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मेलबॉक्स / शौर्यपथ / बुलंदशहर की छात्रा सुदीक्षा के साथ जो कुछ हुआ, वह शर्मनाक है। यह घटना बताती है कि देश में अब भी छेड़खानी और बलात्कार मानो सामान्य बात है। लेकिन दुख की बात यह है कि हम अब भी अपने जन-प्रतिनिधियों से कानून-व्यवस्था में सुधार लाने या लड़कियों की सुरक्षा आदि की मांग नहीं करते, बल्कि हमारे लिए जरूरी कुछ अन्य मुद्दे हैं। कहना गलत नहीं होगा कि कानूनी धाराओं के बेहतर क्रियान्वयन न हो पाने की वजह से ऐसे अपराध दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। अगर पुलिस राह चलते छेड़खानी करने वाले शोहदों को सख्त धाराओं के तहत गिरफ्तार करे और सजा दिलाए, तो संभव है कि उनकी लड़कियों को छेड़ने की फिर कभी हिम्मत नहीं हो। मगर ऐसा हो, तब तो? कुछ दायित्व समाज को भी निभाने होंगे। हरेक माता-पिता को यह बात बचपन में ही अपनी संतान के मन में डालनी होगी कि उन्हें लड़कियों का सम्मान करना चाहिए, अपमान नहीं। अगर हम सब ऐसा कुछ कर सके, तो यकीनन किसी और प्रतिभाशाली सुदीक्षा को यूं अपनी जान नहीं गंवानी पड़ेगी।
शिवानी गांधी
बहराइच, उत्तर प्रदेश
सबक हम लेते नहीं
लगता है कि लोगों ने निर्भया कांड से सबक नहीं लिया है। तभी तो महिलाओं और बच्चियों के साथ दरिंदगी अनवरत जारी है। आए दिन अखबारों में प्रमुखता से छपने वाली ऐसी खबरें पीड़ा पहुंचाती हैं। सरकार ने कठोर कानून जरूर बनाए हैं, अपराधियों को सजा भी मिल रही है, लेकिन शैतान की हैवानियत जारी है। निर्भया के दरिंदों को जब फांसी दी गई थी, तब यह अनुमान लगाया गया था कि अब इस तरह की घटनाएं कम होंगी। मगर लगता है कि इससे कोई सबक नहीं लिया गया। सुदीक्षा के साथ हुई छेड़खानी इसका ताजा उदाहरण है। इन घटनाओं के अपराधी पकड़े भी जाते हैं, तो उन्हें सजा मिलने में इतना अधिक वक्त लग जाता है कि इंसाफ काफी पीछे छूट जाता है। ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई और दोषियों को त्वरित सजा वक्त का तकाजा है।
अमृतलाल मारू
धार, मध्य प्रदेश
सराहनीय काम
बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में अच्छी इंटरनेट-सेवा मुहैया कराने के लिए ‘ऑप्टिकल फाइबर केबल’ की शुरुआत की। यह निश्चय ही लाभदायक और सराहनीय काम है। इससे अंडमान-निकोबार द्वीप की सुरक्षा में भी मदद मिलेगी और पर्यटन को भी खासा बढ़ावा मिलेगा। अब तक यहां आने वाले पर्यटक अच्छी इंटरनेट-सेवा की कमी महसूस करते रहे हैं। अब ऐसा नहीं हो सकेगा। यहां इंटरनेट की अच्छी सुविधा मिलने से ज्ञान-विज्ञान की शाखाएं भी खुल सकेंगी। इन सबसे डिजिटल इंडिया अभियान को विशेष गति मिलेगी।
सोनू कुमार गोस्वामी, अररिया, बिहार
डॉक्टरों से भेदभाव
कोरोना मरीजों, डॉक्टरों, नर्सों आदि के साथ हमारे समाज में जैसा बर्ताव किया जा रहा है, उसका कारण मानव का स्वार्थी और असंवेदनशील होना है। सच तो यह है कि हमें निरंतर असंवेदनशीलता सिखाई जाती है। जन्म लेते ही बच्चा परिवार में स्व-केंद्रित होना सीखता है, इसलिए भविष्य में यह भूल जाता है कि समाज के प्रति भी उसके कुछ दायित्व हैं। इसका खामियाजा बच्चे के मां-बाप को भी भुगतना पड़ता है। कोरोना के संक्रमण-काल में लोगों का यह भेदभाव इसी का संकेत है। हालांकि, इसमें कुछ लोग अपवाद भी हैं, जिनसे ही यह धरती बेहतर ढंग से चल रही है। इन्हीं अपवादों में कोरोना वॉरियर्स हैं, जो अपनी जान की परवाह किए बिना संक्रमित लोगों का जीवन बचा रहे हैं। इसलिए उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव मानवता के खिलाफ है। हमें इससे बचना चाहिए।
अभिषेक सिंह, जौनपुर
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
