय गीत का गायन किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर आकाश छिकारा ने उपस्थित समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी के प्रतिमा में पुष्प अर्पित किया।

         कलेक्टोरेट में ध्वजारोहण के पश्चात प्रेरणा कक्ष में अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए देशभक्ति से ओत-प्रोत शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद सभी लोगों के भीतर राष्ट्रप्रेम की भावना को और प्रगाढ़ कर दिया। इस अवसर पर अपर कलेक्टर सीपी बघेल एवं प्रवीण वर्मा, सहायक कलेक्टर विपिन दुबे, संयुक्त कलेक्टर एआर राणा सहित डिप्टी कलेक्टर सुश्री हीरा गवर्ना और सुश्री नंदिनी साहू समेत अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

    शौर्यपथ राजनितिक /
    प्रयागराज में आयोजित माघी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि अब यह उत्तर प्रदेश की राजनीति का ऐसा केंद्र बन गया है, जहाँ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सत्ता, संगठन और संत-समाज के साथ संबंधों की गहन परीक्षा हो रही है। शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार, प्रशासनिक कार्रवाई और उसके बाद उभरे विरोधाभासी राजनीतिक संकेतों ने सरकार को एक जटिल चक्रव्यूह में खड़ा कर दिया है।
    शंकराचार्य बनाम प्रशासन: विवाद की जड़
    माघी मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद के पालकी यात्रा को लेकर प्रशासन और संत-समाज के बीच टकराव सामने आया। सरकार की ओर से शंकराचार्य पर “व्यवस्था बाधित करने” जैसे आरोप लगाए गए और लगातार नोटिस भेजे गए। इसके विपरीत, उसी प्रतिबंधित क्षेत्र में ‘सातवाँ बाबा’ का वाहन से प्रवेश—और उस पर किसी प्रकार की रोक-टोक या कार्रवाई का अभाव—प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
    संत-समाज में यह संदेश गया कि नियम सबके लिए समान नहीं हैं, और यही असंतोष का मूल बनता चला गया।
    संत-समाज में दरार, सनातन में विभाजन
    इस घटनाक्रम के बाद साधु-संत दो गुटों में बँटते दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर शंकराचार्य की पदवी और वैधता तक पर सवाल उठने लगे—जो किसी भी सरकार के लिए बेहद संवेदनशील स्थिति है।
    भारत के चार शंकराचार्यों में से कुछ का खुला समर्थन, तो कुछ का मौन—दोनों ही अलग-अलग अर्थों में देखा जा रहा है। जहाँ समर्थन स्पष्ट संदेश देता है, वहीं मौन को भी कहीं न कहीं समर्थन या रणनीतिक दूरी के रूप में व्याख्यायित किया जा रहा है।
    सरकार के भीतर दो स्वर
    सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सार्वजनिक रूप से शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद को बारंबार प्रणाम, सम्मान-स्नान और मामला समाप्त करने की अपील कर सरकार के भीतर मौजूद दो अलग-अलग दृष्टिकोणों को उजागर कर दिया।
    एक ओर मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रशासनिक सख्ती और नोटिस, दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री का नरम और समन्वयी रुख—यह विरोधाभास केवल संत-समाज ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया।
    केंद्रीय नेतृत्व का मौन और संगठनात्मक संकेत
    इस पूरे प्रकरण में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की चुप्पी भी कम अर्थपूर्ण नहीं है। न तो खुला समर्थन, न ही स्पष्ट असहमति—यह मौन कई तरह के राजनीतिक संदेश देता है।
    इसी क्रम में उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में पंकज चौधरी की नियुक्ति—जो कथित तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहली पसंद नहीं माने जाते—भी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक संतुलन और शक्ति-वितरण के संकेत देती है।
    2027 से पहले योगी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती
    यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि मामला केवल एक शंकराचार्य या एक मेला-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। यह सनातन समाज की भावनाओं, संतों के सम्मान, और सत्ता-संगठन के समीकरणों से जुड़ा व्यापक प्रश्न बन चुका है।
    यह भी चर्चा में है कि केशव प्रसाद मौर्य की दिल्ली से निकटता और योगी आदित्यनाथ की कथित बढ़ती दूरी, भविष्य की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।
    निष्कर्ष: परीक्षा की घड़ी
    माघी मेले में हुआ यह विवाद उत्तर प्रदेश सरकार के लिए चेतावनी संकेत है। यदि संत-समाज और आम सनातन अनुयायी स्वयं को उपेक्षित या भेदभाव का शिकार महसूस करते हैं, तो इसका प्रभाव सीधे विधानसभा चुनाव 2027 पर पड़ सकता है।
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है—
    क्या वे प्रशासनिक सख्ती, संत-सम्मान और संगठनात्मक संतुलन के बीच इस राजनीतिक चक्रव्यूह को तोड़ पाएँगे?
    या फिर यह घटनाक्रम आने वाले समय में उनकी सत्ता-यात्रा का सबसे कठिन मोड़ साबित होगा—यह निर्णय अब उनके अगले कदमों पर निर्भर करता है।
    नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
    कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी 2026 को सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार को सख्त शब्दों में कटघरे में खड़ा कर दिया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कर दिया कि कानून चुप्पी की इजाजत नहीं देता—अब सरकार को फैसला लेना ही होगा।
    दो सप्ताह का अल्टीमेटम
    सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर यह तय करने का निर्देश दिया है कि मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (मुकदमा चलाने) की मंजूरी दी जाएगी या नहीं। कोर्ट ने कहा कि यह कोई वैकल्पिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कानूनी दायित्व है।
    “पांच महीने से चुप्पी क्यों?”
    कोर्ट ने सरकार की देरी पर तीखी नाराजगी जताते हुए याद दिलाया कि विशेष जांच टीम (SIT) ने 19 अगस्त 2025 को ही अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके बावजूद सरकार द्वारा अब तक कोई निर्णय न लेना न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है। पीठ की टिप्पणी थी—
    “कानून आप पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी डालता है, और आपको फैसला लेना ही होगा।”
    माफी पर सख्त रुख
    मंत्री विजय शाह द्वारा दी गई माफी को सुप्रीम कोर्ट ने “मगरमच्छ के आँसू” बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अब माफी मांगने का समय निकल चुका है, और ऐसी टिप्पणियों को केवल औपचारिक खेद से ढका नहीं जा सकता।
    जांच का दायरा बढ़ा
    सुप्रीम कोर्ट ने SIT को यह भी निर्देश दिया कि जांच के दौरान सामने आई अन्य आपत्तिजनक टिप्पणियों की अलग से जांच कर रिपोर्ट दाखिल की जाए। यानी मामला अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहेगा।
    मामले की पृष्ठभूमि
    यह विवाद वर्ष 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सामने आया, जब एक सार्वजनिक सभा में मंत्री कुंवर विजय शाह ने सेना की ओर से मीडिया ब्रीफिंग कर रहीं कर्नल सोफिया कुरैशी के लिए “आतंकवादियों की बहन” जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया।
    इस पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।
    व्यापक संदेश
    इस पूरे घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट का रुख बेहद स्पष्ट है—
    सेना की गरिमा, महिला अधिकारियों का सम्मान और संवैधानिक मर्यादा किसी भी सूरत में राजनीतिक बयानबाज़ी की भेंट नहीं चढ़ाई जा सकती।
    अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि मध्य प्रदेश सरकार दो सप्ताह के भीतर कानून के अनुरूप साहसिक फैसला लेती है या फिर न्यायपालिका को एक बार फिर हस्तक्षेप करना पड़ता है।

