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इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री समीर पाण्डेय ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार 12 जनवरी को ग्राम कचांदुर में बाल विवाह की सूचना प्राप्त होते ही विभागीय टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए वर विशाल पिता राजकुमार के निवास स्थल पर पहुँचकर आवश्यक हस्तक्षेप किया गया। मौके पर उपस्थित राजकुमार एवं उनके परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों से अवगत कराते हुए समझाइश दी गई।
समझाइश के उपरांत नाबालिक युवक राजकुमार (उम्र 19 वर्ष) एवं उनके माता-पिता द्वारा अपनी त्रुटि स्वीकार की गई तथा युवक की 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने के पश्चात ही विवाह करने की सहमति व्यक्त की गई।
जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री पाण्डेय ने बताया कि इस कार्रवाई के माध्यम से जिले में बाल विवाह की रोकथाम सुनिश्चित की गई है। इस अवसर पर ग्राम पंचायत के सरपंच, उप सरपंच, सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी में नियमानुसार पंचनामा भी तैयार किया गया।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में बाल विवाह रोकने हेतु सतत निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई का कार्य निरंतर जारी है।
धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित है। निर्धारित अवधि के भीतर धान बिक्री से शेष रह गए किसानों का शत-प्रतिशत धान खरीदी सुनिश्चित करने हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं।
इस संबंध में नोडल अधिकारी एवं जनपद पंचायत डौण्डी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री डीडी मण्डले ने जानकारी देते हुए बताया कि धान खरीदी केन्द्र डौण्डी के अंतर्गत शामिल गांवों के 907 किसानों द्वारा 315.48 हेक्टेयर क्षेत्रफल का रकबा समर्पित किया गया है। उन्होंने बताया कि शेष कृषकों के धान की खरीदी सुनिश्चित करने के साथ-साथ अवैध धान की आवक रोकने हेतु भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और सुचारू संचालन बनाए रखने के लिए राजस्व, खाद्य एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों, साथ ही गठित निगरानी दल द्वारा धान खरीदी कार्य की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है।
पार्षद नदारद, बदबूदार व कीड़ेयुक्त पानी पीने को मजबूर जनता अब निगम प्रशासन के दर पर
दुर्ग | विशेष रिपोर्ट
लोकतंत्र में आम जनता और प्रशासन के बीच सेतु माने जाने वाले जनप्रतिनिधि जब नदारद हो जाएं, तब समस्याएं केवल बढ़ती नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संकट का रूप ले लेती हैं।
कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों दुर्ग नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 28 का है, जहां की जनता बदबूदार, कीड़ेयुक्त और अस्वच्छ पानी पीने को मजबूर है।
नल से निकल रहा बदबूदार पानी, उबलाकर पीने को मजबूर लोग
वार्ड नंबर 28 में पिछले कई दिनों से नलों से ऐसा पानी आ रहा है जिसमें—
तेज दुर्गंध है
कीड़े और गंदगी दिखाई दे रही है
जिसे सीधे पीना तो दूर, उपयोग में लाना भी खतरे से खाली नहीं
वार्डवासियों का कहना है कि मजबूरी में पानी को उबालकर, छानकर और अगले दिन इस्तेमाल किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक भी है।
पार्षद नदारद, जनता असहाय
इस गंभीर समस्या के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि— वार्ड की पार्षद आखिर कहां हैं?
