November 06, 2026
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    महापौर अलका बाघमार और बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा के सुशासन के दावों की खुली पोल! Featured

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    धनतेरस पर जमीनी हकीकत ने प्रेस विज्ञप्तियों की चमक उतारी; संभावित अग्निकांड का खतरा बरकरार, पुराना बस स्टैंड में वाहन मेला लगने से पार्किंग व्यवस्था भी बदहाल

    दुर्ग। दीपावली से ठीक पहले शहर में सुशासन, नियमों के पालन और बाजार व्यवस्था दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे करने वाली नगर निगम की शहरी सरकार और बाजार विभाग की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। महापौर अलका बाघमार द्वारा सुचारू व्यवस्था के दावों के बीच बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा के विभागीय नियंत्रण की जमीनी हकीकत धनतेरस के दिन सामने आ गई। समृद्धि बाजार में पूजन सामग्री के विक्रय के लिए आवंटित स्टॉलों के बीच एक बार फिर पटाखों की दुकानें संचालित होती दिखाई दीं। यह स्थिति केवल बाजार प्रबंधन की विफलता नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा, अग्नि दुर्घटना की आशंका और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है।

    पूजन सामग्री के स्टॉलों के बीच पटाखा कारोबार, आखिर किसकी अनुमति से?

    समृद्धि बाजार में पिछले कुछ वर्षों से दीपावली के अवसर पर नगर निगम द्वारा पूजन सामग्री के विक्रय के लिए अस्थायी दुकानों का आवंटन किया जाता रहा है। लेकिन इन्हीं स्टॉलों के बीच पटाखों की बिक्री का मामला भी बार-बार सामने आता रहा है। पिछले वर्ष भी इसी प्रकार की स्थिति निर्मित हुई थी। शिकायतों के बाद बाजार विभाग की ओर से कार्रवाई करने और व्यवस्था सुधारने की बातें कही जाती रहीं, लेकिन आरोप है कि पूरे त्योहारी सीजन में पटाखों का विक्रय जारी रहा।

    इससे भी गंभीर बात यह है कि सूत्रों के माध्यम से यह जानकारी सामने आई थी कि कथित तौर पर बाजार विभाग के कुछ कर्मचारियों द्वारा भी इन्हीं दुकानों से पटाखे खरीदे गए। इस जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और इसकी निष्पक्ष विभागीय जांच होनी चाहिए। यदि इसमें कोई सच्चाई है तो यह केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि नियामक व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करेगा।

    लॉटरी और प्रेस विज्ञप्ति में सुशासन, लेकिन बाजार में नियमों की अनदेखी!

    पिछले सप्ताह पटाखा दुकानों के लिए स्थान आवंटन की लॉटरी प्रक्रिया के दौरान महापौर अलका बाघमार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में शहर में सुशासन और सुव्यवस्थित बाजार व्यवस्था की प्रतिबद्धता जताई गई थी। लेकिन शौर्यपथ ने उस समय ही आशंका जाहिर की थी कि समृद्धि बाजार में पूजन सामग्री के स्टॉलों के बीच पटाखा कारोबार संचालित होने की स्थिति दोबारा बन सकती है।

    शौर्यपथ ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि ऐसी स्थिति सामने आती है तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों, महापौर और सभापति तक पहुंचाई जाएगी। अब धनतेरस के दिन समृद्धि बाजार में पटाखों की दुकानें फिर संचालित होती दिखाई देने से उन आशंकाओं को बल मिला है।

    सवाल यह है कि जब पटाखा दुकानों के लिए अलग से स्थान आवंटन की प्रक्रिया अपनाई जाती है, तब पूजन सामग्री के स्टॉलों के बीच पटाखों की बिक्री किस आधार पर हो रही है? क्या इन दुकानों के पास वैध लाइसेंस, निर्धारित स्थल की अनुमति और अग्नि सुरक्षा संबंधी आवश्यक प्रबंध हैं? यदि हैं तो उनकी जांच किस अधिकारी ने की? और यदि नहीं हैं तो बाजार विभाग अब तक कार्रवाई से पीछे क्यों है?

    अग्नि सुरक्षा से खिलवाड़, दुर्घटना के बाद जिम्मेदारी कौन लेगा?

    पटाखे ज्वलनशील एवं विस्फोटक प्रकृति के उत्पाद हैं। इनके विक्रय के लिए विस्फोटक अधिनियम, 1884, विस्फोटक नियम, 2008 तथा संबंधित लाइसेंसिंग और अग्नि सुरक्षा प्रावधानों का पालन अनिवार्य है। निर्धारित लाइसेंस, स्वीकृत परिसर, सुरक्षित दूरी, भंडारण और अग्निशमन संबंधी शर्तों की अनदेखी आम नागरिकों की जान-माल के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

    समृद्धि बाजार जैसे सार्वजनिक और त्योहारी भीड़ वाले क्षेत्र में पूजन सामग्री की दुकानों के बीच पटाखों का कारोबार होने से आग लगने की स्थिति में आसपास के स्टॉल, दुकानदारों और खरीदारों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में यह मामला केवल किसी दुकान के संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि संभावित सामूहिक दुर्घटना की आशंका से जुड़ा है।

