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March 09, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जीवनदीप समिति के अधीन पार्किंग ठेका, फिर भी नियमों की अनदेखी… पर्ची लेकर वापस लेना भी संदेह के घेरे में ?

दुर्ग।

देशभक्ति, राष्ट्रसेवा और सुशासन की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी को प्रदेश की जनता ने विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत देकर सरकार बनाने का अवसर दिया था। प्रदेश सरकार लगातार जनहित के कार्यों और सुशासन की प्रतिबद्धता का संदेश देती रही है, लेकिन दुर्ग जिला अस्पताल परिसर में चल रही वाहन पार्किंग व्यवस्था इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है।

जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल परिसर में वाहन पार्किंग का ठेका जीवनदीप समिति की अनुशंसा से दिया जाता है, जिसमें वर्तमान समय में भाजपा समर्थित समाजसेवियों की महत्वपूर्ण भूमिका है और इस समिति के प्रमुख जिला कलेक्टर होते हैं। इसके बावजूद अस्पताल परिसर में पार्किंग ठेकेदारों द्वारा आम जनता से निर्धारित शुल्क से दुगुनी-तिगुनी राशि वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

तय शुल्क कुछ और, वसूली कुछ और

जिला अस्पताल कार्यालय के प्रभारी स्टीवर्ड के अनुसार पार्किंग का ठेका गोपीनाथ मांडले के नाम पर है, जिसे प्रतिदिन लगभग ₹4100 की राशि जमा करनी होती है।

नियमों के अनुसार पार्किंग शुल्क इस प्रकार निर्धारित है—

दोपहिया वाहन : ₹5

चारपहिया वाहन : ₹15

लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत बताई जा रही है। अस्पताल आने वाले लोगों का कहना है कि

दोपहिया वाहन से ₹10

चारपहिया वाहन से ₹20 से ₹25 तक

की राशि खुलेआम वसूली जा रही है।

पर्ची देकर वापस ले लेना भी सवालों में

एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि पार्किंग ठेकेदार वाहन खड़ा करते समय पर्ची तो देते हैं, लेकिन वाहन निकालते समय वही पर्ची वापस ले लेते हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि पर्चियां ही वापस ले ली जाती हैं तो वास्तविक वसूली का रिकॉर्ड कैसे सुरक्षित रहेगा।

नियमों के अनुसार बोर्ड भी नहीं

जिला अस्पताल कार्यालय के प्रभारी स्टीवर्ड के मुताबिक पार्किंग स्थल पर शुल्क दरों का स्पष्ट बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है, लेकिन पूरे पार्किंग परिसर में ऐसा कोई बोर्ड दिखाई नहीं देता। इससे आम लोगों को निर्धारित शुल्क की जानकारी ही नहीं मिल पाती और ठेकेदार मनमाने तरीके से वसूली कर रहे हैं।

किसकी शह पर चल रही मनमानी?

यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जीवनदीप समिति, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद यदि पार्किंग ठेकेदार तय दर से अधिक वसूली कर रहे हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर उन्हें अंधेरे में रखा जा रहा है?

सुशासन के दावे और जमीनी हकीकत

प्रदेश सरकार समय-समय पर यह संदेश देती रही है कि आम जनता के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाल ही में विनायक ताम्रकार के निष्कासन जैसे उदाहरण भी सामने आए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी अनुशासन के मामले में सख्त रुख अपनाती है।

ऐसे में अब नजर इस बात पर टिकी है कि जिला अस्पताल की पार्किंग में हो रही कथित अतिरिक्त वसूली के मामले में जीवनदीप समिति, अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन किस तरह की जांच और कार्रवाई करते हैं।

सीसीटीवी और रिकॉर्ड से खुल सकती है सच्चाई

अस्पताल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और वाहनों के आवक-जावक का रिकॉर्ड भी मौजूद है। ऐसे में यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच करे तो वाहन मालिकों से पूछताछ और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक स्थिति आसानी से सामने आ सकती है।

