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June 06, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

भिलाई  / शौर्यपथ / नौपता शुरू होते ही गर्मी ने अपना तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। सोमवार को नौपते की दस्तक के साथ ही सूरज की आग उगलती तपन से भिलाई-दुर्ग की सड़कों पर सन्नाटा पसर गया है। सुबह से देर शाम तक चल रही लू के थपेडों ने लोगों का हाल बेहाल कर डाला है। तापमान में बढ़ोतरी के  कारण सरकारी और निजी अस्पताल में गर्मी से प्रभावित मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा होने लगा है। उल्टी-दस्त, सिर दर्द और बुखार की शिकायतें अचानक बढऩे लगी है। डॉक्टर्स का कहना है कि लू लगने के सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्ग, गर्भवती और नवजातों को रहता है। वहीं समय पर उपचार नहीं मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती है। ऐसे में लू से बचने के लिए सावधानी बरतने की जरुरत है। भीषम गर्मी को देखते हुए लोगों को दोपहर 11 से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से बचना चाहिए। तेज गर्मी के चलते लोगों के घर से निकलने में परहेज करने से लॉकडाउन में छूट के समय व्यापारियों के बेहतर कारोबार की उम्मीदों को झटका लग रहा है।
नौतपा के चौथे दिन आज गुरुवार को दोपहर के वक्त ऐसा लगा जैसे सूर्यदेव आग उगल रहे हैं। झुलसाने वाले गर्म हवाओं के चलते हर कोई परेशान और हलाकान दिखा। इस तरह की स्थिति 25 मई को नौतपे की शुरुवात से ही भिलाई-दुर्ग में बनी हुई है। तापमान में आई बढ़ोतरी की वजह से लू भी अपना असर दिखा रहा है। शाम ढलने के बाद भी गर्म हवाएं चल रही है। दोपहर के वक्त भीषण गर्मी के चलते घर में रहने वाले लोग जरुरी होने पर ही निकल रहे हैं। वही नौकरी पेशा वर्ग दफ्तर अथवा कार्यस्थल पहुंचने के बाद बिना ठोस वजह से बाहर निकलने से परहेज करने में ही अपनी भलाई समझ रहा है।
गौरतलब रहे कि कोरोना संक्रमण के चलते अभी लकडाउन चार जारी है। इस दौरान दुर्ग जिले में सुबह 9 बजे 7 बजे तक व्यापारिक प्रतिष्ठानों को खोले जाने की छूट प्रदान की गई है। व्यापारी वर्ग इस दौरान बेहतर कारोबार की उम्मीदों के साथ दुकानें खोल रहे हैं। लेकिन दोपहर 12 बजे के बाद गर्मी का प्रकोप तेज होने के साथ ही लोगों के लू के थपेड़ों से बचाव के मुद्रा में आ जाने से व्यापारियों की उम्मीदों को झटका लग रहा है। कुल मिलाकर यह कहना गलत नहीं होगा कि नौतपे की गर्म हवाओं का असर शहर के बाजारों में देखने को मिल रहा है।
यहां पर यह बताना भी लाजिमी होगा कि पूर्व की वर्षों में गर्मी धीरे-धीरे तेजी के चरम पर आती थी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। पूरा अप्रैल और मई का आधा महीना ऐसा बीता कि लोगों को गर्मी के मौसम का अहसास तक नहीं हो पा रहा था। नौतपा शुरू होने के दो दिन पहले 23 मई से गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिया। इसके बाद 25 मई से नौतपा शुरू होते ही दिन ब दिन गर्मी का प्रकोप बढ़ता चला जा रहा है। एकबारगी सूरज की तपन बढऩे और लू चलने से लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर पडऩे लगा है।
भिलाई / शौर्यपथ /     वर्ष 2020-21 के संपत्तिकर जमा करने वाले करदाताओं को 31 मई तक संपत्तिकर जमा करने पर 6.25 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है! इसके अतिरिक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मंत्रालय से पूर्व में आदेश जारी होने के बाद संपत्तिकर तथा विवरणी जमा करने की अंतिम तिथि तिथि 31 मई 2020 हो गई है ! तिथि बढऩे के बाद निगम मुख्यालय सहित जोन कार्यालय में लोगों ने अपना टैक्स जमा करना प्रारंभ कर दिया है ताकि अनावश्यक अधिभार एवं शास्त्ती से बचा जा सके ! 
