August 25, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

      रायपुर/शौर्यपथ। रक्षाबंधन के अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राखी में भारतीय सेना के जवानों के सम्मान में भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। COSA Army के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में 72 सैन्यकर्मियों ने सहभागिता की।
    विद्यालय की छात्राओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधकर सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। वहीं विद्यार्थियों ने नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर सैनिकों के नाम भावपूर्ण संदेश लिखकर उनके साहस, त्याग और देशसेवा को नमन किया।
    इस दौरान सैन्यकर्मियों ने विद्यार्थियों से संवाद कर सेना के जीवन, अनुशासन और देशसेवा के अनुभव साझा किए तथा उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में स्टेशन मुख्यालय, रायपुर के प्रशासनिक कमांडेंट कर्नल अभिषेक उनियाल, कर्नल अरिंदम मजूमदार, सूबेदार राज किशोर, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
    राखी के इस आयोजन ने सैनिकों और विद्यार्थियों के बीच स्नेह, सम्मान और राष्ट्रभक्ति का भाव और मजबूत किया।

       रायपुर / शौर्यपथ / इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV)) की बी.एस.सी. (कृषि) द्वितीय वर्ष की कीटशास्त्र (एजीसीएच 221) परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक करने के मामले में रायपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट और थाना तेलीबांधा की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्यवाही करते हुए घटना के 36 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी प्रोफेसर सहित कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

    सुई और नुकीले औजार से छेदा लिफाफा, वीडियो बनाकर 11 हजार में बेचा
    पुलिस खुलासे के अनुसार, इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग में पदस्थ प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया (38 वर्ष) है। आरोपी प्रोफेसर पिछले एक साल से रायपुर कृषि महाविद्यालय से उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र ले जाने का काम कर रहा था। 17 अगस्त को आरोपी ने आगामी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र प्राप्त किए। इसके बाद वह 20 अगस्त को होने वाली कीटशास्त्र परीक्षा के प्रश्न पत्र का लिफाफा चुपके से अपने घर ले गया। वहां उसने सुई और नुकीले औजार से लिफाफे में छोटा छेद किया और मोबाइल कैमरे से प्रश्न पत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली। आरोपी ने यह लीक कंटेंट अपने ही कॉलेज के छात्र अजय नायक को 11,000 रुपये में बेचा, जिसके बाद यह प्रश्न पत्र अन्य छात्रों और सोशल मीडिया ग्रुप्स में वायरल हो गया।

    100 से अधिक पुलिस टीमों ने खंगाले डिजिटल साक्ष्य
    20 अगस्त की सुबह परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले कवर्धा कृषि महाविद्यालय के ई-मेल और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रश्न पत्र वायरल होने की सूचना मिली। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं परीक्षा प्रभारी डॉ. एन. आर. रंगारे की शिकायत पर थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 360/26 दर्ज किया गया। पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्री अमित तुकाराम कांबले के मार्गदर्शन तथा पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) श्री स्मृतिक राजनाला एवं पुलिस उपायुक्त (उत्तर जोन) श्री तारकेश्वर पटेल की सतत मॉनिटरिंग में एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट तथा थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त कार्यवाही के लिए 100 से अधिक पुलिस टीमों का गठन किया गया। रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम और बिलासपुर में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। साइबर विंग ने व्हाट्सएप और सोशल मीडिया टाइमलाइन का सूक्ष्म विश्लेषण करते हुए दुर्ग निवासी अनुज मिंज को हिरासत में लिया, जिससे पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।

    जब्त सामग्री एवं कानूनी कार्यवाही
    पुलिस ने आरोपियों के पास से नगद राशि 11 हजार रूपए, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण 06 मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर,अन्य सामग्रियों में सुई, सुजा और फेविकोल जब्त किया है। आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2008 की धारा 4, 5, 10 तथा बीएनएस (BNS) की धारा 316 के तहत मामला पंजीकृत किया गया है। प्रकरण में 02 अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