अब देखना यह होगा कि जिला अस्पताल प्रबंधन और जीवनदीप समिति इस मामले की गंभीरता को समझते हुए अधिक वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करते हैं, या फिर यह मामला यूं ही दबा रहेगा और अस्पताल आने वाली आम जनता की जेब लगातार ढीली होती रहेगी।

विशेष लेख

छत्तीसगढ़ की पावन धरती ने समय-समय पर ऐसे महान व्यक्तित्वों को जन्म दिया है, जिन्होंने अपने कर्म, सेवा और त्याग से समाज को नई दिशा दी। इन्हीं महान विभूतियों में एक नाम अत्यंत श्रद्धा और सम्मान से लिया जाना चाहिए—महादानी दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल का।

4 अप्रैल 1876 को जन्मे दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल न केवल अपने समय के अत्यंत समृद्ध उद्यमी थे, बल्कि उससे कहीं बढ़कर वे समाज सेवा, परोपकार और मानव कल्याण के प्रतीक थे। आज भी रायपुर और आसपास के अनेक महत्वपूर्ण संस्थान उनकी दानशीलता के प्रमाण हैं, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि समय के साथ उनका नाम धीरे-धीरे जनस्मृति से ओझल होता चला गया।

डी.के. अस्पताल से जुड़ा नाम, लेकिन योगदान उससे कहीं बड़ा

रायपुर का प्रतिष्ठित डी.के. (दाऊ कल्याण) अस्पताल आज भी उनके नाम से जाना जाता है। बहुत से लोग उन्हें केवल इसी अस्पताल की जमीन के दानदाता के रूप में जानते हैं, जबकि उनकी दानशीलता का दायरा इससे कहीं अधिक विशाल था।

1944 में दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल ने डी.के. अस्पताल के लिए जमीन के साथ भवन निर्माण हेतु 1,25,000 रुपये नकद दान किए, जो आज के मूल्यांकन में लगभग 70 करोड़ रुपये के बराबर माने जाते हैं।

एम्स सहित कई संस्थानों की नींव में उनका योगदान

रायपुर में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भी उसी भूमि पर बना है, जिसे दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल ने समाज के हित में दान किया था। यह तथ्य उनकी दूरदर्शिता और समाज के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

शिक्षा और कृषि के क्षेत्र में भी उदार योगदान

दाऊ जी ने केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक ही अपने दान को सीमित नहीं रखा।

उन्होंने लभांडी क्षेत्र की जमीन के साथ कृषि महाविद्यालय और गरीब छात्रों के लिए छात्रावास निर्माण हेतु 1,12,000 रुपये दान किए, जो आज के मूल्य में लगभग 62 करोड़ रुपये के बराबर माने जाते हैं।

इसके अतिरिक्त उन्होंने—

टीबी अस्पताल के लिए 323 एकड़ भूमि दान की

बरोंडा ग्राम में कृषि अनुसंधान के लिए भूमि प्रदान की

भाटापारा में कृषि विज्ञान के लिए विशाल भूमि दान दी

धार्मिक और सामाजिक सेवा में भी अग्रणी

दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल की आस्था और सेवा भाव धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में भी दिखाई देता है।

उन्होंने रायपुर के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के संचालन हेतु पूरा खैरा गांव दान कर दिया।

भाटापारा में अकाल के समय लोगों की पीड़ा को देखते हुए उन्होंने “कल्याण सागर” जलाशय का निर्माण कराया, जिससे हजारों लोगों और पशुओं को पानी की सुविधा मिली।

पशु सेवा और ज्ञान के प्रसार में योगदान

भाटापारा में विशाल पशु चिकित्सालय का निर्माण

गरीबों और विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय की स्थापना

ये सभी कार्य इस बात का प्रमाण हैं कि दाऊ जी का दृष्टिकोण केवल तत्कालीन समाज तक सीमित नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के कल्याण की सोच से जुड़ा था।

छत्तीसगढ़ से बाहर भी उदार दान

उनकी परोपकारिता केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रही। देश के विभिन्न हिस्सों में भी उन्होंने जरूरत के समय उदारतापूर्वक सहयोग किया।

प्रमुख योगदानों में शामिल हैं—

नागपुर के लेडी इरविन अस्पताल के निर्माण में सहयोग

सेंट्रल महिला कॉलेज के निर्माण में प्रमुख दान

बिहार के भूकंप पीड़ितों के लिए सहायता

वर्धा की भीषण बाढ़ में उदार दान

अपने समय के अत्यंत समृद्ध उद्यमी

दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल अपने समय के अत्यंत संपन्न उद्यमियों में गिने जाते थे।

1937 में उन्होंने लगभग 70,000 रुपये का राजस्व भुगतान किया, जो आज की गणना में लगभग 39 करोड़ रुपये से अधिक के बराबर माना जा सकता है।

आज क्यों धुंधला पड़ गया यह नाम?

इतने विशाल और ऐतिहासिक योगदान के बावजूद आज यह विडंबना है कि छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी तो दूर, बहुत से लोग इस महान माटीपुत्र के नाम और कार्यों से परिचित भी नहीं हैं।

यह केवल इतिहास की भूल नहीं, बल्कि उस विरासत के प्रति हमारी उपेक्षा भी है जिसने इस प्रदेश की सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत नींव रखी।

स्मरण और सम्मान की आवश्यकता

आज आवश्यकता है कि छत्तीसगढ़ की जनता, सामाजिक संस्थाएं और सरकार मिलकर दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल जैसे महादानी व्यक्तित्वों को पुनः जनस्मृति में स्थापित करें।

क्योंकि किसी भी समाज की पहचान केवल उसकी वर्तमान उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उन महान व्यक्तियों से होती है जिन्होंने अपना सर्वस्व समाज के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।

दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल न केवल छत्तीसगढ़ के गौरव हैं, बल्कि वे भारतीय परोपकार की परंपरा के एक उज्ज्वल अध्याय भी हैं।

मृणेन्द्र चौबे
राजनांदगांव।शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त नीलू शर्मा आज पश्चिम बंगाल के पुरुलिया ज़िले के मानबाजार विधानसभा क्षेत्र में आयोजित परिवर्तन यात्रा (रथ यात्रा) में शामिल हुए। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की भीड़ उमड़ी और लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
नीलू शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण की नई दिशा देने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन यात्रा में कार्यकर्ताओं और नागरिकों का उत्साह इस बात का संकेत है कि पश्चिम बंगाल में अब बदलाव की मजबूत इच्छा दिखाई दे रही है और जनता भाजपा के विज़न को स्वीकार कर रही है।
उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन यात्रा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन का प्रतीक है। भाजपा का उद्देश्य प्रदेश में विकास, सुशासन और जनकल्याण की नई शुरुआत करना है।
कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र दुबे, पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो और वरिष्ठ नेत्री एवं पूर्व राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली सहित प्रदेश और जिला स्तर के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
मानबाजार विधानसभा में आयोजित परिवर्तन यात्रा ने यह संदेश दिया कि पश्चिम बंगाल अब बदलाव की राह पर आगे बढ़ रहा है और भाजपा के नेतृत्व में विकास का नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है।

शौर्यपथ महासमुन्द ब्यूरो संतराम कुर्रे
महासमुन्द / आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बागबाहरा टाउन हॉल में आयोजित परियोजना स्तरीय महिला जागृति शिविर एवं महिला सम्मेलन में सम्मिलित होकर क्षेत्र की माताओं, बहनों एवं बेटियों को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर तहसीलदार, स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, जनपद सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में क्षेत्र की मातृशक्ति उपस्थित रही।
इस दौरान अपने उद्बोधन में भीखम सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष जिला पंचायत महासमुंद ने कहा कि नारी शक्ति देश और समाज के समग्र विकास की आधारशिला है। महिलाओं का सशक्तिकरण केवल एक दिवस का विषय नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाला सामाजिक संकल्प है। जब महिलाएँ शिक्षित, आत्मनिर्भर और सुरक्षित होंगी तभी परिवार, समाज और राष्ट्र सशक्त बनेगा।
हम सभी का कर्तव्य है कि मातृशक्ति को सम्मान, समान अवसर और सुरक्षा प्रदान कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें, जिससे वे अपने सामर्थ्य और प्रतिभा से समाज को नई दिशा दे सकें।

