July 23, 2026
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    कलेक्टर के आदेश की आड़ में ‘राम रसोई’ को जमीन का खेल? बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा पर गंभीर सवाल, 6 महीने से फाइल गायब! Featured

    • rounak group

    दुर्ग।

    शहर के व्यस्ततम बस स्टैंड क्षेत्र में स्थित “राम रसोई” को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें नगर निगम के बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अनुबंध समाप्ति के बाद भी पिछले 6 महीनों से राम रसोई अवैध रूप से संचालित हो रही है, लेकिन न तो शिकायतों की जांच हो रही है और न ही संबंधित फाइल का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने आ रहा है।

    बताया जा रहा है कि बस स्टैंड जैसे प्राइम लोकेशन पर, जहां जमीन की कीमत हजारों रुपए प्रति वर्गफुट आंकी जाती है, वहां लगभग 2000 वर्गफुट क्षेत्र पर राम रसोई के संचालक चतुर्भुज राठी द्वारा कब्जा बनाए रखा गया है। इस पूरे मामले में बाजार विभाग की निष्क्रियता अब संदेह के घेरे में आ गई है।

    विस्थापन के नाम पर नया खेल?

    मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब बस स्टैंड स्थित शौचालय के पास की दो दुकानों को तोड़ने और उनके विस्थापन का आदेश जिला कलेक्टर द्वारा दिया गया। हालांकि कलेक्टर ने “उपयुक्त स्थान” पर विस्थापन की बात कही थी, लेकिन बाजार अधिकारी द्वारा जिस स्थान का चयन किया गया है, वह यातायात व्यवस्था के लिहाज से बेहद संवेदनशील और अव्यवस्थित माना जा रहा है।

    स्थानीय सूत्रों का दावा है कि जिस मोड़ पर नई दुकानों के निर्माण की तैयारी की जा रही है, वहां पहले से ही यातायात का दबाव रहता है। ऐसे में यह निर्णय न केवल आम जनता के लिए परेशानी का कारण बन सकता है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से राम रसोई के वर्तमान कब्जे को स्थायी करने की दिशा में भी कदम माना जा रहा है।

    6 महीने से जांच ठंडे बस्ते में, फाइल का अता-पता नहीं

    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राम रसोई से जुड़ी शिकायतों को करीब 6 महीने बीत चुके हैं, लेकिन बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा न तो जांच पूरी कर पाए हैं और न ही फाइल की स्थिति स्पष्ट कर पा रहे हैं। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    पर्दे के पीछे सौदेबाजी की चर्चा तेज

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह चर्चा भी जोरों पर है कि विस्थापन और जमीन आवंटन के इस खेल में मोटी रकम का लेन-देन हुआ है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से नियमों की अनदेखी और देरी हो रही है, उसने संदेह को और गहरा कर दिया है।

    आयुक्त की भूमिका पर नजर

    अब नजरें नगर निगम आयुक्त सुमीत अग्रवाल (आईएएस) पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि वे इस मामले में जमीनी स्तर पर निष्पक्ष जांच कराएंगी और बस स्टैंड की व्यवस्था को सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगी।

    आम जनता की चिंता बढ़ी

    यदि समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो बस स्टैंड की यातायात व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ेगा।

    अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है या फिर “आदेश की आड़” में चल रहा यह खेल यूं ही जारी रहता है।

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    Last modified on Wednesday, 08 April 2026 15:45

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