    गिरफ्तार आरोपियों की सूची
    आरोपियों में योगेश सोनकेसरिया (मुख्य आरोपी - प्रोफेसर) निवासी सिवनी (म.प्र.), हाल पता - चंदखुरी, दुर्ग, अजय नायक (छात्र) निवासी बलौदा बाजार, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग, त्रिदेव पटेल (छात्र) निवासी महासमुंद, हाल पता - आनंद विहार, दुर्ग, नितिन पाण्डेय (छात्र) निवासी बस्तर, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग, अनुज मिंज (छात्र) निवासी जशपुर, हाल पता - पोटिया चौक, दुर्ग और आदित्य साहू (छात्र) निवासी बालोद, हाल पता - मीनाक्षी नगर, बोरसी, दुर्ग शामिल हैं।

      रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘जशपुर : एक परिचय’ का विमोचन किया। उन्होंने प्रकाशन को जशपुर की विशिष्ट पहचान, प्रशासनिक अनुभवों और विकास की संभावनाओं को देश-दुनिया के सामने लाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
    पुस्तक में आजादी के बाद जशपुर की प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलाव, सुशासन, सामाजिक-आर्थिक विकास, जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और भविष्य की विकास संभावनाओं का समग्र अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जशपुर की पहाड़ियां, वन, नदियां, जलप्रपात और समृद्ध जनजातीय परंपराएं इसे छत्तीसगढ़ के विशिष्ट अंचलों में स्थान देती हैं। स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
    उन्होंने कहा कि कृषि, वनोपज, पर्यटन, स्थानीय उत्पादों तथा महिला और युवा उद्यमिता के माध्यम से जशपुर की अर्थव्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है। यह अध्ययन प्रशासन को जिले की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और भविष्य की विकास प्राथमिकताएं तय करने में उपयोगी आधार प्रदान करेगा।
    उल्लेखनीय है कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के राष्ट्रीय अभियान के तहत प्रत्येक क्षेत्रीय शाखा को संबंधित राज्य के कम से कम एक जिले का व्यापक अध्ययन करने का दायित्व दिया गया है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ की 33 जिलों में से जशपुर का चयन किया गया। वर्ष 1998 में पृथक जिला बनने से पहले जशपुर रायगढ़ जिले की तहसील था। अध्ययन में रायगढ़ जिला गजेटियर, जनगणना 2011, केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रकाशनों, विभागीय रिपोर्टों और जिला प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया गया है।
    यह पुस्तक पारंपरिक जिला गजेटियर के बजाय जशपुर के प्रशासन, समाज, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और विकास यात्रा का संक्षिप्त समग्र दस्तावेज है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह पुस्तक प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ बनेगी तथा भविष्य में जशपुर पर होने वाले विस्तृत शोध और विकासपरक अध्ययनों का आधार तैयार करेगी।
    विमोचन अवसर पर भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर के चेयरमैन एवं पूर्व मुख्य सचिव सुयोग्य कुमार मिश्रा, वाइस चेयरमैन एवं पूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. इंदिरा मिश्रा तथा वाइस चेयरमैन, पूर्व मुख्य सचिव एवं वर्तमान छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह उपस्थित रहे।

    पांच दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट में प्रकृति, संस्कृति, परंपरा और जनसरोकार के विविध रंगों ने खींचा ध्यान

    रायपुर / तस्वीरें बीते हुए समय को वर्तमान से जोड़ती हैं। कभी वे इतिहास का दस्तावेज बनती हैं तो कभी जीवन के भूले-बिसरे पलों को फिर से जीवंत कर देती हैं। राजधानी रायपुर में आज कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपनी वर्षों पुरानी तस्वीरों के माध्यम से सार्वजनिक जीवन के लंबे सफर को एक बार फिर जिया। कहीं पहली बार विधायक बनने की स्मृतियां थीं, तो कहीं गांव, खेत और मिट्टी से जुड़े जीवन की झलक। इस दौरान मुख्यमंत्री का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने स्वयं कैमरा संभाला और एक फोटो पत्रकार की तस्वीर खींचकर इस अवसर को यादगार बना दिया।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज रायपुर प्रेस क्लब द्वारा विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट ‘दृश्य संवाद 2026’ के समापन समारोह में शामिल हुए। 19 अगस्त से आयोजित इस फेस्ट में मुख्यमंत्री ने फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया और फोटो पत्रकारों तथा ओपन कैटेगरी के प्रतिभागियों द्वारा खींची गई तस्वीरों की सराहना की।