महिला सरपंच ने लगाया धमकी और अभद्रता का आरोप, कार्रवाई की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीण पहुंचे बुंदेली चौकी

संतराम कुर्रे की रिपोर्ट 

पिथौरा/महासमुंद। जिले के पिथौरा क्षेत्र में रेत उत्खनन को लेकर विवाद तूल पकड़ता नजर आ रहा है। ग्राम कोड़ोपली की सरपंच सरिता राज सिंह दीवान ने आरोप लगाया है कि 26 फरवरी को गांव में रेत से जुड़े विवाद के दौरान एक व्यक्ति ने उनके साथ धक्का-मुक्की करते हुए अभद्र व्यवहार किया और जान से मारने की धमकी दी।

सरपंच के अनुसार, घटना के बाद उन्होंने और गांव की करीब 50 महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय तथा बुंदेली चौकी में लिखित शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कई दिनों बाद भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया।

इसी के विरोध में ग्राम भुरकोनी और आसपास के लगभग 100 ग्रामीण सरपंच के समर्थन में बुंदेली थाना पहुंचे और पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि आरोपी के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सरपंच सरिता राज सिंह दीवान ने कहा कि घटना के बाद से वे और गांव की महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं और प्रशासन से सुरक्षा तथा न्याय की मांग कर रही हैं।

वहीं, इस संबंध में चौकी प्रभारी ने बताया कि मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है और आगे की कार्रवाई एसडीओपी एवं संबंधित थाना स्तर से की जाएगी

एसडीओपी ने कहा कि शिकायत के आधार पर प्रक्रिया चल रही है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध रेत उत्खनन को लेकर क्षेत्र में पहले भी विवाद की स्थिति बन चुकी है और प्रशासन को इस पर प्रभावी नियंत्रण करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

महासमुंद से संतराम कुर्रे की खास रिपोर्ट 

पिथौरा/महासमुंद। पुराने सिक्कों से करोड़ों रुपये दिलाने का लालच देकर ठगी करने का एक मामला सामने आया है। पिथौरा विकासखंड के ग्राम बुंदेली निवासी यशवंत साहू ने आरोप लगाया है कि पूजा-पाठ कराने के बहाने घर आए एक व्यक्ति ने उन्हें चार लाख रुपये की ठगी का शिकार बना दिया।

इस संबंध में पीड़ित यशवंत साहू ने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस पिथौरा में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बताया कि उन्होंने वासुदेव महाराज नामक व्यक्ति को पूजा-पाठ कराने के लिए अपने घर बुलाया था। पूजा के दौरान घर में रखे पुराने सिक्कों को देखकर वासुदेव ने दावा किया कि वह इन सिक्कों के बदले करोड़ों रुपये दिलवा सकता है।

पीड़ित के अनुसार, इसी लालच में आकर उन्होंने वासुदेव महाराज को करीब चार लाख रुपये दे दिए। बाद में जब उन्होंने पैसे वापस मांगे तो आरोप है कि आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी।

यशवंत साहू ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी की है तथा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी भी मांगी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

कार्रवाई नहीं होने से आहत पीड़ित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शासन-प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


नकद, मोबाइल व ताश सहित 58,100 रुपये का मशरूका जब्त, जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई

