November 06, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    धनतेरस पर जमीनी हकीकत ने प्रेस विज्ञप्तियों की चमक उतारी; संभावित अग्निकांड का खतरा बरकरार, पुराना बस स्टैंड में वाहन मेला लगने से पार्किंग व्यवस्था भी बदहाल दुर्ग। दीपावली से…

    दिवाली से पहले छत्तीसगढ़ के युवाओं को मिला सुनहरा अवसर

    छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल पहली बार आयोजित करेगा भर्ती परीक्षा

    रायपुर, 05 नवम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने युवाओं को रोजगार का बड़ा अवसर दिया है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल ने समूह-2, तृतीय श्रेणी (स्नातकोत्तर एवं स्नातक स्तर), उपसमूह-02 के अंतर्गत विभिन्न विभागों के 1,703 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। मंडल द्वारा इन पदों के लिए पहली बार लिखित भर्ती परीक्षा आयोजित की जाएगी।

    भर्ती में सहायक ग्रेड-3 के 1,206 पद, सहायक उप निरीक्षक (जिला इकाई संवर्ग) के 279 पद, शीघ्रलेखक (हिंदी) के 30, उप निरीक्षक-अ (शीघ्रलेखक, सामान्य शाखा) के 34, स्टेनो टाइपिस्ट के 23, डाटा एंट्री ऑपरेटर के 25, शीघ्रलेखक (द्विभाषी) के 13, पंजीयक लिपिक के 50, सहायक उप निरीक्षक-अ (सामान्य शाखा) के 40 और शीघ्रलेखक (अंग्रेजी) के 3 पद शामिल हैं।

    ऑनलाइन आवेदन 5 नवम्बर से शुरू हो गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 27 नवम्बर 2026, शाम 5 बजे तक है। आवेदन में त्रुटि सुधार 28 से 30 नवम्बर तक शाम 5 बजे तक किया जा सकेगा।

    लिखित परीक्षा 10 जनवरी 2027 को सुबह 10 से दोपहर 12:15 बजे तक आयोजित होगी। प्रवेश पत्र 4 जनवरी 2027 से मंडल की वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे। परीक्षा पांच संभागीय मुख्यालयों में होगी।

    छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी अभ्यर्थियों, जो परीक्षा में उपस्थित होंगे, को परीक्षा शुल्क नियमानुसार उसी बैंक खाते में वापस किया जाएगा, जिससे शुल्क का भुगतान किया गया है। भर्ती से संबंधित विस्तृत जानकारी और आवेदन के लिए अभ्यर्थी मंडल की वेबसाइट https://cgssb.cgstate.gov.in पर जा सकते हैं।

    अहिवारा के शासकीय महाविद्यालय का नामकरण स्वर्गीय श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के नाम पर करने की घोषणा

    समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित रहा गुरुजी का जीवन : मुख्यमंत्री साय

    स्वर्गीय श्री कोर्सेवाड़ा का सरल व्यक्तित्व, जनसेवा के प्रति समर्पण और सामाजिक योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा : मुख्यमंत्री साय

    रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में अहिवारा के दिवंगत विधायक स्वर्गीय श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने अहिवारा स्थित शासकीय महाविद्यालय का नामकरण स्वर्गीय श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के नाम पर करने की घोषणा की।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वर्गीय श्री कोर्सेवाड़ा का निधन छत्तीसगढ़ के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। वे एक सरल, सहज, मृदुभाषी और मिलनसार जनप्रतिनिधि थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज की सेवा और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। विशेष रूप से अनुसूचित जाति समाज के विकास, सामाजिक सशक्तीकरण और क्षेत्र की प्रगति में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वर्गीय श्री कोर्सेवाड़ा को लोग आत्मीयता के साथ 'गुरुजी' कहकर संबोधित करते थे। यह संबोधन उनके प्रति समाज के गहरे सम्मान और विश्वास का प्रतीक था। उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यों से लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाया था। जनसेवा के प्रति उनकी निष्ठा और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वर्गीय श्री कोर्सेवाड़ा के साथ जुड़े आत्मीय प्रसंगों को साझा करते हुए बताया कि जब वे उपचार के लिए हैदराबाद में भर्ती थे, तब उन्होंने स्वयं फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। साथ ही प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल को भी हैदराबाद जाकर उनका हाल-चाल जानने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके स्वस्थ होकर लौटने की हम सभी को आशा थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनका जाना हम सभी के लिए अत्यंत पीड़ादायक है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वर्गीय श्री कोर्सेवाड़ा ने जनप्रतिनिधि के रूप में सदैव क्षेत्र के विकास और आमजन की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी। उनकी स्मृतियों और जनसेवा की विरासत को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए अहिवारा के शासकीय महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर किया जाएगा। यह उनके प्रति प्रदेश सरकार और क्षेत्र की जनता की ओर से सम्मानपूर्ण श्रद्धांजलि होगी।