    प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने जब अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी पुरानी तस्वीरें देखीं तो उनके साथ जुड़ी अनेक स्मृतियां भी ताजा हो गईं। वर्षों पुराने चित्रों को देखते हुए उन्होंने अपने साथ मौजूद लोगों से कई रोचक संस्मरण साझा किए। अपनी पहली बार विधायक बनने के समय की एक तस्वीर देखकर मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय उन्होंने विशेष रूप से सफारी सूट सिलवाया था। इस छोटे से संस्मरण ने वहां मौजूद लोगों के बीच सहज और आत्मीय माहौल बना दिया।

    प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री श्री साय के ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से जुड़ी तस्वीरें भी प्रदर्शित की गई थीं। हल चलाते हुए अपनी तस्वीर देखकर उन्होंने खेती के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि गांव और खेती-किसानी से जुड़ी तस्वीरें उन्हें अपनी मिट्टी, खेत-खलिहान और पुराने दिनों की याद दिलाती हैं। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण जीवन से जुड़े अपने अनुभव भी फोटो पत्रकारों के साथ साझा किए।

    प्रदर्शनी के दौरान एक दिलचस्प क्षण तब आया, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने खुद कैमरा थाम लिया। उन्होंने फोटो पत्रकार की भूमिका निभाते हुए एक फोटो जर्नलिस्ट को कैमरे में कैद किया। आमतौर पर मुख्यमंत्री की गतिविधियों और भाव-भंगिमाओं को अपने कैमरे में दर्ज करने वाले फोटो पत्रकार के सामने इस बार स्वयं मुख्यमंत्री कैमरे के पीछे थे। यह सहज और आत्मीय पल ‘दृश्य संवाद 2026’ के खास आकर्षणों में शामिल रहा।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने फोटो पत्रकारों के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि तस्वीरें केवल किसी घटना या क्षण को दर्ज करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समय, समाज और स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजती हैं। कई बार एक तस्वीर बिना शब्दों के पूरी कहानी कह देती है। फोटो पत्रकार कठिन परिस्थितियों में भी घटनास्थल पर पहुंचकर समाज और इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों को कैमरे में दर्ज करते हैं। उनका काम पत्रकारिता का महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पक्ष है।

    मुख्यमंत्री ने रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित ‘दृश्य संवाद 2026’ की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन फोटोग्राफी और फोटो पत्रकारिता की रचनात्मकता को मंच प्रदान करते हैं। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को अनुभवी फोटो पत्रकारों के काम को देखने, समझने और सीखने का अवसर भी मिलता है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी फोटो पत्रकारों, प्रतिभागियों और रायपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों को सफल आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    तस्वीरों में दिखे प्रकृति, संस्कृति और जनसरोकार के विविध रंग

    रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित पांच दिवसीय ‘दृश्य संवाद 2026’ में प्रेस फोटो पत्रकारों के साथ ओपन कैटेगरी के प्रतिभागियों की तस्वीरों को भी स्थान दिया गया। प्रकृति एवं पर्यावरण, संस्कृति एवं परंपरा तथा समाचार एवं जनसरोकार सहित विभिन्न विषयों पर प्रदर्शित तस्वीरों ने छत्तीसगढ़ के जीवन, समाज और परिवेश के विविध रंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। पांच दिनों के दौरान बड़ी संख्या में पत्रकारों, विद्यार्थियों, फोटोग्राफी प्रेमियों और नागरिकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

    समापन अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री मोहन तिवारी, महासचिव श्री गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष श्री दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष श्री दिनेश यदु, संयुक्त सचिव सुश्री निवेदिता साहू एवं श्री भूपेश जांगड़े उपस्थित थे। इस अवसर पर फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट के संयोजक श्री दीपक पांडे, वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट श्री गोकुल सोनी, श्री प्रदीप डडसेना, श्री राजकुमार चतुर्वेदी, श्री रुपेश यादव, श्री नरेंद्र बंगाले, श्री सुधीर सागर, श्री रमन हलवाई, श्री किशन लोखंडे, श्री मनोज देवांगन, श्री विजय देवांगन, श्री विनय घाड़गे, श्री पंकज चौहान, श्री हीरा मानिकपुरी, श्री त्रिलोचन मानिकपुरी, श्री हेमंत गोस्वामी, श्री जय गोस्वामी, श्री पंकज सिंह सहित बड़ी संख्या में फोटो जर्नलिस्ट एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।

