July 25, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया उद्घाटन, समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय होंगे मुख्य अतिथि

    रायपुर/सरगुजा ।
    आषाढ़ मास के प्रथम दिवस पर सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत के प्रतीक दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 का सोमवार को भव्य शुभारंभ हुआ। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने महोत्सव का उद्घाटन किया। पारंपरिक गरिमा और सांस्कृतिक उल्लास से परिपूर्ण इस आयोजन में लोक संस्कृति, साहित्य, पुरातत्व और पर्यटन का अनूठा संगम देखने को मिला।

    उद्घाटन समारोह में स्कूली बच्चों और स्थानीय कलाकारों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जबकि नई दिल्ली से आए कलाकारों द्वारा मंचित भव्य रामलीला ने दर्शकों का विशेष आकर्षण केंद्र बनी।

    कार्यक्रम में सांसद चिंतामणि महाराज, लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज, जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, इतिहासकार, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

    रामगढ़ पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर : राजेश अग्रवाल

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि रामगढ़ महोत्सव प्रदेश के इतिहास, लोक संस्कृति, पुरातत्व, साहित्य और पर्यटन का महत्वपूर्ण मंच है, जो नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने का कार्य करेगा।

    उन्होंने बताया कि इस वर्ष रामगढ़ महोत्सव के 50 वर्ष पूरे होने पर यह आयोजन विशेष महत्व रखता है। राज्य सरकार रामगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

    सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाओं का कराया जाएगा भ्रमण

    मंत्री ने बताया कि महोत्सव के दौरान आगंतुकों को विश्व की प्राचीनतम रंगशाला मानी जाने वाली सीताबेंगरा गुफा, जोगीमारा गुफा, रामगढ़ पर्वत श्रृंखला और अन्य पुरातात्विक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इतिहास और पुरातत्व विशेषज्ञ इन स्थलों के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी भी देंगे।

    उन्होंने यह भी बताया कि महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

    रामगढ़ को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने का संकल्प

    सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि रामगढ़ भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान यहां समय बिताया था तथा महाकवि कालिदास ने यहीं 'मेघदूतम्' की रचना की थी। उन्होंने रामगढ़ को विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

    लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने कहा कि रामगढ़ धार्मिक, ऐतिहासिक और साहित्यिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है, जिसकी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार आवश्यक है।

    स्थानीय कलाकारों को मिला मंच

    कलेक्टर अजीत वसंत ने कहा कि रामगढ़ महोत्सव स्थानीय कलाकारों, लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहन देने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस आयोजन से रामगढ़ की ऐतिहासिक पहचान और पर्यटन संभावनाओं को नई गति मिलेगी।

    मुख्य आकर्षण
    आषाढ़ मास के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ।
    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया उद्घाटन।
    स्थानीय कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और दिल्ली के कलाकारों की भव्य रामलीला।
    सीताबेंगरा, जोगीमारा गुफा और रामगढ़ के पुरातात्विक स्थलों का भ्रमण।
    समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय होंगे मुख्य अतिथि।
    महोत्सव का उद्देश्य रामगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की बड़ी घोषणा, बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि 3 माह बढ़ेगी

    रायपुर ।
    राजधानी रायपुर के सोनपैरी स्थित सद्गुरु कबीर आश्रम में सोमवार को आयोजित संत कबीर जयंती महोत्सव में कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू शामिल हुए। कार्यक्रम में सभी अतिथियों ने गुरु असंग देव का आशीर्वाद लिया और आश्रम परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि संत कबीर का सत्य, समरसता, मानव सेवा और सद्भाव का संदेश आज भी समाज और राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने जात-पात, ऊंच-नीच और आडंबर से ऊपर उठकर मानवता, प्रेम और विवेक का मार्ग दिखाया। उन्होंने सोनपैरी कबीर आश्रम द्वारा शिक्षा, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ संत कबीर की तपोभूमि है और उनके विचार आज भी समाज में प्रेम, भाईचारे और समरसता का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि उनका बचपन कबीरपंथी समाज के बीच बीता और संत कबीर की शिक्षाओं का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। मुख्यमंत्री ने संत कबीर द्वारा सामाजिक कुरीतियों, छुआछूत और जातिगत भेदभाव के विरुद्ध किए गए संघर्ष को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में 18 लाख आवास स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से 10 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की दिशा में हो रही प्रगति का भी उल्लेख किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

    बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी घोषणा

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि तीन माह के लिए बढ़ाई जाएगी। इसके तहत बिजली उपभोक्ता सरचार्ज माफी और अन्य आकर्षक प्रावधानों का लाभ लेकर अपने लंबित बिजली बिलों का भुगतान कर सकेंगे।

    गुरु असंग देव का संदेश

    गुरु असंग देव ने कहा कि संत कबीर ने समाज से पाखंड और कुरीतियों को समाप्त करने का संदेश दिया। उन्होंने सेवा, परमार्थ, गौसेवा, वृक्षारोपण और ग्राम विकास को जीवन का आधार बताते हुए समाज में संवाद और प्रेम बढ़ाने का आह्वान किया।

    अन्य वक्ताओं ने भी रखा पक्ष

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि संत कबीर की वाणी आज भी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ प्रेरणा देती है और वृक्षारोपण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है।

    केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि संत कबीर ने सत्य, सेवा और सादगी का मार्ग दिखाया, जिसे अपनाकर समाज और राष्ट्र का कल्याण किया जा सकता है।

    कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक इंद्र कुमार साहू, विभिन्न आयोगों एवं निगमों के पदाधिकारी, संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कबीरपंथी अनुयायी उपस्थित रहे।

    मुख्य बिंदु
    सोनपैरी कबीर आश्रम में संत कबीर जयंती महोत्सव का आयोजन।
    राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने संत कबीर के संदेश को आज भी प्रासंगिक बताया।
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संत कबीर के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
    अतिथियों ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
    मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि 3 माह बढ़ाने की घोषणा, जिससे उपभोक्ता सरचार्ज माफी सहित अन्य प्रावधानों का लाभ उठा सकेंगे।

    रायपुर ।
    छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा 26 से 30 जून 2026 तक पांच दिवसीय "इन्फ्लुएंसर मीट एवं फेमिलराइजेशन (FAM) टूर" आयोजित किया जा रहा है। इस पहल के तहत सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है, ताकि उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय विरासत का व्यापक प्रचार-प्रसार हो सके।

    फेम टूर के दौरान प्रतिभागी मैनपाट, सतरेंगा और रामगढ़ महोत्सव का अनुभव ले रहे हैं। वे यहां की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं, पर्यटन सुविधाओं और सांस्कृतिक आयोजनों को करीब से देख रहे हैं तथा फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री तैयार कर रहे हैं, जो सोशल मीडिया के जरिए देश-विदेश के लाखों-करोड़ों दर्शकों तक पहुंचेगी।

    मैनपाट अपनी हरी-भरी वादियों, तिब्बती संस्कृति, झरनों और शांत प्राकृतिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है, जबकि सतरेंगा तेजी से विकसित हो रहा इको-टूरिज्म गंतव्य है, जहां जलाशय आधारित पर्यटन और साहसिक गतिविधियां आकर्षण का केंद्र हैं। वहीं रामगढ़ महोत्सव के माध्यम से प्रतिभागियों को छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर, लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं से परिचित कराया जा रहा है।

    राज्य सरकार के अनुसार, यह आयोजन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा के नेतृत्व, प्रबंध संचालक विवेक आचार्य तथा उपमहाप्रबंधक पूनम शर्मा के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का समापन 30 जून को होगा।

    पर्यटन विभाग का मानना है कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर्यटन प्रचार का अत्यंत प्रभावी माध्यम बन चुका है। इस अभियान से तैयार सामग्री प्रदेश के पर्यटन स्थलों की वैश्विक दृश्यता बढ़ाने, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार, हस्तशिल्प, लोककला, ग्रामीण पर्यटन तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देने में सहायक होगी।

    मुख्य बिंदु
    26 से 30 जून तक आयोजित हो रहा है पांच दिवसीय इन्फ्लुएंसर मीट एवं FAM टूर।
    सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स मैनपाट, सतरेंगा और रामगढ़ महोत्सव का कर रहे हैं भ्रमण।
    डिजिटल कंटेंट के माध्यम से छत्तीसगढ़ पर्यटन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेगा प्रचार।
    अभियान का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