    श्रद्धांजलि सभा में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, कौशल विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल और जगदलपुर विधायक श्री किरण देव ने भी स्वर्गीय श्री कोर्सेवाड़ा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    इस अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधायक श्री ललित चन्द्राकर, जनपद पंचायत पाटन की अध्यक्ष श्रीमती कीर्ति नायक, कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। सभी ने स्वर्गीय श्री कोर्सेवाड़ा को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके योगदान को नमन किया।

     

    बीएलसी घटक में स्वीकृत आवासों की संख्या बढ़कर 60,623 हुई, एएचपी के 15,463 आवासों सहित अब तक कुल 76,086 आवासों को केंद्र की मंजूरी

    रायपुर / शौर्यपथ। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के शहरी जरूरतमंद परिवारों को दीपावली पर पक्के मकानों की सौगात मिली है। भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) घटक के तहत प्रदेश के 27 जिलों के 84 नगरीय निकायों में 4,670 नए आवासों को स्वीकृति प्रदान की है। इस मंजूरी के साथ ही योजना के बीएलसी एवं भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी) घटकों में अब तक कुल 76,086 हितग्राहियों के आवास स्वीकृत हो चुके हैं।

    बीएलसी में 60,623 और एएचपी में 15,463 आवास स्वीकृत

    योजना के तहत इस नई स्वीकृति से पहले केंद्र सरकार द्वारा बीएलसी घटक में 55,953 तथा एएचपी घटक में 15,463 आवासों को मंजूरी दी जा चुकी थी। दोनों घटकों को मिलाकर यह संख्या 71,416 थी। अब बीएलसी घटक में 4,670 नए आवासों की स्वीकृति के बाद इसकी कुल संख्या बढ़कर 60,623 हो गई है। वहीं एएचपी घटक के 15,463 आवासों को शामिल करने पर कुल स्वीकृत आवासों का आंकड़ा 76,086 तक पहुंच गया है।

    केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से शहरी क्षेत्रों के पात्र जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दीपावली के अवसर पर मिली यह स्वीकृति उन परिवारों के लिए विशेष महत्व रखती है, जो लंबे समय से अपने स्वयं के पक्के मकान का सपना संजोए हुए हैं।

    हर पात्र परिवार को पक्का आवास दिलाना सरकार की प्रतिबद्धता : मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 4,670 नए आवासों की स्वीकृति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी लाभार्थी परिवारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ में तेजी से साकार किया जा रहा है। राज्य सरकार प्रत्येक पात्र परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपावली पर मिली यह सौगात शहरी गरीब परिवारों के लिए केवल मकान निर्माण का अवसर नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    84 नगरीय निकायों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश : उप मुख्यमंत्री अरुण साव

    उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने नए आवासों की स्वीकृति को नगरीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने सभी 84 संबंधित नगरीय निकायों को हितग्राही परिवारों को आवास निर्माण में हरसंभव सहयोग देने और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

    श्री साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ के हर शहरी गरीब परिवार को अपना घर मिले, यही राज्य सरकार का लक्ष्य है। योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराने के प्रयास लगातार जारी हैं। दीपावली पर 4,670 नए आवासों की स्वीकृति से इन परिवारों के अपने आशियाने के सपने को आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

