July 25, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    शौर्यपथ संवाददाता, भिलाईनगर।

    शासन के मंशानुरूप नागरिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण और निगम के कामकाज को अधिक पारदर्शी व हाईटेक बनाने के लिए नगर पालिक निगम भिलाई में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। निगम आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सीएम हेल्पलाइन नंबर 1076 और ई-ऑफिस प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से रणनीति बनाई गई।

    निगम सभागार में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य कार्यालय सहित सभी जोन कार्यालयों के अधिकारी, लिपिक (क्लरिक्स) और कंप्यूटर ऑपरेटर मुख्य रूप से शामिल हुए।

    शिकायतों का होगा समयबद्ध निवारण: सीएम हेल्पलाइन 1076

    बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर आने वाली नागरिकों की हर शिकायत और मांग को गंभीरता से लिया जाए।

    पारदर्शिता और गति: इसके माध्यम से आम जनता की समस्याओं का एक तय समय-सीमा (टाइम-बाउंड) के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।

    समस्याओं का समाधान: पोर्टल संचालन के दौरान मैदानी स्तर पर आ रही तकनीकी और प्रक्रियागत दिक्कतों पर भी चर्चा कर मौके पर ही उनका समाधान निकाला गया।

    कागजी फाइलों से मुक्ति, ई-ऑफिस से बढ़ेगी कार्यक्षमता

    निगम के प्रशासनिक कार्यों में गति लाने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली पर विशेष जोर दिया गया। इस प्रणाली के लागू होने से:

    फाइलों का संचालन अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित होगा।

    कार्यों में पारदर्शिता आएगी और लेटलतीफी पर लगाम लगेगी।

    कर्मचारियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हुए बताया गया कि कैसे नस्तियों (फाइलों) को लिपिक स्तर से उच्च अधिकारियों तक ऑनलाइन अनुमोदन (Approval) के लिए भेजा जाए।

    आयुक्त के कड़े निर्देश: कार्यों को बनाएं पेपरलेस

    निगम आयुक्त ने बैठक में मौजूद सभी अधिकारी-कर्मचारियों को सख्त लहजे में निर्देशित किया कि सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों को 'टॉप प्रायोरिटी' (प्राथमिकता) पर रखते हुए तुरंत निपटाएं। साथ ही, उन्होंने ई-ऑफिस प्रणाली का अधिकतम उपयोग करने को कहा ताकि निगम के कामकाज को पूरी तरह पेपरलेस और पारदर्शी बनाया जा सके, जिससे आम नागरिकों को घर बैठे बेहतर और सुलभ सेवाएं मिल सकें।

    शौर्यपथ संवाददाता, डौंडीलोहारा (लोकेश कुमार साहू)।

    बालोद । 

    छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत संचालनालय द्वारा ग्रामीण विकास को गति देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। शासन ने बालोद जिले की सभी 436 ग्राम पंचायतों को मूलभूत और आवश्यक कार्यों को पूरा करने के लिए कुल 338.19 लाख रुपये (3.38 करोड़ रुपये) की राशि जारी कर दी है। इस राशि से गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास तेजी से हो सकेगा।

    जनसंख्या के आधार पर होगा राशि का वितरण

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासन द्वारा जारी की गई इस राशि का आवंटन ग्राम पंचायतों को उनकी जनसंख्या के मापदंड के आधार पर किया जा रहा है। जिस पंचायत की आबादी जितनी अधिक होगी, उसे विकास कार्यों के लिए उसी अनुपात में राशि का हस्तांतरण किया जाएगा।

    डौण्डीलोहारा विकासखण्ड को मिली बड़ी सौगात

    जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) सुनील चन्द्रवंशी ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि आवंटित की गई कुल राशि में से डौण्डीलोहारा विकासखण्ड को एक बड़ा हिस्सा मिला है।

    डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाली 120 ग्राम पंचायतों के खातों में कुल 78.51 लाख रुपये की राशि सफलतापूर्वक हस्तांतरित कर दी गई है।

    ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार

    पंचायतों को यह राशि सीधे मिलने से अब गांवों में पानी, बिजली, साफ-सफाई, और छोटी-मोटी मरम्मतों जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मूलभूत कार्यों के लिए फंड की कमी नहीं होगी। जिला प्रशासन द्वारा सभी ग्राम पंचायतों को प्राप्त राशि का नियमानुसार और पारदर्शिता के साथ जनहित के कार्यों में उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। इस आवंटन से जिले के सरपंचों और ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है।

