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May 25, 2026
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दिल की जांच कराकर ही जिम जाएं कोरोना से ठीक हुए लोग

  • rounak group

सेहत /शौर्यपथ / कोरोना से ठीक होने के तुरंत बाद अगर आप सामान्य दिनचर्या में लौटना चाहते हैं तो व्यायाम जैसे मेहनत वाले काम करने से पहले दिल की जांच करा लें। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया कि बीमारी से ठीक होने पर भी मरीजों का हृदय क्षतिग्रस्त हो जाता है, ऐसे लोग अगर जिम जाकर व्यायाम करने लगेंगे तो उनकी जान भी जा सकती है।
अरिजोना राज्य की बैनर यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स मेडिसिन के निदेशक डॉ. स्टीवन एरिकसन के शोधदल ने यह पता लगाया है। उनका कहना है कि बीमारी से ठीक हुए लोगों को वर्कआउट करने या किसी खेल आयोजन में भाग लेने से पहले कार्डियक स्क्रीनिंग जरूर करा लेनी चाहिए। उनका कहना है कि मरीज याद रखें कि कोरोना वायरस महज श्वसन तंत्र से जुड़ा रोग नहीं है बल्कि यह शरीर के हर अहम हिस्से को लंबे वक्त तक क्षति पहुंचाता है। इसके कारण हृदय पर चकत्ते और सूजन आ सकती है।
निगेटिव होने के 14 दिन बाद ही ट्रेनिंग करें-
शोध दल की सलाह है कि कोई भी जिम करने वाला व्यक्ति या खिलाड़ी संक्रमित होने के बाद ठीक हो जाता है तो उसे निगेटिव रिपोर्ट आने के 14 दिन बाद ही अपनी ट्रेनिंग शुरू करनी चाहिए। साथ ही वह अपने हृदय की जांच कराए और शरीर में हो रहे बदलावों पर निगाह रखे। शोधकर्ता एरिकसन कहते हैं कि अगर किसी ऐसे खिलाड़ी को जल्द ही किसी खेल आयोजन में भाग लेना है तो वह पहले किसी हृदयरोग विशेषज्ञ से अपनी जांच करा ले।
इसलिए वायरस से खराब होते दूसरे अंग-
शोधकर्ता व अरिजोना कॉलेज ऑफ मेडिसिन के प्रो. क्रिस ग्लेमबोटस्की का कहना है कि शरीर में वायरस के घुसने पर वह कई दूसरे अंगों और ऊतकों में भी प्रवेश करता है, जिससे इंफ्लेमेशन प्रतिक्रिया होने लगती है। यानी उस अंग को काम करने के लिए अपनी क्षमता से अधिक शक्ति लगानी पड़ती है जिससे उस पर बुरा असर पड़ता है।
बिना लक्षण वालों को कम खतरा-
शोधदल ने पाया कि बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों में हृदय क्षति की संभावना कम है। वे मरीज इस बात को लेकर ज्यादा सतर्क रहें जिनके शरीर में कोरोना के लक्षण दिख रहे थे और उन्हें वायरस ने कम से कम तीन दिन तक चपेट में लिया। ऐसे लोगों विशेषकर जिम जाने वालों और खिलाड़ियों को अपनी ट्रेनिंग शुरू करने से पहले दिन की जांच करा लेनी चाहिए।
ये जांच कराएं-
वैज्ञानिकों ने ऐसे लोगों को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम और खून की जांच कराने की सलाह दी है। पहली जांच के जरिए हृदय में इलेक्ट्रिकल सिग्नल मापते हैं। वहीं, रक्त जांच से ट्रॉपोनिन प्रोटीन की मात्रा पता की जाती है जो कि सामान्यत: हृदय की मांसपेशियों में रहता है पर हृदय में क्षति होने पर इसका रिसाव खून में होने लगता है।
संक्रमित खिलाड़ियों को हुई दिल की बीमारी -
प्रतिष्ठित जामा जर्नल में छपे शोध में दावा किया गया कि संक्रमण से ठीक होकर खेल प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाले 15% एथलीटों में मायकार्डिटिस के लक्षण दिखाई दिए। यह हृदय की मांसपेशियों से जुड़ा रोग है, जिसमें अचानक हार्टफेल के कारण मौत हो सकती है। ओहियो राज्य विश्वविद्यालय ने शोध में पाया कि 26 महिला व पुरुष एथलीटों में से चार के शरीर में इस बीमारी के लक्षण दिखे।

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