    परचनपाल की हस्तकला को दीपावली पर मिल रही नई पहचान, 40 से 50 प्रकार के इको-फ्रेंडली उत्पादों की बढ़ी मांग

    2004 में प्रशिक्षण से शुरू किया सफर, अब एक हजार से अधिक ग्रामीण महिलाओं को सिखा चुकी हैं हुनर

    रायपुर / शौर्यपथ। दीपावली का पर्व जहां घरों को रोशनी और खुशियों से सजाने का अवसर लेकर आता है, वहीं बस्तर जिले के परचनपाल गांव की हस्तशिल्प कलाकार श्रीमती शोभा बघेल के लिए यह स्थानीय कला, मेहनत और आत्मनिर्भरता को नई पहचान दिलाने का अवसर बन गया है। उनके हाथों से सीसल के प्राकृतिक रेशों से तैयार आकर्षक बैग, टेबल मैट, दीवार सज्जा और सजावटी उत्पाद इस त्योहारी मौसम में लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। पर्यावरण के अनुकूल इन हस्तनिर्मित कलाकृतियों की बढ़ती मांग ने बस्तर की पारंपरिक हस्तकला को बाजार में नई पहचान दिलाई है।

    सीसल के प्राकृतिक रेशों से तैयार हो रहीं 50 प्रकार की कलाकृतियां

    श्रीमती शोभा बघेल ने सीसल के मजबूत प्राकृतिक रेशों को अपनी रचनात्मकता और हुनर से उपयोगी एवं आकर्षक हस्तशिल्प उत्पादों का रूप दिया है। उनके द्वारा लगभग 40 से 50 प्रकार की कलाकृतियां तैयार की जाती हैं, जिनमें बैग, टेबल मैट, दीवार सज्जा और उपहार में देने योग्य सजावटी वस्तुएं शामिल हैं। इनकी विशेषता प्राकृतिक सामग्री से निर्मित होना, टिकाऊपन और आकर्षक हस्तनिर्मित डिजाइन है।

    उनके उत्पादों को चित्रकोट, शबरी एम्पोरियम, राज्योत्सव और सरस मेलों जैसे प्रमुख मंचों पर बाजार मिला है। इसके अलावा बड़ी संख्या में ग्राहक सीधे उनके घर पहुंचकर भी उत्पाद खरीद रहे हैं। हस्तशिल्प से उन्हें प्रतिमाह लगभग 15 से 20 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है।

    2004 में प्रशिक्षण से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर

    शोभा बघेल की इस उपलब्धि के पीछे वर्षों का परिश्रम और हुनर को निखारने की लगन है। उनके हस्तशिल्प सफर की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई, जब उन्होंने हस्तशिल्प विकास बोर्ड से सीसल के रेशों से उत्पाद तैयार करने का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।

    प्रशिक्षण के बाद उन्होंने इस कला को स्वरोजगार का माध्यम बनाया। धीरे-धीरे उनके उत्पादों को पहचान मिलने लगी और स्थानीय बाजार से निकलकर विभिन्न प्रदर्शनियों एवं मेलों तक उनकी पहुंच बनी। आज उनका यह प्रयास न केवल उनकी पारिवारिक आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि बस्तर की स्थानीय हस्तकला को भी प्रोत्साहित कर रहा है।

    एक हजार से अधिक ग्रामीण महिलाओं को दिया स्वरोजगार का हुनर

    शोभा बघेल की उपलब्धि का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि उन्होंने अपने हुनर को केवल व्यक्तिगत आय तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने ग्रामीण अंचलों की एक हजार से अधिक महिलाओं को सीसल शिल्प का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया है।

    उनकी इस पहल से अनेक ग्रामीण महिलाओं को अपनी रचनात्मक क्षमता पहचानने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। इस तरह शोभा बघेल स्वयं आगे बढ़ने के साथ दूसरी महिलाओं के लिए भी रोजगार और स्वावलंबन की राह तैयार कर रही हैं।