    *हॉर्नबिल संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार का नया अवसर*

    *पीवीटीजी गांवों ओढ़, अमलोर और आमामोरा में बढ़ी मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या*

    रायपुर / 'हॉर्नबिल सफारी' से तात्पर्य हॉर्नबिल पक्षियों को देखने के लिए की जाने वाली वन्यजीव सफारी या हॉर्नबिल से जुड़े प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से है। हॉर्नबिल मुख्य रूप से जंगलों, विशेषकर पश्चिमी घाट और मध्य भारत के नम पर्णपाती और सदाबहार वनों में रहना पसंद करता है।

    *‘हॉर्नबिल सफारी’ प्रारंभ करने का लिया गया निर्णय* 

                छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक विकास को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की जा रही है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप की पहल पर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के गांवों ओढ़, अमलोर और आमामोरा में ‘हॉर्नबिल सफारी’ प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। यह पहल दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित करेगी।

    *संरक्षण और आजीविका को साथ लेकर आगे बढ़ रहा वन विभाग*

             वन मंत्री श्री केदार कश्यप की सोच के अनुरूप वन विभाग वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण कार्यों को स्थानीय समुदायों की भागीदारी और आजीविका से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पाण्डेय तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री ओ.पी. यादव के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कई नवाचार किए जा रहे हैं, जिनसे वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण विकास को एक साथ बढ़ावा मिल रहा है।

    *चार वर्षों में बढ़ी हॉर्नबिल की आबादी*

            उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले चार वर्षों के दौरान मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह सफलता एंटी-पोचिंग अभियान, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, फलदार वृक्षों के संरक्षण एवं रोपण तथा ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ जैसी अभिनव पहल का परिणाम है। स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने भी इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    *हॉर्नबिल ट्रैकिंग टीम निभा रही महत्वपूर्ण भूमिका*

            हॉर्नबिल संरक्षण के लिए गठित विशेष ट्रैकिंग टीम लगातार पक्षियों की गतिविधियों, घोंसलों और आवास क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। वन विभाग के कर्मचारियों के साथ स्थानीय ट्रैकर्स भी इस अभियान से जुड़े हुए हैं। उनके सतत प्रयासों से ओढ़, अमलोर और आमामोरा के आसपास का वन क्षेत्र आज हॉर्नबिल के सुरक्षित आवास और आकर्षक बर्डिंग स्थल के रूप में विकसित हो चुका है।

    *प्रकृति प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए बनेगा नया आकर्षण*

            प्रस्तावित हॉर्नबिल सफारी के माध्यम से पर्यटक, पक्षी प्रेमी, वन्यजीव फोटोग्राफर और शोधकर्ता प्राकृतिक वातावरण में हॉर्नबिल का अवलोकन कर सकेंगे। सफारी के संचालन के लिए प्रारंभिक चरण में दो जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है।

    *स्थानीय युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार*

            हॉर्नबिल सफारी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता स्थानीय समुदायों की भागीदारी है। पीवीटीजी गांवों के युवाओं और ग्रामीणों को बर्ड वॉचिंग तथा नेचर गाइड का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वे पर्यटकों के लिए नेचर गाइड और हॉर्नबिल गाइड के रूप में कार्य करेंगे। इससे उन्हें स्थायी आय और रोजगार का अवसर मिलेगा तथा सामुदायिक आधारित इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।

    *मध्य भारत का उभरता बर्डिंग डेस्टिनेशन*

            रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तेजी से मध्य भारत के प्रमुख बर्डिंग और नेचर टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां मालाबार पाइड हॉर्नबिल के अलावा शाहीन बाज, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, विभिन्न प्रजातियों के कठफोड़वा, बार्बेट, मिनिवेट सहित अनेक स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की विविधता देखने को मिलती है।

    *वन्यजीवों की समृद्ध जैव विविधता का केंद्र*

             यह क्षेत्र पक्षियों के साथ-साथ भारतीय विशाल गिलहरी (इंडियन जायंट स्क्विरल) और भारतीय विशाल उड़न गिलहरी (इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल) जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के लिए भी प्रसिद्ध है। यही कारण है कि यह क्षेत्र प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