जोन कार्यालय में भी कर सकते हैं संपत्तिकर जमा निगम मुख्यालय के अतिरिक्त जोन कार्यालयों में भी संपत्तिकर जमा किए जा सकते हैं इसके लिए स्पैरो सॉफ्ट. प्रा. लि. ने जोन कार्यालयों में 20 कर्मचारियों की व्यवस्था की हुई है! इन कार्यालयों में सोशल डिस्टेंस मेंटेन कराने के लिए 2 अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी स्पैरो सॉ. लिमिटेड द्वारा टैक्स वसूली के लिए लगाई गई है, ताकि टैक्स जमा करने आने वाले लोगों को ज्यादा इंतजार न करना पड़े!
लॉक डाउन में 596 करदाताओं ने अपना टैक्स ऑनलाइन किया जमा लॉक डाउन के दौरान 596 लोगों ने अपना टैक्स ऑनलाइन जमा किया है! टैक्स जमा करने वाले करदाता डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट सीजीसुडा डांट काम में ऑनलाइन पेमेंट को क्लिक करके भिलाई मुंसिपल कारपोरेशन का चयन करने के उपरांत वार्ड एवं अपना आईडी नंबर डालकर डेबिट, क्रेडिट एवं नेट बैंकिंग के माध्यम से ऑनलाइन पेमेंट जमा कर सकते हैं! इस वेबसाइट पर टैक्स की वर्षवार जानकारी भी देख सकते हैं! ऑनलाइन में किसी प्रकार की समस्या होने पर हेल्पलाइन नंबर 18001216505 पर संपर्क कर विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है!
डोर टू डोर टैक्स कलेक्शन घर-घर जाकर टैक्स कलेक्शन की बात करें तो अब तक 4724 घरों से लॉक डाउन के दौरान टैक्स कलेक्शन किया जा चुका है! स्पैरो सॉ प्रा. लिमिटेड भिलाई द्वारा डोर टू डोर जाकर टैक्स कलेक्शन किया जा रहा है इसके लिए इनके 52 कर्मचारी की तैनाती की गई है!
वित्तीय वर्ष 2020-21 के टैक्स में छूट  संपत्तिकर विभाग के प्रभारी अधिकारी तरुण पाल लहरें ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 का संपत्तिकर 31 मई 2020 तक जमा करने वालों को टैक्स में 6.25त्न की छूट प्रदान की गई जा रही है जिसका लाभ लिया जा सकता है, यह छूट इस मई माह के अंतिम तारीख तक लागू रहेगा!
पिछले वित्तीय वर्ष का संपत्तिकर 31 मई तक जमा करने पर नहीं लगेगा अधिभार वित्तीय वर्ष 2019-20 का संपत्तिकर 31 मई तक जमा करने पर अधिभार एवं शास्ती अधिरोपित नहीं किया जाएगा! शासन के आदेश के तहत 31 मई तक संपत्तिकर जमा करने वाले करदाताओं को अधिभार से मुक्त किया गया है, जिसका लाभ करदाता ले सकते है!
सोशल डिस्टेंस का पालन कराने अतिरिक्त काउंटर एवं कर्मचारी निगमायुक्त श्री ऋतुराज रघुवंशी ने सोशल डिस्टेंस एवं मास्क की अनिवार्यता का सख्त पालन करने के निर्देश निगम के अधिकारियों को दिए हुए हैं इस बाबत वे स्वयं ही औचक निरीक्षण कर चुके हैं! निगम मुख्यालय में आने वाले करदाताओं के सोशल डिस्टेंस मेंटेन करने के लिए अलग से काउंटर बनाए गए हैं तथा स्पैरो  सॉफ्ट. लिमि. के द्वारा कर्मचारियों मे बढ़ोतरी की गई है, ताकि करदाताओं को टैक्स जमा करने में अधिक समय न लगे! सीनियर सिटीजन एवं महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि इन्हें कर जमा करने में अधिक समय न व्यतीत करना पड़े! मुख्य कार्यालय में टैक्स जमा करने आने वाले करदाताओं के लिए सोशल डिस्टेंस मेंटेन करने के तहत कुर्सियों की व्यवस्था की गई है तथा करदाताओं को टैक्स जमा करने के लिए स्पैरो के द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है!

