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धर्म संसार / शौर्यपथ / भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज मनाते हैं। यह त्योहार इस साल 6 अगस्त को पड़ रहा है। कजरी तीज को बूढ़ी तीज या सातूड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि की प्राप्ति के साथ मनोकामनाएं भी पूरी होती है। इस व्रत को शाम को चंद्रमा के निकलने के बाद उसे अर्घ्य देकर खोला जाता है।
शुभ मुहूर्त-
तृतीया तिथि प्रारंभ- सुबह 10 बजकर 50 मिनट से
तृतीया तिथि समाप्ति- रात 12 बजकर 15 मिनट पर।
चंद्रोदय का समय- रात 9 बजकर 8 मिनट पर।
कैसे करें पूजा-
कजरी दिन के दिन सुबह स्नान के बाद साफ सुथरे कपड़े पहनने चाहिए। इस दिन जौ, गेहूं, सत्तू ,चने, चावल और घी को मिलाकर कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। सुहागिनें इस दिन माता पार्वती और महादेव की विधि-विधान से पूजा करती हैं। चंद्रोदय के बाद इस व्रत को खोला जाता है। इस दौरान कजरी तीज की व्रत कथा भी पढ़ना शुभ माना जाता है।
चंद्रमा को कैसे दें अर्घ्य-
कजरी तीज में बाद की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। सबसे पहले चंद्रमा को मौली, अक्षत और रोली अर्पित करें। इसके बाद अपने स्थान पर खड़े होकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद व्रत को पानी या कुछ मीठा खाकर खोला जाता है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
