July 18, 2026
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    जिद, मेहनत और योजना से बदली तक़दीर—प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से आत्मनिर्भर बने प्रदीप देशपांडे

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           रायपुर / शौर्यपथ / धुन के पक्के लोग जब ठान लेते हैं, तो परिस्थितियां भी रास्ता दे देती हैं। राजनांदगांव के वैशाली नगर निवासी श्री प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने अपने दृढ़ संकल्प और परिश्रम से यह साबित कर दिया है कि सही योजना और निरंतर मेहनत से आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखी जा सकती है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) उनके लिए न केवल आर्थिक संबल बनी, बल्कि एक नई पहचान और स्थायी आजीविका का माध्यम भी बनी।
    प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना भारत सरकार की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों को सशक्त बनाना, उन्हें औपचारिक स्वरूप देना और प्रतिस्पर्धी बनाना है। इस योजना के अंतर्गत नए एवं मौजूदा उद्यमों को 35 प्रतिशत तक ऋण आधारित सब्सिडी (अधिकतम 10 लाख रुपये), ब्रांडिंग, मार्केटिंग सहायता, प्रशिक्षण एवं बुनियादी ढांचे का सहयोग प्रदान किया जाता है, जिससे वे आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल की भावना के अनुरूप आगे बढ़ सकें।
    इसी योजना के अंतर्गत श्री प्रदीप देशपांडे ने स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपना लघुवनोपज आधारित प्रोसेसिंग उद्योग प्रारंभ किया। उन्होंने प्रदेश में उपलब्ध चिरौंजी, हर्रा एवं बहेरा जैसे लघुवनोपज की संभावनाओं को पहचानते हुए इन पर आधारित प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की। इस उद्योग के लिए मशीन एवं शेड निर्माण हेतु कुल 5 लाख 50 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें से 2 लाख 13 हजार 500 रुपये का अनुदान प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत प्राप्त हुआ।
    उद्योग की स्थापना के साथ ही श्री देशपांडे ने कौरिनभाठा स्थित संस्कारधानी महिला कृषक अभिरुचि स्वसहायता समूह की महिलाओं को रोजगार से जोड़ा। इससे महिलाओं को स्थायी आय का साधन मिला और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हुईं, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा।
    योजना से प्राप्त सहायता राशि से उन्होंने आईटीआई मुंबई निर्मित चिरौंजी डिकॉल्डीकेटर मशीन क्रय की। इस आधुनिक मशीन के माध्यम से चिरौंजी का छिलका अलग कर गिरी निकाली जाती है, जबकि छिलकों से चारकोल का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा चिरौंजी, हर्रा एवं बहेरा की गिरी से तेल निष्कर्षण तथा हर्रा-बहेरा डिकॉल्डीकेटर मशीन द्वारा छाल पृथक्करण का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे मूल्य संवर्धन और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
    ग्रामीण और वनीय क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की चुनौतियों को देखते हुए श्री देशपांडे ने अपनी प्रोसेसिंग यूनिट को सोलर ऊर्जा से संचालित किया है। सोलर प्लांट के उपयोग से उनका बिजली खर्च शून्य हो गया है और उत्पादन कार्य बिना रुकावट जारी है, जिससे लागत में भी भारी कमी आई है।
    चिरौंजी, हर्रा और बहेरा उत्पादों की लगातार बढ़ती मांग के चलते उनका व्यवसाय अब छत्तीसगढ़ तक सीमित न रहकर महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा तक विस्तारित हो चुका है। इस उद्योग से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख रुपये की आय हो रही है, जिससे उनका जीवनस्तर बेहतर हुआ है।
    यह पहल न केवल आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बनी है, बल्कि वनों के संरक्षण, लघुवनोपज के सतत संग्रहण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी सहायक सिद्ध हो रही है। स्वसहायता समूह से जुड़ी महिलाएं आज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।
    श्री प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना को स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली अत्यंत प्रभावी योजना बताते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल ने उनके सपनों को नई उड़ान दी है और आत्मनिर्भर बनने का रास्ता प्रशस्त किया है।

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