    वोकल फॉर लोकल से स्थानीय कारीगरों के घरों में पहुंचेगी खुशहाली

    त्योहारी मौसम में अपने उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच शोभा बघेल ने नागरिकों से स्थानीय हस्तशिल्प और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की है। उनका कहना है कि त्योहारों पर स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार वस्तुओं की खरीदारी करने से हमारी पारंपरिक कला को सम्मान मिलता है और मेहनतकश शिल्पकारों के परिवारों को आर्थिक संबल भी मिलता है।
    बस्तर की शोभा बघेल की यह पहल प्रधानमंत्री के 'वोकल फॉर लोकल' के संदेश को जमीनी स्तर पर साकार करने के साथ महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण स्वरोजगार की संभावनाओं को भी सामने लाती है। दीपावली के अवसर पर उनके सीसल शिल्प की बढ़ती मांग इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय हुनर, उचित अवसर और मेहनत के मेल से ग्रामीण कला को नई पहचान और आजीविका का मजबूत आधार मिल सकता है।

    मास्टर ट्रेनर्स के प्रथम बैच का प्रशिक्षण संपन्न, 16 से 19 नवंबर तक दूसरे बैच का प्रशिक्षण; छत्तीसगढ़ में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक घर-घर होगी जनगणना

    रायपुर / शौर्यपथ। देश की जनगणना-2027 के दूसरे चरण की तैयारियों को लेकर छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक स्तर पर प्रशिक्षण प्रक्रिया तेज कर दी गई है। राज्य में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनगणना का मैदानी कार्य किया जाएगा। इस दौरान प्रगणक घर-घर पहुंचकर परिवारों के सदस्यों की गणना करेंगे। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए प्रदेशभर में लगभग 66 हजार प्रगणक एवं पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे। इनके प्रशिक्षण की जिम्मेदारी 1,120 फील्ड ट्रेनर्स को सौंपी गई है।

    मास्टर ट्रेनर्स के प्रथम बैच का चार दिवसीय प्रशिक्षण पूरा

    जनगणना के दूसरे चरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित एवं त्रुटिरहित बनाने के लिए नवा रायपुर अटल नगर स्थित प्रशासन अकादमी में मास्टर ट्रेनर्स का राज्यस्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण दो बैचों में निर्धारित किया गया है। प्रथम बैच का चार दिवसीय प्रशिक्षण 2 नवंबर से प्रारंभ होकर 5 नवंबर को संपन्न हुआ।

    इस प्रशिक्षण के लिए जिलों से 47 तथा जनगणना कार्य निदेशालय से 13 सहित कुल 60 मास्टर ट्रेनर्स नामित किए गए हैं। इन्हें छत्तीसगढ़ के लिए नियुक्त राष्ट्रीय प्रशिक्षक एवं संयुक्त निदेशक अशोक मिश्र तथा प्रदीप कुमार साव ने प्रशिक्षण प्रदान किया।

    16 जिलों के मास्टर ट्रेनर्स ने लिया प्रशिक्षण

    प्रथम बैच में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, सरगुजा, जशपुर, रायगढ़, कोरबा, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, मुंगेली, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, बलौदाबाजार-भाटापारा और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई सहित 16 जिलों के मास्टर ट्रेनर्स शामिल हुए।

    प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जनगणना के दूसरे चरण की कार्यप्रणाली, प्रश्नावली भरने की प्रक्रिया, प्रगणना की तकनीकी बारीकियों, मोबाइल एप्लीकेशन के उपयोग, आंकड़ों के संकलन और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई। व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें जिला स्तर पर फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करने के लिए तैयार किया गया।

    16 से 19 नवंबर तक दूसरे बैच का प्रशिक्षण

    मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण की अगली कड़ी में दूसरा बैच 16 से 19 नवंबर 2026 तक प्रशासन अकादमी, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित होगा। इस बैच को भी राष्ट्रीय प्रशिक्षक अशोक मिश्र एवं प्रदीप कुमार साव प्रशिक्षण देंगे।

    इसके बाद प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स जिला स्तर पर फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षण देंगे। फील्ड ट्रेनर्स आगे प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। इस प्रकार बहुस्तरीय प्रशिक्षण व्यवस्था के माध्यम से प्रदेश के सभी जनगणना कार्यकर्ताओं को मैदानी जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाएगा।