    30वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले मिली, नियमित आर्थिक सहायता से परिवार को मिला संबल

    रायपुर / महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनकी दैनिक जरूरतों में सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए आर्थिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। योजना के तहत पात्र महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह 1,000 रुपये की राशि अंतरित की जा रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह सहायता महिलाओं को अपनी जरूरतों के साथ परिवार और त्योहारों से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद कर रही है।

    सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सकलो की निवासी श्रीमती सालू सिंह भी महतारी वंदन योजना की लाभार्थी हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें योजना के तहत हर माह 1,000 रुपये की राशि प्राप्त होती है। रक्षाबंधन से पहले योजना की 30वीं किस्त उनके खाते में पहुंची है, जिससे इस बार त्योहार की तैयारियों के लिए उन्हें विशेष आर्थिक सहारा मिला है।

    महतारी वंदन की राशि से भाई के लिए खरीदेंगी राखी और मिठाई

    सालू सिंह ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर वे महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का उपयोग अपने भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदने में करेंगी। उनके लिए योजना की राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि अपने भाई के साथ प्रेम और स्नेह का पर्व पूरे उत्साह से मनाने का माध्यम भी बनी है।

    उन्होंने कहा कि समय पर राशि मिलने से त्योहार की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करना आसान हो जाता है। अपने खाते में राशि आने से उन्हें आर्थिक रूप से आत्मविश्वास मिलता है और वे अपनी आवश्यकता के अनुसार खर्च का निर्णय स्वयं ले पाती हैं।

    सीधे खाते में राशि मिलने से बढ़ा आर्थिक आत्मविश्वास

    महतारी वंदन योजना के तहत सहायता राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे महिलाओं को अपनी जरूरतों के अनुसार राशि का उपयोग करने की स्वतंत्रता मिल रही है। घरेलू आवश्यकताओं से लेकर बच्चों, परिवार और त्योहारों से जुड़े खर्चों तक, महिलाएं इस राशि का उपयोग अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार कर रही हैं।

    सालू सिंह बताती हैं कि हर माह मिलने वाली सहायता परिवार के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहारा है। इससे उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ विशेष अवसरों और त्योहारों की तैयारियां करने में भी सुविधा मिलती है।

    मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार, भाई के साथ विष्णु भैया को भी राखी भेजने की इच्छा

    महतारी वंदन योजना से मिल रहे लाभ के लिए सालू सिंह ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को भी धन्यवाद दिया।

    रक्षाबंधन से पहले 30वीं किस्त मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने भाई को राखी बांधकर यह पर्व पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाएंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें भी राखी भेजने की भावना जाहिर की।

    आर्थिक संबल से त्योहार की खुशियां हुईं दोगुनी

    सालू सिंह की कहानी बताती है कि नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं के जीवन में छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है। महतारी वंदन योजना से मिली राशि ने उनके लिए रक्षाबंधन की तैयारियों को आसान बनाया है और त्योहार को लेकर उनके चेहरे पर खुशी और उत्साह बढ़ाया है।

    महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक संबल देने के साथ उन्हें अपनी जरूरतों और खुशियों के लिए निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी दे रही है। रक्षाबंधन पर भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदने की सालू सिंह की खुशी, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की इसी बदलती तस्वीर को सामने लाती है।

    निजी भूमि पर तालाब बनाकर शुरू किया मत्स्य पालन, विभिन्न आजीविका गतिविधियों से बनीं लखपति दीदी

    बहनों की तरक्की, परिवार की शान—विष्णु भैया का यही अभियान

    रायपुर, / ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसरों का आधार बन रहा है। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन सहित विभिन्न गतिविधियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम गुमगराखुर्द की रहने वाली श्रीमती जय कुमारी भी बिहान योजना से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। लक्ष्मी स्व-सहायता समूह की सदस्य जय कुमारी ने अपनी निजी भूमि पर तालाब का निर्माण कर मत्स्य पालन को आजीविका का माध्यम बनाया है। विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर उन्होंने लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