वार्ड नंबर 28 की निर्वाचित पार्षद श्रीमती ममता राकेश सेन (भाजपा) हैं।
हालांकि उनका शासकीय निवास वार्ड में दर्ज है, लेकिन वर्तमान में वे वार्ड में नियमित रूप से निवास नहीं करतीं, जिससे आम जनता का उनसे संपर्क लगभग असंभव हो गया है।
वार्डवासियों का कहना है कि—
पार्षद वार्ड में दिखाई नहीं देतीं
शिकायत करने पर या तो पुराना बस स्टैंड स्थित कार्यालय जाने को कहा जाता है
या फिर अनिश्चित प्रतीक्षा ही एकमात्र विकल्प रह जाता है
जनप्रतिनिधि की अनुपस्थिति, जनता को सीधे प्रशासन के भरोसे छोड़ा
स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि—
“जब पार्षद उपलब्ध नहीं हैं, तो अब हम सीधे निगम प्रशासन के पास ही जाएंगे।”
यह कथन केवल आक्रोश नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि की निष्क्रियता पर जनता का अविश्वास दर्शाता है।
सोशल मीडिया में उठा मामला, जल विभाग सक्रिय लेकिन…
सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने के बाद जल विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है, लेकिन अब तक—
वार्ड में स्थायी समाधान नहीं हुआ
पार्षद की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई
यही कारण है कि वार्डवासियों की चिंता और बढ़ती जा रही है।
स्वास्थ्य संकट की आहट, प्रशासन की परीक्षा
यह मामला केवल पानी की आपूर्ति का नहीं, बल्कि—
जनस्वास्थ्य
लोकतांत्रिक जवाबदेही
और जनप्रतिनिधि की भूमिका का है
यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो वार्ड में जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा भी इंकार नहीं किया जा सकता।
अब सवाल सीधे प्रशासन से
क्या जल विभाग तत्काल शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करेगा?
क्या वार्ड की जनता को अभी भी बदबूदार पानी पीने को मजबूर होना पड़ेगा?
और सबसे अहम—
क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधि जनता की पीड़ा के बीच अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे?
निष्कर्ष
वार्ड नंबर 28 की यह स्थिति नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों दोनों के लिए चेतावनी है।
जनता ने वोट देकर प्रतिनिधि चुना है, अनुपस्थिति और मौन देखने के लिए नहीं।
अब देखना यह है कि— प्रशासन समय पर हस्तक्षेप करता है या नहीं,
और जनप्रतिनिधि जनता के बीच लौटते हैं या नहीं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि नक्सलवाद उन्मूलन अब निर्णायक चरण में है और मार्च 2026 तक इसे पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य है।
सुरक्षा शिविरों का विस्तार: दिसंबर 2023 से अब तक 65 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं, जिससे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में सरकारी उपस्थिति मजबूत हुई।
नक्सली नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई: प्रमुख माओवादी विचारकों और कमांडरों को निष्क्रिय कर उनके नेटवर्क को पूरी तरह कमजोर किया गया।
सटीक आंकड़े:
आत्मसमर्पण: 2,386+ नक्सली
गिरफ्तार: 1,901+ नक्सली
निष्क्रिय/मारे गए: 505+ नक्सली
इन कदमों से नक्सलियों की कमांड और नियंत्रण प्रणाली टूट चुकी है और स्थानीय लोग अब खुले तौर पर सरकारी पहलों का समर्थन कर रहे हैं।
सरकार ने नक्सलियों के “कोर एरिया” (अबूझमाड़ और घोर जंगली इलाके) में सक्रिय रूप से अभियान चलाकर उनके गढ़ों को निशाना बनाया।
फॉरवर्ड लिंक कैंप: पिछले दो वर्षों में 50+ नए कैंप स्थापित, जिन्हें विकास केंद्र के रूप में विकसित किया गया।
इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन: अब मुठभेड़ें केवल गश्त पर नहीं होतीं, बल्कि सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर विशेष ऑपरेशन किए जाते हैं।
आधुनिक हथियार और तकनीक: ड्रोन, एन्टी-माइन वाहन, और अत्याधुनिक संचार उपकरणों से जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई, हताहत दर में भारी कमी आई।