    रायपुर ।
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की डिजिटल सुशासन पहल लगातार आम नागरिकों के जीवन को सरल बना रही है। सेवा सेतु पोर्टल प्रदेश में शासकीय सेवाओं की ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध उपलब्धता का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है, जिससे नागरिकों का समय और धन बचने के साथ शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है।
    इस पहल का एक प्रेरक उदाहरण रायगढ़ जिले की पुसौर तहसील के ग्राम भाठनपाली निवासी अजय कुमार प्रधान हैं। लंबे समय से स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए उन्हें सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे थे। समय और आर्थिक नुकसान के बावजूद उन्हें समय पर प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहा था, जिससे वे कई सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने से भी वंचित रह जाते थे।
    सेवा सेतु पोर्टल की जानकारी मिलने के बाद अजय कुमार प्रधान ने आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन किया। निर्धारित समय-सीमा में उनका आवेदन स्वीकृत हुआ और उन्हें स्थायी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया। इससे उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हुआ और रोजगार के नए अवसर भी खुल गए।
    प्रमाण पत्र मिलने के बाद उन्होंने रोजगार सहायक के पद के लिए आवेदन किया। अब वे अपने गांव के लोगों को भी जाति, आय, निवास सहित अन्य शासकीय प्रमाण पत्रों के लिए सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
    अजय कुमार प्रधान का कहना है कि सेवा सेतु पोर्टल ने सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर खत्म कर दिए हैं। अब घर बैठे आवेदन, समय पर सेवा और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।
    राज्य सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुवाई में डिजिटल तकनीक के जरिए सुशासन को गांव-गांव तक पहुंचाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। सेवा सेतु पोर्टल प्रशासन को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने के साथ-साथ नागरिकों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    मुख्य बिंदु
    सेवा सेतु पोर्टल से घर बैठे मिला स्थायी जाति प्रमाण पत्र।
    रायगढ़ के अजय कुमार प्रधान की वर्षों पुरानी समस्या का हुआ समाधान।
    प्रमाण पत्र मिलने के बाद रोजगार सहायक पद के लिए किया आवेदन।
    ग्रामीणों को ऑनलाइन शासकीय सेवाओं का लाभ लेने के लिए कर रहे हैं प्रेरित।
    सरकार के अनुसार, डिजिटल सुशासन से प्रशासन में पारदर्शिता और नागरिकों का विश्वास बढ़ा है।

    रायपुर ।
    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सोमवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत ने सौजन्य भेंट की।
    मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए राज्यपाल श्री गहलोत का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें प्रदेश की समृद्ध आदिवासी कला एवं सांस्कृतिक धरोहर 'बस्तर आर्ट' का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
    मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच विभिन्न समसामयिक विषयों, जनहित से जुड़े मुद्दों तथा आपसी रुचि के विषयों पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा हुई। यह भेंट औपचारिक एवं शिष्टाचार मुलाकात के रूप में संपन्न हुई।
    मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।

    मुख्य बिंदु:

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत की सौजन्य भेंट।
    मुख्यमंत्री निवास, रायपुर में हुई मुलाकात।
    राज्यपाल का बस्तर आर्ट के प्रतीक चिन्ह से सम्मान।
    समसामयिक एवं जनहित के विभिन्न मुद्दों पर आत्मीय चर्चा।

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर विधानसभा सीट को लेकर नया कानूनी मोड़ आ गया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी की चुनाव याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। याचिका में उन्होंने भाजपा नेता एवं वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की भवानीपुर सीट से हुई जीत को चुनौती देते हुए मतगणना के दौरान कथित अनियमितताओं और धांधली के आरोप लगाए हैं।

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चुनावी साक्ष्यों के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) तथा संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों को निर्देश दिया है कि चुनाव में प्रयुक्त EVM और VVPAT मशीनों को सुरक्षित रखा जाए। साथ ही मतगणना केंद्र शेखावाटी मेमोरियल गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल के भीतर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी संरक्षित रखने का आदेश दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी अनुमति के बिना कोई भी रिकॉर्डिंग नष्ट या डिलीट नहीं की जाएगी।

