August 01, 2026
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    • rounak group

    सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / जिस देश की सीमा पर तनाव हो, उसका एकजुट होना समय की सबसे बड़ी मांग है। यह एकजुटता देश के जवानों की शहादत का भी सबसे सच्चा सम्मान है। आज जब देश के लोग और तमाम नेता शहीदों का सम्मान कर रहे हैं, उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं, तब यह हमारे लिए देश के पक्ष में विचार करने का सही समय है। ध्यान रहे, चीन के भी जवान शहीद हुए हैं, लेकिन उनके सम्मान के लिए उसके नेताओं के पास दो शब्द भी नहीं हैं। चीन ने कितने जवान खोए हैं, वह शायद ही बताए, लेकिन भारत में एक-एक जवान की जान कीमती है। वाजिब सम्मान के साथ अपने जवानों की शहादत को सदियों तक याद करना हमारी परंपरा रही है। इस परंपरा के सच्चे सम्मान का ही एक बुनियादी व्यवहार हमारी एकजुटता है।
    आज ज्यादातर राजनीतिक पार्टियों ने अपने आपसी मतभेदों को भुला दिया है और वे सरकार व सेना के साथ खड़ी हैं। सीमा पर होने वाला कोई भी संघर्ष किसी एक नेता या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, देश की जिम्मेदारी है। सैनिक देश की रक्षा की शपथ लेते हैं, देश के लिए जान गंवाते हैं। ऐसे में, हमारे रक्षा मंत्री और अन्य नेताओं ने बिल्कुल सही कहा है, शहादत बेकार नहीं जाएगी। यदि हम वाकई चाहते हैं कि शहादत सार्थक हो, तो हमें सबसे पहले एकजुट होने की जरूरत को महसूस करना होगा। राजनीतिक एकजुटता सबसे जरूरी है और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आगामी बैठकों का खास महत्व है। ध्यान रहे, चीन के प्रति हमारा सांस्कृतिक-ऐतिहासिक-आर्थिक-राजनीतिक जुड़ाव हमें किसी निर्णय लेने की प्रक्रिया में संकोची बना देता है। हम एक कदम आगे बढ़ाकर दो कदम पीछे खींच लेते हैं, लेकिन हम मिल-जुलकर यह नहीं देखते कि चीन कदम-दर-कदम कहां से कहां पहुंच गया है। हमें एकजुट होकर इस सच को सामने लाना चाहिए। ध्यान रहे, चीन अपने लोगों को यह नहीं बता रहा कि उसने भारत की जमीन पर कहां-कहां, किस-किस आधार पर दावा कर रखा है। वह गलवान घाटी को चीनी क्षेत्र बता रहा है, तो यह जरूरी है कि हम दुनिया को सच बताएं।
    सख्त शासन की वजह से चीन अपने इतिहास, विरासत व पूर्वजों के विरुद्ध चल रहा है, वरना उसे याद रहता कि चीनी धर्मगुरु कन्फ्यूसियस ने कहा था, ‘एकता, वास्तव में, लोगों को अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने की अनुमति देती है, और फिर खुशी हासिल करती है’। चीन एक समय बुद्धमय भी हो गया था, आज भी वहां बुद्ध का बहुत प्रभाव है। उसे सोचना चाहिए कि जिस देश की जमीन पर वह निगाह गड़ाए बैठा है, वह देश उसी बुद्ध का है, जिनके शांति और अहिंसा के संदेश के सामने संसार झुक जाता है। चीन सब भूल गया, पर हमें नहीं भूलना है। सीमा पर तनाव भी हमारे लिए चौतरफा प्रेरणा का समय है। कूटनीतिक, राजनीतिक, सामरिक, आर्थिक, सामाजिक और साथ ही कोरोना के मोर्चे पर भी हमें और एकजुट होकर मुकाबला करना है। 45 साल बाद जो शहादत हुई है, वह चेतावनी है कि हमें अपना रास्ता ठीक कर लेना चाहिए। देशसेवा के प्रति समर्पण के अभाव और एकजुटता की कमी की वजह से ही भारतीय लोकतंत्र की शोभा कम होती है और चीन हमारी खामियों के बहाने ही लोकतंत्र और हमारी ताकत का मखौल उड़ाता है। बेशक, हम एकजुट हुए, तो सबको सही जवाब मिल जाएगा।

     

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