    *संरक्षण, विकास और पर्यटन का सफल संगम*

            विशेषज्ञों के अनुसार उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में की जा रही यह पहल इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि वैज्ञानिक वन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की सहभागिता के माध्यम से संरक्षण आधारित आजीविका और सतत पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। हॉर्नबिल सफारी के शुरू होने से छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी और ग्रामीण विकास को भी गति प्राप्त होगी। मोबाइल नंबर - 7976688165, 7566510937

    वेबसाइट - : www.udantisitanaditigerreserve.in पर पर्यटक, संपर्क कर विस्तृत जानकारी ले सकते हैं।

    *ग्राम सभाओं के माध्यम से दी जा रही योजना की जानकारी, मानव श्रृंखला बनाकर ग्रामीणों ने दिया जनजागरूकता का संदेश*

    *केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी की मानव श्रृंखला द्वारा जागरूकता की सराहना*

    रायपुर / प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को आजीविका और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा आगामी 1 जुलाई 2026 से लागू की जा रही वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) योजना को लेकर पूरे प्रदेश में व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला स्तर पर लगातार प्रशिक्षण, बैठकें और ग्राम सभाएं आयोजित कर ग्रामीणों को योजना के विभिन्न प्रावधानों एवं लाभों की जानकारी दी जा रही है।

    *सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने बनाई मानव श्रृंखला*

                योजना के प्रति ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रदेश के विभिन्न गांवों में आयोजित ग्राम सभाओं में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर योजना की जानकारी प्राप्त की तथा इसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग का संकल्प लिया। इसी क्रम में बेमेतरा जिले के जनपद पंचायत बेरला की ग्राम पंचायत सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अनूठी पहल करते हुए मानव श्रृंखला का निर्माण किया। ग्रामीणों ने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियां लेकर “वीबी जी राम जी - गांव की प्रगति, हम सबकी जिम्मेदारी”, “रोजगार और आजीविका का नया संबल” तथा “समृद्ध गांव, सशक्त परिवार” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। 

    *केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की सराहना* 

           केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने एक्स अकॉउंट से पोस्ट कर लिखा कि छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से आई इस तस्वीर को देखकर मन आनंद और उत्साह से भर गया। यह तस्वीर गाँव की जनता के जागरूकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी बेमेतरा जिले के इन प्रयासों की सराहना करते हुए अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर लिखा कि यह मानव श्रृंखला बन रही है, जो योजना के प्रति जन-जागरूकता का प्रतीक बनी हुई है।

    *पात्र परिवारों को लाभ दिलाने और जानकारी पहुंचाने लिया संकल्प*

              मानव श्रृंखला के माध्यम से ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि योजना केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में जनभागीदारी का एक महत्वपूर्ण अभियान है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने तथा अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने का संकल्प भी लिया।

    *ग्राम सभा मे अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी*

              ग्राम सभाओं में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि वीबी - जीरामजी योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायत स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

    *अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और हितग्राहियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण*

             पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार 30 जून 2026 तक पंचायत, ब्लॉक एवं जिला स्तर के सभी अधिकारी-कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों तथा हितग्राहियों का प्रशिक्षण पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कठिनाई न आए और पात्र परिवारों को समय पर लाभ मिल सके।

    *1 जुलाई से प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ*

              योजना के प्रचार-प्रसार के लिए ग्राम सभाओं, चौपालों, पोस्टर-बैनर, मुनादी, रथ प्रचार एवं डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से लोगों को योजना की जानकारी देने में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह योजना गांवों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 1 जुलाई से योजना के लागू होने के साथ ही प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की भी उम्मीद है। 

    *उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने भी लाइव आकर दी जानकारी*

             उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा भी मंगलवार को अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर लाइव आकर आगामी ग्राम सभा और वीबी जीरामजी के संबंध में लोगों को जानकारी दी और लोगों को योजना का लाभ लेने को प्रेरित किया साथ ही उन्होंने लोगों के सवालों का भी समाधान किया।

    *दलहन-तिलहन की खेती अपनाने पर मिलेगा 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन*

    *कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलें बनेंगी किसानों की आय का आधार*

    रायपुर / प्रदेश में इस वर्ष एल-नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम वर्षा की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को मौसम के अनुरूप फसल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। विभाग ने विशेष रूप से अपलैंड एवं कम जलधारण क्षमता वाली भूमि में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया है।