दुर्ग /  शौर्य्पथ /  स्थानांतरण के मौके पर जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारियों एवं जिले के अन्य गणमान्य नागरिक संगठन के सदस्यों एवं आम नागरिकों ने कलेक्टर अंकित आनंद को भावभीनी विदाई दी। आज ही जिला पंचायत सीईओ कुंदन कुमार और अपर कलेक्टर गजेंद्र ठाकुर भी रिलीव हुए। इन्हें भी अधिकारी-कर्मचारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने भावभीनी विदाई दी। कलेक्टर अंकित आनंद के विदा होने के मौके पर अधिकारी-कर्मचारियों के अतिरिक्त अन्य नागरिक संगठनों के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। उन्होंने निवर्तमान कलेक्टर के कार्यकाल की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विभिन्न नागरिक संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि कलेक्टर अंकित आनंद ने बड़े ही परिश्रम और मनोयोग के साथ हम सबकी समस्याएं सुलझाने की दिशा में बड़ा काम किया। हम इसके लिए उनके प्रति आभार प्रदर्शन करने आए हैं। अधिकारी-कर्मचारियों ने भी जिले में उनके योगदान की प्रशंसा की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अधिकारी-कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि कोरोना संक्रमण की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग का एहतियात बरतने हम सब इक_ा नहीं हो पाए, हममें से हर कोई व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आभार प्रदर्शन करना चाहता था। अधिवक्ता संघ एवं अन्य संगठनों के पदाधिकारियों ने भी यह बात कही। इन्होंने कहा कि कलेक्टर हमेशा सुलभ होकर मिलते थे और ध्यानपूर्वक समस्याएं सुनकर उनके निदान की दिशा में त्वरित कार्रवाई करते थे। उनका कार्यकाल बहुत अच्छा रहा और हमेशा स्मृति में रहेगा। इसी तरह जिला पंचायत सीईओ  कुंदन कुमार को भी भावभीनी विदाई दी गई। विदाई समारोह को संबोधित करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शालिनी यादव ने कहा कि अपने काम के प्रति पूरी तरह निष्ठा का भाव होने से लक्ष्य की प्राप्ति जरूर होती है। जिला पंचायत सीईओ कुंदन कुमार ने अपने कार्यकाल में नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी का कार्य बहुत अच्छी तरह से आगे बढाया। उन्होंने नवाचारी उपायों को ब?ावा दिया जो किसी भी योजना को सफल करने की दिशा में बड़ी भूमिका निभाते हैं। कोविड संक्रमण को थामने की दिशा में मनरेगा के कार्य को आगे बढाना उनका प्रमुख कार्य रहा। वे काफी सजग होकर और पूरे उत्साह के साथ कार्य करते रहे। इससे ग्रामीण विकास को बढावा देने में बड़ी मदद मिली। जिला पंचायत के अधिकारियों-कर्मचारियों ने भी श्री कुमार के योगदान को सराहा। इस मौके पर सीईओ ने जिला पंचायत के सभी पदाधिकारियों एवं अधिकारी-कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सभी के योगदान की वजह से हम नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाडी, मनरेगा जैसे कार्यक्रमों को प्रभावी  रूप से आगे बढाने में सफल रहे।

भिलाई  / शौर्यपथ /  माह मई में प्रति शनिवार और रविवार राज्य शासन के आदेश पर पूर्ण लॉकडाउन छूट प्राप्त दुकानों को छोड़कर का लोगों द्वारा पूर्ण पालन करने के पश्चात् सप्ताह के शेष दिनों में बेखौफ होकर बिना मास्क पहने बेवजह घुमना एवं सोशल डिस्टेसिंग के प्रति उदासहीनता व लाकडाउन के नियमों का पालन करने में लोग काफी हद तक लापरवाही बरत रहें है।  