    निजी जमीन पर तालाब, अब मछलियों से बढ़ेगी आमदनी

    जय कुमारी ने बताया कि उन्होंने अपनी निजी भूमि पर तालाब का निर्माण कराया और इसके बाद उसमें मत्स्य पालन शुरू किया। ‘बिहान’ योजना के माध्यम से उन्हें मछली बीज की सहायता मिल रही है। मत्स्य विभाग से 50 प्रतिशत अनुदान पर मछली बीज उपलब्ध होने से उन्हें मत्स्य पालन गतिविधि को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है।

    वे बताती हैं कि वे पहले भी मत्स्य पालन कर चुकी हैं। पूर्व में इस गतिविधि से अच्छी आमदनी होने से उनका उत्साह बढ़ा और उन्होंने इसे दोबारा व्यवस्थित रूप से शुरू करने का निर्णय लिया। अब निजी भूमि पर उपलब्ध संसाधन का बेहतर उपयोग करते हुए वे मत्स्य पालन को अपनी नियमित आजीविका का हिस्सा बना रही हैं।

    पुराने अनुभव ने दिखाई नई राह

    जय कुमारी के लिए मत्स्य पालन केवल आय का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर है। पहले के अनुभव से उन्हें मत्स्य पालन की प्रक्रिया की समझ है। इसी अनुभव का लाभ लेते हुए वे अपने तालाब में मछली पालन को बेहतर तरीके से संचालित कर रही हैं।

    योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता ने उनके प्रयासों को मजबूती दी है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध भूमि और पानी के संसाधन का उपयोग कर वे अपने परिवार की आय में अतिरिक्त योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

    बिहान से महिलाओं को मिल रहे आजीविका के नए अवसर

    ‘बिहान’ योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को उनकी रुचि, क्षमता और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इससे महिलाएं स्वयं रोजगार के अवसर विकसित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।

    जय कुमारी की कहानी बताती है कि स्थानीय संसाधन, महिला की मेहनत और सरकारी सहयोग मिलकर स्थायी आजीविका का मजबूत आधार तैयार कर सकते हैं। निजी भूमि पर तालाब निर्माण और मत्स्य पालन के माध्यम से उन्होंने आय का अतिरिक्त साधन विकसित किया है, जिससे आर्थिक आत्मनिर्भरता की उनकी राह और मजबूत हुई है।

    “बहनों की तरक्की, परिवार की शान—विष्णु भैया का यही अभियान”

    अपनी सफलता और शासन से मिले सहयोग के लिए जय कुमारी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिहान योजना के माध्यम से उन्हें मत्स्य पालन के लिए मछली बीज की सहायता मिल रही है, जिससे अपनी आजीविका गतिविधि को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन से उन्हें पहले भी अच्छी आमदनी प्राप्त हुई है और वे आगे भी इस गतिविधि को निरंतर बढ़ाना चाहती हैं। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को आजीविका से जोड़ने वाली योजनाओं के लिए शासन के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया।

    जय कुमारी की कहानी इस विश्वास को मजबूत करती है कि अवसर और सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने आसपास उपलब्ध संसाधनों को आजीविका में बदलकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख सकती हैं। निजी भूमि के एक तालाब से शुरू हुआ उनका यह प्रयास अब परिवार की आय बढ़ाने और आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य की उम्मीद बन रहा है।

    मुख्यमंत्री ने युवा साहित्यकार श्री करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का किया विमोचन
    हर घर में हो छोटी-सी लाइब्रेरी, पढ़ने की संस्कृति को दें बढ़ावा : मुख्यमंत्री श्री साय

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय सभागृह में युवा साहित्यकार श्री करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसे सजग करने और सही दिशा दिखाने का भी सशक्त माध्यम है। ‘कोहरा’ जैसे उपन्यास सामाजिक विषयों को विमर्श के केंद्र में लाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने युवा साहित्यकार श्री करुणा सागर पण्डा को उनके उपन्यास के प्रकाशन पर बधाई देते हुए कहा कि संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण विषय पर लेखन के लिए साहस की आवश्यकता होती है। रचनाकार जब समाज की समस्याओं और वास्तविकताओं को अपनी लेखनी का विषय बनाते हैं, तो साहित्य सामाजिक चेतना का माध्यम बनता है।

    मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की धरती ने देश को अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार दिए हैं। विनोद कुमार शुक्ल जैसे मूर्धन्य रचनाकार को साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ मुक्तिबोध की सृजनभूमि रही है और पदुमलाल पन्नालाल बख्शी जैसे साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के रचनाकार इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और समकालीन विषयों को साहित्य के माध्यम से समाज के सामने ला रहे हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सिनेमा और साहित्य ने समय-समय पर समाज के संवेदनशील विषयों को सामने लाने का काम किया है। उन्होंने ‘द केरल स्टोरी’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन और मार्मिक विषयों को उठाने पर मतभेद और विरोध के स्वर भी सामने आते हैं, लेकिन रचनाकार का दायित्व है कि वह अपनी दृष्टि और संवेदना के साथ समाज के सामने विषय रखे। उन्होंने ‘कोहरा’ के लेखक के साहसिक प्रयास की सराहना की।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अच्छी पुस्तकें अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपने घरों में छोटी-सी लाइब्रेरी बनाने और बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि घर की समृद्धि केवल उसकी भव्यता में नहीं, बल्कि वहां उपलब्ध पुस्तकों और अध्ययन की संस्कृति में भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें पीढ़ियों के बीच ज्ञान, संस्कार और अनुभव का सेतु बनती हैं। इसलिए हर परिवार को अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकों का संग्रह अवश्य रखना चाहिए।

    नक्सलवाद की अनकही पीड़ा को भी सामने लाएं रचनाकार

    मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर नक्सलवाद का उल्लेख करते हुए साहित्यकारों और रचनाकारों से इससे प्रभावित लोगों की पीड़ा और संघर्ष को भी अपनी रचनाओं का विषय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने लंबे समय तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और राज्य सरकार के सतत प्रयासों से प्रदेश में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है और बस्तर शांति एवं विकास के नए दौर की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की हिंसा में अनेक निर्दोष लोगों ने अपने परिजनों को खोया, बच्चों की शिक्षा और भविष्य प्रभावित हुआ तथा दशकों तक अनेक क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से दूर रहे। नक्सलवाद की इस मानवीय त्रासदी और इसके कारण समाज पर पड़े प्रभावों को भी व्यापक रूप से सामने लाने की आवश्यकता है। साहित्यकार अपनी संवेदनशील लेखनी के माध्यम से उन परिवारों की पीड़ा, संघर्ष और बदलते बस्तर की कहानी को देश-दुनिया तक पहुंचा सकते हैं।

    कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री सुनील गंगाराम गर्ग ने कहा कि भारत की संस्कृति विविधता और विशिष्टता के साथ सहअस्तित्व को स्वीकार करती है। उन्होंने श्री करुणा सागर पण्डा की लेखनी की सराहना करते हुए ‘कोहरा’ को समकालीन विषय पर लिखी गई प्रासंगिक कृति बताया।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय विचारों के संवाद का समय है और साहित्य इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक प्रश्नों पर सार्थक विमर्श पैदा करने वाली रचनाएं समाज को आत्ममंथन का अवसर देती हैं। ‘कोहरा’ भी अपने विषय के माध्यम से पाठकों को विचार करने के लिए प्रेरित करता है।

    छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा ने कहा कि ‘कोहरा’ केवल समस्या को सामने नहीं रखता, बल्कि समाधान की दिशा में भी सोचने के लिए प्रेरित करता है। बीबीजे के स्वतंत्र निदेशक श्री जगन्नाथ पाणिग्रही ने कहा कि नई पीढ़ी को देश की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक वास्तविकताओं से परिचित कराने में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका है।

    वरिष्ठ साहित्यकार श्री गिरीश पंकज ने ‘कोहरा’ को साहसिक लेखन का उदाहरण बताते हुए कहा कि रचनाकार को समाज के ज्वलंत प्रश्नों पर अपनी बात रखने का साहस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपन्यास में सामाजिक विषयों के साथ नक्सलवाद की समस्या को भी अभिव्यक्ति दी गई है। साहित्य समाज में वैचारिक चेतना और सकारात्मक प्रतिरोध का स्वर मजबूत करता है।

    इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन महाराज, श्री जलज कुमार अनुपम सहित जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।

    नई दिल्ली। सड़क यात्रा के दौरान आपने अक्सर ‘मोटल’ शब्द सुना होगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ‘मोटल’ नाम कहां से आया और यह होटल से किस तरह अलग है? दरअसल, Motel शब्द ‘Motor’ और ‘Hotel’ से मिलकर बना है।

