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May 25, 2026
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शारदीय नवरात्रि पूजन कैसे करें आराधना, पढ़ें सरल विधि

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धर्म संसार / शौर्यपथ / नवरात्रि में कैसे करें पूजन - आइए जानें नवरात्रि में पूजन कैसे करना चाहिए और इसके क्या नियम हैं?
* आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।
* घर के ही किसी पवित्र स्थान पर स्वच्छ मिट्टी से वेदी बनाएं।
* वेदी में जौ और गेहूं दोनों को मिलाकर बोएं।
* वेदी पर या समीप के ही पवित्र स्थान पर पृथ्वी का पूजन कर वहां सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करें।
* इसके बाद कलश में आम के हरे पत्ते, दूर्वा, पंचामृत डालकर उसके मुंह पर सूत्र बाधें।
* कलश स्थापना के बाद गणेश पूजन करें।
* इसके बाद वेदी के किनारे पर देवी की किसी धातु, पाषाण, मिट्टी व चित्रमय मूर्ति विधि-विधान से विराजमान करें।
* तत्पश्चात मूर्तिका आसन, पाद्य, अर्ध, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, आचमन, पुष्पांजलि, नमस्कार, प्रार्थना आदि से पूजन करें।
* इसके पश्चात दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा स्तुति करें।
* पाठ स्तुति करने के बाद दुर्गाजी की आरती करके प्रसाद वितरित करें।
* इसके बाद कन्या भोजन कराएं। फिर स्वयं फलाहार ग्रहण करें।
प्रतिपदा के दिन घर में ही जवारे बोने का भी विधान है। नवमी के दिन इन्ही जवारों को सिर पर रखकर किसी नदी या तालाब में विसर्जन करना चाहिए। अष्टमी तथा नवमी महातिथि मानी जाती हैं।
इन दोनों दिनों में पारायण के बाद हवन करें फिर यथा शक्ति कन्याओं को भोजन कराना चाहिए।
नवरात्रि में क्या करें, क्या न करें
* इन दिनों व्रत रखने वाले को जमीन पर सोना चाहिए।
* ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
* व्रत करने वाले को फलाहार ही करना चाहिए।
* नारियल, नींबू, अनार, केला, मौसमी और कटहल आदि फल तथा अन्न का भोग लगाना चाहिए।
* व्रती को संकल्प लेना चाहिए कि हमेशा क्षमा, दया, उदारता का भाव रखेगा।
* इन दिनों व्रती को क्रोध, मोह, लोभ आदि दुष्प्रवृत्तियों का त्याग करना चाहिए।
* देवी का आह्वान, पूजन, विसर्जन, पाठ आदि सब प्रातःकाल में शुभ होते हैं, अतः इन्हें इसी दौरान पूरा करना चाहिए।
* यदि घटस्थापना करने के बाद सूतक हो जाएं, तो कोई दोष नहीं होता, लेकिन अगर पहले हो जाएं, तो पूजा आदि न करें।
दस महाविद्याओं के उत्पत्ति की पौराणिक कथा
पुराणों में दस महाविद्याओं के उत्पत्ति की अलग अलग कथाएं मिलती हैं। कई जगहों पर उन्हें माता सती या माता पार्वती की बहनें बताई गई हैं तो कुछ जगहों पर उन्हें माता सती का ही रूप बताया गया है। यह भी कहा जाता है कि उनमें से कुछ माता की बहनें हैं तो कुछ उनका ही रूप हैं। उनकी उत्पत्ति कथाओं में से एक कथा पढ़ें।
पुराणों अनुसार जब भगवान शिव की पत्नी सती ने दक्ष के यज्ञ में जाना चाहा तब शिवजी ने वहां जाने से मना किया। इस इनकार पर माता ने क्रोधवश पहले काली शक्ति प्रकट की फिर दसों दिशाओं में दस शक्तियां प्रकट कर अपनी शक्ति की झलक दिखला दी। इस अति भयंकरकारी दृश्य को देखकर शिवजी घबरा गए। क्रोध में सती ने शिव को अपना फैसला सुना दिया, 'मैं दक्ष यज्ञ में जाऊंगी ही। या तो उसमें अपना हिस्सा लूंगी या उसका विध्वंस कर दूंगी।'
हारकर शिवजी सती के सामने आ खड़े हुए। उन्होंने सती से पूछा- 'कौन हैं ये?' सती ने बताया,‘ये मेरे दस रूप हैं। आपके सामने खड़ी कृष्ण रंग की काली हैं, आपके ऊपर नीले रंग की तारा हैं। पश्चिम में छिन्नमस्ता, बाएं भुवनेश्वरी, पीठ के पीछे बगलामुखी, पूर्व-दक्षिण में धूमावती, दक्षिण-पश्चिम में त्रिपुर सुंदरी, पश्चिम-उत्तर में मातंगी तथा उत्तर-पूर्व में षोड़शी हैं और मैं खुद भैरवी रूप में अभयदान देने के लिए आपके सामने खड़ी हूं।' यही दस महाविद्या अर्थात् दस शक्ति है। बाद में मां ने अपनी इन्हीं शक्तियां का उपयोग दैत्यों और राक्षसों का वध करने के लिए किया था।
दस महा विद्या : 1.काली, 2.तारा, 3.त्रिपुरसुंदरी, 4.भुवनेश्वरी, 5.छिन्नमस्ता, 6.त्रिपुरभैरवी, 7.धूमावती, 8.बगलामुखी, 9.मातंगी और 10.कमला।
प्रवृति के अनुसार दस महाविद्या के तीन समूह हैं। पहला:- सौम्य कोटि (त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, मातंगी, कमला), दूसरा:- उग्र कोटि (काली, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी), तीसरा:- सौम्य-उग्र कोटि (तारा और त्रिपुर भैरवी)।
जानिए राशिनुसार किस शुभ ग्रंथ से घर में आएगी समृद्धि
मेष-मेष राशि वाले प्रात:काल रुद्राष्टक के 11 पाठ करें।
वृषभ- वृषभ राशि वाले प्रात:काल देवी-कवच का पाठ करें।
मिथुन- मिथुन राशि वाले प्रात:काल गणपति-अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
कर्क- कर्क राशि वाले गौरी-जी की आराधना करें।
सिंह- सिंह राशि वाले आदित्य-ह्रदय-स्तोत्र के 11 पाठ करें।
कन्या- कन्या राशि वाले गायत्री-मंत्र जाप करें।
तुला- तुला राशि वाले श्री-सूक्तम का पाठ करें।
वृश्चिक- वृश्चिक राशि वाले मंगला-स्तोत्र का पाठ करें।
धनु- धनु राशि वाले साई-चरित्र का पाठ करें।
मकर- मकर राशि वाले हनुमान चालीसा के 11 पाठ नौ दिन करें।
कुंभ- कुंभ राशि वाले सुंदरकांड का पाठ करें।
मीन- मीन राशि वाले राम-रक्षास्तो‍त्र का पाठ करें।
विशेष- उपरोक्त आराधना नवरात्रि में प्रात:काल करने से विशेष लाभ मिलेगा।

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