August 05, 2026
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    25 वर्ष की आयु में संन्यास लेकर स्वामी विवेकानंद ने दुनिया को सिखाई जीवन जीने की कला

    • rounak group

    शिक्षा /शौर्यपथ/

    आज स्वामी विवेवकानंद जयंती मनाई जा रही है। देश में इनकी जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। हर वर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाई जाती है। स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्र था और इनका जन्म 12 जनवरी 1863 में कोलकाता में हुआ था। इनके पिता कलकत्ता हाईकोर्ट में एक वकील थे और माता धार्मिक विचारों की महिला थीं। स्वामी विवेकानंद ने 25 की उम्र में परिवार छोड़कर संन्यास धारण कर लिया था। 1893 में अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म महासभा उनके द्वारा दिया गया भाषण विश्व प्रसिद्ध है। इसी भाषण के बाद दुनिया ने उनकी अध्यात्मिक सोच और दर्शन शास्त्र से प्रभावित हुई। स्वामी विवेकानन्द ने जीवन के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें कही थी। उनके द्वारा कहे गए विचार जिनको अपनाकर हर कोई अपने जीवन में महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। स्वामी विवेकानन्द की जयंती के अवसर पर आइए जानते हैं उनके कुछ विचार...

     
    स्वामी विवेकानंद के विचार

    एक समय में एक काम करो, ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।

    जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो, ठीक उसी समय पर उसे करना ही चाहिए, नहीं तो लोगों का आप पर से विश्वास उठ जाता है।

    किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आए, आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं।

    हम वो हैं, जो हमें हमारी सोच ने बनाया है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि आप क्या सोचते हैं। जैसा आप सोचते हैं वैसे बन जाते हैं।

    उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य हासिल ना हो जाए।

    जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते।

    एक विचार लो। उस विचार को अपना जीवन बना लो। उसके बारे में सोचो. उसके सपने देखो, उस विचार को जियो।

    सत्य को एक हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।

    खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।

    जिस दिन आपके सामने कोई समस्या न आए, आप यकीन कर सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर चल रहे हैं।

    सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव के प्रति सच्चे होना। खुद पर विश्वास करो।

    भला हम भगवान को खोजने कहां जा सकते हैं, अगर उसे अपने हृदय और हर एक जीवित प्राणी में नहीं देख सकते।

    जो आग हमें गर्मी देती है, हमें नष्ट भी कर सकती है। यह अग्नि का दोष नहीं है।

    आपको अंदर से बाहर की ओर विकसित होना है। कोई तुम्हें पढ़ा नहीं सकता, कोई तुम्हें आध्यात्मिक नहीं बना सकता. तुम्हारी आत्मा के आलावा कोई और गुरु नहीं है।

    मस्तिष्क की शक्तियां सूर्य की किरणों के समान हैं। जब वो केन्द्रित होती हैं, चमक उठती हैं।

    पहले हर अच्छी बात का मजाक बनता है, फिर उसका विरोध होता है और फिर उसे स्वीकार कर लिया जाता है।

    किसी भी चीज से मत डरो। तुम अद्भुत काम करोगे। यह निर्भयता ही है जो पलभर में परम आनंद लाती है।

     

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