July 24, 2026
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    मामला गंभीर बनता

    • rounak group

    सम्पादकीय / शौर्यपथ / अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला न केवल सुखद, बल्कि न्यायपूर्ण भी है। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ देर से सही, लेकिन उचित फैसला किया है, इससे न केवल पीड़ित पक्ष, बल्कि सुशांत सिंह राजपूत के समर्थकों का भी मनोबल बढ़ेगा। 14 जून को हुई सुशांत की मौत को पहली नजर में आत्महत्या का मामला माना गया था, लेकिन बाद में जैसे परिस्थिति जन्य तथ्य और विरोधाभास सामने आते गए, उससे यह मामला गंभीर बनता गया। विशेष रूप से सुशांत के पिता द्वारा बिहार में दर्ज कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट में जिस तरह से आरोप लगाए गए, उससे यह बात लोगों के दिल तक पहुंची कि सुशांत के साथ विगत छह महीने से लगातार नाइंसाफी हो रही थी। यदि कुछ क्षण के लिए यह मान भी लिया जाए कि उन्होंने आत्महत्या की है, तो भी इस संदेह की पर्याप्त गुंजाइश है कि सुशांत को उस ओर दुष्प्रेरित किया गया। सुशांत की मौत से पहले ही उनकी निराशा, अवसाद का सिलसिला शुरू हो चुका था। यह बात भी सामने आ चुकी है कि यह कुशल अभिनेता अपनी सफलता, संपन्नता, ऊर्जा और युवा चुस्ती के बावजूद इतना हतोत्साहित था कि उसे दवाइयों की जरूरत पड़ रही थी। सबसे बड़ी बात कि दवाइयां वही लोग खिला रहे थे, जिन पर आरोप लग रहे हैं। जो लोग उन्हें डॉक्टर के पास ले जा रहे थे, वही लोग सुशांत को उनके परिवार से दूर कर रहे थे। दुखद है कि ये सारे इशारे मुंबई पुलिस को नहीं दिख रहे थे। ऐसे में, सीबीआई जांच को टालना मुश्किल था।
    बिहार पुलिस की जांच को जिस तरह से प्रभावित किया गया, जिस तरह से बिहार के जांच दल के साथ अपराधियों या कोरोना संदिग्ध जैसा सुलूक किया गया, उससे भी लोगों को लगने लगा कि मुंबई पुलिस पर सोलह आना भरोसा नहीं किया जा सकता। मुंबई पुलिस की छवि पर जो दाग लग रहे थे, उन पर सीबीआई जांच के आदेश के साथ सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग गई। अब मुंबई पुलिस के पास एक ही रास्ता है कि वह सीबीआई की जांच में सहयोग करे और सीबीआई की जांच टीम के साथ कतई वैसा सुलूक न करे, जैसा उसने बिहार पुलिस के साथ किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बेशक बिहार पुलिस का मनोबल बढ़ेगा। उसकी एफआईआर और जांच की दिशा सही साबित हुई है। बिहार पुलिस को अभी तक जो तथ्य हासिल हुए हैं, उन्हें सीबीआई को सौंपने का समय आ गया है।
    अब सीबीआई को इस मामले की तह में जाकर सुशांत की मौत के मूलभूत कारणों को उजागर करना होगा। बॉलीवुड में हुई इस मौत के अनगिनत दुखद पहलू हैं, जो यह संकेत करते हैं कि सिनेमा दुनिया की नैतिक बुनियाद कितनी जर्जर है। किस तरह से सामंतवाद या मठाधीशी का ढर्रा चल पड़ा है। किस तरह से अनेक अयोग्य और आपराधिक किस्म के लोग भी गुट बनाकर अपने-अपने गलत ढंग से यहां गुजारा कर रहे हैं। सीबीआई जांच अगर शक्तिशाली होते बॉलीवुड की आपराधिक बुराइयों तक पहुंच पाई, तो इससे देश का भी भला होगा। छोटे शहरों और सामान्य परिवारों के प्रतिभावानों के साथ वहां कैसा व्यवहार होता है, यह जानने की जरूरत पूरे देश को है। वह दुखद दास्तां भी सामने आनी चाहिए, जिसे सुशांत अपने साथ लिए गए हैं। सीबीआई को ध्यान रखना होगा कि उस पर अब देश की निगाह है।

     

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