Google Analytics —— Meta Pixel
May 26, 2026
Hindi Hindi

शांत शहर में हिंसा

  • rounak group

सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / भारत का एक प्रमुख आईटी हब माने जाने वाले बेमिसाल शहर बेंगलुरु में सद्भाव का प्रभावित होना न केवल चिंताजनक, बल्कि शर्मनाक भी है। सोशल मीडिया पर महज एक पोस्ट की वजह से भीड़ ऐसे भड़की कि तीन लोगों को अपनी जान देकर और 100 से ज्यादा लोगों को घायल होकर कीमत चुकानी पड़ी। इसके अलावा 110 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं। हिंसक भीड़ को संभालने में 60 से अधिक पुलिस वाले घायल हुए हैं। सद्भावना से खिलवाड़ के कारण 200 से ज्यादा परिवारों पर सीधे असर पड़ा है और अपेक्षाकृत शांत रहने वाले बेंगलुरु के दामन पर एक दाग आ लगा है। पढ़े-लिखे समझे जाने वाले शहरों में भी अगर एक पोस्ट मात्र से अमन-चैन का माहौल खराब हो सकता है, तो इससे पता चलता है कि भारत में सतर्कता कितनी जरूरी है।
पोस्ट करने वाला शख्स कांग्रेस विधायक का भतीजा बताया जा रहा है, हालांकि उसका कहना है कि उसने पोस्ट नहीं डाली, इसके बावजूद एहतियात बरतते हुए पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके ठीक किया है। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि आखिर पोस्ट किसने लिखी? इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं है? सभ्य समाज के लोगों के साथ-साथ सरकार को भी सजग रहना चाहिए, नाना प्रकार के अनर्गल और गैर-कानूनी पोस्ट सोशल मीडिया पर चलती रहती हैं, जिनसे लोगों की भावनाएं आहत होती रहती हैं। कई बार लोग पोस्ट की आक्रामकता या हिंसा झेल लेते हैं, पर कई बार भावना भड़क उठती है। अत: अव्वल तो यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी अवैध-हिंसक-दुर्भावनाओं से भरी पोस्ट को चलने ही न दिया जाए। अगर कोई ऐसी पोस्ट को आगे बढ़ाता है, तो उसे ऐसे दंडित करना चाहिए कि समाज के सामने एक नजीर बन जाए।
दूसरी ओर, किसी भी तरह की हिंसा के लिए भीड़ जुटाने की बढ़ती गैर-कानूनी प्रवृत्ति की पड़ताल भी जरूरी है। एक लोकतांत्रिक देश में ऐसे भीड़-तंत्र को बढ़ाने के अपने खतरे हैं। पुलिस का खुफिया तंत्र मजबूत होना चाहिए, ताकि किसी भी तरह के आपराधिक मकसद या कानून हाथ में लेने के इरादे से कोई साजिश मुमकिन न हो। लोकतंत्र में भीड़ की इस भ्रांति पर अंकुश भी जरूरी है कि वह कुछ भी कर सकती है। दिल्ली में जो दंगे हुए थे, उसमें भी कदम-कदम पर दोनों समुदायों की ओर भीड़ की गलत भूमिका दिखी थी। बेंगलुरु में भी यही हुआ, भीड़ ने विधायक के घर, पुलिस वालों और थाने को निशाना बनाया। उपद्रवियों ने सुबह तक का इंतजार नहीं किया, रात ही ऐसे निकल चले कि गोलीबारी की नौबत आ गई। खुफिया एजेंसियों को यह देखना होगा कि बेंगलुरु में हुई इस हिंसा के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं थी। कर्नाटक के गृह मंत्री ने बिल्कुल सही कहा है, ‘तोड़फोड़ से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता’। बेंगलुरु के डीजे हल्ली व केजी हल्ली पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले इलाकों में कफ्र्यू लगा दिया गया है। किसी भी भीड़ को सड़क पर उतरने का मौका नहीं मिलना चाहिए। संयम बरतने के साथ ही, पुलिस साइबर सेल और आईटी कंपनियों को भी पूरी सावधानी बरतनी चाहिए कि सोशल मीडिया के किस भी मंच पर द्वेष-रोष भरे घात-प्रतिघात का नया सिलसिला न चले। साइबर वल्र्ड की गंदगी को वहीं पूरी चौकसी व कड़ाई से साफ करने की जरूरत है, ताकि वह किसी शहर में सड़क पर न नजर आए।

 

Rate this item
(0 votes)

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)