    पहला चरण पूरा, अब दूसरे चरण में होगी घर-घर गणना

    उल्लेखनीय है कि जनगणना-2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य छत्तीसगढ़ में 1 से 30 मई 2026 तक सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। अब दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति की गणना सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है।

    यह प्रशिक्षण भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय, नई दिल्ली के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। इसमें जनगणना की राज्य नोडल अधिकारी एवं गृह विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारीक तथा जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ के निदेशक कार्तिकेया गोयल के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही की जा रही है।

    जनगणना-2027 का दूसरा चरण प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति की गणना सुनिश्चित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसके लिए प्रशिक्षण में तकनीकी दक्षता, आंकड़ों की शुद्धता, समयबद्धता और कार्य के प्रति जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि निर्धारित समयावधि में जनगणना का मैदानी कार्य व्यवस्थित एवं त्रुटिरहित ढंग से पूरा किया जा सके।

    खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के दिए निर्देश, बस्तर में विकास कार्यों पर विशेष जोर

    रायपुर, /राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास और वहां के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार के लिए किया जाना चाहिए। इसके तहत पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए सुनियोजित कार्ययोजना तैयार करने के साथ पर्यावरणविदों का भी सहयोग लिया जाए।

    राज्यपाल श्री डेका आज लोक भवन में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की गतिविधियों, खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों तथा आगामी पांच वर्षों की कार्ययोजना के संबंध में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने डीएमएफ की राशि के प्रभावी और सुनियोजित उपयोग के लिए कम से कम दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए डीएमएफ से आवश्यक कार्य किए जाएं। साथ ही उद्योगों से चर्चा कर पर्यावरणीय मानकों और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को अभियान के रूप में संचालित करने पर उन्होंने जोर दिया।

    वैज्ञानिक तरीके से हो रेत का उत्खनन

    राज्यपाल ने नदियों से रेत उत्खनन के संबंध में वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि रेत रहेगी तो पानी रहेगा और पानी रहेगा तो रेत रहेगी। रेत खदानों में वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन को लेकर विशेष अभियान चलाने की बात भी कही।

    जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करें डीएमएफ की कार्ययोजना

    राज्यपाल ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे आम जनता से संवाद करें और उनकी आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं को समझें। इसके अनुरूप डीएमएफ की कार्ययोजना तैयार की जाए। विकास कार्यों के क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों को भी विश्वास में लेना आवश्यक है। प्रशासन को जनता के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए और उन्हें स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कौन से कार्य किए जा सकते हैं तथा किन कार्यों को करना संभव नहीं है। उन्होंने डीएमएफ की नियमित बैठकें आयोजित करने को कहा, ताकि कार्यों की प्रगति की समीक्षा और आवश्यक निर्णय समय पर लिए जा सकें।

    खनन प्रभावित क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएं

    राज्यपाल ने कहा कि डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक कल्याण और विकास से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन विशेष उद्देश्यों के लिए डीएमएफ के अंतर्गत कार्य निर्धारित किए जाते हैं, उन कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाना चाहिए।

    राज्यपाल ने बस्तर क्षेत्र में डीएमएफ के माध्यम से विकास कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो लोग मुख्यधारा में लौट आए हैं, उन्हें शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। उनके पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और जीवन स्तर में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि वे विकास की प्रक्रिया से जुड़ सकें।

    विशेष पिछड़ी जनजातियों के स्वास्थ्य और जीवनशैली पर दें ध्यान

    राज्यपाल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों के कल्याण पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने इन जनजातीय समुदायों के लिए विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करने तथा स्वास्थ्य एवं जीवनशैली में सुधार के लिए जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन समुदायों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जाएं और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।

    राज्यपाल ने कहा कि मनरेगा की तर्ज पर डीएमएफ के कार्यों में भी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाना चाहिए। इसके साथ ही निर्मित परिसंपत्तियों के भौतिक सत्यापन पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि यह पता चल सके कि स्वीकृत कार्यों का वास्तविक क्रियान्वयन हुआ है और उनसे क्षेत्र के लोगों को लाभ मिल रहा है।