    उच्च न्यायालय ने मामले में दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई लगभग दो महीने बाद निर्धारित की गई है।

    इस बीच, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दो सीटों से जीतने के बाद संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने मई 2026 में विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस को अपना त्यागपत्र सौंपा। अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखने का निर्णय लिया, जहां उन्होंने ममता बनर्जी को 15,105 मतों के अंतर से पराजित किया था। वहीं नंदीग्राम सीट पर उन्होंने टीएमसी प्रत्याशी पवित्र कर को 9,665 वोटों से हराया था।

    नंदीग्राम सीट खाली होने के बाद वहां अब उपचुनाव कराया जाएगा, जबकि भवानीपुर सीट का चुनाव परिणाम फिलहाल न्यायिक समीक्षा के दायरे में रहेगा।

    राजनीतिक महत्व:

    हाईकोर्ट का यह आदेश चुनाव परिणाम पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं है, बल्कि संभावित न्यायिक जांच के लिए चुनावी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया का हिस्सा है। अंतिम फैसला न्यायालय में सभी पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।

    आयुक्त के नोटिस में 'पार्षद' पद का उल्लेख नहीं, रेशमा सोनकर ने राष्ट्रपति से मुख्यमंत्री तक भेजने की तैयारी की प्रतिवेदन की प्रतिलिपि; भाजपा की 'ट्रिपल इंजन सरकार' में बढ़ी सियासी चर्चा

    दुर्ग । नगर पालिक निगम दुर्ग के आयुक्त सुमित अग्रवाल द्वारा वार्ड क्रमांक 58 की निर्वाचित महिला पार्षद रेशमा सोनकर को जारी नोटिस अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मामला संवैधानिक मर्यादा, स्थानीय स्वशासन, महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मान और भाजपा संगठन की आंतरिक राजनीति तक पहुंच गया है।

    24 जून को जारी निगम के नोटिस में पार्षद को केवल "श्रीमती रेशमा सोनकर" संबोधित किया गया है, जबकि उनके निर्वाचित पद "पार्षद, वार्ड क्रमांक 58" का उल्लेख नहीं किया गया। इसी बिंदु को लेकर पार्षद ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे निर्वाचित जनप्रतिनिधि की संस्थागत गरिमा की अनदेखी बताया है।

    क्या है पूरा मामला?

    नगर निगम ने नोटिस में आरोप लगाया है कि स्वच्छ भारत मिशन (SBM 2.0) के अंतर्गत वार्ड 57 में प्रस्तावित मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) निर्माण कार्य के दौरान 21 जून को कार्य में बाधा उत्पन्न की गई, ठेकेदार और मजदूरों को डराया गया तथा शासकीय कार्य प्रभावित हुआ। निगम ने इसे शासन की महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी है।

    दूसरी ओर पार्षद रेशमा सोनकर ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि उन्होंने न किसी कर्मचारी, अधिकारी अथवा ठेकेदार से दुर्व्यवहार किया और न ही किसी शासकीय कार्य में बलपूर्वक बाधा डाली। उन्होंने प्रशासन से आरोपों के समर्थन में सीसीटीवी फुटेज, वीडियो, स्वतंत्र गवाह, पुलिस रिकॉर्ड अथवा अन्य विधिसम्मत साक्ष्य सार्वजनिक करने की मांग की है।

    संविधान का दिया हवाला

    अपने विस्तृत जवाब में पार्षद ने संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19, 21 तथा 74वें संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा है कि जनता की समस्याओं को उठाना निर्वाचित जनप्रतिनिधि का संवैधानिक दायित्व है। उनका कहना है कि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं से ऊपर नहीं हो सकता।

    पर्यावरणीय नियमों पर भी उठाए सवाल

    पार्षद का दावा है कि संबंधित स्थल पर ठोस अपशिष्ट जलाया जा रहा है, जो राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि उनके पास फोटो, वीडियो और अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

    केरल दौरे के बीच गरमाई राजनीति

    उल्लेखनीय है कि 24 जून को ही निगम के पार्षदों का दल केरल अध्ययन दौरे पर रवाना हुआ। इसी दौरान नोटिस का मुद्दा सामने आने के बाद भाजपा के भीतर भी चर्चा तेज हो गई। राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार होने के बावजूद एक भाजपा की महिला पार्षद के साथ हुए इस घटनाक्रम पर पार्टी नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी क्यों है।

