July 25, 2026
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    उपचुनाव की जरूरत

    • rounak group

    सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / भारतीय चुनाव आयोग लोकसभा की एक सीट और विधानसभाओं की 56 सीटों पर उपचुनाव कराने को तैयार है, तो इससे पता चलता है कि महामारी की वजह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं रुकेगी। मंगलवार को आठ सीटों के लिए तय उपचुनाव को जब रद्द किया गया था, तब यह माना जा रहा था कि कोरोना के दौर में मतदान आधारित कोई चुनाव नहीं हो सकेगा। लेकिन यह साफ हो गया है कि जिन सीटों पर अब आयोग चुनाव के लिए तैयार है, उनमें वे आठ सीटें भी शामिल हैं। आठ सीटों को लेकर जल्दी इसलिए भी है, क्योंकि इनके लिए 7 सितंबर तक चुनाव हो जाने चाहिए। बाकी बची 49 सीटों के लिए सितंबर का पूरा समय है। सब कुछ ठीक रहा और स्थानीय प्रशासन ने कोई अड़ंगा नहीं लगाया, तो आयोग चुनाव प्रक्रिया तेज कर देगा। वैसे भी, बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल ही रही हैं। समय पर चुनाव कराना आयोग की जिम्मेदारी है और अगर वह इसे निभाने को लालायित है, तो उसकी सराहना होनी चाहिए। हालांकि काफी कुछ सरकारों को भी तय करना है। अगस्त, सितंबर तक कोरोना जिन इलाकों में काबू में आ जाएगा, वहां तो ज्यादा परेशानी नहीं होगी, मगर उसी दौर में कोरोना चरम पर रहा, तो चुनाव टालने की नौबत आ सकती है। इतना तय है कि कोरोना के समय चुनाव कराने के लिए ज्यादा संसाधन, वाहन और सुरक्षा बलों की जरूरत पडे़गी। हर एक मतदान केंद्र पर बचाव के दिशा-निर्देशों की पालना कराना आसान नहीं होगा। लंबी लाइन और मतदाताओं की परस्पर दूरी को बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
    सर्वाधिक 27 सीटों पर मध्य प्रदेश में उपचुनाव होने हैं। मणिपुर में 11, गुजरात में आठ, तो उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल में चार-चार सीटें और झारखंड में भी दो सीटें खाली हैं। हरियाणा, छत्तीसगढ़ इत्यादि में भी सीटें खाली हैं। संविधान के तहत इन सीटों को खाली नहीं रखा जा सकता। रिक्त विधानसभा क्षेत्रों के नागरिकों के अधिकारों की बहाली और किसी सांविधानिक संकट से बचने के लिए चुनाव जरूरी हैं। हो सकता है, जो प्रतिनिधि ऐसे मुश्किलों के बीच से चुनाव जीतकर आएं, वे जनता के बेहतर सेवक साबित हों। हो सकता है, जो सरकारें कोरोना के दौर में बनें, वे शायद ज्यादा समर्पित और संवेदनशील हों।
    एक बड़ी महामारी के समय चुनाव का दुर्लभ अनुभव देश को होने जा रहा है। विभिन्न पार्टियां वर्चुअल रैलियां आयोजित कर रही हैं। ऐसे में, अपेक्षित शारीरिक दूरी बरतते हुए भी लोगों से संपर्क करना और मतदान के लिए रिझाना कैसे संभव है, यह देखना दिलचस्प होगा। हो सकता है, विशाल रैलियों और जनसभाओं में होने वाली बेहिसाब भीड़ से प्रभावित होने का मौका न मिलने पर लोग अपने प्रतिनिधि के बारे में सही फैसला कर सकें। ऐसा नहीं है कि कोरोना के समय दुनिया में चुनाव बंद हो गए हैं। दक्षिण कोरिया और सिंगापुर में कोरोना के समय में ही चुनाव हुए हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव 3 नवंबर को तय है और इसकी प्रक्रिया भी वहां शुरू हो चुकी है। दुनिया के जिम्मेदार लोकतंत्रों ने यह संकेत दे दिया है कि कोरोना की वजह से चुनाव नहीं रुकने वाले। किसी बहाने से चुनाव से बचना ठीक नहीं। कोरोना के समय सुरक्षित चुनाव कुछ महंगा पड़ सकता है, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल रखने के लिए हमें इस लागत से गुजरना होगा।

     

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