July 24, 2026
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    सत्र न हो बर्बाद

    • rounak group

    मेलबॉक्स /शौर्यपथ / कोरोना महामारी से मानव जीवन का हरेक पहलू प्रभावित हुआ है। ऐसे में, शिक्षा-व्यवस्था में परिवर्तन समय की मांग है। मौजूदा शिक्षा-सत्र पूरी तरह से कोरोना की भेंट चढ़ गया है और विकल्प के तौर पर ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था की गई है। हालांकि, हर जगह ऑनलाइन कक्षा संभव नहीं है। बेशक कॉलेज व विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को कुछ नियमित तरीके से, और कुछ विषयों में पत्राचार से पढ़ाई कराते रहे हैं, लेकिन अभी जिस माध्यम से पढ़ाई हो रही है, वह खुला विश्वविद्यालय की तरह ही है। ऐसे में, सरकार को अब यह निर्णय लेना चाहिए कि हर विश्वविद्यालय खुले विश्वविद्यालय की तरह ऑनलाइन नामांकन ले और विद्यार्थियों को पाठ्य-सामग्रियां डाक से भेजे, ताकि वे अपने-अपने घर पर ही पढ़ाई कर सकें। परीक्षा भी खुले विश्वविद्यालय के मानकों की तरह आयोजित हो। इस तरह की व्यवस्था होने से बच्चों के सत्र बरबाद नहीं होंगे।
    मिथिलेश कुमार, भागलपुर

    पोल खोलती बारिश
    दिल्ली में बारिश अभी पूरी तरह से शुरू भी नहीं हुई है और नाले उफनने लगे हैं। यह दयनीय स्थिति है, क्योंकि जब मूसलाधार बारिश होगी, तब हालात कैसे होंगे? दिक्कत यह है कि हर बरसात में लोगों को इस संकट से गुजरना पड़ता है, फिर भी हमारे नगर निगम सिर्फ निरीक्षण की खानापूर्ति कर शांत हो जाते हैं। नालों की सफाई रोजाना नहीं, तो कम से कम हफ्ते में एक बार तो हो ही सकती है। यदि ऐसी व्यवस्था बन जाए, तो लोगों को काफी राहत मिलेगी।
    रितिक सविता, दिल्ली विश्वविद्यालय

    अयोध्या का कायाकल्प
    लंबे समय से लंबित श्रीराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का निपटारा होने के बाद हर भारतवासी की निगाहें अयोध्या की तरफ थीं कि आखिर मंदिर कब बनेगा? अब इसका रास्ता साफ हो गया है। प्रधानमंत्री मंदिर का भूमि पूजन करने वाले हैं। मंदिर बनने से सबसे ज्यादा फायदा अयोध्यावासियों को होगा, क्योंकि इससे पर्यटकों का आना बढ़ेगा, जिससे व्यापार के नए मार्ग खुलेंगे और यहां का चौतरफा विकास हो सकेगा। आखिर बरसों से उपेक्षित अयोध्या में रामराज्य पुन: स्थापित होगा और उम्मीद है कि आगामी वर्षों में अयोध्या का विकास उसे देश के बड़े दार्शनिक स्थलों में शुमार कर देगा।
    शुभम पांडेय गगन
    अयोध्या, फैजाबाद

    चुनाव कराना बड़ी चुनौती
    बिहार में जिस रफ्तार से कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए इस राज्य में विधानसभा का चुनाव कराना खतरे को बढ़ावा देना है। इससे बिहार में संक्रमण की गति और बढ़ सकती है। सरकार को अभी लोगों की फिक्र करने की जरूरत है, न कि चुनाव की। चुनाव आयोग को करोड़ों बिहारवासियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही फैसला करना चाहिए, क्योंकि जान है, तभी जहान है। यदि कोई भी कोरोना संक्रमित मतदाता वोट देने मतदान केंद्र पर पहुंच जाता है, तो वह दूसरे को भी संक्रमित करेगा। इसलिए इस साल चुनाव को स्थगित कर देना चाहिए। ‘न्यू नॉर्मल’ में नए तरीके से चुनाव आयोग को सोचना चाहिए।
    मो. अजहरुद्दीन
    जनता बाजार, छपरा

    महिलाओं का सम्मान
    काफी लंबे समय से महिलाओं के स्थाई कमीशन की मांग सेना में चल रही थी, जिसे अब जाकर पूरा किया गया है। अब महिलाएं भी सेना में अहम भूमिका निभा सकेंगी। सवाल यह है कि इस फैसले को अमल में लाने में इतना वक्त क्यों लग गया? खैर, कहते हैं न कि देर आए, दुरुस्त आए। इस एक फैसले से बहुत से क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति हीन भावना खत्म होगी। हमें इसका स्वागत करना चाहिए।
    अमन कुमार

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