             कृषि विभाग के अनुसार कम वर्षा की संभावित परिस्थितियों में अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, मूंगफली, तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी एवं रागी जैसी फसलें बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं तथा प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में किसानों के लिए जोखिम को कम करती हैं।

    *दलहन-तिलहन की खेती पर मिलेगा प्रोत्साहन*

             राज्य शासन द्वारा किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत अपलैंड क्षेत्रों में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही इन फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर की जाती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।

    *आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी हैं वैकल्पिक फसलें*

            कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि दलहन एवं तिलहन फसलें कम लागत में बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दलहनी फसलें भूमि में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में सहायक होती हैं, जिससे आगामी फसलों की उत्पादकता में भी वृद्धि होती है। साथ ही इन फसलों का बाजार मूल्य अपेक्षाकृत अच्छा होने से किसानों की आय में वृद्धि की संभावना रहती है।

    *अल्प अवधि की धान किस्मों के चयन की सलाह*

              कृषि विभाग ने मध्यम भूमि वाले क्षेत्रों के किसानों को भी संभावित कम वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अल्प अवधि में तैयार होने वाली धान किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। इससे जल उपलब्धता की अनिश्चितता के बावजूद उत्पादन जोखिम को कम किया जा सकेगा।

             कृषि विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुसार फसल चयन करने, फसल विविधीकरण अपनाने तथा शासन की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया है। विभाग का मानना है कि मौसम आधारित कृषि रणनीति अपनाकर किसान न केवल संभावित सूखे के प्रभाव को कम कर सकते हैं, बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

    दो-तिहाई पार्षदों का एक साथ केरल रवाना होना बना चर्चा का विषय, शहर की समस्याओं के बीच सियासी समीकरणों और संभावित राजनीतिक खेल पर उठ रहे सवाल।

    दुर्ग राजनीतिक।

    दुर्ग की राजनीति में इन दिनों विकास, गुटबाजी और सियासी रणनीतियों का ऐसा संगम दिखाई दे रहा है, जिसने नगर निगम की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। नगर निगम के बड़ी संख्या में पार्षदों का सामूहिक रूप से केरल भ्रमण पर जाना केवल एक पर्यटन यात्रा है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है, यही प्रश्न आज शहर के राजनीतिक गलियारों से लेकर आम नागरिकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है।

    राजनीति में संख्या शक्ति का अपना महत्व होता है। सत्ता पक्ष अपने संगठन और जनप्रतिनिधियों को मजबूत रखने का प्रयास करता है तो विपक्ष सत्ता की कमजोर कड़ियों को तलाशने में जुटा रहता है। दुर्ग नगर निगम की वर्तमान परिस्थितियों को देखें तो निगम की सामान्य सभाओं से लेकर विभिन्न विकास कार्यों तक लगातार मतभेद और टकराव की स्थिति दिखाई देती रही है। कई अवसरों पर भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को एक सुर में निगम प्रशासन तथा शहरी सरकार के नेतृत्व पर सवाल उठाते देखा गया है।

    ऐसे समय में जब बरसात का मौसम शुरू हो चुका है और शहर के अनेक वार्ड जलभराव, गंदगी, अधूरी सफाई व्यवस्था, बदहाल सड़कों और मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं से जूझ रहे हैं, तब बड़ी संख्या में पार्षदों का एक साथ दस दिन की यात्रा पर निकलना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है। यह किसी व्यक्ति विशेष की यात्रा का विरोध नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं पर उठता एक लोकतांत्रिक प्रश्न है।

    जनप्रतिनिधि केवल व्यक्तिगत नागरिक नहीं होते। वे अपने वार्ड और हजारों नागरिकों की अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में जब शहर समस्याओं से घिरा हो और निगम के भीतर राजनीतिक असंतोष भी लगातार सामने आ रहा हो, तब सामूहिक यात्रा का राजनीतिक महत्व स्वतः बढ़ जाता है।

    इसी कारण निगम क्षेत्र में "ऑपरेशन पैंथर" की चर्चा जोर पकड़ रही है। हालांकि महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना कानूनी रूप से आसान नहीं है, लेकिन राजनीतिक इतिहास गवाह है कि कई बार बड़ी राजनीतिक घटनाओं की शुरुआत सीधे टकराव से नहीं बल्कि रणनीतिक बैठकों और समूहबद्ध गतिविधियों से होती है। यही कारण है कि पार्षदों का यह सामूहिक भ्रमण केवल पर्यटन न मानकर राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है।

