July 24, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    • rounak group

    सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / कोरोना के समय भी अंतरिक्ष विज्ञान विकास का न रुकना न केवल सुखद, बल्कि स्वागतयोग्य भी है। विशेष रूप से मंगल अभियान की दिशा में जो प्रगति हुई है, वह बहुत प्रेरित करती है। अव्वल तो 19 जुलाई को संयुक्त अरब अमीरात दुनिया का पहला मुस्लिम देश हो गया, जिसने मंगल की ओर अपना यान भेजा है, दूसरी ओर, 23 जुलाई को चीन ने भी उधर अपना यान रवाना किया है। अब एशिया में भारत सहित तीन देश हो गए, जो मंगल की खोज में आगे बढे़ हैं। 1960 के बाद से करीब 60 अभियान मंगल की ओर गए हैं, लेकिन उनमें से 26 को ही थोड़ी या ज्यादा कामयाबी मिली है। इसलिए मंगल पर किसी खोज के लिए चलाया जाने वाला कोई भी अभियान पूरी दुनिया के लिए ही बहुत महत्व रखता है।
    वैसे चीन ने रूस के साथ मिलकर एक प्रयास 2011 में भी किया था, लेकिन वह यान पृथ्वी की कक्षा से बाहर नहीं निकल पाया था। इसके बाद भारत ने 2014 में अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में यान स्थापित कर इतिहास रच दिया। ध्यान रहे, तब चीन ने भी भारत की तारीफ की थी। फिलहाल चीन के अभियान की सफलता की प्रतीक्षा करनी चाहिए। उसने न केवल मंगल की कक्षा में घूमने वाला यान ऑर्बिटर रवाना किया है, बल्कि साथ में लैंडर और रोवर भी भेजे हैं। यूएई और चीन, दोनों के ही यान आगामी फरवरी में मंगल की कक्षा में पहुंच जाएंगे। उम्मीद करनी चाहिए कि दोनों को सफलता मिले। अभी तक दुनिया में अमेरिका, रूस, यूरोपीय यूनियन और भारत को ही मंगल अभियान में सफलता मिली है। इसमें भी सबसे खास भारत की सफलता है, पहली ही बार में कामयाब भारत का यान अभी भी मंगल की परिक्रमा कर रहा है। चीन ने इस मिशन को तियानवेन नाम दिया है, यह दो सदी पुरानी एक कविता के शीर्षक पर आधारित है, जिसका अर्थ है, जन्नत से सवाल। वाकई, जब हम अंतरिक्ष में किसी भी अभियान में जुटते हैं, तब हमारी जिज्ञासा दूसरी दुनिया या जन्नत की खोज से जुड़ जाती है। ऐसी खोज सकारात्मक होती है और हमारे दिलो-दिमाग को सपने और खुशी देती है, जिसकी जरूरत आज कोरोना काल में बहुत ज्यादा है।
    अभी अमेरिका, यूरोप और भारत के करीब आठ अंतरिक्ष यान मंगल की सतह पर हैं या उसकी परिक्रमा कर रहे हैं, चीन और यूएई के यानों को अगर कामयाबी मिली, तो न केवल मुस्लिम देशों, बल्कि चीन को भी एक सकारात्मक दिशा मिलेगी। अमेरिका मंगल पर पहले भी रोवर स्थापित कर चुका है और जल्दी ही ज्यादा बड़ा रोवर भेजने वाला है। अपने अभियान के शुरू होने के बाद चीन ने जिस भावना का प्रदर्शन किया है, उसकी प्रशंसा होनी चाहिए। चीन के एक वैज्ञानिक ने कहा है, ‘यह चीनी अभियान एक वैज्ञानिक पहल है, किसी के साथ प्रतिस्पद्र्धा के लिए नहीं, बल्कि एक-दूसरे से सहयोग के लिए है’। चीन मंगल ग्रह पर पानी और बर्फ के संकेतों की खोज करेगा, उसके रोवर में 13 वैज्ञानिक उपकरण लगे हैं। चीन का यान उत्तरी गोलाद्र्ध में एक मैदान, यूटोपिया प्लैनिटिया में उतरने की कोशिश करेगा। वहां लैंडर की मदद से रोवर तैनात करेगा। मंगल पर दक्षिणी यूटोपिया प्लैनिटिया में कोई भी खोज इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि वैज्ञानिकों को लगता है, मंगल के इस हिस्से पर कभी महासागर था।

     

    Rate this item
    (0 votes)

    Leave a comment

    Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision