July 24, 2026
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    मां ने सिखाया फैसले पर पहुंचना

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    जीना इसी का नाम है / शौर्यपथ / अमेरिकी प्रांत कैनसस में एक छोटा-सा शहर है जंक्शन सिटी। आज भी बमुश्किल पच्चीस-तीस हजार की आबादी होगी। वारेन एडम्स और मैरी एडम्स इसी शहर के बाशिंदे थे। फौजी पृष्ठभूमि होने की वजह से दोनों की मुलाकात दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हुई थी। वारेन एक सैनिक थे और मैरी उन दिनों नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थीं। जब युद्ध छिड़ा, मैरी ने अपने माता-पिता को बताए बिना ही फौज ज्वॉइन कर ली थी। उस समय लगभग डेढ़ लाख अमेरिकी महिलाओं ने मैरी की तरह देशसेवा का प्रण लिया था। नर्सिंग का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मैरी को कैनसस के फोर्ट रिले में नियुक्ति मिल गई, जहां वह जख्मी सैनिकों की खिदमत करती थीं।
    एडम्स दंपति के पास दौलत भले न थी, मगर उनमें प्यार और हौसला खूब था, और इसकी बदौलत ही वे एक सुकून भरी जिंदगी जी रहे थे। मियां-बीवी, दोनों काफी मेहनत करते, ताकि अपने पांचों बच्चों को जमाने के लिहाज से सारी सुविधाएं दे सकें। इन्हीं पांच संतानों में से एक हैं मैरीलीन हेसन। मैरीलीन जब नौ साल की थीं, तब अचानक पिता का साया उन सबके सिर से उठ गया। वारेन एडम्स दिल के दौरे का शिकार हो गए थे। हालांकि, उसके पहले वह कभी बीमार नहीं पडे़ थे, इसलिए पांच से 15 साल के बच्चों को समझ में ही नहीं आ रहा था कि यह क्या हुआ?
    मैरी एडम्स के पास पति की मौत का शोक मनाने का वक्त नहीं था। वह एक हिम्मती महिला थीं और फिर घर के हालात भी इसकी इजाजत नहीं देते थे। अपने बच्चों को मायूस, पस्तहिम्मत देखना उन्हें गवारा नहीं हुआ। उन्होंने ऑफिस जाना शुरू कर दिया। काम पर जाने से पहले वह पांचों बच्चों की एक-एक जरूरत का ख्याल रखतीं और सबको कोई न कोई एक सबक देकर निकलतीं, ताकि वे अनुशासन में रहें।
    घर की कमाई आधी रह गई थी, मगर पांच-सात साल के बच्चे इतने होशमंद कहां होते हैं कि मां की मजबूरियों को समझ पाते? वे कई बार किसी चीज की जिद करने लगते, तो मां उदास हो जातीं। पर नौ साल की मैरीलीन मां की पीड़ा समझने लगी थीं। अतंत: मैरी एडम्स ने वॉर बॉन्ड की राशि से एक इमारत खरीदी, जिसमें चार छोटे-छोटे अपार्टमेंट थे। उन्होंने उनको किराये पर लगाया, ताकि कुछ पैसे आ सकें। लेकिन बच्चे बड़े हो रहे थे, और सबके स्कूल-कॉलेज के खर्चे व घर की जरूरतें भी बढ़ती जा रही थीं। पैसे कम पड़ ही जाते। अंतत: उन्होंने बच्चों के स्कूल के कैफेटेरिया में पार्ट टाइम नौकरी भी की, ताकि कुछ कमाई के साथ-साथ बच्चों के करीब रह सकें। उनका अब बस एक ही सपना था कि बच्चे अच्छी तालीम हासिल कर एक बेहतर मुकाम हासिल करें।
    घर के प्रत्येक बडे़ बच्चे को यह हिदायत थी कि वह अपने से छोटे भाई-बहन की देखभाल करे। मैरीलीन अपनी मां के संघर्ष को काफी करीब से देख रही थीं। इसने उनके ऊपर गहरा असर डाला। पढ़ाई के साथ-साथ वह छोटे भाई-बहन को तो संभालतीं, और अपार्टमेंट में साफ-सफाई जैसे छोटे-मोटे काम भी कर देतीं, ताकि उससे कुछ पैसे मिलें और मां की मदद हो सके। मां हर महीने मैरीलीन को पांच डॉलर बिलों के भुगतान के लिए और सात डॉलर घर के राशन के लिए देतीं और कहतीं, ‘मुझे उम्मीद है तुम सही फैसले करोगी।’
    मैरीलीन ने 1979 में अलबामा यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में एमए किया। उनके पास कोलंबिया बिजनेस स्कूल और हॉर्वर्ड बिजनेस स्कूल की भी डिग्रियां हैं। अलबामा यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने यूएस ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स में नौकरी शुरू की। लेकिन उनकी मंजिल तो कुछ और थी। साल 1983 उनके लिए एक बड़ा मौका लेकर आया और उन्होंने लॉखीद मार्टिन कंपनी ज्वॉइन की। रक्षा क्षेत्र की अमेरिका की अग्रणी कंपनी। दुनिया भर के देशों को लड़ाकू विमान, ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और रक्षा उपकरण मुहैया कराने वाली सबसे बड़ी वैश्विक कंपनियों में एक।
    मैरीलीन ने इसके बाद फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह कंपनी के विभिन्न विभागों से अनुभव बटोरकर आगे बढ़ती रहीं। उनकी काबिलियत और दूरदर्शिता ने नवंबर 2012 में उन्हें कंपनी के निदेशक मंडल में पहुंचा दिया और महज तीन महीने के भीतर वह लॉखीद मार्टिन की सीईओ की कुरसी पर बैठी थीं। उनके नेतृत्व में लॉखीद के कारोबार ने शानदार ऊंचाइयां देखीं। और इसी मार्च में जब उन्होंने यह पद छोड़ा, तब तक इसकी पूंजी तीन गुनी हो चुकी थी।
    साल 2010 से 2020 तक मैरीलीन हेसन को लगातार दुनिया की शीर्ष पचास प्रभावशाली, शक्तिशाली महिलाओं या फिर सीईओ में गिना जाता रहा। दो वर्ष पूर्व वह सर्वश्रेष्ठ सीईओ चुनी गईं। कभी एक-एक डॉलर को बेहद किफायत से खर्र्चने वाली मैरीलीन आज सात अरब से अधिक की संपत्ति की मालकिन हैं। मगर इस मुकाम पर भी वह अपनी मां को कहीं अधिक कर्मठ मानती हैं। ये उन्हीं के शब्द हैं, ‘मेरी मां ने वह सब किया, जो बडे़-बड़े नेता करते हैं। उन्होंने भविष्य के लीडरों को हौसले दिए।’
    प्रस्तुति : चंद्रकांत सिंह मैरीलीन हेसन बिजनेस लीडर, पूर्व सीईओ

     

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