    चर्चा का दूसरा पहलू आर्थिक है। यात्रा में शामिल पार्षदों द्वारा अलग-अलग राशि बताए जाने से भी जिज्ञासाएं बढ़ी हैं। कोई दस हजार रुपये प्रति व्यक्ति बता रहा है तो कोई पंद्रह हजार रुपये। वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में दस दिनों का केरल भ्रमण इतनी कम लागत में संभव कैसे हो रहा है, यह भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि यदि यात्रा की वास्तविक लागत अधिक है तो शेष खर्च का वहन कौन कर रहा है।

    हालांकि इस प्रश्न का कोई आधिकारिक उत्तर सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजनीति में कोई भी सामूहिक गतिविधि बिना किसी उद्देश्य के नहीं होती। अक्सर दिखाई देने वाले चेहरे अलग होते हैं और रणनीति तैयार करने वाले चेहरे अलग। यही कारण है कि इस यात्रा को लेकर कई तरह के राजनीतिक अनुमान लगाए जा रहे हैं।

    दूसरी ओर, निगम की राजनीति में लंबे समय से विकास कार्यों को लेकर भी मतभेद सामने आते रहे हैं। कई पार्षदों ने सामान्य सभा में आरोप लगाया है कि विकास कार्यों के आवंटन और स्वीकृति में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जाता है तथा जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया जाता। स्थानीय विधायक एवं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अनुशंसाओं और विकास योजनाओं को लेकर भी समय-समय पर राजनीतिक विवाद सामने आते रहे हैं।

    इन परिस्थितियों में केरल यात्रा केवल एक भ्रमण कार्यक्रम न रहकर राजनीतिक संकेतों का माध्यम बन गई है। यात्रा समाप्त होने के बाद क्या कोई नया राजनीतिक समीकरण सामने आएगा, क्या निगम के भीतर शक्ति संतुलन में बदलाव होगा, या यह केवल सामूहिक पर्यटन साबित होगा—इन सभी प्रश्नों के उत्तर आने वाला समय ही देगा।

    फिलहाल इतना तय है कि दुर्ग नगर निगम का यह घटनाक्रम केवल केरल यात्रा तक सीमित नहीं है। इसके पीछे छिपे राजनीतिक संदेश, संभावित रणनीतियां और बदलते समीकरण आने वाले दिनों में दुर्ग की शहरी राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। इसलिए निगम क्षेत्र से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हर नजर अब केरल से लौटने वाले पार्षदों और उनके अगले कदम पर टिकी हुई है।

    "केरल की यह यात्रा पर्यटन से अधिक राजनीति का विषय बन चुकी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि लौटने के बाद पार्षद केवल यात्रा की यादें साझा करेंगे या दुर्ग की राजनीति में किसी नए अध्याय का सूत्रपात करेंगे।"

    धमधा तहसील में अवैध कब्जा हटाकर शासन की जमीन सुरक्षित, भू-माफियाओं को स्पष्ट संदेश—शासकीय भूमि पर कब्जा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

      रायपुर, / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शासकीय भूमि की सुरक्षा और भू-माफियाओं के विरुद्ध अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति के तहत दुर्ग जिले में जिला प्रशासन लगातार कड़ी कार्रवाई कर रहा है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देशन में प्रशासन ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के लिए जिले में कोई स्थान नहीं है और ऐसे तत्वों के विरुद्ध कठोर एवं विधिसम्मत कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

      इसी क्रम में धमधा तहसील के ग्राम बसनी में लंबे समय से शासकीय भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाकर शासन की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा शासकीय भूमि पर झटका तार लगाकर तथा खरीफ एवं रबी फसलों की खेती कर अवैध कब्जा किया गया था। शिकायत प्राप्त होने पर कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए।

    तहसीलदार धमधा द्वारा हल्का पटवारी से प्रतिवेदन प्राप्त कर राजस्व प्रकरण में विस्तृत जांच और सुनवाई की गई। तथ्यों की पुष्टि होने पर संबंधित कब्जाधारियों के विरुद्ध विधिवत बेदखली आदेश पारित किया गया। आदेश के पालन में 22 जून 2026 को राजस्व विभाग और ग्राम पंचायत बसनी के संयुक्त प्रयास से व्यापक कार्रवाई करते हुए शासकीय भूमि को कब्जा मुक्त कराया गया।