    धमतरी। जिले में जुआ, सट्टा, अवैध शराब और अन्य अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए धमतरी पुलिस द्वारा लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत थाना अर्जुनी पुलिस ने ग्राम आमदी स्थित शराब दुकान के पीछे चल रहे जुआ फड़ पर दबिश देकर 09 जुआरियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, थाना अर्जुनी पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम आमदी की शराब दुकान के पीछे कुछ लोग ताश पत्ती के माध्यम से रूपये-पैसों का दांव लगाकर जुआ खेल रहे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी करते हुए दबिश दी।

दबिश के दौरान पुलिस ने मौके से 09 लोगों को सार्वजनिक स्थान पर 52 पत्ती ताश से जुआ खेलते हुए पकड़ा। आरोपियों के कब्जे से 23,100 रुपये नगद, 07 मोबाइल फोन (लगभग 35,000 रुपये) तथा ताश पत्ती जब्त की गई। जब्त मशरूका की कुल कीमत 58,100 रुपये आंकी गई है।

इस मामले में आरोपियों के विरुद्ध थाना अर्जुनी में अपराध क्रमांक 36/26 धारा 3(2) जुआ एक्ट के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई है।

गिरफ्तार जुआरियों के नाम:
शेखर साहू (33) निवासी भानपुरी,
द्वारिका साहू (26) निवासी आमदी,
टिमेश साहू (27) निवासी आमदी,
सोमेश्वर पटेल (30) निवासी पेण्डरवानी, जिला बालोद,
धनेश्वर चंदेल (42) निवासी पलारी, जिला बालोद,
टीकम महार (33) निवासी परसतराई,
गोकुल राम साहू (36) निवासी परसतराई,
पवन कुमार सतनामी (50) निवासी पलारी, जिला बालोद,
भूपेन्द्र सेन (27) निवासी रत्नाबांधा धमतरी।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में जुआ, सट्टा, अवैध शराब और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

   दुर्ग / शौर्यपथ / हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के शोधार्थी आदित्य नारंग को “दुर्ग संभाग के नगर निगम क्षेत्र में महिला स्वयं सहायता समूहों के विकास में बैंकिंग एवं नॉन-बैंकिंग साख की भूमिका का अध्ययन” विषय पर 2 मार्च 2026 को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
यह शोध कार्य डॉ. विजय कुमार वासनिक, सहायक प्राध्यापक, शासकीय कन्या महाविद्यालय दुर्ग के मार्गदर्शन तथा डॉ. एस.एन. झा, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (वाणिज्य), शासकीय विश्वनाथ यादव तमस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग के सह-निर्देशन में संपन्न हुआ।
आदित्य नारंग के पिता श्री आलोक कुमार नारंग दुर्ग जिला कलेक्ट्रेट में लंबे समय तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे हैं। वे कलेक्टर रीडर तथा जिला नाजिर जैसे पदों से सेवानिवृत्त हुए हैं और वर्तमान में दुर्ग में ही निवासरत हैं।
अपने शोध में आदित्य नारंग ने दुर्ग संभाग के नगरीय क्षेत्रों में कार्यरत महिला स्वयं सहायता समूहों के विकास में एनबीएफसी (नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों) द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली साख की भूमिका का अध्ययन किया है। शोध में यह बताया गया है कि महिला स्वयं सहायता समूहों को एनबीएफसी के माध्यम से अपेक्षाकृत सुलभ ऋण सुविधा प्राप्त होती है, जिसका उनके व्यवसाय और आर्थिक सशक्तिकरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अध्ययन में परंपरागत बैंकिंग प्रणाली और एनबीएफसी द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली साख व्यवस्था के बीच के अंतर, उससे जुड़ी समस्याओं तथा उनके संभावित समाधानों पर भी प्रकाश डाला गया है। शोध में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन व्यवस्थाओं का नगर निगम क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों के व्यवसायिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह अध्ययन शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए नई संभावनाएं प्रस्तुत करता है।
शोधार्थी की मौखिक परीक्षा (वाइवा-वोसे) हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के टैगोर हॉल में आयोजित की गई। इस अवसर पर बाह्य परीक्षक के रूप में प्रो. उमेश होलानी, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर (मध्यप्रदेश) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में आंतरिक परीक्षक डॉ. विजय कुमार वासनिक, डॉ. एस.एन. झा, विश्वविद्यालय पीएचडी प्रभारी डॉ. सुनीता मिश्रा, प्राचार्य डॉ. रंजना श्रीवास्तव सहित डॉ. अनिल जैन, डॉ. के.एल. राठी, डॉ. शकील हुसैन, डॉ. एच.पी. सिंह सलूजा, डॉ. आर.पी. अग्रवाल, डॉ. सुमित अग्रवाल, डॉ. प्रदीप कुमार जांगड़े, डॉ. लाली शर्मा, डॉ. प्रीति तन्ना टांक, डॉ. हरीश कश्यप सहित अनेक प्राध्यापक, अतिथि व्याख्याता एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
पीएचडी की उपाधि प्राप्त होने पर आदित्य नारंग ने अपने मार्गदर्शकों, विश्वविद्यालय परिवार, सहयोगियों, शुभचिंतकों और परिवारजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के सहयोग और विश्वास का परिणाम है, जिनसे उन्हें समाज के लिए कार्य करने की प्रेरणा मिली।

