July 25, 2026
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    “अवैध खनन की चाय पर चर्चा? दुर्ग में खनिज इंस्पेक्टर के संरक्षण का संदेह गहराया” Featured

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    मुख्यमंत्री साय के ‘सुशासन’ पर भारी पड़ता मुरम माफिया का खुला खेल!

    दुर्ग (ग्रामीण)।

    दुर्ग जिले के ग्रामीण अंचलों में अवैध मुरम मिट्टी उत्खनन और परिवहन अब छुपा हुआ नहीं, बल्कि खुलेआम संचालित हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि लगातार शिकायतों, फोटो, लोकेशन और जमीनी साक्ष्यों के बावजूद जिला खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारी खनिज इंस्पेक्टर दीपक तिवारी की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे न केवल किसानों की जमीन तबाह हो रही है, बल्कि शासन को लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका भी गहराती जा रही है।

    नदी मुहाने से 35 एकड़ तक मुरम की ‘लूट’

    चंगोरी क्षेत्र में नदी के मुहाने के पास स्थित लगभग 35 एकड़ खेत में मुरम मिट्टी की पटिंग का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया, जबकि इस पूरे कार्य से संबंधित कोई वैधानिक अनुमति, रॉयल्टी रसीद या खनिज पास सामने नहीं आया है।

    स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि इस स्थल से हजारों गाड़ियों में मुरम मिट्टी का परिवहन किया गया, जो सीधे तौर पर अवैध खनन और परिवहन की श्रेणी में आता है।

    बिरेझर में खेत नहीं, खदान तैयार

    बिरेझर क्षेत्र के किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि राजा स्टील के संचालक मनोज द्वारा खेत बनाने के नाम पर 8 से 10 फीट तक गहरी खुदाई कर मुरम मिट्टी निकाल ली गई।

    परिणामस्वरूप खेत उपज योग्य रहने के बजाय गड्ढों में तब्दील हो गए। अब किसान अपने ही खेतों को फिर से उपयोगी बनाने के लिए अतिरिक्त खर्च और भारी संघर्ष झेलने को मजबूर हैं।

    शिकायतें पहुँचीं, कार्रवाई शून्य

    इन सभी मामलों की जानकारी खनिज विभाग को  दी गई, इसके बावजूद न तो मौके का निरीक्षण हुआ और न ही अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए कोई सख्त कदम उठाया गया।

    खनिज इंस्पेक्टर दीपक तिवारी की यह निष्क्रियता अब केवल लापरवाही नहीं, बल्कि संरक्षण और मिलीभगत के संदेह को जन्म दे रही है।

    सवालों से बचते दिखे जिम्मेदार अधिकारी

    जब इस पूरे मामले में हमारी टीम ने खनिज इंस्पेक्टर दीपक तिवारी से उनका पक्ष जानना चाहा, तो वे पहले कार्यालय में अनुपस्थित बताए गए।

    लगातार प्रयासों के बाद जब उनकी उपस्थिति मिली, तब भी घंटों तक इंतजार कराया गया। इस दौरान वे ठेकेदारों के साथ चाय-नाश्ता और लंबी बातचीत में व्यस्त नजर आए, लेकिन मीडिया / शिकायतकर्ताओं के सवालों का जवाब देने से बचते रहे।यह रवैया अपने आप में गंभीर संदेह को और गहरा करता है।

    उतई–मोरिद में भी अवैध खनन, फिर भी जांच नदारद

    हाल ही में एक और गंभीर मामला सामने आया है।उतई क्षेत्र के ग्राम मोरिद, तहसील भिलाई-3 अंतर्गत दुर्गा फार्म के पास खुलेआम मुरम मिट्टी का अवैध उत्खनन और परिवहन जारी है।

    इस संबंध में लोकेशन फोटो और शिकायत खनिज विभाग को भेजे जाने के बावजूद तीन दिन बीत जाने के बाद भी खनिज इंस्पेक्टर दीपक तिवारी मौके पर जांच के लिए नहीं पहुंचे।

    नाकाबंदी बंद, विभाग मुख्यालय में जमे अधिकारी

    विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले के सभी खनिज नाके बंद कर दिए गए हैं, और अधिकांश कर्मचारी व अधिकारी जिला मुख्यालय में ही जमे हुए हैं।

    ऐसे में सवाल उठता है कि जब अवैध खनन की शिकायतें बढ़ रही हैं, तब जमीनी निगरानी क्यों खत्म कर दी गई?

    20 वर्षों से अवैध उत्खनन का आरोप

    भिलाई-3 क्षेत्र अंतर्गत पवन यदु द्वारा पिछले लगभग 20 वर्षों से अवैध उत्खनन किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।

    यदि यह तथ्य सही है, तो यह केवल एक-दो मामलों की बात नहीं, बल्कि खनिज विभाग की वर्षों पुरानी विफलता या मौन सहमति की ओर इशारा करता है।

    राजस्व नुकसान या खुला संरक्षण?

    खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व जिला प्रशासन की सबसे बड़ी आय का स्रोत माना जाता है।

    खेत निर्माण, भारतमाला परियोजना और निजी संस्थाओं की आड़ में हो रहा यह अवैध खनन न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सीधे-सीधे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य है।

    अब बड़ा सवाल यह है कि—

    क्या यह सब लापरवाही है या फिर सुनियोजित संरक्षण?

    क्या कलेक्टर को भी गुमराह किया जा रहा है?

    खनिज विभाग सीधे तौर पर जिला कलेक्टर के अधीन कार्य करता है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि

    क्या खनिज इंस्पेक्टर दीपक तिवारी वास्तविक स्थिति से कलेक्टर को अवगत नहीं करा रहे, या फिर जानबूझकर जानकारी छिपाई जा रही है?

    सुशासन बनाम जमीनी हकीकत

    एक ओर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रदेश में सुशासन की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुर्ग जिले में खनिज विभाग की यह कार्यप्रणाली सरकारी दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि—

    क्या उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच होगी?

    क्या दोषियों पर कार्रवाई कर राजस्व की भरपाई की जाएगी?

    या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा?

    दुर्ग की जनता और किसान जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

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