    नगर निगम की राजनीति में पहले से चल रही गुटबाजी की चर्चाओं के बीच यह प्रकरण नए विवाद का कारण बन गया है। विपक्ष के साथ-साथ राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि इससे प्रशासन और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय पर सवाल खड़े हुए हैं।

    राष्ट्रपति से मुख्यमंत्री तक भेजा जाएगा प्रतिवेदन

    रेशमा सोनकर ने बताया कि वे इस पूरे मामले का विस्तृत प्रतिवेदन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री, शिक्षा मंत्री, महापौर, मुख्य सचिव, नगरीय प्रशासन विभाग, संभागायुक्त और कलेक्टर सहित विभिन्न संवैधानिक एवं प्रशासनिक प्राधिकारियों को भेजेंगी।

    अब सबकी नजर इन सवालों पर

    अब इस मामले में कई महत्वपूर्ण प्रश्न चर्चा के केंद्र में हैं—

    क्या नोटिस जारी करते समय निर्वाचित जनप्रतिनिधि के पद का उल्लेख किया जाना चाहिए था?
    क्या निगम प्रशासन के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं?
    क्या पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी?
    भाजपा नेतृत्व और महापौर अलका बाघमार इस विवाद पर क्या रुख अपनाएंगी?
    क्या यह मामला स्थानीय स्वशासन और प्रशासनिक अधिकारों की नई बहस का आधार बनेगा?

    नोट: यह समाचार उपलब्ध निगम नोटिस तथा पार्षद रेशमा सोनकर द्वारा लगाए गए आरोपों और दावों पर आधारित है। निगम प्रशासन का पक्ष नोटिस में दर्ज आरोपों तक सीमित है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण सक्षम जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

    पंजीयन और प्री-रजिस्टर्ड हितग्राहियों के निराकरण में देशभर में प्रथम स्थान, जांजगीर-चांपा ने 96% लक्ष्य पूरा कर प्रदेश में किया शीर्ष प्रदर्शन

    रायपुर । प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के तहत गर्भवती एवं शिशुवती माताओं के पंजीयन के लिए 15 जून से 15 जुलाई तक चलाए जा रहे विशेष अभियान में छत्तीसगढ़ ने देशभर में प्रथम स्थान हासिल कर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। राज्य ने अभियान के शुरुआती सिर्फ 9 दिनों में ही 72 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत कार्यप्रणाली का परिचय दिया है।

    महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, छत्तीसगढ़ ने न केवल नए हितग्राहियों के पंजीयन में बल्कि प्री-रजिस्टर्ड हितग्राहियों के निराकरण में भी सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान प्राप्त किया है। इस सफलता का श्रेय विभागीय अधिकारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पर्यवेक्षकों तथा मैदानी अमले के समन्वित प्रयासों को दिया गया है।

    प्रदेश में जांजगीर-चांपा जिला ने 96 प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया। इसे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में जिले की प्रभावी कार्यप्रणाली का परिणाम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत प्रथम जीवित संतान के जन्म पर पात्र महिलाओं को 5,000 रुपये तथा दूसरी संतान के रूप में बालिका जन्म होने पर 6,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। योजना का उद्देश्य गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षित मातृत्व के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

    इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सभी सहयोगी संस्थाओं को बधाई देते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ शीघ्र ही शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर देश के लिए एक आदर्श मॉडल बनेगा।

    वहीं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इसे विभाग की सामूहिक प्रतिबद्धता और सतत निगरानी का परिणाम बताते हुए सभी पात्र गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं से 15 जुलाई तक विशेष अभियान के दौरान अपना पंजीयन कराने की अपील की, ताकि वे शासन की इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ प्राप्त कर सकें।

    पीटा एक्ट के तहत छापेमारी, तीन युवक और तीन युवतियां हिरासत में; लॉज संचालक की भूमिका की भी जांच

    दुर्ग । कोतवाली थाना पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) की संयुक्त टीम ने रविवार को शहर के एक लॉज में छापेमारी कर कथित देह व्यापार का भंडाफोड़ किया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तीन युवकों और तीन युवतियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।

