
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
हजारों क्विंटल राशन की कमी, करोड़ों की वसूली अब तक अधर में... मंत्री का करीबी बताने वाले नेता पर सरकारी चावल खरीदकर मिलों तक पहुंचाने के गंभीर आरोप
दुर्ग। प्रदेश में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार जहां सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं दुर्ग जिला खाद्य विभाग के अंतर्गत संचालित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पिछले दो वर्षों में विभागीय जांच के दौरान कई उचित मूल्य दुकानों में हजारों क्विंटल सरकारी राशन का स्टॉक कम पाया गया। इसके बावजूद अब तक करोड़ों रुपये की वसूली और कठोर कार्रवाई कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी है।
सूत्रों के अनुसार, विभागीय जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जिन राशनों का स्टॉक दुकानों में होना चाहिए था, वह मौके पर उपलब्ध नहीं मिला। इससे यह संदेह और गहरा होता है कि सरकारी चावल खुले बाजार में बेच दिया गया। सवाल यह है कि यदि राशन गायब मिला तो उसकी जवाबदेही तय करने और सरकारी नुकसान की भरपाई करने में आखिर इतनी देरी क्यों हो रही है?
मंत्री की नजदीकी का दावा, सरकारी चावल के कारोबार का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप एक ऐसे व्यापारी पर लग रहे हैं, जो जिले में एक प्रभावशाली पदाधिकारी के रूप में अपनी पहचान रखता है और स्वयं को प्रदेश के एक मंत्री का करीबी बताता है। सूत्रों का दावा है कि उसके गोदाम में सरकारी राशन पहुंचने और वहां से राइस मिलों तक भेजे जाने के वीडियो भी सामने आए हैं। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जानकारी के अनुसार, हर तीसरे-चौथे दिन सरकारी चावल से भरी एक गाड़ी मिलों तक पहुंचती है और इस पूरे खेल से लाखों रुपये का मुनाफा कमाया जा रहा है। यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल सरकारी राशन की कालाबाजारी नहीं, बल्कि गरीबों के हक पर खुला डाका माना जाएगा।
खाद्य विभाग की कार्रवाई पर सवाल
सूत्रों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों को इस कथित खेल की जानकारी समय-समय पर दी गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल जांच और नोटिस की प्रक्रिया ही चलती रही। विभागीय अधिकारी समय-सीमा और प्रक्रिया का हवाला देकर कार्रवाई टालते नजर आ रहे हैं। इस बीच कथित रूप से सुबह और देर रात सरकारी चावल की आवाजाही जारी रहने की बातें भी सामने आ रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभाग स्वयं स्टॉक में कमी स्वीकार कर चुका है, तब करोड़ों रुपये की वसूली और दोषियों पर कठोर कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई?
सुशासन की छवि पर सवाल
राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले की चर्चा तेज है। भारतीय जनता पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति मंत्री की निकटता का नाम लेकर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करता है, तो इससे सरकार और मंत्री दोनों की छवि प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई ही सरकार के सुशासन के दावों को मजबूत कर सकती है।
उठ रहे हैं ये बड़े सवाल
विभागीय जांच में हजारों क्विंटल राशन कम मिलने के बाद भी वसूली क्यों लंबित है?
जिन दुकानों में स्टॉक कम मिला, उनके खिलाफ अब तक अंतिम कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
कथित रूप से सरकारी चावल खरीदने वाले व्यापारियों और बिचौलियों पर कार्रवाई कब होगी?
यदि वीडियो और अन्य इनपुट विभाग तक पहुंचे हैं, तो जांच किस स्तर पर है?
क्या राजनीतिक संरक्षण के आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी?
(नोट: इस समाचार में वर्णित कुछ आरोप स्थानीय सूत्रों और उपलब्ध जानकारियों पर आधारित हैं। संबंधित व्यक्तियों एवं विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