    विस्थापित परिवारों को योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश

    राज्यपाल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में विस्थापित हुए लोगों के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से विस्थापित परिवारों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि प्रभावित और विस्थापित परिवारों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए उनके लिए संचालित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

    बैठक में खनिज विभाग के सचिव श्री पी दयानंद ने राज्यपाल को डीएमएफ की गतिविधियों और कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीएमएफ पोर्टल 2.0 के माध्यम से प्रत्येक परियोजना और कार्य की जानकारी उपलब्ध है। पोर्टल के जरिए कार्यों की स्थिति और प्रगति की निगरानी भी की जा रही है।

    बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, खनिज विभाग के अधिकारी तथा खनन प्रभावित विभिन्न जिलों के कलेक्टर उपस्थित थे।

    9 करोड़ 41 लाख रुपये का पारिश्रमिक सीधे बैंक खातों में अंतरित

    बुनकरों और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार देकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना हमारी प्राथमिकता : मंत्री श्री गजेन्द्र यादव

    रायपुर / दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले छत्तीसगढ़ के बुनकरों और सिलाई कार्य से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप और ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेन्द्र यादव के विशेष निर्देशों के तहत, राज्य सरकार ने बुनकर सहकारी समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को उनके श्रम का पारिश्रमिक जारी कर दिया है। इसके तहत कुल 9 करोड़ 41 लाख रुपये की राशि आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई है। समय पर भुगतान होने से इन परिवारों में दीवाली की खुशियां और अधिक दोगुनी हो गई हैं।

    समय पर भुगतान से मजबूत हो रहा स्थानीय हुनर- मंत्री श्री गजेन्द्र यादव

    ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने इस संबंध में प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों के कठिन परिश्रम का समय पर पारिश्रमिक भुगतान हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार स्थानीय हुनर को रोजगार से जोड़कर बुनकरों और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। दीपावली से पहले पारिश्रमिक मिलने से उनके परिवारों के जीवन में उत्साह और समृद्धि का संचार होगा।

    मंत्री श्री यादव ने आगे जोर देते हुए कहा कि वोकल फॉर लोकल की भावना को आत्मसात करते हुए बुनाई और गणवेश (यूनिफॉर्म) सिलाई के जरिए जमीनी स्तर पर सतत रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। महिलाओं के कौशल विकास और स्वरोजगार के दायरे को बढ़ाकर उनकी आय में वृद्धि करना सरकार का मुख्य ध्येय है।

    9 करोड़ 41 लाख रुपये का पारिश्रमिक सीधे बैंक खातों में अंतरित

    ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक श्री राजेश सिंह राणा ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष और त्योहारी सीजन के दौरान पारिश्रमिक का यह वितरण पूरी पारदर्शिता के साथ सीधे खातों में किया गया है। प्रदेश के 26 जिलों की 302 बुनकर सहकारी समितियों को 7 करोड़ 60 लाख रुपये का भुगतान अक्टूबर 2026 में किया गया। 49 बुनकर सहकारी समितियों को 1 करोड़ 50 लाख रुपये तथा 128 महिला स्व-सहायता समूहों को 31 लाख रुपये का पारिश्रमिक 3 नवंबर को अतिरिक्त भुगतान किया गया।

    चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) की कुल उपलब्धियां

    राज्य हाथकरघा संघ द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3 नवंबर तक कुल 76 करोड़ 13 लाख 54 हजार रुपये की राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जा चुकी है, जिसमें शामिल हैं। बुनकर सहकारी समितियों को 345 बुनकर सहकारी समितियों को बुनाई पारिश्रमिक के रूप में 54 करोड़ 87 लाख रुपये, 2005 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 21 करोड़ 17 लाख रुपये की राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जा चुकी है।

    बुनकरों को कल्याणकारी सहायता

    बुनकरों की आकस्मिक मृत्यु पर 29 आश्रित परिवारों को 5 लाख 80 हजार रुपये की आर्थिक सहायता अनुदान और हाथकरघा क्षेत्र के 11 पुरस्कृत हितग्राहियों को 3 लाख 74 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।