    अमेरिका में 20वीं सदी के शुरुआती दौर में जब कारों का चलन तेजी से बढ़ा और लोगों में लंबी सड़क यात्राओं का शौक बढ़ने लगा, तब राजमार्गों और प्रमुख सड़कों के किनारे ऐसे ठहरने के स्थान विकसित होने लगे, जहां वाहन चालक अपनी कार के साथ आसानी से रुक सकें।

    इन स्थानों को शुरुआती दौर में ‘Motor Hotel’ या मोटर यात्रियों के लिए बने लॉजिंग के रूप में जाना गया। समय के साथ ‘Motor Hotel’ का संक्षिप्त रूप ‘Motel’ प्रचलित हो गया।

    मोटल की सबसे बड़ी खासियत क्या है?

    मोटल और होटल में सबसे बड़ा अंतर उनकी बनावट और उद्देश्य में देखा जाता है। मोटल आमतौर पर राजमार्गों, हाईवे या प्रमुख सड़कों के किनारे बनाए जाते हैं। यहां कमरों के ठीक बाहर या बेहद नजदीक वाहन पार्क करने की सुविधा होती है।

    इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि सड़क यात्रा कर रहे व्यक्ति को अपना सामान कार से कमरे तक ले जाने में ज्यादा परेशानी नहीं होती।

    कुछ घंटों या एक रात के ठहराव के लिए सुविधाजनक

    मोटल का इस्तेमाल मुख्य रूप से लंबी सड़क यात्रा के दौरान रात में रुकने या थोड़े समय के विश्राम के लिए किया जाता है। वहीं होटल आमतौर पर शहरों, पर्यटन स्थलों और व्यावसायिक क्षेत्रों में अधिक पाए जाते हैं और उनमें लॉबी, रेस्तरां, रूम सर्विस सहित कई अतिरिक्त सुविधाएं हो सकती हैं।

    अमेरिका से शुरू हुई एक दिलचस्प अवधारणा

    अमेरिका में ऑटोमोबाइल और हाईवे संस्कृति के विकास ने मोटल की लोकप्रियता को बढ़ाया। 1920 के दशक में मोटर यात्रियों के लिए सड़क किनारे ठहरने की सुविधाएं तेजी से विकसित हुईं। ‘Motel’ शब्द के शुरुआती प्रसिद्ध प्रयोगों में 1925 में कैलिफोर्निया के San Luis Obispo में बने ‘Milestone Mo-Tel’ का उल्लेख मिलता है।

    आज मोटल केवल अमेरिका तक सीमित नहीं हैं। दुनिया के कई देशों में हाईवे और प्रमुख सड़क मार्गों के आसपास यात्रियों को सुविधाजनक और कम अवधि का ठहराव उपलब्ध कराने के लिए मोटल संचालित होते हैं।

    यानी अगली बार जब आप ‘मोटल’ शब्द सुनें, तो याद रखिए—यह नाम ही अपने इतिहास की कहानी कहता है: Motor + Hotel = Motel।