लॉकडाउन 4 में शासन द्वारा मिली छूट का आम लोगो के साथ साथ व्यावसायिक वर्ग भी पूरा फायदा उठा रहें है। कुछ एक हठधार्मियों के चलते रिसाली क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण को मजाक बनाकर शासन के नियम निर्देषों की खुले आम धज्जियां उड़ा रहें है। बुधवार को रिसाली निगम के उडनदस्ता टीम द्वारा सभी वार्डो का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान आजाद मार्केट रिसाली के इलेक्ट्रीकल व्यवसायी द्वारा बेखोफ होकर रात 8 बजे तक दुकान संचालित करते पाये जाने पर 2000/- रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया। वह नियम निर्देशों के पालन करने का सख्त चेतावनी दी गई। टंकी मरोदा एवं स्टेशन मरोदा के क्षेत्रों में युवाओं द्वारा मास्क जेब में रखकर दोपहियों गाड़ी में तीन सवारी घुमते पाये जाने पर गंभीरता से लेते हुए अर्थदण्ड वसूल किया गया एवं प्रदेष में कोरोना संक्रमण बढते प्रकरण की जानकारी व दुष्परिणाम से अवगत कराया गया। टंकी मरोदा स्थित सेलून दुकान का आकस्मिक निरीक्षण कर दुकानदार से डेली उपयोग में लायी जाने वाली वस्तूओं का सघन निरीक्षण कर सैनटाईजेशन का उपयोग करने व तौलिया, ब्लेड व अन्य वस्तुओं की सावधानी पूर्वक उपयोग करने की हिदायत दी गई। टीम द्वारा सभी वार्डो का निरीक्षण कर हठधार्मियों से 2700/- रूपये का जुर्माना वसूला गया। निरीक्षण के दौरान निगम के सहायक अभियंता बी.के. सिंह, सहा. राजस्व अधिकारी हरचरण सिंह अरोरा, राजस्व निरीक्षक अनिल मैश्राम, रमेशर निषाद, पुनित बंजारे, विनोद शुक्ला, आत्मा राम व राजस्व विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उपस्थित थे।

दुर्ग / शौर्यपथ / श्रमिकों के लिए जिले में 289 क्वारंटीन सेंटर बनाये गए हैं। यहां लगभग तीन हजार श्रमिक फिलहाल निवासरत हैं। इन श्रमिकों को क्वारंटीन केंद्रों में सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही इनके स्वास्थ्य जांच भी समय-समय पर कराई जा रही है। पाटन ब्लाक में 112 क्वारंटीन केंद्र, धमधा ब्लाक में 119 क्वारंटीन केंद्र तथा दुर्ग ब्लाक में 58 क्वारंटीन केंद्र बनाये गए हैं। सबसे ज्यादा ग्रामीण धमधा के क्वारंटीन केंद्रों में रह रहे हैं। यहां फिलहाल दो हजार लोग क्वारंटीन किए  गए हैं। पाटन ब्लाक में लगभग पांच सौ तथा दुर्ग ब्लाक में सात सौ लोग विभिन्न ग्राम स्तरीय एवं ब्लाक स्तरीय केंद्रों में क्वारंटीन किए गए हैं। 
श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से लाए जा रहे श्रमिकों के भोजन एवं केंद्र तक पहुंचाने उपलब्ध कराई गई विशेष व्यवस्था 
श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में श्रमिकों को भोजन पहुंचाने एवं उन्हें केंद्र तक पहुंचाने विशेष बसों की व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा की गई है। यहां चार स्वास्थ्य दल लगाए गए हैं जो गाडिय़ों के उतरते ही नागरिकों के मौके पर ही स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं। इसके बाद नाश्ता कराके, लंच पैकेट के साथ ही प्रवासी श्रमिकों को क्वारंटीन केंद्रों में भेजा जाता है। यहां की मानिटरिंग एवं सुविधाओं को सुनिश्चित करने अमला लगाया गया है। 
हर ब्लाक में अलग तरह का नवाचार-
 क्वारंटीन के दिनों का किस प्रकार उचित तरीके से उपयोग किया जा सके। इसके लिए हर क्वारंटीन केंद्रों में अलग तरह का नवाचार किया गया है। कहीं लोगों का मन लगाए रखने इंडोर गेम्स जैसे लूडो, सांप सीढी आदि की व्यवस्था की गई है तो कहीं लोगों को साक्षर बनाने की कवायद की जा रही है। निरक्षरों  को साक्षर बनाने विशेष अभियान धमधा में चलाया जा रहा है। यहां पर हर क्वारंटीन केंद्र में निरक्षर लोगों को चिन्हांकित किया जा रहा है। 