    तहसीलदार श्रीमती मीना साहू ने बताया कि कार्रवाई के दौरान सेवाराम लोधी द्वारा शासकीय खसरा नंबर 1077 की 20 डिसमिल तथा खसरा नंबर 1188 की 0.34 हेक्टेयर भूमि पर किए गए कब्जे को हटाया गया। इसी प्रकार राजकुमार लोधी के कब्जे से 7 डिसमिल तथा राजकपूर लोधी के कब्जे से 13 डिसमिल शासकीय भूमि मुक्त कराई गई। वहीं शिवकुमार मौर्य द्वारा खसरा नंबर 1077 की 8 डिसमिल भूमि तथा खसरा नंबर 1076 की 0.19 हेक्टेयर भूमि पर किए गए अवैध कब्जे और लगाए गए झटका तार को भी हटाकर भूमि को शासन के पक्ष में सुरक्षित किया गया। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण और विधिसम्मत ढंग से संपन्न हुई, जिसमें राजस्व निरीक्षक धमधा, राजस्व निरीक्षक पेण्ड्रावन, हल्का पटवारी एवं ग्राम पंचायत सचिव उपस्थित रहे।

    जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भू-माफियाओं, अवैध कब्जाधारियों और शासकीय भूमि का दुरुपयोग करने वालों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन की इस निर्णायक पहल से ग्रामीणों में संतोष और विश्वास का माहौल है तथा शासकीय भूमि को संरक्षित करने के इस कदम की व्यापक सराहना की जा रही है।

     

       दुर्ग। जिले में पिछले कुछ महीनों के दौरान अवैध गुटखा निर्माण और नशीले पदार्थों से जुड़े अवैध कारोबारों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने जिस सक्रियता और तत्परता का परिचय दिया है, उसने एक ओर कानून व्यवस्था के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता को सामने रखा है, वहीं दूसरी ओर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

    ताजा मामला ग्राम जेवरा का है, जहां पुलिस ने अवैध गुटखा निर्माण से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मशीनें, कच्चा माल और अन्य सामग्री जब्त की है। इससे पहले अंडा थाना क्षेत्र में वाशिंग पाउडर निर्माण की आड़ में संचालित अवैध गुटखा फैक्ट्री का भी खुलासा हो चुका है। इन कार्रवाइयों ने यह साबित किया है कि जिले में अवैध गुटखा कारोबार केवल छोटे स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित तरीके से संचालित हो रहा है।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुलिस लगातार ऐसे मामलों का खुलासा कर रही है, तब खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है? जिले में विभाग की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में संचालित है, लेकिन अब तक जिन मामलों का खुलासा पुलिस ने किया, उनमें विभाग की कोई उल्लेखनीय भूमिका सामने नहीं आई।

    जानकार बताते हैं कि कुछ समय पूर्व खाद्य एवं औषधि प्रशासन की केंद्रीय टीम भी दुर्ग पहुंची थी, लेकिन उसके बाद भी किसी बड़ी अवैध गुटखा फैक्ट्री पर विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई। इसके विपरीत पुलिस लगातार अवैध कारोबारियों तक पहुंच रही है और कार्रवाई को अंजाम तक पहुंचा रही है।

    पुराने मामलों की फाइलों में दबे सवाल

    कोनारी में पूर्व में हुई कार्रवाई के बाद आगे क्या हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी आज तक सार्वजनिक नहीं हो सकी। नगपुरा क्षेत्र के पास भी अवैध गुटखा निर्माण सामग्री बड़ी मात्रा में मिलने का मामला सामने आया था, लेकिन परिसर खाली मिलने के बाद आगे की कार्रवाई किस दिशा में बढ़ी, यह भी आज तक स्पष्ट नहीं हो पाया।

    इसी प्रकार वर्षों पहले मोहन नगर थाना क्षेत्र में बड़ी मात्रा में कथित रूप से अवैध "सितार गुटखा" पकड़ा गया था। उस समय पुलिस की कार्रवाई के बाद उम्मीद थी कि मामले में कठोर कदम उठाए जाएंगे, लेकिन बाद में विभागीय जांच रिपोर्ट में सामग्री को वैध बताते हुए उसे वापस सौंपे जाने की चर्चा लंबे समय तक होती रही। यह मामला आज भी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

    वहीं करोड़ों रुपये के चर्चित जीएसटी प्रकरण में भी कुछ नाम सामने आए थे, लेकिन उन मामलों की वर्तमान स्थिति क्या है, यह भी आम जनता की जानकारी से दूर है। इससे यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि कई बड़े मामलों की जांच और कार्रवाई फाइलों तक सीमित होकर रह जाती है।

    त्योहारी सीजन में मिठाइयों पर सख्ती, लेकिन नशा परोसने वालों पर नरमी क्यों?