    नगर निगम और जिला प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित दुकानों का निरीक्षण किसने किया, लाइसेंस की वैधता किसने जांची और सुरक्षा मानकों के अनुपालन का प्रमाण किसके पास है? किसी अप्रत्याशित घटना के बाद जांच और मुआवजे की औपचारिकताओं से बेहतर है कि समय रहते नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

    पुराना बस स्टैंड में वाहन मेला, इंदिरा मार्केट आने वालों की पार्किंग समस्या और बढ़ी

    बाजार व्यवस्था की अव्यवस्था केवल समृद्धि बाजार तक सीमित नहीं है। इंदिरा मार्केट में खरीदारी के लिए आने वाले नागरिक पहले से ही पार्किंग की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में पुराना बस स्टैंड के मध्य वाहन मेले का आयोजन पार्किंग की उपलब्धता और यातायात प्रबंधन को लेकर नई परेशानी खड़ी कर रहा है।

    एक ओर नागरिक अपने वाहनों को खड़ा करने के लिए जगह तलाश रहे हैं, दूसरी ओर उपलब्ध सार्वजनिक स्थल पर वाहन मेला आयोजित किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस आयोजन के लिए स्थल आवंटित करते समय आम नागरिकों की पार्किंग आवश्यकता और यातायात व्यवस्था का आकलन किया गया था या नहीं? बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की जिम्मेदारी केवल स्टॉल आवंटन तक सीमित नहीं, बल्कि बाजार क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं और सुव्यवस्थित संचालन को सुनिश्चित करना भी है।

    महापौर के दावों और बाजार अधिकारी की कार्यप्रणाली पर जवाबदेही तय हो

    नगर निगम की जिम्मेदारी केवल प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सुशासन और बेहतर व्यवस्था का दावा करना नहीं, बल्कि उन दावों को धरातल पर लागू करना भी है। महापौर अलका बाघमार शहर की प्रथम नागरिक और नगर निगम की राजनीतिक नेतृत्वकर्ता हैं, वहीं बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा पर बाजार व्यवस्था के संचालन और विभागीय नियमों के अनुपालन की जिम्मेदारी है।

    ऐसे में समृद्धि बाजार में दोबारा पटाखों की दुकानें संचालित होने और पुराना बस स्टैंड में पार्किंग संकट बढ़ने की स्थिति में दोनों स्तरों पर जवाबदेही तय होना आवश्यक है। यदि बाजार विभाग को पहले से शिकायतें और संभावित अनियमितताओं की जानकारी थी, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या विभागीय निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित हैं? क्या महापौर की ओर से जारी व्यवस्था संबंधी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की कोई निगरानी व्यवस्था है?

    अब कार्रवाई होगी या फिर जिम्मेदारी से बचने का एक और अवसर?

    धनतेरस के दिन सामने आई इस स्थिति में नगर निगम प्रशासन, महापौर और बाजार विभाग के सामने कुछ सीधे सवाल हैं—

    1. समृद्धि बाजार में पटाखा बेचने वाली दुकानों के पास वैध विस्फोटक लाइसेंस और निर्धारित स्थल की अनुमति है या नहीं?

    2. क्या इन दुकानों का अग्नि सुरक्षा एवं अन्य वैधानिक मानकों के अनुरूप निरीक्षण किया गया है?

    3. पूजन सामग्री के स्टॉलों के बीच पटाखा विक्रय की अनुमति किसने दी और इसकी विभागीय जिम्मेदारी किसकी है?

    4. पिछले वर्ष की शिकायतों और इस वर्ष पूर्व में जताई गई आशंकाओं के बावजूद ऐसी स्थिति दोबारा कैसे बनी?

    5. बाजार विभाग के कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से पटाखे खरीदे जाने की जानकारी की निष्पक्ष जांच कब होगी?

    6. पुराना बस स्टैंड में वाहन मेले के आयोजन के लिए अनुमति देते समय इंदिरा मार्केट की पार्किंग और यातायात व्यवस्था का आकलन किया गया था या नहीं?

    नगर निगम से अपेक्षा है कि समृद्धि बाजार में संचालित प्रत्येक पटाखा दुकान की तत्काल जांच कराई जाए। जहां वैध लाइसेंस, स्वीकृत स्थल अथवा सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मिले, वहां नियमानुसार तत्काल विक्रय बंद कराकर संबंधित जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन को कार्रवाई के लिए सूचित किया जाए। यदि स्टॉल आवंटन की शर्तों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो नियमानुसार आवंटन निरस्त करने और भविष्य के आवंटन से प्रतिबंधित करने की कार्रवाई पर भी विचार किया जाए।

    जनता को प्रेस विज्ञप्ति नहीं, सुरक्षित बाजार और सुचारू व्यवस्था चाहिए। महापौर अलका बाघमार और बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा के सामने अब वास्तविक परीक्षा है। क्या वे नियमों का निष्पक्ष पालन कराते हुए संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे, या फिर हर वर्ष की तरह शिकायतों, आश्वासनों और औपचारिकताओं के बीच दीपावली का बाजार चलता रहेगा? शहर की जनता को इसका जवाब कार्रवाई के रूप में चाहिए, केवल शब्दों में नहीं।

     

    शौर्यपथ की पड़ताल जारी है।

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