July 24, 2026
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    मेलबॉक्स / शौर्यपथ / कोरोना के इस भयावह दौर में बच्चे काफी दिनों से विद्यालय नहीं जा रहे हैं, लेकिन अब वे ऑनलाइन क्लास से पढ़ने को बोरियत भरा समझने लगे हैं। विद्यालयों की भूमिका हमारे जीवन में बहुत अधिक होती है। जीवन को गढ़ने और सार्थक बनाने के जो प्रयास विद्यालयों में किए जाते हैं, वे सचमुच एक अच्छे और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए जरूरी माने जाते हैं। कोरोना संक्रमण के भय से बंद विद्यालयों के खुलने का इंतजार अब सारे बच्चे कर रहे हैं, ताकि वे बचपन की बुनियाद मजबूत बना सकें। वाकई, घर पर न तो उन्हें कक्षा जैसा वातावरण मिल रहा है और न स्कूल जैसी सुविधा। लंबे समय तक स्क्रीन देखना बच्चों के लिए अब असहज भी होता जा रहा है। ऐसे में, जब तक विद्यालय नहीं खुलते, तब तक यदि हर अध्यापक अपने आस-पास के बच्चों के साथ थोड़ा समय बिताकर उनकी रुचि और उत्साह को बनाए रखने में मदद करे, तो यह एक बेहद सकारात्मक पहल होगी।
    हरीश कुमार शर्मा, बख्तावरपुर गांव

    मास्क है जरूरी
    पूरी दुनिया इस समय कोरोना महामारी से जूझ रही है, जिसमें बचाव के हर उपाय अपनाने की बात सभी विश्लेषक कह रहे हैं। इन उपायों में दैहिक दूरी का पालन, भीड़-भाड़ से परहेज, साबुन से लगातार हाथ धोना और मास्क का इस्तेमाल प्रमुख हैं। मगर हमारे देश में कुछ लोग मास्क से आजादी का अभियान चलाकर दूसरे लोगों को गुमराह कर रहे हैं। मास्क को गुलामी का प्रतीक बताते हुए वे समाज में यह भ्रम फैला रहे हैं कि यह कोरोना वायरस का प्रसार नहीं रोकता, बल्कि कई बीमारियों की सौगात दे जाता है। ऐसे लोगों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। आपदा की इस मुश्किल घड़ी में यदि इस तरह की अफवाहें फैलाई जाएंगी, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
    सुरेंद्र जाखड़, सीकर, राजस्थान

    माही-दौर याद रहेगा
    दुनिया के महान क्रिकेटरों में शुमार महेंद्र सिंह धौनी के संन्यास लेने के साथ ही भारतीय क्रिकेट का एक अध्याय समाप्त हो गया। मैदान पर उनकी कमी खलेगी। उन्होंने विश्व स्तर पर भारत को एक अलग पहचान दिलाई। बतौर कप्तान उनका प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि शायद ही कभी भुलाया जा सकेगा। यही कारण है कि वह देश के सबसे सफल कप्तानों की सूची में शीर्ष पर रहेंगे। हालांकि, वनडे और टेस्ट में उनका खेल अब हम नहीं देख पाएंगे, लेकिन आईपीएल में उनके हेलीकॉप्टर शॉट का नजारा देखने को मिल सकता है। क्रिकेट प्रेमी इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
    अभिषेक सिंह, जौनपुर

    एकजुट लड़ाई जरूरी
    देश की सर्वोच्च अदालत ने फैसला सुनाया है कि कोरोना काल में इंजीनियरिंग और मेडिकल की परीक्षा तय समय पर ली जाएगी। देखा जाए, तो जीवन चलने का ही नाम है। मसले, मुश्किलें, संघर्ष मानव जीवन का हिस्सा हैं। कोरोना महामारी भले ही देश को खोखला कर दे, पर हमें एक नई शुरुआत करनी ही होगी, इसीलिए बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। परंतु यह भी सत्य है कि हमें हमारी व्यवस्था मजबूत बनानी होगी, क्योंकि सावधानी हटी-दुर्घटना घटी! कोरोना महामारी में सतर्कता बेहद आवश्यक है। जरूरी है कि प्रशासन और जनता, दोनों साथ मिलकर इसके लिए प्रयास करें। इससे अवश्य ही संक्रमण का प्रसार रोका जा सकता है। आवश्यकता है कि हम परिस्थिति की गंभीरता को समझते हुए अपने विवेक का पूर्ण इस्तेमाल करें और सरकार द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें। हालांकि, प्रशासन का यह भी कर्तव्य है कि दैहिक दूरी का पालन करवाते हुए परीक्षा आयोजित करवाए, ताकि संक्रमण फैलने का कोई खतरा न हो।
    राजेंद्र प्रसाद, रांची, झारखंड

     

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