मानिटरिंग के लिए विशेष व्यवस्था 
हर क्वारंटीन केंद्र में स्थानीय दलों की नियुक्ति के साथ ही मानिटरिंग के लिए विशेष दस्ते लगाए गए हैं। हर दस गांव का एक क्लस्टर बनाया गया है जहां के नोडल अधिकारी सभी क्वारंटीन केंद्रों का निरीक्षण करते हैं। इसके साथ ही सभी ब्लाक स्तरीय अधिकारियों को भी विशेष रूप से मानिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। क्वारंटीन केंद्रों के हर दिन की स्थिति की जानकारी रिपोर्ट भेजी जाती है। जहां किसी तरह की असुविधा हो रही हो, उसे फीडबैक लेकर तुरंत ठीक किया जाता है।
     भिलाई  / शौर्यपथ / नगर के हथखोज इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित खालसा नामक फैक्ट्री में रखे केमिकल टैंकों में आज दोपहर भीषण आग लग गई। आग इतनी भयंकर थी कि आसपास के पूरे आसमान में आग के धुंए के काले काले गुबार ही नजर आ रहे थे। आग लगने की जानकारी मिलते ही यहां गंभीर स्थिति को देखते हुए आसपास की फैक्ट्रियों को तुरंत बंद कर दिया गया। यह आग कुछ ही देर में फैक्ट्री में रखे हुए केमिकल के पुराने ड्रमों तक आग पहुंच गई है। तीन तीन फायर बिग्रेड और टीम इस भीषण आग को काबू पाने घंटों मशक्कत करना पड़ा। इस आगजनी के कारण फैक्ट्री मालिक को लाखों का नुकसान हो गया है।
मिली जानकारी के अनुसार गुरूवार दोपहर को नगर के इण्डस्ट्रियल ऐरिया में केमिकल बनाने वाली एक फैक्ट्री खालसा नामकी में भीषण आग लग गई। आग लगने की जानकारी तुरंत फैक्ट्री के मालिक हर्ष मंत्री ने पुलिस कंट्रोल रूम सेक्टर 6 को बताया। आग लगने की जानकारी मिलते ही पुलिस कंट्रोल रूम से तुरंत तीन तीन दमकल गाडिय़ों को घटना स्थल के लिए रवाना किया गया। जहां पहुंचते ही दमकल की तीनों टीमे तुरंत आग बुझाने में जुट गई और घंटो मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

दुर्ग। शौर्यपथ । जिले के नवनियुक्त कलेक्टर डा. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने आज पदभार ग्रहण किया। उन्होंने निवर्तमान कलेक्टर श्री अंकित आनंद से पदभार गृहण किया। डा. भूरे इससे पूर्व मुंगेली जिले में कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। डा. भूरे वर्ष 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। डा. भूरे मूल रूप से महाराष्ट्र से हैं। उन्होंने अपनी एमबीबीएस की डिग्री महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी आफ हेल्थ साइंस नाशिक से ली है।

             नजरिया / शौर्यपथ /भारत आज एक बडे़ मानवीय और आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। बड़ी संख्या में उन मजदूरों का पलायन हुआ है, जो हमारी अर्थव्यवस्था के असंगठित क्षेत्र की रीढ़ रहे हैं और ये मजदूर आज खुद को सबसे अधिक घिरा हुआ पा रहे हैं। अर्थव्यवस्था मुश्किल में है और एक आर्थिक पैकेज की घोषणा हुई है। ज्यादातर विश्लेषकों, रेटिंग एजेंसियों और बैंकों ने इस पैकेज का आकार जीडीपी के 0.7 से 1.3 फीसदी के बीच आंका है, जबकि सरकार के अनुसार, यह 10 प्रतिशत है। सरकार ने खुद यह माना है कि 20 लाख करोड़ रुपये के इस पैकेज में रिजर्व बैंक द्वारा नकदी बढ़ाने के लिए दिए गए 8.02 लाख करोड़ शामिल हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के परिणामों पर कोई आश्चर्य नहीं, जिसमें रेपो और रिवर्स रेपो दर घटाने का फैसला हुआ। रिजर्व बैंक द्वारा इन दरों में लगातार कटौती का मकसद बाजार में नकदी उपलब्धता बढ़ाना है। हालांकि उद्योगों और ऋण के खुदरा ग्राहकों को इस रेपो या रिवर्स रेपो रेट कटौती से कोई लाभ नहीं होने वाला, क्योंकि ऋण उपलब्ध नहीं हैं। बैंकिंग नेटवर्क में पहले से ही अच्छी मात्रा में तरलता है, लेकिन बैंकों के बीच जोखिम का विस्तार ऋण प्रवाह बढ़ाने और उद्योगों व आम लोगों तक रेट कटौती का लाभ पहुंचने में बाधा पैदा कर रहा है। आशंका है, इन दरों में कटौती मध्यम एवं निम्न आय वर्ग को प्रभावित करेगी, क्योंकि आने वाले दिनों में इन वर्गों की सावधि जमा पर ब्याज दरों में लगभग 0.5 प्रतिशत की कमी होगी।