  रायपुर / शौर्यपथ / बृहस्पति धुर्वे बताती है कि यदि स्वयं की मेहनत, सही मार्गदर्शन और शासन की योजनाओं का सहयोग मिल जाए, तो साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी कोई महिला सफलता और आत्मनिर्भरता की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है। कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाली पेन्ड्रा-गौरेला-मरवाही जिला के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सधवानी की श्रीमती बृहस्पति धुर्वे आज पूरे क्षेत्र में “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं।
कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के सहयोग से बृहस्पति धुर्वे ने अपने जीवन की दिशा बदल दी और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में संचालित ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर बृहस्पति धुर्वे ने महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से अपने सपनों को साकार करने की शुरुआत की। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला, जिससे उन्होंने ऑयस्टर मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया। शुरुआत में यह काम छोटे स्तर पर था, लेकिन मेहनत और लगन से धीरे-धीरे उनका उत्पादन बढ़ता गया। मशरूम उत्पादन के साथ-साथ उन्होंने सब्जी-भाजी की खेती भी शुरू की, जिससे उनकी वार्षिक आय लगभग डेढ़ से 2 लाख रुपए तक हो जाती है। आज उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि वह आर्थिक रूप से सशक्त बन चुकी हैं और अपने परिवार की जरूरतों को आत्मविश्वास के साथ पूरा कर रही हैं।

बृहस्पति धुर्वे बताती हैं कि शासन की अनेक योजनाओं का लाभ भी उन्हें मिला है। उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत रसोई गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान तथा पीडीएस योजना से 35 किलो निःशुल्क चावल की सुविधा भी प्राप्त हो रही है। इन योजनाओं ने उनके परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की है। आज बृहस्पति धुर्वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। वह अपने अनुभव साझा करते हुए आसपास की महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देती हैं और उन्हें भी स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करती हैं। समूह के माध्यम से ऋण लेकर उन्होंने अपने उत्पादों के विक्रय के लिए एक दुकान भी बनवाई है, जहाँ भविष्य में मशरूम और अन्य उत्पाद बेचकर अपनी आय को और बढ़ाने की योजना है।

   रायुपर / शौर्यपथ / श्रीमती सगो तेता स्व-सहायता समूह और बिहान से जुड़कर न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि अपने स्वाभिमान और आत्मविश्वास को भी नई पहचान दी है। आज कांकेर जिला के गांव ग्राम गढ़पिछवाड़ी की अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं। श्रीमती तेता ने अपनी इस सफलता का श्रेय भारत सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना और छत्तीसगढ़ शासन की पहल बिहान को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और ‘लखपति दीदी’ बनने का अवसर प्रदान किया है। बिहान योजना ने श्रीमती सगो तेता के जीवन में नवा बिहान ला दिया।