    हर वर्ष त्योहारी सीजन के दौरान खाद्य विभाग बाजारों में मिठाई, नमकीन और खाद्य सामग्री की जांच अभियान चलाता है। यह कार्रवाई आवश्यक भी है, लेकिन नागरिकों का सवाल है कि जब युवाओं और समाज के स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करने वाले अवैध गुटखा कारोबार की बात आती है, तब विभाग की सक्रियता उसी स्तर पर क्यों दिखाई नहीं देती?

    जब पुलिस लगातार अवैध गुटखा फैक्ट्रियों तक पहुंच रही है, मशीनें जब्त कर रही है और नेटवर्क का खुलासा कर रही है, तब संबंधित विभाग का केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित दिखाई देना स्वाभाविक रूप से प्रश्नों को जन्म देता है।

    पुलिस की सक्रियता बनी उम्मीद

    वर्तमान में जिले में पुलिस प्रशासन द्वारा की जा रही लगातार कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो अवैध कारोबारों तक पहुंचना और उन पर प्रभावी प्रहार करना संभव है। जेवरा और अंडा जैसे मामलों ने यह साबित कर दिया है कि अवैध गुटखा कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकता है।

    अब आवश्यकता इस बात की है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन भी उतनी ही गंभीरता और जवाबदेही के साथ मैदान में उतरे। केवल नमूने लेने और कागजी प्रक्रिया पूरी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। अवैध गुटखा निर्माण, भंडारण और वितरण के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए विभागीय स्तर पर भी ठोस, पारदर्शी और परिणामकारी कार्रवाई जरूरी है।

    बड़ा सवाल

    जब पुलिस प्रशासन लगातार अवैध गुटखा कारोबारियों तक पहुंच रहा है, तो क्या खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जिम्मेदारी केवल कार्रवाई के बाद दस्तावेज तैयार करने तक सीमित रह गई है?

    दुर्ग की जनता अब जवाब चाहती है। क्योंकि यह मामला केवल कानून उल्लंघन का नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है।

    डिजिटल गवर्नेंस को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने पर जोर, देशभर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

    रायपुर / राज्य में डिजिटल गवर्नेंस के तेजी से बढ़ते दायरे और शासकीय सेवाओं के बढ़ते डिजिटलीकरण के बीच नागरिकों के डेटा एवं महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से रायपुर में "Strengthening Cyber Security Frameworks for State Data" विषय पर राज्य स्तरीय विभागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

    इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा चिप्स (CHiPS) द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों, बोर्डों एवं निगमों के 120 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और राष्ट्रीय स्तर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए।

    साइबर सुरक्षा अब सुशासन और जनविश्वास का विषय : सचिव श्री अंकित आनन्द

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनन्द ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस की सफलता नागरिकों के विश्वास पर आधारित है और यह विश्वास तभी मजबूत होगा जब शासकीय डिजिटल प्रणालियां सुरक्षित, विश्वसनीय और साइबर खतरों का सामना करने में सक्षम हों। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सुशासन, सेवा निरंतरता और जनविश्वास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण रणनीतिक विषय बन चुका है। राज्य शासन का लक्ष्य केवल डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और लचीला बनाना भी है।

    राज्य के लिए तैयार हो रहा व्यापक साइबर सुरक्षा रोडमैप

    चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मयंक अग्रवाल ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि राज्य शासन साइबर सुरक्षा को डिजिटल शासन की आधारशिला मानते हुए राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए व्यापक और भविष्य उन्मुख रोडमैप तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप छह प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें जोखिम आधारित सुरक्षा मूल्यांकन, राज्य डेटा सेंटर एवं नेटवर्क सुरक्षा, सुरक्षा संचालन केंद्र (SOC), जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर, डेटा गवर्नेंस तथा साइबर जागरूकता एवं क्षमता निर्माण शामिल हैं।

    विशेषज्ञों ने बताए राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा मानक

    तकनीकी सत्रों में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न आयामों पर विस्तृत जानकारी साझा की। पुलिस महानिरीक्षक (तकनीकी सेवाएं) डॉ. ध्रुव गुप्ता ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act-2023) की जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून वर्ष 2027 से पूर्ण रूप से लागू हो जाएगा।