ऋण देने में अत्यधिक सावधानी बरतने के लिए अकेले बैंकों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। देश की अर्थव्यवस्था अभूतपूर्व कठिन समय से गुजर रही है और बैंक एनपीए रोकने के लिए अतिरिक्त सतर्कता से काम कर रहे हैं। प्राथमिक मुद्दा तरलता का अभाव नहीं है। असल में, हमारी अर्थव्यवस्था में तरलता की मांग गायब हो गई है। मांग बढ़ाने के लिए कैपिसिटी यूटिलाइजेशन के 68.6 प्रतिशत (अक्तूबर-दिसंबर 2019) को बढ़ाना है। यहीं पर प्रत्येक जन-धन खातों, पीएम किसान खातों, पेंशनर खातों में तत्काल 7,500 रुपये प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण की जरूरत है। इस नकदी हस्तांतरण से ग्रामीण व अद्र्ध-शहरी क्षेत्रों में मांग पैदा होगी, जो भारतीय उद्योग को अपनी शेष 31.4 प्रतिशत क्षमता का उपयोग करने में सक्षम बनाएगी। इसके लिए बैंकों को नकदी समर्थन और बढ़ाना होगा। रिजर्व बैंक ने जो नकदी प्रवाह अभी बढ़ाया है, उससे ऋण लेने में तेजी नहीं आने वाली।
रिजर्व बैंक ने ऋण चुकाने में और तीन महीने की राहत दी है। उसके द्वारा दी गई रियायतों से ऋण लेने वालों को राहत मिल सकती है, लेकिन बैंकों को नहीं, क्योंकि इससे उनके अपने खातों पर दबाव बढ़ जाएगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आत्मनिर्भर होने की दिशा में बैंकों और वित्त संस्थाओं को भगवान भरोसे न रहना पडे़। पिछले कुछ वर्षों में हम पीएमसी और येस बैंक जैसे उदाहरण देख चुके हैं।
देश के लिए एक और चुनौती खाद्य मुद्र्रास्फीति दर में लगातार वृद्धि है। लॉकडाउन की खामियों की वजह से आपूर्ति शृंखला में रुकावट आई है, जिससे अप्रैल 2020 में खाद्य मुद्र्रास्फीति दर बढ़कर 8.6 प्रतिशत हो गई। यदि अर्थव्यवस्था को फिर से खोलने से पूर्व आपूर्ति शृंखलाओं के बारे में उचित योजना नहीं बनाई गई, तो यह और बढे़गी। यदि खाद्य मुद्र्रास्फीति की दर एक आरामदेह सीमा में वापस नहीं लौटती है, तो हमें उच्च मुद्र्रास्फीति दर व नकारात्मक जीडीपी विकास का सामना करने वाली अर्थव्यवस्था से निपटना पड़ेगा। हालांकि रिजर्व बैंक ने अनुमानित जीडीपी विकास का कोई पुख्ता आंकड़ा नहीं दिया है, पर उसने यह तो बता ही दिया है कि वित्त वर्ष 2021 में जीडीपी नकारात्मक रहेगी। कुछ राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने वित्त वर्ष 2021 के लिए माइनस पांच प्रतिशत की भविष्यवाणी की है।
इसलिए इस कठिन दौर से बाहर निकलने का एकमात्र तरीका बैंकों को तरलता प्रदान करना नहीं है, बल्कि नई मांग पैदा करने के लिए कम से कम अगले छह महीनों तक बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष नकदी हस्तांतरण करना होगा। यह नए रोजगार पैदा करेगा और खपत या उपभोग भी बढ़ाएगा। इसके बाद ही हमारी जनसांख्यिकीय ताकत हमारे देश के आर्थिक पहिए को गति देगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)गौरव वल्लभ, कांग्रेस प्रवक्ता

सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / यह एक ऐसी गिनती है, जिसको गिनने की बदकिस्मती से हम बच नहीं सकते और इसके आंकडे़ रोज हमारी चिंताओं में इजाफा कर जाते हैं। कल देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या डेढ़ लाख का आंकड़ा पार कर गई और पिछले छह दिनों से लगातार छह हजार से ज्यादा नए मामले रोज सामने आ रहे हैं। हम इस महामारी के शिकार शीर्ष दस देशों में आ गए हैं। हालांकि, आईसीएमआर अब भी वायरस के सामुदायिक प्रसार की आशंका को नकार रहा है, तो यकीनन यह कुछ सुकून की बात है। पर जिस तरह से महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात और दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए और अब बिहार में इसकी तीव्रता दिख रही है, उससे तो यही लगता है कि लॉकडाउन का पूरा फायदा उठाने में ये प्रदेश चूक गए। ऐसा मानने का आधार है। विदेश को छोड़िए, देश में ही केरल ने यह बताया है कि किसी महामारी से निपटने के लिए कैसी सूझबूझ, तैयारी और प्रशासनिक कौशल की जरूरत पड़ती है।
हमारे यहां कोरोना का पहला मामला केरल में ही 30 जनवरी को सामने आया था और आज वह संतोष जता सकता है कि पिछले चार महीने में उसके यहां संक्रमितों की संख्या हजार से भी नीचे रही, बल्कि इनमें भी आधे से अधिक मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। उसकी यह उपलब्धि तब है, जब उसके यहां जनसंख्या घनत्व कई राज्यों के मुकाबले अधिक है और विदेश में रहने वाले नागरिक भी बड़ी संख्या में वहां लौटकर आए हैं। केरल की ही तरह, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने भी लॉकडाउन की अवधि का अपेक्षाकृत बेहतर उपयोग किया है। बल्कि आज हम जिस मुकाम पर हैं, उसमें अकेले महाराष्ट्र का एक तिहाई योगदान है। शुरुआत में राज्य सरकार वहां हालात को नियंत्रित करती हुई दिखी भी थी, मगर उसके बाद कुछ जैसे उससे छूटता-सा गया। कभी अस्पतालों से बदइंतजामी झांकती मिली, तो कभी फिजिकल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाती भीड़ स्टेशनों पर उमड़ती दिखी। कुछ ऐसी ही तस्वीरें गुजरात से आईं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तो एक वक्त इतने आश्वस्त थे कि चंद रोज के भीतर वह अपने यहां कोरोना पर पूर्ण नियंत्रण का एलान करने जा रहे थे। आज उनका प्रांत संक्रमण के मामले में नंबर दो पायदान पर है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अब राज्य लॉकडाउन में रियायत देने को बाध्य हैं, क्योंकि उन्हें राजस्व भी चाहिए, और उन पर कारोबार जगत का भी दबाव है।
कोविड-19 से जंग की एक विश्व-व्यापी सच्चाई यही है कि जिन भी देशों-प्रदेशों ने एक स्पष्ट नीति बनाई, और उस पर सख्ती से अमल किया, वे आज बेहतर स्थिति में हैं। इसके उलट, जहां कहीं भी उपायों के स्तर पर ऊहापोह की स्थिति रही, वहां के नागरिक समाज को इसकी कीमत चुकानी पड़ी। हमने बहुत पहले देश में पूर्ण लॉकडाउन लागू करके एक अच्छी रणनीति अपनाई थी और इसका फायदा भी हुआ है, मगर हम इससे अपेक्षित लाभ नहीं उठा सके। चंद घटनाओं को छोड़ दें, तो सवा अरब से भी अधिक लोगों ने सरकार के निर्देश पर पहले 21 दिनों में जिस अनुशासन का पालन किया, उसका सारा हासिल इस महामारी को सांप्रदायिक रंग देने की राजनीति और प्रवासियों के मामले में दिशाहीन कार्य-प्रणाली के कारण तिरोहित हो गया। वरना आज हम डेढ़ लाख से अधिक संक्रमण के बाद की आशंकाओं से न घिरे होते।

 

          मेलबॉक्स / शौर्यपथ /चीन बदमाशी कर रहा है। पूरी दुनिया को कोरोना संकट में डालने के बाद भी वह आंखें तरेर रहा है। अपने ऊपर लगे आरोपों से वह नाखुश है। चीन के विदेश मंत्री का तो यह भी कहना है कि मुआवजे की मांग करने वाले देश दिवास्वप्न देख रहे हैं, अर्थात चीन का दुस्साहस इस कदर बढ़ गया है कि वह माफी मांगने की बजाय दूसरे देशों को धमका रहा है। सच यही है कि चीन ने कोरोना वायरस के बारे में दुनिया को बताना उचित नहीं समझा, जिसके कारण इसका फैलाव तेजी से हुआ। इसका प्रकोप सबसे ज्यादा अमेरिका में हुआ है, जहां एक लाख से अधिक लोग इसका शिकार बन चुके हैं। फिर भी, चीन की ऐठन कम नहीं हुई है। दुखद यह भी है कि डब्ल्यूएचओ परोक्ष रूप से उसी का बचाव कर रहा है।
नीरज कुमार पाठक, नोएडा

बनाना होगा दबाव
पूरे विश्व में चीन अपनी गुप्त रणनीति, गहरी साजिश और योजनाओं के लिए जाना जाता है। कभी वह कोरोना वायरस को एक जैविक हथियार के रूप में प्रयोग करता है, तो कभी सीमा-विवाद को बढ़ाकर पड़ोसी देशों पर दबाव बनाता है। कोरोना आपातकाल के इस दौर में भी वह लद्दाख, नेपाल, ताईवान, हांगकांग या भारत की सीमा में घुसपैठ करके अपना वर्चस्व बनाना चाहता है। वह यह जताना चाहता है कि उसकी सीमाओं का कोई अंत नहीं है। अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाने के लिए ही उसने कोरोना वायरस को जन्म दिया, ताकि दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं चौपट हो जाएं और उसका साम्राज्य बन जाए। निश्चित रूप से चीन दुनिया के साथ कॉकटेल गेम खेल रहा है, जिसे तभी रोका जा सकता है, जब पूरी दुनिया एकजुट होकर उस पर दबाव बनाएगी। पूरे विश्व को चीन से सजग रहना होगा।
संजय कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड

अव्यवस्था भरी यात्रा
रेल व हवाई यात्राओं के दौरान सामने आ रही अव्यवस्थाओं को देखते हुए भी संबंधित मंत्रियों का ध्यान समस्या के समाधान की तरफ कम है और विरोधियों को नीचा दिखाने में ज्यादा है। जब एक श्रमिक ट्रेन दो दिन की बजाय नौ दिनों में अपने गंतव्य पर पहुंचती है और ऐसी यात्राओं में कई श्रमिक अपनी जान गंवा देते हैं, तो इसको यात्रा नहीं, यातना ही कहा जाएगा। फिर भी मंत्रीगण ऐसा भाव बनाते हैं, मानो उनकी सरकार के कारण ही रेल चल रही है, वरना नहीं चलती। लॉकडाउन से पहले जहां हजारों ट्रेनें चलने के बाद भी किसी ट्रेन के अपने गंतव्य से भटकने का समाचार नहीं आया, वहीं अब कई ट्रेनें गलत जगहों पर पहुंच रही हैं। इससे भयानक अराजकता भला और क्या होगी?
जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर

स्वास्थ्य मद में बजट बढ़े
वर्तमान महामारी ने हमारी स्वास्थ्य नीति की अक्षमता को उजागर किया है। जहां सरकारी संस्थाएं अपनी पूरी क्षमता से महामारी के खिलाफ लड़ रही हैं, वहीं निजी क्षेत्र भारी-भरकम खर्चों के कारण आम आदमी की पहुंच से लगभग बाहर हो गए हैं। ऐसे में, स्वास्थ्य क्षेत्र के राष्ट्रीयकरण की मांग स्वाभाविक है। अध्ययन यह भी बताते हैं कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के भारी-भरकम खर्च उठाने के कारण ही प्रतिवर्ष करोड़ों लोग गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं। ऐसे में, सरकार द्वारा सभी तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाए बिना गरीबी उन्मूलन के कार्यक्रमों की सफलता संभव नहीं है। दिक्कत यह है कि हमारे देश में स्वास्थ्य सेवाओं पर जीडीपी का महज 1.2 फीसदी खर्च किया जाता है। बेशक, विशाल जनसंख्या और सरकार के सीमित संसाधनों को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी आवश्यक है, लेकिन सार्वजनिक खर्च में वृद्धि करना सबसे जरूरी है, ताकि सभी लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मिल सकें।
वीरेंद्र बहादुर पाण्डेय, गोंडा

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