    पुलिस के अनुसार, कार्रवाई अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम (PITA) के तहत की गई। जिस भवन में छापेमारी हुई, उसके भूतल पर मिठाई की दुकान एवं आइसक्रीम पार्लर संचालित है, जबकि ऊपरी मंजिल पर स्थित लॉज में कथित तौर पर अवैध गतिविधियां संचालित होने की सूचना मिली थी।

    छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से कुछ दस्तावेज एवं जांच से संबंधित अन्य सामग्री भी जब्त की है। प्रारंभिक जांच में यह भी जानकारी सामने आई है कि लॉज में प्रवेश केवल पूर्व से दर्ज मोबाइल नंबरों के आधार पर ही दिया जाता था। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    कोतवाली पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क, लॉज संचालक की भूमिका तथा संभावित अन्य लोगों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध पीटा एक्ट सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

    नोट: यह कार्रवाई पुलिस की प्रारंभिक जांच पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

    मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तराखंड जैसे भाजपा शासित राज्यों ने अपने प्रदेश के हित में मनरेगा के भार का विरोध किया

    रायपुर/ शौर्यपथ / भाजपा शासित राज्य मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तराखंड ने मनरेगा में राज्य पर पड़ने वाले बोझ का विरोध किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने मनरेगा के जी राम जी स्वरूप का अनुमोदन करते हुए केंद्र और राज्य का खर्च 60 एवं 40 प्रतिशत की मंजूरी दे दिया है। यह राज्य की जनता पर बोझ है। छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल को भी मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के समान इस कानून पर राज्य के हित में आपत्ति जताना था। यही नहीं भाजपा शासित राज्यों ने किसानी काम के समय मनरेगा के काम बंद करने पर भी आपत्ति जताया है जबकि छत्तीसगढ़ सरकार में बैठे नेताओं ने अपनी कुर्सी बचाने राज्य के हित में विरोध करने की हिम्मत नहीं दिखाई।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि ने कहा कि बड़ा प्रश्न यह है कि राज्य के वित्तीय संसाधन सीमित है। राज्य का सारा टैक्स तो जीएसटी के माध्यम से केंद्र लेता है फिर मनरेगा का बोझ राज्य पर डालने से राज्य के अन्य कार्य प्रभावित होंगे। भाजपा सरकार पिछले ढाई साल से वित्तीय रोना रोकर वैसे ही कोई नई योजना नहीं शुरू कर पाई है, अब मनरेगा का भार उठाने के बाद राज्य के और काम भी प्रभावित होंगे। यह फैसला राज्य की जनता के साथ धोखा है। राज्य को मनरेगा के मामले में केंद्र के सामने विरोध प्रकट करना था कि पूरा खर्च केंद्र उठाये या उसके लिए विशेष सहायता करे।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल के द्वारा मनरेगा के वित्तीय प्रावधान में 60-40 की मंजूरी दिये जाने का निर्णय राज्य के जनता पर अन्याय है। अभी तक मनरेगा केंद्र प्रवर्तित योजना थी, अब इसमें 40 प्रतिशत भाग राज्य को देना होगा। केंद्र सरकार की चाटुकारिता में साय सरकार ने राज्य के हितों का ख्याल नहीं रखा। राज्य के हिस्से को 40 प्रतिशत करने के केंद्र के फैसले का विरोध करने के बजाय इस राज्य मंत्रिमंडल के द्वारा अनुमोदित कर दिया गया। साथ ही इसके लिए 4000 करोड़ रू. का वित्तीय प्रावधान भी किया गया है, जबकि अभी तक राज्य के मनरेगा पर 6200 करोड़ रू. खर्च होते थे, इसका मतलब है भले घोषित तौर पर दिन बढ़ा दिया लेकिन सरकार की नीयत मनरेगा के काम में कटौती की है जब बजट कम है तो ज्यादा दिन कैसे काम देंगे? जीरामजी कानून पास हुए 8 महीने हो गये। अमूमन 15 जून के बाद मनरेगा के काम बंद हो जाते है। सरकार अब निर्णय ले रही मतलब इस फैसले से 4 माह तक काम नहीं होगा, उसके बाद काम शुरू होगा।

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