     

    शौर्यपथ संपादकीय | दुर्ग

    दुर्ग में दूसरे प्रेस क्लब का गठन कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं है।
    यह न तो शौक का परिणाम है, न किसी साजिश का।
    बल्कि यह वर्षों से पनप रहे अहंकार, एकाधिकार और बंद दरवाज़ों वाली व्यवस्था के खिलाफ हुआ स्वाभाविक विस्फोट है।

    यह उस सोच का अंत है, जो स्वयं को पत्रकारिता का पर्याय और शेष सभी को नगण्य समझ बैठी थी।

    सवाल सीधा और असहज है—
    क्या पत्रकारिता किसी क्लब की बपौती है?
    क्या किसी पत्रकार की पहचान कुछ लोगों की मोहर से तय होगी?

    यदि जवाब “नहीं” है,
    तो फिर दुर्ग में वह स्थिति क्यों बनी, जहाँ राष्ट्रीय और प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकारों को भी बार-बार “पत्रकार” साबित करना पड़ा?


    पुराना प्रेस क्लब: अनुभव की ढाल या निजी हितों का किला?

    इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि पुराने प्रेस क्लब में अनुभव है, वरिष्ठता है और पत्रकारिता का इतिहास है।

    लेकिन जब यही वरिष्ठता—

    • नए पत्रकारों के लिए दीवार बन जाए

    • सदस्यता वर्षों तक लटकाई जाए

    • बैठकों से लोकतांत्रिक संवाद गायब हो जाए

    • और संगठन कुछ गिने-चुने लोगों की सुविधा व वसूली का माध्यम बन जाए

    तो सवाल उठना स्वाभाविक ही नहीं, आवश्यक हो जाता है।पत्रकारिता में सबसे खतरनाक नज़दीकी होती है— सत्ता से नहीं, आत्ममुग्धता से।


    “हम ही हम हैं” का झूठा नैरेटिव

    दुर्ग में वर्षों तक प्रशासन और राजनीतिक तंत्र के भीतर यह भ्रम बैठाया गया कि—“प्रेस क्लब मतलब यही लोग,इनके बाहर कोई पत्रकार नहीं।”

    यह भ्रम इतना गहरा था कि कई अवसरों पर अन्य पत्रकारों को सार्वजनिक रूप से नकारा गया,जबकि वे ज़मीनी पत्रकारिता कर रहे थेऔर बड़े मीडिया संस्थानों से जुड़े हुए थे।

    यह पत्रकारिता नहीं थी— यह सूचना पर कब्ज़े की मानसिकता थी।


    नया प्रेस क्लब: विद्रोह नहीं, विवशता

    नया प्रेस क्लब किसी सत्ता-समर्थित षड्यंत्र का परिणाम नहीं है। यह उन पत्रकारों की आख़िरी चुप्पी-तोड़ प्रतिक्रिया है,जिन्हें वर्षों तक यही सुनाया गया—
    “जगह नहीं है, नियम नहीं है, ज़रूरत नहीं है।”

    जब संगठन परिवार न रहे,तो नए घर बनते ही हैं।


    लेकिन एक कड़वा सच…

    यहाँ एक सच नए प्रेस क्लब के लिए भी उतना ही ज़रूरी है—पत्रकारिता जितनी बँटेगी,उतनी ही कमज़ोर होगी।दो प्रेस क्लब,दो मंच,दो ध्रुव—इस बंटवारे का सीधा लाभ पत्रकारों को नहीं, सत्ता और प्रशासन को मिलेगा।

    जो आज तालियाँ बजा रहे हैं,वही कल इसी विभाजन का इस्तेमाल पत्रकारों की आवाज़ दबाने में करेंगे।


    जिम्मेदारी दोनों की है

    • वरिष्ठ पत्रकारों की — कि संगठन को निजी जागीर न बनाएं

    • नए पत्रकारों की — कि विद्रोह मर्यादा से बाहर न जाए

    पत्रकारिता में न वरिष्ठ छोटा होता है,न कनिष्ठ कमज़ोर— कमज़ोर होती है केवल नीयत।


    आख़िरी सवाल (जो सबसे ज़रूरी है)

    क्या दुर्ग का पत्रकार क्लब से बड़ा बनेगा,या क्लब के नाम पर खुद को छोटा करता रहेगा? यदि पुराने प्रेस क्लब ने आत्ममंथन नहीं किया और नया प्रेस क्लब आत्मसंयम नहीं अपनाता—

    तो इतिहास साफ़ है—
    अहंकार से बना संगठन और जल्दबाज़ी से जन्मा विद्रोह,दोनों ही ज़्यादा देर तक नहीं टिकते। दुर्ग की पत्रकारिता आज चौराहे पर खड़ी है। अब फैसला पत्रकारों को करना है—

    ✒️ कलम एकजुट रखनी है
    या
    ✒️ क्लबों में बाँट देनी है।

     

    दुर्ग।
    तहसील साहू संघ दुर्ग द्वारा साहू सदन, केलाबाड़ी में कार्यकारिणी विस्तार एवं शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन गरिमामय एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में दुर्ग जिला साहू संघ के अध्यक्ष नंद लाल साहू तथा तहसील साहू संघ दुर्ग के अध्यक्ष पोषण साहू विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    समारोह के दौरान संगठन की नवगठित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को विधिवत शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर शैलेन्द्र कुमार साहू को तहसील साहू संघ दुर्ग का मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया। उन्हें संगठन की गतिविधियों, सामाजिक कार्यों एवं विचारों को समाज और जनमानस तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने समाज की एकता, संगठन की मजबूती और सामाजिक उत्थान के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। नवनियुक्त पदाधिकारियों ने समाजहित में निष्ठा, ईमानदारी और पूर्ण समर्पण के साथ अपने दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लिया।

    इस अवसर पर तहसील साहू संघ के पूर्व अध्यक्ष भीखम साहू, यतीश साहू सहित साहू समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने कार्यकारिणी विस्तार को संगठन को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम बताते हुए नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएँ दीं।

    समारोह उत्साहपूर्ण और सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

    रायपुर । छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में दशकों तक चले नक्सली हिंसा के अंधकार के बाद अब शांति, विश्वास और लोकतंत्र का उजास दिखाई देने लगा है। लंबे समय तक…

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