श्रीमती सगो तेता ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पृथक् पहचान बना चुकी
कुछ कर गुजरने का जुनून और उस इच्छाशक्ति को शासन की छोटी सी मदद मिल जाए, तो कामयाबी की बुलंदी को फर्श से अर्श तक पहुंचने में देर नहीं लगती। कांकेर जिले की महिलाएं शासन के सहयोग से प्रशिक्षण तथा सहायता प्राप्त कर अपने हुनर को अंजाम दे रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गढ़पिछवाड़ी की आदिवासी महिला श्रीमती सगो तेता आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पृथक् पहचान स्थापित कर चुकी हैं। उनकी कामयाबी यह साबित करती है कि मेहनत, लगन, आत्मविश्वास और उचित अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी खुद के दम पर अपने समूह, परिवार और समाज के लिए मिसाल कायम कर सकती हैं।

समूह ने बढाया आगे श्रीमती सगो को
एक समय था जब आर्थिक तंगी के कारण श्रीमती सगो को छोटी-छोटी जरूरतों को पूरी करने के लिए भी दूसरों का मुंह ताकना पड़ता था। आजीविका के एकमात्र साधन के रूप में खेती-बाड़ी तो थी, लेकिन सीमित संसाधनों और पारंपरिक तरीकों के कारण आय बहुत कम होती थी। वहीं बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों की चिंता उन्हें अक्सर परेशान करती थी। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की जानकारी मिली। इससे प्रेरित होकर सगो बाई ने गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर गायत्री स्व-सहायता समूह बनाया, जिसमें 10 महिलाएं शामिल हैं।

खेतों में द्विफसली सिंचाई की मिली सुविधा
समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बिहान के अंतर्गत 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश राशि प्राप्त हुई, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दे दी। श्रीमती सगो तेता बताती हैं कि पहले उनके खेत में मोटरपंप (बोरवेल) नहीं था, जिसके कारण खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी और साल में धान की केवल एक ही फसल ले पाती थीं। फिर उन्होंने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर अपने खेत में बोर करवाया, जिससे अब उन्हें सिंचाई की सुविधा मिल गई है। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अब वे अपने खेतों में साल में दोनों फसलें (खरीफ और रबी) ले रही हैं, जिससे उनकी आय में काफी वृद्धि हुई है।

आजीविकामूलक गतिविधियों ने बनाई लखपति दीदी
इसके साथ ही सगो बाई ने कई आजीविकामूलक गतिविधियां भी शुरू कीं। उन्होंने मशरूम पालन, छेना (कंडा) निर्माण, गोबर से जैविक खाद तैयार करना, रुई से तकिये बनाना, सब्जी उत्पादन, ईंट निर्माण और कपड़ों के विक्रय जैसे कार्य प्रारंभ किए। उनकी सतत् मेहनत रंग लाई और आज वे इन अलग-अलग गतिविधियों से प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इसी निरंतर आय और बचत के कारण पूरे क्षेत्र में वह आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जा रही हैं।

जीवन में आया बड़ा बदलाव, महतारी वंदन योजना का भी मिल रहा लाभ
लखपति दीदी श्रीमती सगो तेता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। इसी आय के सहारे उन्होंने अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई करवाई, साथ ही अपने दो बच्चों की शादी भी करवा ली है। इसके बाद अब वे अपनी आजीविका से होने वाली आय से अपनी छोटी बेटी की शादी करने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह महतारी वंदन योजना का भी लाभ ले रही हैं, जिससे मिली रकम को वह बेटी के विवाह में किसी बड़े खर्च के लिए बचत कर रही हैं।

  
साभार - धनंजय राठौर, सयुक्त संचालक,
ताराशंकर सिन्हा, सहायक संचालक जनसंपर्क

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