    सुकमा, बस्तर, कोरबा और जशपुर में पुनर्वासित महिलाओं के लिए नए अवसर

    पारंपरिक कार्यों के साथ-साथ सुदूर और आकांक्षी जिलों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की अनूठी पहल भी शुरू की गई है। इसके तहत सुकमा, बस्तर, कोरबा एवं जशपुर जिलों की 30 पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का विशेष प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।

    राज्य हाथकरघा संघ के अनुपयोगी और कटपीस वस्त्रों का सदुपयोग करते हुए इनसे आकर्षक खिलौने, थैले (बैग) और वाटर बैग जैसे उत्पाद तैयार करवाने के कार्यादेश दिए जा रहे हैं। साथ ही, इन महिलाओं को घर पर ही निःशुल्क सिलाई मशीन उपलब्ध कराकर उनके लिए आय के नए और स्थायी अवसर विकसित किए जा रहे हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

    परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की बैठक संपन्न

    रायपुर / छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य में प्रस्तावित विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई तथा भविष्य की योजनाओं को लेकर रूपरेखा तैयार की गई।

    लागत के स्पष्ट आकलन और समयबद्ध तैयारी पर जोर

    मुख्य सचिव श्री विकासशील ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि प्रस्तावित निर्माण कार्यों के लागत तुलनात्मक विश्लेषण में पूरी स्पष्टता रखी जाए, जिससे प्रत्येक परियोजना की लागत का उचित और यथार्थवादी आकलन संभव हो सके। उन्होंने आगामी बजट में शामिल किए जाने वाले महत्वपूर्ण कार्यों की समय रहते पहचान करने और उनकी आवश्यक प्रशासनिक व तकनीकी तैयारियां पहले से ही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    प्रमुख सड़क एवं बुनियादी परियोजनाओं पर हुई चर्चा

    बैठक के दौरान अधिकारियों ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे और प्रस्तावित विकास कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। मुख्य रूप से इन परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कांकेर जिला में भानुप्रतापपुर-कांकेर-पंखाजूर मार्ग पर पुल-पुलिया सहित सड़क निर्माण कार्य। बिलासपुर क्षेत्र में बिलासपुर-कटनी रेल मार्ग पर रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण तथा बिलासपुर जिले में फ्लाईओवर ब्रिज का निर्माण का कार्य शामिल है। दुर्ग एवं अन्य परिक्षेत्र में नगरी-कांकेर-भानुप्रतापपुर-मानपुर-राजनांदगांव-कवर्धा-फास्टरपुर कुंडा मार्गों तथा कुम्हारी, अहिवारा-धमधा-गंडई-साल्हेवारा मार्गों का उन्नयन एवं चौड़ीकरण कार्य।

    बैठक में शासन के कई वरिष्ठ विभागों के प्रमुख सचिव और सचिव मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश कुमार टोप्पो, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री सारांश मित्तर सहित विभिन्न विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    लोकभवन में पुष्पांजलि अर्पित कर दी श्रद्धांजलि, सांस्कृतिक जगत में उनके अतुलनीय योगदान को किया स्मरण

    रायपुर / शौर्यपथ। भारत रत्न एवं प्रख्यात संगीतकार, गायक, गीतकार तथा बहुमुखी सांस्कृतिक व्यक्तित्व डॉ. भूपेन हजारिका की पुण्यतिथि पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। गुरुवार को लोकभवन में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में राज्यपाल ने डॉ. हजारिका के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

    इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने डॉ. भूपेन हजारिका के सांस्कृतिक एवं रचनात्मक योगदान का स्मरण किया। असम सहित देश-विदेश में अपनी कला और संगीत के माध्यम से विशिष्ट पहचान स्थापित करने वाले डॉ. हजारिका ने भारतीय सांस्कृतिक जगत को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    श्रद्धांजलि कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, विधिक सलाहकार श्रीमती सत्यभामा अजय दुबे तथा लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे। सभी ने डॉ. हजारिका के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
    डॉ. भूपेन हजारिका की पुण्यतिथि पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से उनके कला, संगीत और सांस्कृतिक विरासत में दिए गए योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।

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