      धमतरी / शौर्यपथ / रक्षाबंधन के पावन अवसर पर भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा मंडल नगरी की पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने शनिवार को सिहावा क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों और पुलिस जवानों के साथ रक्षाबंधन पर्व मनाया। महिला मोर्चा की सदस्यों ने सिहावा स्थित सीएसएफ कैंप पहुंचकर जवानों की आरती उतारी, तिलक लगाया और रक्षासूत्र बांधकर उनकी सुरक्षा एवं दीर्घायु की कामना की। इस दौरान महिलाओं ने रक्षा बंधन गीत गाई और जवानों को मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।
    इसके बाद महिला मोर्चा की टीम सिहावा थाना पहुंची, जहां थाना प्रभारी उमेश पाटिल सहित पुलिस स्टाफ को रक्षासूत्र बांधा गया। इसी क्रम में नगरी थाना पहुंचकर थाना प्रभारी तोपेश्वर नेताम सहित पुलिस जवानों को भी रक्षा सूत्र बांधा और मिठाई खिलाई। महिला मोर्चा की सदस्यों ने दुगली थाना पहुंचकर थाना प्रभारी एवं पुलिस स्टाफ को भी रक्षासूत्र बांधकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।
    इस अवसर पर जनपद सदस्य प्रेमलता नागवंशी ने कहा कि “देश और समाज की सुरक्षा में पुलिस एवं सुरक्षा बल के जवान दिन-रात अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर उन्हें रक्षासूत्र बांधकर बहन का स्नेह देना और उनकी सुरक्षा की कामना करना हमारे लिए गर्व का विषय है।”
    महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष चेलेश्वरी साहू ने कहा कि “जवान अपने परिवार से दूर रहकर देश और समाज की रक्षा में समर्पित रहते हैं। रक्षाबंधन पर उनके साथ पर्व मनाकर महिला मोर्चा ने भाई-बहन के स्नेह और सुरक्षा के संकल्प को मजबूत करने का प्रयास किया है। हम सभी जवानों के उज्ज्वल भविष्य और सुरक्षित जीवन की कामना करते हैं।”
    कार्यक्रम में दिनेश्वरी नेताम, प्रेमलता नागवंशी, सुलोचना साहू, अमिता दुबे, किरण साहू, प्रीति यदु, भुनेश्वरी साहू, सुलोचना सिन्हा, अंचला यदु, श्यामा भट्ट, वस्तला साहू, कमला साहू, लक्ष्मी ठाकरे, तेजस्वनी साहू, विभा राजपूत, बबीता साहू, भुनेश्वरी घृतलहरे, मंडल अध्यक्ष चेलेश्वरी साहू, महामंत्री नगीना सोम एवं महामंत्री यशोदा साहू सहित भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहीं

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार पर साधा निशाना, कहा—अपराध रोकने में पुलिस और सरकार नाकाम

    रायपुर/शौर्यपथ। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने छत्तीसगढ़ की कानून व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और हत्या, बलात्कार, गोलीबारी, लूट, चाकूबाजी तथा गैंगवार की घटनाओं से आम जनता में भय का माहौल है।

    बैज ने कहा कि राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में लगातार गंभीर आपराधिक घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने रायपुर में महिला की हत्या के बाद शव के साथ दुष्कर्म, महिला से गैंगरेप, राजनांदगांव के चिखली में घर में घुसकर हत्या, सक्ती में युवती को गोली मारने, जैजेपुर में दो भाइयों की हत्या तथा पेंड्रा-गौरेला क्षेत्र में सराफा कारोबारी की गोली मारकर हत्या जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार से कानून व्यवस्था पर जवाब मांगा।

    “राजधानी की कमिश्नरी व्यवस्था भी विफल”

    दीपक बैज ने कहा कि रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। राजधानी के गंज क्षेत्र में चाकूबाजी और हत्या, देवभोग में परिवार पर धारदार हथियार से हमला तथा अन्य घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अपराधियों में पुलिस का भय समाप्त होता दिखाई दे रहा है।

    उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में प्रतिदिन 6 हत्या और 8 बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं। हालांकि ये आंकड़े कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा लगाए गए दावे हैं।

    गोलीकांड और गैंगवार पर सरकार को घेरा

    बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद प्रदेश में एक दर्जन से अधिक लोगों की गोली मारकर हत्या हो चुकी है। उन्होंने रायपुर सहित बिलासपुर, पेंड्रा-गौरेला, दुर्ग, मस्तूरी, जांजगीर-चांपा, जशपुर और कवर्धा में गोलीबारी की घटनाओं का हवाला दिया।

    उन्होंने रायपुर के हीरापुर में बम हमले, बिरगांव में कथित बम निर्माण और तेलीबांधा-श्याम नगर क्षेत्र में गैंगवार का उल्लेख करते हुए कहा कि दिनदहाड़े चाकूबाजी, गोलीबारी और गैंगवार की घटनाएं चिंता का विषय हैं।

    सोशल मीडिया पर हथियारों का प्रदर्शन भी चिंता का विषय

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बदमाश सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ रील बनाकर खुलेआम धमकियां दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस इस प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाने में विफल रही है। बैज ने सरकार से अपराधियों पर कठोर कार्रवाई कर आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा बहाल करने की मांग की।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पुलिस और प्रशासन का राजनीतिक उपयोग कर रही है तथा विपक्षी नेताओं को प्रताड़ित करने के बजाय अपराध नियंत्रण को प्राथमिकता देनी चाहिए।

    बैज ने कहा कि लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाएं गंभीर चेतावनी हैं। सरकार को कानून व्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्वीकार कर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

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