इन रणनीतियों के परिणामस्वरूप नक्सलियों के बीच भय और अविश्वास का माहौल उत्पन्न हुआ और कई कमांडर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आए।
मुख्यमंत्री की प्रमुख पहल ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गाँव) योजना ने सुरक्षा शिविरों के आसपास के गांवों में शत-प्रतिशत विकास की दिशा में काम किया।
सुविधाओं का विस्तार: राशन दुकान, स्कूल, आंगनबाड़ी, खेल का मैदान, मुफ्त बिजली, पक्के आवास, स्वास्थ्य क्लिनिक और 25+ बुनियादी सुविधाओं का वितरण।
शिक्षा और स्वास्थ्य: बंद 300+ स्कूलों को पुनः खोला गया, और ‘छू लो आसमान’ जैसी कोचिंग संस्थाओं के माध्यम से IIT/NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी उपलब्ध।
स्थानीय सहभागिता: ग्रामीण अब स्वयं सुरक्षा शिविरों की मांग करने लगे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि विकास और सुरक्षा का मॉडल सफल हुआ है।
बस्तर को केवल सुरक्षा के मोर्चे तक सीमित नहीं रखा गया; सरकार ने इसे स्थानीय उद्यमिता, वनोपज और पर्यटन से जोड़ा।
वनोपज आधारित समर्थन: इमली, महुआ, कोसा वनोपजों का MSP बढ़ाया गया और बिचौलियों को खत्म किया गया।
स्थानीय रोजगार: ‘बस्तर कैफे’ ब्रांड और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिला।
पर्यटन और इको-टूरिज्म: ‘बस्तर पांडुम’, ‘बस्तर ओलंपिक’ और सुरक्षित पर्यटन स्थलों से स्थानीय आजीविका को बढ़ावा।
कौशल विकास: आत्मसमर्पित नक्सलियों और युवाओं को ट्रैक्टर रिपेयरिंग, मोबाइल रिपेयरिंग, सोलर पंप तकनीशियन और अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान।
भरोसे का संकेत: 2025 में ‘लोन वर्राटू’ अभियान के तहत 2,000+ नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें कई अब ‘बस्तर फाइटर्स’ के रूप में पुलिस और प्रशासन की मदद कर रहे हैं।
राजनीतिक भागीदारी: ग्राम सभाओं और स्थानीय चुनावों में मतदान प्रतिशत में वृद्धि, जो लोकतंत्र में विश्वास की बढ़ती दर को दर्शाती है।
सड़कों और पुलों का निर्माण: इंद्रावती नदी पर नए पुल और ग्रामीण सड़कों का निर्माण, जिससे मानसून के दौरान भी बस्तर का संपर्क टूटने का खतरा नहीं।
स्वास्थ्य सेवाएं: ‘हाट बाजार क्लिनिक’ योजना के तहत जंगलों और दुर्गम इलाकों में डॉक्टर और दवाइयां उपलब्ध।
शिक्षा और कौशल: बच्चों के लिए गुणवत्ता शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मार्गदर्शन।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में दो वर्षों में सुरक्षा, विकास और विश्वास का त्रिकोणीय मॉडल सफल हुआ है। नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और विकास की मुख्यधारा के प्रति स्थानीय लोगों के विश्वास ने बस्तर को 'लाल आतंक' से मुक्त कर 'हरी-भरी संस्कृति और तेजी से बढ़ते विकास' की पहचान दिलाई है।
मार्च 2026 तक बस्तर को पूर्ण नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य अब within reach है, और यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उनकी सरकार ने बस्तर को न केवल सुरक्षित, बल्कि आत्मनिर्भर और विकसित बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है।
दुर्ग । शौर्यपथ
जहाँ आम नागरिकों से एक-एक दस्तावेज के लिए नियमों और प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन कराया जाता है, वहीं दुर्ग तहसील कार्यालय परिसर के भीतर वर्षों से दो निजी व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना किसी स्पष्ट वैधानिक अनुमति के संचालित होने का मामला सामने आया है। यह स्थिति न केवल गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि एक बड़े संभावित घोटाले की ओर भी इशारा कर रही है।
तहसील परिसर में स्थित त्रिमूर्ति होटल और तहसील कार्यालय के अंदर संचालित वाहन पार्किंग से प्रतिदिन हजारों रुपये की वसूली की जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन प्रतिष्ठानों का ठेका किसे, कब और किन शर्तों पर दिया गया—इसकी स्पष्ट जानकारी स्वयं विभागीय अधिकारियों के पास भी उपलब्ध नहीं है।