    गृह मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव एवं NATGRID के सलाहकार डॉ. सौरभ गुप्ता ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम साइबर सुरक्षा प्रथाओं पर प्रकाश डाला। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के पूर्व वैज्ञानिक-जी एवं डिप्टी डायरेक्टर जनरल श्री सुरेश चंद्रा ने सरकारी डेटा सुरक्षा के लिए मानकीकरण, प्रमाणन और Trusted IT Systems के महत्व को रेखांकित किया।

    समूह चर्चाओं से मिले महत्वपूर्ण सुझाव

    कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को छह विषयगत समूहों में विभाजित कर विस्तृत विचार-विमर्श कराया गया। चर्चा के दौरान साइबर सुरक्षा परिपक्वता बढ़ाने, सुरक्षा निगरानी तंत्र को मजबूत करने, विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करने, नियमित सुरक्षा ऑडिट, प्रभावी घटना प्रतिक्रिया तंत्र (Incident Response Mechanism) और मानव संसाधन क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए।

    राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेंगी कार्यशाला की अनुशंसाएं

    कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं का संकलन कर राज्य की साइबर सुरक्षा कार्ययोजना को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। चयनित अनुशंसाओं को राष्ट्रीय स्तर पर विचारार्थ संबंधित संस्थाओं एवं भारत सरकार को भी भेजा जाएगा।

    कार्यक्रम में एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. व्ही. रमन्ना राव, छत्तीसगढ़ राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी श्री टी.एन. सिंह, चिप्स के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शशांक पाण्डेय, श्री यू.एस. अग्रवाल, श्री आशीष जायसवाल, संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अनुपम आशीष टोप्पो सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

    सुरक्षित डिजिटल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

    कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने सुरक्षित डिजिटल शासन, मजबूत साइबर अवसंरचना तथा नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। यह कार्यशाला राज्य में साइबर सुरक्षा को नई दिशा देने और डिजिटल सेवाओं को अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।

    अल-नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने राज्य सरकार मुस्तैद, किसानों को अल-नीनो से बचाने किए जा रहे हैं उपाय: मंत्री नेताम

    किसानों की चिंता दूर कर रही छत्तीसगढ़ सरकार, अल-नीनो में दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस

        रायपुर / शौर्यपथ / अल-नीनो के प्रभाव से इस बार मानसून कमजोर रहने की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कम अवधि वाली फसलों, दलहन-तिलहन पर जोर, बीज सुरक्षा और फसल बीमा को प्राथमिकता देते हुए व्यापक रणनीति तैयार की है। इस आशय की जानकारी कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री राम विचार नेताम ने केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दी। बैठक वीडियोकांफ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुई।
    बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक कृषि राहुल देव, संचालक अनुसंधान डॉ. विवके त्रिपाठी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
    वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में मंत्री श्री नेताम ने बताया कि प्रदेश में 22 जून तक औसत वर्षा महज 30.8 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत से 58.3 मिलीमीटर कम है। खरीफ बोनी का लक्ष्य 48.69 लाख हेक्टेयर है, लेकिन अभी तक केवल 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो पाई है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में सरकार ने किसानों को संभावित घाटे से बचाने के लिए कई ठोस उपाय शुरू कर दिए हैं।
    कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि कृषि विभाग ने कम अवधि वाली धान के किस्मों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहनी और तिलहनी फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। उच्चहन भूमि में अनाज के साथ दलहन-तिलहन फसलों को अंतरवर्तीय फसल के रूप में लगाने की सलाह दी जा रही है। धान की जगह दलहन-तिलहन फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
    उन्होंने बताया कि बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए करते हुए राज्य बीज निगम ने 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है। सूखे प्रभावित 15 जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 48,449 क्विंटल किसानों तक पहुंच चुका है।
    श्री परदेशी ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के साथ नैनो उर्वरक और लाभकारी फसलों के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सरकार ने बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर फसल नुकसान की भरपाई के लिए बीमा प्लान को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए हैं। ताकि किसानों को आर्थिक क्षति से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि अल-नीनो के प्राभाव कम होने वाली दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस किया जा रहा है। साथ ही
    इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर अनुसंधान विभाग द्वारा अल-नीनो को ध्यान में रखते हुए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है।

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