ठेका कब और कैसे—कोई रिकॉर्ड नहीं
जब इस संबंध में तहसील के जिम्मेदार अधिकारियों से जानकारी मांगी गई, तो अलग-अलग और विरोधाभासी जवाब सामने आए। किसी अधिकारी ने कहा कि "सालों पहले ठेका हुआ था, उसके बाद कभी नया टेंडर नहीं हुआ", जबकि एक अन्य अधिकारी ने स्वीकार किया कि त्रिमूर्ति होटल को नोटिस तो जारी किया गया था, लेकिन उसके बाद की कार्रवाई से संबंधित कोई फाइल या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। यानी नोटिस जारी हुआ, पर कार्रवाई का कोई ठोस प्रमाण नहीं।
सूत्रों और प्रशासन के बयान में टकराव
होटल प्रबंधन का दावा है कि "हर साल ठेका होता है", लेकिन विभागीय अधिकारी इस दावे को सिरे से नकार रहे हैं। यदि हर वर्ष ठेका हुआ है, तो उसके टेंडर दस्तावेज, अनुबंध, रसीदें और राजस्व रिकॉर्ड कहाँ हैं? और यदि ठेका नहीं हुआ, तो सरकारी परिसर के भीतर निजी होटल का संचालन आखिर किसके आदेश पर हो रहा है—यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
पार्किंग से वसूली, शासन को शून्य लाभ
तहसील परिसर की पार्किंग में प्रतिदिन सैकड़ों वाहनों से शुल्क वसूला जाता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इस वसूली की राशि का कोई हिस्सा सरकारी खजाने में जमा हो रहा है या नहीं। न तो विधिवत रसीद दी जाती है, न ही ठेके या लेखा-जोखे का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह पैसा जा कहाँ रहा है।
प्रशासनिक संरक्षण या लापरवाही?
होटल, पार्किंग और एटीएम—तीनों निजी प्रतिष्ठान एक ही सरकारी तहसील परिसर के भीतर संचालित हो रहे हैं और किसी को यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि इन्हें अनुमति किसने दी। यह स्थिति केवल लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक संरक्षण में चल रही एक समानांतर अर्थव्यवस्था की आशंका को भी जन्म देती है।
अब निगाहें तहसीलदार पर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तहसीलदार इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराएंगे? क्या सभी टेंडर, अनुबंध और राजस्व वसूली की निष्पक्ष ऑडिट होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? क्योंकि यह साफ है कि तहसील परिसर में वर्षों से लाखों रुपये की कमाई हो रही है, जबकि सरकार को कोई स्पष्ट लाभ नहीं मिल रहा। यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति की खुली लूट का गंभीर आरोप है।
नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह प्रस्तावक के रूप में मौजूद रहेंगे। नितिन नबीन वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं और बिहार की बांकेपुर सीट से पांच बार विधायक रह चुके हैं। 46 वर्ष की आयु में वे भाजपा के इतिहास के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे।
भाजपा के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन हेतु किसी भी व्यक्ति के पास कम से कम 15 वर्षों की सदस्यता और 12 वर्षों का सक्रिय कार्यकाल होना आवश्यक है। इसके अलावा, नामांकन के लिए कम से कम 5 राज्यों की प्रदेश परिषदों के 20 सदस्यों का संयुक्त प्रस्तावक होना अनिवार्य है।
वर्तमान में नितिन नबीन सबसे प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। पूर्व में वरिष्ठ नेताओं धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान और भूपेंद्र यादव के नाम चर्चा में रहे थे, लेकिन कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद अन्य दावेदारों द्वारा नामांकन की संभावना कम है।
इस चुनाव में छत्तीसगढ़ की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में प्रदेश इकाइयों की सक्रिय भागीदारी होती है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव 19 जनवरी को दिल्ली में होने वाली नामांकन प्रक्रिया में उपस्थित रहेंगे। नितिन नबीन लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी रहे हैं और उनके कार्यकाल में भाजपा ने राज्य में सत्ता वापसी की थी। उनके अध्यक्ष बनने से राज्य भाजपा में उत्साह देखा जा रहा है।
चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ को नया प्रदेश प्रभारी मिलने की संभावना है, क्योंकि नितिन नबीन अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे।
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के नरहरपुर ब्लॉक अंतर्गत बागाबारी गांव से मानव तस्करी का एक गंभीर और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। इस घटना में गांव के ही एक व्यक्ति ने विश्वासघात करते हुए दो महिलाओं और एक 11 वर्षीय बच्ची को धोखे से राजस्थान ले जाकर बेच दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी ने पीड़ित महिलाओं और बच्ची को काम दिलाने के बहाने अपने साथ राजस्थान ले गया। भरोसे और जान-पहचान का फायदा उठाकर आरोपी ने उन्हें मानव तस्करी के जाल में फंसा दिया और वहां बेच दिया।
जब लंबे समय तक पीड़ितों से संपर्क नहीं हो सका, तब परिजनों और ग्रामीणों को अनहोनी की आशंका हुई। इसके बाद नरहरपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कांकेर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक विशेष टीम राजस्थान रवाना की।
छत्तीसगढ़ पुलिस ने राजस्थान पुलिस के सहयोग से दोनों महिलाओं और नाबालिग बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। सभी को सकुशल कांकेर लाया गया है, जहां उनका चिकित्सकीय परीक्षण और काउंसलिंग कराई जा रही है।
इस मामले में शामिल मुख्य आरोपी (पीड़ोसी) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि —
क्या इस तस्करी के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है
क्या पहले भी ग्रामीण इलाकों से महिलाओं और बच्चों की तस्करी की गई है
राजस्थान में किन लोगों को पीड़ितों को सौंपा गया था
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मानव तस्करी, धोखाधड़ी और नाबालिग के अपहरण से संबंधित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में परिचितों पर आंख मूंदकर भरोसा न करने और रोजगार के नाम पर बाहर ले जाने वालों की सघन जांच की आवश्यकता को रेखांकित करती है। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
नई दिल्ली |
भारतीय लोकतंत्र की निष्पक्षता की प्रहरी मानी जाने वाली संस्था भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक साथ कई अहम संवैधानिक सवालों पर सुनवाई चल रही है। जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में हुई सुनवाइयों ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, जवाबदेही और निष्पक्षता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
12–13 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों को दी गई आजीवन कानूनी छूट (Immunity) पर जवाब मांगा है।
याचिका में CEC एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें) अधिनियम 2023 की धारा 16 को चुनौती दी गई है, जिसके तहत आयुक्तों को उनके कार्यकाल के दौरान किए गए फैसलों के लिए सिविल और आपराधिक कार्रवाई से सुरक्षा दी गई है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह प्रावधान संविधान के समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) और जवाबदेही के सिद्धांत के खिलाफ है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस धारा पर रोक लगाने से इनकार किया है, लेकिन इसकी संवैधानिक वैधता की गहन समीक्षा करने पर सहमति जताई है।
13 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सहित अन्य राज्यों में चल रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)’ के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों पर सुनवाई की।
कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्ट पूछा कि —
“क्या कोई निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) केंद्र सरकार के अंतिम निर्णय से पहले ही किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह के आधार पर उसका नाम मतदाता सूची से हटा सकता है?”
कोर्ट ने संकेत दिया कि मताधिकार एक संवैधानिक अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार की प्रशासनिक जल्दबाजी लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट उस 2023 के कानून की भी समीक्षा कर रहा है, जिसके तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है।
याचिकाकर्ताओं और विपक्षी दलों का कहना है कि इससे निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता कमजोर हो सकती है और कार्यपालिका का प्रभाव बढ़ सकता है।
गौरतलब है कि मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि जब तक संसद कानून न बनाए, तब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति
प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश की समिति द्वारा की जाए।
बाद में केंद्र सरकार ने कानून बनाकर CJI को इस समिति से बाहर कर दिया, जिसे अब फिर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही यह सुनवाई केवल कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और चुनावी निष्पक्षता के भविष्य से जुड़ा अहम पड़ाव है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 13 जनवरी 2026 का दिन राजनयिक गतिविधियों, राष्ट्रनिर्माण से जुड़े संवाद और सांस्कृतिक उत्सवों के संदेशों से भरपूर रहा। इस दिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से लेकर युवाओं के सशक्तिकरण और भारतीय परंपराओं के उत्सव तक कई अहम कार्यक्रमों में सहभागिता की।
प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में फ्रांस के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार मिस्टर इमैनुएल बोने से मुलाकात की। इस दौरान भारत–फ्रांस रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक मुद्दों और द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक दोनों देशों के बीच गहरे होते कूटनीतिक संबंधों का संकेत मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री ने लोहड़ी के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए समृद्धि, खुशहाली और एकता का संदेश दिया। उन्होंने इस पर्व को कृषि, प्रकृति और सामूहिक उत्सव का प्रतीक बताया।
पीएम मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ में दिए गए अपने संबोधन की झलकियां साझा कीं। उन्होंने युवाओं को विकसित भारत के संकल्प में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए नेतृत्व, नवाचार और राष्ट्रसेवा पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों को उच्च उद्देश्यों के लिए प्रेरित करते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें आत्मविश्वास, परिश्रम और जागरूकता के साथ आगे बढ़ने का संदेश निहित था।
इसी दिन जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा का समापन हुआ। इससे पहले 12 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज़ ने अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित पतंग उत्सव में भाग लिया था। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई, जिसमें व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को लेकर सहमति बनी।
13 जनवरी का दिन प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय कार्यशैली को दर्शाता है, जहां एक ओर वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को सशक्त किया गया, वहीं दूसरी ओर युवाओं, संस्कृति और परंपराओं को भी समान महत्व दिया गया।
मेष (Aries):
करियर में उन्नति के योग हैं। सूर्य का गोचर कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान और लाभ दिला सकता है।
वृषभ (Taurus):
आर्थिक लाभ संभव है, लेकिन अनावश्यक खर्चों से बचें। व्यापार विस्तार के लिए समय अनुकूल है।
मिथुन (Gemini):
प्रेम जीवन और करियर दोनों के लिए दिन शुभ है। नए अवसर मिल सकते हैं।
कर्क (Cancer):
मानसिक तनाव में कमी आएगी। करियर में सफलता मिलेगी। मित्र की सलाह लाभकारी साबित होगी।
सिंह (Leo):
आर्थिक लेन-देन में सतर्क रहें। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। परिवार के साथ समय सुखद रहेगा।
कन्या (Virgo):
आय बढ़ाने के नए स्रोत मिल सकते हैं। पारिवारिक माहौल अच्छा रहेगा। सेहत का ध्यान रखें।
तुला (Libra):
लाभ के अवसर मिलेंगे। सुख-सुविधाओं पर खर्च संभव है। पैतृक मामलों में प्रगति होगी।
वृश्चिक (Scorpio):
वित्तीय स्थिति मजबूत रहेगी। दस्तावेजी कार्यों में सावधानी आवश्यक है। फिटनेस में सुधार होगा।
धनु (Sagittarius):
कार्यस्थल पर सामंजस्य बनाकर चलना होगा। विवादों और यात्राओं में सतर्कता रखें।
मकर (Capricorn):
मेहनत अधिक रहेगी, लेकिन सफलता के योग प्रबल हैं। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और शुभ समाचार मिल सकता है।
कुंभ (Aquarius):
राजनीतिक या सामाजिक महत्वाकांक्षाएं पूरी हो सकती हैं। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। यात्रा टालें।
मीन (Pisces):
कार्यस्थल पर सतर्क रहें। पुराने संपर्कों से लाभ मिलेगा। आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।
आज के दिन तिल, गुड़, खिचड़ी, घी और ऊनी वस्त्र का दान करना विशेष रूप से शुभ और पुण्यदायी माना गया है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
